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क्या शिंदे के एक मूव से फडणवीस सरकार को खतरा? महाराष्‍ट्र में मध्‍यावध

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जब से महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मुंबई बीएमसी में अपना मेयर बनवाने के लिए भाजपा पर प्रेशर बनाया है, कई तरह की बातें कही जा रही हैं. पहले खबर आई कि शिंदे को किनारे करने के लिए उद्धव ठाकरे ने भाजपा को अलग तरह से समर्थन देने का मूड बना लिया है.

वह सदन में अपने पार्षदों को अनुपस्थित रख देंगे. कुछ देर बाद शाम होते-होते महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आशंका जताई कि राज्य में मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं. इसके बाद अटकलें लगाई जानें लगी हैं कि क्या एकनाथ शिंदे भाजपा का साथ छोड़ने वाले हैं और अगर ऐसा हुआ तो क्या मध्यावधि चुनाव की नौबत आ सकती है?

इन अटकलों की वजह सपकाल का बयान है. असल में हाल में महाराष्ट्र में नगर निगम के चुनाव हुए हैं. बीएमसी ही नहीं, कई नगर निगमों में चौंकाने वाले समीकरण देखने को मिले हैं. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में खबर है कि उद्धव ठाकरे गुट के तीन पार्षदों को शिंदे की शिवसेना ने अपनी तरफ कर लिया है. यूं समझिए मेयर पद पाने के लिए पूरे राज्य के नगर निगमों में जोड़-तोड़ हो रही है. शिंदे के साथ मुश्किल यह है कि बीएमसी चुनाव में उनकी पार्टी के प्रदर्शन से भाजपा खुश नहीं है, इधर उनकी जोड़तोड़ से उद्धव भी खफा हो गए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये किसी नए समीकरण का संकेत हैं?

सपकाल ने क्या कहा?

बीएमसी चुनाव के बाद मेयर को लेकर फंसे पेच के बीच हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा-शिवसेना सत्ता के लिए साथ आए लोग हैं. दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और जनता ने बहुमत दिया है. इतने दिनों में तो फैसला कर लेना चाहिए था कि मेयर कौन बनेगा. मुझे लगता है कि दोनों दलों में मेयर को लेकर खींचतान जारी है इसीलिए अभी तक मेयर को लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया है. आगे उन्होंने कह दिया कि मिड-टर्म पोल भी विधानसभा के हो सकते हैं. होटल पॉलिटिक्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय दबाव जीते हुए जनप्रतिनिधियों पर है और वोटरों पर भी.

नंबर गेम क्या कहता है?

महाराष्ट्र में 288 सीटों के लिए नवंबर 2024 में विधानसभा चुनाव कराए गए थे. बहुमत का आंकड़ा 145 था और भाजपा ने सबसे ज्यादा 132 सीटें जीतीं. शिंदे की शिवसेना को 57 और अजीत पवार की एनसीपी को 41 सीटें मिलीं. उद्धव की शिवसेना 20, कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी केवल 10 सीटें निकाल सकी. फिलहाल महाराष्ट्र में तीन दलों की गठबंधन सरकार चल रही है. हालांकि भाजपा को बहुमत के लिए बहुत कम नंबर की जरूरत है. उसके लिए शिंदे का साथ मजबूरी नहीं है. अगर शिंदे जाते भी हैं तो अजीत पवार के सपोर्ट से आराम से सरकार चलती रहेगी.

असल में शिंदे को भाजपा की जरूरत है

असल में शिंदे की स्थिति इस समय ऐसी है कि उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए भाजपा का साथ अनिवार्यता है. मुंबई में मेयर की डिमांड से इतर देखिए तो उद्धव ठाकरे की पार्टी के प्रदर्शन से साफ है कि मुंबई में अब भी ठाकरे परिवार का दबदबा है. जिस मराठी वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए भाजपा ने मुंबई में शिंदे सेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था उसका बहुत कम फायदा हुआ है. वैसे भी, बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनने के साथ ज्यादातर नगर निगमों में भगवा परचम लहराकर भाजपा ने महाराष्ट्र में खुद को नंबर एक पार्टी बना लिया है. यह शहरी निकाय चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है. ऐसे में शिंदे का कोई मूव फडणवीस सरकार को खतरा नहीं पहुंचाने वाला बल्कि अपनी राजनीति को असरदार बनाए रखने के लिए उनका फिर से नरम पड़ना तय है. खबर है कि वह अपने पार्षदों को होटल से बाहर बुला लिए हैं.

