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CG: भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की…

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मुख्य चुनाव आयुक्त  श्री ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ आज कोलकाता में आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी तैयारियों की विस्तृत और व्यापक समीक्षा की। समीक्षा के दौरान आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों जैसे आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय दलों, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया तथा उनके सुझाव प्राप्त किए।

बैठक में अधिकांश राजनीतिक दलों ने आयोग द्वारा संचालित व्यापक एसआईआर (SIR) अभ्यास की सराहना करते हुए चुनाव आयोग में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। दलों ने आगामी चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने तथा हिंसक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। साथ ही शांतिपूर्ण, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती की भी मांग की।कुछ दलों ने कच्चे बम, अवैध हथियार, धनबल और बाहुबल के संभावित उपयोग को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं तथा चुनाव को एक या दो चरणों में सम्पन्न कराने का सुझाव दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि भारत में चुनाव पूरी तरह कानून के अनुसार आयोजित किए जाते हैं और आयोग पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाताओं अथवा चुनाव कर्मियों के विरुद्ध हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं के प्रति आयोग की नीति ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की होगी।

राजनीतिक दलों ने भी आयोग को आश्वासन दिया कि वे राज्य में चुनाव को हिंसा-मुक्त बनाने में पूर्ण सहयोग करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी दोहराया कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए तथा किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन के लिए फॉर्म 6, 7 और 8 अभी भी भरे जा सकते हैं।

इसके पश्चात आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों/नोडल अधिकारियों, आईजी, डीआईजी, मंडलायुक्तों, पुलिस आयुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों  तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों के साथ चुनाव योजना, ईवीएम प्रबंधन, रसद व्यवस्था, चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण, जब्ती कार्रवाई, कानून-व्यवस्था तथा मतदाता जागरूकता और जनसंपर्क गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की।

आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों को पूर्ण निष्पक्षता के साथ कार्य करने और मतदाताओं को प्रलोभन देने से जुड़ी गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर रैंप, व्हीलचेयर और पेयजल सहित सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं (AMFs) उपलब्ध कराई जाएं।

राज्यसभा चुनाव 2026: क्या चुनावी मुकाबला खत्म हो गया? क्या यह लोकतंत्र का शांत पक्ष है? क्या यही लोकतंत्र की सच्चाई है?

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राज्यसभा चुनाव 2026

राज्यसभा चुनाव 2026 में सीटों की संख्या से ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि कई उम्मीदवार बिना किसी चुनौती के जीत रहे हैं। कई राज्यों में ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनके सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है। इसका अर्थ है कि चुनाव से पहले ही राजनीतिक समीकरण तय हो चुके हैं। संसद का ऊपरी सदन आम चुनावों की तरह हलचल नहीं देखता, बल्कि यहां की राजनीति अक्सर शांत रहती है। लेकिन इस शांति के पीछे गहरी राजनीतिक रणनीतियाँ छिपी होती हैं, जिसके कारण कई नेता बिना मुकाबले संसद में पहुंच जाते हैं।

क्या चुनावी मुकाबला खत्म हो गया?

इस बार 37 सीटों पर चुनाव होने हैं, लेकिन हर सीट पर वास्तविक प्रतिस्पर्धा का अभाव है। कई स्थानों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाने की ओर अग्रसर हैं। यह स्थिति नई नहीं है; पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है। सवाल यह उठता है कि जब मुकाबला ही नहीं होगा, तो चुनाव की भावना का क्या होता है? लोकतंत्र में चुनाव का अर्थ प्रतिस्पर्धा होता है, लेकिन यहां कई जगह मुकाबला शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया है।

क्या दलों के भीतर समझौते हो रहे हैं?

राज्यसभा का चुनाव जनता द्वारा नहीं, बल्कि विधायकों द्वारा किया जाता है। इसलिए यहां की राजनीति का गणित अलग होता है। राजनीतिक दल अपने विधायकों की संख्या के अनुसार उम्मीदवारों का चयन करते हैं। कई बार विपक्ष उम्मीदवार ही नहीं उतारता, और कई बार अंदर ही अंदर समझौते हो जाते हैं। यही कारण है कि कई सीटें निर्विरोध चली जाती हैं। बाहर से सब कुछ शांत दिखता है, लेकिन अंदर गहरा राजनीतिक गणित चलता है।

क्या यह लोकतंत्र का शांत पक्ष है?

राजनीति के विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा का चुनाव एक अलग प्रकार का होता है। यहां आम चुनावों की तरह सीधा संघर्ष कम दिखाई देता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राजनीति समाप्त हो गई है। यहां रणनीति अधिक होती है, और दल अपने विश्वसनीय नेताओं को संसद में भेजते हैं। कई बार वरिष्ठ नेताओं को सम्मान भी मिलता है। इसलिए निर्विरोध जीत को हमेशा नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाता। फिर भी सवाल उठते हैं।

क्या यह ताकत का संकेत है?

किसी नेता का निर्विरोध चुना जाना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। इसका अर्थ है कि उसके पीछे मजबूत राजनीतिक समर्थन है। कई बार दल अपने बड़े नेताओं को इस तरह संसद में भेजते हैं, जिससे पार्टी की एकता का संदेश जाता है। लेकिन आलोचक यह भी कहते हैं कि इससे मुकाबले की भावना कमजोर होती है। लोकतंत्र में चुनौती आवश्यक मानी जाती है, इसलिए यह बहस हमेशा बनी रहती है।

क्या बिहार बदल देगा कहानी?

इस चुनाव में बिहार की एक सीट ने थोड़ी हलचल पैदा की है। यहां मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। अन्य कई स्थानों पर स्थिति लगभग स्पष्ट है, इसलिए सभी की नजर बिहार पर है। यह सीट दर्शाती है कि जब एक अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आता है, तो समीकरण बदल जाते हैं। यही लोकतंत्र का असली रंग है, जहां मुकाबला होता है, वहां राजनीति अधिक खुलकर सामने आती है।

क्या यही लोकतंत्र की सच्चाई है?

राज्यसभा चुनाव 2026 एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। क्या संसद के इस सदन में राजनीति धीरे-धीरे समझौतों की ओर बढ़ रही है, या यह केवल संसदीय व्यवस्था का सामान्य तरीका है? इसका उत्तर सरल नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि निर्विरोध जीतें बहस को जन्म देती हैं। यही बहस लोकतंत्र को जीवित रखती है और आने वाले चुनावों में भी उठती रहेगी।

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट: जानें कारण और भविष्यवाणियाँ….

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सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट’

”सोमवार को अमेरिकी डॉलर की मजबूती और महंगाई की चिंताओं के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इससे यह संभावना कम हो गई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करेगा।”

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद, सोने और चांदी की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई, बल्कि गिरावट देखने को मिली।

”सोमवार को एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी का सोना वायदा 1,59,826 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी वायदा 2,60,743 रुपए प्रति किलोग्राम पर गिर गई।”

दोपहर करीब 12.18 बजे, एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 881 रुपए यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,60,678 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, 5 मई एक्सपायरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट 3,378 रुपए यानी 1.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,64,907 रुपए प्रति किलोग्राम पर था।

”इस बीच, अमेरिकी डॉलर तीन महीने के उच्च स्तर 99.34 तक पहुंच गया, जो इंट्राडे आधार पर लगभग 0.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। डॉलर की मजबूती से अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना और चांदी महंगा हो जाता है।”

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी बॉंड यील्ड भी बढ़ गई है, जिससे बिना ब्याज वाली धातुओं जैसे सोने और चांदी को रखने की लागत बढ़ गई है।

”कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है, जो लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण हुआ है।” ”तेल की कीमतों में इस वृद्धि से महंगाई की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते बाजार में यह उम्मीद बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 18 मार्च को होने वाली नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।”

बाजार के अनुमानों के अनुसार, जून में भी फेड के ब्याज दरों को बिना बदलाव के रखने की संभावना 51 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

”विश्लेषकों का मानना है कि सोने के लिए 1,48,000 रुपए का स्तर मजबूत सपोर्ट है, जबकि 1,53,000 रुपए का स्तर रेजिस्टेंस हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में 5,000 डॉलर के आसपास मजबूत खरीदारी देखी जा रही है। यदि कीमतें 5,400 से 5,600 डॉलर के ऊपर स्थिर रहती हैं, तो सोना नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।” ”बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी का मध्यम और लंबी अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसके पक्ष में हैं।”

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को दी राहत, केजरीवाल-सिसोदिया मामले में सुनवाई जारी…

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दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। केंद्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली शराब नीति घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की है। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सीबीआई को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की।

ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा कि वे ट्रायल कोर्ट की उन टिप्पणियों पर रोक लगाएंगे, जो सीबीआई के खिलाफ थीं। उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को बरी कर दिया था और सबूतों की कमी के लिए सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट अब इस मामले में 16 मार्च को फिर से सुनवाई करेगा।

सीबीआई अधिकारी की जांच पर रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट के शराब घोटाले की जांच कर रहे अधिकारी की जांच कराने के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले में कोई निर्णय नहीं लेता, तब तक कोई फैसला न दिया जाए।

नोटिस जारी करने की प्रक्रिया

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल और अन्य सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला बताया और इसे देश की राजधानी का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश को विवादित बताते हुए कहा कि यह बिना ट्रायल के बरी करने का आदेश है।

सीबीआई पर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र ने शराब नीति मामले में सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट में कई कमियों की ओर इशारा किया था। जज ने कहा था कि बिना ठोस सबूत के सीबीआई ने दिल्ली के केजरीवाल और उनके सहयोगियों को साउथ ग्रुप के रूप में संदर्भित किया था। उल्लेखनीय है कि केजरीवाल और सिसोदिया इस मामले में जेल गए थे, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

रॉयल एनफील्ड हंटर 350: बजट में बेहतरीन मोटरसाइकिल की खासियतें…

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यह उन लोगों के लिए आदर्श है जो बिना अधिक खर्च किए क्लासिक और आधुनिक अनुभव चाहते हैं।

रॉयल एनफील्ड हंटर 350, इस प्रसिद्ध भारतीय ब्रांड की एक प्रमुख और बजट के अनुकूल मोटरसाइकिल है। इसे शहरी राइडिंग, दैनिक यात्रा और नए राइडर्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। हंटर 350 की कीमत और आकार क्लासिक 350 और बुलेट 350 से थोड़े कम हैं। फिर भी, इसमें कुछ ऐसे फीचर्स हैं जो इसे एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं। यह युवा खरीदारों, शहरी उपयोगकर्ताओं और बड़े बाइक के नए राइडर्स के लिए एकदम सही है। यहां हम इसकी पांच प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कर रहे हैं।

इंजन और प्रदर्शन

हंटर 350 में 349cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-ऑयल कूल्ड इंजन है, जो क्लासिक 350 और बुलेट 350 में भी पाया जाता है। यह J-सीरीज इंजन 6,100 rpm पर 20.2 हॉर्सपावर और 4,000 rpm पर 27 Nm का टॉर्क प्रदान करता है। इसकी लो-एंड टॉर्क ट्रैफिक में इसे चलाना आसान बनाता है। इसमें 5-स्पीड गियरबॉक्स और स्लिपर क्लच है, जो गियर शिफ्ट को सहज बनाता है। यह सेटअप नए राइडर्स के लिए अनुकूल है और शहर में राइडिंग को आसान बनाता है।

आकार, वजन और प्रैक्टिकैलिटी

हंटर 350 में 13-लीटर का फ्यूल टैंक है, जो दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त है और छोटी यात्राओं के लिए अच्छी रेंज प्रदान करता है। इसका कर्ब वेट 181 किलो है, जो इसे रॉयल एनफील्ड के हल्के मॉडलों में से एक बनाता है। इसकी लो सीट और नैरो बिल्ड इसे जमीन पर दोनों पैरों को सीधा रखने में मदद करती है, जिससे यह महिलाओं और नए राइडर्स के लिए भी आदर्श बनती है।

