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टैंक से खतरनाक गैस का रिसाव, MRPL के दो फील्ड ऑपरेटरों की मौत, 1 की हालत गंभीर

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कर्नाटक के मंगलुरु जिले के सूरतकल में स्थित मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) में शनिवार को जहरीली गैस के रिसाव से 2 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी की हालत गंभीर बनी हुई है. यह हादसा एमआरपीएल के ऑयल मूवमेंट सेक्शन (ओएमएस) में हुआ. पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी दीप चंद्र भारतीय (33) और केरल के बिजली प्रसाद (33) के रूप में हुई है. उनके सहयोगी, गदग के विनायक मायागेरी, जो गैस की चपेट में आने के बाद बेहोश हो गए थे, को मंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है.
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह घटना ओएमएस डिवीजन के टैंक (एफआईबीआई7029) में खराबी की जांच के दौरान हुई. दीप चंद्र और बिजली प्रसाद टैंक के ऊपरी हिस्से पर निरीक्षण के लिए गए थे. इसी दौरान हादसा हुआ. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दोनों को बचाया नहीं जा सका. दोनों को बचाने की कोशिश कर रहे एक अन्य कर्मचारी विनायक मायागेरी भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए. उन्हें मंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है.
एमआरपीएल प्रशासन ने इस दुर्घटना की गहन जांच के लिए समूह महाप्रबंधकों की एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की है. समिति को घटना के कारणों और सुरक्षा खामियों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है. साथ ही, एमआरपीएल ने संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों के साथ सहयोग करने और आवश्यक जानकारी प्रदान करने का आश्वासन दिया है.

मंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सुधीर कुमार रेड्डी ने कहा कि मृतकों के परिजनों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा. पुलिस आयुक्त रेड्डी ने कहा, ‘प्रारंभिक जानकारी से हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का मामूली रिसाव होने का पता चलता है, जिसे कर्मचारियों ने अपनी नियमित ड्यूटी के दौरान टैंक की जांच करते समय सांस के ज़रिए अंदर ले लिया होगा.’ उन्होंने बताया कि उस समय कर्मचारी मास्क पहने हुए थे. एमआरपीएल की अग्निशमन एवं सुरक्षा टीम ने रिसाव को बंद कर दिया है तथा क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर दिया है.EDC

‘अंडरवियर परेड’ से मचा बवाल, University को मानवाधिकार ने भेजा नोटिस, जानिए यहां पूरा मामला

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गोवा राज्य मानवाधिकार आयोग ने गोवा विश्वविद्यालय के कुलपति को एक कथित घटना के सिलसिले में नोटिस जारी किया है, जिसमें इस साल की शुरुआत में संस्थान में एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान पुरुष छात्रों को उनके अंडरवियर में घुमाया गया था. आयोग ने गुरुवार को कुलपति हरिलाल बी. मेनन को एक नोटिस जारी कर उन्हें 23 जुलाई तक अपने समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है.
विश्वविद्यालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह घटना फरवरी में आयोजित “फ्रोलिक” नामक एक अंतर-विभागीय उत्सव के दौरान हुई थी. उन्होंने कहा कि थर्ड डिग्री’ नामक एक प्रतियोगिता के दौरान, निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों को अपने अंडरवियर तक कपड़े उतारने को कहा. अधिकार आयोग ने इस सप्ताह एक समाचार पत्र में छपी घटना के बारे में एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया.
आयोग ने अपने नोटिस में कहा कि वह इस मामले का स्वतः संज्ञान ले रहा है, जो प्रथम दृष्टया छात्रों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है. पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार घटना की निंदा करते हुए भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के नेता नौशाद चौधरी ने कहा कि उत्सव में शामिल भीड़ में छात्राएं भी शामिल थीं. उन्होंने कहा कि छात्रों को जाने नहीं दिया गया. वहां मौजूद छात्र और छात्राओं, दोनों के लिए यह शर्मनाक स्थिति थी.

