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25 वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंतर्गत सुब्रतो मुखर्जी कप फुटबॉल स्पर्धा का हुआ शुभारंभ

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विधायक जगदलपुर किरण देव ने कहा कि खिलाड़ी अपने श्रेष्ठतम प्रदर्शन से न केवल अपने विद्यालय और क्षेत्र, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रौशन करें। बस्तर जैसे आदिवासी और दूरस्थ अंचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और मंच देने की। देश में 1960 में शुरू हुए सुब्रतो कप जैसे स्पर्धाएं खिलाड़ी छात्र-छात्राओं को शालेय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती है। विधायक किरण देव मंगलवार को स्थानीय पंडित श्यामाप्रसाद मुखर्जी सभागार में 25 वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंतर्गत सुब्रतो मुखर्जी कप फुटबॉल स्पर्धा शुभारंभ कार्यक्रम को मुख्य आतिथ्य की आसंदी से सम्बोधित कर रहे थे।

विधायक किरण देव ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने सहित उन्हें अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। यदि खिलाड़ी खेलभावना के साथ पूरे समर्पण के साथ खेलेंगे तो निश्चित ही आने वाले समय में देश के लिए भी खेल सकते हैं। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महापौर संजय पाण्डे ने खिलाड़ियों से कहा कि हर प्रतियोगिता में जीत-हार अवश्यंभावी है, लेकिन खेलभावना के साथ अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा प्रदर्शन का अलग महत्व है और यही एक खिलाड़ी की विशिष्ट पहचान है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अध्यक्ष छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कारपोरेशन निवास राव मद्दी ने खिलाड़ियों को दक्षता के साथ प्रतिभा दिखाने की अपनी शुभकामनाएं देते हुए आयोजकों को सुब्रतो मुखर्जी कप फुटबॉल स्पर्धा के सुचारू रूप से आयोजन सुनिश्चित करने कहा। वहीं नागरिकों एवं खेलप्रेमियों से स्पर्धा के दौरान उपस्थित रहकर इन खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किए जाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के आरंभ में जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने बताया कि इस चार दिवसीय 25 वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंतर्गत सुब्रतो मुखर्जी कप फुटबॉल स्पर्धा के आयोजन में प्रदेश के पांच जोन बस्तर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा के 240 खिलाड़ी तथा 50 खेल प्रशिक्षक एवं टीम मैनेजर शामिल हो रहे हैं। इस प्रतियोगिता में 15 एवं 17 वर्ष आयु समूह बालक वर्ग के खिलाड़ी तथा 17 वर्ष उम्र समूह बालिका वर्ग के खिलाड़ी सम्मिलित हो रहे हैं। इस स्पर्धा के विजयी टीम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व करेगी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक किरण देव ने स्पर्धा के विधिवत उदघाटन की घोषणा की। वहीं राष्ट्रीय खिलाड़ी अमृता पोड़ियामी ने खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ स्पर्धा में अपने प्रतिभा का प्रदर्शन करने की शपथ दिलाई। आरंभ में आयोजकों सहित खिलाड़ियों के द्वारा अतिथियों को बैज लगााकर आत्मीय स्वागत किया गया। इस मौके पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंण्डावी, नगरपालिक निगम के अध्यक्ष श्री खेमसिंह देवागंन सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधी, गणमान्य नागरिक और संचालक लोक शिक्षण के प्रतिनिधी श्री अनिल मिश्रा, संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा श्री राकेश पाण्डे तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, प्रधानचार्य और शिक्षक-शिक्षिकाएं व बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत मे जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा श्री अखिलेश मिश्र ने आभार व्यक्त किया।

कृषि सेवा केंद्रों का औचक निरीक्षण, चार दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस

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कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार खरीफ सीजन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने हेतु कृषि विभाग के टीम द्वारा विकासखण्ड भानुप्रतापपुर के कोरर क्षेत्र के कृषि सेवा केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया गया। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि भानुप्रतापपुर कोरर क्षेत्र के कई निजी कृषि सेवा केंद्रों पर अमानक सामग्री बेचने की शिकायत मिलने पर कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों पर निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि उप संचालक कृषि जितेंद्र कोमरा के मार्गदर्शन में टीम द्वारा क्षेत्र के आसपास के गांवों में संचालित निजी कृषि केंद्रों निरीक्षण किया गया और दुकानों में लगे पीओएस मशीनों और स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया गया। साथ ही जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर का संधारण अपूर्ण, मूल्य सूची, मौजूदा स्टॉक, अनुज्ञप्ति पत्र का प्रदर्शन न करना, किसानों को बिल सामग्री का रसीद नहीं देना एवं तय कीमत से अधिक रेट में खाद उर्वरक बिक्री की शिकायत मिलने पर चार दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें कोरर के रवि वीरू ट्रेडर्स, जय महाकाली कृषि सेवा केन्द्र, राठौर कृषि सेवा केन्द्र तथा ग्राम हेटारकसा के कलिहारी कृषि केन्द्र सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि इसके पहले कई दुकानों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं और जांच में एफसीओ 1985 के उल्लंघन के प्रमाण भी मिले हैं। इस अवसर पर खाद एवं बीज उर्वरक निरीक्षक, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी मौजूद थे।

डीएलएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष परीक्षा परिणाम घोषित

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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर द्वारा डीएलएड (द्विवर्षीय पाठ्यक्रम) प्रथम एवं द्वितीय वर्ष मुख्य/अवसर परीक्षा वर्ष 2025 का परिणाम आज घोषित कर दिया गया है। परीक्षार्थी अपना रोल नंबर दर्ज कर माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अधिकृत वेबसाइट
www.cgbse.nic.in
पर परीक्षा परिणाम देख सकते हैं।

डीएलएड प्रथम वर्ष में इस वर्ष 3825 बालक और 3404 बालिकाओं सहित कुल 7229 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। वहीं द्वितीय वर्ष की परीक्षा में 3438 बालक और 3732 बालिकाएं सहित कुल 7170 परीक्षार्थी शामिल हुए।edc

दंतेवाड़ा के एक प्राइमरी स्कूल में चल रहा है कॉलेज! 8 वर्षों से न बिल्डिंग बनी न छात्रावास

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई हैं. जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में पिछले 8 वर्षों से हिड़मा मांझी शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि प्राथमिक स्कूल में कॉलेज के संचालन से छोटे बच्चों को खेलने तक की जगह नहीं मिलती है।

साल 2017 में पंजीकृत हिड़मा मांझी शासकीय महाविद्यालय का संचालन बाजारपारा कटेकल्याण में स्थित चार छोटे कमरों में संचालित इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल में हो रहा है. प्राइमरी स्कूल में कम जगह होने से कुल स्वीकृत 270 सीटों वाले कॉलेज में सिर्फ 89 छात्र पढ़ रहे हैं.

8 सालों में न कॉलेज की इमारत बन सकी और न छात्रों के लिए बन सका छात्रावास
गौरतलब है स्कूल में संचालित हो रहे हिड़मा मांझी शासकीय महाविद्यालय के लिए छ्त्तीसगढ़ सरकार ने 8 करोड़ की लागत से भवन और हॉस्टल निर्माण की योजना जरूर बनाई थी, लेकिन पिछले 8 सालों में न ही तो कॉलेज की इमारत बन सकी और न ही छात्रों के लिए छात्रावास बन सका है. हालत ये हैं कि अब ठेकेदार ने काम छोड़ दिया है.

हिड़मा माझी कॉलेज पर पहुंची news टीम, स्टाफ ने सुनाए हैरतअंगेज किस्से
प्राइमरी स्कूल में संचालित हो रहे हिड़मा माझी शासकीय महाविद्यालय पहुंची newsuyjhmn टीम ने कॉलेज और स्कूल टीचर से कॉलेज की दुर्दशा को लेकर बात की. एक ही स्कूल में संचालित हो रहे प्राइमरी स्कूल और कॉलेज को लेकर कॉलेज और स्कूल के स्टाफ से उनकी समस्याएं सुनी. कॉलेज स्टाफ ने बताया कि कॉलेज में स्टॉफ की हालत बेहद चिंताजनक है.

