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तेजी से बदलती दुनिया में नए मानकों और नवाचारों की जानकारी जरूरी – श्री अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव आज भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अभियंताओं के लिए आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम में शामिल हुए। भारतीय मानक ब्यूरो के रायपुर कार्यालय द्वारा रायपुर के नवीन विश्राम भवन में 21 जुलाई और 22 जुलाई को दो दिवसीय इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। देशभर से आए विषय विशेषज्ञ कार्यक्रम में पीएचई के अभियंताओं को जल प्रदाय योजनाओं में प्रयुक्त सामग्री और कार्यों के नए मानकों की जानकारी दे रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रदेशभर के 120 से अधिक अभियंता इसमें हिस्सा ले रहे हैं जिनमें मुख्य अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और सहायक अभियंता शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभियंताओं से कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में नए मानकों और नवाचारों से अपडेट रहना जरूरी है। एक इंजीनियर के रूप में सम-सामयिक तकनीकी पहलुओं और उनके नवीन मापदंडों की जानकारी आवश्यक है। कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के लिए इनकी अच्छी जानकारी काफी मददगार होती है। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो को क्षमता निर्माण कार्यक्रम के आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे हमारे अभियंताओं की दक्षता और क्षमता बढ़ेगी।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का कार्य सीधे जन कल्याण से जुड़ा हुआ है। चाहे वह स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो, जल शोधन की प्रक्रिया हो या ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति तंत्र को सुदृढ़ बनाना हो। इन कार्यों की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम मानकों का कितना पालन करते हैं और तकनीकी ज्ञान को कितनी सफलता से धरातल पर उतारते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अभियंताओं के लिए यह कार्यक्रम उनके कार्यस्थल पर प्रभावी कार्य संपादन में सहायक होगी।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने कहा कि देश-दुनिया में प्रचलित मानकों और मापदंडों से विभाग के अभियंताओं को अवगत कराने भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने विभागीय अभियंताओं से अपील की कि वे यहां सीखी गई बातों को फील्ड में कार्यों के मापन और मूल्यांकन में जरूर अपनाएं। जल जीवन मिशन के संचालक श्री जितेन्द्र शुक्ला, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री टी.डी. सांडिल्य और भारतीय मानक ब्यूरों के क्षेत्रीय निदेशक श्री एस.के. गुप्ता ने भी प्रतिभागी अभियंताओं को संबोधित किया।

दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में इनसे संबंधित मानकों की दी जाएगी जानकारी

भारतीय मानक ब्यूरो के विशेषज्ञ दो दिनों तक चलने वाले क्षमता निर्माण कार्यक्रम में पीएचई के अभियंताओं को भवन उपयोगिता में वृद्धि हेतु जल आपूर्ति, जल निकासी एवं स्वच्छता के लिए श्रेष्ठ व्यवहार, सेवाओं एवं संसाधनों का अनुकूलन : पेयजल आपूर्ति सेवाएं और परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पेयजल की गुणवत्ता, नमूनाकरण एवं परीक्षण में मानकों की भूमिका, सतत संचयन : वर्षा जल प्रबंधन में बीआईएस मानकों की भूमिका, आधुनिक स्वच्छता समाधान : रोटेशनल मोल्डेड पॉलीएथिलीन सेप्टिक टैंक और आईएस 18666, ओवरहेड टैंक, सिविल संरचनाएं (धातु, सीमेंट, आरसीसी), पैकेज्ड जल उपचार संयंत्र (पारंपरिक व अपरंपरागत), दक्षता का अनुकूलन : अपशिष्ट जल आपूर्ति नेटवर्क में परिसंपत्ति प्रबंधन, पाइप सामग्री (DI/CI/PVC/HDPE) तथा पंपिंग प्रणालियों में मानकीकरण के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के बारे में जानकारी देंगे।

बीआईएस के ये विशेषज्ञ दे रहे जानकारी

रिसोर्स पर्सन के रूप में भारतीय मानक ब्यूरो के विशेषज्ञ सर्वश्री फालेन्द्र कुमार, राजेश कुमार दास, देवेन्द्र सिंह धपोला, आर.पी. देवांगन, डॉ. एन. मुरली मोहन और डॉ. मयूर जे. कपाड़िया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के इंजीनियरों को जल प्रदाय प्रणाली और रेन वाटर हार्वेस्टिंग से संबंधित नए मानकों और मापदंडों की जानकारी दे रहे हैं।

स मामले में दोषी पाई गईं चंदा कोचर, 300 करोड़ के लोन में कितना खाया

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आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को 64 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का दोषी पाया गया है. यह रिश्वत वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ रुपये का लोन मंजूर करते वक्त ली गई थी. यह जानकारी एक अपीलीय ट्रिब्यूनल के फैसले से बाहर आई है, जिसमें कहा गया है कि यह पूरा मामला ‘लेन-देन के बदले में लाभ’ (quid pro quo) का है. इस पैसे को चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के जरिए एक कंपनी में पहुंचाया गया, जो वीडियोकॉन से जुड़ी थी.

