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छत्तीसगढ़ के प्रथम डीजीपी श्री श्रीमोहन शुक्ला का निधन

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छत्तीसगढ़ के प्रथम पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री श्रीमोहन शुक्ला का आज दिनांक 28 जनवरी 2025 को प्रातः आकस्मिक निधन हो गया। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी श्री शुक्ला (आयु 85 वर्ष) ने भोपाल के वैशाली नगर स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। श्री शुक्ला का अंतिम संस्कार आज दोपहर 12 बजे भोपाल में हुआ। इस दौरान परिवारजनों, मित्रों और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

श्री श्रीमोहन शुक्ला, छत्तीसगढ़ के प्रथम पुलिस महानिदेशक रहे। उन्होंने एक नवंबर 2000 से 26 मई 2001 पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रहे। इसके बाद उन्होंने 26 मई 2001 से 2 अक्टूबर 2004 तक छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। श्री शुक्ला के निधन पर छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

लंबे समय से अनुपस्थित 27 चिकित्सा अधिकारियों व विशेषज्ञ चिकित्सकों पर बड़ी कार्यवाही करते हुए किया गया सेवा मुक्त

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा बड़ी कार्यवाही करते हुए लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित 27 चिकित्सा अधिकारियो व विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही 21 चिकित्सा अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए है।

विदित हो कि चिकित्सा अधिकारियों व विशेषज्ञ चिकित्सकों को अपने कर्तव्यस्थल से लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लगातार तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहते हुए शासन के मूलभूत नियम और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम का उल्लंघन किया गया था।
अनुपस्थित अधिकारियों व चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी करके अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया था। सुनवाई में उपस्थित चिकित्सा अधिकारियों/ विशेषज्ञ चिकित्सकों के पक्ष को सुना गया तथा उनके द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर गंभीरता से विचार करते हुए चिकित्सा अधिकारियो व विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा समाप्त कर दी गई हैं।

महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने आजीविका मूलक गतिविधियों में करें संलग्न-राज्यपाल डेका

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राज्यपाल रमेन डेका की अध्यक्षता में आज गरियाबंद कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों से चर्चा की। राज्यपाल डेका ने प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा करते हुए शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की। उन्होंने बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सुपोषण एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। कलेक्टर श्री दीपक अग्रवाल ने जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन एवं जिला प्रशासन द्वारा किये जा रहे विभिन्न कार्यों एवं आयोजनों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। राज्यपाल ने जिले में कौशल विकास अंतर्गत किये जा रहे कार्यो की जानकारी लेकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने आजीविका मूलक गतिविधियों में संलग्न करने की अपेक्षा की। उन्होंने पशुपालन, मछली पालन आदि गतिविधियो में महिलाओं को जोड़कर उनका कौशल उन्नयन के साथ आर्थिक विकास को भी बेहतर करने के सुझाव दिये। राज्यपाल श्री डेका ने स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं की जानकारी लेते हुए रेडक्रॉस की गतिविधियों को सक्रियता के साथ आयोजित करने के सुझाव दिये। साथ ही हेल्थ कैंप, ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के सुझाव दिये। उन्होंने जिले में अवैध नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए चलाये जा रहे अभियान की जानकारी लेकर मादक पदार्थो के रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखकर लगातार अभियान चलाने अधिकारियांे को प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने स्कूली बच्चों को एनसीसी से जोड़कर प्रोत्साहित करने को कहा। जिससे समय प्रबंधन एवं अनुशासन की सीख बच्चों में बेहतर होगी। बैठक उपरांत राज्यपाल श्री डेका को कलेक्टर ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा पैरा आर्ट से बनाए गए राज्यपाल की फेस फोटो कलाकृति भेंट किए। इस दौरान बैठक में राज्यपाल के संयुक्त सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, सहित जिला अधिकारीगण मौजूद रहे।
टीबी मरीजों को प्रदान किये सुपोषण किट –
राज्यपाल रमेन डेका ने जिले में टीबी के संबंध में चल रहे अभियान निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ 100 दिवसीय पहचान एवं उपचार के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने टीबी मरीजों को प्रोटीन युक्त सुपोषण किट प्रदान किये। साथ ही उनका स्वास्थ्य हाल-चाल पूछकर उनके बेहतर एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की। राज्यपाल श्री डेका ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा कि टीबी मुक्त जिले की दिशा में आगे बढऩे की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से टीबी मुक्त जिले की दिशा में आगे बढ़ते हुए टीबी मरीजों की सहायता के लिए अधिक से अधिक लोगों को निक्षय मित्र बनने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल रमेन डेका ने गरियाबंद लाईवलीहुड कॉलेज का किया निरीक्षण

