तेल के खेल में घिरा रूस, यूरोपीय यूनियन के बैन से भारत का लाभ… राष्ट्रपति पुतिन,प्रधानमंत्री मोदी मुलाकात पर निगाहें टिकी हुई हैं.741
यूरोप ने रूस के तेल पर क्यों लगाया बैन?
भारत बना रूस का ‘ऊर्जा साथी’
कब हो सकती है मोदी-पुतिन की मुलाकात?
इस मुलाकात के मायने क्या?
बेटिंग एप मामले में गूगल-मेटा पर ED का शिकंजा, दोनों MNCs पर गंभीर आरोप, 21 जुलाई को तलब
एजेंसी ने पूछे गंभीर सवाल
तेलंगाना पुलिस ने भी इस संबंध में एक FIR दर्ज की है, जो एक बिजनेसमैन फणिंद्र शर्मा की शिकायत पर आधारित है. शिकायत में कहा गया है कि इन ऐप्स की वजह से आम लोग, खासकर मध्य और निम्न वर्गीय परिवार भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं. ईडी ने इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मामले में हाल ही में मुंबई के चार स्थानों पर छापेमारी की. इस दौरान 3.3 करोड़ रुपये की नकदी, विदेशी मुद्रा, नकदी गिनने की मशीनें, कीमती आभूषण, लग्जरी कारें (जिसमें मर्सिडीज भी शामिल है) और महंगे ब्रांड की घड़ियां बरामद की गईं. जांच एजेंसी का मानना है कि ये सामान ‘डब्बा ट्रेडिंग’ और ऑनलाइन सट्टा कनेक्शन से अर्जित किया गया है.
मुख्यमंत्री साय के प्रयत्नों से मिली ऐतिहासिक स्वीकृति चावल उपार्जन लक्ष्य में 8 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि
प्रदेश के अन्नदाताओं के हितों को सर्वोपरि मानते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर 149.25 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है, जो राज्य गठन के बाद अब तक की सर्वाधिक मात्रा है। उपार्जित धान का त्वरित निराकरण कस्टम मिलिंग के माध्यम से किया जा रहा है। धान खरीदी की समाप्ति तक प्रदेश को केन्द्रीय पूल अंतर्गत 70 लाख मीट्रिक टन चावल उपार्जन का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। राज्य की कल्याणकारी योजनाओं एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए आवश्यक राज्य पूल के लक्ष्य के साथ मिलाकर कुल 118.17 लाख मीट्रिक टन धान की मात्रा कस्टम मिलिंग से निराकरण के लिए निर्धारित की गई है।किसानों के हित में निर्णय लेते हुए राज्य सरकार ने अतिरिक्त धान का नीलामी के माध्यम से निराकरण करने का निर्णय लिया है। नीलामी के माध्यम से अब तक 19 लाख मीट्रिक टन धान हेतु बायर ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं, और संबंधित क्रेताओं एवं मिलरों द्वारा उसका त्वरित उठाव भी किया जा रहा है। प्रदेश के संग्रहण केंद्रों में शेष भंडारित धान की सुरक्षा हेतु खाद्य विभाग द्वारा सभी आवश्यक सावधानियाँ सुनिश्चित की गई हैं।
मुख्यमंत्री प्रदेश के कृषकों से एक-एक दाना धान खरीदने की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार से लगातार संवाद एवं आग्रह किया गया। इसी क्रम में उन्होंने दिनांक 24 जून 2025 को नई दिल्ली में केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से भेंट कर केन्द्रीय पूल अंतर्गत चावल उपार्जन लक्ष्य को बढ़ाने का आग्रह किया था।
मुख्यमंत्री साय के सतत प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। भारत सरकार ने 18 जुलाई 2025 को चावल उपार्जन लक्ष्य को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह निर्णय न केवल किसानों के हित में महत्त्वपूर्ण है, बल्कि इससे राज्य सरकार को लगभग 1200 करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय हानि से भी बचाया जा सका है। चावल उपार्जन लक्ष्य में मिली इस वृद्धि से राज्य की राजकोषीय स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गति आएगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस निर्णय के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग, केंद्र और राज्य की समन्वित किसान-हितैषी नीति का परिचायक है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मिलर एसोसिएशन एवं किसानों द्वारा समय-समय पर उठाई गई मांगों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि सभी सुझावों और आवश्यकताओं पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्रवाई की जाएगी।
जिलों को भारत सरकार से मिला कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (सीबीबीएफएस)
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। दृष्टिहीनता के प्रमुख कारणों में से एक मोतियाबिंद है, जो सामान्यतः एक आयुजन्य नेत्र रोग है। एक निश्चित आयु के पश्चात इसका होना सामान्य माना जाता है, किन्तु इसका ऑपरेशन कर दृष्टि पुनः प्राप्त की जा सकती है। इसके उपचार हेतु गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन की सुविधा राज्य के 25 जिला चिकित्सालयों एवं 10 चिकित्सा महाविद्यालयों सहित कुल 43 स्वास्थ्य सं/स्था/नों में उपलब्ध है, जहाँ नियमित रूप से नेत्र ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
राज्य में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 1,45,580 तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 27,245 मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं। प्रदेश में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना” संचालित है, जिसके अंतर्गत सभी जिलों को ‘‘कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस’’ (सीबीबीएफएस) प्रदान किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत दोनों आंखों में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन द्वारा उन्हें दृष्टिहीनता से मुक्त किया जाता है।
अब तक राज्य के 11 जिलों — कबीरधाम, रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, रायगढ़, कोरबा एवं बस्तर — को दृष्टिहीनता मुक्त घोषित किए जाने हेतु दावा भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। वहीं कांकेर एवं बेमेतरा जिलों के दावों का सत्यापन कार्य प्रगति पर है, जिसके उपरांत प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा।
दृष्टिहीनता के एक अन्य प्रमुख कारण “ग्लॉकोमा” की भी पहचान और उपचार हेतु विभाग सजग है। यह आंख की एक जटिल बीमारी है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में रोगी को जानकारी नहीं होती और जब पता चलता है, तब तक दृष्टि का ह्रास हो चुका होता है। इसकी गई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती। इसकी पहचान केवल नियमित नेत्र परीक्षण से ही संभव है। अतः 40 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक 6 माह में नेत्र परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है। राज्य के सभी विकासखंड केन्द्रों में इसकी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
कॉर्नियल दृष्टिहीनता की रोकथाम के लिए “कॉर्नियल दृष्टिहीनता मुक्त राज्य योजना” भी संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत सभी जिलों में कॉर्नियल दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर, नेत्र प्रत्यारोपण केन्द्रों से उनका सत्यापन कराते हुए नेत्र बैंक में पंजीयन कराया गया है। नेत्रदान प्राप्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर इनका प्रत्यारोपण किया जाता है। जनजागरूकता के माध्यम से नेत्रदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 263 और अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 88 नेत्रदान संपन्न हुए हैं।
अन्य सामान्य नेत्र रोगों के उपचार की सुविधा राज्य के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। सभी जिला चिकित्सालयों में निर्धारित दिवसों पर स्पेशल क्लीनिक आयोजित किए जाते हैं, जिनके अंतर्गत ग्लॉकोमा, रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी सहित अन्य नेत्र रोगों का उपचार किया जाता है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक ऐसे 81,000 से अधिक तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 25,000 से अधिक रोगियों का उपचार किया गया है।
गुणवत्तापूर्ण नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित स्क्रीनिंग शिविर, आधुनिक उपकरणों से जांच तथा तत्काल सर्जरी की सुविधा के माध्यम से प्रदेशवासी निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता को बेहतर, प्रभावी और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
उप अभियंता सिविल और विद्युत एवं यांत्रिकी भर्ती परीक्षा 20 जुलाई को
छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा जल संसाधन विभाग के अंतर्गत उप अभियंता सिविल और उप अभियंता विद्युत एवं यांत्रिकी भर्ती हेतु संभाग स्तर पर परीक्षा का आयोजन आगामी 20 जुलाई को अंबिकापुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर एवं रायपुर में किया जा रहा है। जीपीएम जिले से परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने परीक्षा के संबंध में व्यापम द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन करने अपील की है।
व्यापम द्वारा जारी दिशा निर्देश में कहा गया है कि परीक्षार्थी, परीक्षा प्रारंभ होने के कम से कम 2 घंटा पूर्व परीक्षा केन्द्र में पहुंचे ताकि उनका फ्रिस्किंग एवं पहचान पत्र का सत्यापन किया जा सके। परीक्षा प्रारंभ होने के 20 मिनट पूर्व परीक्षा केन्द्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जायेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई परीक्षा प्रातः 10 बजे से प्रारंभ हो रहा है तो मुख्य द्वारा प्रातः 9.30 बजे बंद कर दिया जाएगा। इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें। हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े पहनकर परीक्षा देने आये। फुटवियर के रूप में चप्पल पहनें। कान में किसी भी प्रकार का आभूषण वर्जित है। परीक्षा प्रारंभ होने के पहले आधा घंटा में एवं परीक्षा समाप्ति के आखिरी आधा घंटा में परीक्षा कक्ष से बाहर जाना वर्जित है। परीक्षा कक्ष में किसी प्रकार का संचार उपकरण, इलेक्ट्रानिक उपकरण, इलेक्ट्रानिक घडी, पर्स, पाऊच, स्कार्फ, बेल्ट, टोपी आदि ले जाना पूर्णतः वर्जित है। प्रवेश पत्र के सभी पेज का प्रिंट आउट ले और पेज के केवल एक तरफ प्रिंट करें, क्योंकि प्रत्येक परीक्षा हेतु व्यापम की प्रति परीक्षा केंद्र में जमा हो जाएगी।
परीक्षार्थी को परीक्षा हेतु प्रवेश पत्र के साथ पहचान पत्र के रूप में मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पेन कार्ड, आधार कार्ड जिसमें अभ्यर्थी का फोटो हो का एक मूल पहचान पत्र परीक्षा दिवस में परीक्षा केंद्र में लाना अनिवार्य होगा। मूल पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जायेगा, जिसके लिए अभ्यर्थी स्वयं जिम्मेदार होंगे। यदि इंटरनेट से प्राप्त प्रवेश पत्र पर फोटो नहीं आता है, तो अभ्यर्थी अपने साथ दो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो लेकर परीक्षा केंद्र में जावे। परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष में केवल काले या नीले बाल पॉइंट पेन को ही उत्तर अंकित करने हेतु उपयोग में लाये। चयन-प्रवेश के समय प्रवेश पत्र मांगा जाता है, अतः इसे सुरक्षित रखें। व्यापम द्वारा दोबारा प्रवेश पत्र जारी नहीं किया जावेगा। निर्देशों का पालन ना करने पर अभ्यर्थी को परीक्षा देने से वंचित किया जायेगा। परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी तथा अभ्यर्थिता समाप्त कर दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने प्रवेश पूर्व आवश्यक परीक्षण बिंदु की पुष्टि करने को कहा
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को आवश्यक परीक्षण बिंदु के आधार पर तथ्यों की पुष्टि करने को कहा है।
आयोग के प्रभारी सचिव ने कहा है कि वे सुनिश्चित कर ले कि संबंधित विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम-2005 के अंतर्गत अधिसूचित है और उनके परीनियम एवं अध्यादेश छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में प्रकाशित हो चुके है। इसके प्रकाशन के उपरांत ही विद्यार्थियों का प्रवेश दिया जा सकता है।
इस बात की पुष्टि भी कर ले कि निजी विश्वविद्यालयों में संचालित संस्थान/अध्ययन शाला, विश्वविद्यालय की एक संघटक इकाई है। यह कोई संबद्ध महाविद्यालय, शिक्षण संस्थान, शोध संस्थान नहीं है, क्योंकि निजी विश्वविद्यालय एकात्मक स्वरूप के हैं एवं इन्हें किसी अन्य महाविद्यालयों को संबद्ध करनेकी अनुमति नहीं है।
इस बात की पुष्टि भी कर ले कि पाठ्यक्रम-डिग्री आदि, जिसमें प्रवेश लिया जा रहा है, यूजीसी द्वारा अनुमोदित है एवं राजपत्र में प्रकाशित अध्यादेशों में इस पाठ्यक्रम से संबंधित अध्यादेश भी शामिल है।
इसी तरह यह भी सुनिश्चित कर ले कि पी.एच.डी. की उपाधि के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (पी.एच.डी. उपाधि के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया) विनियम, 2022 प्रभावशील है। जिस विषय में पी.एच.डी. पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जा रहा है, उस विषय पर विद्यार्थी यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित निजी विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में मानदण्डों के अनुरूप योग्यता प्राप्त शोध निर्देशक नियमित रूप से पदस्थ है। बाहर के शोध निर्देशकों की सेवाएं लेकर शोध कार्य कराना यू.जी.सी. विनियम-2022 की भावना के प्रतिकूल है।
शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी, ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर ये हैं मांगे
सरकार द्वारा जारी ई-अटेंडेंस संबंधित आदेश के खिलाफ बालाघाट जिले के अतिथि शिक्षकों ने सामूहिक हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया. यह विरोध प्रदर्शन अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के नेतृत्व में जिला मुख्यालय में किया गया, जहां शिक्षकों ने एकजुट होकर कलेक्टर को 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और शासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य होंगे. शिक्षकों का कहना है कि शासन द्वारा बिना आवश्यक संसाधन दिए सीधे ई-अटेंडेंस लागू करना अमानवीय और तानाशाहीपूर्ण निर्णय है. कई ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में नेटवर्क की समस्या है और अधिकांश अतिथि शिक्षकों के पास एंड्रॉयड फोन तक नहीं है. बावजूद इसके सरकार द्वारा ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर देना, शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है.