इकॉनमिक्स टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा- ट्रिब्यूनल के अनुसार, रिश्वत का पैसा वीडियोकॉन की कंपनी एसईपीएल से निकलकर ‘न्यूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी में भेजा गया था. यह कंपनी सीधे तौर पर दीपक कोचर के नियंत्रण में थी, हालांकि कागजों पर इसे वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के नाम दिखाया गया था. दिलचस्प बात यह है कि यह पैसा ठीक उसी दिन ट्रांसफर किया गया, जिस दिन बैंक से 300 करोड़ रुपये का लोन मंजूर हुआ था.

लोन पास करने वाली कमेटी में थीं चंदा कोचर

चंदा कोचर उस कमेटी में थीं, जो लोन पास करती है. इसके बावजूद उन्होंने यह बात नहीं बताई कि उनके पति की कारोबारी साझेदारी उसी कंपनी के साथ है, जिसे लोन दिया जा रहा है. यह बैंक की नैतिकता और हितों के टकराव (conflict of interest) से जुड़े नियमों का सीधा उल्लंघन था.

लोकसभा-राज्यसभा में भारी हंगामा, दोपहर 12 बजे तक कार्यवाही स्थगित

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संसद का मानसून सत्र सोमवार को तीखी बहस और हंगामे के साथ शुरू हुआ. विपक्षी दलों ने पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की. सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी. आज मंगलवार को कार्यवाही का दूसरा दिन है. आज भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया है. हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई.

हिंदू शरणार्थियों की बस्ती पर चलेगा बुल्डोजर, शरणार्थी बोले- मरना पसंद था लेकिन मुस्लिम बनना नहीं

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साल 2011 में पाकिस्तान में प्रताड़ना और काफ़िर शब्द से परेशान होकर हिंदुस्तान की जमीन पर कदम रखा और दिल्ली के मजनू का टीला को अपना ठिकाना बनाया. अब इन हिंदू शरणार्थियों को मजनू का टीला से भी जाना होगा, क्योंकि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस जमीन को खाली करने का आदेश जारी कर दिया है. दिल्ली विकास प्राधिकरण की नोटिस में साफ तौर पर लिखा गया है कि 15 7.2025 और 16-7-2025 गुरुद्वारा मजनू का टीला, पश्चिमी तट के दक्षिण में यमुना नदी बाढ़ के मैदान पर डीडीए, अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाने वाला है.

