Home Blog Page 759

घरेलू गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण, गैस गोदाम में छिपा रखे थे 14 सिलेंडर, खाद्य विभाग ने किया जब्त

0

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बलौदा बाजार (Baloda Bazar) में खाद्य विभाग ने घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. अधिकारियों ने दो प्रतिष्ठानों साक्षी सीएससी सेंटर और सखी सेंटर रोमा नागदेव में दबिश दी. इस दौरान 14 सिलेंडर जब्त किए. साथ ही सिलेंडर का अवैध कारोबार करने वालों को नोटिस जारी किया गया है.

सिलेंडरों के अवैध भंडारण के खिलाफ एक्शन, 1 सिलेंडर जब्त
दरअसल, बलौदा बाजार में खाद्य विभाग ने घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. यह कार्रवाई जिले के कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर हुई है. जिला मुख्यालय में चलाए गए जांच अभियान के दौरान विभागीय टीम ने दो प्रतिष्ठानों साक्षी सीएससी सेंटर और सखी सेंटर रोमा नागदेव में दबिश दी. इस दौरान 14 सिलेंडर जब्त किए गए, जिसमें 8 भरे और 6 खाली सिलेंडर थे.

सिलेंडर का अवैध कारोबार करने वालों को नोटिश
वहीं सिलेंडर का अवैध कारोबार करने वालों के साथ ही सिलेंडर देने वाली एजेंसी को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया है.

शिकायत मिलने के बाद एक्शन
जिला खाद्य अधिकारी विजय किरण ने बताया कि घरेलू सिलेंडरों की अधिक दाम में बिक्री की शिकायतें मिलने पर यह कार्रवाई की गई. साक्षी सीएससी सेंटर से 4 भरे हुए और 3 खाली सिलेंडर बरामद किए गए. वहीं सखी सेंटर रोमा नागदेव से 4 भरे हुए और 3 खाली सिलेंडर जब्त किए गए. सभी सिलेंडरों को द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय एवं वितरण विनियमन) आदेश 2000 के तहत ज़ब्त किया गया.

बलौदा बाजार के अमेरा में केंद्रीय विद्यालय का होगा निर्माण, 13 एकड़ जमीन चिन्हित

0

बलौदा बाजार जिले में लंबे समय से लंबित केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) की स्थापना को लेकर अब ठोस कदम उठाए गए हैं. विद्यालय के लिए अमेरा गांव में 13 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है. वहीं केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की टीम ने हाल ही में प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया, जिसमें कुछ बिंदुओं पर आपत्तियां भी दर्ज की गईं, जिसमें भूमि पर कब्जाधारियों के अतिक्रमण कर खेत बनाना भी शामिल है. इसके जवाब में जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर दीपक सोनी ने संचालन को लेकर आवश्यक वचन पत्र सौंपा है.

बलौदा बाजार में केंद्रीय विद्यालय स्थापना की दिशा में बड़ी पहल
दरअसल, पहले केंद्रीय विद्यालय के लिए भाटापारा के नजदीक ग्राम खम्हरिया में भूमि चयनित की गई थी, लेकिन वहां से जिले के अन्य हिस्सों का संपर्क सहज नहीं था. इसी को ध्यान में रखते हुए नए जगह की तलाश की गई और अमेरा में उपयुक्त भूमि मिलने पर उसे चिन्हांकित कर केंद्रीय विद्यालय संगठित को प्रस्तावित कर दिया गया. साथ ही प्रपोजल के बाद इसे अलॉट कर दिया गया.

केंद्रीय विद्यालय के लिए भाटापारा में जमीन चिन्हित
जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बताया कि विद्यालय का प्रारंभिक संचालन कक्षा पांचवीं तक के लिए किया जाएगा. इसके लिए अस्थायी तौर पर सकरी स्थित लाइवलीहुड कॉलेज के खाली पड़े गर्ल्स हॉस्टल भवन का चयन किया गया है. भवन में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं हैं साथ ही आवश्यक मूलभूत सुविधाओं बिजली, जल, शौचालय, बैठक व्यवस्था के लिए टेबल-कुर्सी के इंतजाम करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया है. उम्मीद की जा रही है कि जिले में विद्यालय की शुरुआत बहुत जल्द होगी, जिससे जिले के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण केंद्रीय शिक्षा का लाभ मिलेगा और वर्षों से लंबित मांग पूरी होगी.

