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बैल की तरह हल बांधकर खेत जुतवाया, Love मैरिज करने पर प्रेमी जोड़े को मिली अमानवीय सजा

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ओडिशा के रायगढ़ा से एक बेहद ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां प्रेमी जोड़े को शादी में बंधने की अमानवीय सजा दी गई. बैल की तरह हल बांधकर उनसे खेत जुतवाया गया है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इसके बाद लोग इसकी खूब आलोचना भी कर रहे हैं.

वायरल हो रहे वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक प्रेमी युगल को बैल की तरह हल बांधकर खेत जुतवाया जा रहा है. उन्हें डंडों से पीटा भी जा रहा है. उनके साथ यह दुर्व्यवहार करने के बाद अपने गांव से खदेड़ दिया गया.

घटना उड़ीसा के रायगड़ा जिले के कल्याणसिंहपुर प्रखंड के शिकारपाई पंचायत के कंजामयोजी गांव की है .दरअसल यहां के युवक और युवती को प्रेम हो गया. बताया जा रहा है कि दोनों रिश्ते में भाई-बहन हैं. इन दोनों प्यार में पड़ने के बाद शादी के बंधन में बंध गए थे. बताया जा रहा है कि युवक- युवती की चाची का बेटा है. इस तरह की शादी को स्थानीय परंपराओं के मुताबिक एक वर्जित माना गया है. दोनों की शादी गांव के कुछ लोगों को नागवार गुजरी. ऐसे में समाज के तथाकथित ठेकेदारों ने इस जोड़े को अमानवीय सजा दी. w

छत्तीसगढ़ में बढ़े बिजली के दाम, जानिए सरकार ने कितने रुपये का दिया झटका

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छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission) ने शुक्रवार को सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों (Hike in Electricity Rates) में औसतन 1.89 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी. नई दरें एक जुलाई से प्रभावी हो गई हैं.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि वाम चरमपंथ प्रभावित जिलों में संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मोबाइल टावरों को ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है.

बयान में कहा गया है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर और दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण तथा सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण में संचालित अस्पताल, नर्सिंग होम और जांच केंद्रों के लिए प्रचलित विद्युत दरों के ऊर्जा प्रभार में दी जा रही पांच प्रतिशत की छूट को जारी रखा गया है.

घरेलू उपभोक्ता के लिए नई विद्युत दरें
0 से 100 यूनिट तक प्रति यूनिट ₹4.10 पैसे प्रति यूनिट
100 से 200 यूनिट तक ₹4.20 पैसे प्रति यूनिट
201 से 400 यूनिट तक ₹5.60 पैसे प्रति यूनिट
401 से 600 यूनिट तक ₹6.50 रुपये प्रति यूनिट
₹601 यूनिट से अधिक पर ₹8.30 प्रति यूनिट
पुरानी विद्युत दर थी
0 से 100 यूनिट पर ₹3.90 पैसे प्रति यूनिट
101 से 200 यूनिट तक ₹4.10 पैसे प्रति यूनिट
और 201 से ₹400 यूनिट तक ₹5.50 पैसे प्रति यूनिट
401 से 600 तक ₹6.50 पैसे प्रति यूनिट
601 से उससे अधिक पर ₹8.10 पैसे प्रति यूनिट
घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली की नई दरें
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों (Electricity Tariffs) में 0.10 रुपये से 0.20 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है. इसका असर राज्य के लगभग 60 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. राज्य में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण तीन सरकारी कंपनियां बिजली सेवाओं का प्रबंधन करती हैं.

इन लोगों पर नहीं पड़ेगा बढ़ी बिजली दरों का असर
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने एक बयान में कहा कि बिजली दरों में मौजूदा दरों की तुलना में औसतन केवल 1.89 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो नाममात्र है. सिंह ने कहा कि कृषि उपभोक्ताओं के लिए कुछ मदों में दर में वृद्धि की गई है, जिसका भार प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है. इसलिए इससे कृषि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह का अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा. इसके अलावा, अस्थायी कनेक्शनों, आदिवासी अंचलों, मुरमुरा-पोहा उद्योगों, प्रिंटिंग प्रेस आदि के लिए रियायत बढ़ाई गई है या यथावत रखी गई है.

बयान में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी को विद्युत की लागत 7.02 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को न्यूनतम 4.10 रुपये की दर से विद्युत आपूर्ति की जाती है. सिंह ने कहा कि निम्न मध्यम वर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए विद्युत दरों में 10 पैसे प्रति यूनिट और अन्य घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 20 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है.

