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अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुशासन पहुंचाने हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

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गुणवत्तायुक्त विकास कार्य पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सबका साथ-सबका विकास-सबका प्रयास और सबका विश्वास मूलमंत्र के साथ हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि अपने क्षेत्र के विकास और निर्माण कार्यों की सतत निगरानी करें और विकसित छत्तीसगढ़ राज्य बनाने में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बालोद जिले के ग्राम जुगेरा में आयोजित 141 करोड़ रूपए के विकास कार्यों के लोर्कापण-शिलान्यास कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई संसाधन और सड़कों के रखरखाव पर फोकस करते हुए अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुशासन पहुंचाने प्रतिबद्ध है। भारतीय प्राचीन ग्रंथों में जिसे रामराज्य कहा गया है, वही तो सुशासन है। सुशासन का सूर्याेदय हो गया है, यह सब आप लोगों के स्नेह और अपार जनसमर्थन से यह संभव हो सका है। हमें विश्वास है कि आप सबका भरोसा अटूट रहेगा। सभी मिलजुलकर विकासशील छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ बनाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोई भी भारतीय खुले आसमान के नीचे नहीं सोएगा। हर नागरिक का पक्का मकान होगा। पक्का छत वाले मकान निर्माण की योजना प्रधानमंत्री आवास के तहत बालोद जिले में 31 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हुए हैं। इनमें आधे से अधिक आवास बन गए हैं। शेष का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने नए आवास में प्रवेशित हितग्राहियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री साय ने बालोद जिले के ग्राम जुगेरा में आयोजित कार्यक्रम में 141 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने इस अवसर पर बालोद में 400 सीटर ऑडिटोरियम के निर्माण और जुगेरा स्थित बंजारी माता मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा में विस्तार के लिए डोम सेट निर्माण की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही बालोद में नालंदा परिसर का निर्माण होगा, इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी हैं। उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट नर्सिंग अफसर के रूप में सेवा दे रही बालोद के ग्राम जमरूवा निवासी वीणा साहू की सराहना करते हुए उसके उज्जवल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बालोद जिले में बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता हितग्राही हैं, हमने उनके हित में तेंदूपत्ता खरीदी की दर में प्रति मानक बोरा 15 सौ रूपए की अतिरिक्त वृद्धि करते हुए 5500 रूपए प्रति मानक दर से खरीदी सुनिश्चित की। हमने डौंडीलोहारा विकासखंड के मटियामोती जलाशय के नहरों का लाइनिंग मरम्मत और पुर्ननिर्माण के लिए भूमिपूजन किया है। करीब 30 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इस नहर से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषक उन्नति योजना से बालोद जिले के करीब डेढ़ लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। उनके खाते में 2023-24 में बेचे गए खरीफ सीजन के धान की राशि 686 करोड़ रूपये अंतरित की गई है, इससे किसानों में समृद्धि आयी है। किसान खुशहाल हुए हैं। हमारा मानना है कि जब हमारे अन्नदाता खुशहाल होंगे तो सभी का जीवन सुखमय रहेगा। बालोद जिले में डेढ़ लाख से अधिक किसानों के खाते में 223 करोड़ रूपये बकाया बोनस की राशि भी हमने गत वर्ष दिया है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मोदी जी की गारंटी वाली साय की सरकार में विकास कार्यों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं होगी। कार्यक्रम को सांसद भोजराज नाग ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में नागरिकों को सशक्त करने डिजिटल गवर्नेंस मॉडल : मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ में नागरिक सुविधाओं को सुगम एवं सशक्त करने के लिए डिजिटल गवर्नेंस के मॉडल को अपनाया है। सभी विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुगमतापूर्वक योजनाओं की पहुंच आसानी से हो सके। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज धमतरी जिले में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन समारोह में उक्त बात कही। कार्यक्रम में उन्होंने 268 करोड़ रूपए के विकास कार्यो का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामित्व कार्ड के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवास करने वाले ग्रामीणों की बड़ी समस्या आज दूर हो रही है। इन लोगों को आबादी भूमि पर स्वामित्व के पक्के दस्तावेज मिल रहे है। दस्तावेज नहीं होने के कारण अक्सर विवाद की स्थिति में मामले न्यायालयों में सालों-साल लंबित रहते थे

25 जनवरी को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस‘ का होगा आयोजन

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भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के निर्देशानुसार प्रतिवर्ष 25 जनवरी को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस‘ सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाएगा। इस संबंध में आज छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर द्वारा परिपत्र जारी कर दी गई है।

