Home Blog Page 1102

भारत में कब शुरू हुई कागजी मुद्रा, पहले छपा ये नोट, 10,000 का नोट भी आया, जानिए नोटों पर गांधी जी से पहले कौन था

0

बचपन से लेकर आज तक आपने भारतीय नोटों को कई रूप और रंगों में देखा होगा. हर दौर में भारतीय नोट बदले हैं. एक वक्त था जब 1, 2 और 5 रुपये के नोट चलते थे लेकिन अब उनकी जगह सिक्कों ने ले ली है. 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट की शक्ल और साइज भी काफी बदल गई है. लेकिन, क्या आप जानते हैं भारत में कागजी नोटों की शुरुआत कब हुई. कागजी मुद्रा आने से पहले सिक्कों में लेनदेन हुआ करता था.

भारत में कागजी रुपयों का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. RBI की साइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कागजी मुद्रा की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में हुई थी. आइये आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं भारतीय कागजी नोटों का इतिहास

पहला कागजी नोट कौन-सा था?
कागजी रुपयों की शुरुआत अंग्रेजों के जमाने में हो गई थी. पहला भारतीय मुद्रा नोट भारत सरकार ने पेश किया था, न कि रिज़र्व बैंक द्वारा ने, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1938 में करेंसी नोट जारी करने का कार्य अपने हाथ में ले लिया. 18वीं शताब्दी में, बंगाल में बैंक ऑफ हिंदोस्तान जनरल बैंक और बंगाल बैंक ने भारत में कागजी मुद्रा जारी की, जो देश में पहली पेपर मनी थी. 1861 में पेपर करेंसी एक्ट आया और कागजी मुद्रा का प्रबंधन मिंट मास्टर्स, महालेखाकारों और मुद्रा नियंत्रक को सौंपा गया. पहला कागजी मुद्रा नोट, यानी 10 रुपये का नोट, भारत सरकार द्वारा वर्ष 1861 में पेश किया गया था.

18वीं से 19वीं सदी तक आते रहे ये कागजी नोट
 -1872 में 5 रुपये का नोट
– 1899 में 10,000 रुपये का नोट
– 1900 में 100 रुपये का नोट
– 1905 में 50 रुपये का नोट
– 1907 में 500 रुपये का नोट
– 1909 में 1000 रुपये का नोट
– 1917 में 1 रुपये और 2.5 रुपये के नोट

पहले नोट पर किसकी तस्वीर हुआ करती थी
ये सभी नोट भारत सरकार द्वारा जारी किए गए थे. भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1938 में भारतीय मुद्रा नोट जारी करना शुरू किया. RBI ने 1938 में जॉर्ज VI के चित्र वाला पहला 5 रुपये का नोट जारी किया था. 2 रुपये, 10 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 1,000 रुपये और 10,000 रुपये के नोट आए. 10,000 रुपये के नोटों को 1946 में वापस ले लिया गया था. हालांकि, 1949 में 5000 रुपये के नोटों के साथ फिर से शुरू किया गया और 1978 में इसे फिर से बंद कर दिया गया.

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से छाए बादल, नए साल के पहले सप्ताह में बरसने की संभावना

0

साल का अंत तो बेहद ही सामान्य ठंड के साथ बीत जाएगा. मगर नए साल के पहले सप्ताह में छाए बादल बरस भी सकते हैं. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव और दो दिशाओं की हवा के मिलन से राज्य का मौसम बदलने की संभावना बन रही है. अभी बादलों की वजह से रात का पारा और चढ़ने तथा दिन में मौसम में ठंडकता रहने का अनुमान है.

शुक्रवार से अपना असर दिखा रहा पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के जाने के बाद भी राज्य में आने वाली हवा की दिशा नहीं बदली है. जिसकी वजह से ठंड की वापसी नहीं हुई है. वातावरण में मौजूद नमी की वजह से रायपुर में रात का तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस में तक अधिक हो चुका है. इसके प्रभाव से ठंड बेहद कम हो चुकी है और इसमें आने वाले दिनों में और कमी आने की गुंजाइश बन रही है. जानकारी के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ ने अपना प्रभाव शुक्रवार से दिखाना शुरू कर दिया है.

2 से 3 डिग्री तापमान बढ़ने की संभावना
मौसम विशेषज्ञ एच पी चंद्रा ने बताया कि प्रदेश में अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 – 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है. सर्वाधिक अधिकतम तापमान डोंगरगढ़ का 29.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री अंबिकापुर में दर्ज किया गया है. प्रदेश में आज मौसम शुष्क रहने की संभावना है. आज राजधानी रायपुर का अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है

राजस्थान में डबल इंजन की सरकार: सीएम भजनलाल ने मंत्रिमंडल के गठन से पहले ले डाले ये 5 बड़े फैसले, देखें सूची

0

राजस्थान में आज भजनलाल सरकार के मंत्रिमंडल का गठन होने जा रहा है. राजस्थान में सत्ता बदलते ही सूबे की नई भजनलाल सरकार एक्शन मोड में आ गई थी. भजनलाल सरकार ने मंत्रिमंडल के गठन से पहले पांच ऐसे बड़े वादों को पूरा कर देने का ऐलान कर दिया था जो उसने सत्ता में आने से पहले जनता से किए थे. अब मंत्रिमंडल से गठन के बाद सरकार के कामकाज में और तेजी आने की संभावनाएं हैं. बीजेपी सरकार जनता को स्वच्छ सुशासन देने का वादा करके सत्ता में आई है.

राजस्थान की सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने के बाद बीजेपी की भजनलाल सरकार ने ताबड़तोड़ बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए थे. सीएम भजनलाल ने सत्ता संभालते ही कई बड़े फैसले कर डाले. ये वो बड़े मामले हैं जिनको लेकर बीजेपी कांग्रेस सरकार के समय उसके खिलाफ आक्रमक मोड में रहती थी. सरकार की ओर से ताबड़तोड़ लिए गए इन बड़े फैसलों से बीजेपी को उम्मीद है कि साल 2024 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में जनता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा.

सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने लिए ये 5 बड़े फैसले
01 – पेपरलीक मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन
02 – संगठित अपराधों के उन्मूलन के लिए एंटी गैंगस्टर टास्क फॉर्स का गठन
03 – उज्जवला योजना के तहत 1 जनवरी से 450 रुपये में गैस सिलेंडर
04 – आयुष्मान भारत योजना के तहत आमजन को 25 लाख रुपये तक के फ्री इलाज की सुविधा का ऐलान
05 – ईआरसीपी योजना को अमली जामा पहनाने की की शुरुआत

बहरहाल भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समय उठाए गए मुद्दों का सत्ता में आते ही समाधान कर यह साबित करने की कोशिश की है कि डबल इंजन की सरकार जनता के कामकाज को लेकर कितना चिंतित है. बीजेपी की कोशिश है कि जनता को गुड गर्वेन्स को फील करे ताकि उसके पक्ष में बना हुआ माहौल लोकसभा चुनाव तक यूं ही बना रहे. अब सबकी नजरें नए मंत्रिमंडल के चहेरों और उनके दिए जाने वाले पोर्टफोलियों पर टिकी है.

अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क का सरगना कौन? फ्रांस से वापस भेजे गए गुजरात के यात्रियों से CID ने की पूछताछ

0

निकारागुआ जाने वाले विमान में सवार गुजरात के कम से कम 20 यात्रियों से पुलिस ने राज्य से संचालित एक संदिग्ध अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क का पता लगाने के लिए पूछताछ की है. इस विमान को फ्रांस से वापस भेज दिया गया था. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही. निकारागुआ जाने वाले विमान एयरबस ए340 को मानव तस्करी के संदेह में चार दिनों के लिए फ्रांस में रोक दिया गया था. इस विमान में 276 यात्री सवार थे. यह विमान 26 दिसंबर को तड़के मुंबई में उतरा.

क्या अमेरिका में अवैध रूप से घुसने का था इरादा
राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, उन यात्रियों में गुजरात के कम से कम 60 लोग शामिल थे, जो पहले ही राज्य में अपने मूल स्थानों पर पहुंच चुके हैं. अधिकारी ने कहा कि विभाग यह पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ कर रहा है कि निकारागुआ पहुंचने के बाद क्या उनका अमेरिका में अवैध रूप से घुसने का कोई इरादा था.