मोबाइल टावरों के बिजली की दरों में कटौती
बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार अधिसूचित वाम चरमपंथ प्रभावित जिलों में संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मोबाइल टावर की स्थापना कर रही है. इन क्षेत्रों में आने वाले सभी मोबाइल टावरों के ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है.

कृषि पंपों के लिए दरों में 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है. कृषि पंपों के विद्युत देयकों का भुगतान राज्य शासन द्वारा किया जाता है, इसलिए यह भार राज्य शासन स्वयं वहन करेगा. वहीं, गैर घरेलू उपभोक्ताओं की विद्युत दरों में 25 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है.

इसमें कहा गया है कि महिला सशक्तिकरण के लिए पंजीकृत महिला स्व सहायता समूहों द्वारा संचालित उद्योग संबंधी गतिविधियों और व्यावसायिक गतिविधियों को ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट जारी रखी गई है.

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण तथा सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण में संचालित अस्पताल, नर्सिंग होम एवं जांच केंद्रों के लिए प्रचलित विद्युत दरों के ऊर्जा प्रभार में दी जा रही पांच प्रतिशत की छूट को जारी रखा गया है.

पोहा और मुरमुरा मिल को ऊर्जा प्रभार में पांच प्रतिशत की छूट को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. अग्रिम भुगतान करने वाले सभी उपभोक्ताओं को दी जाने वाली 0.50 प्रतिशत छूट को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किया गया है. ऑफसेट प्रिन्टर्स और प्रिंटिंग प्रेस उपभोक्ताओं को गैर घरेलू से हटाकर औद्योगिक श्रेणी में सम्मिलित किया गया है जो कि पहले की अपेक्षा कम है.

TCS को झटका, तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट प्राइस, क्या स्‍टॉक बेचने में ही है भलाई

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टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के पहली तिमाही के नतीजे न बाजार को पसंद आए हैं और न ही ब्रोकरेज हाउसेज को. यही वजह है कि तिमाही परिणाम आने के बाद जहां टीसीएस शेयर गिर गया है, वहीं कई ब्रोकरेज ने भी स्‍टॉक की रेटिंग घटा दी है. अप्रैल-जून तिमाही में टीसीएस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6 फीसदी बढ़कर 12760 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले मुनाफा 12040 करोड़ रुपये रहा था. ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड बेसिस पर रेवेन्यू सालाना आधार पर 1.31 फीसदी बढ़कर 63437 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के भारतीय कारोबार में तिमाही आधार पर 31% की गिरावट दिखी तो यूरोप और यूके बिजनेस भी दबाव में ही नजर आया. शुक्रवार को टीसीएस का शेयर 3.47 फीसदी गिरकर 3264.50 रुपये पर बंद हुआ.
तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म्‍स नोमुरा और यूबीएस ने टीसीएस शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है. ब्रोकरेज का मानना है कि डील्स हासिल करना कंपनी की निर्धारित सीमा के अंदर रहा, लेकिन मार्च तिमाही की तुलना में कम रहा. अमेरिकी डॉलर में रेवेन्यू घटा, जबकि उम्मीद इसके बढ़ने की थी.

यूबीएस ने घटाया टारगेट प्राइस
ब्रोकरेज यूबीएस ने टीसीएस शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग तो बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को ₹4,050 से घटाकर ₹3,950 कर दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी अभी भी वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री एवरेज ग्रोथ डिलीवर करने की क्षमता रखती है. कंपनी की मौजूदा वैल्युएशन कंफर्टेबल दिख रहा है जिससे आगे स्टॉक में गिरावट का रिस्क कम नजर आ रहा है.

नोमूरा ने भी टीसीएस शेयर पर अपनी ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को ₹3,820 से घटाकर ₹3,780 कर दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए ग्रोथ की संभावना अभी भी अस्पष्ट है. ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 26-28 के ईपीएस अनुमानों में 1-2% की कटौती की है.
एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन ने बरकरार रखी न्‍यूट्रल रेटिंग
HSBC और जेपी मॉर्गन ने टीसीएस शेयर पर ‘न्‍यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है. एचबीएसई ने टीसीएस शेयर पर ₹3,665 का टारगेट प्राइस दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में कमी आई, जिसका मुख्य कारण बीएसएनएल थी. लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में भी कमजोरी देखी गई. इससे भी ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि टीसीएस भी प्रॉफिट में रहने के लिए संघर्ष करती दिख रही है.

