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कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस वार्ता पर बड़ा खुलासा….

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कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को प्रदर्शन का ऐलान किया है. इससे पहले 3 जून को कॉकरोच जनता पार्टी ने एक प्रेस वार्ता की. इस प्रेस वार्ता को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है.

कॉकरोच जनता पार्टी ने 3 जून को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी. इस कार्यक्रम के लिए अनुमति दिलाने को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा द्वारा कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के निदेशक को लिखी गई एक चिट्ठी चर्चा में है.

चिट्ठी में पत्रकार सौरभ दास को प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था, हालांकि पत्र में कहीं भी कॉकरोच जनता पार्टी का उल्लेख नहीं है.

अभी तक चुप हैं मनोज झा

इस चिट्ठी को लेकर अब तक मनोज झा की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. सौरभ दास को हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है. पार्टी ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है.

इस प्रदर्शन को सोनम वांगचुक समेत कई चर्चित हस्तियों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है. वहीं पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके के अमेरिका से दिल्ली पहुंचने पर एयरपोर्ट पर उनके स्वागत की भी तैयारी बताई जा रही है.

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर उस समय चर्चा में आई थी, जब सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यामूर्ति सूर्याकांत की एक टिप्पणी के बाद इससे जुड़ी गतिविधियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित किया.

पत्र में क्या था?

राज्यसभा सांसद और आरजेडी नेता प्रो. मनोज कुमार झा ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के निदेशक को पत्र लिखकर पत्रकार सौरव दास के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने हेतु स्थान उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी. पत्र में उन्होंने अनुरोध किया था कि सौरव दास को शाम 5 बजे (3 जून) कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए जगह आवंटित की जाए. प्रो. झा ने अपने पत्र में इसे एक औपचारिक अनुशंसा बताते हुए क्लब प्रशासन से आवश्यक व्यवस्था करने का आग्रह किया था.

उधर, समाचार एजेंसी PTI को दिए एक बयान में मनोज झा ने 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा था कि इस मुद्दे पर उनका रुख बिल्कुल स्पष्ट है और वह इस बारे में पहले भी लिख चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब तक किसी संगठन की विचारधारा स्पष्ट रूप से सामने नहीं आती, तब तक उस पर टुकड़ों में टिप्पणी करना उचित नहीं है. मनोज झा ने कहा, जिस राजनीतिक संगठन की आप बात कर रहे हैं, उसकी विचारधारा को लेकर हमारी समझ अभी स्पष्ट नहीं है. जब तक उसकी वैचारिक दिशा साफ नहीं होती, तब तक उस पर कोई ठोस टिप्पणी करना सही नहीं होगा.

West bengal Politics: ममता की बढ़ी चुनौती, दत्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि…

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रिजू दत्ता ने कहा कि यह पूरा कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और अब इस पर सवाल खड़े करने की गुंजाइश नहीं है. उनका दावा है कि ऋतब्रत के पक्ष में विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी को बड़ा झटका देते हुए दावा किया है कि उनके साथ पार्टी के 58 विधायक हैं और उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना गया है. वहीं, एक और टीएमसी से निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने भी इसे लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 ने ऋतब्रत का समर्थन किया है.

सिर्फ साइन बोर्ड बच जाएगा

रिजू दत्ता ने कहा कि यह पूरा कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और अब इस पर सवाल खड़े करने की गुंजाइश नहीं है. उनका दावा है कि ऋतब्रत के पक्ष में विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सभी विधायक ममता बनर्जी को पार्टी नेता मानते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं और उन पर “बॉस कल्चर” चलाने का आरोप लगाया.

दत्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ममता बनर्जी अब भी स्थिति को नहीं समझतीं, तो जल्द ही पार्टी सिर्फ “साइन बोर्ड” बनकर रह जाएगी.

गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है. कभी 200 से अधिक सीटों वाली पार्टी अब घटकर 80 विधायकों तक सीमित रह गई है. शुभेंदु अधिकारी से भवानीपुर सीट पर हार ने ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को और झटका दिया.

ममता की बढ़ी चुनौती

इस बीच, बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित किया है. पार्टी द्वारा पहले ही ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित किया जा चुका है, लेकिन इस कदम से बगावत शांत होने के बजाय और तेज होती नजर आ रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के सामने यह उनके लंबे राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, हालांकि उनकी वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.

 

भारतीय जनता पार्टी के तमिलनाडु के फायर ब्रांड नेता अन्नामलाई जल्द ही पार्टी से इस्तीफा दे देंगे. इसको लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है….

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तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता के. अन्नामलाई जल्द ही पार्टी से इस्तीफ दे देंगे. उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हाल ही में मुलाकात की है. अब चर्चा है कि वे जल्द ही पार्टी का साथ छोड़ देंगे. अन्नामलाई शुक्रवार (5 जून) को भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन को इस्तीफा दे सकते हैं.

अन्नामलाई जल्द ही दिल्ली से तमिलनाडु के लिए रवाना होंगे. वे इसके बाद शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. अहम बात यह भी है कि अन्नामलाई को बीजेपी नेतृत्व की ओर से अभी तक जवाब नहीं मिला है. तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्री कजगम) की जीत के बाद राजनीतिक गलियारे में काफी हलचल देखी गई. भाजपा को तमिलनाडु चुनाव में निराशा हाथ लगी थी. इसी के बाद अन्नामलाई ने इस्तीफे का मन बना लिया.

अन्नामलाई ने भाजपा के शीर्ष नेताओं से की मुलाकात

तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने मंगलवार को नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई बैठकें कीं. ये बैठकें भाजपा में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर जारी अटकलों और राज्य इकाई में हाल के घटनाक्रमों से उनकी असंतुष्टि की खबरों के बीच हुईं.

अन्नामलाई ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की.इन मुलाकातों में कथित तौर पर तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति और पार्टी के भीतर अन्नामलाई के भविष्य के मार्ग पर चर्चा हुई.

इस साल की शुरुआत में तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई की भविष्य की भूमिका को लेकर बढ़ती राजनीतिक अटकलों के बीच इन बैठकों का महत्व बढ़ गया है. हालांकि, हाल के दिनों में उनकी असंतुष्टि की अफवाहें तेज हो गई हैं, लेकिन न तो अन्नामलाई और न ही भाजपा नेतृत्व ने चर्चाओं के विवरण पर कोई सार्वजनिक बयान दिया है.

मौसम ने बिगाड़ा राहुल गांधी का पूरा उत्तराखंड दौरा, अल्मोड़ा, पौड़ी और देहरादून के सभी कार्यक्रम रद्द…

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खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण राहुल गांधी का पूरा उत्तराखंड दौरा रद्द हो गया. अल्मोड़ा, पौड़ी और देहरादून के सभी कार्यक्रम रद्द कर उन्हें दिल्ली लौटना पड़ा.

उत्तराखंड दौरे पर आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पूरा कार्यक्रम खराब मौसम की भेंट चढ़ गया. पहले उनका अल्मोड़ा और पौड़ी जाने का कार्यक्रम था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण वह वहां नहीं पहुंच सके. इसके बाद देहरादून का दौरा भी रद्द कर दिया गया और अंततः उन्हें दिल्ली वापस लौटना पड़ा. राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर प्रदेश कांग्रेस में काफी उत्साह था.

लगभग चार साल बाद उनके उत्तराखंड आने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं. अल्मोड़ा में जनसभा और पौड़ी में कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं. इसके अलावा देहरादून में भी उनके कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित थे. मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली कि पूरा कार्यक्रम धरा का धरा रह गया. खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते उनका हेलीकॉप्टर पंतनगर से आगे नहीं जा सका. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उड़ान को रोकना पड़ा. काफी इंतजार के बाद भी जब मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो उनका अल्मोड़ा और पौड़ी दौरा रद्द कर दिया गया.

