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चाहे बंद कमरे में मिले या लॉबी में… उद्धव ठाकरे के सुर बदलने के पीछे की इनसाइड स्टोरी

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महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक अलग ही सुगबुगाहट चल रही है. इसकी वजह है उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी)… हाल ही में आदित्य ठाकरे की मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में सीक्रेट मुलाकात की खबरें सामने आईं. कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ यह मुलाकात लगभग एक घंटे चली. हालांकि, दोनों नेताओं ने किसी भी मीटिंग से इनकार किया है.

सीएम ऑफिस के अनुसार, मुख्यमंत्री होटल में किसी अन्य कार्यक्रम के लिए आए थे, जबकि आदित्य अपने दोस्तों के साथ डिनर के लिए मौजूद थे. हालांकि अगर हाल की राजनीतिक गतिविधियों पर गौर करें तो यह सिर्फ संयोग नहीं लगता. तीन दिन पहले ही यानी 17 जुलाई को खुद उद्धव ठाकरे और फडणवीस की मुलाकात भी हुई थी. यह मुलाकात विधान परिषद अध्यक्ष राम शिंदे के कक्ष में हुई थी, जहां उद्धव के बेटे और वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे.

मुलाकात पर क्या बोले आदित्य ठाकरे?

लगभग आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में उद्धव ने सीएम फडणवीस को एक किताब भेंट की, जिसमें ‘हिंदी की सख्ती क्यों, तीन भाषा जरूरी क्यों’ लिखा था? आदित्य ने बाद में कहा कि यह एक कम्पाइलेशन था, जिसमें कई पत्रकारों और संपादकों ने तीन-भाषा नीति पर अपनी राय दी थी.
सार्वजनिक रूप से तो ये भेंट ‘किताब भेंट’ तक सीमित बताई गई, लेकिन सियासी गलियारों में इसे महज ‘औपचारिक मुलाकात’ मानने को कोई तैयार नहीं. इन मुलाकातों के पीछे कुछ और ही कहानी मानी जा रही है.
16 जुलाई को विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे के विदाई समारोह के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने मजाकिया लहजे में उद्धव ठाकरे को सत्ता पक्ष में आने का न्योता दिया था. उन्होंने कहा था कि बीजेपी उनके साथ विपक्ष में शामिल होने की संभावना नहीं रखती, लेकिन वे सत्ता पक्ष में आ सकते हैं. इस बयान के 24 घंटे के अंदर ही उद्धव की फडणवीस से मुलाकात हुई, जो करीब 20 मिनट चली.

उद्धव ठाकरे का MVA से मोहभंग क्यों?

इस सवाल का जवाब शनिवार को ‘सामना’ में छपे उनके इंटरव्यू में मिलता है. उन्होंने स्वीकार किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान एमवीए में सीट बंटवारे को लेकर गंभीर गलतियां की गईं. ठाकरे ने कहा कि यदि वे इन गलतियों को दोहराना चाहते हैं, तो एक साथ आने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने बताया कि सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी आखिरी दिन तक चलती रही, और इसका गलत संदेश जनता तक पहुंचा. ठाकरे के मुताबिक, लोकसभा चुनावों के दौरान तीनों पार्टियों- शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट)- ने एकजुटता दिखाई थी, लेकिन विधानसभा चुनावों में ‘हम’ की भावना ‘मैं’ में बदल गई.
उद्धव का यह बयान भी संकेत देता है कि MVA को लेकर अब ठाकरे परिवार के भीतर भी असंतोष है. और शायद यही वजह है कि देवेंद्र फडणवीस के साथ बैकचैनल बातचीत की जा रही है.

शिवसेना के पास कितने विधायक?

महाराष्ट्र विधानसभा की सीटों पर नजर डालें तो यहां 288 सदस्यीय सदन में बीजेपी के पास सबसे अधिक 132 विधायक हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 57, अजित पवार की एनसीपी के पास 41 विधायक है. वहीं विपक्षी एमवीए गठबंधन पर नजर डालें तो इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 20 विधायक, कांग्रेस के पास 16, जबकि शरद पवार की एनसीपी के पास महज 10 विधायक हैं.

NDA में आते हैं उद्धव तो क्या होगा?

