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अपराधियों के मन में कानून का भय हो, पीड़ितों को त्वरित मिले न्याय: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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हमारी सरकार सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस: मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की

रायपुर 13 सितम्बर 2024/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि अपराधियों के मन मेें कानून का भय हो, पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले। आम जनता में पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास कायम रहे। बेवजह किसी नागरिक को परेशान न किया जाए। पुलिस का व्यवहार आम नागरिकों के साथ मित्रवत हो। पुलिस थानों का वातावरण ऐसा हो कि आम नागरिक को पुलिस थानों में प्रवेश करते समय सहयोग की उम्मीद हो। वे आज राजधानी के न्यू-सर्किट हाउस में कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में अपराध पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर एवं एसपी आपसी समन्वय स्थापित करते हुए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दंड संहिता को बदल कर न्याय संहिता कर दिया है। इसका जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए पुलिस को इन नए कानूनों के अनुरूप कार्य करने के लिए स्वयं को ढालना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है, और पिछले वर्षों की तुलना में अपराध की संख्या में कमी आई है।

राज्य में नए सिरे से सोशल पुलिसिंग को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत – मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नए सिरे से सोशल पुलिसिंग को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है, इससे अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी। लोगों को जागरूक करना और उन्हें इस बात का भरोसा दिलाना होगा कि पुलिस उनके साथ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में गौ-तस्करी व नशाखोरी एक बहुत बड़ी समस्या है, इस पर कड़ाई से नियंत्रण सुनिश्चित करते हुए ऐसे मामलों में एंड टू एंड कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के परिवहन एवं बिक्री, जुआ, सट्टा एवं गांजा की तस्करी को रोकने के लिए अभियान चलाकर दोषियों पर विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित करें। समाज में अशांति फैलाने वालों, अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखें और उनके खिलाफ त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। हत्या जैसे मामले में कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए तथा ऐसे केस में प्राथमिकता से त्वरित गति से कार्यवाही सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई रुकनी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधात्मक मामलों में देरी न हो और जिला बदर की कार्रवाई केवल कागजों पर ना हो बल्कि वास्तव में हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब बिक्री की बहुत शिकायत है, जिसमें पुलिस पर संरक्षण के आरोप लगते है, यह बिलकुल नहीं होना चाहिए। अवैध शराब बिक्री पूरी तरह बंद होना चाहिए। कई जगहों में अवैध शराब बिक्री की जांच को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है, इस संबंध में शिकायतें मिलती है कि जांच टीम सही से जांच नहीं कर रही, अधिकारी जांच में उपस्थित नहीं रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान सम्मान निधि में धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिन पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर पुलिस रेंज में अपराधों में कमी आई है, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं होते हुए पुलिस की सक्रियता का स्तर और बेहतर करने की जरूरत है। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि दुर्ग पुलिस रेंज को और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हत्या और डकैती के मामले 6 महीने में भी नहीं सुलझ पा रहे हैं, ये उचित नहीं है। कई मामलों में आरोपी फरार है, इस पर जल्दी कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजनांदगांव पुलिस रेंज में कुछ जगह अच्छे काम हुए हैं, त्रिनेत्र एप और चिटफंड मामलों में अच्छी कार्रवाई हुई है लेकिन सिर्फ इतना पर्याप्त नहीं है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आम लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और सीट-बेल्ट, हेलमेट पहनने की समझाइश दी जाए। उन्होंने बैठक में आने वाले दिनों में पुलिसिंग को और अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी व उत्तरदायी बनाने की दिशा में किए जा सकने वाले उपायों पर चर्चा की।

भूमाफियों पर रखें कड़ी नजर
मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर रेंज की समीक्षा करते हुए राजधानी में पुलिसिंग की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि रायपुर प्रदेश की राजधानी है और यहां की पुलिसिंग का सर्वाेत्तम स्तर पर होना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने रायपुर में भूमाफियाओं द्वारा शासकीय और आम नागरिकों की जमीन पर कब्जे की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर इस समस्या पर कड़ी नजर रखें और तुरंत कार्रवाई करें।