रायपुर में शहर से जेल तक अपराध नॉनस्टॉप ! 72 घंटे में 5 कत्ल, जेल में भी कैदी सुरक्षित नहीं

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून का इकबाल सवालों के घेरे में है. राजधानी में बीते 72 घंटे में पांच हत्याएं हुई और जेल में बंद कांग्रेस नेता पर जानलेवा हमला हुआ है. जेल में कांग्रेस नेता पर हुए हमले को गैंगवार का नतीजा बताया जा रहा है. रायपुर के अलावा दुर्ग जेल में भी एक हत्या के आरोपी ने आत्महत्या कर ली है. इससे जेल में सुरक्षा इंतजाम भी सवालों के घेरे में है. दूसरी तरफ इन मामलों को लेकर राज्य की सियासत भी गरमा गई है. आगे बढ़ने से पहले वारदातों पर निगाह डाल लेते हैं.

विचाराधीन कैदियों ने किया जानलेवा हमला
राजधानी में बीते 72 घंटे में हुई पांच हत्याओं में से तीन मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है. चौंकाने वाली बात ये है कि तीनों ही मामलों में हत्या के समय आरोपी नशे में थे. सबसे चौंकाने वाला मामला रायपुर की जेल में हुई हत्या का है. इस हत्याकांड को 17 जुलाई को अंजाम दिया गया. जानकारी के मुताबिक युवा कांग्रेस नेता आशीष शिंदे पर ब्लेड और कटर से जानलेवा हमला हुआ था. हमले में उनके चेहरे, छाती और गले पर गंभीर चोटें आईं. जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया.

महेश रात्रे और जामवंत ने किया. पुलिस इसे आपसी रंजिश के चलते हुई हत्या मान रही है. हालांकि इस वारदात ने एक बार फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

धारदार हथियारों का जेल के अंदर पहुंचना और गैंगवार की स्थिति बनना जेल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है. दूसरी तरफ जेल प्रशासन ने इन घटनाओं की आंतरिक जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है. वैसे एक और आंकड़ा है जो रायपुर में पुलिसिया इंतजाम की कहानी बयां करता है.

रायपुर में 3 साल 220 हत्याएं
2022 में 75 हत्याएं
2023 में 65 हत्याएं
2024 में 79 हत्याएं
अब इन्हीं वारदातों को लेकर कांग्रेस विष्णु देव साय सरकार पर हमलावर है तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष का कहना है कि भूपेश सरकार के मुकाबले अपराध में कमी दर्ज की गई है. कांग्रेस मीडिया सेल के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला का कहना है- बीजेपी की सरकार में कानून व्यवस्था चौपट हो गई है. प्रदेश की राजधानी में 72 घंटे में 5 हत्या की वारदात होती है तो राज्य भर में इसी दौरान 28 हत्या के मामले सामने आए हैं. इस सरकार के दौर में तो जेल भी सुरक्षित नहीं है. सुशील आनंद के वार पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है. बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर का कहना है- भूपेश सरकार के दौर में पांच सालों तक एनसीआरबी के डेटा में छत्तीसगढ़ पांचवें नंबर पर था लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं है. हालांकि जो घटनाएं हुई हैं वो चिंताजनक है. सरकार कार्रवाई कर रही है.कई मामलों में एसपी-कलेक्टर का तबादला तक किया गया है. हत्या के संबंध में ज्यादातर मामले आपसे रंजिश के हैं. जाहिर है वारदात होंगे तो इस पर सियासत भी होगी ही लेकिन देखने वाली बात ये है कि गृह विभाग अब कौन से कड़े कदम उठाता है. Q

सड़कों पर पंडाल और आयोजन को लेकर हाईकोर्ट सख्त, साय सरकार को नीति बनाने के लिए मिला 6 सप्ताह का समय

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त्योहारी सीजन में सड़कों पर बगैर अनुमति लगाए जाने वाले पंडाल, रैली और अन्य आयोजनों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इस मुद्दे पर सोमवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि वो इस विषय में नीति तैयार करे और इसके लिए उसे 6 सप्ताह का समय दिया गया है.अगली सुनवाई अब 2 सितंबर 2025 को होगी.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या कहा?
यह जनहित याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा उनकी अधिवक्ता अदिति सिंघवी के माध्यम से दायर की गई थी. याचिका में बताया गया कि रायपुर शहर में बीते तीन वर्षों के दौरान गणेश और दुर्गा उत्सवों में कई स्थानों पर बिना किसी अनुमति के पंडाल लगाए गए. कलेक्टर और नगर निगम से इस संबंध में जानकारी ली गई, जिन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आयोजन के लिए उनकी ओर से अनुमति नहीं दी गई थी.

सड़कों पर पंडाल और आयोजन करने से आम नागरिकों को होती है परेशानी
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ऐसे आयोजन सार्वजनिक मार्गों और तंग गलियों में बगैर अनुमति किए जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और आम नागरिकों को परेशानी होती है. शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने कोर्ट को बताया कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में कई विभागों की सहभागिता आवश्यक है, जिस कारण समय चाहिए.

जिला प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब तक नई नीति नहीं बन जाती, तब तक पूर्व में जारी दिशा-निर्देश ही लागू रहेंगे. वर्तमान में 22 अप्रैल 2022 को गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत किसी भी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या अन्य सार्वजनिक आयोजन के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है. अनुमति के लिए निर्धारित फॉर्म में आवेदन और शपथ पत्र देना जरूरी है, जिससे सुरक्षा और यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके.

एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा; 2050 तक मौत के साथ ही इलाज का खर्च भी बढ़ेगा

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ई स्टडी के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होने (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) के कारण न केवल मौतों की संख्या बढ़ सकती है, बल्कि इलाज की लागत भी मौजूदा 66 अरब डॉलर (लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये) प्रति वर्ष से बढ़कर 2050 तक 159 अरब डॉलर (लगभग 13.3 लाख करोड़ रुपये) प्रति वर्ष हो सकती है. सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के एक नए अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर प्रतिरोध की दर 1990 के बाद के रुझानों जैसी रही, तो स्वास्थ्य खर्च का 1.2 फीसदी हिस्सा एंटीबायोटिक प्रतिरोध के इलाज पर खर्च होगा.

क्या समस्या हो सकती है?
जब हम एंटीबायोटिक दवाओं का गलत या बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं. इन प्रतिरोधी बैक्टीरिया को सुपरबग्स कहते हैं जो सामान्य दवाओं पर असर नहीं होने देते. इससे अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या और इलाज की अवधि बढ़ जाती है और उनका इलाज भी ज़्यादा मुश्किल और महंगा हो जाता है.

अध्ययन के अनुसार, यह समस्या खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में ज्यादा गंभीर होगी, जहां संसाधन सीमित हैं. अध्ययन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) के डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अनुमान है कि साल 2050 तक एंटीबायोटिक प्रतिरोध से होने वाली मौतें 60 फीसदी बढ़ सकती हैं. साल 2025 से 2050 के बीच 3.85 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.
सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के पॉलिसी फेलो एंथनी मैकडॉनेल के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने बताया, “एंटीबायोटिक प्रतिरोध का सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ता है. यह स्वास्थ्य देखभाल की लागत को बढ़ाता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है.”

शोध में सुझाव दिया गया है कि नई और प्रभावी दवाओं के शोध को बढ़ावा देना, एंटीबायोटिक्स का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना और उच्च गुणवत्ता वाले इलाज तक पहुंच बढ़ाना जरूरी है. अगर एंटीबायोटिक प्रतिरोध से होने वाली मौतें रोकी जाएं, तो साल 2050 तक दुनिया की आबादी 2.22 करोड़ ज्यादा होगी. यह अध्ययन सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत को बताता है.

बारिश के साथ बढ़ा मलेरिया का कहर, लचर व्यवस्था से बिगड़ रहे हालात

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छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण लोग बहुत परेशान हैं. लोगों को कई तरह की बीमारी का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही, आम जीवन भी अस्त-व्यस्त है. बिलासपुर जिले में बारिश शुरू होते ही मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है. बीते एक महीने में 17 मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में सर्वे कर रही हैं, लेकिन दवाओं की कमी, पुरानी मच्छरदानियों की अप्रभावशीलता और बजट अभाव से हालात बिगड़ रहे हैं.