एजेंट का पता लगाने की हो रही कोशिश
अपर पुलिस महानिदेशक, सीआईडी-अपराध और रेलवे, एस. पी. राजकुमार ने कहा, ‘‘उन्हें फ्रांस से वापस भेज दिया गया. ऐसी अफवाह थी कि निकारागुआ में उतरने के बाद उन्होंने अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की योजना बनाई थी. अपने बयानों में उन्होंने हमें बताया कि वे वहां पर्यटक के रूप में जा रहे थे. हम यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि उनकी यात्रा के पीछे कौन एजेंट थे.’’ उन्होंने बताया कि वापस आए 60 लोगों में से करीब 20 से एजेंसी पहले ही पूछताछ कर चुकी है.

PM मोदी ने 2 अमृत भारत और 6 वंदे भारत ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, अयोध्या में कर रहे सौगातों की बौछार

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्‍या में रोड शो करने के बाद अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां उन्होंने 6 वंदे भारत और 2 अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. थोड़ी देर पहले उनका विमान वाल्मीकि‍ एयरपोर्ट पर उतरा. इसके बाद उनका काफि‍ला अयोध्‍या धाम स्टेशन की ओर निकला. रास्‍ते में बैरिकेडिंग के दोनो ओर लोगों की भीड़ सुबह से पीएम मोदी का इंतजार कर रही थी. पीएम मोदी ने गाड़ी से उतरकर उनका अभिवादन किया. पीएम अयोध्या में रोड शो कर रहे हैं और वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे.

प्रधानमंत्री यहां महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उद्घाटन करेंगे. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री मोदी अपने इस दौरे में एयरपोर्ट, हाईवे, रेलवे स्टेशन व रेलवे लाइन दोहरीकरण के साथ कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात अयोध्या को देंगे. इसी के साथ 30 दिसंबर 2023 की तिथि अयोध्या के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो जाएगी और भगवान श्रीराम की नगरी में विकास के नया युग का शुभारंभ होगा.

RBI D-SIBs List: RBI ने कहा भरोसे का दूसरा नाम हैं ये बैंक…सबसे सेफ बैंकों की लिस्ट में इस बार कौन-कौन, 

0

हम में से बहुत से लोग अपने मेहनत की कमाई बैंकों में जमा करते हैं ताकि समय पर यह पैसा काम आएगा. कभी-कभी होता ऐसा है कि बैंक ही डूब जाता है. ऐसे में जमाकर्ता की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. ऐसे में कहा जाता है कि लोगों को अपना पैसा जमा करने से पहले देखना चाहिए कि सामने वाला बैंक सुरक्षित है या नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसी साल की शुरूआत में डोमेस्टिक सिस्‍टमिकली इम्‍पॉर्टेंट बैंक (Domestic Systemically Important Banks/D-SIBs) 2022 के नाम से एक सूची जारी की है यानी कि घरेलू सिस्टम के लिए अहम बैंक हैं. इस लिस्ट में देश के सबसे सुरक्षित बैंकों के नाम शामिल किए गए हैं.

आरबीआई द्वारा जारी सबसे सुरक्षित बैंकों की सूची में एक सरकारी और 2 प्राइवेट बैंकों के नाम शामिल हैं. इसमें पब्लिक सेक्टर का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का नाम है. इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर के 2 बैंक इस लिस्ट में शामिल हैं. इनमें एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) का नाम शामिल हैं.

1 अप्रैल 2025 से क्या बदल जाएगा?
अहम बदलाव ये हुआ है कि आईसीआईसीआई बैंक की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है लेकिन बाकी दोनों बैंक का लेवल बढ़ा है यानी और हाई बकेट में चले गए हैं. दरअसल, घरेलू सिस्टम के लिए अहम बैंकों को एडीशनल कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) मेंटेन करना होता है. आरबीआई के बयान के मुताबिक, एसबीआई को रिस्क-वेटेड एसेट्स के फीसदी के रूप में अतिरिक्त 0.80 फीसदी CET1 के रूप में रखना होगा. वहीं एचडीएफसी बैंक को अतिरिक्त 0.40 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक को अतिरिक्त 0.20 फीसदी मेंटेन करना होगा. हालांकि यह लेवल 1 अप्रैल 2025 से मेंटेन करना है. अभी स्टेट बैंक के लिए यह सरचार्ज 0.60 फीसदी और एचडीएफसी बैंक के लिए 0.20 फीसदी है.

