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GST संग्रह की रफ्तार धीमी, बिलासपुर संभाग ने की लक्ष्य से 1261 करोड़ रुपये की कम वसूली…

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छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर संभाग में जीएसटी वसूली का प्रदर्शन इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक शासन ने 2909 करोड़ 31 लाख रुपये का लक्ष्य तय किया था, लेकिन विभाग अब तक सिर्फ 1647 करोड़ 69 लाख रुपये ही वसूल कर पाया है.

यानी लक्ष्य से करीब 1261 करोड़ 62 लाख रुपये कम वसूली हुई है. फरवरी महीने में भी संग्रह निर्धारित लक्ष्य से कम रहा है. आंकड़ों के मुताबिक बिलासपुर के तीनों जोन के अलावा जांजगीर-चांपा, गौरेला-पेंड्रा और मुंगेली जिलों में भी जीएसटी वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है. कई स्थानों पर लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम राशि प्राप्त हुई है, जिससे राजस्व संग्रह की स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है.

जीएसटी वसूली ने विभाग की कार्यप्रणाली पर किए सवाल खड़े

लगातार कम हो रही जीएसटी वसूली अब विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है. सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर जांच और कारोबार के वास्तविक आकलन में ढिलाई बरती जा रही है, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है. यहीं वजह है कि लक्ष्य और वास्तविक वसूली के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है. इधर, चालू वित्तीय साल के खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, लेकिन लक्ष्य के मुकाबले वसूली का अंतर अभी भी काफी बड़ा है. ऐसे में विभाग के सामने राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

टैक्स अनुपालन बढ़ाने और जांच को मजबूत करने चलाए जा रहे अभियान

इस संबंध में बिलासपुर जीएसटी के संयुक्त आयुक्त महेंद्र कुमार धनेलिया का कहना है कि विभाग लगातार राजस्व संग्रह बढ़ाने के प्रयास कर रहा है. उनके मुताबिक टैक्स अनुपालन बढ़ाने, जांच और निगरानी को मजबूत करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं और आने वाले समय में वसूली में सुधार की उम्मीद है. हालांकि विभाग सुधार के दावे कर रहा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि बिलासपुर संभाग में जीएसटी वसूली की रफ्तार अभी भी तय लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है.

CAPF अधिकारियों का बढ़ता असंतोष, सांसदों से प्रेशर बनाने की मांग; राज्यसभा में SP सांसद ने उठाया मुद्दा..

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देश की आंतरिक सुरक्षा संभालने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कैडर अधिकारियों के अधिकारों और उनकी सेवा शर्तों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. एक तरफ जहां यह मामला संसद में उठाया गया, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने सांसदों को ज्ञापन भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जल्द लागू करने की मांग की है.

अफसरों का कहना है कि अगर आदेश का पालन जल्द नहीं हुआ तो इससे सभी का मनोबल गिरेगा.

देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करने वाले सीआरपीएफ (Central Reserve Police Force, CRPF), बीएसएफ (Border Security Force, BSF), आईटीबीपी (Indo-Tibetan Border Police, ITBP), एसएसबी (Sashastra Seema Bal, SSB) और सीआईएसएफ (Central Industrial Security Force, CISF) के करीब 13 हजार कैडर अधिकारी लंबे समय से सेवा संबंधी अपने अधिकारों में सुधार की मांग कर रहे हैं.

राज्यसभा में उठा CAPF अधिकारियों का मुद्दा

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने इस मसले को आज राज्यसभा में उठाया. राम गोपाल ने कहा कि CAPF अधिकारी देश की संसद, सीमाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ एयरपोर्ट्स की सुरक्षा करते हैं, लेकिन उन्हें अपने करियर में पहली प्रमोशन के लिए 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद निराशाजनक है और इससे अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है.

सशस्त्र बलों पर SC का ऐतिहासिक फैसला

CAPF अधिकारियों ने अपने ज्ञापन में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 23 मई को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में CAPF के ग्रुप-A कार्यकारी कैडर अधिकारियों को 1986 से Organised Group A Services (OGAS) का सदस्य माना था. तब यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने दिया था.

साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया था कि 6 महीने के भीतर सेवा और भर्ती नियमों में संशोधन किए जाएं. साथ ही 6 महीने में कैडर समीक्षा पूरी की जाए. इसके अलावा 2 सालों के भीतर IG स्तर तक IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा याचिका भी खारिज

गृह मंत्रालय की ओर से दायर समीक्षा याचिका को 28 अक्टूबर को सूर्यकांत की बेंच ने खारिज कर दिया था. इसके बाद यह फैसला अंतिम और बाध्यकारी माना गया. अब CAPF अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट की ओर से तय समयसीमा के बावजूद अब तक सेवा नियमों में बदलाव और कैडर समीक्षा नहीं की गई.

इसी वजह से अधिकारियों को इस साल 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी. 10 फरवरी को हुई पहली सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में वैधानिक हस्तक्षेप पर विचार किया जा रहा है.

अब CAPF कैडर के अधिकारियों ने सांसदों से अपील की है कि वे इस मुद्दे में हस्तक्षेप करें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जल्द लागू करवाएं. अधिकारियों का कहना है कि अगर फैसला जल्द लागू नहीं हुआ तो इससे न केवल करीब 13 हजार अधिकारियों को नुकसान होगा, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़े इन सुरक्षा बलों का मनोबल भी प्रभावित होगा.

CAPF के अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब सरकार के संभावित नए बिल को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. अधिकारी और जवान देश के सबसे कठिन इलाकों में काम करते हैं. कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान, मध्य भारत में नक्सल विरोधी ऑपरेशन, सीमाओं की सुरक्षा और संकट के समय आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं बलों पर होती है.

CG: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र का अतिरिक्त सहयोग :  छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता…

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प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।

केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।

इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

CG: घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर छापेमारी, 19 सिलेंडर जब्त…

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घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग के विरुद्ध खाद्य विभाग द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में आज खाद्य विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न होटल एवं रेस्टोरेंट में छापामार कार्रवाई करते हुए घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग के मामले में चार प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कुल 19 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। इनमें 11 भरे हुए तथा 8 खाली सिलेंडर शामिल हैं।

गरियाबंद में घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर छापेमारी, 19 सिलेंडर जब्त

जिला खाद्य अधिकारी श्री अरविंद दुबे ने बताया कि कलेक्टर द्वारा जिले के सभी गैस वितरकों को तेल कंपनियों के निर्देशानुसार घरेलू गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

गरियाबंद में घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर छापेमारी, 19 सिलेंडर जब्त

खाद्य विभाग की टीम द्वारा ऑथेंटिक फूड एशियन रेस्टोरेंट से 2 भरे हुए एवं 4 खाली गैस सिलेंडर, शिव फैमिली रेस्टोरेंट से 3 भरे हुए एवं 2 खाली गैस सिलेंडर, अमन फैमिली रेस्टोरेंट से 3 भरे हुए गैस सिलेंडर तथा होटल हार्माेनी एंड जायका रेस्टोरेंट से 3 भरे हुए एवं 2 खाली गैस सिलेंडर जब्त किए गए।

खाद्य विभाग का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग करना नियमानुसार प्रतिबंधित है। इस प्रकार के मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा जिले में इस प्रकार की जांच और कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

CG: 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म, मुर्गी फार्म से लगभग 80 हजार से अधिक का मासिक आय कर रहे है अर्जित…

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जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन 150 के द्वितीय चरण के अंतर्गत समूह द्वारा स्थापित 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारम्भ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष श्री एतराम साहू एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार के द्वारा किया गया।

Poultry Farming: कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा, जानिए कितना आएगा खर्चा, क्या है मुर्गी पालन का पूरा तरीका - Utility AajTak

समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती है कि समूह की सदस्य महिलाएं पहले मुख्य रूप से खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनके पास आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगा। समूह की सभी सदस्याओं ने मिलकर आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

मुर्गी पालन फार्म - सुल्तानपुर - Justdial

युगेश्वरी बताती है कि समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर मुर्गी फार्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये प्राप्त किए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख रुपये और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी प्राप्त किया। आजीविका को और विस्तारित करने के उद्देश्य से समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