अगर यह खेमा एनडीए में शामिल होता है तो महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की स्थिति और मजबूत हो जाएगी. उधर माना जा रहा है कि ठाकरे गुट को केंद्र में मंत्रालय या महाराष्ट्र में अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे उनकी वापसी की राह आसान हो सकती है.
2019 में शिवसेना और बीजेपी ने साथ मिलकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ा था और दोनों मिलकर लगभग 160+ सीटें जीतकर बहुमत लाए थे. चुनाव नतीजों के बाद उद्धव ने दावा किया था कि बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद 2.5-2.5 साल के लिए शेयर करने का वादा किया था. लेकिन फडणवीस और बीजेपी ने इस दावे को खारिज कर दिया, जिसके बाद शिवसेना ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया और महाविकास आघाड़ी (MVA) के रूप में कांग्रेस और NCP के साथ सरकार बनाई.
हालांकि यह महाविकास आघाड़ी सरकार ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाई थी और शिवसेना में ही दोफाड़ हो गया. इसके बाद फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर सरकार बनाई. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि शिवसेना के दोनों गुटों से बीजेपी सामंजस्य कैसे बैठाएगी?

एकनाथ शिंदे को कैसे करेगी सेट?

अब अगर उद्धव दोबारा बीजेपी के करीब आते हैं, तो शिंदे गुट के साथ सामंजस्य बैठाना चुनौतीपूर्ण होगा. इसकी एक बानगी शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा तक में देखने को मिली, जहां एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को गिरगिट तक कह दिया. उन्होंने बीजेपी से गठबंधन तोड़ने और फिर कांग्रेस से हाथ मिलाने की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र ने कभी गिरगिट को इतनी तेजी से रंग बदलते नहीं देखा. वह उन लोगों के साथ चले गए जिन्हें वह कभी नीच समझते थे.’
ऐसे में माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे सत्ताधारी गठबंधन में वैसे तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी को शामिल करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होंगे. हालांकि BJP को इस तरह का राजनीतिक संतुलन साधने का अच्छा अनुभव है. वैसे भी यह पुरानी कहावत है कि कि राजनीति में दरवाज़े कभी पूरी तरह बंद नहीं होते. और शायद यही वजह है कि महाराष्ट्र में अब महाविकास से ज्यादा महासमीकरण की चर्चा तेज हो गई है.

बॉर्डर के बाद अब संसद में ‘जंग’, मानसून सत्र में क्या होगा विपक्ष का एजेंडा, ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार कितनी तैयार

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21 जुलाई यानी आज से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में सिर्फ बिल पास नहीं होंगे, इस बार बॉर्डर से लेकर बिहार तक पर सियासी जंग होगी. जहां सरकार दर्जनों महत्त्वपूर्ण बिल लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष पहले से तलवारें खींच कर तैयार है. खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर, एयर इंडिया हादसा और बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बवाल होने के आसान साफ साफ दिख रहे हैं.

सरकार के एजेंडे में क्या है खास?

इनकम टैक्‍स बिल 2025: इसे 13 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था और भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था. न्यूज18 ने बताया था कि इसे इसी सत्र में संसद में पारित होने के लिए लाए जाने की उम्मीद है.
मणिपुर GST (संशोधन) बिल: इसका उद्देश्य राज्य जीएसटी कानून को केंद्रीय कानून के अनुरूप बनाना है.
जन विश्वास विधेयक: व्यापार सुगमता और अनुपालन सुधार को लेकर अहम पहल.
IIM संशोधन बिल: IIM गुवाहाटी को कानूनी मान्यता दिलाने का रास्ता खोलेगा।
कराधान कानूनों में संशोधन: कर नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम।
भू-धरोहर संरक्षण विधेयक: भारत के भूवैज्ञानिक धरोहरों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
खनिज एवं खनन संशोधन बिल: दुर्लभ और गहरे खनिजों की खोज को विनियमित करेगा।
राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक: खेल निकायों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल।
राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन: WADA के वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत के कानून।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन विस्तार: 13 फरवरी से लागू शासन के विस्तार पर वोटिंग संभव।

विपक्ष के तीन बड़े सवाल

INDIA अलायंस को एकजुट……संसद सत्र से पहले हुई बैठक में सीट बंटवारे और रणनीति पर बात तो हुई