2 जुलाई को एक साथ सड़क पर उतरेंगे एक लाख 80 हजार शिक्षक, इसलिए सरकार से नाराज हैं टीचर्स

0

बुधवार को छत्तीसगढ़ के 146 विकासखंडों में एक बार फिर सरकारी शिक्षक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. शिक्षक साझा मंच का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, सूरजपुर जिले की शिक्षिका सोना साहू को प्रथम नियुक्ति तिथि से क्रमोन्नति वेतनमान दिया जा रहा है. साथ ही, उन्हें पूरी एरियर्स राशि की भुगतान भी कर दी गई है. लेकिन, राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी पात्र शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान देने का जनरल आर्डर नहीं दिया है. इससे प्रदेश के एक लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हैं और उन्हें आर्थिक रूप से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये का एक बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है. संगठन की मांग है कि राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान देने का जनरल आर्डर जारी किया जाए.

शिक्षकों को हो रहा आर्थिक नुकसान
शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालकों ने कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति 1995 एवं 1998 से हुई है, लेकिन प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना न कर संविलियन तिथि 2018 से की जा रही है. इससे शिक्षकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है. शिक्षक साझा मंच की मांग है कि शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवागणना कर पुरानी पेंशन बहाली सहित समस्त लाभ दिया जाए.

क्या है शिक्षकों की मांग?
छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षक कई मामलों को लेकर परेशान हैं. प्राथमिक स्कूल से शिक्षकों की संख्या तीन से घटकर दो कर दी गई है. मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी एक-एक शिक्षकों की कटौती कर दी गई है. इस प्रकार, प्रदेश के स्कूलों में लगभग 57 हजार शिक्षकों के पदों को एक झटके में समाप्त कर दिया गया है. इस बार प्रदेश के 23 शिक्षक संगठन एक साथ होकर अपनी मांग को पूरा करने के लिए प्रदर्शन करने वाले हैं.

कलेक्शन से लेकर टैक्सपेयर तक जानिए कैसे आया बदलाव! जुलाई से बदल जाएंगे रिटर्न के नियम

0

1 जुलाई 2025 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के आठ वर्ष पूरे हो गए हैं. जीएसटी को एक सशक्त और अधिक एकीकृत अर्थव्यवस्था की नींव रखने में महत्वपूर्ण मानते हुए वर्ष 2017 में शुरू किया गया था. जीएसटी के साथ कर अनुपालन सरल होने के साथ कारोबारियों की लागत में कमी आई और माल को बिना किसी परेशानी के देश के एक राज्य से दूसरे में ले जाने की अनुमति मिली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी का परिचय ‘नए भारत के एक मार्गदर्शक कानून’ के रूप में दिया था. बीते आठ वर्षों में जीएसटी को जबरदस्त सफलता मिली और जीएसटी कलेक्शन को लेकर लगातार वृद्धि दर्ज की गई. आइए जानते हैं क्या कहते हैं आंकड़ें?

पिछले पांच साल में रिकॉर्ड कलेक्शन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी कलेक्शन को लेकर बीते 5 वर्षों में लगभग दोगुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 11.37 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-2025 में 22.08 लाख करोड़ रुपए हो गया. जीएसटी कलेक्शन में यह तेजी अनुपालन और आर्थिक गतिविधि में निरंतर वृद्धि को दर्शाती है.

जीएसटी के वर्तमान स्ट्रक्चर में दरों के चार मुख्य स्लैब 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं. ये दरें देशभर में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती हैं. हालांकि, मुख्य स्लैब के अलावा, तीन विशेष दरें भी तय की गई हैं. जीएसटी की दर सोना, चांदी, हीरा और आभूषण पर 3 प्रतिशत, कटे एवं पॉलिश किए गए हीरे पर 1.5 प्रतिशत और कच्चे हीरे पर 0.25 प्रतिशत लगती है.
टैक्सपेयर्स की संख्या में भी उछाल
आधिकारिक डेटा के अनुसार, जीएसटी कलेक्शन के साथ-साथ सक्रिय जीएसटी करदाताओं की संख्या में भी जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है, जो कि 30 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 1,51,80,087 हो गए हैं.