नशे के खिलाफ अभियान चलाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशीली दवाइयों की बिक्री पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को इस अवैध व्यापार के इकोसिस्टम को तोड़ना होगा और अपराध की जड़ तक पहुंचकर इसे समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि रायपुर में स्कूल और कॉलेजों में नशे के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है, ताकि युवाओं को इस घातक प्रवृत्ति से बचाया जा सके।

राजधानी में रात्रि गश्त करें
मुख्यमंत्री ने राजधानी में रात की गश्त को और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए पुलिस पेट्रोलिंग को लगातार जारी रखने और संगठित अपराधों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कहा कि वे योजना बनाकर अपराध और अपराधियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाएं ताकि अपराध पर काबू पाया जा सके और कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर हो सके।

कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा, राज्य के संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पुरानी शैली बदलें, पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता की समस्याओं का निराकरण करें – मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में दो दिवसीय कलेक्टर कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि बीते 9 महीने में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अनुरूप प्रदेश को संवारने की दिशा में प्रयास किया गया है, किन्तु विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए हम सबको और अधिक कठिन परिश्रम करना होगा। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि शासन की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित की जाए और इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी फ्लैगशिप योजनाओं में सैचुरेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कार्य करें। उन्होंने कुछ जिलों में आम जनता और स्कूली छात्रों से शासकीय अधिकारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और सहृदयता के साथ आम जनता की समस्याओं को सुने और उसका यथासंभव शीघ्र निराकरण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की भाषा-शैली मर्यादित होनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों को जनसामान्य से संयमित लहजे में बातचीत करने की हिदायत दी और कहा कि यदि आपके अधीनस्थ अधिकारी भाषा संयम न रखें, तो उन पर तत्काल सख्त कार्यवाही करें।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि स्थानीय स्तर की समस्याएं वहीं निपटे, छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोगों को राजधानी न आना पड़े। इस बात का ध्यान जिला प्रशासन को रखना चाहिए। जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान में लाई गई जन समस्याओं के त्वरित निदान के लिए प्रभावी कदम उठाएं जाएं।
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान साफ तौर पर कहा कि इस विभाग का आम लोगों और किसानों से ज्यादा वास्ता है। राजस्व के प्रकरणों का निराकरण बिना किसी लेट-लतीफी के किए जाने से शासन-प्रशासन की छबि बेहतर होती है। उन्होंने अधिकारियों को जनसामान्य की भूमि संबंधी छोटी-छोटी त्रुटियों एवं समस्याओं का निदान पूरी संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा में करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़, बस्तर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में राजस्व मामलों के निराकरण की धीमी गति पर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने जिलेवार कलेक्टरों से अविवादित और विवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, त्रुटि सुधार, डायवर्सन, असर्वेक्षित ग्रामों की जानकारी, नक्शा बटांकन की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में ऐसे जिले जिनकी प्रगति 70 प्रतिशत से कम है, उन्हें इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। विवादित बटवारा के प्रकरण 6 माह से ज्यादा लंबित न हो। सीमांकन के प्रकरणों को भी तेजी से निराकृत किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी कमिश्नरों को अधीनस्थ जिलों का नियमित दौरा कर राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को प्रधानमंत्री जी ने अभी पीएम आवास के अंतर्गत 8 लाख 46 हजार 931 आवासों को स्वीकृति दी है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पीएम आवास का काम काफी पिछड़ गया था। हमें तेजी से इस पर काम करना है। यह सर्वाेच्च प्राथमिकता का कार्य है। इसके साथ ही हमने चिन्हांकित किये गये लगभग 47 हजार आवासहीन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने का निर्णय भी लिया है। इस पर भी जुट कर काम करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वच्छता सर्वे अभी चल रहा है। छत्तीसगढ़ के गांव और ग्राम पंचायतें स्वच्छता सर्वे को सभी मानदंडों को पूरा करती हों, इस पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत हैं। मनरेगा रोजगार सृजन का सबसे अच्छा माध्यम है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी अधोसंरचनाएं तैयार करें। मनरेगा में भुगतान संबंधी दिक्कतों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन कम होने पर बस्तर कलेक्टर पर नाराजगी जतायी। उन्होंने कलेक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वसहायता समूहों को बढ़ावा देने के साथ ही ट्रेनिंग, बैंक लिंकेज आदि की व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने पंचायतों का व्यापक निरीक्षण करने, वहां की समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए। अमृत सरोवर योजना को जन अभियान का स्वरूप देने, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों का तेजी से निर्माण कराए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजना है। 15 सितम्बर को प्रधानमंत्री जी द्वारा पहली किश्त जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल विकास योजना के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की और खैरागढ़, सारंगढ़, सक्ती, रायगढ़ जिलों की शून्य प्रगति पर नाराजगी जताई और कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है।
मुख्यमंत्री साय ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के सूपेबेड़ा में किडनी की बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय करने और आवश्यकतानुसार दिल्ली से विशेषज्ञ बुलाकर सेवाएं लेने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए सरस्वती सायकल योजना के वितरण में कुछ जिलों में हुई लेट-लतीफी को लेकर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने कलेक्टरों को स्पष्ट तौर पर कहा कि सायकल का वितरण शिक्षा सत्र शुरू होते ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सुकमा एवं बलरामपुर जिले में साइकिल वितरण अब तक न होने पर की स्थिति को देखते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा के दौरान हितग्राहियों को प्रधानमंत्री जन मन योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कबीरधाम जिले में वन अधिकार पट्टा के कार्य में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और जिन जिलों में डिजिटलाइजेशन का कार्य 80 प्रतिशत से कम है, वहां तेजी से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आश्रम एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा और कलेक्टरों को स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही, छात्रावासों में भोजन मेन्यू के अनुसार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा करते हुए महतारी वंदन योजना को सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना में कोई पात्र महिला वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ से कुपोषण को जड़ से समाप्त करना हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए और इसके लिए विभाग को विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी., मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और श्री पी. दयानंद तथा सभी संबंधित विभागों के सचिव सहित सभी संभागों के आयुक्त, सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ और नगर निगमों के आयुक्त भी मौजूद थे।

15 सितंबर को छात्रावास अधीक्षक श्रेणी ’’द’’ भर्ती परीक्षा का होगा आयोजन

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छत्तीसगढ़ व्यावसयिक परीक्षा मण्डल रायपुर द्वारा छात्रावास अधीक्षक श्रेणी ’’द’’ भर्ती परीक्षा (टीएचएस24) का आयोजन 15 सितंबर (रविवार) को एक पाली में किया जाएगा। अपरान्ह 12:00 से 2:15 बजे तक परीक्षा होेगी। जिसके लिए जिले में कुल 19 परीक्षा केंद्र बनाया गया है। जिसमें कुल 5506 परीक्षार्थी बैठेंगे। परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों के सुविधा हेतु कार्यालय कलेक्टर सूरजपुर में कन्ट्रोल रूम ए-11 में दो कर्मचारियों श्री ब्रिजेश कुमार साहू, सहायक ग्रेड-2 एवं श्री मिथलेश सिंह, सहायक ग्रेड-3, की ड्यूटी लगाई गई है। कन्ट्रोल रूम संपर्क मो. +91-9165431753, +91-7723977240 है।

स्कूली बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में एसडीएम ने ली बैठक

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अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मरवाही ने स्कूली बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के संबंध तहसीलदार और सभी संकुल शैक्षिक समन्वयकों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में पात्र छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही समस्याओं का समुचित निदान भी बताया गया। इस अवसर पर जिन संकुल शैक्षिक समन्वयको के द्वारा जाति प्रमाण पत्र हेतु पूर्ण आवेदन जमा किए गए थे उन विद्यार्थियों को जारी स्थायी जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया गया।