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संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही विपक्षी INDIA अलायंस ने सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की, लेकिन रणनीति कम और रस्साकशी ज्‍यादा दिखी. हर दल की अलग लाइन, हर नेता की अलग सोच. उद्धव ठाकरे ने तो साफ साफ गठबंधन की चुनावी नाकामी पर सवाल उठा दिए. कह द‍िया ‘एक बार फिर वही गलती हुई तो साथ आने का कोई फायदा नहीं’. ममता, अखिलेश और तेजस्वी कांग्रेस को घेरते रहे हैं. वजह साफ है बीजेपी भले प्रतिद्वंद्वी हो, असली ‘खतरा’ कांग्रेस बन रही है. उधर, राहुल गांधी भी पीछे नहीं रहे. केरल की धरती से उन्‍होंने कह द‍िया, वाम दल आरएसएस जैसे हैं. वही वाम दल जो INDIA अलायंस में पार्टनर है. यही वजह है कि INDIA अलायंस को साथ रखना अब ‘तराजू में मेंढक तौलने’ जैसा बन गया है.

INDIA अलायंस में शामिल हर पार्टी जानती है क‍ि बीजेपी एक कॉमन दुश्मन है, लेकिन वे कांग्रेस को भी अपने-अपने राज्यों में सबसे बड़ा खतरा मानते हैं. ममता बनर्जी बंगाल में कांग्रेस को जगह नहीं देना चाहतीं. अखिलेश यादव को यूपी में कांग्रेस के वोट शेयर का असर अखरता है. तेजस्वी यादव को लगता है कि अगर कांग्रेस ने बिहार में ज्यादा दखल दिया, तो आरजेडी की पकड़ ढीली पड़ेगी. उधर, कांग्रेस की स्थिति भी सामूहिक नेतृत्व वाली नहीं दिखती. वह एक ओर गठबंधन को साधने की कोशिश कर रही है, लेकिन जैसे ही एक राज्य में किसी दल के साथ डील करती है, दूसरे राज्य में नया झगड़ा खड़ा हो जाता है. इसीलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस जहां समेटने जाती है, वहां से नया रायता फैल जाता है.
क्‍यों हो रही परेशानी
इस पूरे भ्रम और असमंजस का सीधा लाभ बीजेपी को मिलता है. वह विपक्ष में मार-काट को भुनाने में जुटी है. बीजेपी को पता है कि INDIA अलायंस का हर नेता कांग्रेस से डरता है क्योंकि कांग्रेस अगर राष्ट्रीय स्तर पर फिर से मजबूत हो गई, तो क्षेत्रीय दलों का स्पेस खत्म हो जाएगा. यही वजह है कि INDIA अलायंस को एकसाथ लेकर चलना ‘तराजू में मेंढक तौलने’ जैसा बन गया है. कोई एक तरफ कूदता है, तो दूसरा दूसरे पलड़े से उतर जाता है. ऊपर से कांग्रेस की दुविधा क‍ि वह लीडरश‍िप को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती. कोई नया नेता नहीं देना चाहती, जो इंडिया अलायंस को परेशान करता है.
महाराष्‍ट्र
उद्धव ठाकरे ने INDIA अलायंस की रणनीति पर सीधा सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा, जब लोकसभा चुनाव हुए, तब हमारे पास साझा चुनाव च‍िह्न नहीं था, पर कैंड‍िडेट तय किए गए. विधानसभा चुनाव में चिन्ह तय था, पर सीटों और उम्मीदवारों पर कोई स्पष्टता नहीं थी. यह गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए, वरना साथ आने का मतलब ही नहीं. इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि अंदरखाने जो नाराजगी पल रही थी, वह अब मंच पर आ चुकी है.
पश्च‍िम बंगाल
बंगाल में ममता बनर्जी को डर है कि अगर कांग्रेस को छूट दी गई तो मुस्लिम वोटों में बंटवारा होगा और बीजेपी को लाभ मिलेगा.

उत्‍तर प्रदेश
यूपी में अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन तो चाहते हैं, लेकिन सीमित सीटों पर. कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव से समाजवादी पार्टी को खतरा महसूस होता है. क्‍योंक‍ि दोनों का वोट बैंक लगभग एक है.
बिहार
बिहार में तेजस्वी यादव की आरजेडी ने शुरू से ही कांग्रेस को जूनियर पार्टनर की भूमिका में रखा है, लेकिन अब कांग्रेस यहां भी दखल बढ़ाना चाह रही है. यह तेजस्‍वी को परेशान करता है.

कांग्रेस की असहज स्थिति
कांग्रेस खुद भी इस स्थिति से संतुलन नहीं बना पा रही. अगर वह किसी राज्य में गठबंधन के लिए झुकती है, तो दूसरे राज्य में उसी का खामियाजा भुगतना पड़ता है. ममता बनर्जी जैसी नेता कई बार यह इशारा कर चुकी हैं कि उन्हें कांग्रेस पर भरोसा नहीं है.

बाल-बाल बची एयर इंडिया की फ्लाइट, बड़ा हादसा टला, रनवे पर फिसला विमान और फिर…

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एयर इंडिया की एक और फ्लाइट भीषण हादसे का शिकार होते-होते बची. भारी बारिश की वजह से फ्लाइट रनवे पर फिसल गई. हालांकि, पायलट की सूझबूझ से ये बड़ा हादसा टल गया, उन्होंने बिना पैनिक हुए फ्लाइट को कंट्रोल कर लिया.

पीएम मोदी की मालदीव यात्रा में मुईज्जू को मिलेगा भारत का तोहफा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25-26 जुलाई की मालदीव यात्रा भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. इस यात्रा के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुईज्जू को भारत की ओर से एक बड़ा तोहफा मिलने की संभावना है. ये तोहफा है- नई लाइन ऑफ क्रेडिट यानी LoC. यह कदम मालदीव की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए भारत की रणनीतिक और आर्थिक सहायता को दर्शाता है.

लेकिन सवाल यह है कि आखिर लाइन ऑफ क्रेडिट क्या है और यह दोनों देशों के रिश्तों को कैसे प्रभावित करेगा? लाइन ऑफ क्रेडिट एक प्रकार का वित्तीय ऋण सुविधा है, जिसमें भारत सरकार किसी देश को बिना शर्त के एक निश्चित राशि तक ऋण देती है, जिसका उपयोग वह अपनी विकास परियोजनाओं या आर्थिक संकट से निपटने के लिए कर सकता है. मालदीव हाल के वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. उसके लिए यह कदम राहत भरा हो सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस LoC को मोदी की यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया जा सकता है. मोदी मालदीव के राष्ट्रीय दिवस 26 जुलाई के अवसर पर वहां का दौरा कर रहे होंगे. इस मौके पर वह भारत द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा और क्षमता निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे.
मालदीव की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, विशेष रूप से पर्यटन और व्यापार में कमी के कारण. भारत ने पहले भी मालदीव को LoC के जरिए सहायता दी है, जिसमें 56 परियोजनाओं को मंजूरी मिली. इनमें से 14 पूरी हो चुकी हैं. अब नई LoC इस साझेदारी को और मजबूत करेगी. लेकिन यह तोहफा केवल एकतरफा उदारता नहीं है.

क्यों मालदीव को भारत दे रहा LoC

भारत अपनी सामरिक रुचियों को देखते हुए हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखना चाहता है, जहां चीन पहले से ही अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है. मालदीव का भौगोलिक स्थान इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बनाता है और भारत इसे अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों को गहराने के लिए एक अवसर के रूप में देख रहा है. हालांकि, इस कदम की आलोचना भी हो सकती है. कुछ विश्लेषक इसे भारत की ‘डॉलर डिप्लोमेसी’ के रूप में देखते हैं, जो मालदीव को आर्थिक रूप से भारत पर निर्भर बनाएगी. साथ ही, मालदीव में कुछ राजनीतिक धड़ों ने पहले भारत के बढ़ते प्रभाव को लेकर आपत्ति जताई थी, खासकर ‘इंडिया आउट’ अभियान के दौरान. मुईज्जू की सरकार भी पहले भारत-विरोधी रुख के लिए जानी जाती थी. लेकिन उसने भी हाल के महीनों में संबंध सुधारने की कोशिश की है. यह LoC उस दिशा में एक कदम हो सकता है.