एनएसयूआई ने इस आयोजन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है.विपक्षी गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने सबसे पहले इस घटना को मीडिया में उजागर किया. जीएफपी प्रमुख विजय सरदेसाई ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस घटना के बारे में अधिकारियों से पूछताछ की है. इस बीच, गोवा विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को “विवेकाधीन अवकाश” की घोषणा की है.विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एस.एन. धुरी ने एक परिपत्र में कहा, “विश्वविद्यालय के सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों को सूचित किया जाता है कि शुक्रवार को विवेकाधीन अवकाश घोषित किया गया है.+

ये एयरपोर्ट माना जाता था इंजीनियरिंग का चमत्कार! अब समंदर में डूबने का खतरा

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जापान में ओसाका की खाड़ी में दो कृत्रिम द्वीपों पर बना कंसाई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (KIX) कभी इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जाता था. लेकिन अब यह डूब रहा है. जापान हवाई अड्डे को और नुकसान से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई कर रहा है. हवाई अड्डे में लगातार धंसाव की समस्या आ रही है तथा यह ओसाका खाड़ी में डूब रहा है. द स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक द्वीप की सतह 3.84 मीटर नीचे धंस गई है. जिससे लंबे वक्त तक हवाई अड्डे की स्थिरता और तूफान प्रतिरोध क्षमता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं. इतना ही नहीं, 1980 में निर्माण शुरू होने के बाद से यह परियोजना लगभग 13.6 मीटर नीचे धंस चुकी है.
1994 में जब हवाई अड्डे का उद्घाटन हुआ था, तब इसे आधुनिक भूमि सुधार तकनीकों का उपयोग करके नरम समुद्री मिट्टी पर तैरने के लिए डिजाइन किया गया था. हालांकि, प्रारंभिक धंसाव अनुमान से अधिक था और संचालन के पहले 8 साल में लगभग 12 मीटर तक गिरावट आई. हवाई अड्डे की नरम मिट्टी की नींव उसका भारी वजन सहन नहीं कर पा रही है. समुद्र का बढ़ता दबाव और प्राकृतिक शक्तियां धीरे-धीरे इस इंजीनियरिंग के चमत्कार को गहराई की ओर खींच रही हैं. जिससे भविष्य में इसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है.
दस साल से अधिक समय तक कोई सामान न खोने का शानदार रिकार्ड बनाए रखने वाले इस हवाई अड्डे को 2024 में सामान प्रबंधन के लिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डा घोषित किया गया. इस जापानी हवाई अड्डे की शुरुआत में पास के ओसाका हवाई अड्डे पर भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से एक बढ़िया समाधान के रूप में तारीफ की गई थी. तब से कंसाई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (KIX) पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की यात्राओं का विस्तार हुआ है. ये एक महत्वपूर्ण विमानन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है.

KIX को अपने कर्मचारियों, दक्षता और वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है. 2024 में लगभग 3.06 करोड़ यात्रियों ने इसके टर्मिनलों से होकर 25 देशों के 91 शहरों की यात्रा की. 2018 में आए जेबी तूफान ने विनाशकारी बाढ़ लाकर डूब की समस्या से निपटने के महत्व को उजागर किया था. इसने हवाई अड्डे की कमजोरी को और भी साफ कर दिया था. तूफान के कारण आई बाढ़ के कारण इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था.

सड़क पर पानी भरे होने पर एम्बुलेंस ड्राइवर ने आने से किया मना, जान जोखिम में डाल खुद पहुंची प्रसूता

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भारी बारिश ने लोगों का जीवन बूरी तरह प्रभावित करके रख दिया है. नदी-नालों से बाहर बहते पानी के कारण सड़कों और पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है. इसके कारण कई हादसे भी हो रहे हैं. सड़कों में गड्डों के कारण कई हादसे भी हो रहे हैं. आए दिन खराब सड़क पर ट्रक या गाड़ियों के पलटने के मामले सामने आ रहे हैं. इसी बीच, नरसिंहपुर जिले से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है. वीडियो में नजर आ रहा है कि जिले के कुम्हडी गांव में एक प्रसूता के लिए एम्बुलेंस तो पहुंची, लेकिन पुलिया पर पानी होने के चलते एंबुलेंस चालक ने पुलिया पार नहीं की. इसके कारण उसे पैदल पुल पार करनी पड़ी और जान जोखिम में डालकर वे अस्पताल पहुंची.

उपसरपंच और महिला ने पार कराया पुल
पुल के ऊपर कम पानी होने के कारण प्रसूता को गांव के ही बुजुर्ग उपसरपंच और महिला ने पैदल पुलिया पार कराया. महज घुटने तक पानी होने की वजह से प्रसूता ने पुल पार किया और एंबुलेंस में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है. लेकिन, सवाल ये है कि पुलिया पैदल जब पार की जा सकता है तो इसपर से एंबुलेंस क्यों नहीं गया?