ऐसे में 14- 07-2025 तक इस क्षेत्र को खाली कर दिया जाए. अन्यथा 15 और 16 जुलाई तक अतिक्रमण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा. उसमें जो भी नुकसान होगा उसके लिए लोग खुद जिम्मेदार होंगे. हालांकि, आज तारीख 22 जुलाई हो गई है और ध्वस्तीकरण की तारीख निकल चुकी है. अभी तक फिलहाल दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से कोई भी ध्वस्तीकरण अभियान यहां पर नहीं चलाया गया है. इन सब के बावजूद हिंदू शरणार्थी दहशत में है और अपना-अपना सामान पैक कर रहे हैं. हमने यहां पर पहुंचकर ग्राउंड रिपोर्ट की और हिंदू शरणार्थियों का दर्द जाना.
मरना पसंद था लेकिन मुस्लिम बनना नहीं
हमने यहां के प्रधान धर्मवीर से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर ढाई सौ परिवार हैं. सभी पाकिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थी हैं. पूरे हिंदू शरणार्थी यहां पर रहते हैं. इस बस्ती में हर एक कदम पर आपको मंदिर मिलेंगे. हर घर में मंदिर है. सरकार हिंदुओं को सहयोग कर रही है, तो फिर हिंदू शरणार्थियों को क्यों नहीं. हिंदू शरणार्थी कौन से देश में जाएंगे.
वहीं यहां पर साल 2011 में पाकिस्तान की सिंध से आई हुई मैना ने बताया कि यहां पर एक झोपड़ी बनाने में 10 साल का वक्त लग गया. 10 साल बिना लाइट के रहे. अब कुछ सुविधा हुई हैं, तो अब इसको भी तोड़ने का फैसला आ गया है. अगर सरकार इसे तोड़ रही है तो कम से कम हमें मकान दे दे या कुछ रोजगार के अवसर दे दे, ताकि हम हिंदू शरणार्थी जो पाकिस्तान से अपने हिंदू धर्म को बचाने के लिए आए हैं, वो अपने वतन में सुकून से जी सकें, क्योंकि हमें मरना पसंद था लेकिन मुस्लिम बनना नहीं इसलिए हिंदुस्तान आए थे. उन्होंने बताया कि सबके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और तो और नागरिकता भी है.
यहां पर रह रही सीमा ने बताया कि साल 2011 से लेकर 2013 के बीच पाकिस्तान में हिंदुओं पर बहुत अत्याचार हुआ, इसीलिए इसी दौरान हिंदुस्तान में हिंदू शरणार्थी आए और ज्यादातर दिल्ली के मजनू का टीला के इसी बस्ती में रह रहे हैं. सभी हिंदू शरणार्थी हैं. छोटे-छोटे बच्चों को लेकर अब कहां जाएंगे अगर इस बस्ती को उजाड़ दिया गया. यहां पर रह रही विमला ने बताया की उम्र बीत गई यहां पर रहते हुए क्या सरकार के दिल में हिंदू शरणार्थियों के लिए कोई हमदर्दी नहीं है. बहुत टेंशन हो गई है कि कहां जाएंगे. क्या करेंगे. सरकार को हम हिंदू शरणार्थियों को बसाने पर ध्यान देना चाहिए और इस बस्ती को ना उजाड़ा जाए. वरना कई हिंदू शरणार्थी फिर से परेशान होंगे.

हिमाचल में भारी बारिश से टूटे पहाड़, 36 घंटे में 5 लोगों की मौत, लैंडस्लाइड से 3 नेशनल हाईवे समेत 398 बंद, 3 उपमंडलों में स्कूल बंद किए

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हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हुआ है. बीते 36 घंटों में प्रदेश में बारिश और लैंडस्लाइड में छह लोगों की मौत हुई है, जबकि जगह-जगह तीन नेशनल हाईवे सहित 398 सड़कें बंद हो गई हैं. वहीं, 682 बिजली ट्रांसफार्मर और 151 पेयजल योजनाएं हैं. इससे पहले, सोमवार को भारी बारिश के चलते शिलाई, कोटखाई और थुनाग में स्कूल और शैक्षणिक संस्थान बंद करने पड़े थे. उधऱ, मंगलवार के लिए 4 जिलों में ऑरेंज और 8 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने बताया कि ऊना, हमीरपुर, सोलन और बिलासपुर में ऑरेंज रहेगा.

मंगलवार को भी प्रदेश में मौसम खराब बना हुआ है. सोमवार रात को प्रदेशभर में रुक रुक कर बारिश होती रही. वहीं, कई जिलों में बत्ती गुल हो गई. मौसम विभाग ने बीते कल सोमवार को पांच जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था. वहीं, अब मंगलवार को ऑरेंज अलर्ट रहेगा.
मंडी ज़िले में बारिश का येलो अलर्ट, तीन उपमंडलों में बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज
मंडी ज़िले में लगातार हो रही बारिश के बीच मंगलवार को भी मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. बारिश की स्थिति को देखते हुए उपमंडल थुनाग, करसोग और निहरी तहसील के तहत आने वाले सभी शैक्षणिक संस्थान आज बंद रहेंगे. बताया जा रहा है कि रविवार रात से पूरे ज़िले में रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है, जिससे हालात बिगड़ते जा रहे हैं. चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) पर दवाड़ा के पास भूस्खलन के चलते मार्ग कल से पूरी तरह बंद है. मार्ग को बहाल करने में अभी और समय लग सकता है. इस मार्ग पर सैकड़ों वाहन और यात्री फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने और मार्ग खोलने के लिए प्रशासन और एनएचएआई की टीमें प्रयास कर रही हैं.

मंगलवार को कुल्लू जिले को जोड़ने वाले वेक्लपिक मार्ग कांडी -कटौला सड़क राहला-रोपा के पास 2-3 वाहनों के खराब होने से अवरुद्ध हो गई है और यह स्थान बजौरा से मंडी की ओर करीब 8–10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस कारण दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है और मार्ग पर जाम की स्थिति बनी हुई है. प्रशासन से मार्ग को जल्द खुलवाने की मांग की जा रही है.

