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केवल रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, निचले स्तर पर जाकर योजनाओें का क्रियान्वयन देखें- डेका

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राज्यपाल रमेन डेका ने आज राजभवन में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (प्रधानमंत्री जनमन योजना) के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल फील्ड रिपोर्ट पर निर्भर न रहें बल्कि निचले स्तर पर जाकर योजनाओं का क्रियान्वयन देंखें।
राज्यपाल डेका ने प्रदेश के पीएम जनमन क्षेत्रों में विभिन्न विभागों के कार्याे की समीक्षा की और संचालित कार्याे की जमीनी हकीकत देखने के लिए इन ग्रामों का दौरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योजना का मूल उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातियों को केन्द्र द्वारा तय सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है। इन वर्गाे तक मूलभूत सुविधाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि देना पहली प्राथमिकता है। जो योजनाएं संचालित है वे तय समय पर पूर्ण हो जाएं। पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में सुविधाएं पहुंचे इसके लिए सही एप्रोच जरूरी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सहयोग और समन्वय से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री डेका ने निर्देश दिया कि सतत् विकास की प्रक्रिया मे पर्यावरण को अनदेखा न किया जाए। जो विकास के कार्य हो रहे है, उसमें पेड़ों को बचाकर रखा जाए। उन्होंने कहा कि पानी को लेकर गंभीर होना है। जमीनी जल स्तर और वर्षा का मापन करे और उसके अनुसार योजनाएं बनाएं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता दे। सौर विद्युतीकरण की प्रगति पर उन्होंने असंतोष जताया और कहा कि इस क्षेत्र में जो चुनौतियां है उसका सभी मिलकर निराकरण करेंगे।

बैठक मे राज्यपाल डेका ने पीएम जनमन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी निर्माण की प्रगति की जानकारी ली और कहा कि आंगनबाड़ीयों में लाइवलीहुड के लिए कार्य होना चाहिए। उन्होंने राज्य में स्व सहायता समूहों के गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में भी नवाचार को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में नवाचार करने वाले स्व सहायता समूहों को राजभवन द्वारा भी पुरूस्कृत किया जाएगा। श्री डेका ने जनजातीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से नवाचार करने पर बल दिया।

अवैध रूप से भंडारित 162 बोरी खाद जप्त

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खरीफ मौसम में जिले के किसानों को उनकी मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न उर्वरकों के अवैध भंडारण, काला बाजारी आदि की जांच एवं नियंत्रण के लिए कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी के निर्देशानुसार राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सतत् रूप से समितियों एवं व्यापारियों के गोदामों का जांच किया जा रहा है। जांच के दौरान पेंड्रा तहसील के अंतर्गत आमाडांड एवं झाबर में अवैध रूप से भंडारित 162 बोरी उर्वरक जप्त कर गोदाम सील किया गया। इसमें ग्राम आमाडांड निवासी शेर बहादुर ठाकुर के घर एवं दुकान से 84 बोरी एनपीके एवं डीएपी उर्वरक और ग्राम झाबर निवासी अभिषेक सोनी के गोदाम से 78 बोरी एनपीके एवं सुपर फास्फेट उर्वरक शामिल है। दोनों व्यापारियों के गोदाम एवं दुकान में अवैध रूप से भंडारित उर्वरक पाए जाने पर जप्त कर गोदाम सील किया गया है। यह कार्रवाई तहसीलदार पेंड्रा अविनाश कुजूर, उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर एवं उर्वरक निरीक्षक हेमंत कश्यप द्वारा की गई।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सरिया में अटल परिसर, तहसील एवं उप-पंजीयक कार्यालय का किया लोकार्पण

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने रविवार को सरिया में नवनिर्मित तहसील कार्यालय, उप-पंजीयक कार्यालय और अटल परिसर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने तहसीलदार कोमल साहू और उप-पंजीयक पूनम सिदार को उनके पदीय दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएं दीं और विधिवत रूप से उन्हें उनके कार्यस्थल की कुर्सी पर आसीन कराया।

लोकार्पण समारोह के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया और सरिया चौक में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत नगर पंचायत कार्यालय परिसर में अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के साथ अटल परिसर का उद्घाटन भी किया गया।