क्या यह रिश्ता टिकाऊ होगा

लेकिन क्या यह रिश्ता टिकाऊ होगा? यह भविष्य के घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा. मोदी की यात्रा का समय भी रणनीतिक है. यह उनकी तीसरी पारी का पहला मालदीव दौरा है और यह भारत की क्षेत्रीय नीति को मजबूत करने का संकेत देता है. मालदीव के साथ साझा हितों- जैसे समुद्री सुरक्षा, व्यापार और डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI पर बातचीत होने की उम्मीद है.
इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर में मुईज्जू की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ की रूपरेखा बनाई थी, जिसे इस यात्रा में आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, भारत को सावधानी बरतने की जरूरत है. चीन का मालदीव में निवेश और प्रभाव पहले से मौजूद है और कोई भी गलत कदम भारत की स्थिति को कमजोर कर सकता है.

खेल युवाओं में साहस, शक्ति और दृढ़ संकल्प का विकास करते हैं : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज देर शाम राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित वाको इंडिया राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 2025 के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर देश के 28 राज्यों से आए लगभग 1200 प्रतिभागियों और 300 कोचों का भगवान श्रीराम की ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरती छत्तीसगढ़ में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि यह राज्य का सौभाग्य है कि वाको इंडिया राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग फेडरेशन ने इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ को चुना।

मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों को छत्तीसगढ़ राज्य की विशेषताओं से अवगत कराते हुए बताया कि यह देश के हृदयस्थल पर स्थित एक छोटा, परंतु अत्यंत समृद्ध प्रदेश है, जिसका 44 प्रतिशत भूभाग सुरम्य वनों से आच्छादित है। यहाँ 5,000 वर्ग किलोमीटर में फैला सघन अबूझमाड़ क्षेत्र है, जहाँ सूर्य की किरणें तक नहीं पहुँचतीं। राज्य में मनोरम जलप्रपात, सुंदर गुफाएँ, समृद्ध खनिज संपदा और सांस्कृतिक विविधता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने देशभर से आए खिलाड़ियों को आग्रहपूर्वक छत्तीसगढ़ घूमने का निमंत्रण भी दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किक बॉक्सिंग जैसे खेल युवाओं में साहस, शक्ति और दृढ़ संकल्प का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि “यह आयोजन निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर और अधिक सशक्त स्थान प्रदान करेगा।”

मुख्यमंत्री ने किक बॉक्सिंग एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ को इस भव्य आयोजन के लिए साधुवाद देते हुए कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग हैं, जो केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण का भी पाठ सिखाते हैं।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे मेहनत, लगन और जुनून के साथ अपने लक्ष्यों की दिशा में निरंतर अग्रसर रहें। मुख्यमंत्री ने कहा, “जीत और हार जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन असली लक्ष्य अपनी क्षमता को पहचानना और उसे निखारना होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित खेलो इंडिया कार्यक्रम की सराहना करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों को इस योजना से जोड़ा गया है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के खिलाड़ियों को समान अवसर प्राप्त हो सकें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 1 से 3 करोड़ रुपये तक की पुरस्कार राशि देने की योजना सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इस योजना के तहत खेल मैदानों का उन्नयन, उच्च स्तरीय उपकरणों की व्यवस्था, खेल क्लबों को आर्थिक सहायता तथा पारंपरिक खेलों के आयोजन सुनिश्चित किए गए हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को प्रतिस्पर्धा में भागीदारी के लिए शुभकामनाएँ दीं और आशा जताई कि आगामी वर्षों में छत्तीसगढ़ देश में खेलों के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि किक बॉक्सिंग जैसे खेल विशेष रूप से बालिकाओं की आत्मरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी स्कूली छात्र-छात्राओं से पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में खेलों को हर स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में खेल अकादमियों और आधारभूत संरचनाओं का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है।

महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर वाको इंडिया राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग फेडरेशन के अध्यक्ष श्री संतोष अग्रवाल, छत्तीसगढ़ किक बॉक्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री छगन मुंदड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, ऑब्जर्वर श्रीमती रेणु पारीख, श्री मुरली शर्मा, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं खेलप्रेमीजन उपस्थित रहे।

प्रतियोगिता में 22 स्वर्ण, 18 रजत एवं 26 कांस्य पदकों के साथ पंजाब ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। 21 स्वर्ण, 16 रजत एवं 29 कांस्य पदकों के साथ महाराष्ट्र द्वितीय और 12 स्वर्ण, 14 रजत एवं 15 कांस्य पदकों के साथ तमिलनाडु तृतीय स्थान पर रहा। इस चैम्पियनशिप में छत्तीसगढ़ ने 8 स्वर्ण, 13 रजत और 37 कांस्य पदक प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर छठवाँ स्थान अर्जित किया, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है। इसके साथ ही असम रायफल्स को सर्वश्रेष्ठ अनुशासित टीम के रूप में सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ को स्किल हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा – ‘समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़’

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि “हम विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़” के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर कार्यरत हैं, और इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। मुख्यमंत्री श्री साय आज भिलाई स्थित रूंगटा यूनिवर्सिटी में आयोजित विश्व युवा कौशल उत्सव 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जाएगा। गोल्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने 8183 प्रतिभागियों को एक सप्ताह के भीतर दिए गए प्रशिक्षण को प्रमाणित किया है और संस्थान को इसका प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। उन्होंने रूंगटा यूनिवर्सिटी प्रबंधन को इस नि:शुल्क और अभूतपूर्व आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर एवं दक्ष बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भिलाई को इस्पात नगरी के साथ-साथ मिनी इंडिया भी कहा जाता है और शिक्षा के क्षेत्र में रूंगटा यूनिवर्सिटी का योगदान अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने विगत 25 वर्षों में प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और इस वर्ष को हम राज्य की रजत जयंती के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार हुआ और वर्तमान में राज्य में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, सिपेट, एम्स, और लॉ यूनिवर्सिटी जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में राज्य सरकार ने समान रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। बीते डेढ़ वर्षों में सुशासन की स्थापना के लिए ठोस प्रयास हुए हैं। शासन को पारदर्शी बनाने हेतु अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी। जब यह मिशन प्रारंभ हुआ था, भारत विश्व की 10वीं अर्थव्यवस्था था — और आज, केवल एक दशक में भारत चौथे स्थान पर पहुँच चुका है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मेगा प्लेसमेंट कैंप्स के माध्यम से नियोक्ताओं और प्रशिक्षित युवाओं के बीच संतुलन स्थापित हुआ है। यह कार्य डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि यह योजना युवाओं के लिए अनुभव के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान कर रही है, जिससे उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में युवाओं के लिए विशेष अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। एक हजार से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों को अनुदान देने का प्रावधान है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त रियायतें दी गई हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर के सभी 32 विकासखंडों में स्किल इंडिया मिशन की गतिविधियाँ आरंभ हो चुकी हैं।उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को प्रोत्साहन देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को क्लीयरेंस की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया गया है। इससे राज्य में निवेश को गति मिली है। अब तक 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके अनुमोदन की प्रक्रिया प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हाल ही में नवा रायपुर में फार्मास्युटिकल कंपनी का शुभारंभ हुआ है। यह दो कारणों से संभव हुआ—एक, नवा रायपुर को फार्मा हब के रूप में विकसित किया गया है, और दूसरा, फार्मा उद्योग के लिए नई नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर यूनिट का शिलान्यास हाल ही में किया गया है। इसके पीछे एआई और आईटी क्षेत्र में निवेश हेतु विशेष अनुदान का योगदान है।छत्तीसगढ़ सरकार ने देश का पहला एआई डाटा सेंटर पार्क भी नवा रायपुर में स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने निजी संस्थानों, विशेषकर रूंगटा यूनिवर्सिटी की सराहना करते हुए कहा कि वे राज्य सरकार के प्रयासों में पूर्ण सहभागी बनकर छत्तीसगढ़ को स्किल हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों और यूनिवर्सिटी परिवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी।

उल्लेखनीय है कि भिलाई स्थित रूंगटा यूनिवर्सिटी में आयोजित विश्व युवा कौशल उत्सव 2025 के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ को स्किल हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया। कार्यक्रम में 8183 युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। 25 चयनित प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। गूगल, आईबीएम और इंटरनेशनल काउंसिल के साथ संयुक्त डिग्री कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। हार्वर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा एक सप्ताह में सबसे अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने के कीर्तिमान की पुष्टि की गई।

इस अवसर पर सांसद श्री विजय बघेल और विधायक श्री रिकेश सेन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और इस ऐतिहासिक आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।