अलग अलग जगह 5 लोगों की मौत

रविवार शाम से लेकर मंगलवार सुबह तक प्रदेश में लैंडस्लाइड और डूबने की वजह से कुल छह लोगों की मौत हुई है. इसमें दो बच्चियां भी शामिल हैं. सबसे पहला मामला लाहौल स्पीति में रविवार शाम को पेश आया था, जिसमें नेपाली मूल की दो बेटियां दालंग मोड़ के समीप टैंट में रहती थी और पास में बने पानी के टैंक में नहाने उतरी. इस दौरान दोनों डूब गईं. इसी तरह चंबा के मैहला विकास खंड की पंचायत चड़ी के गांव सूताह में सोमवार सुबह चार बजे लैंडस्लाइड आया और कमरे में सोए हुए दंपति की मौत हो गई. राहुल और पल्लवी नाम के दंपति की चार पांच महीने पहले ही शादी हुई थी और महिला अपने पति के साथ मायके आई थी.

सुंदरनगर में युवक बह गया
उधर, सुंदरनगर में बुआ के घर से लौट रहा युवक हादसे का शिकार हो गया और ग्राम पंचायत कांगू के गांव देहवी में खड्ड पार करते समय 20 वर्षीय युवक की पानी के तेज बहाव में बहने से मौत हो गई है. रोहित कुमार (20) पुत्र मंगत राम निवासी गांव जंदरेहडू डाकघर बायला सोमवार सुबह देहवी के निकट जड़ोल खड्ड को पार कर रहा था. इसके अलावा, सोमवार को शिमला के रामपुर में लुहरी-सुन्नी मार्ग पर एक पिकअप वाहन पर अचानक भारी-भरकम चट्टानें गिर गईं, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दो लोग घायल हो गए. लुहरी के पास सड़क से ऊपर पहाड़ी से अचानक बड़े-बड़े बोल्डर टूटकर नीचे आ गिरे और पिकअप को चपेट में ले लिया. हादसा इतना भयानक था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए.
श्रीखंड और किन्नर कैलाश यात्रा रोकी

भारी बारिश के चलते कुल्लू की श्रीखंड महादेव और किन्नौर की किन्नर कैलाश यात्रा को सोमवार को एक दिन के लिए रोका गया था. डीसी कुल्लू तोरुल एस. रवीश ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा को सोमवार के लिए रोका गया था. सभी श्रद्धालुओं को बेस कैंप में ही रुकने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि निरमंड उपमंडल की ऊँची पहाड़ियों में लगातार तेज बारिश हो रही है, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है. अब तक करीब 6900 श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में भाग ले चुके हैं.

किन्नर कैलाश यात्रा भी एक दिन के लिए स्थगित
किन्नौर के कल्पा के एसडीएम कल्पा ने बताया कि सोमवार को करीब 300 श्रद्धालुओं को मेलिंग खट्टा में रोका गया, जबकि 40 श्रद्धालुओं का एक दल सुबह दर्शन के लिए आगे गया था, उन्हें भी गुफा से वापस लाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पागल नाले में आई बाढ़ के कारण राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 (NH-5) करीब तीन घंटे तक अवरुद्ध रहाय सांगला के टोगटोचे नाला और गंगारंग नाले में भी पानी का बहाव तेज़ हुआ, हालांकि इन स्थानों पर किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है. रूनंग नाले में भी बाढ़ आने से एनएच-5 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है.
ऊपर से गुजरती ट्रेन और नीचे लैंडस्लाइड
सोमवार को कांगड़ा के नूरपु में चक्की दरिया में पानी का बहाव इतना तेज़ हो गया कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब को जोड़ने वाले पुल को नुकसान पहुंचा है. यहां पर पानी के तेज बहाव से चक्की दरिया पर बना पुल नीचे से धंसने लगा है, जिससे उस पर से गुजरना खतरनाक हो गया है. इसके साथ ही रेलवे पुल को भी नुकसान पहुंचा है. बताया जा रहा है कि जब पुल के नीचे का हिस्सा धंस रहा था, उसी समय एक ट्रेन भी पुल से गुजर रही थी, जिससे बड़ा हादसा बच गया. इसी बारिश के कारण हिमाचल की इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के तीन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया और आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है. उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी यही मार्ग बारिश के चलते बह गया था, जिसके बाद सेना की मदद से वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था. इस संबंध में इंदौरा के एसडीएम सुरेन्द्र ठाकुर ने फोन पर बताया कि, “हम लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर जा रहे हैं. सेना और पठानकोट प्रशासन से संपर्क करके जल्द से जल्द रास्ता बहाल करने की कोशिश की जाएगी.”
बस मलबे में फंसी, बाल बाल बचे लोग