लीला साहू की यही है मांग
बता दें कि सीधी जिले की रहने वाली लीला साहू पिछले कई दिनों से खराब सड़कों को लेकर वायरल वीडियो बना रही है. खुद प्रेगनेंट होने के बावजूद वे खराब और जर्जर सड़कों के बीच पहुंचकर वीडियो में असलीयत को दिखाती हैं और सरकार से मामले में एक्शन लेने की मांग करती है. उन्होंने खास तौर से प्रसूताओं के लिए ही आवाज उठाई है, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य की सुविधाएं बदइंतजाम नजर आ रही है.

राजा हत्याकांड मामले में पहली जमानत, इन दो आरोपियों को कोर्ट से मिली राहत

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मध्य प्रदेश के इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या मामले में नया अपडेट सामने आया है. राजा की हत्या मामले में शिलांग पुलिस की न्यायिक हिरासत में कैद आरोपियों में से दो आरोपियों की जमानत मंजूर हो गई है. शिलांग की अदालत ने जमानत मंजूर कर ली है. फ्लैट मालिक लोकेंद्र तोमर और सुरक्षा गार्ड बलवीर जमानत पर बाहर आ गए हैं. बता दें कि इनकी न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद जमानत मंजूर की गई है. कानूनी सहायक ने उनकी जमानत के लिए अर्जी दी थी.

किस आरोप में दोनों थे अंदर?
तोमर और बलवीर पर बिजली व्यापारी सिलोम जेम्स के साथ सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप था. सिलोम जेम्स की जमानत पर सुनवाई 16 जुलाई को होनी है. राजा की हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी सोनम, राज और तीन अन्य न्यायिक हिरासत में अभी भी हैं.

क्या है पूरा मामला?
शिलांग की एक स्थानीय अदालत ने राजा की हत्या मामले के दो कथित सह-आरोपियों को जमानत दे दी है. सहायक लोक अभियोजक तुषार चंदा ने पुष्टि की है कि उस फ्लैट के मालिक, लोकेंद्र सिंह तोमर, जहां मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी मेघालय से भागने के बाद रुकी थी और परिसर के सुरक्षा गार्ड बलबीर अहिरवार को जमानत मिल गई है.

सिलोम जेम्स के जमानत पर 16 जुलाई को सुनवाई
इससे पहले, 2 जुलाई को अदालत ने एक अन्य सह-आरोपी, सिलोम जेम्स को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इंदौर निवासी जेम्स पर इंदौर के पर्यटक राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप है, जिनकी कथित तौर पर 23 मई को सोहरा में उनकी पत्नी सोनम ने हत्या कर दी थी. जेम्स के बचाव पक्ष के वकील द्वारा 16 जुलाई को अगली सुनवाई में ज़मानत याचिका दायर करने की उम्मीद है.

स्कूल स्टाफ भूलकर भी मीडिया से न करें बात, BEO Mainpur ने जारी किया गजब का फरमान

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक नया आदेश जारी किया गया है. इसके बाद से पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा हो रही है. गरियाबंद जिला के मैनपुर के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर की ओर से एक नया आदेश जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि सभी स्कूलों को मीडिया वालों से दूरी बनाकर रखनी है. बीईओ का ये आदेश कई जरूरी बातों के साथ जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है कि स्कूल साफ रखें, समय से चलाएं, आदि. लेकिन, इसके साथ ही ये भी आदेश दिया गया है कि मीडिया से दूरी बनाएं रखें. बता दें कि बीते कुछ दिनों से भारी बारिश के बाद कुछ सरकारी स्कूलों की छत गिरने का मामला लगातार मीडिया में सामने आ रहा है.

सरकारी स्कूलों के लिए क्या आदेश?
बीईओ द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कुल सात निर्देश जारी किए गए हैं. इनमें कहा गया है कि –

