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CBI की दिल्ली-NCR समेत 7 राज्यों में छापामारी, देश में online क्राइम के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई

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ऑपरेशन चक्र-V के तहत online अपराध और डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स के खिलाफ चल रहे अभियान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को एक और बड़ी कार्रवाई की. सीबीआई ने दिल्ली-एनसीआर समेत 7 राज्यों में कई ठिकानों पर छापा मारा. इनमें मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, पंजाब, आंध्र प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं. साथ ही सीबीआई ने तीन अहम आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है.

CBI की यह कार्रवाई म्यूल बैंक अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के मकसद से की गई है, जो कि online ठगी से कमाए गए पैसों को इधर-उधर करने और छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे. छापामारी के दौरान एजेंसी को बड़ी संख्या में मोबाइल, बैंक खाते खोलने से जुड़े फर्जी दस्तावेज, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और केवाईसी पेपर्स मिले हैं.

पहले भी हुई थी कार्रवाई, अब नए इनपुट पर दोबारा छापामारी
CBI ने 25 जून को इस मामले में 37 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. जांच में पता चला कि ये लोग म्यूल अकाउंट होल्डर, मिडलमैन, एजेंट और कुछ बैंक कर्मचारी हैं, जो साइबर अपराधियों के साथ मिलकर फर्जी अकाउंट खोलते थे और online फ्रॉड से मिले पैसों को इन खातों के ज़रिए घुमाते थे. इससे पहले 26 और 27 जून को CBI ने देशभर के 40 ठिकानों पर छापामारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

किन-किन तरीकों से हो रही थी ठगी
CBI की जांच में खुलासा हुआ है कि ये म्यूल अकाउंट्स डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फर्जी कॉल्स , इन्वेस्टमेंट फ्रॉड , जालसाज विज्ञापनों और आईटी एक्ट से जुड़े अन्य साइबर अपराधों से कमाए गए पैसों को ट्रांसफर और विदड्रॉ करने में इस्तेमाल किए जा रहे थे.

CBI ने online क्राइम से निपटने के लिए तीन अहम स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाई-
वित्तीय ढांचा: म्यूल अकाउंट्स, अनऑथराइज्ड पेमेंट गेटवे और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग.
संचार ढांचा: फर्जी सिम कार्ड, PoS एजेंट्स और अवैध सिम नेटवर्क.
ह्यूमन नेटवर्क: लोगों को लालच देकर या धोखे से साइबर क्राइम में झोंकने वाले संगठित गैंग, जिसे ‘साइबर स्लेवरी’ भी कहा जा रहा है। ये नेटवर्क ज़्यादातर देश के बाहर से ऑपरेट होते हैं.

सरकार का संदेश साफ, online अपराध बर्दाश्त नहीं
सरकार और CBI दोनों की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि online अपराधों को अंजाम देने वालों के साथ-साथ इस नेटवर्क को सपोर्ट करने वाली पूरी संरचना को भी ध्वस्त किया जाएगा. गिरफ्तार किए गए आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा.

बिहार दौरे पर पीएम मोदी, 12,000 करोड़ के प्रोजेक्ट की देंगे सौगात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को बिहार और बंगाल दौरे पर 12,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे. इस दौरान वे दोनों राज्यों में 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पण करेंगे. इन परियोजनाओं में रेलवे, सड़क, गैस, ऊर्जा, मत्स्य पालन, आईटी और ग्रामीण विकास जैसे अनेक क्षेत्रों की योजनाएं शामिल हैं.

बिहार में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम (मोतिहारी, दरभंगा, पटना)
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे की शुरुआत बिहार के मोतिहारी से करेंगे, जहां वे लगभग 7,200 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे और एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे.
दरभंगा-थलवारा और समस्तीपुर-रामभद्रापुर रेल खंड के दोहरीकरण की शुरुआत जो रेल यातायात की क्षमता को बढ़ाएगा.
दरभंगा-नरकटियागंज रेललाइन का दोहरीकरण (लगभग 4,080 करोड़ की परियोजना)- उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा.
समस्तीपुर-बछवाड़ा सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग की सुविधा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही और समयबद्धता में सुधार होगा.
पटना में वंदे भारत ट्रेनों के मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी जाएगी.

भटनी-छपरा ग्रामीण सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और ट्रैक्शन सिस्टम का अपग्रेडेशन होगा.
सड़क क्षेत्र में नए मार्ग और बेहतर कनेक्टिविटी

NH-319 पर आरा बाइपास की चार लेन सड़क का निर्माण जो आरा-मोहनिया और पटना-बक्सर हाइवे को जोड़ेगा.
पररिया से मोहनिया तक का 4-लेन खंड, जिसकी लागत 820 करोड़ रुपये से अधिक है, को जनता को समर्पित किया जाएगा.

NH-333C पर सरवन से चकाई तक की सड़क बिहार और झारखंड को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग बनेगा.

आईटी और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा

दरभंगा में नया सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (Software Technology Parks of India) (STPI) सेंटर और पटना में स्टेट ऑफ ऑर्ट इनक्यूबेशन फैसिलिटी का उद्घाटन किया जाएगा. ये सुविधाएं स्टार्टअप्स, आईटी कंपनियों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएंगी.

मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास को नई दिशा
पीएम मोदी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत बिहार में नए फिश हैचरी, बायोफ्लॉक यूनिट्स, एक्वाकल्चर यूनिट्स और फिश फीड मिल्स का उद्घाटन करेंगे.

इससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, गांवों में रोजगार और महिला उद्यमिता को बल मिलेगा.
चार नई अमृत भारत ट्रेनों का संचालन शुरू

राजेंद्र नगर टर्मिनल (पटना)-नई दिल्ली
बापूधाम मोतिहारी-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल)

दरभंगा-लखनऊ (गोमती नगर)
मालदा टाउन-लखनऊ (गोमती नगर) वाया भागलपुर

महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहयोग

प्रधानमंत्री करीब 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपये जारी करेंगे. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 12,000 परिवारों को गृह प्रवेश की चाबियां दी जाएंगी और 40,000 लाभार्थियों को 160 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जाएगी.

इराक के शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग, 60 लोगों की मौके पर ही हुई मौत, कई घायल

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इराक के पूर्वी शहर कूत में एक दर्दनाक घटना घटी है. यहां 16 जुलाई, 2025 की रात एक हाइपरमार्केट और रेस्तरां में भीषण आग लग गई, जिसमें 60 लोग मारे गए और बहुत से लोग जख्मी हुए हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी पुष्टि की है. दो पुलिस अधिकारियों ने बात करते हुए बताया कि इनमें 59 मृत लोगों की पहचान हो चुकी है जबकि 1 शव इतनी बुरी तरह जल चुका है कि उसकी पहचान नहीं हो पाई है.
इलाके के गवर्नर ने बताया कि आग उस समय लगी, जब मार्केट में मौजूद रेस्तरां में बहुत से परिवार खाना खा रहे थे और लोग दुकानों में खरीदारी कर रहे थे. आपको बता दें कि ये शॉपिंग मॉल हाल ही में बना था और प्राइमरी रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि आग की वजह शॉर्ट सर्किट रही. घटना में हुई मौतों की वजह से गवर्नर ने तीन दिन के शोक की घोषणा की और हादसे की जांच शुरू कर दी, जिसके नतीजे 48 घंटे में आने की उम्मीद है.
आईएनए के मुताबिक गवर्नर ने कहा कि इमारत और मॉल के मालिक के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं. उन्होंने इसे त्रासदी और आपदा करार दिया है. ये घटना कूत शहर के लिए बड़ा झटका है हालांकि इराक में इस तरह आग लगने की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं. साल 2021 में बगदाद के एक अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक विस्फोट से 82 लोग मारे गए थे जबकि साल 2023 में निनेवेह के एक मैरिज हॉल में आतिशबाजी से लगी आग में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

रागी इडली से लेकर ग्रिल्ड फिश तक…सांसदों के खाने में अब फिट इंडिया का फ्लेवर, संसद बनी सुपरफूड जोन

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रागी इडली से लेकर ग्रिल्ड फिश तक… अब संसद में स्वाद और सेहत की जुगलबंदी दिखेगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की पहल पर संसद की कैंटीन में हेल्थ-फर्स्ट मेन्यू लॉन्च किया गया है. इसमें मिलेट्स, लो-कैलोरी, हाई-प्रोटीन और न्यूट्रिशन से भरपूर डिशेज़ शामिल की गई हैं. सांसद, अधिकारी और विज़िटर अब मूंग दाल चिल्ला, ज्वार उपमा, शुगर-फ्री खीर और हर्बल ड्रिंक्स जैसे ऑप्शन्स में से अपनी पसंद चुन सकेंगे… और वो भी बिना स्वाद से समझौता किए.