रूस से तेल खरीदा तो चुकानी होगी कीमत… अमेर‍िका आख‍िर क‍िसे दे रहा धमकी? भारत-चीन कनेक्‍शन समझ‍िए

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अमेरिका एक बार फिर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बना रहा है. इस बार मामला सीधे तौर पर भारत और चीन से जुड़ा है. अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और लिंडसे ग्राहम ने एक नया बिल पेश किया है, जो रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाने की बात करता है. इस कानून के जरिए ऐसे देशों पर 500% तक का टैक्स लगाने का प्रस्ताव है. इसका सबसे बड़ा असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो रूस से करीब 70% ऊर्जा खरीदते हैं.
अमेरिकी सांसदों के मुताबिक, रूस की ऊर्जा खरीद का 70% हिस्सा भारत और चीन मिलकर खरीदते हैं. ऐसे में ये कानून इन्हीं दो देशों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करेगा. ब्लूमेंथल ने यहां तक कहा कि ये प्रतिबंध पुतिन के फंडर्स को मजबूर करेगा कि वे अब तय करें कि वो किस ओर हैं रूस की ओर या दुनिया के अन्‍य देशों के साथ.

अमेरिका क्यों है नाराज?
अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदकर भारत और चीन पुत‍िन को ताकत दे रहे हैं. यही वजह है कि अब अमेरिका चाहता है कि जो देश रूस से व्यापार करते हैं, उन पर आर्थिक प्रत‍िबंध लगाए जाएं. हालांकि यह बिल अभी प्रस्तावित है और इसमें राष्ट्रपति को सहयोगी देशों को 180 दिनों तक छूट देने का भी प्रावधान है, जो भारत के लिए एक संभावित राहत हो सकती है.
आलोचना भी कम नहीं
जहां कुछ लोग इस कानून को रूस को सबक सिखाने वाला हथौड़ा बता रहे हैं, वहीं अमेरिका में ही इसके खिलाफ आवाजें उठ रही हैं. आलोचकों का कहना है कि इस तरह की आर्थिक सख्ती से वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतें बिगड़ सकती हैं. सोशल मीडिया पर बहस गर्म है. कुछ लोग कह रहे हैं, पहले अमेरिका की समस्याएं सुलझाओ, तो कुछ इसे रूस को जवाब मान रहे हैं.

राफेल से घातक फाइटर जेट, 200 KM दूर से ही दुश्‍मन को करेगा ट्रैक, ब्रह्मोस मिसाइल से लैस होगा यह देसी महाबली

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किसी भी देश के डिफेंस सिस्‍टम की मजबूती को उसकी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की ताकत से आंका जाता है. आर्म्‍ड फोर्सेज के तीनों अंग जितना आ‍धुनिक और अपग्रेड होंगे, वे देश दुश्‍मनों में उतना ही भय और डर पैदा करने में सक्षम होंगे. ग्‍लोबल स्‍टेज पर उसका दबदबा और रसूख भी उतना ही ज्‍यादा प्रभावी होगा. अमेरिका, रूस, चीन जैसे देश न सिर्फ बड़ी इकोनॉमी हैं, बल्कि इनका डिफेंस सिस्‍टम भी उतना ही मजबूत है. भारत भी अब टॉप इकोनॉमी वाला देश बन गया है, जिसका असर डिफेंस सिस्‍टम पर भी देखा जा सकता है. आज का भारत अपने दम पर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने की तैयारी में जुटा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 के साथ ही स्‍वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्‍टम ने भी अपनी ताकत दिखाई. ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का फायर पावर देख दुनिया भौंचक्‍की रह गई. पाकिस्‍तान ने एक ही झटके में घुटने टेक दिया. इस दौरान एयरफोर्स के अविश्‍वसनीय महत्‍व का भी पता चला. साथ ही कुछ कमियां भी सामने आईं, जिन्‍हें पूरा करने के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है. खरीद प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, ताकि इमरजेंसी परचेज में किसी तरह की बाधा पैदा न हो. सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है देश को हर तरफ और हर तरह के दुश्‍मन से महफूज रखने के लिए एयरफोर्स को फाइटर जेट की 41 स्‍क्‍वाड्रन की जरूरत है, जबकि उपलब्‍ध 31 स्‍क्‍वाड्रन है. नेशनल डिफेंस की इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. एक तरफ फाइटर जेट खरीदे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ स्‍वदेशी तकनीक से लड़ाकू विमान बनाने के प्रोजेक्‍ट को भी रफ्तार दी जा रही है. फिलहाल तेजस Mk-1A के अपग्रेडेड वर्जन तेजस Mk-2 नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट को डेवलप किया जा रहा है. चार से पांच साल में इसके इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO के सीनियर साइंटिस्‍ट डॉक्‍टर रविशंकर एसआर ने हाल में ही बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस Mk-2 फाइटर जेट को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्‍होंने दावा किया कि नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट तेजस Mk-2 आधुनिक तकनीक और वेपन सिस्‍टम से लैस होगा जो इसे फ्रांस की डिफेंस कंपनी डसॉल्‍ट द्वारा डेवलप राफेल लड़ाकू विमान के टक्‍कर का बनाएगा. कुछ डिफेंस एक्‍सपर्ट को तो यह भी मानना है कि तेजस Mk-2 कई मायनों में राफेल मल्‍टीरोल एयरक्राफ्ट से भी ज्‍यादा मॉडर्न और घातक होगा. टेक्‍नोलॉजिकल स्‍टैंडर्ड के आधार पर देखें तो इस दावे में दम दिखता है. रडार से लेकर विंगफ्रेम, वजन, पेलोड कैपेसिटी, मिसाइल इंटीग्रेशन और टारगेट को पता लगाने के मामले में तेजस Mk-2 फाइटर जेट राफेल पर भारी दिखता है. सबसे बड़ी बात यह है कि तेजस Mk-2 जेट को स्‍वदेशी तकनीक से डेवलप किया जा रहा है. इस तरह यह राफेल के मुकाबले काफी किफायती भी है. साथ ही देश में विकस‍ित हथियार और मिसाइल को इसके साथ इंटीग्रेट करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी. बता दें कि अन्‍य देशों से खरीदे गए फाइटर जेट में देसी वेपन को इंस्‍टॉल करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सोर्स कोड शेयर न होने की वजह से अन्‍य तरह की दिक्‍कतें भी पेश आती हैं. हाल में इसका एक नमूना देखने को मिला, जब ब्रिटिश F-35 लड़ाकू विमान की केरल में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. ब्रिटेन ने इसे अमेरिका से खरीदा है. तमाम कोशिशों के बावजूद इस फाइटर जेट को ब्रिटिश इंजीनियर ठीक नहीं कर सके. अब इसे टुकड़ों में वापस ले जाने की तैयारी है. एफ-35 लड़ाकू विमान में आई यह दिक्‍कत इंपोर्टेड फाइटर जेट की समस्‍या को एक बार फिर से दुनिया के सामने लाकर रख दिया है. ऐसे में भारत के लिए देसी फाइटर जेट डेवलप करना जरूरी हो गया है.

तेजस Mk-2 फाइटर जेट, भारत की तकनीकी ताकत
तेजस Mk-2 नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट है. यह तेजस Mk-1A का उन्‍नत संस्‍करण है. तेजस Mk-2 जेट इंजन वेपन और रडार सिस्‍टम के मामले में पूर्व के तेजस विमान से कहीं आगे है. इसे इंडियन एयरफोर्स की जरूरतों के हिसाब से डेवलप किया जा रहा है, ताकि यह आने वाले साल में जगुआर और मिराज-200 जैसे लड़ाकू विमान के बेड़े को रिप्‍लेस कर सके. स्‍वभाविक है कि यह जगुआर और मिराज-2000 जैसे जेट से कहीं ज्‍यादा अपग्रेड और एडवांस है. हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (HAL) और डीआरडीओ तेजस Mk-2 को इस तरह से डेवलप कर रहा है कि यह एयरफोर्स की मॉडर्न और मल्‍टीरोल जरूरतों को पूरा कर सके. ऐसे में इस फाइटर जेट में कई ऐसी तकनीक को एड किया गया है, जो इसे तेजस एमके-1ए से ज्‍यादा ताकतवर और एडवांस बनाता है.

रिपोर्ट्स की मानें तो तेजस Mk-2 वजन और इंजन के मामले में मौजूदा राफेल फाइटर जेट से कहीं ज्‍यादा एडवांस होगा. तेजस Mk-2 में अमेरिकी जेट इंजन निर्माता कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा डेवलप F414-INS6 का इस्‍तेमाल किया गया है. यह इंजन 98 kN (किलो न्‍यूटन) का थ्रस्‍ट देने में सक्षम है. बता दें कि जो जेट इंजन जितना ज्‍यादा थ्रस्‍ट प्रोड्यूस करता है, उस एयरक्राफ्ट की रफ्तार उतनी ज्‍यादा होती है. तेजस Mk-1A में 80 से 85 kN थ्रस्‍ट पैदा करने वाला इंजन लगाया गया है. दूसरी तरफ, राफेल जेट में दो साफ्रान M88 इंजन का इस्‍तेमाल किया गया है. जानकारी के अनुसार, साफ्रान M88 इंजन जेट को 75 kN का थ्रस्‍ट देने में सक्षम है. वजन की बात की जाए तो हल्‍के एयरफ्रेम के साथ तेजस Mk-2 जेट का वजन 13.5 टन (13,500 किलोग्राम) है. वहीं, राफेल फाइटर जेट का वेट 15.3 टन यानी 15,300 किलो है. कम वजन तेजस Mk-2 को ज्‍यादा रफ्तार के साथ दुश्‍मनों पर अटैक करने में सक्षम बनाता है.