मंगल भवन में आयोजित आमसभा को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों, महिलाओं और आमजन के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार के गठन के 12 दिनों के भीतर किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस दिया गया। पहले वर्ष धान खरीदी का भुगतान लगभग 13 हजार करोड़ रुपये और दूसरे वर्ष 12 हजार करोड़ रुपये किया गया। उन्होंने बताया कि सरिया क्षेत्र में किसानों की मांग पर अपेक्स बैंक की स्थापना की गई है और अब यहां रजिस्ट्री कार्यालय भी आरंभ हो गया है। साथ ही 100 बिस्तरों वाले अस्पताल का निर्माण कार्य भी तेज़ी से प्रगति पर है।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है और वे भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उप-पंजीयक को उन्होंने भ्रष्टाचारमुक्त सेवा देने की सख्त हिदायत दी और सभी जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से जनता की सेवा में ईमानदारी और समर्पण की अपेक्षा जताई।

तहसील एवं उप-पंजीयक कार्यालय भवन का निर्माण छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, रायगढ़ द्वारा 72.12 लाख रुपये की लागत से किया गया है, वहीं अटल परिसर का निर्माण 19.95 लाख रुपये की लागत से पूरा हुआ है।

आईटीबीपी जवान बलजीत सिंह ने पेश की मानवता की मिसाल

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छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित आदिवासी अंचल नारायणपुर में इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक जवान ने असाधारण संवेदनशीलता और मानवता का परिचय देते हुए एक महिला की जान बचाई। यह घटना जिला अस्पताल नारायणपुर की है, जहां गंभीर रूप से बीमार महिला को परिजनों द्वारा भर्ती कराया गया था।

महिला अत्यधिक एनीमिया (एचबी 5.2), उच्च रक्तचाप, अनियंत्रित मधुमेह और एक्यूट किडनी इंजरी जैसी जटिल समस्याओं से ग्रस्त थी। डॉक्टरों ने तत्काल तीन यूनिट रक्त की आवश्यकता बताई, लेकिन महिला का रक्त समूह दुर्लभ होने के कारण परिवार के सभी प्रयास असफल रहे। ऐसे संकट की घड़ी में आईटीबीपी की 41वीं बटालियन में पदस्थ कांस्टेबल (सीटी जीडी) श्री बलजीत सिंह फरिश्ता बनकर सामने आए।

परिजनों के अनुरोध पर बलजीत सिंह ने बिना किसी हिचकिचाहट के तत्क्षण रक्तदान कर दिया। उनका यह साहसिक और मानवीय कदम न केवल एक महिला की जान बचाने में सहायक बना, बल्कि समाज के प्रति सुरक्षाबलों की समर्पण भावना को भी दर्शाता है। मरीज के परिजनों ने भावुक होकर कहा जब हर रास्ता बंद हो गया, तब आईटीबीपी कैंप से मिली यह मदद हमारे लिए जीवनदान साबित हुई। बलजीत सिंह का यह योगदान हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों ने भी जवान के इस कार्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

यह घटना बताती है कि वर्दी केवल सीमा की सुरक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा और सेवा का भी प्रतीक बन चुकी है। बलजीत सिंह का यह सेवा भाव न केवल सुरक्षाबलों की संवेदनशील छवि को सुदृढ़ करता है, बल्कि युवाओं को भी समाज सेवा के प्रति प्रेरित करता है।

सबूतों के अभाव में बरी हुए 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस के सभी 12 आरोपी, 189 लोगों की गई थी जान

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साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को सूबतों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया है. उच्च न्यायालय ने जेल में बंद सभी 12 आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया है.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने विशेष टाडा न्यायालय की ओर से दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को बरी किया है. इनमें से 5 को मृत्युदंड और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया है.

2006 में विशेष टाडा अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाया था
गौरतलब है साल 2006 में मुंबई के लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम धमाके के बाद विशेष टाडा अदालत ने सभी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने 10 बाद फैसले को पलट दिया है. न्यायमूर्ति अनिल किलोर व न्यायमूर्ति एस. चांडक की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों में कोई ठोस आधार नहीं था.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए 12 आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विशेष टाडा हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को सबूतों का अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है. हाईकोर्ट ने न केवल आरोपियों की अपील को स्वीकार किया, बल्कि राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें मृत्युदंड की मांग की गई थी.

मामला 11 जुलाई 2006 का है, जब मुंबई की लोकल ट्रेनों में शाम के समय मात्र 11 मिनट के अंदर सात अलग-अलग जगहों पर सीरियल बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 189 लोगों की जान चली गई थी और 827 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था.

गूगल और मेटा ने ईडी की नोटिस को हवा में उड़ा दिए, पूछताछ के लिए ऑफिस नहीं पहुंचे दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स को बढ़ावा देने के मामले में टेक दिग्गज गूगल और मेटा को नोटिस भेजा था. इन दोनों टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों को 21 जुलाई यानी सोमवार को दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए.

सूत्रों के मुताबिक अब ईडी ने दोनों कंपनियों को दोबारा समन भेजने का फैसला किया है. ईडी की जांच उन ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स पर केंद्रित है, जो कथित तौर पर अवैध जुए और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं. इनमें महादेव बेटिंग ऐप और फेयरप्ले आईपीएल जैसे ऐप्स शामिल हैं.

अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का है आरोप
ईडी का आरोप है कि गूगल और मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर इन अवैध सट्टेबाजी ऐप्स को विज्ञापनों के जरिए बढ़ावा दिया और इनकी पहुंच को व्यापक बनाने में मदद की. जांच में पाया गया कि ये ऐप्स स्किल-बेस्ड गेमिंग के नाम पर अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई, जिसे हवाला चैनलों के माध्यम से छिपाया गया, ताकि जांच से बचा जा सके.

29 मशहूर हस्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई
ईडी ने इन ऐप्स के विज्ञापनों को गूगल और मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर प्रमुखता से प्रदर्शित होने का आरोप लगाया है, जिससे इनके यूजर्स बढ़े. पिछले हफ्ते, ईडी ने इस मामले में 29 मशहूर हस्तियों के खिलाफ कार्रवाई की थी. इनमें अभिनेता विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती, प्रकाश राज, निधि अग्रवाल, प्रणिता सुभाष, मंचू लक्ष्मी और अनन्या नगेला शामिल हैं. इसके अलावा, टीवी कलाकार, होस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे श्रीमुखी, श्यामला, वर्षिणी सौंदर्यराजन, बसंती कृष्णन, शोभा शेट्टी, अमृता चौधरी, नयनी पावनी, नेहा पठान, पांडु, पद्मावती, हर्षा साय और बय्या सनी यादव के नाम भी जांच में हैं. इन पर जंगली रम्मी, ए23, जीतविन, परिमैच और लोटस 365 जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्रचार का आरोप है, जो मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं.

6 साल में ही सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल हुआ ‘सुपर फ्लॉप’ ! जगह-जगह गिर रही छत, लिफ्ट भी खराब

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ग्वालियर अंचल के सबसे बड़े जेएएच अस्पताल परिसर में स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल 6 सालों में ही ‘सुपर फ्लॉप’ हो गया है. 2018 में 164 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए इस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में अब मरीज से लेकर स्टाफ सब डरे-सहमे हुए हैं. इसका कारण हैं यहां आये दिन वार्ड में फॉल्स सीलिंग का गिरना… इतना ही अस्पताल में लगाए गए लिफ्ट भी अब खराब हो चुकी है.

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल जर्जर हालत में
बीस दिन में चार जगह की फॉल्स सीलिंग टूटकर गिर चुकी हैं. इसका भवन जर्जर होने की स्थिति में हैं. इस अस्पताल में 6 में से 4 लिफ्ट बंद पड़ी हुई है. दो में से एक लिफ्ट मरीजों के लिए है तो एक स्टाफ के लिए. इतना ही नहीं इसमें भी कहीं-कहीं पानी टपक रहा हैं.

सालों बाद भी कोई सुधार नहीं
साल 2018 में 164 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कोरोना के समय सितंबर 2019 में ओपीडी शुरू की गई थी. उस वक्त तत्कालीन डीन डॉ. भरत जैन और उसके बाद डीन डॉ. एसएन आयंगर ने एचएससीसी के अधिकारियों से कहा था कि जो कमियां हैं उसे दूर किया जाए, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो सका.

20 दिन में चार जगह टूटकर गिरी फॉल्स सीलिंग
कुछ दिन पहले रात में सर्जिकल गेस्ट्रो एंट्रोलॉजी वार्ड में एक बार फिर फॉल्स सीलिंग गिर गई. इस बार फॉल्स सीलिंग, जहां गिरी है वहां स्टाफ बैठता है. गनीमत रही कि जब यह फॉल्स सीलिंग गिरी थी, तब वहां कोई मौजूद नहीं था. इसी वार्ड में बीते दिन देर रात में फॉल्स सीलिंग गिर गई. इतना ही नहीं सुपर स्पेशलिटी अधीक्षक कार्यालय के बाहर भी बारिश का पानी टपक रहा है.

बीजापुर में नक्सलियों की कायराना करतूत, धारदार हथियार से दो ग्रामीणों को मार डाला

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नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बुरी खबर है. नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन से खार खाए नक्सलियों द्वारा रविवार देर रात दो ग्रामीणों की धारदार से हत्या करने का मामला सामने आया है. नक्सलियों के हाथों मारे गए दोनों ग्रामीणों की पहचान कर ली गई है.

नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य की संयुक्त कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की हालत खराब है, जिसकी खीज नक्सली भोले-भाले ग्रामीणों की हत्या से निकालते रहते हैं. बीजापुर जिले के छुटवाई गांव में नक्सलियों ने देर रात दो ग्रामीणों को धारदार हथियारों से मार डाला.

4-5 अज्ञात माओवादियों ने धारदार हथियार से दो ग्रामीणों की हत्या
नक्सलियों के कायरना हरकत से मारे गए दोनों ग्रामीणों की पहचान क्रमशः 55 वर्षीय कवासी जोगा और 50 वर्षीय मंगलू कुरसम के रूप में हुई है. दोनों ग्रामीणों को नक्सलियों ने तर्रेम थाना क्षेत्र के छुटवाई गांव में देर रात धारदार हथियार से निर्ममता से हत्या को अंजाम दिया. बताया जाता है इस हत्याकांड में 4-5 अज्ञात माओवादी शामिल थे.

नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई से लकान हैं नक्सली
गौरतलब है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 में नक्सलवाद को जड़ खत्म करने की तारीख मुकर्रर की है. सुरक्षा बल लगातार नक्सलियों की धरपकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन में चला रही है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नक्सल संगठन हलकान है, जिससे नक्सली राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्म-समर्पण कर रहे हैं.

कलेक्ट्रेट कार्यालय में पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का किया प्रयास, सुरक्षा कर्मियों ने बचाया तो बताई जान देने की वजह

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धमतरी जिले में एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पीड़ित युवक ने आवास नहीं मिलने से नाराज होकर कलेक्ट्रेट के सामने पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया. बताया जा रहा है कि डोमा निवासी पीड़ित युवक करण सोनकर जिला प्रशासन को 6 से 7 बार आवास के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन युवक के आवास को लेकर प्रशासन ने अब तक कोई भी विचार नहीं किया.

इससे परेशान होकर युवक ने आत्मघाती कदम उठा लिया, ताकि उसकी परेशानी सुनी जा सके. वहीं, पीड़ित युवक ने बताया कि वह आवास नहीं मिलने के कारण काफी ज्यादा परेशान हो चुका है.

गांव के सरपंच से हुआ परेशान
गांव की सरपंच गुंजा साहू के व्यवहार से भी वह काफी ज्यादा परेशान हो चुका है और आवास के लिए दिए हुए आवेदन में पीड़ित युवक का नाम भी कट गया है. इसी से आहत होकर वह आत्मदाह करने का मन बनाकर युवक कलेक्ट्रेट जन दर्शन में पहुंच गया और आत्महत्या का प्रयास किया.

पुलिस पूछताछ कर रही
कलेक्ट्रेट के सामने मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने युवक को देख लिया और कार्यालय के सामने एक बड़ा हादसा होने से टल गया. वहीं, युवक को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़कर उसे नहलाया और धमतरी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया. वहीं, अब रुद्री पुलिस युवक को पड़कर पूछताछ कर रही है.

भूपेश बघेल ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 8 मई के फैसले को चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल के खिलाफ दाखिल चुनाव याचिका पर सुनवाई जारी रखने का फैसला दिया था. भूपेश बघेल ने अंतरिम राहत के तौर पर उनके खिलाफ हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर एक पक्षीय रोक लगाने भी की मांग की है.

बता दें कि भूपेश बघेल पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए भाजपा सांसद ने याचिका दायर की है, जिसमें उनका चुनाव रद्द करने की मांग की गई है. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई. वहीं, वकील समीर सोंढी के माध्यम से दाखिल याचिका में भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर बेंच के फैसले को रद्द करने की मांग की है.

दुर्ग से भाजपा सांसद चुनाव रद्द करने की मांग की
दुर्ग से बीजेपी सांसद विजय बघेल ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल का चुनाव रद करने के लिए याचिका दायर की थी.
विजय बघेल का आरोप है कि विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है. 8 मई को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से झटका भी लग गया था. तब कोर्ट ने कहा था कि पूर्व सीएम व पाटन विधानसभा सीट से विधायक भूपेश बघेल के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी. कोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका को खारिज कर दिया था

मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका में पर्याप्त सामग्री मौजूद है और इसे इस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता.