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अमरजीत सिंह का घर सूरज की रोशनी से हुआ रोशन

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प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम जनजीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना के अंतर्गत लोग अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्राप्त कर रहे हैं। योजना के तहत उपभोक्ताओं को कम ब्याज दर पर ऋण के साथ-साथ 30 हजार से 78 हजार रुपये तक की अनुदान राशि भी दी जा रही है।

जांजगीर जिले के चांपा नगर निवासी श्री अमरजीत सिंह सलूजा इस योजना से लाभान्वित होने वालों में एक हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है, जिस पर उन्हें शासन की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री सलूजा ने बताया कि सोलर सिस्टम लगाने से पहले उनका बिजली बिल काफी अधिक आता था, जिससे उनका घरेलू बजट प्रभावित होता था। लेकिन अब सोलर पैनल लगने के बाद उनका बिजली बिल पूरी तरह से शून्य हो गया है।

उन्होंने बताया कि इस योजना से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि बिजली कटौती की समस्या से भी छुटकारा मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को “एक पंथ दो काज” की संज्ञा देते हुए कहा कि इससे न केवल पर्यावरण को लाभ हो रहा है, बल्कि आमजन को आर्थिक राहत भी मिल रही है।

श्री सलूजा ने बताया कि अब चांपा में सोलर सिस्टम को लेकर लोगों में जागरूकता और विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। वे स्वयं भी लोगों को इस योजना की जानकारी देकर प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम जनता के लिए एक दूरदर्शी और सशक्त कदम है, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि दोनों में सहायक साबित हो रही है।

शहर से सौ किमी दूर पंडोपारा के स्कूल में दूर हुई शिक्षको की कमी

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कोरबा शहर से लगभग सौ किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच पंडोपारा में जब स्कूल खुला तब यहाँ रहने वाले पंडो समाज के लोगो में न सिर्फ अथाह खुशी थी, अपितु वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर भी सुकून और राहत महसूस कर रहे थे। अपने गाँव में स्कूल पाकर वे अपने बच्चों को स्कूल भी भेजने लगे, लेकिन इस विद्यालय में बनी शिक्षको की कमी उन्हें अक्सर चिंतित करती रहती थी, क्योंकि उनके बच्चे पाठशाला तो नियमित जाते थे, लेकिन विद्यालय में एकमात्र शिक्षक होने का खमियाजा भी बच्चों को भुगतना पड़ता था। कभी किसी कारण से शिक्षक के अवकाश में होने के कारण बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता था तो कभी उन्हें कमरे में बिना क्लास या पढ़ाई के घण्टो समय बितानी पड़ती थी। लिहाज़ा बच्चों के साथ माता-पिता भी चिंतित थे कि उनके गाँव के विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं है। आखिरकार जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में ऐसे शिक्षकविहीन और एकलशिक्षकीय विद्यालयों की सुध ली गई तो युक्ति युक्तकरण जैसी व्यवस्था ने घने जंगलों में बसे पंडो जनजाति के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की राह आसान कर दी। अतिशेष शिक्षको के समायोजन से पंडोपारा ही नहीं कोरबा जिले के लगभग 300 एकल शिक्षकीय और शिक्षकविहीन विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के भाग्य बदल दिए है, जिसका लाभ इस शिक्षण सत्र से मिलने लगेगा।

राज्य शासन के दिशा निर्देशों के तहत कोरबा जिले में युक्ति युक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की गई है। इस प्रक्रिया का लाभ जिले के सभी शिक्षक विहीन विद्यालयों को मिला। अब कोरबा जिले में कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं है। युक्ति युक्तकरण से प्राथमिक शाला के 14 शिक्षकविहीन और 287 एकलशिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मिडिल स्कूलों में भी 4 शिक्षकविहीन और 20 एकलशिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। अब सभी मिडिल स्कूलों में कम से कम 3 शिक्षक और दूरस्थ क्षेत्र के प्राथमिक शालाओ में दो सहायक शिक्षक बच्चों को अध्यापन कराएंगे। शासन की इस पहल से जिले के दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालयों में बनी शिक्षको की कमी भी दूर हो गई है। ऐसे ही पाली ब्लॉक के अंतर्गत अंतिम छोर ग्राम उड़ान से आगे पण्डो जनजाति के बसाहट पंडोपारा में एक प्राथमिक शाला है। शासन ने इस दूरस्थ गाँव में पाठशाला खोलकर पंडो समाज के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने की पहल तो की, लेकिन यहाँ बनी शिक्षक की कमी से विगत कई वर्षों तक बच्चों को जूझना पड़ा। हालांकि आसपास के विद्यालयों व अन्य व्यवस्थाओं से यहाँ अध्यापन तो कराया गया, लेकिन यह नाकाफी ही थी। पंडोपारा के ग्रामीण मंगल सिंह पंडो ने बताया कि गाँव में स्कूल संचालित होने पर सभी खुश थे। कई साल तक यहाँ एक शिक्षक ही पढ़ाते रहे हैं, जिससे अन्य कक्षा के विद्यार्थी खाली बैठने को मजबूर रहते थे। कई बार किसी आवश्यक काम से उक्त शिक्षक के अवकाश में रहने से भी व्यवस्था बिगड़ जाती थी। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को पास के ही स्कूल में भेज सकते हैं, इसलिए यहाँ का स्कूल हमारे लिए महत्वपूर्ण था मगर शिक्षक की कमी से यहाँ की अध्यापन व्यवस्था हमेशा बिगड़ती रही है। मंगल सिंह ने बताया कि उन्हें मालूम हुआ है कि अब गाँव के इस स्कूल में नए शिक्षक भी आ रहे हैं, यह बहुत खुशी की बात है। दो शिक्षक होने से क्लास में सभी बच्चों की पढ़ाई होगी। कोई खाली नहीं बैठेगा। इसी विद्यालय में कक्षा चौथी के छात्र जगदेश्वर पंडो, तीसरी कक्षा के राजेन्द्र और कक्षा दूसरी के मुकेश पंडो को भी खुशी है कि उनके स्कूल में इस सत्र से नए गुरुजी पढ़ाने को आएंगे।

छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए : मंत्री श्री रामविचार नेताम

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आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 में पदोन्नत हुए छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को काउंसलिग के माध्यम से संपन्न कराया जाए। मंत्री श्री नेताम ने यह निर्देश मंगलवार को आदिम जाति तथा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर में 19 जिलों के सहायक आयुक्त एवं परियोजना प्रशासकों के साथ विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित 3357 छात्रावास-आश्रमों में छात्रावास अधीक्षक रीढ़ के समान है। इस पर संबंधित संस्था के सुचारू रूप से संचालन की सबसे प्रमुख जिम्मेदारी होती है। अतः इनकी नियुक्ति, सेवा शर्तें, पदोन्नति एवं पदस्थापना संबंधी कार्यों पर प्रमुखता से ध्यान देने की जरूरत है।

आदिम जाति विकास मंत्री श्री नेताम ने कहा कि वर्ष 2022 में आयुक्त कार्यालय के आदेश द्वारा कुल 491 छात्रावास अधीक्षकों को श्रेणी “द ” से श्रेणी “स” के पद पर पदोन्नत किया गया है, परन्तु इनकी पदस्थापना अभी तक नहीं हो पाई, क्योंकि कुछ जिलों में स्वीकृत पद से अधिक अधीक्षक नियुक्त थे कई जगह पो.मैट्रिक संस्थाओं में रिक्त पदों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। इसके साथ ही पदस्थापना के संबंध में कई प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।

पदस्थापना नहीं होने से अधीक्षकों की सेवा शर्तों संबंधी समस्याएं आ रही थी। इसी प्रकार अप्रैल 2025 में कुल 486 छात्रावास अधीक्षकों को श्रेणी “द” से श्रेणी “स” के पद पर पदोन्नत किया गया है। अब इन सभी पदोन्नत अधीक्षकों की पदस्थापना पारदर्शी तरीके से एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत् काउंसिलिंग के माध्यम से किये जाने हेतु मंत्री श्री नेताम के निर्देश पर विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है। इसके लिए जिला स्तरीय, संभाग स्तरीय एवं राज्य स्तरीय समिति का गठन किए जाने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर, संभाग स्तरीय समिति के अध्यक्ष संभागायुक्त एवं राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित विकास विभाग होंगे।

जिला स्तरीय समिति को 12-13 जून से प्रक्रिया प्रारंभ कर 16 जून तक संपन्न करने के निर्देश दिए गए हैं इसी प्रकार संभाग स्तरीय समिति 17-18 जून से 19-20 जून तक एवं राज्य स्तरीय समिति को 20-21 जून से लेकर 22-23 जून तक प्रक्रिया संपन्न करने हेतु निर्देशित किया गया है। जिला स्तरीय समिति एवं संभाग स्तरीय समिति द्वारा जारी पदस्थापना प्रस्ताव को जिला मुख्यालय में कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त कार्यालय एवं संभाग मुख्यालय में संभागीय आयुक्त एवं सहायक आयुक्त संभाग मुख्यालय के कार्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करेंगे। उक्त प्रस्तावों पर किसी भी प्रकार की दावा-आपत्ति होने पर आवेदक राज्य स्तरीय समिति के समक्ष सूची प्रकाशन के 02 दिवस के भीतर अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है।

राज्य स्तरीय समिति प्राप्त अभ्यावेदन का निराकरण 02 दिवस के भीतर कर आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर को पदस्थापना सूची जारी करने हेतु प्रतिवेदन देगी। राज्य स्तरीय समिति के द्वारा जारी अनुशंसित सूची में कोई त्रुटि या आपत्ति होने पर आवेदक विभाग के भारसाधक सचिव के समक्ष सूची जारी होने के 02 दिवस के भीतर अभ्यावेदन प्रस्तुत करेंगे, जिस पर भारसाधक सचिव द्वारा नियमानुसार अभ्यावेदन का निराकरण किया जाएगा। इस प्रकार प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी। प्रत्येक समिति के दायित्व एवं अन्य नियम-शर्तों का विस्तार से उल्लेख शासन द्वारा जारी आदेश में किया गया है।

आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा 25 जून तक पदस्थापना आदेश भी जारी कर दिया जाएगा। काउंसलिग प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो, इसके लिए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा स्वयं पूरी प्रकिया की सतत मानीटरिंग कर रहे हैं।

संतु चक्रेस को मिला सपनों का आशियाना, मुख्यमंत्री से पक्के मकान की चाबी पाकर भावुक हुए बुजुर्ग

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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण न सिर्फ जरूरतमंदों को पक्का मकान दे रही है, बल्कि उनके सपनों को भी नया ठौर और आत्म-सम्मान दे रही है। ऐसी ही एक कहानी है जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा निवासी 70 वर्षीय संतु चक्रेस की।

वर्षों तक कच्चे घर में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले बुजुर्ग संतु चक्रेस आज बेहद प्रसन्न हैं क्योंकि उन्हें उनका पहला पक्का घर मिल गया है। खास बात यह रही कि इस घर की चाबी उन्हें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों से मिली, जब वे हाल ही में जशपुर प्रवास पर थे।

भावुक संतु चक्रेस ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि “उम्र के इस पड़ाव में जब चिंता से मुक्त होकर जीना चाहता है, तब यह पक्का मकान मेरे लिए भगवान का आशीर्वाद है। अब मुझे और मेरे परिवार को न तो बारिश से डर है और न ही जहरीले जीव-जंतुओं से। अब हमारा भी एक सुरक्षित और मजबूत आशियाना है।”

संतु चक्रेस ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान स्वीकृत हुआ था, जो अब पूर्ण रूप से बनकर तैयार है। यह महज एक मकान नहीं, बल्कि उनके लिए आत्म-सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक है।

वर्षों तक झोपड़ी जैसे घर में जीवन बिताने के बाद जब उन्हें अपना खुद का ठोस छत मिला, तो उनके चेहरे की खुशी देखने लायक थी

जनजातीय समाज के विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री श्री साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने छात्रावास-आश्रम प्रबंधन के लिए नवीन पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही, आगामी शिक्षण सत्र 2025-26 में प्रदेश के आश्रम छात्रावासों के संचालन हेतु नई व्यवस्था के अंतर्गत शिष्यवृत्ति एवं भोजन सहायता की पहली किश्त (जुलाई से सितंबर) के रूप में 85 करोड़ रुपए का ऑनलाइन अंतरण भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों और आदिवासी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए संकल्पित है। हमारा लक्ष्य है कि इन वर्गों का जीवन स्तर बेहतर हो, वे आत्मनिर्भर बनें और विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जनजातीय समुदाय की सदैव चिंता करते हैं और उनके विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। केंद्र सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने हेतु अनेक योजनाएं संचालित कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पीएम जनमन एवं धरती आबा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवास और सड़क निर्माण कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया। साथ ही, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत शिविरों के माध्यम से हितग्राहियों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र जैसे मूलभूत दस्तावेजों को तैयार करने का कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने आश्रम-छात्रावासों की समीक्षा करते हुए कहा कि जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ सर्वसुविधायुक्त छात्रावास बनाए जाएं। शौचालय, बेड, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं में एकरूपता रहे तथा छात्रावासों की निगरानी के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा संचालित क्रीड़ा परिसरों की भी जानकारी ली और बच्चों द्वारा विभिन्न खेलों में अर्जित सफलताओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 20 क्रीड़ा परिसरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि खेल प्रतिभाएं और निखरें और खिलाड़ी खेलो इंडिया सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

प्रयास विद्यालयों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें उच्च शिक्षित प्रशिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। साथ ही, इंजीनियरिंग, मेडिकल, क्लैट, सीयूईटी सहित अन्य कैरियर विकल्पों के लिए भी बच्चों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आदिम जाति विभाग के अंतर्गत स्वीकृत एवं प्रगतिरत भवनों के निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने तथा भवनविहीन संस्थानों के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक भी शीघ्र आयोजित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आदिवासी संस्कृति संरक्षण एवं विकास के अंतर्गत देवगुड़ी निर्माण और अखरा विकास के कार्यों की भी समीक्षा की। श्री साय ने अखरा विकास के तहत आस्था स्थलों पर उपयुक्त प्रकाश, बैठक व्यवस्था, शेड और पेयजल सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने शहीद एएसपी श्री आकाश राव गिरपुंजे को दी श्रद्धांजलि: पार्थिव शरीर को कंधा देकर दी अंतिम विदाई

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सुकमा जिले के कोंटा में नक्सलियों द्वारा किए गए कायरतापूर्ण आईईडी विस्फोट में शहीद हुए एएसपी श्री आकाश राव गिरपुंजे को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर पहुंचकर शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा शहीद के पार्थिव शरीर को कंधा देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद श्री गिरपुंजे के शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं और उन्हें इस कठिन समय में ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद एएसपी श्री आकाश राव गिरपुंजे ने अपने कर्तव्य के प्रति अदम्य साहस, निष्ठा और समर्पण का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। हमें उन पर गर्व है। सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लगातार हो रही सुरक्षाबलों की सफल कार्रवाइयों से नक्सली बौखलाए हुए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शहीद श्री गिरपुंजे की वीरता और देशभक्ति को सदैव याद रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री के साथ इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, शहीद के परिजन, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

राज्यपाल श्री डेका ने सक्ति जिले के टी.बी. मरीजों को दी 60 हजार रुपए की आर्थिक सहायता

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राज्यपाल रमेन डेका ने सक्ति जिले के 10 टीबी मरीजों के लिए एक सराहनीय कदम उठाते हुए उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने हेतु 60 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। यह सहायता राशि उन्होंने अपने स्वेच्छानुदान मद से दी है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिलेगी। प्रत्येक मरीज को प्रति माह 500 रुपए के मान से एक वर्ष तक सहायता दी जाएगी।

भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य को टीबी मुक्त बनाने के लिए राज्यपाल श्री डेका ने इस अभियान में समुदाय की भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया और जन सहयोग की महत्ता पर बल दिया है। वे जिलों के भ्रमण के दौरान मरीजों की स्थिति की जानकारी लेते हैं और उनकी हरसंभव सहायता व मदद सुनिश्चित कराते हैं।

महासमुंद में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

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महासमुंद जिले में शराब के अवैध परिवहन एवं विक्रय के खिलाफ आबकारी विभाग द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत आज बसना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की गई। कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से कुल 30 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब के साथ एक स्कूटी भी जब्त की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अखराभाठा टुकड़ा निवासी सूरज बारीक के पास से 30 बल्क लीटर कच्ची शराब और शराब परिवहन में प्रयुक्त टीवीएस स्कूटी जूपिटर (कीमत 1,06,000 रूपए) जब्त की गई। ग्राम बेलडीही पाठर निवासी चंद्रमणि मिरि के पास से 15 बल्क लीटर कच्ची शराब (कीमत 3,000 रूपए) बरामद की गई। दोनों आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2), 46(1), 46(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

इस कार्रवाई में ग्राम बेलडीही पाठर के ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग मिला। अभियान को सफल बनाने में आबकारी वृत बसना प्रभारी श्री दरसराम सोनी, उपनिरीक्षक साकरा वृत प्रभारी श्री एच.के. त्रिपुड़े, पिथौरा वृत प्रभारी श्री मिर्जा जफर बेग एवं प्रधान आरक्षक राज किशोर पांडे की विशेष भूमिका रही। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में शराब के अवैध कारोबार के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार को मिला पक्का आवास

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प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत जशपुर जिले के दूरस्थ अंचल में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को अब पक्के मकान का लाभ मिल रहा है। विकासखंड बगीचा के ग्राम पंचायत पंड्रापाठ की निवासी श्रीमती फूलोबाई को इस योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ, जो अब बनकर तैयार हो चुका है। वर्षों तक कच्चे घर में कठिन जीवन जीने वाली फूलोबाई के लिए यह घर केवल एक आवास नहीं, बल्कि उनके सपनों का महल बन चुका है।

फूलोबाई ने बताया कि बरसात में छत टपकती थी और हमेशा जहरीले जीवों का डर सताता था। लेकिन जब से यह पक्का आवास बना है तब से मैं चौन से सो पाती हूँ। मेरे जीवन में यह पहली बार है कि खुद का मजबूत और सुरक्षित घर है। फूलोबाई ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह घर उनके लिए सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुका है।

प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत ऐसे कई परिवारों को पक्के मकान का लाभ मिल रहा है, जो उनके जीवन को बेहतर और सुरक्षित बना रहा है। यह योजना आदिवासी और पिछड़े समुदायों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

आपने भी निकाल लिया PF का पैसा, पर पेंशन फंड का क्‍या होगा, कब मिलेगी EPS में जमा रकम?

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प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले ज्‍यादातर कर्मचारी अपनी जॉब बदलने या कॉरपोरेट सेक्‍टर छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने पर कर्मचारी भविष्‍य निधि यानी ईपीएफ में जमा पैसा तो निकाल लेते हैं, लेकिन इनमें से ज्‍यादातर लोगों को पेंशन फंड में जमा रकम के बारे में नहीं पता होता. ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन स्‍कीम में जमा रकम को आखिर कब और कैसे निकाला जा सकता है, इसके बारे में आज भी ज्‍यादातर लोगों को नहीं पता है.

दरअसल, नौकरी बदलने वाले और संगठित क्षेत्र छोड़ने वाले कर्मचारी अपने भविष्य निधि (EPF) बैलेंस को निकाल लेते हैं और सोचते हैं कि उन्होंने अपने रिटायरमेंट फंड का अध्याय बंद कर दिया है. उन्हें यह पता नहीं होता कि EPF निकासी के बाद भी पेंशन घटक यानी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अपने आप बंद नहीं होती और न ही इसमें जमा रकम आपको मिलती है. इसे आपकी वर्किंग हिस्‍ट्री के आधार पर गणना करके निकाला जा सकता है.

क्‍या है ईपीएस और ईपीएफ
जब नियोक्ता और आप दोनों EPF में योगदान करते हैं, तो नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPS में जाता है. EPF का हिस्सा ब्याज कमाता है और इसे निकाला जा सकता है, जबकि EPS का हिस्सा आपकी पेंशन के लिए होता है और इस पर ब्याज नहीं मिलता. इसे केवल 10 साल की सेवा के बाद और 58 साल की उम्र पूरी करने पर ही पूरी पेंशन के लिए निकाला जा सकता है. अगर आप 10 साल पूरे करने से पहले PF निकालते हैं, तो आपका EPS योगदान तब तक नहीं निकाला जाता जब तक आप इसे निकालने के लिए विशेष रूप से फॉर्म 10C नहीं भरते.

जिन लोगों की 10 साल से अधिक की सेवा है, उनके EPS योगदान से उन्हें पेंशन का हक मिलता है, भले ही उन्होंने अपना EPF निकाल लिया हो. आपको 58 साल की उम्र पूरी करने पर पेंशन के लिए अलग से फॉर्म 10D भरकर आवेदन करना होगा. अधिकांश मामलों में कर्मचारी अपनी सेवा के पांच या छह साल बाद पीएफ निकालते समय अनजाने में अपने ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) के हिस्से को छोड़ देते हैं. चूंकि, ईपीएस स्वचालित रूप से आपके बैंक खाते में नहीं आता और इस पर ब्याज भी नहीं मिलता, इसलिए इसे ध्यान में नहीं रखा जाता.