सैंपल जांच का काम ठप
बिलासपुर में पुराने सरकारी भवन में स्थित मलेरिया कार्यालय में सैंपल जांच का काम ठप है. इसके कारण समय पर संक्रमण की पहचान नहीं हो रही है और लोगों में संक्रमण फैलता जा रहा है. कोटा ब्लॉक के कुरदर, बेलगहना, खोंगसरा जैसे दर्जनों गांवों को मलेरिया का अति संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है. 2024 में करवा गांव में दो भाइयों की इससे मौत भी हो चुकी है. स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वे के लिए दी गई 6 बाइकें सालों से बंद कमरे में सड़ रही हैं और बाइक एम्बुलेंस सेवा भी दो महीने से बंद है.

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कही ये बात
बिलासपुर जिले की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर शुभा गरेवाल ने जानकारी देते हुए कहा, “बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में जो अति संवेदनशील क्षेत्र माना है, वहां 17 मलेरिया के मरीज मिले थे. इनका इलाज लगभग पूरा हो चुका है. इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जा कर लोगों की जांच कर रहे हैं. जिन परिवारों के पास मच्छरदानी है, उन मच्छरदानियों को मेडिकेटेड करके स्वास्थ्य विभाग वापस कर रही है. लेकिन, विभाग की ओर से मच्छरदानी वितरण नहीं किया जा रहा.”

मलेरिया होने पर क्या करें ?
बरसात के मौसम में, खासतौर से मॉनसून में डेंगू और मलेरिया जैसी बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है. वैसे तो मलेरिया को घर पर पूरी तरह से ठीक करने का कोई उपाय नहीं है, लेकिन मलेरिया होने पर आप इन चीजों को घर पर करके इसके संक्रमण को बढ़ने से कुछ हद तक बचा सकते हैं.

छत्तीसगढ़ में 16 लाख पंजीकृत बेरोजगार ! डेढ़ साल में सरकार ने नौकरी दी- शून्य

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छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों को लेकर पेश किए गए आंकड़े हैरान करते हैं. राज्य में 16 लाख से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं, लेकिन पिछले डेढ़ सालों में उनको सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की जानकारी सरकार के पास निरंक यानि शून्य है. बेरोज़गारी की इस विराट लीला में रोजगार के मुद्दे ऐसे खो गए हैं जैसे सरकारी घोषणाओं में नीयत. जिन युवाओं का सपना था स्कूल में पढ़ाने का, वो अब व्हाट्सएप पर बच्चों के रिजल्ट देख रहे हैं… और जो पुलिस में भर्ती होना चाहते थे, वो अब खुद को व्यवस्था की गिरफ़्त में पा रहे हैं . दूसरी तरफ सरकार कहती है “प्लेसमेंट एजेंसियों” से 6279 युवाओं को नौकरी दिलाई गई…वो पंजीकृत लाखों बेरोजगारों पर भी कोई ठोस जवाब नहीं देती. पूरे मामले पर आगे बढ़ने से पहले सरकारी आंकड़ों के जरिए ही राज्य में बेरोजगारी की क्या स्थिति है इसे समझ लेते हैं.

ये सिर्फ बेरोजगारी नहीं, टूटते भरोसे की कहानी है
दरअसल राज्य में 16 लाख 24 हजार 105 पंजीकृत बेरोजगार हैं. लेकिन जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच इन बेरोजगारों को शासकीय सेवा में नियोजित या रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया है. ये आंकड़े खुद सरकार के हैं. अहम ये भी है कि छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार ने अप्रैल से मई 2025 तक सुशासन तिहार मनाया. इस दौरान भी 4373 हितग्राहियों ने रोजगार की व्यवस्था के लिए गुहार लगाई. हकीकत क्या है ये आप सरकारी आंकड़ों के आईने में देख ही चुके हैं. NDTV ने इन्हीं बेरोजगारों की स्थिति जानने के लिए ग्राउंड पर जाकर रोजगार के आकांक्षी युवाओं से बात की. सबसे पहले हमारी मुलाकात हुई दुर्ग के रहने वाले सतीश निषाद से. वे हर रोज़ लाइब्रेरी आते हैं. उनकी मां नहीं रहीं और पिता भी रिटायर हैं. सतीष साल 2015 में ही अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है. वो तीन सालों से शिक्षक बनने का सपना लिए किताबों से बातें कर रहे हैं.