वैसे, भी शिंदे मंझे हुए राजनीतिज्ञ हैं. अभी विधानसभा चुनाव 2029 में हैं. शहरी निकायों में वह अपनी पार्टी का प्रभाव देख ही चुके हैं, ऐसे में वह सत्ता से दूर जाने जैसा खतरनाक कदम उठाने के बारे में सोचेंगे भी नहीं.

‘मैं निराश हूं, राष्ट्रगान को नहीं दिया गया उचित सम्मान…’ 

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तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि मंगलवार को विधानसभा के पहले सत्र के उद्घाटन दिवस पर परंपरागत भाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए. राज्यपाल ने इस दौरान कहा कि उन्हें राष्ट्रगान को उचित सम्मान न दिए जाने से निराशा हुई है और उन्होंने इस पर विरोध जताया.

राज्यपाल ने विधानसभा में कहा कि मैं निराश हूं. राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया. इसका उचित सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया, उनका अपमान हुआ और उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया.

राज्यपाल आरएन रवि ने फिर छोड़ा सदन

रविवार को राज्यपाल ने मांग की कि तमिल राष्ट्रगान के बाद राष्ट्रगान बजाया जाए, लेकिन जब विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने इस पर इनकार किया तो रवि ने उद्घाटन भाषण पढ़े बिना ही सदन छोड़ दिया. यह तीसरी बार है जब राज्यपाल ने परंपरागत भाषण नहीं पढ़ा और विधानसभा से वॉकआउट किया है. 2024 और 2025 में भी उन्होंने सदन में भाषण नहीं दिया था. इससे पहले 2025 में भी राज्यपाल ने भाषण के दौरान राष्ट्रगान नहीं बजाए जाने पर विरोध जताते हुए विधानसभा से वॉकआउट किया था.

वहीं, तमिलनाडु के लोक भवन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि राज्यपाल के भाषण के दौरान उनका माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया. बयान में यह भी कहा गया कि राज्य में दलितों के खिलाफ अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा में वृद्धि हो रही है लेकिन भाषण में इस मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया.

साथ ही, लोक भवन ने राष्ट्रगान के अपमान और संवैधानिक कर्तव्यों की अवहेलना का आरोप भी लगाया. इसी बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं. उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष श्री एम. अप्पावु को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. ईश्वर आपको अच्छे स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु प्रदान करें.

“पंजाब में लुधियाना, जालंधर, संगरूर, पटियाला और बठिंडा के बस टर्मिनलों “

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य भर के प्रमुख बस टर्मिनलों के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक योजना को मंजूरी दी है. यह कदम सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम पहल है.

इस संबंध में जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने बताया कि इस योजना के तहत लुधियाना, जालंधर, संगरूर, पटियाला और बठिंडा के बस टर्मिनलों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से अपग्रेड किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दक्षता, सुरक्षा, पहुंच और बेहतर सेवाओं को सुनिश्चित करना है.

ये बस टर्मिनल ग्रामीण और शहरी दोनों आबादी के लिए महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करते हैं और कामगारों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, पर्यटकों तथा औद्योगिक श्रमिकों को रोज़मर्रा की आवाजाही की सुविधा प्रदान करते हैं. मंत्री ने आगे बताया कि ये टर्मिनल अंतर-राज्यीय संपर्क में भी अहम भूमिका निभाते हैं और हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पड़ोसी राज्यों के लिए आवागमन की सुविधा देते हैं.