जीएसटी को एक राष्ट्र, एक कर के उद्देश्य से पेश किया गया था. जीएसटी आने के साथ ही विभिन्न अप्रत्यक्ष करों की एक विस्तृत श्रृंखला को एक कर दिया गया. जीएसटी ने उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट जैसे करों की जगह ले ली. इससे देश में कर प्रणाली में एकरूपता आई.
1 जुलाई से बदल जाएंगे रिटर्न के ये नियम
1 जुलाई 2025 से जीएसटी के कुछ नियमों में बदलाव हो रहे हैं. GST काउंसिल की ओर से जारी नए नियमों के तहत GSTR-3B फॉर्म लॉक हो जाएगा और रिटर्न फाइलिंग की अधिकतम सीमा तीन साल तक सीमित कर दी गई है. इन बदलावों का मकसद रिटर्न फाइलिंग में पारदर्शिता बढ़ाना, गलतियों और धोखाधड़ी को कम करना है.

ट्रेन के किराए में बढ़ोत्तरी, IRCTC तत्काल टिकट बुकिंग में बदलाव; आप पर कितना पड़ेगा असर

0

1 जुलाई से कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिसका आपकी जेब पर सीधा असर हो सकता है. इनमें नए तत्काल ट्रेन टिकट बुकिंग (Tatkal Booking) और रेलवे किराया में बदलाव शामिल हैं. जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के कई नए नियम लागू हो जाएंगे. 1 जुलाई 2025 से आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या इसके मोबाइल ऐप के जरिए तत्काल ट्रेन टिकट के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य हो जाएगा. आइए जानते हैं ये बदलाव कैसे आपको प्रभावित करेंगे?

किराए में होगा ऐसा बदलाव
साधारण श्रेणी में 500 किलोमीटर तक कोई वृद्धि नहीं होगी. 501 से 1500 किलोमीटर की दूरी के लिए 5 रुपये और 2500 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपये तथा 2501 से 3000 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपये की वृद्धि होगी.

किराया ढांचे को सुव्यवस्थित करने और यात्री सेवाओं की वित्तीय स्थिरता को बढ़ाने के उद्देश्य से, रेल मंत्रालय ने 01 जुलाई 2025 से प्रभावी, यात्री ट्रेन सेवाओं के मूल किराए को युक्तिसंगत बनाया है. संशोधित किराए भारतीय रेलवे सम्मेलन संघ (आईआरसीए) द्वारा जारी अद्यतन यात्री किराया तालिका पर आधारित हैं.

उपनगरीय (सब अर्बन) सिंगल यात्रा किराए और सीज़न टिकटों (उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों मार्गों के लिए) में कोई बदलाव नहीं.

साधारण गैर-एसी क्लास (गैर-उपनगरीय रेलगाड़ियाँ) के लिए:

द्वितीय श्रेणी: प्रति किलोमीटर आधा पैसा बढ़ाया गया, बशर्ते कि500 किलोमीटर तक कोई वृद्धि न हो501 से 1500 किलोमीटर की दूरी के लिए 5 रुपये की वृद्धि1501 से 2500 किलोमीटर की दूरी के लिए 10 रुपये की वृद्धि2501 से 3000 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपये की वृद्धिस्लीपर श्रेणी: प्रति किलोमीटर 0.5 पैसे की वृद्धि
प्रथम श्रेणी: प्रति किलोमीटर 0.5 पैसे की वृद्धि
मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों (गैर-एसी) के लिए:

द्वितीय श्रेणी: 01 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धिस्लीपर श्रेणी: 01 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धिप्रथम श्रेणी: 01 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि
एसी क्लास (मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें) के लिए:
एसी चेयर कार, एसी 3-टियर/3-इकोनॉमी, एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट/एग्जीक्यूटिव क्लास/एग्जीक्यूटिव अनुभूति: 02 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी

किराए में संशोधन राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, तेजस, हमसफर, अमृत भारत, महामना, गतिमान, अंत्योदय, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, एसी विस्टाडोम कोच, अनुभूति कोच और साधारण गैर-उपनगरीय सेवाओं जैसी प्रीमियर और विशेष ट्रेन सेवाओं पर भी लागू.
सहायक शुल्कों में कोई बदलाव नहीं
आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट अधिभार और अन्य शुल्क अपरिवर्तित रहेंगे.जीएसटी लागू नियमों के अनुसार लगाया जाता रहेगा.किराया राउंडिंग सिद्धांत मौजूदा मानदंडों के अनुसार बने रहेंगे.
संशोधित किराया 01.07.2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा. इस तिथि से पहले जारी किए गए टिकट बिना किसी किराया समायोजन के मौजूदा किराए पर वैध रहेंगे. पीआरएस, यूटीएस और मैनुअल टिकटिंग सिस्टम को तदनुसार अपडेट किया जा रहा है.