फीचर्स और सुरक्षा

इसमें एक सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर है, जो स्पीड, फ्यूल लेवल, ट्रिप मीटर और अन्य बुनियादी जानकारी प्रदर्शित करता है। हालांकि, बेस मॉडल में टैकोमीटर नहीं है। उच्च वेरिएंट में ट्रिपर नेविगेशन पॉड शामिल है, जो ब्लूटूथ के माध्यम से आपके फोन से कनेक्ट होता है और एक छोटी स्क्रीन पर टर्न-बाय-टर्न दिशा दिखाता है। सभी वेरिएंट में ड्यूल-चैनल ABS सुरक्षा के लिए उपलब्ध है।

रंग विकल्प

हंटर 350 को 7 रंगों में उपलब्ध है, जिनमें ग्रेफाइट ग्रे, टोक्यो ब्लैक, लंदन रेड, रेबेल ब्लू, डैपर ग्रे, रियो व्हाइट और फैक्ट्री ब्लैक शामिल हैं। ये रंग बाइक को पारंपरिक क्लासिक मॉडलों की तुलना में एक ताजा और युवा लुक देते हैं।

हंटर 350 की कीमत

भारत में हंटर 350 की कीमत: बेस फैक्ट्री ब्लैक वेरिएंट की कीमत 1,37,640 रुपये है, जो एक्स-शोरूम कीमत है। इस वेरिएंट में स्पोक्ड व्हील्स और ट्यूब वाले टायर्स शामिल हैं। एलॉय व्हील्स और ट्यूबलेस टायर्स वाले उच्च वेरिएंट्स की कीमत 1,66,883 रुपये (एक्स-शोरूम दिल्ली) है। यह इसे रॉयल एनफील्ड की सबसे सस्ती बाइक्स में से एक बनाता है।

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, भाजपा और कांग्रेस में होड़…

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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिन पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने उम्मीदवारों का चयन करने में जुटे हुए हैं।

विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को दो सीटों पर जीत हासिल करने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिलने की उम्मीद है।

रिटायर होने वाले सांसद

तीन सीटों पर रिटायर होने वाले सांसदों में भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू, राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। बिट्टू केंद्रीय मंत्री हैं और उपचुनाव के माध्यम से राज्यसभा में पहुंचे थे, उनका कार्यकाल भी जून 2026 तक है। राजेंद्र गहलोत को मारवाड़ क्षेत्र का एक प्रमुख नेता माना जाता है, जबकि नीरज डांगी को कांग्रेस का दलित चेहरा माना जाता है।

राजनीतिक समीकरण

इन नामों को लेकर दिल्ली से लेकर जयपुर तक चर्चा का माहौल है। राज्य की विधानसभा सीटों के हिसाब से कुल 200 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 51 प्राथमिकता वाले वोटों की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास 118 विधायक हैं, जिससे पार्टी को दो सीटों पर जीत हासिल करने में आसानी होगी। वहीं, कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं, जिससे एक सीट पर जीत की संभावना है, लेकिन दूसरी सीट के लिए निर्दलीय समर्थन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उम्मीदवारों की चर्चा

भाजपा दो सीटों पर जातीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रवनीत सिंह बिट्टू एक सक्रिय नेता हैं और उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना है। दूसरी सीट के लिए कई प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा, सतीश पूनिया को भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला है और युवाओं तथा जाट समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इन दो नामों के अलावा अशोक परनामी का नाम भी चर्चा में है। भाजपा इन नामों के माध्यम से आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि उम्मीदवारों का चयन हाईकमान द्वारा किया जाएगा। राज्य में होने वाले चुनाव में एनडीए की ताकत बढ़ सकती है।

ईरान ने नया सुप्रीम लीडर चुना: मुस्तबा खामेनई का नेतृत्व शुरू…

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ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया है। अली खामिनई के निधन के बाद, उनके बेटे अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा खामेनई को इस पद पर नियुक्त किया गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी मुस्तबा खामेनई के चयन का समर्थन किया।

सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, 8 मार्च की रात को 88 सदस्यों वाली एक्सपर्ट असेंबली ने मतदान के बाद मुस्तबा के नाम पर मुहर लगाई। असेंबली ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा हुसैनी खामेनई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा नेता नियुक्त किया है।