शिक्षकों की क्या हैं मांग?
वारासिवनी विकासखंड की अतिथि शिक्षिका दीपकला राहंगडाले ने बताया कि सरकार की शर्त है कि ई-अटेंडेंस नहीं लगाने पर मानदेय नहीं मिलेगा, लेकिन हम न तो स्थायी हैं न ही सुविधाओं से युक्त हैं. ऐसे में यह आदेश हमारे अधिकारों का हनन है. हम लंबे समय से ई-अटेंडेंस का विरोध कर रहे हैं. वहीं महकेपार के शिक्षक पेमेंद्र पारधी ने कहा कि हैं, शासन टस से मस नहीं हो रहा. बालाघाट जिले और प्रदेशभर में जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं.

रिक्त पदों पर फॉलन आउट अतिथि शिक्षकों को वरीयता दी जाए.पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सितम्बर 2023 को की गई घोषणाओं को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए.स्कोर कार्ड में अनुभव के आधार पर प्रतिवर्ष 10 अंक जोड़े जाएं.चयन परीक्षा में 20 अतिरिक्त अंक तथा विभागीय परीक्षा को राजपत्रित मान्यता प्रदान की जाए.अवकाश की सुविधा दी जाए और नियमित शिक्षकों की तरह वेतनवृद्धि की जाए.
शिक्षकों ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे सरकार तक उनकी मांगें शीघ्र पहुंचाएं और समाधान के प्रयास करें. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है.
ई-अटेंडेंस को लेकर बालाघाट की यह सामूहिक हड़ताल आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैल सकती है. अतिथि शिक्षकों में लगातार यह भावना बढ़ रही है कि सरकार उनके योगदान को नज़रअंदाज़ कर रही है.
ज्ञापन के माध्यम से अतिथि शिक्षकों ने 50 से 70 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं. यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम सभी शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. अगर हमें नियमित शिक्षक की तरह सुविधाएं दी जाती हैं तब हम ई-अटेंडेंस का पालन करने को तैयार हैं.
सोनम रघुवंशी के सबूत छिपाने वाले सिलोम जेम्स को मिली जमानत
राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बड़ी खबर सामने आ रही है. इस केस में प्रॉपर्टी डीलर सिलोम जेस्म (Silom James) को जमानत मिल गई है. प्रॉपर्टी डीलर शिलोम जेम्स ने ही इस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपी विशाल चौहान को किराए पर फ्लैट दिलवाया था और इस फ्लैट में सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) हत्या करने के बाद से रह रही थी. वहीं बाद में इस मामले में जांच कर रही शिलांग एसआईटी की टीम प्रॉपर्टी ब्रोकर सिलोम जेम्स को लेकर रतलाम पहुंची थी. बताया गया था कि रतलाम की मंगलमूर्ति कॉलोनी में सिलोम का ससुराल है.
सिलोम ने दी थी ये जानकारी
इंदौर में संपत्ति प्रबंधन की एक फर्म चलाने वाले कारोबारी सिलोम जेम्स ने खुद सामने आकर दावा किया था कि राजा रघुवंशी की हत्या के पांच गिरफ्तार आरोपियों में शामिल विशाल चौहान ने 30 मई को उनसे मुलाकात करके शहर के देवास नाका क्षेत्र में 17,000 रुपये प्रति माह पर एक फ्लैट किराए पर लिया था और इसके लिए अनुबंध पर दस्तखत भी किए थे.
शिलांग पुलिस ने हाल ही में रतलाम में प्रॉपर्टी डीलर शीलोम जेम्स के ससुराल से कुछ गहने, लैपटॉप और एक पेन ड्राइव बरामद किए हैं.
एसआईटी की टीम रतलाम पहुंची थी. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिलांग पुलिस को एक बैग मिला था, इसमें रखी सामग्री को जब्त किया गया है.
इस पूरे मामले में सिलोम जेम्स पर साक्ष्य छुपाने का आरोप लगा था. सिलोम के साथ बिल्डिंग के मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर और गार्ड बलवीर अहिरवार को गिरफ्तार किया गया था, इन दोनों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है.