थनौद के मूर्तिकारों के लिए मुसीबत बना भारतमाला प्रोजेक्ट, आजीविका पर गहराया संकट

0

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का थनौद गांव अपनी अनूठी पहचान रखता है. यह गांव मूर्तिकला का गढ़ माना जाता है, जहां बनी खूबसूरत मूर्तियां न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में पहुंचती हैं. लेकिन, अब भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बना एक कम ऊंचाई वाला पुल इन मूर्तिकारों के लिए अभिशाप बन गया है… यह पुल गांव की कला और आजीविका को दांव पर लगा रहा है.

मूर्तिकारों की मुश्किल
थनौद गांव, जिसे कलाकारों का गांव कहा जाता है, यहां 50 से अधिक मूर्तिकार पीढ़ियों से मूर्तिकला की कला को जीवंत रखे हुए हैं. बचपन से ही मिट्टी को आकार देकर ये कारीगर ऐसी मूर्तियां बनाते हैं, जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. 20 से 22 फीट ऊंची इन मूर्तियों की मांग देशभर में है. लेकिन, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे इस कम ऊंचाई वाले पुल ने इन मूर्तिकारों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है.

क्या है परेशानी?
मूर्तियों की ऊंचाई: 20-22 फीट, कभी-कभी इससे भी अधिक
पुल की ऊंचाई: मात्र 13 फीट
समस्या: इतनी ऊंची मूर्तियों को इस पुल के नीचे से ले जाना असंभव
दूसरा रास्ता?: गांव से बाहर जाने के अन्य रास्ते संकरे हैं और बिजली की तार बाधा बन रही हैं

क्या कह रहे मुर्तिकार?
मूर्तिकार राधेश्याम चक्रधारी का दर्द छलक पड़ता है. वे बताते हैं, “हम सालों से मूर्तियां बनाते आ रहे हैं. हमारी कला देश के हर कोने में पहुंचती है. लेकिन, अब यह पुल हमारी आजीविका पर भारी पड़ रहा है. मूर्तियों को बाहर भेजना मुश्किल हो रहा है. गांव के दूसरे छोर पर मूर्तिकार शिवकुमार की पीड़ा भी कम नहीं. वे कहते हैं, “हमारा गांव अपनी विशाल और खूबसूरत मूर्तियों के लिए मशहूर है. अगर यह काम रुक गया, तो हमारा धंधा चौपट हो जाएगा. हमने नेताओं, मंत्रियों से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं.”

छत्तीसगढ़ में चलेगी तबादला एक्सप्रेस, सरकारी विभागों में कर्मचारियों के ट्रांसफर की जल्द जारी हो सकती है

0

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभाग में कर्मचारियों के ट्रांसफर के आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. 14 से 30 जून तक आवेदन मंगाए गए थे. अब कभी भी विभागवार ट्रांसफर लिस्ट जारी हो सकती है, लेकिन इस बीच ट्रांसफर नीति में बदलाव की मांग भी हो रही है.

छत्तीसगढ़ सरकार अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों के ट्रांसफर की सूचि कभी भी जारी कर सकती है, क्योंकि ट्रांसफर के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 जून को खत्म हो चुकी है. बताया जा रहा है कि अलग-अलग विभागों में हजारों की संख्या में ट्रांसफर के आवेदन भी आए हैं, लेकिन इस बीच ट्रांसफर पर बैन हटाने की समय सीमा में बदलाव की मांग भी हो रही है.

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के संयोजक वीरेन्द्र दुबे ने बताया कि स्कूल प्रारंभ होने के बाद बहुत सारी दिक्कतें होती हैं, क्योंकि स्कूल शुरू होने के बाद वहां से बच्चों को निकालना उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालता है. एक स्कूल से दूसरे स्कूल में एडमिशन करवाना पड़ता है. यात्रा करना भी मुश्किल है. ट्रांसफर के समय को अप्रैल से मई के बीच करना चाहिए, शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ट्रांसफर नीति बनाई जानी चाहिए.

क्या कहते हैं आंकड़े
छत्तीसगढ़ सरकार ने 14 जून से 30 जून तक कर्मचारियों से ट्रांसफर के लिए आवेदन मंगाए.
राज्य में अलग-अलग विभागों में लगभग 3 लाख 80 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं.
युक्तियुक्तकरण के कारण शासकीय शिक्षकों से ट्रांसफर के आवेदन नहीं मंगाए गए.
शिक्षा विभाग में 1 लाख 80 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्हें ट्रांसफर नीति का लाभ नहीं मिला.

अब पढ़ाई भी होने वाली है शुरू
कांग्रेस प्रवक्ता अशीष यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार एक तरह से ट्रांसफर उद्योग चला रही है, कभी भी किसी का भी ट्रांसफर कहीं भी कर दिया जा रहा है. कर्मचारियों के ट्रांसफर का समय भी उन्हें परेशान करने वाला है, जब स्कूलों में एडमिशन के बाद कक्षाएं लगनी भी शुरू हो गई हैं, ऐसे में ट्रांसफर करना कर्मचारियों को परेशानी में डालना है.

भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी पूरी तरह से पारदर्शी है, यह सिविल सेवा की प्रक्रिया के तहत ही हो रही है. अमूमन हर सरकार के कालखंड में मई और जून महीने में ही यह संपादित किया जाता है, जहां तक कर्मचारियों के विरोध की बात है तो सरकार इसपर कर्मचारियों से बैठकर बात करेगी. अगर कोई समस्या है तो उसे दूर किया जाएगा.

छत्तीसगढ़ रेरा का बड़ा कदम बिना पंजीकरण वाले प्रोजेक्ट्स पर कसा शिकंजा

0

छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने ऐसे 106 प्रोजेक्ट्स की पहचान की है जो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से स्वीकृत होने के बावजूद अब तक रेरा अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन प्रोजेक्ट्स का निर्माण अथवा विक्रय कार्य बिना वैधानिक रेरा पंजीकरण के किया जा रहा था, जो कि न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों के लिए भी अत्यंत नुकसानदेह है।

प्राधिकरण ने इन सभी प्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों को नोटिस जारी करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा अधिनियम, 2016 का पालन सुनिश्चित करना प्रत्येक प्रमोटर की जिम्मेदारी है। प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि पिछले सात वर्षों में 136 प्रोजेक्ट्स के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही की गई है, जिनमें प्रमोटरों द्वारा बिना पंजीकरण कार्य संचालित किया गया था।

रेरा अधिनियम के अनुसार, बिना पंजीकरण प्रोजेक्ट संचालित करने पर पंजीकरण शुल्क का 400 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क और परियोजना लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। रेरा अधिनियम की यही विशेषता है कि वह न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित निवेश का वातावरण देता है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और समयबद्धता भी सुनिश्चित करता है।

सीजी रेरा ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संपत्ति जैसे फ्लैट, प्लॉट, विला या व्यावसायिक इकाई खरीदने से पहले यह अवश्य जांच लें कि संबंधित परियोजना रेरा में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए
https://rera.cgstate.gov.in/
पोर्टल पर जाकर परियोजना की पंजीकरण स्थिति की जांच की जा सकती है। वहीं, प्रमोटरों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी परियोजनाओं को विधिवत रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि किसी प्रकार की शास्ति या कानूनी कार्यवाही से बचा जा सके।

प्राधिकरण का उद्देश्य स्पष्ट है कि वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना चाहता है और अनियमित एवं अराजक प्रोजेक्ट्स पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। घर खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की पुष्टि अवश्य करें, इसी संदेश के साथ सीजी रेरा ने जिम्मेदार नागरिकों और ईमानदार डेवलपर्स से सहयोग की अपील की है।

रूंगटा इंटरनेशनल स्कील्स विश्वविद्यालय भिलाई के सुरीसेट्टी प्रथम कुलपति नियुक्त

0

राज्यपाल एवं कुलाध्यक्ष रमेन डेका द्वारा डॉ जवाहर सुरीसेट्टी कार्यकारी निदेशक रूंगटा ग्रुप को रूंगटा इंटरनेशनल स्कील्स विश्वविद्यालय भिलाई जिला दुर्ग का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया है।

राज्यपाल द्वारा उनकी नियुक्ति रूंगटा इंटरनेशनल स्कील्स विश्वविद्यालय अधिनियम, 2005 (संशोधन अधिनियम, 2025) की धारा 17(3) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। डॉ सुरीसेट्टी का कार्यकाल, परिलब्धियां तथा सेवा शर्ते विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियम में निहित प्रावधान अनुसार होंगी। इस संबंध में गत दिवस राजभवन सचिवालय से आदेश जारी किया गया है।

राज्यपाल डेका से केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री ने की सौजन्य भेंट

0

राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में सामाजिक न्याय, दिव्यांगजनों के अधिकार तथा समाज के वंचित वर्गों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।