वेपन सिस्‍टम और कॉम्‍बैट रेंज के मामले में तेजस Mk-2 जेट डसॉल्‍ट द्वारा डेवलप राफेल लड़ाकू विमान से ज्‍यादा उन्‍नत होने वाला है. राफेल जेट में दुनिया की सबसे खतरनाक और घातक मिसाइल में शुमार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल फिलहाल फिट नहीं किया जा सकता है. इस दिक्‍कत के चलते ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Su-30MKI से पाक‍िस्‍तान पर ब्रह्मोस मिसाइल दागनी पड़ी थी. यदि राफेल इसमें सक्षम होता तो दुश्‍मन के सीने पर और गहरे जख्‍म दिया जा सकता था. वहीं, तेजस Mk-2 में ब्रह्मोस मिसाइल के नेक्‍स्‍ट जेनरेशन को इंटीग्रेट करना आसान होगा. इसके अलावा देसी महाबली फाइटर जेट में घातक अस्‍त्र MK-2 मिसाइल भी इंस्‍टॉल किया जा सकेगा. जानकारी के अनुसार, तेजस Mk-2 6,500 किलोग्राम पेलोड के साथ उड़ान भरने में सक्षम होगा. तेजस Mk-2 का कॉम्‍बैट रेंज 2500 किलोमीटर होगा. ऐसे में चीन और पाकिस्‍तान को मुकम्‍मल और तरीके से जवाब देना संभव होगा. राफेल जेट का कॉम्‍बैट रेंज 1850 किलोमीटर है. तेजस Mk-2 फाइटर जेट AESA रडार सिस्‍टम से भी लैस होगा, जिससे टारगेट को 200 किलोमीटर दूर से ही पता लगाना संभव हो सकेगा. ऐसे में एयरफोर्स की अटैकिंग पावर काफी बढ़ जाएगी.

स्कूलों में खत्म होगी बोरियत, मजेदार बनेगी पढ़ाई, एनसीईआरटी की नई किताबों से बंद होगा रटने का दौर

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एनसीईआरटी ने सत्र 2025-26 से क्लास 5 और 8 के लिए नई किताबें लॉन्च की हैं. ये नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 पर बेस्ड हैं. एनसीईआरटी की नई किताबें बच्चों में क्रिएटिविटी, जिज्ञासा और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई हैं. क्लास 8 की नई किताबों में ‘Curiosity’ (विज्ञान), ‘Kaushal Bodh’ (वोकेशनल एजुकेशन), ‘Malhaar’ (हिंदी) और ‘Poorvi’ (अंग्रेजी) शामिल हैं.

एनसीईआरटी की नई किताबें भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक उपलब्धियों और नैतिक मूल्यों पर फोकस्ड हैं. क्लास 8 की साइंस की किताब ‘Curiosity’ में भारत की मॉडर्न उपलब्धियों को शामिल किया गया है. इसमें कोविड-19 वैक्सीन, मेक इन इंडिया पहल, चंद्रयान मिशन, आयुर्वेद सिद्धांत और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर कई चैप्टर्स हैं. ये विषय बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारत की ग्लोबल उपलब्धियां उजागर करते हैं.

अब मज़ेदार लगेंगी क्लासेस
कक्षा 8 की नई किताबें काफी रोचक हैं. इन्हें सरल भाषा में लिखा गया है और दूरदर्शिता के हिसाब से डिजाइन किया गया है.

1- ‘Curiosity’ विज्ञान की नई किताब है. इसके 18 चैप्टर्स में केमिस्ट्री, फिजिक्स और और बायोलॉजी को कवर किया गया है. इसमें प्रैक्टिकल एक्टिविटीज और असल जिंदगी के उदाहरणों पर फोकस किया गया है. इसमें जेनेटिक्स, इकोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय सरलता से समझाए गए हैं.