जारी परिपत्र के अनुसार 25 जनवरी 2025 को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस‘ के अवसर पर सभी शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शिक्षण संस्थानों में शपथ लेने की कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही सभी शासकीय व सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय एवं शिक्षण संस्थानों में भारत निर्वाचन आयोग के लोगो, जो मतदान के महत्व की पुष्टि करता है का उपयोग आधिकारिक वेबसाइटों में भी किया जाएगा। जारी पत्र के अनुसार उक्त सभी गतिविधियों के फोटोग्राफ्स भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध करायी गई शासकीय सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड किए जाने का भी निर्देश दिया गया है।

पोड़ी उपरोड़ा छात्रावास अधीक्षिका निलंबित

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कलेक्टर कोरबा ने पोड़ी उपरोड़ा कन्या छात्रावास के अधीक्षिका जय कुमारी रात्रे को कार्य में लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कटघोरा निर्धारित किया गया है।

ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर का पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित

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लोक निर्माण विभाग ने बीजापुर के ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर का पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उसे दिए गए सभी कार्य निरस्त कर दिए हैं। बस्तर परिक्षेत्र जगदलपुर के विभागीय मुख्य अभियंता की अनुशंसा पर प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा सुरेश चंद्राकर का पंजीयन निलंबित किया गया है। मुख्य अभियंता द्वारा लोक निर्माण विभाग में पंजीकृत सुरेश चंद्राकर “अ” वर्ग ठेकेदार, बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के मुख्य आरोपी के रूप में समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाने तथा गिरफ्तार किए जाने के कारण उसके पंजीयन को निलंबित किए जाने की अनुशंसा की गई थी।

मुख्य अभियंता की अनुशंसा को दृष्टिगत रखते हुए विभाग ने सुरेश चंद्राकर का पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं सुरेश चंद्राकर को दिए गए सड़क निर्माण के कार्यों को लंबे समय तक बंद पाए जाने तथा कार्यों की धीमी गति के कारण उसे दिए गए सभी कार्यों को निरस्त कर दिया गया है।

खाद्य मंत्री ग्राम जांता में आयोजित बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में हुए शामिल

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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल आज बेमेतरा जिला अंतर्गत विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा ग्राम जांता में आयोजित बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर बच्चों को पुरस्कार वितरण कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राज्यपाल डेका से खेल मंत्री श्री वर्मा ने सौजन्य भेंट की

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राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में खेलकूद एवं युवा कल्याण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने सौजन्य भेंट की।

जिला पंचायत सदस्य हेतु 09 व जनपद पंचायत सदस्य के लिए 08 जनवरी को की जाएगी आरक्षण की कार्यवाही

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त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन के तहत पंचायतों के पदाधिकारियों जिला पंचायत के सदस्य एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष पदों के प्रवर्गवार एवं महिलाओं के प्रवर्गवार स्थानों के आबंटन एवं आरक्षण की कार्यवाही कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी निलेशकुमार क्षीरसागर द्वारा 09 जनवरी को जिला पंचायत के सभाकक्ष में की जाएगी। इसी प्रकार जनपद पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंच पदों के प्रवर्गवार तथा महिलाओं के प्रवर्गवार स्थानों के आबंटन और आरक्षण की कार्यवाही संबंधित जनपद पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में 08 जनवरी को की जाएगी। इस हेतु जनपद पंचायत कांकेर, चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, दुर्गूकोंदल और जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के प्रवर्गवार आरक्षण की कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को संबंधित अनुभाग अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायतों के लिए प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया है।