खामेनई परिवार का पुनः नेतृत्व

इस घोषणा के साथ, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की बागडोर फिर से खामेनई परिवार के हाथों में आ गई है। अयातुल्लाह अली खामेनई इस पद पर देश के दूसरे नेता थे, जबकि पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहल्ला खुमैनी थे, जिन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद इस पद की स्थापना की थी। खुमैनी के बाद, अली खामेनई ने लंबे समय तक ईरान का नेतृत्व किया और अब उनके बेटे मुस्तबा तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में उभरे हैं। मुस्तबा के सुप्रीम लीडर बनने की खबर के साथ ही ईरान के विभिन्न शहरों में जश्न मनाया गया। लोग सड़कों पर निकल आए और नए नेतृत्व का स्वागत किया। अली खामेनई के एक्स अकाउंट से एक रीपोस्ट किया गया, जिसमें बताया गया कि ईरान के संविधान के आर्टिकल 108 के तहत मुस्तबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है।

नए युग की शुरुआत

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिजिशकीय ने मुस्तबा खामेनई को बधाई देते हुए कहा कि उनका नेतृत्व ईरान के सम्मान और शक्ति के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है। ईरानी सेना ने भी नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी वफादारी व्यक्त की है। ईरान आर्म्ड फोर्सेस के जनरल स्टाफ ने एक बयान जारी कर मुस्तबा खामेनई के प्रति अपनी पूरी वफादारी की कसम खाई है। बयान में अली खामेनई के निधन पर शोक भी व्यक्त किया गया है। भारत में ईरान एंबेसी ने कहा कि देश की मौजूदा गंभीर परिस्थितियों में यह विकल्प निश्चित रूप से हमारे राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की गारंटी देगा।

खामेनई की मौत और उसके बाद की स्थिति

आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले में अली खामेनई की मौत हो गई थी। इसके बाद से सुप्रीम लीडर का पद खाली था, और देश का शासन तीन सदस्यीय टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल के हाथों में था। अब मुस्तबा खामेनई के चुनाव के साथ ईरान को नया नेतृत्व मिल गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद टाइम्स ऑफ इजराइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की। ट्रंप ने कहा कि देखते हैं क्या होता है। युद्ध की समाप्ति इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन याहू के साथ आपसी निर्णय से होगी। आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने कहा था कि ईरान उनके बिना नया सुप्रीम लीडर नहीं चुनेगा। दूसरी ओर, इजराइल ने धमकी दी थी कि वह खामेनई के उत्तराधिकारी को मार देंगे।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है प्रभाव;राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे…

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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामर्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।

खड़गे ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा, “मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया।” खड़गे ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। हाल की घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। भारत हर साल लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का तेल आयात करता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवारों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस बीच बाद सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बैठ जाने के लिए कहा गया।

सभापति ने खड़गे को बाद में बोलने का अवसर देने की बात कही और कहा कि फिलहाल विदेश मंत्री एस जयशंकर सदन में अपनी बात रखने जा रहे हैं। इस बार विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। लेकिन विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे इसके उपरांत विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे। सभापति ने मल्लिकार्जुन खड़गे को शुरुआत में बोलने का अवसर दिया और इसके बाद उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री द्वारा इस संदर्भ में आधिकारिक जानकारी दे रहे हैं। विदेश मंत्री द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद वह खड़गे को बोलने का अवसर देंगे। लेकिन विपक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ और सदन में विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे।

युवाओं की विकसित होती सोच देश की सबसे बड़ी ताकत…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के बाद आयोजित वेबिनार श्रृंखला के चौथे वेबिनार को संबोधित किया, जिसका विषय था “सबका साथ सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति।” पीएम ने बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श करने के लिए विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का स्वागत किया।

पीएम ने कहा, “जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति मात्र एक विषय नहीं है। यह इस बजट का मूल उद्देश्य और इस सरकार का संकल्प है।”

पीएम मोदी ने विशेष रूप से उभरती ‘देखभाल अर्थव्यवस्था’ और वैश्विक स्तर पर देखभालकर्ताओं की बढ़ती मांग की ओर ध्यान आकर्षित किया और विशेषज्ञों से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए नए प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं इस वेबिनार में उपस्थित स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों से नए प्रशिक्षण मॉडल और साझेदारियों को विकसित करने के लिए सुझाव देने का आग्रह करूंगा ताकि देश में प्रशिक्षण व्यवस्था और भी मजबूत हो सके।”

प्रधानमंत्री ने दूरस्थ क्षेत्रों तक टेलीमेडिसिन की पहुंच की सफलता का उल्लेख किया। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने उपयोगकर्ता अनुभव को और सरल बनाने तथा जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। पीएम मोदी ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि टेलीमेडिसिन के बारे में जागरूकता और इसके उपयोग में आसानी बढ़ाने की अभी भी आवश्यकता है।”

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की विकसित होती सोच को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया और इस भावना के अनुरूप शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नई शिक्षा नीति एक ऐसे पाठ्यक्रम की नींव रखती है जो बाजार की मांगों और वास्तविक अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों के अनुरूप होना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करना होगा।” शिक्षा, रोजगार और उद्यम के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने ए.वी.जी.सी. (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा के केंद्रों में बदलने का आह्वान किया ताकि छात्रों को आवश्यक वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके।

मोदी ने कहा, “मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इस वेबिनार में, अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श अवश्य करें।”

प्रधानमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती संख्या पर गर्व व्यक्त किया और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में बेटियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नवाचार और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमें ऐसा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा जहां युवा शोधकर्ताओं को नए विचारों पर प्रयोग करने और काम करने का पूरा अवसर मिले।”

रोजगार सृजन में पर्यटन और संस्कृति की क्षमता पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक स्थलों से परे नए पर्यटन स्थलों का विकास किसी शहर की ब्रांडिंग और समग्र विकास को बढ़ावा देता है। अब हम देश में पर्यटन स्थलों को नए सिरे से विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। प्रशिक्षित गाइड, आतिथ्य कौशल, डिजिटल संपर्क और सामुदायिक भागीदारी हमारे पर्यटन क्षेत्र के स्तंभ बन रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इसके साथ ही स्वच्छता और सतत प्रथाएं भी आवश्यक हैं। भारत को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में मजबूत करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे में पर्यटन और संबंधित क्षेत्रों पर आपके सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।”

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रगति को गति देने के लिए संस्थानों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल के महत्व पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि ये चर्चाएं भविष्य के लिए एक ठोस रूपरेखा प्रदान करेंगी और एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसे प्रयासों से एक विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी।”

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सियासत तेज, भाजपा व सहयोगी दलों ने किया विरोध…

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है।

भाजपा व उसके सहयोगी दलों के सांसदों ने साफ कहा है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पर पूरा विश्वास है और यह प्रस्ताव सदन में टिक नहीं पाएगा।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ लोग संसद को चलने नहीं देना चाहते और इस तरह का प्रस्ताव लाना पूरी तरह अनुचित है।” उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाता है तो यह “बेवकूफी की हद पार करने” जैसा कदम होगा।

वहीं, भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष ने अब तक यह स्पष्ट ही नहीं किया है कि आखिर किस कारण से वे लोकसभा अध्यक्ष को हटाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव सदन में बुरी तरह से हार जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल ने कई बार सदन में लोकसभा अध्यक्ष के पद का अपमान किया है, जो संसद की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी अपने नेतृत्व में अब तक 95 चुनाव हार चुके हैं और आने वाले चुनावों में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा।”

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने भी लोकसभा अध्यक्ष के प्रति अपनी पार्टी का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सभी सांसदों का विश्वास ओम बिरला में है और विपक्ष को जो कहना है, वह कहता रहे। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “उन्हें गर्व है कि उन्होंने ओम बिरला के साथ भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई में काम किया है। ओम बिरला ऐसे नेता हैं जो संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हैं और उनका पूरी तरह पालन करते हैं।”

इस मुद्दे पर भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 94 सदस्यों को स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने का अधिकार देता है, लेकिन सवाल यह है कि विपक्ष ऐसा क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह आरोप लगा रहा है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाता जबकि समय का निर्धारण संसदीय नियमों के तहत होता है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत बहस होगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। जब उन्हें बोलने का मौका मिलेगा तो सबूतों के साथ अपनी बात रखनी होगी। सरकार इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और बहस के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।