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बाज नहीं आ रहा पाकिस्‍तान,तब पहलगाम अब पुंछ में टीआरएफ ने की नापाक हरकत

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लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा वैश्विक आतंकी संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) लगातार हमले कर रहा है. पहले पहलगाम में पर्यटकों पर हमला और अब पुंछ में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास लैंड माइन ब्लास्ट, टीआरएफ अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. अमेरिका ने पिछले दिनों टीआरएफ को विदेशी आतंकी संगठनों की लिस्‍ट में डाल दिया था. इसके बाद ऐसा लगा था कि टीआरएफ की नापाक हरकतों पर लगाम लगेगी, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रही है. जम्मू-कश्मीर के पुंछ में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास शुक्रवार को एक लैंड माइन ब्लास्ट हुआ था. इसमें सेना के एक जवान की मौत हो गई थी और तीन घायल हो गए थे. इस धमाके की जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है.

क्‍या है द रजिस्टेंस फ्रंट?
द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक आतंकवादी संगठन है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है. यह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा है. इसके खिलाफ भारतीय सुरक्षा बल लगातार कार्रवाई कर रहे है. भारत सरकार ने इस संगठन को काफी पहले आतंकवादी घोषित कर दिया है. यह संगठन हाल के वर्षों में घाटी में कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है. टीआरएफ का मकसद कश्मीर में भारतीय शासन को समाप्त करना और इस्लामी राज्य की स्थापना करना है. हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कई आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया है, जिनमें सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमले शामिल हैं.

TRF का समर्थक पाकिस्‍तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पिछले दिनों कहा था कि हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान में टीआरएफ के उल्लेख का विरोध किया था. मुझे दुनिया भर से फ़ोन आए, लेकिन पाकिस्तान ने इसे नहीं माना. इशाक डार ने कहा कि हम टीआरएफ को अवैध नहीं मानते हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि हमें सबूत दिखाइये कि टीआरएफ ने ही कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया. टीआरएफ की जिम्मेदारी साबित कीजिए. हम इस आरोप को स्वीकार नहीं करेंगे, जबकि पहलगाम में पर्यटकों पर हुए हमले के बाद टीआरएफ ने खुल इसकी जिम्‍मेदारी ली थी. इसके बावजूद बड़ी बेशर्मी से पाकिस्‍तान टीआरएफ के समर्थन में खड़ा नजर आया.

पुंछ में LoC के निकट बारूदी सुरंग विस्फोट
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में शुक्रवार को एलओसी के निकट बारूदी सुरंग विस्फोट में एक सैन्यकर्मी की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गये. अधिकारियों ने बताया कि कृष्णा घाटी के क्षेत्र में गश्त के दौरान एक बारूदी सुरंग में विस्फोट हुआ, जिसमें एक अग्निवीर जवान की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गये. अधिकारियों ने बताया कि घायलों में से एक जेसीओ है, जिसे सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत स्थिर है. इस हमले की जिम्‍मेदारी टीआरएफ ने ली है.

क्या लैंड माइन ब्लास्ट को भारत ‘एक्ट ऑफ वार’ मानेगा
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्‍तान में पल रहे आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. भारत टीआरएफ को लश्‍कर का प्रॉक्‍सी मानता है. लश्‍कर का समर्थन पाकिस्‍तान करता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के कई सैन्‍य हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद पाक घुटनों पर आ गया और सीजफायर की गुहार लगाने लगा था. सीजफायर के बाद भारत ने साफ-साफ कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्‍म नहीं हुआ है. अगर पाकिस्‍तान में पल रहे आतंकियों की ओर से कोई नापाक हरकत की गई, तो ऑपरेशन सिंदूर फिर एक्टिव हो जाएगा. भारत के खिलाफ पहलगाम जैसी कोई भी घटना को ‘एक्‍ट ऑफ वार’ माना जाएगा. अब सवाल उठता है कि क्या लैंड माइन ब्लास्ट को भारत ‘एक्ट ऑफ वार’ मानेगा? 8520/