इसी तरह का केस मंजू ठाकरे का भी है. वो भी सालों से नौकरी का इंतजार कर रही हैं. वे बताती हैं कि उनके पास तैयारी का वक्त कम है क्योंकि घरवाले शादी का दबाव बना रहे हैं. हमें एक और बेरोजगार मिले, जिनका नाम सतीष निषाद है. उन्होंने बताया कि उनका सपना तो शिक्षक बनने का था जिसके लिए मैं 3 साल से तैयारी कर रहा हूं लेकिन राज्य में 2 सालों से शिक्षकों की भर्ती हुई ही नहीं है. वे बताते हैं कि राज्य में साल 2023 में 78 हजार पद खाली थे लेकिन अब रिक्त पदों को ही कम कर लगभग 22 हजार 464 कर दिया गया है. सतीश बताते हैं कि उनके समूह में करीब 7 लाख अभ्यर्थी बीएड डीएम की डिग्री लेकर इंतजार कर रहे हैं. सरकार के रवैये से अब खुद के भविष्य की चिंता होने लगी है. इसी तरह की एक और बेरोजगार मंजू ठाकरे भी कहती हैं- सरकार सिर्फ हम लोग को भ्रमित कर रही है. न तो वो भर्ती निकाल रही है और न ही कुछ और ही कर रही है.

“हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती”
8520/ बेरोजगारों की इस समस्या को लेकर सरकार से भी जवाब मांगा. राज्य के डिप्टी CM विजय शर्मा ने हमारे सवाल के जवाब में कहा- मुझे अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं है. मैं जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा हालांकि बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने बताया- हर किसी को सरकारी नौकरी उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती, फिर भी कई विभागों में जरूरत के आधार पर भर्तियां हो रही हैं, युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए सरकार कार्य कर रही है. दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता आशीष यादव का कहना है- महिला, किसान, युवाओं की हितैषी होने का दावा करने वाली भाजपा सिर्फ जुमलेबाजी करना जानती है. विधानसभा में पेश आंकड़े ही इनकी हकीकत बता रहे हैं, ये सरकार युवाओं को रोजगार दिलाना ही नहीं चाहती, क्योंकि रोजगार पाने के बाद युवा समाज और देश के विकास में भूमिका निभाएंगे, जबकि बेरोजगार रहेंगे तो इनके जुमलेबाजी में फंसे रहेंगे.

सरकार के पास आंकड़े हैं पर नौकरी नहीं !
जाहिर है छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी का आलम ये है कि आंकड़े सरकार के पास हैं, लेकिन नौकरियां नहीं… और बेरोजगारों के पास डिग्रियाँ हैं, लेकिन दरवाज़ा खटखटाने पर भी कोई नहीं खोलता. राज्य में सोलह लाख से ऊपर पंजीकृत बेरोज़गार हैं. यानी इतनी भीड़ तो कभी मेला प्रांगण में भी नहीं दिखती, जितनी रोज़ रोजगार कार्यालय में दिख जाती है. पर सरकार है कि कहती है हमारे पास जानकारी ही नहीं है कि इनमें से किसी को काम मिला या नहीं! इधर सरकार ने “सुशासन तिहार” मनाया… अच्छा किया, पर लगता है तिहार में शासन चला गया और सुशासन कहीं छुट्टी पर! यह वो सरकार है जो बेरोज़गार को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है. शायद इसलिए कि बेरोजगार रोज़ खुद से कहे, “हिम्मत रख, सरकार के भरोसे मत बैठ!

ED को सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार, तो बोले बघेल- ये बस विपक्षी नेता व पार्टी की छवि खराब करते हैं

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से ईडी के खिलाफ की गई टिप्पणी के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ईडी की कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि ये जांच एजेंसी भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार के इशारे पर सिर्फ विपक्षी पार्टी के नेताओं और विपक्षी दलों की छवि खराब करने का काम करती है.

ED के एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी राजनीति न करें. राजनीति का काम राजनीतिक लोगों को ही करने दिया जाए.

ED की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने अपने बयान में आगे कहा कि राज्यसभा में पेश किए गए जवाब के अनुसार ED का सक्सेस स्ट्राइक रेट मात्रा एक फीसद ही है. उनकी कार्रवाई विपक्षी दल के नेताओं और विपक्षी पार्टियों की छवि खराब करने के लिए ही की जाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को तोड़ने के लिए केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग किया जा रहा है.