अब संसद की थाली में तली-भुनी चीजें नहीं, फिटनेस का तड़का होगा. इस बदलाव का मकसद है लंबे डिबेटिंग ऑवर्स के बीच भी सांसदों को सेहतमंद और एक्टिव बनाए रखना. मेन्यू में हर डिश के सामने उसकी कैलोरी वैल्यू भी दी गई है, ताकि सांसद डाइट कॉन्शस चॉइस ले सकें. ये बदलाव सिर्फ एक कैंटीन अपग्रेड नहीं है बल्कि देश के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का मैसेज है… एकदम फिट इंडिया वाली सोच के साथ.
पौष्टिकता की संसद में एंट्री
संसद के इस स्पेशल हेल्थ मेन्यू में भारतीय परंपरागत व्यंजनों को आधुनिक न्यूट्रिशनल जरूरतों के साथ जोड़ा गया है. खास बात ये है कि हर डिश के साथ उसकी कैलोरी वैल्यू भी मेंशन की गई है ताकि खाने वाला अपनी डाइट को समझदारी से चुन सके.
1. रागी मिलेट इडली + सांभर + चटनी – 270 kcal

2. ज्वार उपमा – 206 kcal
3. मिक्स मिलेट खीर (शुगर फ्री) – 161 kcal

4. ग्रिल्ड चिकन + बॉयल्ड वेज – 157 kcal
5. ग्रिल्ड फिश – 378 kcal

6. जौ-बार्ली सलाद – 294 kcal
7. गार्डन फ्रेश सलाद – 113 kcal

8. बेसिल शोरबा और वेज क्लियर सूप भी शामिल
स्वाद के साथ सेहत का संतुलन
नई व्यवस्था के तहत संसद की कैंटीन अब उन सांसदों के लिए भी हेल्दी ऑप्शन दे रही है, जो लंबी बहसों और बैठकों के दौरान जंक फूड से बचना चाहते हैं. मेन्यू में अब हर्बल टी, ग्रीन टी, मसाला सत्तू और गुड़ वाले आम पन्ना जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी शामिल हैं.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ‘मन की बात’ में ज्यादा तेल और चीनी के सेवन से होने वाली बीमारियों पर चेताया था और देशभर में हेल्दी ईटिंग को लेकर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया था.
सेहतमंद भारत की ओर संसद का कदम
इस मेन्यू का मकसद सिर्फ स्वाद बदलना नहीं बल्कि सांसदों और सरकार के प्रतिनिधियों के ज़रिए देश में हेल्दी लाइफस्टाइल का संदेश फैलाना भी है. इसी सोच के तहत फिट इंडिया मूवमेंट, ईट राइट इंडिया, पोषण अभियान, NP-NCD, और खेलो इंडिया जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं. लोकसभा अध्यक्ष खुद सदन सत्र के दौरान स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगवाते हैं और न्यूट्रिशन पर विशेषज्ञों की लेक्चर भी आयोजित किए जा रहे हैं.

तारों को छूकर लौटे शुभांशु शुक्ला, एक शिकन तक न दिखी, परिवार से मिलते ही छलके आंसू

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की 20 दिन बाद सुरक्षित धरती पर वापसी पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बन गई. शुभांशु जैसे ही स्पेस मिशन से लौटे, उनके माता-पिता की आंखें खुशी से नम हो गईं. पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, ‘हमारा बच्चा उस जगह से लौटा है जहां सिर्फ ऊपरवाले की ताकत चलती है.’ शुभांशु की मां भी बेहद भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा, ‘अब बस उससे गले मिलने का इंतजार है.’ बुधवार को शुक्ला अमेरिका में ही अपने परिवार से मिले. जो बंदा अंतरिक्ष में तारों को छूकर लौटा और उसके माथे पर एक शिकन तक न दिखी, वो पत्नी को गले लगाकर और बच्चे को गोद में उठाकर भावुक हो गया.शुभांशु फिलहाल आइसोलेशन में हैं. शुभांशु की पत्नी का नाम डॉक्टर कामना शुक्ला है. वह पेशे से एक डेंटिस्ट हैं. कामना स्कूल के समय से शुंभाशु की दोस्त हैं. उसी दौरान उनका प्यार परवान चढ़ा. दोनों की शादी फैमिली की सहमति से हुई.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कामना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे और शुभांशु कक्षा 3 से साथ पढ़े. कामना के अनुसार, शुभांशु बड़े शर्मीले हैं. ज्यादा बातचीत नहीं करते, शांत रहते हैं.

‘उद्धवजी, इधर आ जाइए’, विधान परिषद में फडणवीस ने दिया ऑफर, भाई के साथ गठबंधन पर राज ठाकरे ने साधी चुप्पी

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे को सत्ता पक्ष में आने का सार्वजनिक न्योता दे दिया है. फडणवीस ने हंसते हुए कहा कि ’29 तक तो कोई स्कोप नहीं है… लेकिन उद्धवजी, आपको यहां (सत्ता पक्ष) में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है.’ फडणवीस ने भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसा, लेकिन इसके सियासी मायने गहरे हैं. फडणवीस के ऑफर पर उद्धव ने कहा, ‘यह सब बातें हंसी-मजाक में हो रही थी, हंसी-मजाक में ही रहने दें…’

उसी दिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के साथ संभावित गठबंधन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि मीडिया ने उनके नाम से बयान चलाए जो उन्होंने दिए ही नहीं.

राज ठाकरे ने साफ किया कि इगतपुरी में आयोजित मनसे पदाधिकारियों के सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत हुई थी. ‘मुझसे शिवसेना (उबाठा) से गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया, तो मैंने हल्के अंदाज़ में कहा कि क्या मुझे अब आपके साथ गठबंधन की रणनीति पर चर्चा करनी चाहिए?’ उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पत्रकारों ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और यह दिखाया कि नगर निगम चुनाव से पहले गठबंधन की संभावना पर विचार होगा.

राज ठाकरे ने कहा कि अनौपचारिक बातचीत को ‘बयान’ की तरह पेश करना पत्रकारिता की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने पत्रकारों को भी नसीहत देते हुए कहा कि वह भी 1984 से

ठाकरे भाइयों की दुर्लभ जुगलबंदी

5 जुलाई को हुए ‘विजय उत्सव’ के मंच पर महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश को रद्द कराने का जश्न मनाना था, जिसमें राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने की बात थी. यह मंच मराठी अस्मिता की जीत के रूप में देखा गया.

रिवार के दोनों धड़े एक बार फिर साथ आ सकते हैं, खासकर मुंबई और अन्य नगर निगम चुनावों से पहले. लेकिन जहां उद्धव इस गठबंधन के प्रति उत्साहित दिख रहे हैं, वहीं राज ठाकरे ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है.

‘उद्धवजी, इधर आ जाइए’, विधान परिषद में फडणवीस ने दिया ऑफर, भाई के साथ गठबंधन पर राज ठाकरे ने साधी चुप्पी

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे को सत्ता पक्ष में आने का सार्वजनिक न्योता दे दिया है. फडणवीस ने हंसते हुए कहा कि ’29 तक तो कोई स्कोप नहीं है… लेकिन उद्धवजी, आपको यहां (सत्ता पक्ष) में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है.’ फडणवीस ने भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसा, लेकिन इसके सियासी मायने गहरे हैं. फडणवीस के ऑफर पर उद्धव ने कहा, ‘यह सब बातें हंसी-मजाक में हो रही थी, हंसी-मजाक में ही रहने दें…’

उसी दिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के साथ संभावित गठबंधन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि मीडिया ने उनके नाम से बयान चलाए जो उन्होंने दिए ही नहीं.