रूंगटा यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री संतोष रूंगटा ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी और कहा कि संस्थान राज्य सरकार के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ को ग्लोबल स्किल हब बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

इस अवसर पर संभागायुक्त श्री एस.एन. राठौर, आईजी श्री आर.जी. गर्ग, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, रूंगटा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प में छत्तीसगढ़ की भूमिका महत्वपूर्ण— मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

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शिक्षा ही वह साधन है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकता है और अपने सपनों को साकार कर सकता है। शिक्षा से ही रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” हमारी सरकार का मूलमंत्र है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प में छत्तीसगढ़ की महत्त्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित है। हमने राष्ट्रीय विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ विजन डॉक्युमेंट भी जारी किया है, और उसके प्रत्येक बिंदु को धरातल पर उतारने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर के सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित रजक युवा गाडगे सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने संत गाडगे महाराज की पूजा-अर्चना कर राज्य स्तरीय गाडगे सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने सम्मेलन में रजक समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं, प्रबुद्धजनों एवं समाजसेवियों को शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि रजक समाज का सामाजिक समरसता और सेवा भाव हमेशा से अनुकरणीय रहा है।छत्तीसगढ़ के प्रत्येक गांव में इस समाज की उपस्थिति है, और शादी-विवाह, छठ्ठी सहित अन्य सनातन परंपराएं इनके सहयोग के बिना पूर्ण नहीं होतीं। इनके पुश्तैनी व्यवसाय के सशक्तिकरण हेतु राज्य सरकार ने रजककार विकास बोर्ड का गठन किया है, जिसके माध्यम से उन्हें किफायती दर पर ऋण सुविधा प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को उन्नति के नए आयाम तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और सुशासन की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। आज अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश समाप्त हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रत्येक गारंटी को वचनबद्धता के साथ पूर्ण कर रही है। हमने 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख महिलाओं को प्रति माह एक-एक हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। तेन्दूपत्ता की खरीदी 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से महिलाओं, अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं दिव्यांगजनों को रोजगार एवं उद्योग स्थापित करने हेतु विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। नई उद्योग नीति से आकर्षित होकर बीते छह से आठ महीनों में लगभग साढ़े छह लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं। डेढ़ वर्षों में लगभग 10 हजार सरकारी नौकरियाँ प्रदान की गई हैं। पाँच हजार शिक्षकों की भर्ती हेतु शीघ्र ही विज्ञापन जारी किया जाएगा। साथ ही, स्वरोजगार के लिए भी सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से हमें अलग छत्तीसगढ़ राज्य मिला। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के 15 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से राज्य को भुखमरी की समस्या से मुक्ति मिली और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हुआ।

सम्मेलन की अध्यक्षता रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक ने की। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती रजनी रजक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री धर्मजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सवन्नी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के विशेष प्रयास से कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 56 पदों की मिली स्वीकृति

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जशपुर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पत्थलगांव विकास खंड के कोतबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नयन करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माण करने के लिए 4 करोड़ 37 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति भी दे दी है।

कोतबा में लोगों तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 56 पद स्वीकृत किए हैं। इनमें अस्पताल अधीक्षक, सर्जन, मेडिकल विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग सिस्टर, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, स्टाप नर्स, लेखापाल, फार्मासिस्ट, सहायक ग्रेड 3, ड्रेसर, वार्ड बॉय, आया और भृतय के पद स्वीकृत किया गया है। शीघ्र ही उनकी पदस्थापना की जाएगी जिसमें लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराया जा सके।

मुख्यमंत्री के विशेष प्रयास से कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 56 पदों की मिली स्वीकृति

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जशपुर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पत्थलगांव विकास खंड के कोतबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नयन करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माण करने के लिए 4 करोड़ 37 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति भी दे दी है।

कोतबा में लोगों तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 56 पद स्वीकृत किए हैं। इनमें अस्पताल अधीक्षक, सर्जन, मेडिकल विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग सिस्टर, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, स्टाप नर्स, लेखापाल, फार्मासिस्ट, सहायक ग्रेड 3, ड्रेसर, वार्ड बॉय, आया और भृतय के पद स्वीकृत किया गया है। शीघ्र ही उनकी पदस्थापना की जाएगी जिसमें लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराया जा सके।