झालावाड़ स्कूल हादसा की जिम्मेदारी किसकी और कहां हुई चूक? जानें सबकुछ

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झालावाड़ में स्कूली इमारत ढहने के दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेशभर में रोष है. प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्यवाहक प्रिंसिपल सहित 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. लेकिन विपक्ष शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग कर रहा है. दरअसल यह हादसा सिर्फ एक स्कूल इमारत के ढहने का नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक है. इस त्रासदी के लिए 5 प्रमुख चेहरों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराए जा रहा. जिनकी लापरवाही और चूक ने मासूमों की जान ले ली.

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

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शिक्षा मंत्री के तौर पर मदन दिलावर की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की नीतिगत देखरेख और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है. जर्जर स्कूली इमारतों का मुद्दा लंबे समय से उठ रहा था. लेकिन उनपर ध्यान देने या ठोस कार्यवाही करने में मंत्री उदासीन रहे. उनकी निगरानी में कमी के कारण ही ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर त्वरित निर्णय नहीं लिए गए और जमीनी स्तर पर निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पाया. हालांकि मदन दिलावर ने अपनी ज़िम्मेदारी मानते हुए सिस्टम को ठीक करने की बात कही है.

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक सीताराम जाट

निर्देशों की अनदेखी और जवाबदेही की कमी

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक होने के नाते सीताराम जाट की जिम्मेदारी सरकारी स्कूल की जर्जर इमारतों की पहचान, मरम्मत या उन्हें गिराने ठीक करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करना और उनके पालन को सुनिश्चित करना है. यह आरोप है कि निदेशालय ने इस संबंध में पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाई और न ही फील्ड अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट मांगी अगर निर्देश जारी भी हुए तो उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया. जिससे यह प्रतीत होता है कि जवाबदेही तय करने में भी उनकी चूक हुई है.

झालावाड़ जिला कलेक्टर- अजय सिंह राठौड़


ज़िले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

ज़िले के मुखिया होने के नाते झालावाड़ जिला कलेक्टर की ज़िम्मेदारी है कि वे जिले के सभी सरकारी भवनों, विशेषकर स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें. इसमें समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट करवाना, जर्जर इमारतों की पहचान करना और उनके सुधार या स्थानांतरण के लिए आवश्यक कदम उठाना शामिल है. हादसे वाली स्कूल की इमारत की जर्जर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद, यदि उन्होंने त्वरित और निर्णायक कार्रवाई नहीं की, तो यह उनकी प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है.

मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा

सीधी फील्ड स्तरीय लापरवाही

इनकी भूमिका ज़िले के स्कूलों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों और उनके रखरखाव की सीधी निगरानी करने की है. जर्जर इमारतों के बारे में जानकारी होने और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाने या बच्चों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी थी. यदि उन्हें स्कूल की खराब हालत की जानकारी थी और उन्होंने आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित नहीं किया या उनके निर्देशों का पालन नहीं किया, तो यह सीधी फील्ड स्तरीय लापरवाही है.

कार्यवाहक स्कूल प्रिंसिपल – मीना गर्ग
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बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता

स्कूल प्रिंसिपल की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्कूल परिसर में बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. ग्रामीणों की शिकायत और खुद की मॉनिटरिंग के चलते कार्यवाहक प्रिंसिपल को इमारत की जर्जर स्थिति के बारे में जानकारी थी इसके बाद भी बच्चों को उस खतरनाक इमारत में पढ़ने की अनुमति दी तो यह उनकी ओर से बच्चों की सुरक्षा के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाता है. यह उनकी कर्तव्यनिष्ठता में बड़ी चूक है, जिसके लिए वे सीधे तौर पर जवाबदेह हैं. सरकार ने चार शिक्षकों के साथ उनको भी निलंबित कर दिया है.

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ये केवल हादसा नहीं है बल्कि एक पूरी व्यवस्था की विफलता है. जहां लापरवाही की परतों ने एक दर्दनाक त्रासदी को जन्म दिया है. अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु मुख्यमंत्री की दूरदर्शी पहल

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मुख्यमंत्री साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया स्थित कैम्प कार्यालय परिसर से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एम्बुलेंस बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि से प्रदत्त है, जिसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम सहित अन्य उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
यह एम्बुलेंस मुख्य रूप से मनोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रखी जाएगी, जिसकी सेवाएँ आवश्यकता अनुसार पूरे जिले में ली जा सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा परिवहन सेवा सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सहायता मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित है। उनकी पहल पर विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि कुनकुरी में मेडिकल कॉलेज और 50 बिस्तर वाला मातृ एवं शिशु अस्पताल, जशपुर में प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का कार्य प्रगति में है।
इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

DAP और खाद की कालाबाजारी किसानों की बर्बाद कर रही फसल, कलेक्ट्रेट पहुंच पर सौंपा ज्ञापन

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धमतरी जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में शुक्रवार को किसान यूनियन बड़ी संख्या में अपनी मांगों को लेकर पहुंचे. किसानों को कहना है कि वो डीएपी और यूरिया खाद की कमी के चलते कलेक्टर से मिलने आए हैं और अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपेंगे. किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि धान की बोनी के बाद खाद की जरूरत है, लेकिन सोसाइटी और राइस मिलों में खाद नहीं मिल रहा है. इससे खेती पर असर पड़ रहा है.

किसानों ने कहा कि खुले बाजार में महंगे दामों पर खाद खरीदने को किसान मजबूर हैं. काला बाजारी करने वाले 12 सौ रुपये की डीएपी 19 सौ रुपये और 272 रुपये वाली यूरिया 450 रुपये में बेच रहे हैं. किसान इन्हीं दामों पर खरीदने को मजबूर हैं.

किसानों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग है कि जैविक खेती करने वालों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये अनुदान देने के साथ ही बिजली की दरों में वृद्धि पर रोक लगाई जाए. साथ ही कृषि मोटर पंप में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाए. वहीं, किसानों ने मंडी संशोधन बिल को किसान विरोधी बताया है. पहले मंडी नियमों का उल्लंघन पर 6 महीने की सजा थी, अब सिर्फ 5000 रुपेय का जुर्माना लगेगा.

यह बिल व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है. सरकार इसे तुरंत वापस ले. वहीं, छत्तीसगढ़ में लगातार अवैध रूप से शराबी की बिक्री हो रही है.

इस मामले पर अपर कलेक्टर बीआर मरकाम ने कहा कि किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है. इसे आगे प्रेषित कर दिया जाएगा.

उच्च न्यायालय व जिला कोर्ट के बीच सामंत-गुलाम जैसे रिश्ते’- HC ने ऐसा क्यों कहा

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि “उच्च न्यायालय और जिला कोर्ट के बीच सामंत और गुलाम जैसे रिश्ते हैं.” जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि “जिला न्यायालय के जज हाईकोर्ट जजों से मिलते हैं, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बिना रीढ़ की हड्डी वाले स्तनधारी की तरह गिड़गिड़ाने वाले शख्स जैसी होती है. हाईकोर्ट के जज खुद को सवर्ण व जिला न्यायालय के जजों को शूद्र समझते हैं.” ये टिप्पणी व्यापमं केस से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई. ये याचिका भोपाल के पूर्व एससी-एसटी कोर्ट जज जगत मोहन चतुर्वेदी ने लगाई थी, उन्हें एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के बाद बर्खास्त किया गया था.

क्या है मामला?
2016 में एससी एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश के रूप में भोपाल जिला अदालत में पदस्थ रहे जगत मोहन चतुर्वेदी पर आरोप लगा था कि 2015 में व्यापमं मामले के आरोपी कुछ छात्रों को उन्होंने अग्रिम जमानत दी. जबकि इसी मामले में अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी. अलग-अलग तथ्यों के चलते विभिन्न आदेश दिए. इस पर हाई कोर्ट प्रशासन ने उनके विरुद्ध कदाचरण की कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया था.

कोर्ट ने यह कहा
इस बार सुनवाई के बाद कोर्ट ने उच्च न्यायालय के जजों और जिला कोर्ट के न्यायाधीशों के बीच “निराशाजनक संबंध” की आलोचना की. इसे एक ‘सामंत’ और ‘दास’ के बीच का रिश्ता बताया. कोर्ट ने कहा कि एक “अहंकारी” उच्च न्यायालय छोटी-छोटी गलतियों के लिए “जिला न्यायपालिका को फटकार” लगाने की कोशिश करता है, जिससे जिला कोर्ट को दंड के भय में रखा जाता है. हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि इससे न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है.

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “जिला कोर्ट के न्यायाधीश जब उच्च न्यायालय के जजों का अभिवादन करते हैं, तो उनकी शारीरिक भाषा, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने गिड़गिड़ाने जैसी होती है. जिससे जिला कोर्ट के न्यायाधीश बिना रीढ़ की हड्‌डी वाले स्तनधारियों की प्रजाति बन जाते हैं.”
हाईकोर्ट ने कहा कि जिला कोर्ट के जजों द्वारा रेलवे प्लेटफॉर्म पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनके लिए जलपान की सेवा करने के उदाहरण आम हैं. उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्ति पर आए जिला कोर्ट के न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कभी भी बैठने की पेशकश नहीं करते हैं. जब कभी उन्हें ऐसा मौका मिलता भी है, तो वे उच्च न्यायालय के जज के सामने बैठने में हिचकिचाते हैं.

बलरामपुर में बड़ी लापरवाही; बच्चों के राशन पर डाका, ग्रामीणों ने वायरल कर दिया

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सरकारी स्कूलों पर पढ़ने वाले बच्चों के पोषक को ध्यान में रखते हुए मिड डे मील योजना संचालित की जा रही है, जिसमें सालाना करोड़ों रुपए खर्च कर पोषणयुक्त मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) देखकर शिक्षा से नियमित जोड़े रखने का प्रयास कर रही है, लेकिन बलरामपुर जिले में स्कूल से चावल की बोरियां भरकर बाजार में बिक्री करने के लिए ले जाने की तस्वीर सामने आई है. जिससे शिक्षा विभाग में पूरी तरह से हड़कंप मचा हुआ है. वहीं इस मामले के बाद अब विभाग पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

ग्रामीणों ने वायरल कर दिया वीडियो
ये पूरा मामला बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड क्षेत्र में आने वाले मेघुली गांव में स्थित पूर्व माध्यमिक शाला का है. जहां स्कूल में मध्याह्न भोजन के लिए रखे चावल को अवैध तरीके से निजी वाहन में भरकर बाजार बिक्री के लिए ले जाया जा रहा था. इस घटना को ग्रामीणों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, फिर सोशल मीडिया पर वीडियो को वायरल किया. इतना ही नहीं ग्रामीणों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत कर जांच की मांग भी की है.

ग्रामीणों का क्या कहना है?
प्रत्यक्षदर्शी एवं ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में करीब 4 बजे एक लोडिंग गाड़ी पहुंची, जहां प्रधान पाठक की मौजूदगी में स्टोर रूम से चावल की बोरियां निकाल कर गाड़ी में लोड की जा रही थी. इस पूरे मंजर को जब ग्रामीणों ने देखा तो मौके पर पहुंचे और पहले तो अपने मोबाइल से वीडियो बनाया फिर प्रधान पाठक से पूछताछ की तो आनन-फानन में गाड़ी पर लोड़ की गई बोरियां प्रधान पाठक के द्वारा उतरवा कर फिर से स्टोर रूम में रखवा दी गई और लोग वहां से भाग निकले.

अधिकारी ने क्या कहा?
इस पूरे मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी सदानंद कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं. सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी के नेतृत्व में टीम भेजी गई है. इस मामले पर जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके ऊपर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.

छत्तीसगढ़ के भू माफिया तो गजब के निकले ! सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीनों का कर दिया सौदा, बैंक से लोन भी उठाया

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छत्तीसगढ़ में बड़ा जमीन घोटाला हुआ है. सरकार की ऑनलाइन भूइयां साइट में गड़बड़ी कर सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया है. इतना ही नहीं सरकार की इन जमीनों को बैंकों में बंधक रख निजी व्यक्तियों द्वारा करोड़ों रुपये लोन लेने का भी आरोप है. ताजा मामला दुर्ग जिले के मुरमुंदा पटवारी हल्का से जुड़ा है. मुरमुंदा हल्का के मुरमुंदा, अछोटी, चेटुवा, बोरसी गांवों में बड़े पैमाने पर जमीनों की हेराफेरी पकड़ी गई है. इन गांवों में 250 एकड़ से अधिक शासकीय और निजी जमीनों का फर्जी तरीके से बटांकन कर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया है. मामले की जानकारी लगते ही विभाग ने आनन-फानन में जांच शुरू कर दी है. जिला प्रशासन ने राज्य सरकार के भू-राजस्व अभिलेख शाखा के आयुक्त को भी मामले की जानकारी दी है. साथ ही इस बात का पता लगाने का अनुरोध किया है कि आखिर ऑनलाइन किसकी आईडी से गड़बड़ी हुई.


अकेले अछोटी गांव में 191 एकड़ का घपला
जमीन घोटाला मामले के इनपुट पर NDTV की टीम ने भी पड़ताल की तो कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं. तहसील कार्यालय, पटवारी दफ्तर, राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिले इनपुट से हमें पता चला कि सबसे बड़ी गड़बड़ी अछोटी गांव में हुई है. यहां बेशकीमती शासकीय जमीनों पर 52 बोगस खसरा नंबर जारी कर 191 एकड़ से ज्यादा जमीनों की हेराफेरी की गई है. इन जमीनों का बड़ा पैच मुख्य मार्गों से लगा है, जिसकी बाजार में वर्तमान कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है. मामला सामने आने के बाद सभी बोगस खसरा को संदिग्ध मानकर तहसीलदार स्तर पर जांच की जा रही है. ऑनलाइन डिजिटल सिग्नेचर बी-1 की कॉपियों से हटा दिए गए हैं. फिलहाल इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

जशपुर के स्कूल में घुसी हथिनी और बच्चा, मचाया आतंक; वन विभाग ने छात्रों को भिजवाया घर

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जशपुर जिले के पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में हाथियों का आतंक जारी है. तड़के सुबह एक जंगली मादा हाथी और उसका बच्चा दल से बिछड़कर स्कूल परिसर में आ धमके. आक्रमक हाथी स्कूल परिसर में रखी बाइक को क्षतिग्रस्त कर दिया. इस दौरान स्कूल में अफरा-तफरी की वजह से स्थिति गंभीर हो गई. जब घटना की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी को मिली तो उन्होंने स्कूल में छुट्टी करने का निर्देश दे दिया

हाथियों की आमद से गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण काफी भयभीत हैं. स्कूल परिसर में हाथी के आमद से प्रबंधन ने बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया. दो जंगली हाथियों की आमद से गांव में दहशत का माहौल है. वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है.

वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की अपील की है. तेज बारिश में वन विभाग की टीम स्कूल की छतों पर चढ़कर लगातार निगरानी में जुटी हुई है, हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है. हथिनी को सुरक्षित जंगल की ओर लौटाने का प्रयास कर रहा है.

बिल्डर व फिल्म अभिनेता के खिलाफ FIR दर्ज, जानें – क्या है पूरा मामला

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग (Durg) के चर्चित बिल्डर, जमीन व्यापारी व फिल्म अभिनेता मनोज राजपूत (Manoj Rajput) के खिलाफ सुपेला थाना में केस दर्ज किया गया है. FIR में उल्लेख है कि उसने अपने आपराधिक मामले छिपाते हुए गलत तरीके से शपथ पत्र बनाया और पासपोर्ट लिया. इतना ही नहीं, मनोज राजपूत के खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें रेप, धोखाधड़ी सहित मारपीट के मामले शामिल हैं. आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से मनोज राजपूत को दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में गुंडा बदमाश सूची में भी शामिल किया गया है. नियमानुसार, पासपोर्ट जारी होने से पहले किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड चेक किया जाया है और पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर ही पासपोर्ट जारी होता है. लेकिन, मनोज राजपूत के नाम पर कई मामले दर्ज होने के बाद भी पासपोर्ट जारी होना बड़ा सवाल है.

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मनोज राजपूत ने अपने आपराधिक इतिहास को छिपाने के लिए अपने मूल पते में हेरफेर किया. वह मूल रूप से दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र का निवासी है, जहां उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. लेकिन, उसने अपना पता बदलकर सुपेला थाना क्षेत्र का दिखाया और सुपेला पुलिस थाना से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट प्राप्त कर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाया. मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि पासपोर्ट बनवाने से पहले व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाती है और केवल साफ रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को ही पासपोर्ट जारी किया जाता है. फिर भी, मनोज राजपूत जैसे अपराधी को सुपेला थाना से

कौन है मनोज राजपूत?
मनोज राजपूत न केवल एक जमीन व्यापारी है, बल्कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनेता और निर्माता के रूप में भी जाना जाता है. उनके खिलाफ पहले से ही दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है. इसके अलावा, धोखाधड़ी और मारपीट जैसे कई अन्य आपराधिक मामले भी उनके नाम पर दर्ज हैं. उनकी कुख्यात गतिविधियों के कारण उन्हें गुंडा-बदमाश की सूची में शामिल किया गया है.

जल प्रलय से टूटा MP-CG का संपर्क, लगातार हो रही बारिश से पूरा जिला जलमग्न!

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बीते 24 घंटे से लगातार हो रही झमाझम बारिश (Heavy Rains) ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. जिले के चारों ओर सड़कों पर पानी का सैलाब नजर आ रहा है, वहीं निचले इलाकों में घरों में पानी घुसने लगा है. राष्ट्रीय राजमार्ग 45 पर पीपरखूंटी और केवची के बीच जैसे-तैसे बनाई गई डायवर्टेड पुलिया शुक्रवार दोपहर बाद फिर से भारी बारिश में बह गई, जिससे एक बार फिर से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है. इस मार्ग से गौरेला-पेंड्रा से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है.

मेन संपर्क रोड टूटा
मरवाही-सिवनी से होकर मध्य प्रदेश के अनूपपुर वेंकटनगर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी भेढ़वा नाला पर पानी का बहाव तेज होने के कारण बंद हो गया है. पुलिया पर बहते पानी के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है. हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट रूप से ऐसे बहते नालों को पार करने से मना किया है, फिर भी कुछ लोग जोखिम लेकर पार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कभी भी गंभीर दुर्घटना को जन्म दे सकता है.

गांवों में भरा पानी
बारिश का कहर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है. चंगेरी और परासी गांवों की सड़कों पर भी तेज बहाव से पानी बह रहा है, जिससे निचले इलाकों के घरों में पानी घुस गया है. लोग रातभर बाल्टियों और मगों से पानी निकालते दिखे, कई परिवारों ने घर खाली कर सुरक्षित जगहों का रुख किया है. लगातार बारिश से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. बचाव व राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है. तेज बारिश और जलभराव से काम रुक-रुक कर हो रहा है.