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एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय गोलावंड में प्रवेश हेतु आवेदन 14 जून तक

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शैक्षणिक सत्र – 2025-26 हेतु एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, गोलावंड, कोण्डागाँव में कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं और 11वीं में रिक्त सीटों के सापेक्ष अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित की गई है। कक्षा 7वीं से 9वीं तक चयन प्रवेश परीक्षा के आधार पर जबकि कक्षा 11वीं हेतु चयन मेरिट के आधार पर किया जाना है। प्रवेश हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 14 जून 2025 है । इसे विद्यालय की वेबसाईट या विद्यालय आकर प्राप्त किया जा सकता है। विस्तृत जानकारी विद्यालय के वेबसाईट
https://emrsgolawand.netlify.app
पर उपलब्ध है।

सूरजपुर जिले की शालाएं बनीं शिक्षक युक्त, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ऐतिहासिक पहल

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सूरजपुर जिले में बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की गई है। इस पहल के तहत अब जिले की लगभग सभी शालाएं शिक्षक युक्त हो चुकी हैं, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।

पूर्व में जिले की 18 प्राथमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षकविहीन थीं, लेकिन अब ये सभी शालाएं शिक्षकयुक्त हो गई हैं। इसी तरह, पहले 281 प्राथमिक शालाएं एकल शिक्षक प्रणाली पर आधारित थीं, जिनकी संख्या अब घटकर केवल 47 रह गई है। इसके अतिरिक्त, दो हाई स्कूल भी शिक्षकविहीन थे, जिन्हें अब योग्य शिक्षकों से सुसज्जित कर दिया गया है। जिले के सभी पूर्व माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।

शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, 1 से 3 जून 2025 तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विश्रामपुर में ओपन काउंसलिंग का आयोजन किया गया। इस प्रक्रिया में वरीयता क्रम के आधार पर सैकड़ों अतिशेष शिक्षकों की नवीन पदस्थापना की गई। इससे न केवल शिक्षकविहीन शालाओं की समस्या का समाधान हुआ, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों की शालाओं में भी शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

शिक्षकों के इस युक्तियुक्तकरण से जिले में शिक्षा के परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। शासन और जिला प्रशासन की यह पहल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हो रही है।

युक्तियुक्तकरण से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित युक्तियुक्तकरण अभियान के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह सुधार शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

शासन के निर्देश पर जिले में संचालित विद्यालयों की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि युक्तियुक्तकरण से पूर्व जिले में 3 प्राथमिक शालाएं और 1 हाई स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन थे। इन सभी शालाओं में त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। अब जिले का कोई भी प्राथमिक विद्यालय या हाई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है, जो प्रशासन की सक्रियता और शिक्षा विभाग की तत्परता को दर्शाता है।

हालांकि, जिले में अभी भी 2 प्राथमिक शालाएं एकल शिक्षक प्रणाली पर आधारित हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शालाओं को भी शीघ्र ही बहु-शिक्षक विद्यालयों में परिवर्तित करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर विकासखंडों के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में स्थित कई विद्यालयों में पूर्व में शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा था। अब युक्तियुक्तकरण के पश्चात इन शालाओं में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल रहा है।

शिक्षा विभाग के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि “राज्य शासन द्वारा लागू की गई युक्तियुक्तकरण नीति से शिक्षकों की तैनाती में असंतुलन को दूर किया गया है। अब हमारा प्रयास शेष एकल शिक्षकीय विद्यालयों को भी बहु-शिक्षकीय स्वरूप प्रदान करने का है, जिससे शिक्षकों का कार्यभार संतुलित हो और छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिले।”

विभाग ने बताया कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में जिले के सभी विकासखंडों से प्राप्त आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण कर प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की नवीन पदस्थापना की गई है। साथ ही, जहां आवश्यकता है, वहां त्वरित समाधान की दिशा में निरंतर कार्य जारी है।

चीन और यूएस के बीच ट्रेड डील हुई फाइनल, रेयर अर्थ मेटल्स समेत इन मुद्दों पर बन गई बात

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यूएस और चीन के बीच ट्रेड डील फाइनल हो गई है. यह दावा यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी है. उनका कहना है कि अब इस समझौते को बस उनके और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अप्रूवल की आवश्यकता है. राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इस डील के तहत चीन अमेरिका को जरूरी रेयर अर्थ मटेरियल्स और फुल मैग्नेट्स सप्लाई करेगा. इसके बदले में अमेरिका भी चीन को कुछ सहमति अनुसार सुविधाएं देगा, जिसमें अमेरिकी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में चीनी छात्रों को शिक्षा लेने की अनुमति भी शामिल है.

ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका इस डील से कुल 55% टैरिफ लाभ प्राप्त कर रहा है, जबकि चीन को सिर्फ 10% का फायदा मिलेगा. उन्होंने इसे “excellent relationship” बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा होगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अमेरिकी संस्थानों में चीनी छात्रों के पढ़ने के वह पहले से पक्षधर रहे हैं और यह डील उसी विश्वास को आगे बढ़ाती है.
इस डील के मुताबिक, चीन अमेरिका को दुर्लभ खनिज (rare earth elements) और महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल मैग्नेट की आपूर्ति पहले से कर देगा. ये खनिज आज के इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और रक्षा उद्योग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं. चीन दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ्स उत्पादक देश है, ऐसे में अमेरिका के लिए यह डील रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही है. वहीं, बदले में अमेरिका ने चीन को कुछ रियायतें देने का वादा किया है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका एक बार फिर चीनी छात्रों को अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ में दाखिला लेने की अनुमति देगा. यह उल्लेखनीय है कि कोविड और बाद के भू-राजनीतिक तनावों के चलते चीनी छात्रों की एंट्री पर अमेरिका ने सख्ती बढ़ा दी थी.
चौंकाने वाला टैरिफ
इस डील की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिका चीनी उत्पादों पर कुल 55% तक का टैरिफ वसूल करेगा, जबकि चीन अमेरिकी सामान पर 10% टैरिफ रखेगा. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका अब भी दबाव की मुद्रा में बना रहना चाहता है, लेकिन इसके साथ ही व्यापार को फिर से सामान्य करने का संकेत भी दे रहा है.

जोसा काउंसलिंग यानी जॉइंट सीट एलोकेशन अथोरिटी (JoSAA) ने जोसा काउंसलिंग 2025 (JoSAA Counselling 2025) के लिए दूसरी मॉक सीट आवंटन लिस्ट जारी कर दी है.

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जोसा काउंसलिंग यानी जॉइंट सीट एलोकेशन अथोरिटी (JoSAA) ने जोसा काउंसलिंग 2025 के लिए दूसरी मॉक सीट आवंटन लिस्ट जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों ने 10 जून तक अपनी पसंद सबमिट की थी, वे अब आधिकारिक पोर्टल josaa.nic.in पर लॉग इन करके अपना परिणाम देख सकते हैं.

जोसा 13 जून को डेटा सत्यापन, सत्यापन करेगा. जोसा काउंसलिंग 2025 के लिए पंजीकरण करने की अंतिम तिथि 12 जून है. जिन उम्मीदवारों ने अभी तक जोसा काउंसलिंग 2025 के लिए पंजीकरण नहीं किया है, उन्हें आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

जोसा काउंसलिंग राउंड 1 सीट आवंटन रिजल्ट 14 जून को सुबह 10 बजे जारी किया जाना है. राउंड 1 के बाद रिपोर्टिंग की अंतिम तिथि 18 जून है. राउंड 1 आवंटन रिजल्ट घोषित होने के बाद, चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी-सीट स्वीकार करना, दस्तावेज़ अपलोड करना, आवश्यक शुल्क का भुगतान करना और किसी भी प्रश्न का उत्तर देना होगा.

जोसा काउंसलिंग राउंड 2 मॉक सीट आवंटन की जांच कैसे करें
आधिकारिक वेबसाइट josaa.nic.in पर जाएं.

होमपेज पर “मॉक सीट आवंटन-2” लिंक पर क्लिक करें.

अपना लॉगिन विवरण दर्ज करें.

मॉक सीट आवंटन परिणाम स्क्रीन पर दिखाई देगा.

परिणाम को डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए सहेजें.

जोसा काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया, आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (जीएफटीआई) जैसे टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की पात्रता निर्धारित करती है.

लग गया कर्फ्यू! अमेरिका का लॉस एंजिल्स हिंसक विरोध का केंद्र क्यों बना?

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अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के शहर लॉस एंजिल्स में हिंसक विरोध-प्रदर्शन (Los Angeles Protest) जारी है. हालात इस हद तक बिगड़ गए हैं कि लॉस एंजिल्स के मेयर करेन बास ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हो रही लूटपाट और हिंसा से निपटने के लिए शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू तक लगा दिया है. दरअसल लॉस एंजिल्स शहर में इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के कदमों के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इस शहर में दूसरे देशों (खासकर लैटिन अमेरिका) से आए कई अवैध प्रवासी रह रहे हैं और अब उनको निकालने की तैयारी है.

सवाल है कि अमेरिका के कुछ सबसे धनी और सबसे शक्तिशाली लोगों का घर- लॉस एंजिल्स ट्रंप की सबसे सख्त आप्रवासन कार्रवाई (अवैध प्रवासियों को निकालने) का केंद्र क्यों बन गया है? इस सवाल का जवाब इस शहर की जातीय, नस्लीय और जनसांख्यिकीय संरचना में छिपा हुआ है.

लॉस एंजिल्स की आबादी की बनावट
लॉस एंजिल्स काउंटी दक्षिणी कैलिफोर्निया के 4,000 वर्ग मील में फैली हुई है. इस लॉस एंजिल्स काउंटी में लॉस एंजिल्स शहर के साथ-साथ पॉश बेवर्ली हिल्स, हॉलीवुड, लॉन्ग बीच, मालिबू, पासाडेना, सांता मोनिका और कई अन्य समुदाय शामिल हैं. अमेरिकी जनगणना के अनुसार, लॉस एंजिल्स काउंटी लगभग 1 करोड़ लोगों का घर है- यानी कैलिफोर्निया की आबादी का 27 प्रतिशत. खास बात है कि इनमें से एक तिहाई विदेशी मूल के व्यक्ति हैं.

लॉस एंजिल्स काउंटी का दिल है लॉस एंजिल्स शहर. जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि लॉस एंजिल्स शहर, जो अभी अस्थिर आप्रवासन विरोधी विरोध प्रदर्शनों का केंद्र है, लगभग 39 लाख लोगों का घर है. इनमें से 35 प्रतिशत से अधिक लोग अमेरिका के बाहर पैदा हुए थे. यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया डोर्नसाइफ के 2020 की एक स्टडी के अनुसार, इसमें लगभग 900,000 बिना डॉक्यूमेंट वाले अप्रवासी हैं, जिनमें से कई एक दशक से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे हैं. यानी उन्हें कानून जब चाहे सरकार अमेरिका से निकाल सकती है. लॉस एंजिल्स में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति ऐसे परिवार में रहता है जहां कम से कम एक सदस्य के पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं है.

यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, लॉस एंजिल्स के आधे से अधिक विदेशी मूल के निवासी प्राकृतिक नागरिक (naturalised citizens) हैं यानी उनका जन्म अमेरिका में हुआ है और उन्हें यहां कि नागरिकता मिल गयी है. लॉस एंजिल्स के 18 लाख से अधिक निवासी हिस्पैनिक या लातीनी हैं, लगभग 50 लाख एशियाई, मूल हवाईयन या अन्य प्रशांत द्वीपवासी हैं. 11.5 लाख से अधिक लोग कहते हैं कि वे “कोई अन्य जाति” हैं, और उनमें से 50 लाख से अधिक लोग दो या दो से अधिक जातियों से संबंधित हैं. शहर में 56 प्रतिशत से अधिक लोग घर पर अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषा बोलते हैं – मुख्यतः स्पेनिश.

लॉस एंजिल्स में विरोध प्रदर्शन कैसे शुरू हुआ?
विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को तब शुरू हुआ जब इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) अधिकारियों ने शहर के प्रमुख लातीनी आबादी वाले क्षेत्रों में छापेमारी की. इन छापों के बाद दर्जनों गिरफ्तारियां हुईं, जिनके बारे में अधिकारियों का कहना है कि ये अवैध प्रवासी और गैंग के सदस्य हैं.

शहर के निवासियों ने गिरफ्तारियों का जवाब नारेबाजी और अंडे फेंककर दिया. पुलिस अधिकारियों को काली मिर्च के स्प्रे और गैर-घातक गोला-बारूद का उपयोग करके भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मजबूर होना पड़ा. विरोध प्रदर्शन पांच दिनों से चल रहा है, जो शहर के निचले हिस्से और भारी लातीनी उपनगर पैरामाउंट तक फैल गया है.

राजा रघुवंशी हत्याकांड: पुलिस पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे, जानिए अब तक के 5 बड़े अपडेट

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राजा रघुवंशी हत्याकांड में रोज सनसनीखेज खुलासे होते जा रहे हैं. मर्डर की मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी कड़ी सुरक्षा में यूपी के गाजीपुर से शिलांग लौट चुकी है और उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है. इधर सोनम के भाई ने राजा के परिवार से मुलाकात की और माफी मांगी है. उन्होंने बहन के लिए कड़ी सजा की मांग की. साथ ही पुलिस ने राजा की हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए हैं.

1. सोनम ने कराई थी पति की हत्या, कबूल किया अपना जुर्म
सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी की मौत में अपनी भूमिका को स्वीकार करते हुए बुधवार को अपना जुर्म कबूल कर लिया. मेघालय पुलिस ने जब उसके प्रेमी राज कुशवाहा से उसका आमना-सामना कराकर पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह मान लिया. पुलिस ने खून से सनी जैकेट, सोनम का रेनकोट और अन्य सबूत सामने रखे और सोनम से सवाल किया, तो वह चुप हो गई, लेकिन इसके बाद उसने सभी सबूतों को देखते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया.

पति, बच्चों और ससुराल वालों को जहर देकर मारने की साजिश, सोनम बेवफा जैसी ही एक और कहानी आई सामने

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इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या का मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. अभी तक की जांच में राजा की हत्या के मामले में उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आती नजर आ रही है. राजा की हत्या के मामले ने पति-पत्नी के प्यार और विश्वास के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए. शातिर सोनम का सच और मासूम राजा की हत्या के मामले के बीच दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक से भी एक ऐसा ही खौफनाक मामला सामने आया है. कर्नाटक से सामने आई इस कहानी में 33 साल की महिला को गिरफ्तार किया है. महिला पर आरोप है कि उनके अपने विवाहेत्तर संबंध को बचाने के लिए पति, बच्चों और ससुराल वालों को जहर देने की कोशिश की.

दिल दहला देने वाली यह घटना कर्नाटक के हसन के बेलूर तालुक के केरलूर गांव की है. आरोपी महिला चैत्रा की 11 साल पहले गजेंद्र से शादी हुई थी. दंपति के बीच शुरू में सौहार्दपूर्ण संबंध थे और उनके दो बेटे भी थे. हालांकि, पिछले तीन सालों में दंपति के बीच तनाव बढ़ने लगा और छोटी-छोटी बातों पर अक्सर झगड़े होने लगे.

इस दौरान चैत्रा ने कथित तौर पर पुनीत नाम के एक व्यक्ति के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए. जब ​​उसके पति को इस संबंध के बारे में पता चला, तो उसने चैत्रा के माता-पिता को सूचित किया. परिवार ने मामले को सुलझाने की कोशिश की.

हालांकि बाद में चैत्रा ने फिर से एक और संबंध बना लिया, इस बार शिवू नाम के एक स्थानीय व्यक्ति के साथ. इस डर से कि उसके पति, बच्चे और ससुराल वाले इस बारे में जान सकते हैं और इस संबंध में हस्तक्षेप कर सकते हैं, उसने कथित तौर पर उन सभी को खत्म करने की योजना बनाई.

चैत्रा ने कथित तौर पर परिवार के खाने में जहरीली गोलियां मिलाना शुरू कर दिया, और शिवू ने भी इस अपराध में उसकी मदद की. सौभाग्य से, गजेंद्र को इस योजना का पता चल गया और उसने तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना दी. बेलूर पुलिस ने चैत्रा को हिरासत में ले लिया है और घटना की पूरी जांच शुरू कर दी है.

सरकारी मेडिकल कॉलेज बनें जनता की पहली पसंद : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

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प्रधानमंत्री विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने चिकित्सा और सामुदायिक विकास दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बैठक लेकर मंगलवार को कांकेर जिले में समीक्षा की। मंत्री श्री जायसवाल ने जिले के नांदनमारा स्थित इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित स्वशासी समिति की बैठक लेकर कॉलेज की कार्यप्रणाली, आधारभूत ढांचे और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री ने साफतौर पर निर्देश दिए कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों को इस रूप में विकसित किया जाए कि वे जनता की पहली पसंद बनें। उन्होंने कहा कि बाह्य रोगी विभाग व अंतःरोगी सेवाओं में संवेदनशीलता और उत्कृष्टता लाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
“जनता को केवल इलाज नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदना भी मिले, यही हमारी चिकित्सा व्यवस्था की पहचान होनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने चिकित्सा अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि विभाग का उद्देश्य सिर्फ उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं है, अपितु आमजनता के प्रति संवेदनशीलता और उन्हें सम्मान भी मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया ने कॉलेज में पारदर्शिता, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, स्टाफ की नियमित नियुक्ति और उत्तरदायित्व तय करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग की आयुक्त श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, सांसद श्री भोजराज नाग, कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम, मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, हस्तशिल्प बोर्ड अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत एवं अधिष्ठाता डॉ. खान सहित अन्य जनप्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ उपस्थित रहे।

अब जीपीएम जिले की कोई भी शाला शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय नहीं

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शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अब कोई भी शाला न तो शिक्षकविहीन है और न ही एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। यह सफलता शिक्षकों के प्रभावी युक्तियुक्तकरण के जरिए प्राप्त हुई है।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, युक्तियुक्तकरण से पहले जिले में 4 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन थीं, वहीं 130 प्राथमिक एवं 10 पूर्व माध्यमिक शालाएं एकल शिक्षकीय थीं। अब इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। यह जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो विद्यार्थियों के हित में एक समर्पित प्रयास को दर्शाता है।

जिले में कुल 13 शालाओं का समायोजन किया गया, जबकि 844 में से 831 शालाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी, वहाँ से अतिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण कर उन्हें आवश्यकता वाले विद्यालयों में पदस्थ किया गया है।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की समन्वित पहल से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो। युक्तियुक्तकरण के परिणामस्वरूप अब संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा — जैसे कि अच्छी भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा।