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सरकारी बंगले पर कब्जे को लेकर भड़का सुप्रीम कोर्ट, कहा- जीवन भर नहीं रख सकता कब्जा, 21 लाख का जुर्माना भी लगाया

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सरकार से मिला आवास आखिर कब तक आपका बना रह सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस सवाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि कोई भी व्यक्ति जीवन भर सरकारी बंगले पर कब्जा नहीं कर सकता. अदालत ने बिहार के पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने दो साल तक बंगला खाली नहीं किया और अब 21 लाख रुपये का जुर्माना किराया चुकाना पड़ेगा. यह फैसला तब आया है जब हाल ही में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके आधिकारिक आवास को भी सरकार ने वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है एक स्पष्ट संकेत कि सरकारी सुविधा स्थायी संपत्ति नहीं होती.

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और एन वी अंजरिया की पीठ के सामने बिहार के पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह पेश हुए, जिन्हें पटना के टेलर रोड पर अपने सरकारी बंगले में अप्रैल 2014 से मई 2016 तक दो साल तक रहने के लिए 21 लाख रुपये का जुर्माना किराया देने का आदेश दिया गया था.
क्या था मामला
अविनाश कुमार सिंह, जो बिहार के धाका विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने मार्च 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया. चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने पटना के टेलर रोड स्थित सरकारी बंगला मई 2016 तक कब्जे में बनाए रखा. सरकार ने जब उनसे 21 लाख रुपये का अतिरिक्त किराया मांगा, तो सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और कहा कि वे 2009 की एक सरकारी अधिसूचना के आधार पर ‘राज्य विधानमंडल अनुसंधान और प्रशिक्षण ब्यूरो’ के सदस्य के रूप में इस बंगले में रह सकते थे.

खरगे-केजरीवाल से मुलाकात, वो फोन वाली बात और… जगदीप धनखड़ ने क्यों दिया इस्तीफा

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उपराष्ट्रपति कार्यालय ने 15 जुलाई को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का 44 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे वी-पी एन्क्लेव में जगदीप धनखड़ से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं. पिछले रविवार यानी संसद के मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले जगदीप धनखड़ ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और इस मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट कीं. अरविंद केजरीवाल सांसद नहीं हैं.

ऐसी मुलाकातें आधिकारिक शिष्टाचार का हिस्सा हैं, मगर वह सरकार एक धड़े की नजरों से बच नहीं पाए, जहां यह चर्चा भी सुनाई दी कि जगदीप धनखड़ ने विपक्षी नेताओं के साथ ऐसी बैठकों में नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की थी. यह 2024 से एक यूटर्न है, जब विपक्षी नेताओं ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था और उन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए राज्यसभा के सभापति पद से हटाने की धमकी दी थी. जगदीप धनखड़ को मार्च में हृदय संबंधी समस्याओं के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था.
विपक्ष के साथ धनखड़ की जुगलबंदी?
लेकिन ऐसा लगता है कि मार्च के बाद जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के साथ संबंध बनाने की कोशिश की ताकि यह साबित किया जा सके कि वह राज्यसभा के सभापति के रूप में पक्षपाती नहीं हैं. उन्होंने अक्सर मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ कांग्रेस के जयराम रमेश और कांग्रेस राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी से मुलाकात की. रमेश और प्रमोद तिवारी अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया और सरकार से आग्रह किया कि वह उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाए. पिछले दिसंबर की तुलना में यह एक बड़ा बदलाव है.
धनखड़ अपनी सीमा से बाहर थे?

जगदीप धनखड़ आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं जब तक कि उन्हें 2019 में मोदी सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नहीं चुना गया, जहां उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. साल 2022 में जगदीप धनखड़ को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में पदोन्नत किया गया. मगर हाल ही में सरकार को लगा कि वह उन मुद्दों पर बोलकर अपनी सीमा से बाहर जा रहे हैं, जिन पर उनका अधिकार नहीं था. इसका प्रमुख उदाहरण जस्टिस यशवंत वर्मा मामले के प्रकाश में आने के बाद NJAC जैसी संस्था को बहाल करने के लिए उनका ‘अभियान’ था. उन्होंने इस मुद्दे पर राज्यसभा में सदन के नेताओं से भी मुलाकात की.
सरकार से अलग धनखड़ की राय?
लेकिन सरकार स्पष्ट रूप से एनजेएसी जैसे किसी कदम से न्यायपालिका को नाराज करने के मूड में नहीं थी. गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सीएनएन-न्यूज18 के एक कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा कि सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. लेकिन जगदीप धनखड़ के इस मुद्दे पर लगातार सार्वजनिक बयानों से यह धारणा बनी कि सरकार ही उन्हें ऐसा कहने के लिए प्रेरित कर रही थी, जो कि सच नहीं था. जगदीप धनखड़ बार-बार इस बात की भी आलोचना कर रहे थे कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई. यह उनके उपराष्ट्रपति पद के अधिकार क्षेत्र से कहीं आगे जा रहा था.
किससे और क्या बहस हुई थी?
बताया जा रहा है कि धनखड़ के इस्तीफे की आखिरी वजह सोमवार शाम एक सीनियर मंत्री के साथ उनकी टेलीफोन पर हुई बहस थी, जिसमें उनसे सवाल किया गया कि उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ 65 से अधिक विपक्षी सांसदों की ओर से पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार क्यों किया? जबकि सरकार इस कदम से बिल्कुल अनजान थी. इसके जवाब में जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर नोटिस स्वीकार करने की बात कही. बाद में सोमवार को भाजपा चीफ जेपी नड्डा और किरण रिजिजि दोनों ही जगदीप धनखड़ द्वारा शाम 4:30 बजे बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए. इससे पता चला कि पिछले कुछ महीनों में अविश्वास की बढ़ती स्थिति के बाद मामले बहुत आगे बढ़ गए थे.

अब आगे क्या?
मोदी सरकार अगले उपराष्ट्रपति के रूप में एक वफादार भाजपा नेता को प्राथमिकता देगी क्योंकि वह राज्यसभा में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती, जहां संख्या बल नाज़ुक है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अन्य सीनियर कैबिनेट मंत्रियों में से किसी एक या राज्यसभा के सीनियर भाजपा सांसदों में से किसी एक जैसे कई नाम चर्चा में हैं. अगले उपराष्ट्रपति को पूरे पांच साल का कार्यकाल मिलेगा. 60 दिनों के भीतर नया उपराष्ट्रपति चुनना अनिवार्य है.

बांग्लादेश जाएगी बर्न स्पेशलिस्टों की टीम, जेट हादसे में घायलों का करेंगे इलाज, खास उपकरणों के साथ होंगे ढाका रवाना

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सोमवार को बांग्लादेश में एक विमान हादसा हुआ, जो उनकी एयरफोर्स के इतिहास में सबसे खतरनाक हादसा था. इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 165 से ज्यादा घायल हैं. 21 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ढाका में हुई विमान दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया था और हर संभव मदद का आश्वासन दिया था. इसी के मद्देनजर भारत बर्न इंजरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सों की एक टीम जल्द बांग्लादेश भेजने जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. यह टीम जरूरी चिकित्सा सामग्री के साथ ढाका पहुंचेगी ताकि घायलों का इलाज किया जा सके. यह टीम पीड़ितों की हालात का आंकलन करेगी और जरूरत पड़ी तो भारत में आगे के इलाज और खास देखभाल की सिफारिश करेगी. प्रारंभिक जांच और इलाज के आधार पर अतिरिक्त मेडिकल टीमें भी बाद में भेजी जा सकती हैं.

मौत का आंकड़ा पहुंचा 31
21 जुलाई की दोपहर करीब डेढ़ बजे एयरफोर्स का ट्रेनिंग जेट बांग्लादेश के माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज पर जाकर गिरा. इससे पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई थी. बांग्लादेश सेना की तरफ से इस दुर्घटना में मारे गए लोगों के आंकड़े जारी किए गए. क्रैश के बाद अब तक मारे गए 31 लोगों में से ज्यादातर बच्चे हैं. 165 लोग अस्पताल में भर्ती हैं जिनमें से 10 की हालत अभी गंभीर बनी हुई है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस हादसे पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक का एलान किया था, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज को आधा फहराया गया और इस घटना के पीड़ितों के लिए खास प्रार्थना का भी आयोजन किया गया।
यूनुस सरकार के खिलाफ गुस्सा
इस घटना के बाद आम लोगों और छात्रों में काफी रोष दिखा. रिपोर्ट के मुताबिक दुर्घटना स्थल का दौरा करने आए बांग्लादेश के मंत्रियों को लोगों ने घेर लिया और जमकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में लोग और छात्र मौजूद थे. वे सरकार से मांग कर रहे थे कि मौत के सही आंकड़े पेश करें और उन्हें इंसाफ दिलाएं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने बल का भी प्रयोग किया. आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया गया.
चाइना मेड एयरक्राफ्ट से हुआ हादसा
सेना ने इस क्रैश की वजह तकनीकी खराबी बताई. चेंगदु F-7 फाइटर अपने रूटीन मिशन के लिए उड़ान भरी थी लेकिन यह क्रैश हो गया. अगर इस एयरक्राफ्ट की बात करें तो दरअसल यह रूसी मिग को लाइसेंस पर चीन निर्माण कर रहा था. इसे नाम दिया गया F7 और इसे J-7 के नाम से भी जाना जाता है. इस सीरीज का सबसे एडवांस जेट बांग्लादेश को चीन ने बेचा था. बांग्लादेश ने चीन से 16 फाइटर जेट की खरीद साल 2011 में की थी. साल 2013 तक सभी 16 जेट बांग्लादेश को डिलीवर किए जा चुके थे. खास बात तो यह है की चीन अपनी फ्लीट से इस फाइटर को फेजआउट कर रहा है. और दूसरे देशों को सबसे बेहतर बताकर बेच चुका है. हर पायलट की तरह F-7 उड़ा रहे पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट तौकीर इस्लाम सागर ने भी विमान को आबादी वाली जगह से दूर ले जाने की कोशिश की, लेकिन कोशिश काम ना आ सकी. साल 1992 से लेकर अब तक बांग्लादेश वायुसेना के कम से कम 27 विमान और फाइटर जेट हादसे के शिकार हो चुके हैं. साल 2005 के बाद से अब तक 11 दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 7 चीनी विमान थे.

MiG-21 रिटायर, उसकी जगह लेगा देसी ‘तेजस’ MK1A, 200+ KM रेंज, पेट में रखता है 9 मिसाइलें

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भारतीय वायुसेना का सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लड़ाकू विमान MiG-21 आखिरकार रिटायर हो रहा है. 62 वर्षों की सर्विस के बाद यह सोवियत-युग का विमान अपनी उड़ान पूरी कर चुका है. इसकी जगह अब स्वदेशी रूप से विकसित हल्का लड़ाकू विमान (LCA) ‘तेजस’ लेगा. ‘तेजस’ तकनीकी रूप से कहीं अधिक उन्नत और भविष्य के लिए तैयार है.

तेजस: 80s में देखा गया एक सपना
तेजस लड़ाकू विमान की योजना 1980 के दशक में बनी थी. 1983 में सरकार ने इसकी परियोजना को मंजूरी दी और 1984 में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) की स्थापना की गई. पहले चरण में सरकार ने इसके लिए 560 करोड़ रुपये स्वीकृत किए और उम्मीद की गई कि 8–10 सालों में यह विमान तैयार हो जाएगा. हालांकि, तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इस परियोजना में तीन दशकों से अधिक का समय लग गया.
तेजस Mk1A वर्जन में कई नई खूबियां जोड़ी गई हैं:
AESA रडार: इसमें इज़राइली EL/M-2025 AESA रडार लगाया गया है, जिसे बाद में भारत में विकसित ‘उत्तम’ रडार से बदला जाएगा. यह 200 किलोमीटर से ज्यादा रेंज में कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है.

डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम: इससे विमान को बेहद सटीक नियंत्रण मिलता है और यह इलेक्ट्रॉनिक तौर पर उड़ान संचालित करता है.

इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम: इसमें रडार वॉर्निंग रिसीवर और एडवांस्ड सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर जैसे आधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों और रडार से बचाव करते हैं.

मल्टी-रोल हथियार क्षमता: तेजस Mk1A के पास 9 हार्डपॉइंट होंगे, जिन पर BVR मिसाइलें, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें तथा बम लगाए जा सकते हैं.

हालांकि भारतीय वायुसेना ने HAL से तेजस Mk1A के 83 विमान ₹36,468 करोड़ की लागत से ऑर्डर किए हैं, लेकिन डिलीवरी में देरी हो रही है. GE द्वारा निर्मित F404 इंजन की आपूर्ति भी दो साल पीछे चल रही है.