दौरा रद्द होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मायूसी
इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि वह देहरादून पहुंच सकते हैं, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए यह दौरा भी रद्द करना पड़ा. अंततः राहुल गांधी को अपना पूरा उत्तराखंड दौरा रद्द कर दिल्ली लौटना पड़ा.इस घटनाक्रम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी निराशा देखने को मिली. जिन कार्यक्रमों के लिए लंबे समय से तैयारियां चल रही थीं, वे सभी अचानक रद्द हो गए. कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया और उनके चेहरे मायूस नजर आए.

बीजेपी का तंज , राजनीतिक बयानबाजी
राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा काफी अहम माना जा रहा था, क्योंकि लंबे समय बाद राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा हो रहा था. ऐसे में पार्टी को इससे नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया. इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने चुटकी ली है. पार्टी नेताओं का कहना है कि शायद मौसम भी नहीं चाहता था कि यह दौरा सफल हो. उनका यह भी कहना है कि एक दिन मौसम खराब होना समझ में आता है, लेकिन अगले दिन का दौरा भी रद्द कर देना कई सवाल खड़े करता है, जिसका जवाब कांग्रेस को ही देना चाहिए.

कांग्रेस को झटका , गर्माई राज्य की राजनीति
बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि इस दौरे के रद्द होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा स्वाभाविक है, क्योंकि वे लंबे समय से इस कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे. अब इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है.कुल मिलाकर, खराब मौसम ने कांग्रेस के लिए बड़ा झटका दिया है और राहुल गांधी का यह दौरा बिना किसी कार्यक्रम के ही समाप्त हो गया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.

Maruti ने पेश की देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार, जानें खासियत…

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नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह E85 फ्यूल पर भी चल सकती है. E85 का मतलब है कि फ्यूल में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है.

भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार एथेनॉल बेस्ड फ्यूल को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर को लॉन्च कर दिया है. यह कार खास तकनीक के साथ तैयार की गई है, जिससे यह सामान्य पेट्रोल के अलावा अधिक मात्रा में एथेनॉल मिक्स फ्यूल पर भी चल सकती है.

नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह E85 फ्यूल पर भी चल सकती है. E85 का मतलब है कि फ्यूल में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. वर्तमान में ज्यादातर वाहन E20 तक के फ्यूल पर चलने के लिए तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इससे एक कदम आगे है. यह गाड़ी फ्यूल में मौजूद एथेनॉल और पेट्रोल के अनुपात के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेता है.

तेल आयात पर होने वाला खर्च होगा कम

सरकार एथेनॉल के उपयोग को इसलिए बढ़ावा दे रही है क्योंकि इससे कई फायदे मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को विदेशों से कम कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा. हर साल देश अरबों रुपये का तेल आयात करता है. अगर एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ेगा तो तेल आयात पर होने वाला खर्च कम होगा. इसके अलावा एथेनॉल गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने से किसानों को भी फायदा होगा.

नई वैगनआर को देखने पर आपको सामान्य मॉडल जैसी ही कार नजर आएगी. कंपनी ने इसके डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है. फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के लिए कंपनी ने कार के कई जरूरी हिस्सों को अपग्रेड किया है. इसके साथ ही कार के ECU यानी इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट को भी विशेष रूप से ट्यून किया गया है.

यह ECU लगातार यह जांचता रहता है कि टैंक में कितना एथेनॉल और कितना पेट्रोल मौजूद है. इसी के मुताबिक, इंजन की कार्यप्रणाली को एडजस्ट किया जाता है. इससे कार हर प्रकार के मिश्रण वाले फ्यूल पर बेहतर प्रदर्शन कर पाती है और इंजन की कार्यक्षमता भी बनी रहती है.

वैगनआर को क्यों चुना गया?

मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के लिए वैगनआर को चुना है क्योंकि यह कंपनी की सबसे सफल और पॉपुलर कारों में से एक है. वैगनआर अपनी आरामदायक सीटिंग, बड़े केबिन, अच्छे माइलेज और कम मेंटेनेंस खर्च के लिए जानी जाती है. कंपनी को उम्मीद है कि ग्राहकों के बीच इसकी पॉपुलेरिटी नई तकनीक को अपनाने में मदद करेगी.

कीमत की बात करें तो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के कारण इस मॉडल की कीमत सामान्य वैगनआर से थोड़ी अधिक हो सकती है। हालांकि अगर भविष्य में E85 ईंधन पेट्रोल की तुलना में सस्ता मिलता है, तो ग्राहकों को रोजाना के ईंधन खर्च में अच्छी बचत मिल सकती है। लंबे समय में यह अतिरिक्त कीमत की भरपाई कर सकता है.

आने वाले सालों में भारत में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का बाजार तेजी से बढ़ेगा. जैसे-जैसे एथेनॉल फ्यूल की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे लोग इस तकनीक को अपनाने लगेंगे. कई अन्य कार कंपनियां भी ऐसी कारों और दोपहिया वाहनों पर काम कर रही हैं.

 Monsoon: IMD ने उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी…

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उत्तर प्रदेश में मानसून पूर्वी हिस्सों से प्रवेश करेगा. मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी यूपी में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंच सकता है.

देशभर में भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है. इसके साथ ही देश के सबसे अहम बारिश के मौसम की शुरुआत हो गई है. अब सबसे ज्यादा नजरें उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली पर टिकी हैं, जहां लोग चिलचिलाती गर्मी से राहत का इंतजार कर रहे हैं. मौसम विभाग का कहना है कि मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा.

बिहार में 12 से 15 जून के बीच दस्तक

IMD के अनुमान के अनुसार, बिहार में मानसून 12 से 15 जून के बीच पहुंच सकता है. हालांकि राज्य के कुछ इलाकों में इसकी एंट्री इससे पहले भी हो सकती है. मानसून के प्रवेश के बाद पूरे बिहार में सक्रिय होने में करीब 2 से 3 दिन का समय लग सकता है. इसके बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है.

उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगा मानसून

उत्तर प्रदेश में मानसून पूर्वी हिस्सों से प्रवेश करेगा. मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी यूपी में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंच सकता है, जबकि पश्चिमी यूपी में इसकी एंट्री 20 से 25 जून के बीच होने का अनुमान है. मानसून के पहुंचने के बाद प्रदेश के लोगों को गर्मी और लू से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

दिल्ली में फिलहाल प्रीमानसून गतिविधियां

राजधानी दिल्ली में अभी मानसून पहुंचने में समय है, लेकिन मौसम का मिजाज बदलना शुरू हो गया है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई है. जैसे-जैसे मानसून उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा, दिल्ली-एनसीआर में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी और तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी.

केरल में भारी बारिश का अलर्ट

मानसून की एंट्री के साथ ही केरल के कई हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई है. मौसम विभाग ने 4 जून से 9 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. कई इलाकों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है.

तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन इलाकों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है.

देशभर में बढ़ेगी बारिश की गतिविधियां

मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है. आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश का दायरा बढ़ सकता है.

तेज हवाओं और आंधी का भी अलर्ट

IMD ने उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है. कई जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.

Weather Delhi: दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली. अंगड़ाई तेज हवा झमाझम बारिश से लोगों को गर्मी से मिली राहत….

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दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली. गुरुवार (4 जून) को दोपहर के बाद तेज हवाएं चलनी शुरू हुईं और उसके बाद तेज बारिश हुई. दिन के समय ही काले बादलों ने अंधेरा कर दिया. मौसम विभाग ने 4 जून और 5 जून के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग ने अगले 2 घंटों के दौरान दिल्ली में नरेला, अलीपुर, बुराड़ी, बादली, मॉडल टाउन, करावल नगर, आज़ादपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस, दिलशाद गार्डन, सीमापुरी, कश्मीरी गेट, सीलमपुर, शाहदरा, विवेक विहार, लाल किला और एनसीआर (लोनी देहात) में मध्यम बारिश और बिजली गिरने, 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा ओलावृष्टि/तूफान आने का अनुमान जताया.

इस साल कितनी होगी बारिश?

पिछले सप्ताह मौसम विभाग ने मौसमी वर्षा के अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए कहा था कि इस वर्ष बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. आईएमडी के अनुसार, इस साल देश में मौसमी वर्षा, दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की लगभग 90 फीसदी रहने की संभावना है. एलपीए का मतलब किसी विशेष क्षेत्र में किसी निर्धारित अवधि जैसे एक महीने या मौसम के दौरान लंबे समय आमतौर पर 30 से 50 वर्षों में दर्ज औसत वर्षा से है.

देशभर में मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत (एलपीए) 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर 87 सेंटीमीटर है. यदि मानसून के दौरान वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो आईएमडी उसे ‘अल्प वर्षा’ की श्रेणी में रखता है.

अल नीनो की स्थिति सामान्य से कम वर्षा की संभावित

सामान्य से कम वर्षा की संभावित वजहों में से एक अल नीनो की स्थिति का विकसित होना हो सकता है, क्योंकि इसके प्रभाव से भारत में मानसून के दौरान बारिश कम होती है.

फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन की स्थिति अल नीनो की ओर बढ़ रही है. अल नीनो की स्थिति बनने से देश में मानसून वर्षा कम हो जाती है. आईएमडी ने कहा कि जून में अल नीनो की स्थिति कमजोर रहने की संभावना है, जबकि सितंबर तक इसके मध्यम से मजबूत होने की आशंका है.

बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को केरल में दस्तक दे दी. आमतौर पर मानसून एक जून के आसपास केरल पहुंचता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून ऋतु (जून से सितंबर) की शुरुआत का संकेत माना जाता है. इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई को केरल पहुंचेगा.

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 : हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़….

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प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है।

हरियाली से समृद्धि की ओर

छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है।

शहरों को मिल रही हरित पहचान

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं।

जल संरक्षण बना जनआंदोलन

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है।

नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है।
इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल

पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण: सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे।

धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी…

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अंतराष्ट्रीय बाजार में सुगंधित चावल की है बड़ी डिमांड’

कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में  इंडियन राईस एक्सपोर्ट फेडरेशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक, पायलट प्रोजेक्ट पर बनी सहमति’

छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। श्री नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।

बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत…

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पानी, रोजगार और समृद्धि का संगम: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से बदल रहे गांव’

मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार, 57 प्रतिशत महिलाएं’

1610 करोड़ रुपये से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों से जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह संगम छत्तीसगढ़ को सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दे रहा है।

जल संरक्षण से आजीविका का सृजन

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई अभिनव पहलें शुरू की हैं। वर्तमान में  समाज के संवेदनशील एवं कमजोर वर्गो की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

नवा तरिया-आय के जरिया’ के अंतर्गत विकसित हो रहे 624 सामुदायिक तालाब

इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इन जल संरचनाओं से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम भी बन रहा है।

1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

इसके साथ साथ अन्य जल सरंक्षण, संवर्धन कार्य भी व्यापक सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे है। प्रधान मंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा अपने खर्च पर स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है ।

तकनीक से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप के माध्यम से स्थल चयन तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है।

जलदूत प्रणाली से भू-जल स्तर की हो रही नियमित निगरानी

भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर का लेखन कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी और समुदाय आधारित बन सके।

पारदर्शिता का अभिनव मॉडल

मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश ने तकनीक आधारित नवाचारों को अपनाया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजना में पारदर्शिता एवं जनविश्वास को और सुदृढ़ किया गया है।

जनभागीदारी से “भागीदारी से साझेदारी “(Participation to Partnership) की ओर

अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्राम सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है।

जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार का अभिनव मॉडल

छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की अवधारणा को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और अभिसरण का यह मॉडल राज्य को भागीदारी से साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है।