लुधियाना- जालंधर बस टर्मिनलों पर प्रतिदिन 75,000 से 1 लाख यात्रियों की आवाजाही

इसके अतिरिक्त, लुधियाना और जालंधर बस टर्मिनलों पर प्रतिदिन 75,000 से 1 लाख यात्रियों की आवाजाही होती है, जबकि पटियाला और बठिंडा में रोज़ाना लगभग 50,000 यात्री आते हैं. यह आंकड़े पंजाब के गतिशीलता इकोसिस्टम में इन सुविधाओं के महत्व को दर्शाते हैं. मंत्री ने कहा कि पश्चिम में बठिंडा से दोआबा क्षेत्र में जालंधर तक, लुधियाना से संगरूर और मालवा में पटियाला तक, उन बस टर्मिनलों को अपग्रेड किया जा रहा है जहां पहले से ही बड़ी संख्या में नागरिक रोज़ाना यात्रा करते हैं. पीपीपी मॉडल के माध्यम से इन पांचों टर्मिनलों को लोगों की दैनिक यात्रा को प्रभावित किए बिना सुरक्षित, बेहतर और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा. यह विकास राज्य के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और कामगारों, विद्यार्थियों तथा सभी वर्गों के लोगों की यात्रा को अधिक सुगम बनाएगा.

परियोजनाओं को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडलों के तहत लागू किया जाएगा

उन्होंने कहा कि बस टर्मिनलों के आधुनिकीकरण की यह पहल मौजूदा टर्मिनलों में लंबे समय से चली आ रही बुनियादी ढांचे की कमियों, संचालन संबंधी अक्षमताओं और अपर्याप्त यात्री सुविधाओं को दूर करने के लिए तैयार की गई है. परियोजनाओं को डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर या बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडलों के तहत लागू किया जाएगा, जिससे स्थिरता, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं, बेहतर परिवहन सुविधाएं, शहरी परिवहन प्रणालियों के साथ बेहतर एकीकरण और राज्य के वित्तीय संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके.

यात्रियों की सुविधाओं और संचालन प्रबंधन में सुधार पर विशेष ध्यान

भुल्लर ने बताया कि योजनाबद्ध नवीनीकरण के तहत यात्रियों की सुविधाओं और संचालन प्रबंधन में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसमें बेहतर प्रतीक्षा क्षेत्र, उन्नत स्वच्छता सुविधाएं, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और संकेतक, सुव्यवस्थित बोर्डिंग व्यवस्था और ढांचागत पार्किंग प्रणालियां शामिल होंगी. भीड़भाड़ वाले समय और अधिक यात्री आवागमन के दौरान सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए आवागमन, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इस परियोजना में समाज के सभी वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा. वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बाधारहित पहुंच और सुगम आवागमन की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सार्वजनिक परिवहन का बुनियादी ढांचा सभी के लिए सुलभ और सम्मानजनक हो.

आधुनिक बस टर्मिनलों को एकीकृत शहरी हब के रूप में विकसित किया जाएगा: परिवहन मंत्री लालजीत सिंह  अधिक जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने कहा, “परिवहन सुविधाओं के साथ-साथ आधुनिक बस टर्मिनलों को एकीकृत शहरी हब के रूप में विकसित किया जाएगा. लागू नियमों और योजना दिशानिर्देशों के तहत टर्मिनल परिसरों में वाणिज्यिक और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं जैसे खुदरा दुकानें, कार्यालय, कार्यस्थल और लॉजिस्टिक्स सहायता संबंधी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. यह एकीकृत दृष्टिकोण यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और टर्मिनलों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता में योगदान देगा.” परिवहन मंत्री ने आगे कहा, “इस पहल के माध्यम से पंजाब सरकार का उद्देश्य रोज़मर्रा में उपयोग होने वाले सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना, लाखों नागरिकों की दैनिक यात्रा को अधिक सुगम करना और राज्य में आधुनिक, कुशल तथा जन-हितैषी बस टर्मिनलों के लिए एक नया मानक स्थापित करना है.”

“उद्धव गुट बोला- ‘ हम बहुमत से सिर्फ 6 सीट दूर…’ मुंबई मेयर चुनाव पर “

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बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में स्पष्ट बहुमत का दावा कर रहे महायुति गठबंधन के बीच मुंबई महापौर पद की दौड़ को लेकर राजनीतिक सस्पेंस बरकरार है. शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत से केवल 6 सीट पीछे है.

संजय राउत का बड़ा दावा

बता दें, बीएमसी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 227 वार्डों में से 89 सीटें जीती हैं, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. इस तरह महायुति गठबंधन के पास कुल 118 पार्षद हो गए हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक हैं. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें हासिल कर दूसरा स्थान पाया. संजय राउत का दावा है कि सहयोगी दलों के समर्थन से उनका आंकड़ा 108 तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि बहुमत के लिए सिर्फ 6 सीटों की जरूरत है.

चुनाव परिणामों के अनुसार, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने 6 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के साथ मिलकर 24 सीटें हासिल कीं. इसके अलावा, एआईएमआईएम को 8, समाजवादी पार्टी को 2, अजित पवार की एनसीपी को 3 और शरद पवार गुट को 1 सीट मिली है. अजित पवार की पार्टी राज्य सरकार का हिस्सा होने के बावजूद बीएमसी चुनाव अलग लड़ी थी. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राउत ने कहा कि फिलहाल हमारे पास यूबीटी, एमएनएस, कांग्रेस और सहयोगियों के साथ 108 सीटें हैं. हमें सिर्फ छह सीटों की कमी है. मुंबई की राजनीति में कुछ भी हो सकता है, देखते रहिए…

राउत ने शिंदे खेमे पर साधा निशाना

राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया कि शिंदे खेमा अपने पार्षदों को पाला बदलने से रोकने के लिए उन्हें होटलों में रखे हुए है. हालांकि, शिंदे गुट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्षदों को प्रशिक्षण कार्यशाला के लिए एक होटल में ठहराया गया है.

‘हमारा नेतृत्व जनसेवा और राष्ट्रसेवा की भावना से आगे बढ़ाता है…’

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नितिन नबीन ने मंगलवार को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला. वह इस पद को संभालने वाले सबसे कम उम्र के नेता बन गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर उन्हें बधाई दी.

इस दौरान पीएम मोदी ने पार्टी मुख्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया. पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले, मैं दुनिया की सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टी के प्रेसिडेंट चुने जाने पर नितिन नवीन को दिल से बधाई देता हूं. पिछले कई महीनों से संगठन की सबसे छोटी यूनिट से लेकर नेशनल प्रेसिडेंट के चुनाव तक पूरी प्रक्रिया 100 परसेंट लोकतांत्रिक तरीके से पूरी की गई है. आज, यह प्रक्रिया सही और औपचारिक तरीके से पूरी हो गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह भव्य संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी के लोकतांत्रिक विश्वास, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है. मैं इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए देश भर के सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को दिल से बधाई देता हूं… हमारा नेतृत्व परंपरा से निर्देशित है, अनुभव से समृद्ध है और जनसेवा और राष्ट्रसेवा की भावना से संगठन को आगे बढ़ाता है.</p><p><strong>खबर अपडेट की जा रही है..

Trains Cancelled: 24 से 31 जनवरी तक रेलवे ने एक साथ कैंसिल कीं कई ट्रेनें!

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रेलवे ने फिर थोक में रद्द की ट्रेनें 14 ट्रेनें रद्द, 4 ट्रेनें गंतव्य से पहले होंगी समाप्त, 2 ट्रेनें बीच में की जाएंगी कंट्रोल.

रेलवे ने एक बार फिर यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। थर्ड लाइन कनेक्टिविटी के कार्य के चलते रेलवे ने बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द और नियंत्रित करने का फैसला लिया है। राजनांदगांव–कलमना रेलखंड के बीच थर्ड लाइन को तुमसर यार्ड से जोड़ने का कार्य किया जाना है जिसके चलते 24 से 31 जनवरी तक रेल यातायात प्रभावित रहेगा।

बिलासपुर रूट पर 14 ट्रेनें रद्द

रेलवे प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इस अवधि में कुल 14 ट्रेनें रद्द रहेंगी, जबकि 4 ट्रेनों को उनके गंतव्य से पहले ही समाप्त किया जाएगा। इसके अलावा 2 ट्रेनों को बीच रास्ते में कंट्रोल किया जाएगा। इसी कड़ी में तुमसर रोड यार्ड पर राजनांदगाँव-नागपुर तीसरी लाइन परियोजना से संबन्धित कार्य के लिए नॉन इंटरलोकिंग कार्य किया जाएगा । इस कार्य के फलस्वरूप कुछ यात्री गाड़ियों का परिचालन प्रभावित रहेगा ।

प्रभावित होने वाली गाडियां

  1. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक तुमसर रोड से छूटने वाली 58817 तुमसर रोड-तिरोडी पैसेंजर नहीं चलेगी ।
  2. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक तिरोडी से छूटने वाली 58816 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर नहीं चलेगी ।
  3. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) जंक्शन से छूटने वाली 58815 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-तिरोडी पैसेंजर नहीं चलेगी ।
  4. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक तिरोडी से छूटने वाली 58818 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर नहीं चलेगी ।
  5. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक बालाघाट से छूटने वाली 68715 बालाघाट-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-तिरोडी मेमू नहीं चलेगी ।
  6. दिनांक 24 से 31जनवरी, 2026 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 68714 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)- बालाघाट मेमू नहीं चलेगी ।
  7. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक दुर्ग से छूटने वाली 68741 दुर्ग-गोंदिया मेमू नहीं चलेगी ।
  8. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक गोंदिया से छूटने वाली 68743 गोंदिया-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) मेमू नहीं चलेगी ।
  9. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 68744 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-गोंदिया मेमू नहीं चलेगी ।
  10. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक गोंदिया से छूटने वाली 68742 गोंदिया-दुर्ग मेमू नहीं चलेगी ।
  11. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक डोंगरगढ़ से छूटने वाली 68711 डोंगरगढ़-गोंदिया मेमू नहीं चलेगी ।
  12. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक गोंदिया से छूटने वाली 68713 गोंदिया-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) मेम नहीं चलेगी ।
  13. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक इतवारी से छूटने वाली 68716 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-गोंदिया मेमू नहीं चलेगी ।
  14. दिनांक 28 से 31 जनवरी, 2026 तक गोंदिया से छूटने वाली 68712 गोंदिया-डोंगरगढ़ मेमू नहीं चलेगी ।

बीच में समाप्त होने वाली गाडियां 

  1. दिनांक 24 से 31 जनवरी, 2026 तक तुमसर रोड के स्थान पर यह गाड़ी गोबरवाही से तिरोडी के लिए रवाना होगी 78811 तुमसर रोड-तिरोडी डेमू गोबरवाही तक चलेगी अर्थात यह गाड़ी गोबरवाही एवं तुमसर रोड नहीं चलेगी ।
  2. दिनांक 24 से 31 जनवरी, 2026 तक तिरोडी से छूटने वाली 78812 तिरोडी-तुमसर रोड डेमू गोबरवाही तक चलेगी अर्थात यह गाड़ी गोबरवाही एवं तुमसर रोड नहीं चलेगी ।
  3. दिनांक 24 से 31 जनवरी, 2026 तक तिरोडी के स्थान पर यह गाड़ी गोबरवाही से बालाघाट के लिए रवाना होगी 78813 तिरोडी-बालाघाट डेमू अर्थात यह गाड़ी गोबरवाही एवं तुमसर रोड के बीच नहीं चलेगी ।
  4. दिनांक 24 से 31 जनवरी, 2026 तक बालाघाट से छूटने वाली 78814 बालाघाट-तिरोडी डेमू गोबरवाही तक चलेगी अर्थात यह गाड़ी गोबरवाही एवं तुमसर रोड नहीं चलेगी ।

बीच में नियंत्रित होने वाली गाडियां 

  1. दिनांक 29 जनवरी, 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से चलने वाली गाड़ी 18240 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) – कोरबा शिवनाथ एक्स्प्रेस को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) एवं तुमसार रोड के बीच 30 मिनट नियंत्रित होगी ।
  2. दिनांक 31 जनवरी, 2026 को अहमदाबाद से चलने वाली गाड़ी 12833 अहमदाबाद- हावड़ा एक्स्प्रेस को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) एवं गोंडिया के बीच 40 मिनट नियंत्रित होगी ।

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर राजधानी के मुस्लिम समाज ने जताई नाराज़गी, केंद्र सरकार से की यह बड़ी मांग…

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रायपुर में मुस्लिम समाज ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रही हिंसा के खिलाफ नाराज़गी जताई और केंद्र सरकार से बांग्लादेश को सबक सिखाने की मांग की। उन्होंने कहा कि निर्दोषों पर हमला किसी भी धर्म के खिलाफ है और भारत को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए।

  • रायपुर में मुस्लिम समाज ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा पर नाराज़गी जताई।
  • समाज के प्रमुखों ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश को सबक सिखाने की मांग की।
  • प्रमुखों की बैठक में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को सुरक्षा ना दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई ।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुस्लिम समाज ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कड़ी नाराज़गी जताई है। शहर के मुस्लिम समाज के प्रमुखों ने एक बैठक आयोजित की, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदुओं को निशाना बनाए जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। समाज के लोगों ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश को सबक सिखाने की मांग की है।

केंद्र सरकार से बांग्लादेश को सबक सिखाने की अपील

आपको बता दें कि इस आयोजित बैठक के दौरान मुस्लिम समाज के प्रमुखों ने इस बात पर गहरी नाराज़गी जताई कि बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को उचित सुरक्षा नहीं दी जा रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि निर्दोष लोगों पर हमला किसी भी धर्म के खिलाफ है। उन्होंने भारत की केंद्र सरकार से अपील की है कि बांग्लादेश को सबक सिखाया जाए।

बीतें दिनों इतने हिंदू की हुई हत्या

आपको बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते दिनों दीपू चंद्र दास पर हमला हुआ था, जिन्हें एक कपड़े की फैक्ट्री में पीट-पीटकर मार डाला गया। इसके अलावा अमृत मंडल नाम के एक अन्य हिंदू युवक को भी मौत के घाट उतार दिया गया था। वहीं, मयमनसिंह जिले में हिंदू युवक बृजेंद्र बिस्वास को गोली मार दी गई थी। इसके अलावा खोकन दास की भी भीड़ के हमले में मौत हो गई थी।

उधर भ्रष्टाचार के बाबू.. इधर ‘सीनियर’ बेकाबू! करप्शन के बहाने सरकार पर तंज!

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छत्तीसगढ़ में क्या सरकारी तंत्र में करप्शन को नेता खुलकर स्वीकारोक्ति दे चले हैं? विपक्ष मौजूदा सरकार को, प्रशासन को भ्रष्टाचार पर घेरने पूरे दमखम के साथ सड़क से लेकर सदन तक रणनीति बना रहा है, लेकिन जब सवाल अपने ही नेता के बयान से उठे तो फिर विपक्ष के पास खुला मौका होता है सरकार को घेरने का। एक पूर्व मंत्री और सीनियर विधायक कह रहे हैं कि मोहब्बत और भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होता। कांग्रेस कह रही है कि बीजेपी सरकार में जग खरीदी से लेकर जंबूरी तक के भ्रष्टाचार पर सत्तापक्ष के नेता मुहर लगा रहे हैं। सवाल है क्या वाकई सत्तापक्ष के नेता अपनी सरकार में करप्शन से परेशान हैं, उसे रोक नहीं पा रहे हैं?

इस वक्त प्रदेश में भ्रष्टाचार जारी घमासान चरम पर है। विपक्षी कांग्रेस धान संग्रहण केंद्रों पर करोड़ों के धान चूहों के खाने के बयान के बाद अब पूरा जोर लगाकर सरकार को घेर रही है। सरकारी तंत्र के करप्शन पर राजधानी से लेकर जिलों तक कांग्रेसी सड़क पर उतर चुके हैं। इसी बीच रायपुर DEO ऑफिस में आगजनी की घटना पर कांग्रेस ने इसे सीधे-सीधे सरकारी भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने के लिए जानबूझकर लगवाई आग बताया। आरोपों पर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने शायराना अंदाज में तंज कसा कि मोहब्बत और भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होते, बस बाबू बदल जाते हैं।