तेजस बनाम MiG-21

जहां MiG-21 अब पुराना और तकनीकी रूप से पिछड़ा हो चुका है, तेजस एक आधुनिक चौथी पीढ़ी का मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है. तेजस न केवल वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
तेजस के विकास में समय लगा, लेकिन यह भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी सुपरसोनिक फाइटर जेट है. इसके पीछे HAL, DRDO, ADA और कई वैज्ञानिक संस्थानों की वर्षों की मेहनत है. वर्तमान में भारत के पास 41 स्क्वाड्रनों की आवश्यकता है, लेकिन सिर्फ 31 स्क्वाड्रन सक्रिय हैं. ऐसे में तेजस की समय पर डिलीवरी बेहद जरूरी है, ताकि Mirage-2000, Jaguar और MiG-29 जैसे पुराने विमानों की जगह ली जा सके.

रेलवे टेंडर घोटाला, दिल्ली कोर्ट में लालू यादव के किस्मत पर आज फैसला

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दिल्ली के स्थानीय कोर्ट बुधवार को आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में आरोप तय करने का आदेश सुना सकता है. इस मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्य और अन्य आरोपी हैं. यह मामला आईआरसीटीसी होटलों के टेंडर में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने जांच एजेंसी और आरोपियों के वकीलों की दैनिक आधार पर दलीलें सुनने के बाद 29 मई तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
1 मार्च को, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री प्रेमचंद गुप्ता और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर अपनी बहस पूरी कर ली थी. इस मामले में 14 आरोपी हैं. सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने तर्क दिया था कि दो आईआरसीटीसी होटल रखरखाव ठेकों के आवंटन में आरोपियों की ओर से भ्रष्टाचार और साजिश रची गई थी.
एसपीपी डीपी सिंह ने अधिवक्ता मनु मिश्रा के साथ मिलकर तर्क दिया था कि आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव के ठेके एक निजी कंपनी को आवंटित करने में भ्रष्टाचार और साजिश हुई है. सीबीआई ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे. इनपर आरोप है कि आईआरसीटीसी के दो होटलों, बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी के रखरखाव का ठेका विजय और विनय कोचर के स्वामित्व वाली एक निजी फर्म सुजाता होटल को दिया गया था.

टेंडर के बदले जमीन

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इस सौदे के बदले में लालू प्रसाद यादव को एक बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ बेशकीमती जमीन मिली. 7 जुलाई, 2017 को सीबीआई ने लालू के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी. एजेंसी ने पटना, नई दिल्ली, रांची और गुड़गांव में लालू और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.

लालू के खिलाफ कोई सबूत नहीं?

दूसरी ओर- लालू प्रसाद यादव की ओर से दलील दी गई कि आईआरसीटीसी भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए कोई सबूत नहीं है. वे इस मामले में बरी किए जाने के हकदार हैं. ये दलीलें राउज़ एवेन्यू कोर्ट में पेश की गईं. अदालत आईआरसीटीसी भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने पर बहस सुन रही है.

बरी के हकदार लालू

लालू प्रसाद यादव के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी कि लालू प्रसाद यादव की ओर से अनियमितताएं हुई हैं। टेंडर निष्पक्ष तरीके से दिए गए थे. लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं. वे आरोपों से बरी किए जाने के हकदार हैं.

र साल खतरे में 1.30 लाख भारतीयों की जान…..जिंदगी बचाने के लिए चाहिए 206 लाख करोड़, विश्‍व बैंक ने दी सीधी चेतावनी