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राज्यपाल रमेन डेका ने प्रवास के दौरान गरियाबंद लाईवलीहुड कॉलेज का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं के कौशल उन्न्यन के लिए चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी ली। साथ ही कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों से आवश्यक चर्चा की। राज्यपाल डेका ने प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण के फायदे एवं उपयोग की जानकारी ली। युवाओं से चर्चा कर राज्यपाल श्री डेका ने विभिन्न कौशल उन्नयन कार्यक्रमों का लाभ लेकर स्वयं का बेहतर कौशल विकास करने को प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री साय ने लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें किया नमन

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मुख्यमंत्री साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की 28 जनवरी को जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लाला लाजपत राय जी का जीवन देश के लिए समर्पण, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री श्री साय ने लाला लाजपत राय जी के स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि लाला जी ने स्वाधीनता के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। लाला जी ने कहा था ‘मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी’। साय ने कहा कि लाला जी की कही बात सच साबित हुई और उनकी शहादत ने आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लाला लाजपत राय का देश के लिए बलिदान हमें देश की उन्नति के लिए काम करने की सदैव प्रेरणा देते रहेगा।

छत्तीसगढ़ में 17.46 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बोनी

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छत्तीसगढ़ में 17.46 लाख हेक्टयर क्षेत्रों में चना, गेहू, मटर, अलसी, सरसों, मक्का, रागी सहित विभिन्न रबी फसलों की बोनी हो चुकी है, जो कुल बोनी का 91 प्रतिशत है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन की तरह रबि सीजन के लिए भी अल्पकालीन कृषि ऋण का भी प्रावधान किया गया है। अब तक किसानों को रबी फसल के लिए किसानों को 445 करोड़ रूपए की ऋण राशि प्रदाय किया जा चुका है। रबी फसल के लिए इस वर्ष 2.89 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 1.73 लाख क्विंटल बीज का भण्डारण कर 1.54 लाख क्विंटल बीज वितरित किया गया है, जो भण्डारण का 90 प्रतिशत है।
इसी प्रकार रबी फसल के लिए राज्य में 4.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण करने का लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 6.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण कर 2.77 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया है, जो कुल भण्डारण का 44 प्रतिशत है।

42 अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में नगरपालिका एवं त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2025 के तहत 25 जनवरी को आयोजित मतदान दल प्रशिक्षण में अनुपस्थित 42 अधिकारियों-कर्मचारियों को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संबंधितों को 24 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है। कलेक्टर ने नोटिस का निर्धारित समयावधि में संतोषप्रद जवाब न मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में नगरपालिका एवं त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2025 के तहत 25 जनवरी मतदान दल प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। सेमरा, पेण्ड्रा और मरवाही स्थित प्रशिक्षण केंद्रों में कुल 42 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाये गए, जिन्हें कारण बताओं नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है, जिनमें सहायक ग्रेड, उप अभियंता, प्रधान पाठक और श्रम निरीक्षक समेत विभिन्न पदों के कर्मचारी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ का गणतंत्र दिवस संदेश -सरगुजा, 26 जनवरी 2025

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आज हम देश के गणतंत्र का उत्सव मना रहे हैं। इसके पीछे उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का बलिदान है, जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, उन संविधान निर्माताओं का योगदान है, जिन्होंने इस संविधान के माध्यम से भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। उन विभूतियों का योगदान है, जो संविधान की रक्षा के लिए हमेशा डटे रहे तथा संविधान के मूल्यों पर चलकर अंत्योदय का कल्याण करते रहे। नक्सलवाद से लड़ते हुए देश की एकता और अखण्डता के लिए अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, ताकि हम सुरक्षित रह सकें और समाज में शांति स्थापित हो सके। इन जवानों की शहादत को मैं शत्-शत् नमन करता हूं।
भारत की आजादी की यात्रा के साथ ही दुनिया के अनेक देशों ने भी अपनी स्वतंत्रता की यात्रा प्रारंभ की, लेकिन इनमें से कई देशों में शासन व्यवस्था पटरी से उतर गई और वहां की जनता आज अराजकता का सामना करने मजबूर है। गणतांत्रिक परंपराओं की अपनी ऐतिहासिक जड़ों और अपने श्रेष्ठ संविधान के बूते लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत अविचल खड़ा ही नहीं है अपितु निरंतर तरक्की के नये शिखरों को छू रहा है।
भारत का संविधान एक पवित्र दस्तावेज है। यह वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से प्रेरित है। इसे एक ऐसे राष्ट्र के नागरिकों ने तैयार किया, जिनकी भावनाओं के मूल में विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण की सोच है। हमारी आजादी की लड़ाई की सोच हमारे संविधान में पूरी तरह से झलकती है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में जब हमारे छत्तीसगढ़ से संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य संविधान तैयार कर रहे थे, तब निश्चय ही उनके सामने बाबा गुरु घासीदास जी के समतामूलक संदेश, शहीद वीरनारायण सिंह जी के संघर्ष की गाथा और पंडित सुंदरलाल शर्मा जी का छूआछूत विरोधी संघर्ष जैसे आदर्श रहे होंगे। इन सभी के विचारों को बाबा साहेब ने अंतिम ड्राफ्ट के रूप में बहुत सुंदरता से पिरोया था।
इस गणतंत्र की धरोहर को सुरक्षित रखने और सहेजने-संवारने की जिम्मेदारी हमारी और भावी पीढ़ी के हाथों में है। हमारा गणतंत्र हमें सत्यमेव जयते की सीख देता है। मुंडकोपनिषद का यह सूत्र वाक्य हमें बताता है कि अंधेरा कितना भी घना क्यों न हो, हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अंततः विजय सत्य की ही होती है। हमारे गणतंत्र की इस भावना की विजय हमने गंभीर नक्सलग्रस्त इलाकों में देखी है।
इन इलाकों में माओवाद ने अपनी हिंसक विचारधारा से न केवल आम आदमी के जीवन को नरक बना दिया था अपितु भारत के गणतंत्र को चुनौती देने के लिए गनतंत्र खड़े करने की योजना बनाकर काम कर रहे थे। हमारे सुरक्षा बलों का इनसे लगातार संघर्ष चल रहा है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नई रणनीति बनाकर हमने माओवाद के कैंसर को नष्ट करने का काम किया है । इस कैंसर को नष्ट करने के लिए जरूरी था कि इसकी जड़ों पर प्रहार किया जाए। हमारे जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित पनाहगाहों में हमला किया। इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे। एक साल के भीतर ही हमने माओवादी कैडर के 260 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। अंधेरी सुरंग खुल गई, जो रौशनी फूटी है उससे बस्तर में विकास का उजाला फैला है।
जब केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी पिछले महीने छत्तीसगढ़ आये तो बस्तर की इसी धरती में ग्राम गुंडम की एक बुजुर्ग माँ उनके पास आई, माता जी ने उन्हें वनोपजों की टोकरी भेंट की और कहा कि माओवाद को पूरी तरह से नष्ट कर दीजिए। जब सरकार का इरादा, जवानों का हौसला और जनता का संकल्प मिल जाता है, तो कोई भी हिंसक विचारधारा नहीं टिक सकती। बस्तर में माओवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है। शीघ्र ही बस्तर पूरी तरह से नक्सल आतंक से मुक्त हो जाएगा।
आतंक से मुक्ति के साथ ही बस्तर में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास की राह भी खुल गई है। इसका माध्यम हमारी सरकार द्वारा चलाई जा रही नियद नेल्ला नार योजना बनी है। अरसे बाद स्कूलों में घंटियां गूंजी, पानी-बिजली का पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित हुआ। आधार कार्ड बने और आयुष्मान कार्ड भी बन गये। बस्तर अब उमंग से भरा हुआ है। हमने यहां बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया। पूरे बस्तर से 1 लाख 65 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें नक्सल हिंसा से प्रभावित परिजन भी थे। आत्मसमर्पित नक्सली भी थे और नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके दिव्यांगजन भी थे। खेलों के इस महाकुंभ में खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था, हम सबके लिए यह बहुत भावुक क्षण था, बस्तर ओलंपिक नये बस्तर की पहचान बन गया।
किसान परिवार से आने वाले लोगों ने खेती का वो वक्त भी देखा है जब कड़ी मेहनत से धान उपजाने के बाद मंडियों में किसान भाई धान लेकर जाते थे, तो औने-पौने में धान बेचकर आना पड़ता था। बहुत मुश्किल से परिवार चलता था। खरीफ के बाद उनके पास दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता था। श्रद्धेय अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया, तो धान खरीदी की व्यवस्था भी आरंभ हुई। धान के कटोरे में कोई भी भूखा न सोये, इसके लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना भी आरंभ हुई। यह काम इतने व्यवस्थित तरीके से हुआ कि छत्तीसगढ़ देश में खाद्य सुरक्षा का माडल राज्य बन गया।

गणतंत्र दिवस : मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया

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गणतंत्र दिवस पर आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय परिसर में मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. सुभाष राज ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। डॉ. राज ने इस अवसर पर उपस्थित सुरक्षा अधिकारियों, स्वास्थ्य अधिकारियों निवास कार्यालय के निजी स्टाफ के अधिकारियों-कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में हम बढ़ रहे आगे : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आम जनता के नाम संदेश का वाचन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्रीसाय ने गणतंत्र दिवस समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हम सबके लिए अत्यंत गौरवशाली है। आज हम देश के गणतंत्र का उत्सव मना रहे हैं। इसके पीछे उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का बलिदान है, जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, उन संविधान निर्माताओं का योगदान है, जिन्होंने इस संविधान के माध्यम से भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। उन विभूतियों का योगदान है, जो संविधान की रक्षा के लिए हमेशा डटे रहे तथा संविधान के मूल्यों पर चलकर अंत्योदय का कल्याण करते रहे। नक्सलवाद से लड़ते हुए देश की एकता और अखण्डता के लिए अनेक जवानों ने अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया, ताकि हम सुरक्षित रह सकें और समाज में शांति स्थापित हो सके। इन जवानों की शहादत को मैं शत्-शत् नमन करता हूं।

भारत की आजादी की यात्रा के साथ ही दुनिया के अनेक देशों ने भी अपनी स्वतंत्रता की यात्रा प्रारंभ की, लेकिन इनमें से कई देशों में शासन व्यवस्था पटरी से उतर गई और वहां की जनता आज अराजकता का सामना करने मजबूर है। गणतांत्रिक परंपराओं की अपनी ऐतिहासिक जड़ों और अपने श्रेष्ठ संविधान के बूते लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत अविचल खड़ा ही नहीं है अपितु निरंतर तरक्की के नये शिखरों को छू रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान एक पवित्र दस्तावेज है। यह वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से प्रेरित है। इसे एक ऐसे राष्ट्र के नागरिकों ने तैयार किया, जिनकी भावनाओं के मूल में विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण की सोच है। हमारी आजादी की लड़ाई की सोच हमारे संविधान में पूरी तरह से झलकती है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में जब हमारे छत्तीसगढ़ से संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य संविधान तैयार कर रहे थे, तब निश्चय ही उनके सामने बाबा गुरु घासीदास जी के समतामूलक संदेश, शहीद वीरनारायण सिंह जी के संघर्ष की गाथा और पंडित सुंदरलाल शर्मा जी का छूआछूत विरोधी संघर्ष जैसे आदर्श रहे होंगे। इन सभी के विचारों को बाबा साहेब ने अंतिम ड्राफ्ट के रूप में बहुत सुंदरता से पिरोया था।

इस गणतंत्र की धरोहर को सुरक्षित रखने और सहेजने-संवारने की जिम्मेदारी हमारी और भावी पीढ़ी के हाथों में है। हमारा गणतंत्र हमें सत्यमेव जयते की सीख देता है। मुंडकोपनिषद का यह सूत्र वाक्य हमें बताता है कि अंधेरा कितना भी घना क्यों न हो, हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अंततः विजय सत्य की ही होती है। हमारे गणतंत्र की इस भावना की विजय हमने गंभीर नक्सलग्रस्त इलाकों में देखी है।

इन इलाकों में माओवाद ने अपनी हिंसक विचारधारा से न केवल आम आदमी के जीवन को नरक बना दिया था अपितु भारत के गणतंत्र को चुनौती देने के लिए गनतंत्र खड़े करने की योजना बनाकर काम कर रहे थे। हमारे सुरक्षा बलों का इनसे लगातार संघर्ष चल रहा है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नई रणनीति बनाकर हमने माओवाद के कैंसर को नष्ट करने का काम किया है। इस कैंसर को नष्ट करने के लिए जरूरी था कि इसकी जड़ों पर प्रहार किया जाए। हमारे जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित पनाहगाहों में हमला किया। इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे। एक साल के भीतर ही हमने माओवादी कैडर के 260 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। अंधेरी सुरंग खुल गई, जो रोशनी फूटी है उससे बस्तर में विकास का उजाला फैला है।

जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी पिछले महीने छत्तीसगढ़ आये तो बस्तर की इसी धरती में ग्राम गुंडम की एक बुजुर्ग माँ उनके पास आई, माता जी ने उन्हें वनोपजों की टोकरी भेंट की और कहा कि माओवाद को पूरी तरह से नष्ट कर दीजिए। जब सरकार का इरादा, जवानों का हौसला और जनता का संकल्प मिल जाता है, तो कोई भी हिंसक विचारधारा नहीं टिक सकती। बस्तर में माओवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है। शीघ्र ही बस्तर पूरी तरह से नक्सल आतंक से मुक्त हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंक से मुक्ति के साथ ही बस्तर में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास की राह भी खुल गई है। इसका माध्यम हमारी सरकार द्वारा चलाई जा रही नियद नेल्ला नार योजना बनी है। अरसे बाद स्कूलों में घंटियां गूंजी, पानी-बिजली का पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित हुआ। आधार कार्ड बने और आयुष्मान कार्ड भी बन गये। बस्तर अब उमंग से भरा हुआ है। हमने यहां बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया। पूरे बस्तर से 1 लाख 65 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें नक्सल हिंसा से प्रभावित परिजन भी थे। आत्मसमर्पित नक्सली भी थे और नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके दिव्यांगजन भी थे। खेलों के इस महाकुंभ में खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था, हम सबके लिए यह बहुत भावुक क्षण था, बस्तर ओलंपिक नये बस्तर की पहचान बन गया।