राज्यपाल डेका का स्काउट गाइड मुख्य संरक्षक अलंकरण बैज लगाकर किया गया सम्मान

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राज्यपाल रमेन डेका को छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड के मुख्य संरक्षक अलंकरण बैज लगाकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका को आज राजभवन में संस्था के पदाधिकारियों ने भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय मुख्यालय से प्राप्त बैज पहनाया और स्मृति चिन्ह भेंट किया।
राजभवन में आयोजित छत्तीसगढ़ के स्काउट-गाइड के एक संक्षिप्त कार्यक्रम में संस्था को पदाधिकारियों से मिलकर राज्यपाल श्री डेका ने प्रसंन्नता व्यक्त की और कहा कि स्काउट-गाइड की समाज में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्काउट गाइड में शामिल होने के लिए प्रेरित करें जिससे उनमे अनुशासन और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा मिलेगा और वे देश के अच्छे नागरिक बनेंगे।
छत्तीसगढ़ स्काउट एवं गाइड के अध्यक्ष रायपुर लोकसभा के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि मुख्य संरक्षक राज्यपाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलांे में स्काउट-गाइड योजना शुरू करने की योजना हैं।
स्काउट गाइड के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त डॉ. सोमनाथ यादव ने आभार प्रदर्शन किया। इस पूर्व राज्यपाल को मुख्य संरक्षक बैज पहनाकर राज्य मुख्य आयुक्त डॉ यादव ने स्वागत किया।
इस अवसर पर कोषाध्यक्ष शर्मा, राज्य सचिव सोनी, संयुक्त सचिव गनवीर, राज्य संगठन आयुक्त गाइड डॉ. करूणा मसीह, राज्य प्रशिक्षण आयुक्त गाइड सरिता पांडेय उपस्थित थी।

मुख्यमंत्री साय आदेशानुसार राज्य में विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू

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मुख्यमंत्री साय की आदेशानुसार राज्य में विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस विभाग में रिक्त पदों की भर्ती के लिए वित्त विभाग द्वारा 341 पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें सर्वाधिक 278 पद सब इंस्पेक्टर के हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ पुलिस बल में भर्ती के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने हरी झंडी दे दी है। स्वीकृत पदों में 19 सूबेदार, 278 उप निरीक्षक, 11 उप निरीक्षक (विशेष शाखा), 14 प्लाटून कमाण्डर, 4 उप निरीक्षक (अंगुल-चिन्ह), 1 उप निरीक्षक (प्रश्नाधीन दस्तावेज), 5 उप निरीक्षक (कम्प्यूटर), और 9 उप निरीक्षक (साइबर क्राइम) शामिल हैं।
इन रिक्तियों से छत्तीसगढ़ पुलिस बल की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, जिससे कानून व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। साथ ही, युवाओं को स्थिर और सम्मानजनक करियर के अवसर मिलेंगे। भर्ती की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी जल्द जारी की जाएगी।

पुरानी शैली बदलें, पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता की समस्याओं का निराकरण करें – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश : पूरी पारदर्शिता से अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने ठोस प्रयास करें

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों द्वारा आम जनता और स्कूली छात्राओं से दुर्व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जतायी

स्कूली छात्राओं को समय पर सायकिल वितरित करने को कहा, इस पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में दो दिवसीय कलेक्टर कॉन्फ्रेंस शुरू