क्या हैं D-SIBs 
ये ऐसे बैंक होते हैं जो सिस्टम के लिए इतने महत्वपूर्ण होते हैं कि जिनके डूबने पर पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को झटका लग सकता है और अस्थिरता आ सकती है. इस प्रकार के बैंकों इतने महत्वपूर्ण हैं कि इन्हें कुछ हुआ तो सरकार खुद इन्हें बचाने की कोशिश करेगी.

इस IPO में पैसा लगाने से पहले रहें अलर्ट….रतन टाटा ने किया अलग होने का फैसला

0

चाइल्ड केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी फर्स्टक्राई की पेरेंट कंपनी ब्रेनबीज सॉल्यूशंस लिमिटेड अपना आईपीओ (Firstcry IPO) लाने जा रही है. कंपनी ने आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज सेबी के पास दाखिल कर दिए हैं. आईपीओ में फ्रेश इश्यू और ऑफर फोर सेल (OFS) दोनों होंगे. ऑफर फोर सेल में कई बड़े शेयरधारक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी में हैं. इनमें से एक टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा भी हैं.

टाटा अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं. उन्होंने 2016 में 66 लाख रुपये लगाकर हिस्सेदारी खरीदी थी. उनके पास कंपनी के 77,900 शेयर यानी 0.02 प्रतिशत हिस्सेदारी है. उन्हें कंपनी के तरजीही शेयर आवंटित किए गए थे. आईपीओ के लिए दाखिल किए गए दस्तावेज में यह बात सामने आई है. दस्तावेजों के अनुसार, पुणे स्थित कंपनी के आईपीओ में 1,816 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 5.44 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) लाई जाएगी. आईपीओ के टोटल साइज और इश्यू प्राइस के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं हैं.

टाटा के अलावा भी बेच रहे शेयर
बिक्री पेशकश में शेयर बेचने वालों में महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) 28 लाख शेयर बेचेगी. यह उनकी कंपनी में 0.58 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर होगा. इन्वेस्टमेंट बैंक सॉफ्टबैंक भी 2.03 करोड़ शेयर बेचेगा. हाल ही में खबर आई थी कि सॉफ्टबैंक ने कंपनी में 630 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं. यह शेयर सचिन तेंदुलकर के परिवार, इंफोसिस के को-फाउंडर क्रिश गोपालकृष्णन, मान्यवर के रवि मोदी द्वारा खरीदे गए हैं. टीपीजी, न्यूक्वेस्ट एशिया, एसवीएफ फ्रॉग (केमैन) लिमिटेड, एप्रीकॉट इन्वेस्टमेंट्स, वैलेंट मॉरीशस, टीआईएमएफ, थिंक इंडिया अपॉर्चुनिटीज फंड, श्रोडर्स कैपिटल और पीआई अपॉर्चुनिटीज भी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी में हैं.

कंपनी की वित्तीय स्थिति
फर्स्टक्राई का शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 23 में इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 6 गुना बढ़कर 79 करोड़ से 486 करोड़ हो गया है. हालांकि, कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 135 फीसदी का उछाल देखने को मिला और यह 5,633 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस लिहाज से फर्स्टक्राई अब 5000 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट करने वाले स्टार्टअप्स में शामिल हो गई है.

PM मोदी का विजन हुआ साकार….राम नगरी अयोध्या का अब धार्मिक, सांस्कृतिक, और आधुनिक वर्ल्ड क्लास सिटी के तौर पर पहचान

0

अयोध्या से मॉडर्न अयोध्या अब बनकर तैयार है. देश-दुनिया के लोग इस धार्मिक शहर को केवल सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर नहीं बल्कि एक आधुनिक शहर के तौर पर देखने जा रहे है. 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता संभाली थी, तब से वे इस शहर को दुनिया के नक्से में एक अलग पहचान दिलाने के लिए एक विजन पर काम शुरू कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण था कि अयोध्या में आधुनिक विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का विकास हो, संपर्क में सुधार हो और शहर के समृद्ध इतिहास और विरासत के अनुरूप यहां नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हो.