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भारतीय शहरों में रहने वाले 1.30 लाख से ज्‍यादा लोगों की जान खतरे में है और इनकी जिंदगी बचाने के लिए करीब 206 लाख करोड़ रुपये चाहिए होंगे. यह खुलासा विश्‍व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में किया है. विश्‍व बैंक ने बताया है कि भारतीय शहर बाढ़, बढ़ते तापमान और अन्य जलवायु संबंधी जोखिमों के प्रति लगातार संवेदनशील होते जा रहे हैं. साल 2050 तक मजबूत और कम कार्बन उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 2,400 अरब डॉलर (करीब 206 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश की जरूरी होगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शहरों में आर्थिक वृद्धि के केंद्र बनने की काफी संभावनाएं हैं और साल 2030 तक 70 फीसदी नौकरियां सिर्फ शहरों से ही आएंगी. ‘भारत में मजबूत और समृद्ध शहरों की ओर’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के प्रभावों से निपटने और भविष्य में अरबों डॉलर के नुकसान को रोकने के लिए शहरों को समय पर सही कदम उठाने की जरूरत है.
बाढ़ से हर साल कितना नुकसान
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ साझेदारी में तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्षा से संबंधित बाढ़ से होने वाला सालाना आर्थिक नुकसान वर्तमान में 4 अरब डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपये) आंका गया है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर समय पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाये गए, तो साल 2030 तक यह नुकसान बढ़कर पांच अरब डॉलर (करीब 43 हजार करोड़ रुपये) और साल 2070 तक 30 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) सालाना हो सकता है.
किन शहरों पर ज्‍यादा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, शहरों का ज्यादातर विस्तार बाढ़ प्रभावित और अत्यधिक गर्मी से प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहा है. रिपोर्ट में दिल्ली, चेन्नई, सूरत और लखनऊ को खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में बस्तियों के विस्तार के कारण अधिक तापमान के प्रभावों और बाढ़ के जोखिमों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील शहरों के रूप में चिह्नित किया गया है. दिल्ली में बढ़ते तापमान और शहरी बाढ़ से जुड़े जोखिम हैं. यहां गर्मी का दबाव भी बढ़ने की आशंका है. साल 1983 और साल 2016 के बीच भारत के 10 सबसे बड़े शहरों में खतरनाक स्तर के तापमान के संपर्क में 71 फीसदी की वृद्धि हुई और यह सालाना 4.3 अरब से बढ़कर 10.1 अरब व्यक्ति-घंटे हो गया. रिपोर्ट में गर्मी से लोगों की मृत्यु पर चिंता जताई गई है.
गर्मी से हर साल कितनी मौतें
विश्‍व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर उत्सर्जन मौजूदा स्तर पर जारी रहा तो साल 2050 तक गर्मी से संबंधित मौतों की सालाना संख्या 1,44,000 से बढ़कर 3,28,000 से ज्यादा हो सकती है. अधिक तापमान से दबाव की स्थिति के कारण भारत के प्रमुख शहरों में लगभग 20 फीसदी कार्य घंटे बर्बाद हो सकते हैं. केवल तापमान में कमी लाने के उपायों से ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 0.4 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है और साल 2050 तक सालाना 1,30,000 लोगों की जान बचाई जा सकती है.

भारत-ब्रिटेन ट्रेड डिल को मंजूरी, PM मोदी कब करेंगे साइन

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भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है. इस समझौते से दोनों देशों के लोगों को चमड़ा, जूता और कपड़ा के साथ-साथ व्हिस्की और कार सस्ते दाम पर मिलेंगे. मंगलवार को दोनों देशों के बीच हुई मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने की सूत्रों द्वारा जानकारी दी गई. बता दें कि इस समझौते पर दोनों देशों के प्रधानमंत्री 24 जुलाई को लंदन में हस्ताक्षर करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं. इस समझौते कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (Comprehensive Economic and Trade Agreement) के रूप में जाना जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समझौते पर लंदन में अपने समकक्ष आधिकारिक कीर स्टारमर के साथ इस पर हस्ताक्षर करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे के साथ वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी होंगे. पीएम मोदी-स्टार्मर क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे. समझौते के पाठ पर दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है.
भारत और ब्रिटेन के बीच छह मई को व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी. इस व्यापार समझौते में चमड़ा, जूते और कपड़ा जैसे श्रम-प्रधान उत्पादों के निर्यात पर कर हटाने का प्रस्ताव है. साथ ही ब्रिटेन से व्हिस्की और कारों के आयात को सस्ता बनाने का भी प्रस्ताव है. इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है. इस समझौते में वस्तुओं, सेवाओं, इनोवेशन, सरकारी खरीद और बौद्धिक संपदा अधिकारों जैसे मुद्दों पर बात हो रही हैं.

ब्रिटेन: कितना बड़ा निवेशक

बता दें कि इस समझौते की पर आमतौर पर दोनों देशों के वाणिज्य मंत्री हस्ताक्षर करते हैं. मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, इसे प्रभावी होने से पहले ब्रिटिश संसद की मंजूरी की जरूरत होती है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को कहा, हम एफटीए के लिए कानूनी प्रक्रिया और अन्य अंतिम क्षणों के काम पर काम कर रहे हैं… ब्रिटेन भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसका कुल एफडीआई 36 अरब डॉलर है. दिलचस्प बात यह है कि भारत भी ब्रिटेन में एक प्रमुख निवेशक है, जिसका कुल एफडीआई लगभग 20 अरब डॉलर है.’