2- ‘Kaushal Bodh’ व्यावसायिक शिक्षा यानी वोकेशनल एजुकेशन पर फोकस्ड है. इससे स्टूडेंट्स को स्किल बेस्ड एजुकेशन मिलेगी और वे भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार हो सकेंगे.
3- ‘Poorvi’ (अंग्रेजी) में थीम बेस्ड 5 यूनिट्स हैं. इसमें मेजर सोमनाथ शर्मा की वीरता, वर्गीज कुरियन की ‘श्वेत क्रांति’ और Physicist बिभा चौधरी की कहानियां शामिल हैं. ये सक्सेस स्टोरी साहस, दयालुता और वैज्ञानिक जिज्ञासा जैसे मूल्यों को मोटिवेट करती हैं.
4- कक्षा 8 में ‘Malhaar’ (हिंदी) और ‘Kriti’ (कला शिक्षा) नामक किताबें भी लॉन्च की गई हैं. Kriti के तहत थिएटर, संगीत और ड्रामा को नियमित विषयों के रूप में पढ़ाया जाएगा. इससे कला शिक्षा को अनिवार्य बनाया गया है. यह NEP 2020 की रिकमेंडेशन पर आधारित है.
5- कक्षा 5 के लिए ‘Santoor’ (अंग्रेजी) और ‘Veena’ (हिंदी) लॉन्च की गई हैं. छोटे बच्चे इन किताबों से रोचक तरीके में भाषा सीख सकेंगे. इन किताबों में एक्टिविटी-बेस्ड टीचिंग पर फोकस किया गया है ताकि बच्चे खेल-खेल में नया सीख सकें.

एनसीईआरटी की नई किताबें कहां मिलेंगी?
NCERT ने इन किताबों को NEP 2020 के तहत लॉन्च किया है लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं. नई किताबें अभी तक ऑनलाइन पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं. Amazon या लोकल दुकानों में इनकी कमी की शिकायतें मिली हैं. कुछ अभिभावकों और शिक्षकों ने NCERT से इन किताबों के PDF वेबसाइट पर अपलोड करने की मांग की है. NCERT ने 15 करोड़ किताबें छापने की योजना बनाई है. डिलीवरी को आसान बनाने के लिए Amazon, Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म के साथ पार्टनरशिप भी की है.

यहां से लें नई किताबें
एनसीईआरटी वेब पोर्टल – https://ncertbooks.ncert.gov.in
NCERT ने इन किताबों को Amazon पर भी लिस्ट किया है.
1. Curiosity : https://amzn.in/d/1plvvnz
2. Kaushal Bodh: https://amzn.in/d/gm1ZMRu

वाहन मालिकों को बड़ी राहत, अब मनपसंद नंबर का दोबारा उपयोग संभव

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राज्य सरकार ने आम नागरिकों को एक और महत्वपूर्ण सुविधा का उपहार दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए यह सुविधा प्रदान की गई है कि अब वाहन मालिक अपने पुराने वाहन के मनपसंद या च्वाईस नंबर का उपयोग नए वाहन में भी कर सकेंगे।
परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश एवं परिवहन आयुक्त श्री डी. रविशंकर ने बताया कि इस संबंध में विभाग द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इस नई व्यवस्था से आमजन को सुविधा मिलेगी और उनकी पसंद के नंबर को फिर से उपयोग में लाने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय न केवल जनता की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि परिवहन विभाग की सेवाओं को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाएगा।

परिवहन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब वाहन स्वामी जिनके पुराने वाहनों का पंजीयन विधिपूर्वक निरस्त हो चुका है, वे उसी श्रेणी के नए या अन्य राज्य से एनओसी लेकर आए वाहनों में पुराने पंजीयन नंबर को पुनः प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए वाहन मालिकों को निर्धारित शुल्क का ऑनलाईन भुगतान करना होगा। यदि पुराना नंबर सामान्य (नॉन-फैंसी) हो, तब भी वाहन स्वामी शुल्क अदा कर संबंधित परिवहन कार्यालय से वही पंजीयन क्रमांक प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा केवल नए वाहनों या अन्य राज्यों से लाए गए वाहनों पर लागू होगी। पहले से छत्तीसगढ़ में पंजीकृत वाहनों के लिए यह सुविधा मान्य नहीं होगी।

फेनीटोइन इंजेक्शन की गुणवत्ता संबंधी प्रकरण पर सीजीएमएससीएल का स्पष्टीकरण

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हाल ही में फेनीटोइन इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायत के संदर्भ में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) द्वारा स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि संस्था ने शिकायत पर तत्काल प्रभाव से गंभीरता और पारदर्शिता के साथ संज्ञान लेते हुए समुचित कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

राज्य के एक शासकीय स्वास्थ्य संस्थान से Phenytoin Sodium Injection IP 100mg/ml (Batch No. 409B) में कणीय संदूषण (particulate matter) की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत मिलते ही CGMSCL द्वारा उक्त बैच का उपयोग तत्काल रोकने के निर्देश जारी किए गए तथा सभी संबंधित संस्थानों को “Stop Use Advisory” भेजी गई।