सिरमौर जिले के रेणुका विधानसभा क्षेत्र के संगडाह क्षेत्र में एक निजी बस बाल-बाल दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई, संगड़ाह चाढना रुट पर जा रही बस कड़ियाना गाँव के समीप बरसारी नाले में आए भारी मलबे के बीच धंस गई. बस में कुल 15 लोग सवार थे. गनीमत रही कि बस मलबे के साथ नीचे नहीं बही. उधर, मंडी जिले के सराज में भी बारिश के चलते नाले ऊफान में आने से यहां पर लोग सहम गए. 1 जुलाई की आपदा के बाद से यहां पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है और अब तक 15 लोगों की लाशें मिली हैं, जबकि 27 लापता हैं.

हिमाचल में मॉनसून का कहर, अब तक 1246 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
हिमाचल प्रदेश में इस बार का मॉनसून तबाही लेकर आया है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 20 जून से अब तक प्रदेश को 1246 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है. लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. अब तक प्रदेश में 1162 घर क्षतिग्रस्त, 1005 पशुशालाएं और 276 दुकानें पूरी तरह से जमींदोज हो चुकी हैं. बारिश और बाढ़ की वजह से 1296 मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि 21,500 पोल्ट्री पक्षी भी मारे गए हैं. सड़कों और बिजली-पानी की सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. प्रदेश में 3 राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और 398 सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं. इसके अलावा, 682 ट्रांसफार्मर और 151 जलापूर्ति परियोजनाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं. प्रशासन की ओर से लगातार राहत और बहाली कार्य जारी है, लेकिन मौसम की मार के चलते दिक्कतें लगातार बनी हुई हैं. लोगों से अपील की गई है कि वह नदियों-नालों से दूर रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें.

रूस-यूक्रेन के बीच इस्तांबुल में शांति वार्ता, जेलेंस्की करेंगे पुतिन का इंतजार

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रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए नए दौर की शांति वार्ता बुधवार को आयोजित की जाएगी. यह वार्ता इस्तांबुल में पहले हुई दो दौर की बैठकों के बाद हो रही है. आपको बता दें कि दोनों ही बैठकों में युद्ध खत्म करने को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी थी. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार को अपने संबोधन के दौरान यह जानकारी दी थी.Q

कब होगी रूस- यूक्रेन के बीच वार्ता?

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया – आज मैंने यूक्रेनी सुरक्षा परिषद प्रमुख] रुसतेम उमेरोव के साथ कैदियों की अदला-बदली और रूस के साथ तुर्की में होने वाली आगामी बैठक की तैयारियों को लेकर चर्चा की. उमेरोव ने बताया कि यह बैठक बुधवार को प्रस्तावित है.हालांकि रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से दावा किया है कि यह वार्ता गुरुवार को आयोजित की जाएगी. इससे पहले सोमवार को क्रेमलिन ने पुष्टि की कि एक और दौर की वार्ता की योजना बनाई जा रही है, लेकिन अभी सटीक तारीखों की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है.
जेलेंस्की ने वार्ता का प्रस्ताव शनिवार को रखा था, जब रूस के हवाई हमलों से एक बार फिर यूक्रेन के कई हिस्सों में तबाही मची थी. इसके बाद ही क्रेमलिन ने उम्मीदों पर लगाम लगाते हुए कहा कि इस वार्ता से पहले अभी भी बहुत सारा कूटनीतिक कार्य बाकी है.जहां यह वार्ता रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित समाधान की एक नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है, वहीं रूस का रुख बता रहा है कि वो किसी सकारात्मक निर्णय की ओर जाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहा है. वो बात अलग है कि वार्ता से पहले ही पश्चिमी देशों ने रूस को और अधिक प्रतिबंधों की धमकी दे रखी है.

डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम का क्या

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 50 दिन क अल्टीमेटम दिया था कि यूक्रेन के साथ वो युद्धविराम कर लें. हालांकि रूस की ओर से जवाब आया था कि उन्हें धमकियों की परवाह नहीं है. किसी तरह पुतिन शांतिवार्ता के लिए तैयार तो हैं लेकिन उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है – हम इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं लेकिन अपने लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेंगे.