सरकार के निर्देशानुसार स्कूल का संचालन निर्धारित समय तक ही करें
विद्यालय का रखरखाव सही रखें
जर्जर भवन में स्कूल का संचालन न करें. व्यवस्थित स्थान पर शाला का संचालन करें, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो
मीडिया से किसी भी प्रकार का स्कूल के संबंध में बाईट या वर्जन देने से बचें
स्कूल की रसोई कक्ष और शौचालय साफ रखें
संकुल प्रचार्य/ संकुल समन्वयक प्रतिदिन अपने संकुल के स्कूलों का मॉनिटरिंग करें
विद्यालय के जरूरी दस्तावेज/ पंजी संधारण करें, जिसे उच्चाधिकारी के सामने समय पर प्रस्तुत किया जा सके
शिक्षकों और पत्रकारों में आक्रोश
इस नए आदेश के जारी होने के बाद ब्लॉक के तमाम स्कूलों के शिक्षकों और पत्रकारों में नाराजगी है. उनका कहना है कि इससे स्कूलों की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी. जब स्कूलों में जर्जर भवन, गंदे शौचालय या मिड-डे मील की गड़बड़ी होती है, तो मीडिया ही उसकी आवाज बनती है. इसके बाद कई बार सरकार मामले में संज्ञान लेकर एक्शन लेती है. लेकिन, इस आदेश के बाद छात्रों का भविष्य कहीं न कहीं अंधकार में नजर आ रहा है.

सीबीआई की FIR के बाद मान्यता पर तलवार! Zero ईयर घोषित हो सकता है रावतपुरा मेडिकल कॉलेज का ये सत्र

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फर्जी दस्तावेज, नकली मरीज और घोस्ट फैकल्टी के आधार पर मेडिकल कॉलेज की मान्यता दिलाने के सिंडिकेट का सीबीआई द्वारा पर्दाफाश करने के बाद राजधानी रायपुर के श्री रावतपुरा मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में है. रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के 2025-26 के सत्र को एनएमसी जीरो ईयर घोषित कर सकती है. जीरो ईयर का मतलब होता है कि मेडिकल कॉलेज में इस सत्र के लिए कोई एडमिशन नहीं दिया जाएगा. मेडिकल कॉलेज इस सत्र के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है.

ग्रामीणों को पैसे देकर मरीज दर्शाया
नवा रायपुर के पचेड़ा में स्थित श्रीरावतपुरा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को लेकर नए नए कारनामें सामने आ रहे है. सीबीआई ने FIR में जो बातें दर्ज की है उसे पचेड़ा गांव के आसपास गांव के लोगों भी अनौपचारिक रूप से मान रहे है. ग्रामीणों का कहना है कि जब भी मेडिकल कॉलेज में इंस्पेक्शन की टीम आती थी, गांव के मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता था. एक एक मरीज की जो दिहाड़ी होती है, उतना भुगतान किया जाता था. ग्रामीण से जब ये पूछा कि इसकी शिकायत आप लोगों ने क्यों नहीं की तो उनका कहना था कि ये बड़े लोग हैं, हम उनके खिलाफ बोलेंगे तो हमारा ही नुकसान होगा. इसलिये हम लोग कुछ नहीं कहते.

30 जून 2025 को एनएमसी की टीम ने रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया, जहां 150 से 250 एमबीबीएस सीटें बढ़ाने का आवेदन लंबित था.सीबीआई ने 10-15 दिन पहले कॉलेज की रेकी शुरू की, मान्यता प्रक्रिया पर नजर रखी.1-2 जुलाई 2025 को सीबीआई ने छत्तीसगढ़, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की.55 लाख रुपये की रिश्वत के लेनदेन के दौरान रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल तिवारी 3 डॉक्टर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के लोगों द्वारा रिश्वत बेंगलुरु में निरीक्षण टीम को दी गई, जो कॉलेज के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट देने के लिए थी.कॉलेज प्रबंधन ने फर्जी दस्तावेज, नकली मरीजों और गलत बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल मान्यता हासिल करने के लिए उपयोग किया सीबीआई ने 35 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिसमें एनएमसी और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हैं.
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अन्य लोगों की हो सकती है गिरफ्तारी
सीबीआई की FIR में रावतपुरा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन समेत 35 को आरोपी बनाया गया है. उस आधार पर सीबीआई के सूत्रों की मानें तो रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन रविशंकर महाराज, रिटायर्ड IFS संजय शुक्ला समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है. गौरतलब है कि सीबीआई की FIR में तीसरे नंबर पर रावतपुरा मेडिकल कॉलेज का नाम है, चौथे नंबर पर रवि शंकर जी महाराज का नाम दर्ज किया गया है. इस मामले में सीबीआई रावतपुरा सरकार के डायरेक्टर अतुल तिवारी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.

नक्सलगढ़ में भगदड़ , एक करोड़ 55 लाख के इनामी समेत 24 घंटे में 45 नक्सलियों ने डाले हथियार

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नक्सलवाद प्रभावित छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सुदूर अंचलों में सुरक्षाबलों के लगातार ऑपरेशन और बड़े माओवादियों के मारे से जाने से नक्सलियों में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई है. जान के लाले पड़ने के बाद नक्सली अब धड़ाधड़ आत्मसमर्पण करने रहे हैं. इसी कड़ी में शनिवार को सुकमा जिले में ₹1.18 करोड़ के इनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया.

इससे पहले शुक्रवार को बस्तर के नारायणपुर जिले की पुलिस के सामने एक साथ 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था. इनमें 14 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं. इन सरेंडर माओवादियों पर 37.05 लाख रुपये का इनाम घोषित था. बताया जाता है कि सरेंडर करने वाले माओवादी लंबे समय से अबूझमाड़ के जंगलों में खूनी वारदातों को अंजाम दे रहे थे. इन्हें मिलाकर पिछले 24 घंटों में कुल 45 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास जताया है.

‘बंदूक की गोली नहीं, विकास की बोली’
नक्सलियों की बड़ी संख्या में समर्पण से खुश छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभूतपूर्व घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स के माध्यम से व्यक्त की. अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि विश्वास की उस जीत का प्रतीक है, जो हमारी सरकार ने ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी जन उन्मुख योजनाओं के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया है. अब यहां बंदूक की गोली नहीं, विकास की बोली सुनाई दे रही है.

15 महीनों में 1521 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले 15 महीनों में 1521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की पहुंच और विश्वास निरंतर बढ़ा है. यह सफलता राज्य सरकार की ‘नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025′ की सकारात्मकता को भी दर्शाती है, जिसके तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को न केवल सामाजिक सम्मान, बल्कि पुनर्वास और आजीविका का अवसर भी दिया जा रहा है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन प्रधानमंत्री के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे सुशासन के विजन का सजीव उदाहरण है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारा प्रदेश तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होगा और बस्तर क्षेत्र का प्रत्येक नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा.

आंगनबाड़ियों में घटिया सामान की आपूर्ति का मामला मंत्री राजवाड़े के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई, छह सप्लाई एजेंसियां ब्लैक लिस्टेड

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आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए भेजी गई सामग्रियों की गुणवत्ता पर उठे सवालों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने त्वरित और सख्त रुख अपनाया। मंत्री राजवाड़े के निर्देश पर राज्य स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। जिसमें संयुक्त संचालक (वित्त), सीएसआईडीसी और जीईसी रायपुर के तकनीकी प्रतिनिधि, संबंधित जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारी, सहायक संचालक (आईसीडीएस) और दो तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों SGS इंडिया और IRCLASS सिस्टम्स के विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने सभी जिलों में सामग्री की गुणवत्ता का भौतिक परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट संचालनालय को सौंप दिया।

रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्रदायकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए छह सप्लायरों मेसर्स नमो इंटरप्राईजेस, मेसर्स आयुष मेटल, मेसर्स अर्बन सप्लायर्स, मेसर्स मनीधारी सेल्स, मेसर्स ओरिएंटल सेल्स, मेसर्स और सोनचिरिया कॉर्पाेरेशन एजेंसियों को जेम पोर्टल से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, भविष्य में ये एजेंसिया किसी भी प्रकार की सामग्रियों की शासकीय सप्लाई भी नही कर पाएगी। विभाग द्वारा इन सभी से घटिया सामग्रियों को वापस मंगाकर मानकों के अनुरूप सामग्री की आपूर्ति कराई गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कार्रवाई राज्य सरकार की दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पारदर्शिता का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री स्वयं बार-बार यह दोहरा चुके हैं कि बच्चों, महिलाओं और गरीबों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2024-25 में कुल 23.44 करोड़ रुपये की सामग्री जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे 40 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिसे विभाग ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग ने बताया कि पूरी क्रय प्रक्रिया पारदर्शी रही और सभी सामग्रियों की सप्लाई से पहले और सप्लाई के बाद गुणवत्ता जांच कराई गई।

राज्य स्तरीय जांच समिति द्वारा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा और जांजगीर-चांपा जिलों में जाकर प्रदाय की गई सामग्रियों का गहन निरीक्षण किया गया। समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ टेबल स्थानों पर असेंबल नहीं हुए थे, जिन्हें बाद में सही कराया गया। अनाज कोठी भारतीय मानक (ठप्ै) के अनुरूप नहीं मिलने पर मेसर्स नमो इंटरप्राइजेस और आयुष मेटल से सामग्री बदली गई और दोनों को जेम से प्रतिबंधित किया गया। स्टील ट्रे की साइज और वजन में भिन्नता पर मेसर्स अर्बन सप्लायर्स, मनीधारी सेल्स व ओरिएंटल सेल्स से रिप्लेसमेंट कराया गया। तवा की गुणवत्ता कम मिलने पर मेसर्स सोनचिरैया कॉर्पाेरेशन को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। कढ़ाई हल्की वजन भिन्नता को छोड़कर अधिकांश मापदंडों पर ठीक पाई गई। अन्य सामग्रियां जैसे अलमारी, कुकर, चम्मच व गिलास अधिकतर स्थानों पर मानकों के अनुरूप पाई गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खराब सामग्री के लिए ऐजेंसियों को कोई भुगतान नहीं किया गया है। विभाग की नीति के तहत भुगतान केवल गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही होता है, जिससे प्रदायकर्ताओं की मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। सभी दोषपूर्ण सामग्रियों को वापस लेकर मानक सामग्री दी जा चुकी है।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पूरे मामले पर कहा, “बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमने तत्परता और पारदर्शिता के साथ जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की है। हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों तक केवल सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही पहुंचे।”

भारत पेट्रोलियम की गैस पाइपलाइन परियोजना को मिली राहत, नगर पालिका का निर्णय को कलेक्टर ने किया निलंबित

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कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डी. राहुल वेंकट द्वारा भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन” परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को एम.डी.पी.ई. माध्यम घनत्व पॉलीथिन पाइपलाइन डाया 32 mm / 63 mm / 90 mm / 125 mm के माध्यम से नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में भूमिगत प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बिछाने की अनुमति 15 मार्च 2024 को दी गई थी, जिसमें कार्य पूर्ण करने की 6 माह की शर्त अधिरोपित की गई थी। निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण न होने पर अनुमति निरस्त मानी जानी थी, किंतु शर्तों के अनुसार भारत पेट्रोलियम द्वारा समयावधि बढ़ाने हेतु नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ को आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड छत्तीसगढ़-1 गैस टेरिटोरी द्वारा क्रमशः 5 सितंबर 2024 और 7 जून 2025 को विस्तार हेतु आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिस पर नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ की साधारण बैठक 12 जून 2025 में अतिरिक्त निर्णय क्रमांक 13(1) के तहत समयावधि विस्तार के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया, परंतु निर्णय में कोई कारण नहीं दर्शाया गया। मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 7 जुलाई 2025 को बीपीसीएल को निर्णय की सूचना दी गई, जिसे लेकर कलेक्टर कार्यालय द्वारा 9 जुलाई को मांगी गई स्पष्टीकरण पर नगर पालिका ने अपने निर्णय पर स्थिर रहने का पत्र प्रस्तुत किया।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, दस्तावेजों और भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड के पत्र दिनांक 4 जुलाई 2025 का अवलोकन करने पर यह तथ्य सामने आया कि यह परियोजना न केवल मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले बल्कि आगे चलकर कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा एवं बलरामपुर तक विस्तारित होगी, जिससे इस परियोजना में वृहद जनहित निहित है। यह परियोजना भारत सरकार की एक राष्ट्रीय महत्व की योजना है, जिसे भारत पेट्रोलियम जैसा अर्धशासकीय लोक उपक्रम क्रियान्वित कर रहा है। यह भी स्पष्ट किया गया कि नगर पालिका परिषद द्वारा जारी मूल अनुमति में ही शर्त संख्या 14 के तहत अवधि विस्तार हेतु आवेदन देने का प्रावधान था, जिसकी पूर्ति बीपीसीएल द्वारा समय रहते कर दी गई थी। फिर भी, परिषद द्वारा उसका निराकरण बिना किसी कारण के अस्वीकार करना न केवल प्रशासनिक रूप से अनुचित बल्कि वृहद जनहित की अवहेलना भी है। उपरोक्त समस्त तथ्यों और विश्लेषण के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ का निर्णय “संकुचित दृष्टिकोण” और “कारण रहित प्रस्ताव” पर आधारित है, जो राष्ट्रीय हित एवं जनसाधारण की सुविधा के विपरीत है। इसलिए नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ की साधारण बैठक 12 जून 2025 के अतिरिक्त निर्णय क्रमांक 13(1) को छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 323(1) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
साथ ही भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड, छत्तीसगढ़-1 गैस टेरिटोरी, अंबिकापुर को निर्देशित किया गया है कि परियोजना कार्य के दौरान लोक सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने की स्थिति में वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।