रायपुर, 12 सितम्बर 2024/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में दो दिवसीय कलेक्टर कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि बीते 9 महीने में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अनुरूप प्रदेश को संवारने की दिशा में प्रयास किया गया है, किन्तु विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए हम सबको और अधिक कठिन परिश्रम करना होगा। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि शासन की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित की जाए और इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी फ्लैगशिप योजनाओं में सैचुरेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कार्य करें। उन्होंने कुछ जिलों में आम जनता और स्कूली छात्रों से शासकीय अधिकारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और सहृदयता के साथ आम जनता की समस्याओं को सुने और उसका यथासंभव शीघ्र निराकरण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की भाषा-शैली मर्यादित होनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों को जनसामान्य से संयमित लहजे में बातचीत करने की हिदायत दी और कहा कि यदि आपके अधीनस्थ अधिकारी भाषा संयम न रखें, तो उन पर तत्काल सख्त कार्यवाही करें।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि स्थानीय स्तर की समस्याएं वहीं निपटे, छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोगों को राजधानी न आना पड़े। इस बात का ध्यान जिला प्रशासन को रखना चाहिए। जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान में लाई गई जन समस्याओं के त्वरित निदान के लिए प्रभावी कदम उठाएं जाएं।

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान साफ तौर पर कहा कि इस विभाग का आम लोगों और किसानों से ज्यादा वास्ता है। राजस्व के प्रकरणों का निराकरण बिना किसी लेट-लतीफी के किए जाने से शासन-प्रशासन की छबि बेहतर होती है। उन्होंने अधिकारियों को जनसामान्य की भूमि संबंधी छोटी-छोटी त्रुटियों एवं समस्याओं का निदान पूरी संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा में करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़, बस्तर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में राजस्व मामलों के निराकरण की धीमी गति पर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने जिलेवार कलेक्टरों से अविवादित और विवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, त्रुटि सुधार, डायवर्सन, असर्वेक्षित ग्रामों की जानकारी, नक्शा बटांकन की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में ऐसे जिले जिनकी प्रगति 70 प्रतिशत से कम है, उन्हें इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। विवादित बटवारा के प्रकरण 6 माह से ज्यादा लंबित न हो। सीमांकन के प्रकरणों को भी तेजी से निराकृत किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी कमिश्नरों को अधीनस्थ जिलों का नियमित दौरा कर राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को प्रधानमंत्री जी ने अभी पीएम आवास के अंतर्गत 8 लाख 46 हजार 931 आवासों को स्वीकृति दी है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पीएम आवास का काम काफी पिछड़ गया था। हमें तेजी से इस पर काम करना है। यह सर्वाेच्च प्राथमिकता का कार्य है। इसके साथ ही हमने चिन्हांकित किये गये लगभग 47 हजार आवासहीन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने का निर्णय भी लिया है। इस पर भी जुट कर काम करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वच्छता सर्वे अभी चल रहा है। छत्तीसगढ़ के गांव और ग्राम पंचायतें स्वच्छता सर्वे को सभी मानदंडों को पूरा करती हों, इस पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत हैं। मनरेगा रोजगार सृजन का सबसे अच्छा माध्यम है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी अधोसंरचनाएं तैयार करें। मनरेगा में भुगतान संबंधी दिक्कतों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन कम होने पर बस्तर कलेक्टर पर नाराजगी जतायी। उन्होंने कलेक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वसहायता समूहों को बढ़ावा देने के साथ ही ट्रेनिंग, बैंक लिंकेज आदि की व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पंचायतों का व्यापक निरीक्षण करने, वहां की समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए। अमृत सरोवर योजना को जन अभियान का स्वरूप देने, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों का तेजी से निर्माण कराए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजना है। 15 सितम्बर को प्रधानमंत्री जी द्वारा पहली किश्त जारी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल विकास योजना के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की और खैरागढ़, सारंगढ़, सक्ती, रायगढ़ जिलों की शून्य प्रगति पर नाराजगी जताई और कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के सूपेबेड़ा में किडनी की बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय करने और आवश्यकतानुसार दिल्ली से विशेषज्ञ बुलाकर सेवाएं लेने की बात कही। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का सभी जिलों में संचालन तथा रोगियों को लाभ सुनिश्चित करने, आगामी 6 माह में शत प्रतिशत आयुष्मान पंजीयन करने, पीएम जनऔषधि केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने टीबी उन्मूलन के तहत किये जा रहे कार्यों की भी जानकारी ली। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में रायपुर और बिलासपुर जिले में बेहतर स्थिति की सराहना की। उन्होंने अन्य जिलों को भी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए सरस्वती सायकल योजना के वितरण में कुछ जिलों में हुई लेट-लतीफी को लेकर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने कलेक्टरों को स्पष्ट तौर पर कहा कि सायकल का वितरण शिक्षा सत्र शुरू होते ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सुकमा एवं बलरामपुर जिले में साइकिल वितरण अब तक न होने पर की स्थिति को देखते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा के दौरान हितग्राहियों को प्रधानमंत्री जन मन योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कबीरधाम जिले में वन अधिकार पट्टा के कार्य में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और जिन जिलों में डिजिटलाइजेशन का कार्य 80 प्रतिशत से कम है, वहां तेजी से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आश्रम एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा और कलेक्टरों को स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही, छात्रावासों में भोजन मेन्यू के अनुसार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा करते हुए महतारी वंदन योजना को सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना में कोई पात्र महिला वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने पीएम मातृ वंदन योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ से कुपोषण को जड़ से समाप्त करना हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए और इसके लिए विभाग को विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी., मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत और श्री पी. दयानंद तथा सभी संबंधित विभागों के सचिव सहित सभी संभागों के आयुक्त, सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ और नगर निगमों के आयुक्त भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के नए अध्यक्ष चुने गए