मुर्गी पालन बिज़नेस : मुनाफा 8 लाख से अधिक - 1000 बिज़नेस आईडिया

आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। इस व्यवसाय के माध्यम से समूह की सदस्याएं आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही अन्य सदस्यों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम हो रही हैं। समूह की सदस्याओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं तथा राज्य शासन एवं बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त की हैं।

CG: महतारी वंदन योजना मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की पहचान…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की लाखों माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है।

योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

यह योजना महिलाओं की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध हो रही है और परिवार पर उनकी आर्थिक निर्भरता को भी कम कर रही है। योजना से मिलने वाली यह सहायता राशि महिलाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत कर रही है।

इसी कड़ी में कोरबा जिले के शहरी क्षेत्र बुधवारी निवासी श्रीमती हेमलता साहू की कहानी भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। श्रीमती साहू बताती हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है और कई बार आवश्यक जरूरतों के लिए अतिरिक्त राशि की आवश्यकता पड़ जाती थी। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि ने उन्हें काफी सहारा दिया है। अब उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरतों या बच्चों की छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन और इंटरनेट की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे योजना से प्राप्त राशि से अपने मोबाइल का रिचार्ज कर अध्ययन जारी रख रही हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

श्रीमती हेमलता साहू ने योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे उनके जैसी महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात…

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‘प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका’

: मुख्यमंत्री श्री साय

‘मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की।

प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

”मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। ”

इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक श्रीमती निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

CG: अफीम की अवैध खेती पर सभी कलेक्टरों को सर्वे कर 15 दिवस में प्रमाण पत्र सहित रिपोर्ट देने के निर्देश…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

CG: ‘बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना, 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत…

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मुख्यमंत्री ने “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का किया शुभारंभ’

28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत’

आर्थिक कठिनाइयों के कारण बकाया बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ’

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी का किया अंतरण’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की।

मुख्यमंत्री ने “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।  

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए।

 बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना

उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है।

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।

इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

“पवन खेड़ा पर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने का आरोप”

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मुख्यमंत्री ने लगाए गंभीर आरोप

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ 3-4 FIR दर्ज होने की जानकारी दी है। उन पर आरोप है कि वे चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए उग्रवादी समूहों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे।

सर्मा ने यह आरोप तब लगाया जब कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री को कुछ ही हफ्तों में जेल में डाल दिया जाएगा, उनके कथित भ्रष्टाचार के कारण।

सर्मा ने प्रेस को बताया, “पवन खेड़ा के खिलाफ पहले से ही 3-4 मामले दर्ज हैं, जिसमें उन्होंने असम में कुछ उग्रवादी संगठनों से संपर्क करने की कोशिश की है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच चल रही है।</p><p>उन्होंने आगे कहा, “चुनाव के बाद आपको पता चलेगा कि कौन जेल जाएगा। मुझे लगता है कि पवन खेड़ा का अंतिम पता असम की जेल होगा।”

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मीडिया और संचार अध्यक्ष से तत्काल कोई टिप्पणी प्राप्त नहीं हो सकी।

इससे पहले, खेड़ा ने बुधवार को आरोप लगाया था कि भाजपा और उसकी सरकार केवल अपने हितों के लिए काम कर रही है, और मंत्री, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, अपने परिवारों के हितों को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने कहा, “चुनावों के बाद हिमंत बिस्वा सरमा को कोई नहीं बचा सकता, न ही दिल्ली में बैठे उनके आकाओं। असम विधानसभा के परिणाम घोषित होने के बाद, वह कुछ ही हफ्तों में जेल में होंगे।”

खेड़ा ने विश्वास व्यक्त किया कि एपीसीसी प्रमुख गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस और उसके सहयोगी राज्य में अगली सरकार बनाएंगे और एक ‘नया असम मॉडल’ स्थापित करेंगे।

असम विधानसभा चुनाव 126 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए इस वर्ष अप्रैल में होने की उम्मीद है। यह 2023 में किए गए परिसीमन के बाद पहला विधानसभा चुनाव होगा।