राज ठाकरे ने साफ किया कि इगतपुरी में आयोजित मनसे पदाधिकारियों के सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत हुई थी. ‘मुझसे शिवसेना (उबाठा) से गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया, तो मैंने हल्के अंदाज़ में कहा कि क्या मुझे अब आपके साथ गठबंधन की रणनीति पर चर्चा करनी चाहिए?’ उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पत्रकारों ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और यह दिखाया कि नगर निगम चुनाव से पहले गठबंधन की संभावना पर विचार होगा.

राज ठाकरे ने कहा कि अनौपचारिक बातचीत को ‘बयान’ की तरह पेश करना पत्रकारिता की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने पत्रकारों को भी नसीहत देते हुए कहा कि वह भी 1984 से

ठाकरे भाइयों की दुर्लभ जुगलबंदी

5 जुलाई को हुए ‘विजय उत्सव’ के मंच पर महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश को रद्द कराने का जश्न मनाना था, जिसमें राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने की बात थी. यह मंच मराठी अस्मिता की जीत के रूप में देखा गया.

रिवार के दोनों धड़े एक बार फिर साथ आ सकते हैं, खासकर मुंबई और अन्य नगर निगम चुनावों से पहले. लेकिन जहां उद्धव इस गठबंधन के प्रति उत्साहित दिख रहे हैं, वहीं राज ठाकरे ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है.

ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन का जलवा दिख गया, अब लॉजिस्टिक ऑपरेशन की बारी है, सेना लॉजिस्टिक ड्रोन की खरीद में जुटी है

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पारंपरिक युद्ध अब तकनीकी युद्ध में बदल चुका है. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने खुद इसका एहसास किया. सारी लड़ाई हवा में ही लड़ी गई. ड्रोन और एंटी ड्रोन तकनीक ने पूरे जंग का तरीका ही बदल दिया. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अर्मेनिया-अजरबैजान, हमास-हिजबुल्लाह-हूती और ईरान के साथ इजरायल की जंग, सभी में ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने साफ कहा कि आज के जटिल युद्ध में ‘कल के हथियारों’ से जीत संभव नहीं है और भारत को ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. भारतीय सेना लंबे समय से स्वदेशी ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम की खरीद को आगे बढ़ा रही है. भारतीय सेना ड्रोन को सर्विलांस और काइनेटिक यूज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. अब लॉजिस्टिक ड्रोन की बारी है. यानी इन ड्रोन के जरिए विषम परिस्थितियों में सेना तक जरूरी सामान पहुंचाना.

लॉजिस्टिक ड्रोन की खरीद जारी
चीन ने बड़ी तादाद में ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरू किया जो ऊंची पहाड़ियों पर तैनात सैनिकों के लिए रसद, गोलाबारूद और अन्य सामग्री पहुंचा सके. भारतीय सेना ने भी खुद को लॉजिस्टिक ड्रोन से लैस करने का फैसला लिया था. लॉजिस्टिक ड्रोन हिमालय के हाई ऑल्टिट्यूड और मीडियम ऑल्टिट्यूड में इस्तेमाल के मकसद से साल 2022 में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया गया था. कुल 363 लॉजिस्टिक ड्रोन लेने थे जिसमें से 163 हाई ऑल्टिट्यूड एरिया के लिए और 200 मीडियम ऑल्टिट्यूड एरिया के लिए लेने थे. इसके अलावा 570 ड्रोन के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन भी जारी किया था.दो साल बाद ही लॉजिस्टिक ड्रोन सबल 20 को शामिल कर लिया गया.सबल ड्रोन की खासियत है कि यह मीडियम ऑल्टिट्यूड ड्रोन है और 20 से 25 किलो तक का वजन उठा सकता है. लॉजिस्टिक ड्रोन होने के कारण यह वर्टिकल लैंडिंग और टेक ऑफ करता है. सेना को अभी हाई ऑल्टिट्यूड में ऑपरेट करने वाले लॉजिस्टिक ड्रोन की तलाश है जो 50 से 80 किलो तक का वजन आसानी से उठा सके. माना जा रहा है कि अगले 5 साल में यह जरूरत पूरी हो सकती है.
क्या होगा लॉजिस्टिक ड्रोन का काम?
सेना के राशन, दवाएं और अन्य सामग्री को ऊंची पोस्ट तक पहुंचाने के लिए एक प्रक्रिया है. इसमें गोदाम से ट्रकों में भरकर सामान सेना के बेस डिपो तक पहुंचता है. बेस डिपो से यह सप्लाई प्वाइंट तक पहुंचता था और फिर सीधा रेजिमेंटल/बटालियन/फॉर्मेशन हेडक्वार्टर तक आता है. यहां तक रसद और सामान सड़क के जरिए पहुंचता है. उसके बाद शुरू होता था पोस्ट पर तैनात सैनिकों तक इन्हें पहुंचाना. सर्दियों में बर्फबारी से पहले ही सामान पोस्टों में जमा कर दिया जाता था. इसकी वजह थी कि भारी बर्फबारी के चलते पोस्ट पूरी तरह से बेस से कट जाते थे. इसे विंटर स्टॉकिंग कहा जाता था. यह सारा काम अब भी पोर्टर और जानवरों के जरिए किया जाता है. इस काम के लिए अप्रैल से सितंबर तक का ही समय होता है. एक पोर्टर अपने साथ 20 किलो और एक पोनी 60 किलो तक का ही वजन उठा सकता है. यह प्रक्रिया पहले भी ऐसी ही चलती थी और अब भी जारी है. लेकिन लॉजिस्टिक ड्रोन की एंट्री अब जरूरी हो गई है. मसलन, बर्फ से ढकी चोटियों में अगर किसी सैनिक को मेडिकल इमरजेंसी के तहत कोई दवा या फिर गोला बारूद भेजना हो तो इन लॉजिस्टिक ड्रोन के जरिए आसानी से पहुंचाया जा सकेगा. हालांकि इस काम के लिए हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हेलिकॉप्टर तभी उड़ान भर सकते हैं जब मौसम ठीक हो. इस काम में जोखिम भी होता है. लेकिन लॉजिस्टिक ड्रोन के आने से काफी हद तक इन सब चुनौतियों से आसानी से पार पाया जा सकेगा.

मानसून सत्र से पहले राष्‍ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात

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पीएम नरेंद्र मोदी आज शाम राष्‍ट्रपति भवन पहुंचे और उन्‍होंने राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. यह मीटिंग संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले हो रही है. ऐसे में इसे संसद की कार्यवाही से जोड़कर देखा जा रहा है. सूत्रों के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मुलकात के दौरान मानसून सत्र के एजेंडे प्रमुख विधेयकों और सरकार की रणनीति पर चर्चा की. इस बार सत्र में चुनाव आयोग का SIR, मणिपुर हिंसा, पहलगाम आतंकी हमला और जीएसटी सुधार जैसे मुद्दे छाए रहने की संभावना है. यह मुलाकात संसद सत्र से पहले सभी दलों के साथ सहमति बनाने की दिशा में एक औपचारिक कदम हो सकता है.

कांग्रेस भी रणनीति के साथ तैयार
उधर, कांग्रेस ने भी आज दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालातों पर मंथन हुआ. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम पर मणिपुर हिंसा और पहलगाम हमले जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया. पार्टी ने सत्र में इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है. कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर, भारत-चीन सीमा तनाव और बेरोजगारी जैसे विषयों पर चर्चा की मांग की है. साथ ही, विपक्षी गठबंधन INDIA ने मणिपुर में शांति बहाली के लिए पीएम के बयान की मांग दोहराई.
ममता के पास भी एक्‍शन प्‍लान!
कांग्रेस की बैठक दर्शाती है कि विपक्ष संसद में सरकार पर दबाव बनाने की पूरी तैयारी में है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का गवाह बनेगा. बीजेपी गठबंधन के लिए यह सत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि 2024 के चुनावी जीत के बाद यह पहला बड़ा संसद सत्र है. सरकार जहां ‘विकसित भारत’ के अपने विजन को आगे बढ़ाना चाहती है. वहीं विपक्ष क्षेत्रीय और सामाजिक मुद्दों को उठाकर जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल भी बंगाली अस्मिता जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा सकते हैं.

राइफल से रोबोट तक, ‘प्रचंड शक्ति’ में खड़गा कोर ने दिखाया कैसे लड़ेगी भारत की फ्यूचर इन्फैंट्री

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जंग की परिभाषा बदल रही है. अब युद्ध सिर्फ बंदूकों और बूटों की लड़ाई नहीं रही है. ये वो युग है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोट और डेटा वॉरफेयर ने पारंपरिक इन्फैंट्री को नई धार दे दी है. इसी नई धार की झलक मिली मेरठ के खड़गा कोर फील्ड ट्रेनिंग एरिया में, जहां भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने लाइव युद्धाभ्यास ‘प्रचंड शक्ति’ का आयोजन किया.

भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने अपने एक्स (X) हैंडल से जारी इस वीडियो के साथ स्पष्ट संकेत दिया — कि अब जंग सिर्फ ज़मीन पर नहीं, तकनीक के हर मोर्चे पर लड़ी जाएगी. यह अभ्यास न सिर्फ इन्फैंट्री की पारंपरिक छवि को पुनर्परिभाषित करता है, बल्कि दिखाता है कि भारतीय पैदल सेना अब आधुनिक तकनीकों से लैस एक स्मार्ट युद्धक बल बन चुकी है — जो दुश्मन की सीमा में गहराई तक घुसकर निर्णायक प्रहार करने में सक्षम है.
भारतीय सेना ने वर्ष 2025 को ‘Year of Tech Absorption’ घोषित किया है — एक ऐसी पहल, जिसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीकों को सेना के वास्तविक युद्धक अभियानों में समाहित करना है. ‘प्रचंड शक्ति’ इस लक्ष्य का प्रतीक बनकर उभरा है — जहां इन्फैंट्री के पारंपरिक साहस को AI, ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, और स्वायत्त रोबोटिक हथियारों की धार मिली. इस युद्धाभ्यास में खड़गा कोर ने दर्शाया कि भविष्य का सैनिक सिर्फ लड़ने वाला नहीं होगा, वह डेटा विश्लेषक, टेक्नोलॉजी यूज़र और रोबोटिक कमांडर भी होगा.
प्रचंड शक्ति’ में इस्तेमाल हुई तकनीकों ने भारत की रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया:
– AI-आधारित कमांड सिस्टम – रियल टाइम निर्णय क्षमता — तेज़ी, सटीकता और मिशन सफलता की गारंटी.

– Loitering Munitions (कामीकाज़े ड्रोन) – टारगेट खोजते हैं, वहीं फट जाते हैं — सैनिकों को खतरे में डाले बिना दुश्मन को खत्म करते हैं.
– Autonomous Combat Platforms – ऐसे लड़ाकू रोबोट जो बिना इंसानी हस्तक्षेप दुश्मन की पहचान कर स्वतः हमला करते हैं.

– UAV Surveillance – दुश्मन की निगरानी और लक्ष्य निर्धारण में अहम भूमिका – कम रिस्क, ज्यादा इम्पैक्ट.
इस अभ्यास ने साबित किया कि भारतीय सेना युद्ध के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़, नेटवर्क-सेंट्रिक, AI-संचालित और मल्टी-डोमेन कॉम्बैट की ओर बढ़ चुकी है. सैनिक अब सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि डेटा, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक डोमेन में भी जंग लड़ने को तैयार हैं. खड़गा कोर की यह पहल बताती है कि भारत न केवल दुश्मन को हराने की तैयारी कर रहा है, बल्कि युद्ध की परिभाषा को भी बदल रहा है.

‘प्रचंड शक्ति’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसमें इस्तेमाल की गई अधिकांश तकनीकें भारतीय स्टार्टअप्स और घरेलू कंपनियों द्वारा विकसित की गई थीं. ड्रोन से लेकर रोबोट तक, AI सिस्टम से लेकर लॉइटरिंग म्यूनिशन तक — सब भारत में बना. भारतीय सेना का यह कदम सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं — यह रणनीतिक क्रांति है. अब लड़ाई के मैदान में भारत की इन्फैंट्री सिर्फ “जमीन पर कब्ज़ा” करने वाली ताकत नहीं रही — बल्कि यह डिजिटल डोमिनेशन, डेटा सिक्योरिटी और टेक्नो-सुपीरियोरिटी की प्रतीक बन चुकी है. और यही है प्रचंड शक्ति — तकनीक, आत्मनिर्भरता और बहादुरी का शक्तिशाली संगम.