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मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के नए अध्यक्ष चुने गए हैं। मुख्यमंत्री निवास में आज आयोजित की गई एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में सर्व सम्मति से मुख्यमंत्री श्री साय को अध्यक्ष चुना गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आज व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए गौरव की बात है, आप लोगों ने सर्वसम्मति से मुझे छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना। इसके लिए आप सभी का हृदय से आभार। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस एसोसिएशन के अनेक आयोजनों में मुझे शामिल होने का मौका मिला। राष्ट्रीय आर्चरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा जी के साथ भी मुझे आयोजनों में शामिल होने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि आर्चरी एसोसिएशन ने बड़ी कुशलता और परिश्रम से छत्तीसगढ़ के तीरंदाजों की प्रतिभा को तराशा जिससे हमारे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर सहित अनेक प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर पदक जीते।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मैं स्वयं इस एसोसिएशन जुड़ गया हूं, सभी के सहयोग और मार्गदर्शन में आर्चरी एसोसिएशन के कार्यों को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं जनजातीय बहुल जशपुर क्षेत्र से आता हूं। बचपन में हम लोग भी तीर धनुष लेकर शिकार किया करते थे। आर्चरी हम सभी लोगों का विशेष रूप से जनजातियों का पसंदीदा खेल है। जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा निवास करती है। ये लोग बड़े धनुर्धर होते हैं, प्राचीन काल में पहाड़ी कोरवा तीर धनुष से शिकार करते थे। आज भी उनके हर घर में तीन धनुष रहता है। साय ने कहा कि इन लोगों की तीरंदाजी की नैसर्गिक प्रतिभा को तराशने के प्रयास किए जाने चाहिए। अभी प्रदेश में तीरंदाजी की तीन अकादमी हैं। जशपुर जिले में भी आर्चरी अकादमी का विस्तार करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी को तीन करोड़ रुपए, रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ी को दो करोड़ रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी को एक करोड़ रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। खेलों के विकास के लिए जो भी आवश्यक होगा किया जाएगा। हमारे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी आर्चरी के क्षेत्र में प्रदेश का नाम रौशन करें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, छत्तीसगढ़ बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिसोदिया सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारी उपाध्यक्ष भारत मटियारा, पैकरा, दीपेश अरोरा सहित अनेक पदाधिकारी, सुमंता चंद्र मोहंती, प्रवेश जोशी सदस्य गण, तीरंदाजी में पदक विजेता खिलाड़ी उपस्थित थे।

नगरीय निकाय आम निर्वाचन-2024 हेतु निर्वाचक नामावली तैयार करने कार्यक्रम जारी

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छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकायों के आम निर्वाचन 2024-25 कराए जाने फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली तैयार करने कार्यक्रम (समय अनुसूची) जारी किया गया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार प्रथम चरण में 18 सितंबर 2024 तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति एवं प्रारंभिक प्रारूप निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु कर्मचारियों का चयन एवं नियुक्ति की जाएगी। निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, प्राधिकृत कर्मचारियों का प्रशिक्षण तथा भारत निर्वाचन आयोग की 01 जनवरी 2024 की स्थिति में तैयार अद्यतन विधानसभा की निर्वाचक नामावली जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करने हेतु 20 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है। इसके बाद विधानसभा की निर्वाचक नामावली वार्डवार पृथक कर रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को उपलब्ध कराने 21 सितंबर, प्रचलित परिसीमन के आधार पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निर्वाचक नामावली को वार्डवार एवं भागवार मार्किंग कराने 27 सितंबर, वार्डवार एवं भागवार चिन्हित निर्वाचकों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्शित वार्ड के संबंधित भाग के अनुभाग में शिफ्ट किये जाने के लिए 01 अक्टूबर की तिथि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई है। इसी तरह निर्वाचक नामावली की चेकलिस्ट (पीडीएफ) तैयार करने 04 अक्टूबर एवं चेकलिस्ट की जांच व त्रुटि सुधार के लिए 07 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई है। इसी प्रकार 10 अक्टूबर को चेकलिस्ट संशोधन पश्चात् प्रारूप निर्वाचक नामावली मुद्रण हेतु जिला निर्वाचन कार्यालय को प्रदाय किया जाएगा और 14 अक्टूबर को जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा निर्वाचक नामावली का मुद्रण कराना एवं रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
. कार्यक्रम के द्वितीय चरण में 16 अक्टूबर से नर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन एवं दावे तथा आपत्तियां प्राप्त की जाएगी तथा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को निर्वाचक नामावली भी उपलब्ध कराई जाएगी। दावे-आपत्तियां प्राप्त करने अंतिम तिथि 23 अक्टूबर को अपरान्ह 03 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। दावा-आपत्तियों का निपटारे की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर है। इसी प्रकार प्ररूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 04 नवंबर तथा प्राप्त दावों का निराकरण 08 नवंबर को किया जाएगा। प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण आदेश के विरूद्ध अपील निराकरण आदेश पारित होने के 05 दिवस के भीतर किया जा सकेगा। साथ ही सॉफ्टवेयर में 13 नवंबर तक परिवर्धन, संशोधन एवं विलोपन के प्रकरणों की प्रविष्टि की जाएगी। चेकलिस्ट का निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा जांच करवाना तथा पी.डी.एफ. मुद्रण हेतु 16 नवंबर तक जिला कार्यालय को सौंपा जाएगा और 19 नवंबर तक अनुपूरक सूची का मुद्रण और अनुपूरक सूची को मूल सूची के साथ संलग्न करने के बाद निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 22 नवंबर 2024 को किया जाएगा।

कलेक्टर ने ली स्कूल प्राचार्यों की बैठक

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कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज स्कूल शिक्षा विभाग के प्राचार्यों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयको की समीक्षा बैठक ली। बैठक में विगत वर्ष के कक्षा दसवीं और कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष बेहतर परिणाम के लिए चर्चा की गई। इस दौरान कलेक्टर ने औसत से कम प्रतिशत वाले शालाओं के प्राचार्य और शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले शालाओं के प्राचार्यों से चर्चा कर कमियों और खूबियों के बारे में जानकारी ली। पूरे जिले के प्राचार्य को सत्र 2024-25 में कक्षा दसवीं एवं कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम कम से कम 90 प्रतिशत लाने के लिए रणनीति बनाकर लक्ष्य दिया गया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री एस. आलोक, जिला शिक्षा अधिकारी श्री मोहन राव सावंत सहित शिक्षा अधिकारी और सभी स्कूलों के प्राचार्य मौजूद थे।
कलेक्टर श्री लंगेह ने बैठक में प्राचार्यों से कहा कि वास्तव में प्रार्चाय स्कूल के धुरी होते हैं वे अपने लीडरशिप भूमिका निभाएं और स्वयं एक उदाहरण बनें। उन्होंने कहा कि जिन विषयों में कमजोर परफॉर्मेंस है उसमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषकर अंग्रेजी और गणित विषयों को लेकर शिक्षक विशेष प्रयास करे। कलेक्टर ने कहा कि बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए स्कूलों में पालकों की भागीदारी बढ़ानी होगी। हर माह कम से कम पालक शिक्षक बैठक नियमित रूप से आयोजित किया जाए। परीक्षा के पहले पालकों को परीक्षा की जानकारी दे और उन्हें घर में मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी भी देवें। कलेक्टर ने कहा कि जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहतर हो सकता था उसमें सुधार करने की रणनीति बनाएं। कलेक्टर लंगेह ने बच्चों के नियमित टेस्ट पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की साप्ताहिक और मासिक टेस्ट लेना सुनिश्चित करें और प्रगति पत्रक के माध्यम से उनके परिणामों की समीक्षा करते रहें। कलेक्टर ने प्राचार्यों से कहा कि सभी शिक्षक समय पर स्कूल आएं और अपना कोर्स पूरा करें। स्कूल में किसी भी तरह की नशाखोरी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जानकारी मिलने पर सीधे सस्पेंड किए जायेंगे। बैठक में परीक्षा परिणाम का पांच वर्गों के अनुसार समीक्षा की गई जिसमें 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले विद्यालय जिनकी संख्या शून्य है, 30 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक परीक्षा परिणाम वाले शालाओं की संख्या 09, 60 से 90 प्रतिशत तक वाले विद्यालयों की संख्या 97 एवं 90 से अधिक 68 और शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 14 विद्यालयों की समीक्षा की गई। ज्ञात है कि जिले में कक्षा 10वीं में 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम वाले 14 स्कूल एवं 12वीं में 20 स्कूल शामिल हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ एस. आलोक ने कहा कि बच्चों से अधिक से अधिक संवाद करने की आवश्यकता है। प्राचार्य भी बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी परेशानियों को समझ कर हल करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि स्कूलों में जाति प्रमाण पत्र बनाना भी आवश्यक है। इसलिए प्राचार्यगण इसे गम्भीरता से लेते हुए प्रत्येक बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में इस सत्र में बेहतर रिजल्ट आएगा।
इस अवसर पर हाई स्कूल परसदा, मेमरा, पिथौरा, सिरबोड़ा, केजुवा, महासमुंद नयापारा, पटेवा के प्राचार्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ब्लूप्रिंट के आधार पर प्रश्न निर्माण कर प्रति सप्ताह मूल्यांकन करने से, तिमाही, छमाही परीक्षा को बोर्ड पैटर्न में प्रश्न पत्र निर्माण कर बच्चों से हल करने से एवं विगत 5 वर्षों के अनसॉल्वड पेपर को अच्छे से अभ्यास करने से रिजल्ट में सुधार जरूर होगा। सभी शिक्षक यदि ठान ले कि हमको बेहतर से बेहतर रिजल्ट देना है तो कोई बड़ी बात नहीं है। सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति के साथ-साथ बच्चों की शत् प्रतिशत उपस्थिति पर विशेष ध्यान देना शामिल था। इसके अलावा लेखन कौशल को भी अभ्यास में लाना होगा।
बैठक में जिला मिशन समन्वयक चंद्राकर, सहायक संचालक सतीश नायर, व नंद किशोर सिन्हा सहायक संचालक, परियोजना समन्वयक रेखराज शर्मा, पांचो विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित जिले के सभी स्कूल के प्राचार्य उपस्थित थे।