Home Blog Page 746

यहां किसान के पैरों तले सरक गई 3 एकड़ ज़मीन, बोला, नहीं मिली तो आत्महत्या कर लूंगा

0

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. एक पीड़ित किसान ने अपनी 3 एकड़ जमीन की चोरी का आरोप लगाया है. चोरी हुई जमीन की सुनवाई के लिए किसान पटवारी से लेकर कलेक्टर ऑफिस का चक्कर काट रहा है. किसान ने चेतावनी दी है कि जमीन नहीं मिली तो वह सुसाइड कर लेगा.

जमीन चोरी की घटना हैरान करने वाली है, लेकिन किसान जनक चंद्राकर ने अपनी 3 एकड़ जमीन चोरी होने का दावा किया है. जमीन तलाशने के लिए किसान ने पटवारी से लेकर कलेक्ट्रेट ऑफिस से संपर्क किया है. पीड़ित का कहना है कि उसकी जमीन नहीं मिली तो अपनी जान दे देगा.

किसान की 3 एकड़ जमीन पर गांव के दबंग ने कर रखा है अवैध कब्ज़ा
मामला कुंडा तहसील के भरेवापूरन गांव का है. पत्नी के साथ मंगलवार को कवर्धा कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे पीड़ित किसान जनक चंद्राकर ने ज़मीन चोरी होने की शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी पुश्तैनी 3 एकड़ जमीन पर गांव के एक दबंग व्यक्ति ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है, जबकि वर्षों से उसके पूर्वज उस जमीन पर कृषि कार्य करते आ रहे हैं.

अवैध कब्जे के खिलाफ 4 माह पू्र्व तहसील कार्यालय में दिया था आवेदन
पीड़ित किसान ने बताया कि उसके तीन एकड़ खेत पर गांव के दंबग रामकुमार चंद्राकर ने अवैध कब्जा कर रखा है. अपनी तीन एकड़ जमीन पर दबंग द्वारा किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ किसान ने 4 माह पू्र्व तहसील कार्यालय में आवेदन किया था, लेकिन सीमांकन आदेश के बाद भी पटवारी और आर आई द्वारा सीमांकन नहीं किया जा रहा है.

पत्नी के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे पीड़ित किसान जनक चंद्राकर ने ज़मीन चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित किसान के मुताबिक उसकी 3 एकड़ जमीन पर गांव के एक दबंग व्यक्ति ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है, जबकि वर्षों से उसके पूर्वज उस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं.
दुल्हन!
पुश्तैनी जमीन पर कई वर्षों से खेती करता आ रहा है पीड़ित किसान
पीड़ित किसान दम्पति का कहना है चोरी हुई तीन एकड़ जमीन पर पुश्तैनी जमीन पर वो वर्षों से खेती करता आ रहा है. किसान ने बताया कि वो हर वर्ष धान की फसल उगाकर सोसायटी में बेंचते है और उस जमीन पर कर्ज भी लेते है, लेकिन जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर हर जगह गुहार लगा चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है, जिससे वो आहत हैं.

पंडरिया SDM बोले, जल्द विवादित जमीन का किया जाएगा सीमांकन
मामले पर पंडरिया एसडीएम संदीप ठाकुर ने कहा किसान जनक चंद्राकर और रामकुमार के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, पहले भी विवादित जमीन का सीमांकन किया जा चूका है और दूसरी बार सीमांकन के लिए गई टीम गई थी लेकिन मौसम के चलते सीमांकन नहीं हो पाई. उन्होंने कहा, जल्द विवादित जमीन का सीमांकन कर लिया जाएगा.

निर्माणाधीन हाईवे और खराब डायवर्जन ने बढ़ाई मुश्किलें, लापरवाही के आरोप

0

बिलासपुर-पेंड्रा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-45) एक बार फिर जाम का कारण बना. बुधवार तड़के करीब 3:00 बजे से कारीआम गांव के पास हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. सैकड़ों यात्री बसें, छोटे-बड़े वाहन और मालवाहक गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहीं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

इस मार्ग पर निर्माणाधीन हाईवे की हालत पहले से ही खराब है. जगह-जगह गड्ढे, अधूरे निर्माण कार्य और अव्यवस्थित डायवर्जन के चलते आए दिन जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है.