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीएम मोदी इसे साकार करने में जुट गए. पीएम ने राम मंदिर ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर बनाने का जिम्मा सौंपा. वहीं, इस शहर को कैसे वर्ल्ड क्लास सिटी बनाया जाये, इसके लिए अपने कई मंत्रालय से रिपोर्ट मांगवाई और इस शहर के हर सुविधा को मॉडर्न बनाने में लग गए. पीएम ने अयोध्या के विकास को लेकर अपने मंत्रिमंडल के साथ समय-समय पर चर्चा और उसके डेवलपमेंट पर नजर बनाये रखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश सरकार और वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इसके विकास में लग जाने की हिदायत दी. पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियो से लगातार समीक्षा बैठके की. पीएम मोदी की ये मेहनत अब जमीन पर दिखाई देने लगी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 दिसंबर को अयोध्या जाने वाले हैं. पीएम मोदी का ये दौरा ऐतिहासिक होने जा रहा है. यहां पीएम अयोध्या के पुनर्विकसित अयोध्या रेलवे स्टेशन और एक नए हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे. पीएम नई अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे. पीएम मोदी अयोध्या से ही राज्य के लिए 15,700 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इनमें अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 11,100 करोड़ रुपये की परियोजनाएं और पूरे उत्तर प्रदेश में अन्य परियोजनाओं से संबंधित लगभग 4600 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं.

मॉडर्न अयोध्या की झलक:
महर्षि बाल्मीकि अंतराष्ट्रीय हवाईअड्डा अयोध्या धाम
पीएम मोदी इस आधुनिक हवाईअड्डा का उद्घाटन 30 दिसंबर को करने वाले है, अयोध्या के इस अत्याधुनिक हवाई अड्डे का पहला चरण 1,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है. हवाई अड्डे का टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर होगा , जो सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की सेवा करने के लिए तैयार रहेगा. टर्मिनल भवन का अगला हिस्सा अयोध्या के आगामी श्रीराम मंदिर की मंदिर वास्तुकला को दर्शाता है. टर्मिनल भवन के अंदरूनी हिस्सों को भगवान श्रीराम के जीवन को दर्शाते हुए स्थानीय कला, चित्रों और भित्ति चित्रों से सजाया गया है. अयोध्या हवाई अड्डे का टर्मिनल भवन विभिन्न सुविधाओं से लैस है जिनमें इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, एलईडी लाइटिंग, वर्षा जल संचयन, फव्वारे के साथ भूनिर्माण, जल उपचार संयंत्र, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं.

असम का उल्फा साथ शांति समझौता करने जा रही मोदी सरकार, जानें कैसे होगा उग्रवात का अंत

0

केंद्र सरकार शु्क्रवार को यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम के वार्ता समर्थक गुट के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेगी. केंद्र सरकार पिछले 1 साल से इस समझौते पर काम कर रही थी. यह कदम पूर्वोत्तर राज्य में स्थायी शांति लाने के उद्देश्य से उल्फा और केंद्र और असम सरकार के बीच आज यानी की शु्क्रवार को त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होगा.

1979 में उल्फा का हुआ था गठन
ULFA भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में एक्टिव एक प्रमुख आतंकवादी और उग्रवादी संगठन है. इसका गठन 1979 में 7 अप्रैल को परेश बरुआ ने अपने साथी अरबिंद राजखोवा, गोलाप बरुआ उर्फ अनुप चेतिया, समीरन गोगोई उर्फ प्रदीप गोगोई और भद्रेश्वर गोहेन के साथ मिलकर किया था. इस संगठन को बनाने के पीछे सशस्त्र संघर्ष के जरिए असम को एक स्वायत्त और संप्रभु राज्य बनाने का लक्ष्य था. उल्फा शुरू से ही विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है. साल 1990 में केंद्र सरकार ने इसपर प्रतिबंध लगाया और फिर सैन्य अभियान शुरू किया.

