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विधायक का बेटा MLA, सांसद का बेटा MP तो क्या मुख्यमंत्री नीतीश के पुत्र बनेंगे बिहार के अगले CM

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हाल के वर्षों में ऐसे कम ही उदाहरण देखने को मिले हैं, जिसमें पिता राजनीति में रहे और बेटा राजनीति से कोसों दूर भाग जाए. देश की राजनीति में बीते दो-तीन दशकों से अक्सर यह देखने को मिल रहा है कि अगर पिता राजनीतिज्ञ हैं तो बेटा भी राजनीति को पेशा बना लेता है. एक ही परिवार में पिता-पुत्र, बहू, भाई और साला-साली तक सांसद, विधायक और जिला पार्षद के सदस्य तक बन जाते हैं. मौजूदा दौर में भी कई परिवार इस परंपरा को बरकरार रखे हुए हैं. यूपी में मुलायम सिंह यादव, बिहार में लालू प्रसाद यादव और झारखंड में शिबू सोरेन के पुत्र या तो सीएम बन गए हैं या फिर बनने के सबसे बड़े दावेदार बने हुए हैं. ऐसे में बिहार के मौजूदा सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा गर्म हो गई है. चर्चा किसी और ने नहीं, परिवार के ही सदस्यों ने शुरू किया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या तेजस्वी, अखिलेश और हेमंत सोरेन की तरह निशांत भी सीधे सीएम पद के लिए दावेदारी करेंगे?

यूपी, बिहार, राजस्थान, एमपी, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे छोटे-बड़े राज्यों में मौजूदा राजनेताओं के बेटे-बेटियां राजनीति में ताल ही नहीं ठोक रही हैं, बल्कि सीएम बनने की रेस में भी बने हुए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और बिहार में कोयरी-कुर्मी वोट बैंक पर उनकी पकड़ को बरकरार रखने के लिए निशांत कुमार को पॉलिटिक्स में एंट्री करवाई जा सकती है? क्या निशांत कुमार और नीतीश कुमार को पार्टी के अंदर से लेकर परिवार के अंदर भी राजनीति में आने का जबरदस्त दवाब है?

निशांत राजनीति में इसलिए आएंगे!
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नीतीश कुमार के परिवार के लोग उनके स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा ही चिंतित हो गए हैं. हाल के दिनों में उनका बर्ताव पूर्व के नीतीश कुमार से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है. ऐसे में न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में नीतीश कुमार के परिवार के अहम सदस्य अवधेश कुमार ने निशांत को राजनीति में आने की मांग कर जेडीयू नेताओं को सोचने को मजबूर कर दिया है. हालांकि, निशांत कुमार राजनीति से कोसों दूर रहना चाहते हैं. कई मौकों पर निशांत कुमार बोल चुके हैं, ‘मैं राजनीति में नहीं आऊंगा.’

कई राजनेताओं को मजबूरन राजनीति में आना पड़ा
लेकिन, देश में कई ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें ना चाहते हुए राजनेताओं के बेटे-बेटियों को पार्टी में लाया गया. सबसे बड़ा उदाहरण तो देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी रहे हैं. साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनको राजनीति में आना पड़ा. देश में सैंकड़ों ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें पिता के राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बेटा या बेटी ने आईएएस और आईपीएस जैसे पदों को त्याग दिया. कांग्रेस नेता जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार या फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता बीरेंद्र सिंह के आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह की कहानी कुछ ऐसे ही है. पिता के राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए इन लोगों ने राजनीति में आने के लिए सिविल सर्विस जैसी शानदार नौकरी भी छोड़ दी.

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राजनीति में आकर सीधे सीएम बनेंगे? जानकार बताते हैं कि यह कहना अभी थोड़ा जल्दबाजी होगा. लेकिन, बिहार में कोई भी राजनीतिक दल या गठबंधन कोयरी-कुर्मी वोट बैंक साधने के लिए निशांत कुमार को पलकों पर रखेगा. चाहे वह जेडीयू, आरजेडी या बीजेपी ही क्यों न हो. ऐसे में अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो सालों तक उनकी भी राजनीति वैसे चमकती रहेगी जैसे चरण सिंह के नाम पर जैसे अजित सिंह, देवीलाल के नाम पर ओमप्रकाश चौटाला, मुलायम सिंह यादव के नाम पर अखिलेश यादव और लालू प्रसाद यादव के नाम पर तेजस्वी यादव की चमकी.

गणतंत्र दिवस समापन समारोह में ‘संविधान’ बैंड फॉर्मेशन, राष्ट्रपति के सामने पेश की जाएंगी स्वदेशी धुन

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26 जनवरी गणतंत्र दिवस का समारोह बड़े ही धूमधाम में मनाया गया. अब उसके समापन समारोह की तैयारी भी बेहद खास होने वाली है. 29 जनवरी को विजय चौक पर आयोजित होने वाले बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में अलग अलग बैंड स्वदेशी धुन बजाएंगे. इस समारोह में सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अन्य केंद्रीय मंत्री, सीडीएस, तीनों सेना के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी और आम लोग मौजूद रहेंगे. इस मौके पर भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और CAPF के बैंड 30 भारतीय धुनों को प्रस्तुत करेंगे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन ने अपने प्रेजिडेंट गार्ड के साथ रायसीना हिल्स से विजय चौक आएंगी. उनके आते ही ध्वजारोहण होगा और राष्ट्रगान के साथ ही शुरू हो जाएगा समापन समारोह. भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह पहली बार 1950 के दशक में महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस फिलिप की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित किया गया था. तब से यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सालाना कार्यक्रम बन गया है.

बैंड का संविधान फॉर्मेशन
हर साल के बीटिंग रिट्रीट समारोह में थीम भी अलग होती है और धुन भी अलग. इस साल संविधान के 75 साल पूरे होने को मौके पर परेड में भी उसकी झलक दिखी तो समापन समारोह में यह नजर आएगा. सुप्रीम कमांडर के सामने बैंड प्रस्तुती के वक्त सेना के बैंड संविधान का फॉर्मेंशन बनाएंगे. इस फॉर्मेंशन में संविधान की कॉपी की तरह खुद को पोजिशन करेंगे. नौसेना का बैंड इस बार ‘आत्मनिर्भर’ भारत धुन में पेश करेगा. समारोह की शुरुआत भारतीय बैंड ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से करेगी. इसके बाद अमर भारती, इंद्रधनुष, जय जन्मभूमि, हिमाचल प्रदेश के लोकनृत्य ‘नाटी इन हिमालयन वैली’, गंगा जमुना और वीर सियाचिन जिसे पाइप्स एंड ड्रम्म्स बैंड द्वारा बजाया जाएगा.

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की धुन से होगा समापन
इस साल भी बीटिंग रीट्रीट में सारी धुनें स्वदेशी हैं. CAPF बैंड कुल पांच धुनें बजाएगा. इसमें विजय भारत, राजस्थान ट्रूप्स, ऐ वतन तेरे लिए और भारत के जवान जैसे गीतों की धुन बजाएगी. भारतीय वायु सेना बैंड गैलेक्सी राइडर, स्ट्राइड, रूबरू और मिलेनियम फ्लाइट फैंटेसी की धुन पेश करेगा, भारतीय नौसेना का बैंड राष्ट्रिय प्रथम, निशक निष्पद, आत्मनिर्भर भारत, स्प्रेड द लाइट ऑफ फ्रीडम, रिदम ऑफ द रीफ और जय भारती जैसी धुनों से समारोह में रंग भरेगा. इसके बाद भारतीय थलसेना का बैंड वीर सपूत, ताकत वतन, मेरा युवा भारत, ध्रुव और फौलाद का जिगर की धुन बजाएंगे. पहले ज्यादातर धुने विदेशी होती थी, फिर मिक्स हुई और अब सब स्वदेशी है. समारोह का समापन ‘ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी’ और ‘सारे जहां से अच्छा’ कि धुन से होगी.

महाकुंभ से लौटते ही गौतम अडानी को मिली खुशखबरी…हाथ से फिसलते-फिसलते रह गया हजारों करोड़ का प्रोजेक्‍ट

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ऐसा लगता है कि अडानी समूह के साल 2025 कुछ ज्‍यादा ही खास होने वाला है. साल की शुरुआत में ही उनके दुश्‍मन और अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग पर ताला लगने की खबर आई और अब पड़ोसी देश में उनके एक बड़े प्रोजेक्‍ट पर मंडरा रहे संकट के बादल भी छंटते नजर आ रहे हैं. कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि अडानी पड़ोसी देश श्रीलंका में बनने वाला यह प्रोजेक्‍ट अडानी समूह के हाथ से निकल जाएगा, लेकिन वहां की सरकार ने एक बार फिर इस पर दोबारा बातचीत करने में रुचि दिखाई.

श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता नलिंदा जयतिसा ने मंगलवार को बताया कि उनकी सरकार 484 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा परियोजना से पैदा होने वाली बिजली की लागत कम करने को लेकर अडानी ग्रीन एनर्जी के साथ बिजली खरीद समझौते पर फिर से बातचीत करेगी. सरकार इस परियोजना की लागत को 0.06 अमेरिकी डॉलर प्रति यूनिट से कम करने के बारे में अडानी समूह की कंपनी के साथ नए सिरे से बातचीत करेगी. उन्‍होंने कहा कि हम चाहते हैं कि यह छह अमेरिकी सेंट से कम हो.

20 साल के लिए हो रहा था समझौता
श्रीलंका की पिछली सरकार ने 484 मेगावाट क्षमता के पवन संयंत्रों के लिए 8.2 सेंट के भाव पर अडानी ग्रीन एनर्जी के साथ 20 साल का बिजली खरीद समझौता (पीपीए) करने का फैसला किया था. हालांकि, इस निर्णय पर विवाद हो गया था क्योंकि स्थानीय बोलीदाताओं ने उससे कम यूनिट कीमतों की बोली लगाई थी. इससे दबाव में आकर जयतिसा की पार्टी नेशनल पीपल्स पावर (एनपीपी) ने पहले अडानी ग्रीन एनर्जी परियोजना को रद्द करने का वादा किया था.
प्रोजेक्‍ट के खिलाफ थी नई सरकार
पिछली सरकार द्वारा सहमत खरीद मूल्यों पर नई सरकार ने दिसंबर में हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. वैसे श्रीलंका सरकार ने उन खबरों का खंडन किया कि मन्नार और पूनरिन परियोजनाओं के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में स्थित अडानी ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को रद्द किया जाना है. लेकिन, सरकार ने यह जरूर कहा कि उसके द्वारा नियुक्त एक समिति पूरी परियोजना की समीक्षा करेगी. अडानी ग्रीन एनर्जी ने भी पहले इस बात से इनकार किया था कि श्रीलंका सरकार ने परियोजना रद्द कर दी है.

समूह करेगा 8,600 करोड़ का निवेश
अडानी समूह की कंपनी ने पिछले हफ्ते अपने एक बयान में कहा कि मई, 2024 में स्वीकृत शुल्क दरों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए दो जनवरी, 2025 का श्रीलंकाई मंत्रिमंडल का निर्णय एक मानक समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है. खासकर एक नई सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि समझौते की शर्तें उनकी वर्तमान प्राथमिकताओं और ऊर्जा नीतियों से मेल खाती है. इसके साथ ही अडानी ग्रीन एनर्जी ने कहा था कि वह श्रीलंका के हरित ऊर्जा क्षेत्र में एक अरब डॉलर का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा एवं आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.

महाकुंभ में उमड़ा जन सैलाब, मौनी अमावस्या पर 10 करोड़ श्रद्धालु संगम पहुंचेंगे

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महाकुंभ-2025 में पिछले 17 दिनों में 15 करोड़ से अधिक लोग गंगा और संगम में स्नान कर चुके हैं. बुधवार को मौनी अमावस्या पर और 10 करोड़ लोगों के गंगा स्नान करने की संभावना है. उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कहा कि प्रशासन ने मौनी अमावस्या के लिए पूरी तैयारी कर ली है. इस बीच, प्रयागराज जिला प्रशासन ने पूरे कुंभ क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस बलों की तैनाती की है. जिला मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार मांदड़ ने कहा, दुनियाभर से आ रहे श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रयागराज के लोगों से दोपहिया वाहनों का उपयोग करने या हो सके तो पैदल चलने का अनुरोध है. भारी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूल 28, 29 और 30 जनवरी को बंद रहेंगे. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी मौनी अमावस्या के अवसर पर अवकाश घोषित कर दिया है.

महाकुंभ में उमड़ा जन सैलाब, मौनी अमावस्या पर 10 करोड़ श्रद्धालु संगम पहुंचेंगे
मेला क्षेत्र को अगले कुछ दिनों के लिए पहले ही नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है, प्रयागराज जिला प्रशासन ने भी स्थानीय लोगों से चार पहिया वाहनों के उपयोग से बचने तथा वरिष्ठ नागरिकों को संगम पर ले जाने के लिए केवल दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करने की अपील की है.

प्रदेश सरकार के मुताबिक, मकर संक्रांति (14 जनवरी) को 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं, संतों और कल्पवासियों ने अमृत स्नान में हिस्सा लिया. वहीं आगामी मौनी अमावस्या के लिए आठ से 10 करोड़ लोगों के स्नान करने की संभावना है.

राज्य सरकार ने कहा कि उसने मौनी अमावस्या के अवसर पर बुधवार को सुबह पौने सात बजे श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करने की योजना बनाई है. हर 12 साल में होने वाला महाकुंभ मेला 13 जनवरी को प्रारंभ हुआ और यह 26 फरवरी तक चलेगा. इस मेले में 40 से 50 करोड़ लोगों के आने की संभावना है.

बाजार के लिए सबसे खराब महीना बनने की ओर जनवरी? विदेशी निवेशकों ने लगा दी घरेलू बाजार की लंका

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जनवरी 2025 भारतीय शेयर बाजारों के लिए एक ऐतिहासिक रूप से खराब महीना साबित हो रहा है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अब तक लगभग $7.8 अरब (₹63,000 करोड़) की शुद्ध बिकवाली की है, जो जनवरी के किसी भी महीने में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यह आंकड़ा जनवरी समाप्त होने से पहले $8 अरब के करीब पहुंचने की संभावना है, जिससे यह महीना भारतीय बाजारों के लिए सबसे खराब शुरुआत वाला साल बन गया है. FIIs की यह भारी बिकवाली भारतीय बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा रही है और निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है.

इससे पहले, सबसे अधिक मासिक बिकवाली अक्टूबर 2024 में दर्ज की गई थी, जब FIIs ने $11.2 अरब का निवेश निकाला था. मार्च 2020, जो कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर का महीना था, में भी $8.4 अरब की बिकवाली देखी गई थी. इस साल जनवरी में अब तक, FIIs ने भारतीय शेयर बाजारों के विभिन्न क्षेत्रों से अपना निवेश निकाला है, जिससे व्यापक प्रभाव पड़ा है.
किस सेक्टर को कितना नुकसान हुआ?
जनवरी के पहले दो हफ्तों में FIIs ने सबसे ज्यादा बिकवाली वित्तीय सेक्टर में की, जहां $1.41 अरब का निवेश निकाला गया. इसके अलावा, कंज्यूमर सर्विसेस सेक्टर में $405 मिलियन, पावर सेक्टर में $360 मिलियन, और कैपिटल गुड्स में $303 मिलियन की बिकवाली दर्ज की गई. मेटल्स, आईटी, ऑटोमोबाइल्स और कंस्ट्रक्शन जैसे अन्य सेक्टरों में भी $200 मिलियन से अधिक की बिकवाली हुई. इन सभी सेक्टरों में भारी बिकवाली के चलते निवेशकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

सेंसेक्स और निफ्टी पर प्रभाव
FIIs की इस बड़ी बिकवाली का असर भारतीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से देखा गया. जनवरी में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में 3.5% की गिरावट दर्ज की गई है. यह जनवरी 2017 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है और जनवरी 2021 में दर्ज 3.07% की गिरावट को भी पार कर गई है. व्यापक बाजारों पर इसका प्रभाव और भी गंभीर रहा है, जहां बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 9% से अधिक की गिरावट देखी गई है.

बिकवाली के प्रमुख कारण
इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक हैं. वैश्विक स्तर पर, आर्थिक सुस्ती, ऊंची ब्याज दरें, और मुद्रास्फीति ने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक प्रभाव डाला है. अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने भी FIIs को भारतीय बाजारों से अपना निवेश निकालने के लिए प्रेरित किया है. इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद टैरिफ वॉर की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की है.

विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजारों में ऊंचे वैल्यूएशन ने भी बिकवाली के दबाव को बढ़ावा दिया है. हालांकि, भारतीय बाजार के वैल्यूएशन अब नीचे आ रहे हैं, और विश्लेषकों को उम्मीद है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स के स्थिर होने से भारतीय बाजारों को स्थिरता मिल सकती है. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर वैश्विक संकेतक स्थिर होते हैं, तो भारतीय इक्विटी बाजारों को राहत मिल सकती है.

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें किया नमन

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की 28 जनवरी को जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लाला लाजपत राय जी का जीवन देश के लिए समर्पण, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री श्री साय ने लाला लाजपत राय जी के स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि लाला जी ने स्वाधीनता के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। लाला जी ने कहा था ‘मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी’। श्री साय ने कहा कि लाला जी की कही बात सच साबित हुई और उनकी शहादत ने आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लाला लाजपत राय का देश के लिए बलिदान हमें देश की उन्नति के लिए काम करने की सदैव प्रेरणा देते रहेगा।

जम्मू कश्मीर में अमन एवं शांति के लिए कार्य करें युवा – राज्यपाल श्री रमेन डेका

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जम्मू कश्मीर में उद्योग एवं व्यवसाय के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। युवा विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए आगे आएं लेकिन यह तभी सफल होगा जब यहां शांति होगी। कश्मीर के युवा, अमन एवं शांति के लिए कार्य करें और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए अपना योगदान दें। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने नेहरू युवा केन्द्र संगठन के ‘युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम‘ के तहत छत्तीसगढ़ भ्रमण पर आए कश्मीर के युवाओं से रूबरू होकर उक्त बातें कहीं।
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय अंतर्गत नेहरू युवा केन्द्र संगठन एवं गृह मंत्रालय भारत सरकार के ‘युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम‘ के तहत कश्मीर के 6 जिलों श्रीनगर, कुपवाड़ा, बारामुला, अनंतनाग, पुलवामा और बड़गांव के स्कूलों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत 132 युवा, 6 दिनों के छत्तीसगढ़ र्भ्रमण पर गत 26 जनवरी को राजधानी रायपुर पहुंचे है। इस दौरान वे छत्तीसगढ़ विधानसभा सहित धमतरी जिले में गंगरेल बांध, एडवेंचर पार्क, यूथ क्लब आदि स्थानों में भ्रमण करेंगे। इसी कड़ी में वे राजभवन आए और राज्यपाल श्री डेका से मुलाकात की।
राज्यपाल श्री डेका ने इन युवाओं को देश-प्रदेश, समाज एवं परिवार के प्रति जिम्मेदारी निर्वहन करते हुए कैरियर निर्माण तथा देश के बेहतर नागरिक बनने के लिए जरूरी मार्गदर्शन दिया। श्री डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ और कश्मीर दोनों प्राकृतिक रूप से सुंदर राज्य हैं। युवाओं को एक-दूसरे के राज्य के बारे में जानना चाहिए। जिससे वे अपने गौरवशाली राष्ट्र के बारे में ज्यादा जान पाएंगे। उन्होंने युवाओं को कैरियर एवं जीवन में आगे बढने के लिए जरूरी बाते बताई और कहा कि वर्तमान में जो हम करेंगे वह हमारा भविष्य बनाएगा। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के सामने कैरियर निर्माण के बहुत सारे विकल्प हैं। धैर्य के साथ कड़ी मेहनत करें और अपने जुनून को अपना व्यवसाय बनाएं। श्री डेका ने कश्मीर के विशेष ड्राय फ्रूट, गलीचा, कालीन निर्माण, टूरिस्ट गाइड, होम स्टे जैसे व्यवसायों में स्टार्टअप के लिए युवाआंें को मार्गदर्शन दिया।
श्रीनगर जिले की युवा छात्रा कुमारी जीनत राही, कुपवाड़ा की कुमारी रिफत युसुफ, पुलवामा जिले के राजा युनुस आदि ने छत्तीसगढ़ भ्रमण के दौरान हो रहे अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन अद्भूत है। सभी ने यहां किए गए मेहमानवाजी की सराहना की और कहा कि कश्मीर के दूसरे युवाओं को भी छत्तीसगढ़ आने का मौका मिलना चाहिए। युवाओं ने राज्यपाल श्री डेका सेे अपने कैरियर और राज्य के विकास संबंधी विभिन्न प्रश्न भी पूछे। श्री डेका ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन नेहरू युवा के राज्य संचालक श्री अतुल निकम ने दिया। उप संचालक श्री आर. के तिवारी ने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, संयुक्त सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, नेहरू युवा केन्द्र के अधिकारी तथा कश्मीर से आए हुए युवा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

राज्यपाल श्री डेका से नव नियुक्त सचिव डॉ. प्रसन्ना ने की भेंट

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज यहां राजभवन में राज्यपाल के नव नियुक्त सचिव डॉ. श्री सी. आर प्रसन्ना ने भेंट की। राज्यपाल ने उन्हें नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।
नव नियुक्त सचिव डॉ. श्री सी. आर प्रसन्ना ने आज राजभवन में अपना कार्यभार ग्रहण किया। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2006 बैच के अधिकारी हैं। उनके पास सहकारिता विभाग का भी कार्यभार है।

बेमेतरा जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच का अभियान जारी

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छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार अमानक खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के विरूद्ध जांच पड़ताल का अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। बेमेतरा जिले में खाद्य पदार्थों और खाद्य तेलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री रणबीर शर्मा के मार्गदर्शन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने आज कई प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण किया और खाद्य तेलों व खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए संकलित किए। इस अभियान के तहत प्रतिष्ठित विक्रेताओं जैसे जय सुपर बाजार से लाल गुलाब कच्ची घानी सरसों तेल और नेहल सुपर बाजार से पतंजलि कच्ची घानी सरसों तेल के नमूने लिए गए। इन नमूनों को परीक्षण हेतु खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है।

गौरतलब है कि जिले में पूर्व में की गई जांच पड़ताल एवं परीक्षण में अमानक खाद्य पदार्थ विक्रय के मामले में 6 दुकानों एवं प्रतिष्ठानों पर 16 लाख 50 हजार रूपए का अर्थदण्ड लगाया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई पूर्व जांच में छह मामलों में खाद्य पदार्थ अमानक पाए गए थे। जिसमें श्री मुरारी फेमिली रेस्टोरेंट एंड स्वीट्स, नवागढ़ चौक, बेमेतरा द्वारा बिना लाइसेंस रेस्टोरेंट संचालन के लिए 4 लाख रुपये, मंडेला स्वीट्स, बेमेतरा द्वारा अमानक मिठाई बनाने के लिए 3 लाख रुपये, स्वाति एरकॉन प्रा. लि., कारेसरा द्वारा अमानक रेडवाइन के भंडारण के लिए 5 लाख रुपये, रामेश्वरी ट्रेडर्स, कण्डरका द्वारा मिथ्याछाप धनिया पाउडर बेचने के लिए 1 लाख रुपये, अपना ढाबा, पिकरी, बेमेतरा द्वारा अमानक ग्रेवी बनाने के लिए 3 लाख रुपये तथा अश्वनी किराना, पड़कीडीह द्वारा अमानक अरहर दाल विक्रय के लिए 50 हजार रुपये का अर्थदण्ड न्यायालय द्वारा अधिरोपित किया गया।

पाथरी ग्राम पंचायत का सचिव निलंबित

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बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत पाथरी के सचिव लखीराम देवांगन को कर्तव्य में लापरवाही और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत बस्तर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन ने छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा अनुशासन एवं अपील नियम 1999 के तहत यह कार्रवाई की है।

शिकायतों के आधार पर पाया गया कि श्री देवांगन अपने मुख्यालय पाथरी में निवास न कर दूरस्थ ग्राम पंचायत तोंगकोंगेरा में रहते हैं और पिछले छह महीनों से कार्यालय में उनकी उपस्थिति बेहद कम रही। इसके अलावा, मतदाता सूची पुनरीक्षण, आयुष्मान कार्ड शिविर, ग्राम सभा की बैठकों और योजनाओं से जुड़े कार्यों में घोर लापरवाही बरतने का मामला पकड़ में आया है। निलंबन अवधि में श्री देवांगन का मुख्यालय जनपद पंचायत बकावंड कार्यालय निर्धारित किया गया है।