शिकायत की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित निर्माता फर्म (दिल्ली स्थित) को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया है। साथ ही कंपनी से QC संबंधित दस्तावेज, विनिर्माण विवरण तथा परीक्षण रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने हेतु कहा गया है।

यह बैच प्रदेश के अन्य संस्थानों में भी वितरित किया गया था, किंतु अब तक किसी अन्य जिले से गुणवत्ता संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद CGMSCL ने सभी जिलों को अपने स्टॉक की सतर्कता से जांच करने के निर्देश जारी किए हैं।
संबंधित बैच के नमूने NABL मान्यता प्राप्त तृतीय पक्ष प्रयोगशालाओं को परीक्षण हेतु भेजे गए हैं। परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत, यदि दोष प्रमाणित होता है, तो निर्माता के विरुद्ध अनुबंध समाप्ति, ब्लैकलिस्टिंग और आपूर्ति पर स्थायी प्रतिबंध जैसी कठोर कार्यवाही की जाएगी।

CGMSCL अपनी स्थापना के उद्देश्य के अनुरूप राज्य के नागरिकों को गुणवत्तायुक्त, सुरक्षित एवं प्रमाणित औषधियाँ उपलब्ध कराने हेतु प्रतिबद्ध है। संस्था Zero Tolerance Policy का पालन करती है और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता। शिकायत प्राप्त होते ही त्वरित, पारदर्शी एवं निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

यह उल्लेखनीय है कि Phenytoin Injection एक जीवन रक्षक औषधि है, जिसका उपयोग मिर्गी के दौरे, सिर की चोट, न्यूरोलॉजिकल आपात स्थिति एवं ऑपरेशन के दौरान किया जाता है। इस कारण इसकी गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से अस्वीकार्य है।

निष्कर्षतः, CGMSCL ने प्राप्त शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लिया है एवं समुचित कदम उठाए जा चुके हैं। समस्त संबंधित विभागों, संस्थानों एवं नागरिकों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि राज्य के किसी भी स्वास्थ्य सेवा उपयोगकर्ता को गुणवत्ता से संबंधित संकट न हो, इसके लिए CGMSCL हर आवश्यक कदम पारदर्शिता और तत्परता के साथ उठा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की ऐतिहासिक कार्रवाई: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

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मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता से लागू कर रही है। इसी क्रम में राज्य शासन ने आबकारी विभाग से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 अधिकारियों को निलंबित किया है।

यह कार्रवाई पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान हुए 3200 करोड़ रुपये के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच के आधार पर की गई है। वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुए इस घोटाले में आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई थी, जिन्होंने अवैध रूप से अर्जित धन से संपत्तियाँ अर्जित की थीं।

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की गहन जांच से यह स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित सिंडिकेट के रूप में संचालित घोटाला था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने तत्क्षण कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए सभी घोटालों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों।

राज्य सरकार डीएमएफ घोटाले, महादेव ऑनलाइन सट्टा एप प्रकरण, तेंदूपत्ता वितरण, सीजीएमएससी और अन्य मामलों की भी गहन जांच करवा रही है। हाल के दो वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध एंटी करप्शन ब्यूरो ने कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार के समूल उन्मूलन के साथ सुशासन की दिशा में अग्रसर है। शासन की प्राथमिकता है—पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित में निष्ठावान प्रशासन। इसी क्रम में जेम पोर्टल से सरकारी खरीद को अनिवार्य किया गया है, ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है, और 350 से अधिक सुधारों के माध्यम से निवेश की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 की शुरुआत के साथ अब एनओसी की प्रक्रिया सरल, तेज और तकनीक-सक्षम हो चुकी है। इससे उद्यमियों और निवेशकों को स्पष्ट लाभ मिला है।

आबकारी विभाग में एफएल-10 नीति समाप्त कर पारदर्शिता बढ़ाई गई है, वहीं नकली शराब पर अंकुश लगाने के लिए बोतलों पर सुरक्षा होलोग्राम अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त खनिज ट्रांजिट पास और लकड़ी नीलामी की प्रक्रिया भी अब पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है।

पीएससी-2021 परीक्षा की अनियमितताओं की जांच CBI को सौंप दी गई है, वहीं भारतमाला योजना सहित अन्य मामलों की जांच भी गंभीरता से जारी है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि यह सरकार नीतियों और परिणामों से जनता का विश्वास अर्जित कर रही है और अब राज्य में भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। हमारा लक्ष्य है—पारदर्शी, उत्तरदायी और ईमानदार शासन। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दो टूक कहा है कि यह सरकार न तो भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करेगी, न दोषियों को छोड़ेगी। अब छत्तीसगढ़ में ईमानदारी ही नई पहचान बनेगी। हमारी सरकार का उद्देश्य सिर्फ प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्ठा के बल पर सुशासन का एक नया मानक स्थापित करना है।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुख्यमंत्री साय की सबसे बड़ी कार्यवाही

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छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लेकर आगे बढ़ रही है। साथ ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। पूर्व शासनकाल के दौरान हुए 3200 करोड़ रूपए के बहुचर्चित शराब घोटाले में साय सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 29 में से 22 आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की इस कार्रवाई को किसी भी राज्य द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इन अधिकारियों पर वर्ष 2019 से 2023 के बीच भ्रष्टाचार कर करीब 88 करोड़ रुपये की अवैध कमाई से चल-अचल संपत्तियां भी बनाने का आरोप है।

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह पूरा घोटाला एक संगठित सिंडिकेट के जरिये संचालित हो रहा था, जिसमें आरोपी आबकारी अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस मामले में एक अधिकारी की मौत हो चुकी है और सात अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गत 7 जुलाई को न्यायालय में दाखिल पांचवें पूरक चालान में इन अधिकारियों के खिलाफ 138 पृष्ठों की समरी, 2100 पृष्ठों के मूल दस्तावेज और 227 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं।

इसका खुलासा होते ही छत्तीसगढ़ सरकार ने बिना देर के 22 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। जिनमें आबकारी उपायुक्त अनिमेष नेताम, अरविन्द कुमार पाटले, नीतू नोतानी, नोहर सिंह ठाकुर, विजय सेन शर्मा शामिल हैं। इसी प्रकार सहायक आयुक्त आबकारी प्रमोद कुमार नेताम, विकास कुमार गोस्वामी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, राजेश जायसवाल, मंजुश्री कसेर, दिनकर वासनिक, आशीष कोसम, सौरभ बख्शी, प्रकाश पाल, रामकृष्ण मिश्रा, अलख राम कसेर, सोनल नेताम और जिला आबकारी अधिकारी मोहित कुमार जायसवाल, गरीबपाल सिंह दर्दी, इकबाल अहमद खान, जनार्दन सिंह कौरव, नितिन कुमार खंडूजा शामिल हैं।

गौरतलब है कि पूर्व सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान कई बड़े घोटाले हुए हैं, जिनकी जांच केंद्रीय और राज्य एजेंसियां कर रही हैं और एक-एक कर सभी दोषी जेल भेजे जा रहे हैं। केवल शराब घोटाला ही नहीं, राज्य सरकार डीएमएफ घोटाला, महादेव सट्टा एप घोटाला और तेंदूपत्ता घोटाले जैसे मामलों की भी गहराई से जांच करवा रही है, जिनमें किसी भी तरह की संलिप्तता सामने आने पर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो रही है। बीते दो वर्षों में ACB ने 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा है, जो राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा उदाहरण है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के साथ-साथ राज्य में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत जेम पोर्टल से खरीददारी को अनिवार्य किया गया है, ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत हुई है, 350 से अधिक सुधारों के जरिये निवेश की राह भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और आसान बनाई गई है, इसी क्रम में सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से एनओसी की प्रक्रिया बेहद सरल कर दी गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आबकारी विभाग में FL-10 नीति को समाप्त कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है और देशी-विदेशी मदिरा की बोतलों पर अब नासिक मुद्रणालय से छपने वाले होलोग्राम अनिवार्य किए गए हैं ताकि नकली शराब की बिक्री पर रोक लगाई जा सके। इसी तरह खनिज ट्रांजिट पास की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, लकड़ियों की ई-नीलामी प्रणाली लागू की गई है और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने PSC-2021 परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच CBI को सौंप दी है, जिसमें आयोग के तत्कालीन चेयरमैन को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, भारतमाला योजना और सीजीएमएससी घोटालों की जांच भी EOW को सौंपी गई है, जिनमें दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस पारदर्शी कार्रवाई में आईएएस, आईएफएस से लेकर राज्य सेवा के विभिन्न स्तर के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कहा है कि यह घोटाला पिछली सरकार के कार्यकाल में हुआ था, घोटाले में संलिप्त किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अब राज्य में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है, हमारी सरकार का उद्देश्य जनता को पारदर्शी, जवाबदेह और ईमानदार प्रशासन देना है।