2008 में उल्फा ने एक साथ 13 ब्लास्ट किया था
साल 1991 में 31 दिसंबर को उल्फा कमांडर-इन-चीफ हीरक ज्योति महंल की मौत के बाद उल्फा के करीब 9 हजार सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था. 2008 में उल्फा के नेता अरबिंद राजखोवा को बांग्लादेश से गिरफ्तर कर लिया गया और फिर भारत को सौंप दिया था. इस दौरान जब राजखोवा ने शांति समझौते की बात की तो उल्फा दो हिस्सों में बंट गया. अब तक उल्फा ने कई बड़े वारदात को अंजाम दिया है. उल्फा के आतंक के चलते चाय व्यापारियों ने एक बार के लिए असम छोड़ दिया था.

लंबे समय से चल रहा था प्रयास
सूत्रों ने बताया कि शांति समझौते का माहौल बनाने और उसके लिए संगठन को राजी करने के लिए लंबे समय से प्रयास हो रहे थे. इधर, बीते एक हफ्ते से इसको लेकर दिल्‍ली में संगठन और सरकार के बीच बातचीत हो रही थी. राजखोवा गुट के दो लीडर अनूप चेतिया और शशधर चौधरी नई दिल्‍ली में सरकारी वार्ताकारों के संपर्क में थे. दोनों पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा हुई है. इंटेलीजेंस ब्यूरो के निदेशक तपन डेका और पूर्वोत्तर मामलों पर सरकार के सलाहकार एके मिश्रा ने सरकार की तरफ से संगठन के नेताओं से चर्चा की थी.

उल्फा और भारत सरकार के बीच आज हो रहे समझौते के प्रमुख बिंदु यह हैं
–असम के लोगों की सांस्कृतिक विरासत बरकरार रहेगी
–असम के लोगों के लिए और भी बेहतर रोजगार के साधन राज्य में मौजूद रहेंगे
–इनके काडरों को रोजगार के पर्याप्त अवसर सरकार मुहैया करवाएगी
–उल्फा के सदस्यों को जिन्होंने सशस्त्र आंदोलन का रास्ता छोड़ दिया है उन्हें मुख्य धारा में लाने का भारत सरकार हर संभव प्रयास करेगी

कोरोना से कोहराम …नए वेरिएंट JN.1 से डरने की जरूरत….देश में अब तक 150 से अधिक केस

0

इन्साकॉग के बृहस्पतिवार को अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 के उप-स्वरूप जेएन.1 के कुल 157 मामले मिले हैं, जिनमें केरल में सबसे अधिक 78 मामले सामने आए हैं, इसके बाद गुजरात में 34 मामले मिले हैं. कई राज्यों में पिछले कुछ हफ्तों में कोविड के मामलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है और नौ राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक वायरस के जेएन.1 उप-स्वरूप की उपस्थिति का पता लगा है.

भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक संघ (इन्सकॉग) के अनुसार इन राज्यों में केरल (78), गुजरात (34), गोवा (18), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) और दिल्ली (एक) हैं. इन्साकॉग के आंकड़े बताते हैं कि देश में दिसंबर में आए कोविड के 141 मामलों में जेएन.1 के होने का पता चला, वहीं नवंबर में 16 ऐसे मामले मिले थे.

कर्नाटक सरकार ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को निर्देश दिये कि कोविड मरीजों के संपर्क में आने वाले ऐसे मरीज, जिनमें लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनकी जांच और इसके कारण होने वाली मौतों का ऑडिट करने जैसे कदम उठाये जाएं. वहीं, ओडिशा के जनस्वास्थ्य निदेशक निरंजन मिश्रा ने बताया कि राज्य में कोविड-19 के तीन नये मरीज मिले हैं और जिसके बाद यहां कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर आठ हो गई हैय

कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवा आयुक्तालय ने परिपत्र जारी कर कहा, ‘कोविड-19 का शीघ्र पता लगाने और उनका उपचार शीघ्र शुरू करने के लिए परीक्षण सबसे मजबूत आधार है. एहतियात के तौर पर यह सलाह दी जाती है कि पहले जारी किए गए मानदंडों के साथ-साथ कोविड मरीजों के संपर्क में आये ऐसे लोग जिनमें लक्षण नजर आ रहे हैं, उनकी भी जांच की जाए.’