बच्चों की चीखों से रो पड़ा बांग्लादेश, सरकार ने घोषित किया राष्ट्रीय शोक, कभी नहीं भूलेगा खौफनाक मंजर

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सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे बांग्लादेशwSX के माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज ने जो मंजर देखा है, वो भूलने वाला नहीं है. जिस तरह एयरफोर्स का ट्रेनिंग जेट गिरने के बाद कैंपस में दिल दहलाने वाली चीखें सुनाई दीं, वो किसी का भी सीना चीर देंगी. यहां ढाका के उत्तरा इलाके में सोमवार को बांग्लादेश वायुसेना का एक ट्रेनिंग जेट मिलस्टोन स्कूल और कॉलेज की इमारत से जा टकराया. टक्कर के तुरंत बाद जेट आग के गोले में तब्दील हो गया और फिर शुरू वो तांडव, जिसकी कल्पना भी दो मिनट पहले किसी को नहीं थी. इस भीषण घटना में 22 लोगों की मौत हो गई, जिसमें ज्यादातर वहां पढ़ने वाले बच्चे थे.

सरकार ने घोषित किया राष्ट्रीय शोक दिवस

ढाका के अखबार डेली स्टार के मुताबिक सरकारी घोषणा में कहा गया है कि मंगलवार को देशभर के सरकारी, अर्ध-सरकारी, स्वायत्त संस्थानों और सभी शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. साथ ही बांग्लादेश के विदेशी मिशनों में भी झंडा आधा झुकाया जाएगा. सरकार ने यह भी बताया कि देशभर के मंदिरों, मस्जिदों, गिरजाघरों और अन्य धार्मिक स्थलों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाएंगी ताकि इस दुखद घटना में घायल व मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दुआ की जा सके. सरकार की ओर से यह शोक दिवस राष्ट्र के सामूहिक दुख और एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है.माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज के कैंपस में बांग्लादेश एयरफोर्स के एक F-7 BGI ट्रेनिंग विमान तब क्रैश हुआ, जब यहां छुट्टी होने वाली थी. पैरेंट्स अपने बच्चों को लेने के लिए गेट पर थे, तभी उन्हें तेज धमाका सुनाई दिया. चश्मदीदों के मुताबिक विमान काफी लो लेवल पर था और वो नारियल के एक पेड़ से टकराने के बाद आग के गोले में बदलकर बिल्डिंग पर गिरा था. चूंकि उस वक्त पढ़ाई चल रही थी, तो पूरा कैंपस छात्रों और टीचर्स से भरा हुआ था, जो इस मंजर को देखने के बाद बेतहाशा भागने लगे.

मैंने अपनी आखों से देखा खौफनाक दृश्य

कॉलेज कंपाउंड में मौजूद एक टीचर ने बताया कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि क्या हो रहा है. अचानक तेज रौशनी और धमाका हुआ, जिसके बाद हर तरफ धुआं और आग थी. बच्चे स्कूल से निकलने के लिए लाइन लगाकर खड़े थे, जब हादसा हुआ. खुद टीचर के हाथ जले हुए हैं और उन्होंने बताया कि छात्रों की कमीजों में आग पकड़ चुकी थी. वहीं एक और चश्मदीद ने बताया कि प्लेन बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर गिरा, जबकि वे दूसरी बिल्डिंग में थे. वहां बच्चे पढ़ाई कर रहे थे और ग्राउंड फ्लोर पर भी क्लासेज चल रही थीं.

जगदीप धनकड़ के बाद अब कौन होगा अगला उपराष्ट्रपति…..रेस में कौन-कौन, जानिए नाम

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जगदीप धनखड़ ने भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस कदम से राजनीतिक हलकों में सभी लोग स्तब्ध हैं. धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है. विपक्ष पहले ही अपने सवालों से सरकार पर हमला बोला है. क्या इसके पीछे कोई और वजह है? कई राजनीतिक एक्सपर्ट इसपर नजर बनाए हुए हैं. क्या इसका इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों से कोई लेना-देना है? बहरहाल कारण जो भी हों… अब सवाल ये उठता है कि भारत का अगला राष्ट्रपति कौन होगा? इस रेस में कौन-कौन से बड़े नेता शामिल हैं? तो चलिए हम कुछ बड़े चेहरों की चर्चा करते हैं.
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर अटकलें तेज हैं, जो भारत के अगले उपराष्ट्रपति बन सकते हैं. इस रेस में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे आग चल रहे हैं. साथ ही कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर की भी नामों पर खूब चर्चा हो रही है. इस रेस में जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह को भी पहली पसंद बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई नाम चल रहे हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि धनखड़ का उत्तराधिकारी कौन होगा?