एशिया का प्रथम स्वचलित सायफन स्पिल-वे मुरूमसिल्ली बांध पर्यटन का केन्द्र

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मुरूमसिल्ली जलाशय महानदी संकुल (काम्पलेक्स) का यह सबसे पुराना महत्वपूर्ण जलाशय हैं। मुरूमसिल्ली जलाशय महानदी की सहायक नदी सिलियारी नदी पर धमतरी जिला मुख्यालय से 28 किमी. दक्षिण में मुरूमसिल्ली गांव के पास बनाया गया हैं। इस जलाशय में अतिरिक्त जल निकास हेतु अपने आप चलने वाला विशेष एवं अद्वितीय स्पिलवे साइफन सिस्टम का निर्माण किया गया, जो कि उस समय की गहन अध्ययन एवं रूपांकन की सूझ-बूझ दर्शाता हैं। इस तरह का स्वचालित सायफन स्पिल-वे का निर्माण एशिया का प्रथम निर्माण था। अतः आटोमेटिक स्पिल-वे सायफन का निर्माण एक विशिष्टता लिये हुये है। जिसको सिविल इंजीनियरिंग की पुस्तक ’’ऑटोमेटिक स्पिलवे सायफन ऑफ मुरूमसिल्ली डैम डिजाईन इन टेक्सट बुक इन सिविल इंजीनियरिंग (इरीगेशन इंजीनियरिंग सायफन वियर्स एंड लॉक्स राईटर बाय सर्ज लेलीयाव्स्की) में अध्ययन हेतु उल्लेखित किया गया है।

इस तरह का यह स्पिल-वे भारत वर्ष में अद्वितीय है। सायफन स्पिल-वे का रूपांकन भी उस समय की गहन अध्ययन व सूझ-बूझ दर्शाता है। बांध के बन जाने के साथ विभिन्न सायफन चलाने की व्यवस्था की गयी है। सायफन स्वतः ही चलने लगते है। मुख्य सायफन के साथ-साथ बेवी सायफन लगे हुये है, जैसे-जैसे जल स्तर बांध में बढ़ता है, वृहदस्तर बेवी सायफन चलना प्रारंभ होते है। जल स्तर बढ़ने पर बेवी सायफन प्राइमिंग कर देते है व मुख्य सायफन चलने लगते है।

शैलचित्रों की दुर्लभ श्रृंखला का गढ़

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हर सभ्यता वक्त की रेत पर अपने निशान छोड़ जाती है, ऐसे ही शैलचित्रों की अनोखी दुर्लभ श्रृंखला रायगढ़ की पहाडिय़ों में बिखरी हुई है, जो सदियां बीतने पर भी धूमिल नहीं हुई है और प्रागैतिहासिक काल से मानव विकास क्रम की कहानियां कह रही हैं। रायगढ़ जिले में हजारों वर्ष पुराने पाषाणकालीन समृद्ध शैलचित्रों का खजाना है, जो न केवल देश एवं प्रदेश में बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसी दुर्लभ पुरासंपदा हमारी प्राचीन सभ्यता के जीवंत अमूल्य अवशेष है। जिले में आदिम मानवों द्वारा सिंघनपुर, करमागढ़, कबरापहाड़, ओंगना, नवागढ़ पहाड़ी, बसनाझर, भैंसगढ़ी, खैरपुर, बेनिपाट, पंचभैया पहाड़, राबकोब गुफा, सारंगढ़ के सिरौलीडोंगरी जैसे अनेक स्थानों में शैलाश्रय में शैलचित्र उकेरे गए है, जिनमें पशु-पक्षी, आखेट के दृश्य, परम्परा, जीवनशैली, पर्व एवं त्यौहार का चित्रांकन दीवारों पर किया गया है। ऐसे रॉक पेंटिंग विश्व के अन्य देशों फ्रांस, स्पेन, आस्ट्रेलिया एवं मेक्सिको में भी पाये गए हैं। प्रागैतिहासिक काल में आदिम मानव इन सघन एवं दुर्गम पहाडिय़ों में गुफाओं एवं कंदराओं में निवास करते थे और यहां सभ्यता का विकास होता गया। आदिम कुशल चित्रकारों द्वारा बनाये इन शैलचित्रों में उनकी जीवनशैली एवं परिवेश की अनुगूंज सुनाई देती है, जिसकी भावनात्मक अभिव्यक्ति इन रेखाचित्रों के रूप में उभरकर सामने आती है। आदिमानव रंगों के प्रयोग से अनभिज्ञ नहीं थे। यह शैलचित्र हमारे पुरखों द्वारा दिया गया बहुमूल्य उपहार है।

जिले में प्रागैतिहासिक कालीन शैलचित्रों में प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति उत्कृष्ट रूप में अभिव्यक्त हुई है और यह पुरातत्वविदों के लिए अनुकरणीय है। रहस्य एवं रोमांच से भरपूर इन शैलचित्रों में अभी भी बहुत कुछ खोजना शेष है। इन कहानियों को क्रमिकता में समझने की जरूरत है, कि उस काल में जीवन किस तरह का था और रचनात्मकता किस तरह की थी। इनका सही वैज्ञानिक विश्लेषण करने पर मानव विकास के क्रम की कई तस्वीरें सामने आएगी।