लोगों का फूटा गुस्सा
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने निर्माण एजेंसी और जिला प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं. वाहन चालकों का कहना है कि हर दिन जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरना पड़ता है.

एक ड्राइवर ने बताया, “बरसात के मौसम में सड़क पर मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है. वाहनों का चलना लगभग नामुमकिन हो जाता है. कभी भी हादसा हो सकता है.”

जनता में बढ़ रहा आक्रोश
बार-बार लगने वाले जाम और निर्माण कार्य में हो रही अनियमितताओं को लेकर अब लोगों का गुस्सा उबाल पर है. नागरिकों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों और प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लोगों को रोज़ाना इस तरह की समस्या से दो-चार न होना पड़े.

इस मार्ग की स्थिति न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है.

कैश कांड: जस्टिस यशवंत वर्मा की जाएगी कुर्सी! मानसून सत्र में होगा बड़ा फैसला, ‘इंडिया’ गठबंधन से भी मिला समर्थन

0

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज और वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आने वाले मानसून सत्र में सांसदों द्वारा बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया पर अंतिम मोहर लग सकती है. सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से 21 जुलाई से शुरू होने वाले आने वाले मानसून सत्र में सांसदों द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा को उनको उनके पद से हटाने के वाले प्रस्ताव को संसद में पेश किया जाएगा. हालांकि, पहले इसे लोकसभा में पेश किया जाएगा या पहले राज्यसभा में… इस मामले में कुछ कन्फर्म नहीं है. इस मामले में केंद्र सरकार को विपक्षी पार्टी के कई सांसदों का भी समर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा है.
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप उस वक्त लगा था जब वो दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस पद पर कार्यरत थे. घटना मार्च की है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के आवास के बाहरी हिस्से में आग लग गई थी. नोट की गड्डियों के बारे में खुलासा आग बुझाने के लिए पहुंचे फायरब्रिगेड टीम ने किया था. इसका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. उन्होंने आरोपों से इनकार किया और उसे साजिश बताया था. नकदी वाले वीडियो के बाद उनका मामला पूरे देश भर में चर्चा का विषय बना था. फिलहाल वो इलाहाबाद हाईकोर्ट में हैं, लेकिन उन्हें कोई भी न्याययिक प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते हैं.
कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के जैसे ही दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहें जस्टिस यशवंत वर्मा का महाभियोग का मामला हो सकता है. दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड से जुड़े मामले की तफ्तीश रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के मार्फत से देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया गया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन सीजेआई रहें संजीव खन्ना ने जांच रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के साथ-साथ इस मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के जवाब को भी एक साथ जोड़कर उसे राष्ट्रपति के पास संज्ञान लेने और उचित निर्णय लेने के लिए भेजा गया था. जिससे देश की राष्ट्रपति जांच कमेटी की उस रिपोर्ट के आधार पर अब तय कर सकती हैं की अब आगे क्या कार्रवाई करना है?

इस मामले की विस्तार से पड़ताल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम के द्वारा तीन न्यायमूर्ति की एक कमेटी बनाई गई थी. जिसमें जस्टिस शील नागू ,जो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे, इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी.एस. संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे. इस मामले की पड़ताल के बाद पांच मई को तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना को रिपोर्ट सौंप दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इस मामले में आठ मई को औपचारिक पर एक प्रेस नोट जारी किया गया है और सुप्रीम कोर्ट के वेबसाइट पर अपलोड करके ये जानकारी साझा की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जस्टिस वर्मा के केस से संबंधित तीन जजों की आंतरिक जांच समिति की तफ्तीश रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में भेज दिया गया है सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि तीन जजों की जो आंतरिक रिपोर्ट तैयार की गई है, उसके मुताबिक तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा को इस्तीफा देने का विकल्प देते हुए कहा गया कि आप या तो अपना इस्तीफा दे दें या उनके खिलाफ महाभियोग के लिए जांच रिपोर्ट को राष्ट्रपति को भेजा जाएगा.
किसी भी न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग चलाने का क्या है नियम
किसी भी न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 में निर्धारित है. इस अधिनियम की धारा तीन के मुताबिक, महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए इसे लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्य सभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना जरूरी होता है. इसके साथ ही लोकसभा और राज्यसभा में उस महाभियोग की प्रक्रिया को लेकर जाने से पहले एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है – लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों का दस्तखत लेकर समर्थन जुटाना… आने वाले दिनों में कुछ नेताओं के द्वारा इस प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है.
ये तो पहली प्रकिया थी, लेकिन उसके बाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले इस मामले की औपचारिक तौर पर जानकारी लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को देनी पड़ती है. उसके बाद दूसरी प्रक्रिया के तहत लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के मार्गदर्शन में तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जिस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या कोई जज करता है. हालांकि, इस कमेटी में एक ऐसा भी प्रावधान है कि किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जा सकता है.

कैल्शियम की दवा के आर्डर में सोफे का Specification, स्वास्थ्य मंत्री ने जांच कराने का दिया आश्वासन

0

छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार के मामले में लगातार सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में बना हुआ है. आए दिन नए-नए भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे है. ताजा कारनामा सक्ती जिला स्वास्थ्य अधिकारी का उजागर हुआ है. सक्ती सीएमएचओ ने जेम पोर्टल के जरिए कैल्शियम डी-3 टैबलेट की जगह सोफे के स्पेसिफिकेशन का अनुबंध जारी कर दिया है. सीएमएचओ सक्ती ने 30 जून को वीजे एंटरप्राइज के नाम से जो अनुबंध जारी किया है, उसमें प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन उल्लेखित है, वो किसी सोफे का स्पेसिफिकेशन है.

दवाई की जगह सोफे का स्पेसिफिकेशन
दवा की स्पेसिफिकेशन के अनुसार, प्रोडक्ट की लंबाई 60 इंच, चौड़ाई 635 इंच, ऊंचाई 55 इंच है… साथ ही, सीट की संख्या दो दर्ज है. अनुबंध में दिए गए वीजे एंटरप्राइज के नंबर पर NDTV रिपोर्टर ने बात की, तो एंटरप्राइज के प्रबंधक सुकेश मखीजा ने बताया कि उनका दवाई का काम है. सीएमएचओ से उनकी फर्म को दवा की सप्लाई का आर्डर है. मेरी फर्म ने सोफे की कोई सप्लाई नहीं दी है. स्टाफ काम को देखता है. उसे चेक करना होगा.

स्वास्थ्य मंत्री ने कही जांच की बात
सक्ती सीएमएचओ के मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी. जो दोषी होगा, उसपर कार्रवाई होगी.

CGMC में अरबों रुपये दवा खरीदी का घोटाला
छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार के मामले में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाला विभाग बन गया है. छत्तीसगढ़ मेदिकल सर्विसेज कारपोरेशन में रीएजेंट मेडिकल उपकरण खरीदी में 750 करोड़ रुपये से ज्यादा का भ्रष्टाचार हुआ है, जिसकी ACB और EOW जांच कर रही है. इस मामले में 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण सहायक शिक्षक (एलबी) मुकेश कुमार मण्डावी की सेवा समाप्त

0

जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास सिंह बघेल ने छुरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला मोरकुटुम्ब में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) श्री मुकेश कुमार मण्डावी को अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 12 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दिया है।

रायपुर में ‘लखपति महिला पहल‘ पर राष्ट्रीय क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

0

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “लखपति दीदी बनाने की दिशा में” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज रायपुर में हुआ। कार्यशाला ज़ोन-5 के अंतर्गत आने वाले छह राज्यों बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए आयोजित की जा रही है।

कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने किया। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के सचिव एस.सी.एल. दास ने भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, छत्तीसगढ़ शासन की प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय श्रीमती स्वाति शर्मा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छत्तीसगढ़ के सचिव श्री भीम सिंह भी उपस्थित रहे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन करोड़ “लखपति दीदियों” को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में एनआरएलएम राज्यों के साथ मिलकर ठोस रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं और लखपति महिला पहल न केवल महिला सशक्तिकरण बल्कि विकसित भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री दास ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं का एक सशक्त संगठनात्मक ढांचा तैयार हुआ है। अब समय है कि इन लखपति महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया जाए। उन्होंने महिला उद्यमिता के लिए पंजीयन, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण बताया।

छत्तीसगढ़ शासन की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने राज्य में महिला समूहों द्वारा संचालित नवाचारों और लखपति महिला पहल की प्रगति की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि महिलाएं विभागीय अभिसरण के माध्यम से आजीविका गतिविधियों में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय श्रीमती स्वाति शर्मा ने ज़ोन-5 राज्यों द्वारा इस पहल के सफल क्रियान्वयन की सराहना की और सीजीएसआरएलएम द्वारा कार्यशाला के लिए किए गए उत्कृष्ट समन्वय की प्रशंसा की। मिशन संचालक, सीजीएसआरएलएम श्रीमती जयश्री जैन ने कार्यशाला की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय इस कार्यशाला में राज्यों द्वारा प्रस्तुतीकरण, विषय आधारित सत्र, उपसमूह चर्चाएं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई है।

कार्यशाला के पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्र ‘उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु कौशल और वित्त‘ विषय पर केंद्रित रहा। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री विजय दयाराम के., वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की उप सचिव सुश्री रेना जमील, एनआईबीएफ के सह-संस्थापक श्री सतेंद्र श्रीवास्तव, नाबार्ड के एजीएम श्री जगदीश गायकवाड़ तथा मध्यप्रदेश और बिहार के राज्य परियोजना प्रबंधकों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में प्रेरणादायक लखपति दीदियों की सफलता की कहानियों को भी प्रस्तुत किया गया, जो यह दर्शाती हैं कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन ला रही है और उन्हें आत्मनिर्भरता व नेतृत्व के नए अवसर प्रदान कर रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य को डीएमएफ संबंधी उत्कृष्ट कार्यों के लिए भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा किया गया सम्मानित

0

भारत सरकार के खान मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। आज नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक दिवसीय “नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप” के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री पी. दयानंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

खान मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना द्वारा नेशनल डीएमएफ पोर्टल में समस्त राज्यों के डीएमएफ से संबंधित डेटाबेस का संधारण किया जा रहा है। डीएमएफ के ऑडिट रिपोर्ट का राज्य डीएमएफ पोर्टल एवं नेशनल डीएमएफ पोर्टल में 90 प्रतिशत डेटाबेस पूर्णतः अपलोड किए जाने पर छत्तीसगढ़ राज्य को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और अन्य राज्यों को भी डेटा अपलोडिंग, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन के अनुकरण की सलाह दी गई।

उल्लखेनीय है कि नेशनल डीएमएफ कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना एवं डीएमएफ की प्रभावशीलता को बढ़ाने और खनन क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सचिव, संचालक एवं खनन प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना एवं आजीविका जैसे विविध क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में अब तक 16,506 करोड़ रुपये की लागत से 1,01,313 विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 70,318 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं।

राज्य शासन द्वारा डीएमएफ के क्रियान्वयन में पारदर्शी और जनहितकारी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, प्रत्येक जिले में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों की योजना और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। यह नीति न केवल भौतिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण को भी लक्ष्य में रखती है।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव, खनिज साधन विभाग पी. दयानंद, संचालक रजत बंसल के साथ बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा, रायगढ़ एवं दंतेवाड़ा जिलों के कलेक्टर्स एवं डीएमएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका ने केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गड़करी से की सौजन्य भेंट

0

राज्यपाल रमेन डेका ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर श्री डेका ने राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, कैंसर के दवाओं के साइड इफेक्ट्स की ये है बड़ी वजह

0

कैंसर को अति गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है. कुछ सालों पहले तक इसका इलाज संभव नहीं था. लेकिन, समय के साथ इसके इलाज में काफी तरक्की हुई है, जिससे लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है. लेकिन, इस बीमारी के इलाज के कुछ गंभीर साइड इफेक्ट्स भी सामने आए हैं, जो मरीज की जिंदगी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के कुछ वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की है, जो इन साइड इफेक्ट्स के पीछे की वजहों को समझने में मदद करती है. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

इस प्रोटीन से कम हो सकता है कैंसर का खतरा
मेलबर्न के वाल्टर एंड एलाइजा हॉल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआई) की एक टीम ने बताया कि एमसीएल-1 नाम का एक प्रोटीन कैंसर को बढ़ने से रोकने में अहम है और यह हमारे शरीर की सामान्य कोशिकाओं को भी ऊर्जा प्रदान करता है. उन्होंने बताया कि नए इलाज में जो दवाएं दी जाती हैं, वे एमसीएल-1 (MCL 1) प्रोटीन को रोकती हैं और शरीर के स्वस्थ अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं.

प्रोटीन से कमजोर हो जाते हैं अंग
कैंसर मरीजों को इलाज के दौरान एमसीएल-1 नाम के प्रोटीन से युक्त दवाइयां दी जाती हैं. लेकिन, ये प्रोटीन शरीर के कुछ अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं. खासकर दिल को, क्योंकि ये अंग ऊर्जा के लिए इसी प्रोटीन पर निर्भर रहते हैं. इसी कारण इलाज के दौरान कुछ लोगों में गंभीर साइड इफेक्ट्स देखने को मिले हैं.

कमरा एक और कक्षाएं सात, बहुत लापरवाही है! डिंडोरी के इस सरकारी स्कूल में 180 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

0

अकसर ये बहस चलती है कि सरकारी स्कूल बेहतर हैं या प्राइवेट स्कूल? कुछ राज्यों में बेशक सरकारी स्कूल निजी से बेहतर होते हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण और भ्रष्टाचार की चकाचौंध में कई बार सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ जाता है. ऐसा ही एक सरकारी स्कूल में लापरवाही का मामला मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले से सामने आया है. बजाग तहसील के अंतर्गत सुकुलपुरा गांव के शासकीय स्कूल के एक कमरे के अंदर सात कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है. एक छोटे से हॉल के अंदर केजी-वन से लेकर पांचवीं क्लास के करीब 180 नन्हे-मुन्ने छात्र बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं.

एक कक्षा में चल रही सात कक्षाएं
लगभग बनकर तैयार है सीएम राइज स्कूल
दरअसल, सुकुलपुरा गांव में करोड़ों रुपये की लागत से सीएम राइज स्कूल भवन का निर्माण चल रहा है. ये लगभग पूरी तरह से बनकर तैयार है. लेकिन, कुछ काम और औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के चलते फिलहाल इस नवीन भवन को हैंडओवर नहीं लिए जाने की बात कही जा रही है. करीब तीन साल पहले सुकुलपुरा गांव में जब सीएम राइज स्कूल की सौगात मिली थी, उस वक्त गांव के पुराने स्कूल भवन को तोड़ दिया गया था और वैकल्पिक तौर पर स्कूल के संचालन के लिए ठेकेदार ने एक अस्थायी भवन बनाया था. उसी अस्थायी भवन के एक कमरे में पिछले तीन साल से सात कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, तो वहीं छठवीं से लेकर दसवीं कक्षा का संचालन पीडीएस भवन में एवं दूसरे स्कूल के भवनों में किया जा रहा है.

छत में कई छेद
जिस अस्थायी भवन के एक कमरे में सात कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, उसके छप्पर में जगह-जगह छेद होने की वजह से बारिश का पानी अंदर भर जाता है. इसमें छात्र और किताबें भी भीग जाते हैं. यहां पदस्थ शिक्षक खुद कैमरे पर स्वीकार रहे हैं कि ऐसे माहौल में बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. तो वहीं, स्कूल के प्रिंसिपल गोलमोल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. सीएम राइज स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि फिलहाल नए स्कूल भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. इस वजह से हैंडओवर की प्रक्रिया बाकी है, जबकि अभिभावक और ग्राम पंचायत के सरपंच का साफ कहना है कि शिक्षण सत्र शुरू होने के पहले निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाना चाहिए था, लेकिन मनमानी व लापरवाही के चलते नवीन भवन हैंडओवर नहीं हो पाया है.

छात्रों की उम्मीद पर फिरा पानी
सुकुलपुरा गांव के अभिभावक और छात्रों को बड़ी उम्मीद थी कि इस शिक्षण सत्र में नए सीएम राइज स्कूल भवन में स्कूल का संचालन शुरू हो जाएगा. साथ ही, उन्नयन की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी, जिससे दसवीं के बाद की पढ़ाई के लिए उनके बच्चों को अन्यत्र स्कूल में दाखिले के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. लेकिन, सिस्टम की लापरवाही के चलते ऐसा हो नहीं पाया.