सोशल मीडिया पर या फिर इंटरनेट पर इस बात की ज़ोरदार चर्चा हो रही है कि नीतीश कुमार अगले उपराष्ट्रपति हो सकते हैं. नीतीश कुमार का नाम आना लाजिमी भी लग रहा है. इस साल बिहार विधानसभा चुनाव है. नीतीश कुमार अभी तक चुनाव में पूरी तरह से एक्टिव नहीं हुए हैं. वहीं, बिहार में भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में अपना चेहरा रखना चाहती है. मौजूदा मुख्यमंत्री को राज्य में चुनावों से पहले उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है. नीतीश के राज्य की राजनीति में रहते, भाजपा को मुख्यमंत्री फेस मिलना मुश्किल है, यह कारण नीतीश को उप-राष्ट्रपति बनने की दावेदारी को मजबूत करती है.

राजनीतिक पत्रकार समीर चौगांवकर ने एक्स पर लिखा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश के अगले उपराष्ट्रपति बनने वाले हैं. बिहार में भाजपा चुनावों के लिए अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करेगी. जदयू का एक उपमुख्यमंत्री होगा. नीतीश के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तो यहां तक अनुमान लगा रहे हैं कि नीतीश को उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है, वहीं धनखड़ को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है.

हरिवंश नारायण सिंह

मीडिया रिपोर्ट्स में जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह को उपराष्ट्रपति पद के लिए “अगली स्पष्ट पसंद” बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस लिस्ट में सिंह का नाम सबसे आगे है. क्योंकि वे वर्तमान में राज्यसभा के उपसभापति हैं. संविधान के नियमों के अनुसार, सिंह आज से, धनखड़ की अनुपस्थिति में नए उपराष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक राज्यसभा के सभापति (उपाध्यक्ष) का कार्यभार संभालेंगे. सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि सिंह के नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के साथ संबंध बहुत शानदार हैं और इसलिए, कई लोगों का मानना है कि एनडीए उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना सकता है.
शशि थरूर
हाल के दिनों के घटनाओं को देखा जाए तो शशि थरूर के बयान और एक्स पर पोस्ट या फिर फिर 2024 लोकसभा के चुनाव में जीत के बाद शशि थरूर ने कहा था कि वह अगले चुनाव में सांसदी का चुनाव नहीं लडेंगे. इससे पहले, मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के अमेरिका दौरे के लिए उनको चुना था. कांग्रेस के साथ थरूर के मतभेद और मोदी सरकार के साथ उनकी नज़दीकियां, खासकर ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार के आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा बनने के बाद, पिछले कुछ दिनों से सुर्खियां बटोर रही हैं.एक वरिष्ठ पत्रकार ने ए्कस पर लिखा, एनडीए के दो प्रमुख केंद्रीय मंत्री और शशि थरूर उपराष्ट्रपति पद के संभावित दावेदार हैं.’

आरिफ मोहम्मद खान

अरिफ मोहम्मद खान इस समय बिहार के राज्यपाल हैं. केरल के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं. वह एक चर्चित और मुखर राजनेता के रूप में जाने जाते हैं. उनकी दिल्ली की यात्रा और राजनीतिक अस्थिर राजनीति में उनकी सक्रियता ने भाजपा और एनडीए गठबंधन के भीतर यह संभावना जगाई है. भाजपा नेतृत्व अपने प्रतिनिधित्व और छवि को देखते हुए ऐसे नामों पर विचार कर सकती है जो संविधान, धर्मनिरपेक्षता और सार्वजनिक संवाद के मामलों में संतुलन बना सकें. अरिफ मोहम्मद खान की छवि एक “लिबरल मुस्लिम” की रही है, जिन्होंने इतिहास में शाहबानो मामले में कांग्रेस से दूरी बनाई और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाई.

‘स्वास्थ्य का कारण नहीं हो सकता है, वजह कुछ और है जो बाहर नहीं आई’

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जयपुर. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर राजस्थान में सियासत तेज हो गई है. इसके पीछे बड़ी वजह है कि धनखड़ राजस्थान के ही रहने वाले हैं. धनखड़ के इस्तीफे को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि आजादी के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ कि उपराष्ट्रपति का इस्तीफा हुआ हो. स्वास्थ्य कारण की बात समझ नहीं आई. पीएम विदेश दौरे पर जा रहे हैं. मानसून सत्र की शुरुआत हुई है. सोमवार को दिनभर हाउस चला. उसके बाद यह सब. ये खबर सुनकर सभी राजस्थानियों को धक्का लगा है.

गहलोत ने कहा कि ये पूरे देश के लिए चौंकाने वाला है. यह दुखद भी है. इसमें जो चर्चाएं चल रही है उसमें सबका मनाना है कि स्वास्थ्य का कारण नहीं हो सकता है. और कोई कारण हो सकता है जो अभी तक बाहर नहीं आया है. धखड़ राजस्थान के रहने वाले हैं. किसान हैतेषी है. वे पहले भी संसद में किसानों की आवाज उठाते रहे हैं. गहलोत ने कहा कि राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों राजस्थान के हैं. मैने 10 दिन पहले ही कहा था कि लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा स्पीकर दबाव में काम कर रहे है.
यह कोई मामूली घटना नहीं है
गहलोत ने कहा कि यह कोई मामूली घटना नहीं है. ये देश में आरएसएस या बीजेपी का कोई मूव तो नहीं है जो वह छिपा रही हो. गहलोत ने कहा कि कुछ दिन पहले धनखड़ ने दो साल बाद 2027 में इस्तीफे की कही थी. असल में क्या हुआ है ये तो RSS जानें. मोहनभागवत जानें या फिर प्रधानमंत्री जानें. गहलोत बोले मेरे उनके परिवार से 50 साल से संबंघ रहे हैं. प्रधानमंत्री को चाहिए कि उनको मनाए उनका इस्तीफा वापस हो ऐसा हमारी पार्टी का स्टैंड है.

50 नहीं 49 हैं… यशवंत वर्मा पर महाभियोग और फिर जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, जानिए क्या हुआ था दिनभर

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. 74 वर्षीय धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. यह इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन शाम में आया. उन्होंने पूरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की. धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति थे. उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद के समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया है. उनके इस्तीफे से उपराष्ट्रपति पद के लिए नया चुनाव छह महीने के भीतर होगा. धनखड़ तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दिया.

पूरे दिन क्या-क्या हुआ

धनखड़ के इस्तीफे से पहले पूरा दिन सामान्य रहा है. राज्यसभा में सोमवार को विपक्ष ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया. इस पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे. यह विपक्ष का चौंकाने वाला कदम था. सत्तापक्ष इससे चौंक गया. क्योंकि लोकसभा में सत्ता पक्ष की ओर से ऐसा प्रस्ताव आया था जिस पर 152 सांसदों के हस्ताक्षर थे.
राज्यसभा के चेयरमैन धनखड़ का प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि 50 से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर की संख्या शर्त पूरी है. उन्होंने कहा कि यदि प्रस्ताव दो अलग-अलग दिनों में पेश हुआ हो तो जो प्रस्ताव पहले पेश हुआ उसी पर विचार होगा. यानी राज्यसभा में पेश विपक्ष का प्रस्ताव प्रभावी होगा.
इस दौरान धनखड़ ने कहा कि सदन को उच्चतम मानक स्थापित करने चाहिए. यदि हम लोगों की उपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे तो इसका मतलब है कि हम मुद्दों को दबा रहे हैं.
दिन में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार पर तीखे वार किए. सभापति ने उनको बोलने का पूरा मौका दिया. उसी वक्त सदन के नेता जेपी नड्डा ने यह कहा कि रिकॉर्ड में कुछ नहीं जा रहा है. जो मैं बोलूंगा वही रिकॉर्ड में जाएगा. हालांकि ऐसी हिदायत देने का अधिकार केवल सभापति के पास है. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रहा है.

धनखड़ से मिले विपक्षी सांसद

शाम चार बजे के लगभग धनखड़ जयपुर दौरे का कार्यक्रम सार्वजनिक हुआ. शाम 5:30 के करीब विपक्षी सांसद उनसे मिलने पहुंचे. शाम 6 बजे के लगभग धनखड़ को संदेश मिला कि नोटिस पर 50 सांसदों के हस्ताक्षर तो हैं लेकिन ये सिर्फ विपक्ष के सांसद हैं. फिर खबर आई कि प्रस्ताव पर 50 नहीं 49 सांसदों के हस्ताक्षर है. एक सांसद ने दो बार हस्ताक्षर किए थे.
उधर, भाजपा ने अपने व सहयोगी दलों के राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने शुरू कर दिए. रक्षा मंत्री राजनाथ के घर के इसको लेकर बैठक हुई.

फिर 9:25 बजे धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया. इसी साल मार्च और जून में धनखड़ ने सीने में दर्द की शिकायत की थी. मार्च में उनको एम्स में भर्ती करवाया गया था.