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते की मुख्य विशेषताएं

इस समझौते में भारत की प्रमुख मांग- दोहरी सामाजिक सुरक्षा योगदान संधि है. इसे काफी महत्वपूर्ण मानी जाता है. दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई व्यक्ति, जो दोनों देशों में काम करता है, उसे एक ही काम के लिए दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान (जैसे पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, या बेरोजगारी लाभ) नहीं देना पड़े.न किया जाए।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, ब्रिटेन में अस्थायी वर्किंग वीजा पर कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को तीन साल तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी. इससे उनके वेतन में लगभग 20% की बचत होगी. अकेले आईटी क्षेत्र के 60,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को लाभ होने की उम्मीद है.
इस समझौते के अनुसार, भारत ब्रिटेन की व्हिस्की और जिन पर शुल्क 150% से घटाकर 75% और समझौते के 10वें वर्ष में 40% करने की संभावना है. ऑटोमोटिव उत्पादों पर शुल्क वर्तमान 100% से घटकर 10% हो जाएगा, जो एक कोटा के अधीन है.
इसके अलावा, भारत को लगभग 99% टैरिफ लाइनों (या उत्पाद श्रेणियों) पर टैरिफ उन्मूलन से लाभ होगा, जो व्यापार मूल्य के लगभग 100% को कवर करेगा, जिससे भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि के लिए बड़े अवसर मिलेंगे.

आयात शुल्क में कमी से बाजार खुल सकते हैं और कारोबारियों तथा भारतीय उपभोक्ताओं के लिए व्यापार सस्ता हो सकता है. ऐसे अन्य सामानों में ब्यूटी प्रोजक्ट्स, एयरोस्पेस, भेड़ का मांस, मेडिकल एक्विपमेंट्स, सामन मछली, इलेक्ट्रीक मशीनरी, सॉफ्ट ड्रिंक, चॉकलेट और बिस्कुट शामिल हैं.

दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी

दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद, इसे लागू होने से पहले ब्रिटिश संसद की मंज़ूरी की आवश्यकता होगी. हालांकि, द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत अभी भी जारी है. 2024-25 में ब्रिटेन को भारत का निर्यात 12.6% बढ़कर 14.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 2.3% बढ़कर 8.6 अरब डॉलर हो गया. भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2022-23 में 20.36 अरब डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 21.34 अरब डॉलर हो गया.

ब्रिटेन और मालदीव की यात्रा पर रवाना होंगे PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से 4 दिवसीय यात्रा पर ब्रिटेन और मालदीव के लिए रवाना होंगे. पीएम मोदी 23 से 26 जुलाई तक यूनाइटेड किंगडम और मालदीव की यात्रा करेंगे. पीएम की यात्रा के दौरान भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर शामिल होंगे.

पीएम मोदी और यूके के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर भारत-यूके द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे. दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे और किंग चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करेंगे. पीएम की यात्रा के दौरान भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता के हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है जिसे इसी साल मई में अंतिम रूप दिया गया था.
भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता तीन वर्षों की बातचीत के बाद तय हुआ है और ये भारतीय निर्यात के 99 प्रतिशत हिस्से को शुल्क-मुक्त करने में सहायक होगा जबकि इससे ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत में व्हिस्की, कारों और अन्य उत्पादों का निर्यात आसान होगा और कुल व्यापार में भी वृद्धि होगी. यूके में प्रधानमंत्री स्टार्मर के सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी पहली बार यूके में होंगे.
पिछले साल जुलाई में हुए आम चुनावों में लेबर पार्टी को 14 वर्षों बाद सत्ता में लौटाया था. दोनों नेताओं की अब तक कुछ बहुपक्षीय बैठकों के दौरान मुलाकात हो चुकी है… जैसे कि पिछले साल नवंबर में ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में G20 शिखर सम्मेलन और इस साल जून में कनाडा के कनानास्किस में G7 नेताओं की बैठक.
अपनी यात्रा के दूसरे चरण में यानी 25 और 26 मई को पीएम मालदीव जाएंगे. राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नवंबर 2023 में पदभार संभालने के बाद पीएम मोदी की यह पहली यात्रा होगी. प्रधानमंत्री मोदी 26 जुलाई को मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के समारोह में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ होंगे. दो साल पहले राष्ट्रपति मुइज्जू के टकराव की स्थिति से शुरू हुआ संबंध पीएम मोदी की यात्रा से भारत और मालदीव के रिश्तों में एक नया मोड़ लाएगी.

मालदीव राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत से विमानन प्लेटफॉर्म से जुड़े भारतीय सैन्य कर्मियों – दो हेलीकॉप्टर और एक विमान – को वापस बुलाने को कहा था, जिन्हें बाद में तकनीकी स्टाफ से बदला गया. भारत और मालदीव के बीच कड़वाहट के बाद मालदीव जानेवाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई थी, लेकिन अब हाल के महीनों में संबंध सामान्य की शुरुआत से पर्यटकों की आवाजाही पटरी पर आ रही है.
अक्टूबर 2024 में मुइज्जू की भारत यात्रा के बाद दोनों पक्षों ने संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया. पीएम मोदी और मुइज्जू आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और “भारत-मालदीव संयुक्त दृष्टिकोण” के तहत ‘समग्र आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी’ की प्रगति पर बातचीत करेंगे. सरकार ने कहा कि यह यात्रा इस बात को दर्शाती है कि भारत अपने समुद्री पड़ोसी मालदीव को कितनी अहमियत देता है, जो भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और विजन महासागर में एक विशेष स्थान रखता है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा—सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित पशुओं की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करें

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मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़कों पर निराश्रित पशुओं की आवाजाही पर प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की एक प्रमुख वजह निराश्रित मवेशी हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को त्वरित, ठोस और समन्वित कार्य योजना के साथ आगे बढ़ना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने पशुधन विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और लोक निर्माण विभाग को आपसी तालमेल के साथ जिम्मेदारी साझा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गंभीर है और इसके समाधान में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने राज्य में संचालित गौशालाओं, गौठानों, कांजी हाउस एवं काउ-कैचर (Cow-Catcher) जैसी व्यवस्थाओं की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इन संस्थानों की वर्तमान उपयोगिता, क्षमता और सुधार की संभावनाओं पर भी गहन चर्चा की और सुझाव माँगे।

मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित गांवों में पशुओं के प्रबंधन हेतु प्रभावी एवं व्यावहारिक मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाईवे पर पशुओं की उपस्थिति केवल यातायात में बाधा नहीं, बल्कि जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनती है, अतः इस दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई आवश्यक है।

बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों और उनमें निराश्रित पशुओं की भूमिका की समीक्षा की गई। साथ ही, गोधन विकास से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निराश्रित एवं लावारिस गौवंश की देखभाल, चारे की उपलब्धता और उनके पुनर्वास के लिए सुनियोजित रणनीति अपनाने की बात कही।

नगरीय क्षेत्रों में सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की रोकथाम के लिए काउ-कैचर की कार्यप्रणाली और उसके विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया। कृषि एवं पशुधन विकास विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रदेशभर की गौठानों, गौशालाओं एवं पशुधन विकास योजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर सिंह पटेल, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं राहुल भगत, नगरीय प्रशासन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस. तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश के किसानों को 5560 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित

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मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर एवं सहकारिता मंत्री कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य के अधिक से अधिक किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण किया जा रहा है। प्रदेश में किसानों को अब तक राज्य सहकारी बैंकों द्वारा 2058 सहकारी समितियों के माध्यम से 5560 करोड़ 34 लाख रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण प्रदान किया गया है। इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। अब तक वितरित कुल राशि लक्ष्य का लगभग 71.28 प्रतिशत है। किसानों को उनके मांग और रकबे के अनुरूप अल्पकालीन कृषि ऋण प्रदान किया जा रहा है। जबकि पिछले वर्ष आज की स्थिति में 5549 करोड़ रूपए के अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित किए गए थे।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को खेती-किसानी की प्रारंभिक जरूरतों को पूरा करने तथा खेती-किसानी में सहूलियत प्रदान करने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना प्रारंभ किए गए थे। इसके अलावा किसानों को साहूकारों के चंगुलों से बचाना इसका एक प्रमुख उद्देश्य था। वर्तमान समय में इस योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं। किसानों को प्रारंभिक जरूरतों के लिए न सिर्फ राहत मिली है, बल्कि फसलों के उत्पाद में लगातार वृद्धि हो रही है।