इस मामले में लगभग आठ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. पुलिस गहनों, डिजिटल उपकरणों और अन्य सबूतों के आधार पर केस को अंतिम रूप देने में जुटी है. पुलिस अब सोनम और अन्य आरोपियों से पूछताछ कर हत्याकांड की पूरी साजिश का खुलासा करने की कोशिश में है.
प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घालमेल! कागज़ी महल में रहते हैं ‘झोपड़ी’ वाले
बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को पक्की छत देने के लिए देश में बड़े पैमाने पर सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है…इसके तहत करोड़ों की संख्या में बेघरों को घर भी मिल रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के सतना में इस महत्वाकांक्षी योजना में पलीता लगाने का काम कर रहे हैं पंचायत और दूसरे अधिकारी. जी हां सतना के रामपुर बघेलान विकासखंड के अकौना गांव में कागजों पर सभी निवासियों के पास पक्के मकान हैं लेकिन हकीकत ये है कि ये सबकुछ बस कागजों पर हैं. असल में ये लाभार्थी अभी भी पन्नियों और खपरैलों से तैयार कच्चे मकानों में रख रहे हैं. यानी बाबुओं की मेहरबानी से सरकारी कागज में टारगेट पूरा लेकिन सच्चाई ये है कि उनकी हालत इस योजना के आने से पहले जैसी थी उससे भी खराब हो गई है.
इस अकेले ग्राम पंचायत में 28 ऐसे लाभार्थी हैं जिनके नाम पर पीएम आवास योजना स्वीकृत तो हुई लेकिन बाद में वे इसके अपात्र हो गए और जो अपात्र थे वे इसके पात्र हो गए. ऐसे ही कुछ मामलों का ग्राउंड पर जाकर हकीकत की छानबीन की. इस दौरान सामने आया कि ग्राम पंचायत के नोडल अधिकारी सचिव और रोजगार सहायक और दूसरे अधिकारियों ने मिलकर गजब का खेल किया है. जो पहले पात्र थे उन्हें इस आधार पर अपात्र बता दिया गया कि उनके पास तो पक्के मकान पहले से ही है. हमारी पड़ताल में इनमें से कई मामले सिरे से गलत पाए गए. बहरहाल आगे बढ़ने से पहले सतना जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत को भी जान लेते हैं फिर हमारी पड़ताल में सामने आई हकीकत से भी आपको रुबरू कराएंगे.
ग्राम पंचायत के नोडल अधिकारी सचिव और रोजगार सहायक ने अकौना गांव के ऐसे लोगों की सूची तैयार की है जो कि अपात्र की श्रेणी में रखे गए हैं. इस सूची में कल्लू रैकवार को पूर्व से लाभान्वित बताया गया. इसी प्रकार राम चरण कहार तथा फुलझरिया का भी नाम लाभ पा चुके लोगों में शामिल किया गया. जबकि अमृतलाल साहू, पवन साहू, सीता देवी, राजकुमार केवट, धर्मेन्द्र केवट, अवधेश सिंह, कौशल केवट, कृष्ण कुमार केवट को पक्का मकान का मालिक बताकर अपात्र कर दिया गया. अपात्रों की सूची में कई और नाम भी हैं- मसलन भगवान दीन, पुष्पेन्द्र सिंह, राजबहादुर सिंह, मोतीलाल सिंह, दयाराम रजक, राम सिंह, वीरेन्द्र सिंह, अजय सिंह बघेल, शिवेन्द्र सिंह और उमाकांत सिंह.जब इस मामले में पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए.
केस नंबर 1
रामसजीवन के बेटे कौशल केवट को पंचायत ने अपात्र बताया. इनकी आवास आईडी एमपी 113952870 और प्राथमिकता क्रम में स्थान 12वां है. जब उनके पास पहुंचा तो पाया कि वे मिट्टी के कच्चे मकान में रहते हैं. दो कमरे के इस मकान की छत भी खपरैल की है. उन्होंने बताया कि सचिव के द्वारा पिछले दिनों नाम काट दिया गया। मेरा घर कहां बना है जब मैं पूछता हूं तो कोई जवाब नहीं मिलता. पैसे भी ले लेते हैं आवास भी नहीं मिलता. बताते हैं कि पंचायत में बैठे कर्मचारी लोगों का हक मारकर चले जाते हैं शिकायत करने पर भी कुछ नहीं होता.