चंद्राकर के इस बयान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि पूर्व मंत्री स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी पार्टी की सरकार के दौर में करप्शन जारी है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता उद्योगपतियो को छूट दिलाते हैं और पिछले दरवाजे से उनसे पैसे लेते हैं। अब सवाल ये कि क्या वाकई सत्ता पक्ष के नेता ये स्वीकार कर रहे हैं कि सरकारी तंत्र में स्थाई तौर पर भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है।जिसे उनकी सरकार भी रोक नहीं पा रही है। पूर्व अजय चंद्राकर का बयान कांग्रेस को बीजेपी सरकार को घेरने का खुला मौका है तो क्या ये बयान जानबूझकर किसी खीज में दिया गया या वाकई नेताजी कड़वी सच्चाई को साहस से स्वीकार कर रहे हैं।

CG: साय कैबिनेट बैठक कल रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रस्ताव पर फैसला संभव नवा रायपुर भी कमिश्नरी में शामिल…

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Sai Cabinet: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (साय कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक कल आयोजित होने जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (साय कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक कल आयोजित होने जा रही है। कई अहम नीतिगत और प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में रायपुर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है, जिस पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

पुलिस कमिश्नरी प्रस्ताव पर फैसला संभव

सूत्रों के अनुसार, रायपुर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली के अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक सीमाओं के निर्धारण को अंतिम मंजूरी दी जा सकती है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो राजधानी रायपुर के साथ-साथ नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र में शामिल किया जा सकता है। इससे राजधानी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।

अगर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने पर मुहर लगतीहै इससे पुलिस प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने और अपराध नियंत्रण में अधिक अधिकार मिलेंगे। इस व्यवस्था के तहत पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रेटी शक्तियां भी प्राप्त होंगी, जिससे कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। ⁠

गणतंत्र दिवस पर भी रहेगा फोकस

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल द्वारा दिए जाने वाले अभिभाषण के प्रारूप को भी स्वीकृति दी जा सकती है। इस अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख किया जाएगा। ऐसे में कैबिनेट की मंजूरी के बाद अभिभाषण को अंतिम रूप दिया जाएगा।

धान खरीदी गड़बड़ियों पर समीक्षा

इसके अलावा धान खरीदी, धान के उठाव और स्टॉक मिलान में सामने आ रही गड़बड़ियों की भी समीक्षा की जाएगी। हाल के दिनों में धान खरीदी से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। कैबिनेट इस विषय पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दे सकती है। इससे किसानों को समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।

अन्य विभागीय प्रस्तावों पर भी अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। इनमें विकास योजनाएं, प्रशासनिक सुधार, वित्तीय स्वीकृतियां और जनहित से जुड़े निर्णय शामिल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री साय की सरकार के गठन के बाद यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें राजधानी की पुलिस व्यवस्था से लेकर कृषि और प्रशासनिक विषयों पर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026: छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना का राष्ट्रीय जश्न, 3 दिन होगा भव्य आयोजन…

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रायपुर साहित्य उत्सव 2026 23 और 25 जनवरी को नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित होगा. यह तीन दिवसीय कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का प्रमुख मंच बनेगा.

रायपुर साहित्य उत्सव 2026

छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है.

तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे.

120 से अधिक साहित्यकार, 42 सत्रों में होगा विमर्श

इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा. आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा.

साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे.

कला, राजनीति से लेकर डिजिटल युग तक चर्चा

इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी. साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे.

आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है. आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं.

भव्य उद्घाटन और समापन समारोह

साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा किया जाएगा. उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी.

साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी.

चाणक्यनाटक और खास अतिथि होंगे आकर्षण

साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा.

इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे. 24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा.

साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं. मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है.

दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है.

आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे.

पुस्तक मेला, टेलेंट जोन और लोक संस्कृति की झलक

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है.

आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी. स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी. साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे.

पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा.

साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं. आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं. कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं.

रायपुर साहित्य उत्सव–2026  छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है. यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा.