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चंद्रयान-3 को डिजाइन करने का दावा करने वाले मितुल त्रिवेदी गायब, घर पर लगा ताला, फोन भी बंद

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चंद्रयान-3 को डिजाइन करने का दावा करने वाले मितुल त्रिवेदी गायब, घर पर लगा ताला, फोन भी बंद

चार दिन पहले 23 अगस्त को चंद्रयान-3 के सफलतापूर्वक चांद पर उतरने के बाद खुद के इसरो से जुड़े होने और चंद्रयान-3 की डिजाइन तैयार करने में अहम भूमिका निभाने का दावा करने वाले सूरत निवासी मितुल त्रिवेदी अब गायब हैं।

कथित तौर पर त्रिवेदी के आवास पर ताला लगा हुआ है और उनका फोन भी बंद है, जिससे उनके दावों को लेकर शंका और बढ़ गई है।

चंद्रयान 3 का डिजाइन तैयार करने की बात कहने वाले त्रिवेदी अब जांच अधिकारियों से बचते नजर आ रहे हैं। सुर्खियां बटोरने वाले मितुल त्रिवेदी के दावों की जांच अब सूरत पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हालांकि त्रिवेदी के दावे से नुकसान कुछ नहीं है, वे उनके बढ़ा-चढ़ाकर बयान देने की प्रवृत्ति को उजागर करते हैं।

इससे पहले त्रिवेदी के बयानों की जांच पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हेतल पटेल को सौंपी गई थी। शहर के पुलिस आयुक्त के कार्यालय तक पहुंचने के बावजूद मितुल त्रिवेदी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ अपने कथित जुड़ाव को साबित करने वाला कोई भी दस्तावेज उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे थे।

मितुल त्रिवेदी ने सफल चंद्रयान-3 मिशन के बाद अपनी भागीदारी का दावा कर ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि लैंडर के उनके डिजाइन में पारंपरिक लैंडर के विपरीत, लैंडिंग पर धूल के बिखरने को रोकने वाली एक अनूठी विशेषता शामिल थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह 2011 से इसरो और 2013 से नासा से जुड़े हुए हैं। यहां तक कि उन्होंने नासा के 2024 चंद्र मानव मिशन और इसरो के आदित्य एल1 और गगनयान मिशन डिजाइन प्रोजेक्ट में भी भूमिका का दावा किया।

मितुल त्रिवेदी की प्रसिद्धि तब बढ़ी जब उनकी शिक्षक अर्जुन पटेल से बात करते एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गई। इससे पहले त्रिवेदी ने दक्षिण गुजरात में ओलपाड के पास समुद्र में द्वारिका नाम की स्वर्ण नगरी होने का दावा किया था। त्रिवेदी की कथित शैक्षणिक उपलब्धियों में भौतिकी में बीएससी और एमएससी और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में क्वांटम भौतिकी में अध्ययन और पीएचडी के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान और वेदांत शामिल हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सदस्यता और 45 प्राचीन भाषाओं को पढ़ने की क्षमता का भी दावा किया है।

बासमती के चावल के निर्यात पर लगी रोक जाने अब कितने चावल भी सकेंगे बाहर

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पिछले दो महीने से घरेलू बाजार में महंगाई एक बार फिर सिर उठाने लगी है. मई में सबसे निचले स्तर को छूने के बाद महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और जुलाई महीने में यह 7 फीसदी के पार पहुंच गई है.

इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार व्यापार पर नियंत्रण के लिए लगातार कई कदम उठा रही है. ताजा मामले में बासमती चावल के निर्यात पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है.सरकार ने अब 1,200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से कम कीमत वाले बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब निर्यातक इस दर पर महंगा बासमती चावल ही देश से बाहर भेज सकेंगे। इससे पहले भी सरकार चावल के निर्यात पर समय-समय पर कई तरह के प्रतिबंध लगाती रही है। ताजा अपडेट के बाद कई कैटेगरी के चावल के निर्यात पर रोक लगा दी गई है.

के कारण निर्णय लिया गया
सरकार का कहना है कि प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के अवैध निर्यात की आशंका व्यक्त की जा रही थी। उन आशंकाओं को दूर करने और अवैध निर्यात को रोकने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया गया है।

निर्यात पर यह प्रतिबंध अस्थायी है
वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को इस संबंध में एक बयान जारी किया. मंत्रालय ने बताया कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को 1,200 डॉलर प्रति टन से कम के अनुबंध पंजीकृत नहीं करने का निर्देश दिया गया है। बयान के मुताबिक, यह फैसला अस्थायी है. इस संबंध में आगे निर्णय लेने के लिए एपीडा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रतिबंध जारी रखने या हटाने का निर्णय लिया जाएगा.

इन किस्मों के निर्यात पर रोक
सरकार चावल की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार ने पिछले साल सितंबर में टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. पिछले महीने गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पिछले हफ्ते गैर-बासमती चावल पर 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगाया गया था. भारत ने अब गैर-बासमती चावल की सभी किस्मों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

चीनी के निर्यात पर अपडेट
पिछले हफ्ते ऐसी खबरें भी आईं कि सरकार चीनी के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाने जा रही है. हालांकि, सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में न तो कोई निर्णय लिया गया है और न ही इस संबंध में कोई विचार चल रहा है। सरकार ने कहा था कि चालू सीजन में गन्ने की फसल कैसी है, इसके आधार पर चीनी के निर्यात को लेकर फैसला लिया जाएगा.

दिन में स्लीपर को भी बना दिया जाए जनरल कोच, रेलवे ने दिए आदेश; क्या है प्लान

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दिन में स्लीपर को भी बना दिया जाए जनरल कोच, रेलवे ने दिए आदेश; क्या है प्लान
दिन में स्लीपर को भी बना दिया जाए जनरल कोच, रेलवे ने दिए आदेश; क्या है प्लान

ट्रेन में अकसर जनरल कोच में भारी भीड़ देखी जाती है। एक तरफ जहां स्लीपर और एसी कोच में लोग आराम से चढ़ जाते हैं तो वहीं अनरिजर्व्ड कोच में चढ़ने के लिए भी लोगों को कमर कसनी पड़ती है।

हालांकि अब रेल मंत्रालय ने जोनल अथॉरिटी से कहा है कि जनरल कोच से बोझ कम करने के लिए यात्रियों को स्लीपर कोच में भी जगह दी जाए। 21 अगस्त को रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया है कि जिन ट्रेनों के स्लीपर कोच में यात्री कम हों उन्हें जनरल कोच बना दिया जाए। खास तौर पर दिन के समय चलने वाली ट्रेनों में ऐसा करने का निर्देश दिया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जहां स्लीपर कोच में यात्रियों की संख्या कम होगी वहां कोच को जनरल कोच में बदलने की सिफारिश की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि रेलवे को अतिरिक्त रेवेन्यू भी मिले और थोड़ी दूर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिले। एक रेलवे अधिकारी ने कहा, जब तक ट्रेन नहीं छूटती तब तक जनरल क्लास के टिकट जारी किए जाते हैं। इसकी कोई सीमा भी नहीं है। ऐसे में जनरल कोच में काफी भीड़ हो जाती है।

उन्होंने कहा, हर कोच की अपनी क्षमता है। फर्स्ट एसी कोच में 18 से 24 बर्थ तक होती हैं। सेकंड एसी में 48 से 54, थर्ड एसी में 64 से 72, स्लीपर में 72 से 80 और जनरल कोच में 90 लोगों के सफर करने की सुविधा होती है। वहीं जनरल कोच में 180 से भी ज्यादा यात्री आम तौर पर सफर करते हैं। जनरल कोच में भीड़ बढ़ने की वजह यह भी है कि रेलवे ने ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए थ्री टायर एसी कोच की संख्या बढ़ा दी। जनरल कोच के मुकाबले इससे ज्यादा रेवेन्यू मिलता था।

कोरोना के बाद रेलवे ने जनसाधारण एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का संचालन ही बंद कर दिया। इनमें जनरल कोच हुआ करते थे। हालांकि रेलवे का कहना था कि इन ट्रेनों को वजह से नुकसान हो रहा है। बालासोर ट्रेन ऐक्सिडेंट के बाद रेलवे बोर्ड ने अनरिजर्व्ड कोच के पास भी पानी के पानी, नाश्ते की सुविधा उपलब्ध करवाने को कहा है। इसके अलावा रास्ते में भी पीने के पानी और सफाई को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि लोगों की यात्रा सुविधाजनक और सुखद बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बता दें कि कोरोना के समय में जनरल कोच में भी रिजर्वेशन की ही तरह टिकट दिए जाते थे। इन्हें सेकंड सीटिंग बना दिया गया था। सोशल डिस्टैंसिंग के नियमों का पालन करवाने के लिए जनरल कोच में सीमित टिकट दिए जारहे थे। हालांकि अब एक बार फिर जनरल टिकट असीमित बांटे जा रहे हैं जिससे भीड़ बढ़ी है।

सरकार और रेलवे दोनों को शर्म नहीं आ रहा है। आम जनता का पैसा लेकर ये लोग मलाई खाएंगे और जनता मरे या जीये इन लोगों को कोई मतलब नहीं। जो अधिकारी ये सुझाव दिया है कि स्लिपर को जनरल बना दिया जाए उन नसमझ अधिकारी को ये समझमें क्यों नहीं आया कि आम जनता बहुत मेहनत से पैसे कमाके ४ महिना पहले टिकट लेता है। अगर ज्यादा लोड परता है जनरल टिकट बंद करो या १,2 डब्बा और लगा दो।

MP-CG के लिए क्या है कांग्रेस का प्लान, चिंता बढ़ा रहे सर्वे, जल्द हो सकता है टिकटों का ऐलान

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MP-CG Assembly Elections: पांच राज्यों में अगले दो महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जो कांग्रेस के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। लेकिन चुनावी राज्यों से जो सर्वे आ रहे हैं वह कांग्रेस की चिंता जरूर बढ़ा रहे हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस जल्द ही सितंबर से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करनी शुरू कर देगी। सर्वे और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशियों को नामों का ऐलान होगा। क्योंकि कुछ सर्वे में प्रत्याशी विधायकों से नाराज नजर आ रहे हैं।

एमपी में जल्द होगा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमान पीसीसी चीफ कमलनाथ ने संभाल रखी है। ऐसे में कमलनाथ का सर्वे ही यहां आखिरी सर्वे माना जाएगा। वैसे भी कमलनाथ पहले ही कह चुके हैं कि जिन नेताओं को टिकट दिया जाना है उन्हें संकेत पहले ही दिए जा चुके हैं। हालांकि कांग्रेस के कुछ मौजूदा विधायकों के खिलाफ भी नाराजगी देखी जा रही है। ऐसे में कमलनाथ दूसरे विकल्पों पर भी तलाश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी मौजूदा विधायकों का भी सर्वे करा रही है और सर्वे का बाद ही टिकट वितरण करेगी।

हारी हुई सीटों पर फोकस

कमलनाथ सितंबर तक प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करवा सकते हैं। जहां सबसे ज्यादा फोकस कांग्रेस का हारी हुई सीटों पर है। बताया जा रहा है कि 66 सीटों पर कांग्रेस जहां पिछले कुछ चुनावों से लगातार हार रही है, वहां प्रत्याशियों के नामों का सबसे पहले ऐलान किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में भी नाराजगी

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में हैं। ऐसे में यहां भी कांग्रेस का पूरा फोकस बना हुआ है। हालांकि छत्तीसगढ़ में भी कई विधायक और मंत्री लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहे हैं। ऐसे में कई विधायकों के खिलाफ नाराजगी दिखी है। हालांकि छत्तीसगढ़ में ऐसी संख्या कम है।

माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस जल्द ही प्रत्याशियों को नामों का ऐलान करना शुरू कर दी है। जिन सीटों पर पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था, वहां प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करके उन्हें चुनाव के लिए पर्याप्त समय देने के प्लान पर काम किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ का मॉडल

खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे शानदार प्रदर्शन किया था। जबकि छत्तीसगढ़ मॉडल को ही आगे लेकर कांग्रेस बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस छत्तीसगढ़ को सबसे मजबूत स्थिति में रखना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी यहां भी सबसे ज्यादा फोकस कर रही है।

बता दें कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव होने हैं। ये पांचों राज्य ऐसे हैं जहां कांग्रेस की सरकारें रही हैं, जबकि दो राज्यों में अभी भी सत्ता है। ऐसे में कांग्रेस इन राज्यों के जरिए ही अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने की कोशिशों में जुटी है।

CG Vidhan Sabha Chunav 2023: 45 कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची तैयार! जानिए किन नामों पर पार्टी ने लगाई मुहर

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रायपुर: Congress Candidate Name Final List इस बार के चुनावों में छत्तीसगढ़ में दोनों ही बड़ी पार्टियां प्रत्याशियों का ऐलान समय से पहले कर रही हैं। बीजेपी ने इसकी शुरूआत कर दी है।तो कांग्रेस में प्रत्याशियों को लेकर जोर-शोर से मंथन चल रहा है। अगले कुछ दिनों में बीजेपी अपनी दूसरी लिस्ट और कांग्रेस पहली लिस्ट जारी कर देगी। इसके संकेत दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने दिए हैं।Congress Candidate Name Final List चुनावी बिसात पर उम्मीदवारों को उतारने का सिलसिला भाजपा ने शुरू किया। दूसरी लिस्ट में भी वो लीड लेने की तैयारी में है। बीजेपी एक हफ्ते में दूसरी लिस्ट जारी कर सकती है। इधर, कांग्रेस प्रत्याशियों के ऐलान में पीछे जरूर है, लेकिन तैयारी जोर-शोर से चल रही है। सितंबर के पहले हफ्ते में कांग्रेस लिस्ट जारी कर सकती है। 2 सितंबर को राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा है। 3 सितंबर को 3-3 नामों का पैनल बन जाएगा। 4 और 5 सितंबर को अजय माकन की मौजूदगी में छानबीन समिति नामों पर चर्चा करेगी।माना जा रहा है कि कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की 6 सितंबर बैठक के बाद प्रत्याशियों का ऐलान कर सकती है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 27 अगस्त को है, माना जा रहा है भाजपा 29 तक ऐलान कर सकती है। अरसे से ये बात चर्चा में है कि कांग्रेस एंटी इन्कमबैंसी से निपटने के लिए टिकटों में बड़ी कटौती करेगी। कुछ मंत्रियों ने अपनी सीट बदलने की गुजारिश की थी, लेकिन इनमें से एक को ही अनुमति मिली है। भाजपा ने पहले ही जारी 21 में से 16 नए प्रत्याशी देकर अपनी मंशा साफ कर दी है।कांग्रेस बस्तर के 12 विधायकों में से 3 के टिकट काट सकती है। कांग्रेस की पहली सूची में छत्तीसगढ़ के 45 और एमपी के 100 नामों का ऐलान हो सकता है। वहीं भाजपा 29 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में 23 और मध्यप्रदेश 70 प्रत्याशियों का ऐलान कर सकती है।

Tomato Price: ₹14 किलो हुआ टमाटर, कुछ ही दिनों में आ जाएगा 10 रुपये से नीचे

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टमाटर के भाव आसमान से गिर चुके हैं। उतार-चढ़ाव भरे सफर के बाद टमाटर की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है, जबकि किसान निराश हैं। कुछ ही हफ्ते पहले 180 रुपये से 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंची टमाटर की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है।

रविवार को मैसूरु एपीएमसी में टमाटर के भाव शनिवार के 20 रुपये से घटकर 14 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। बेंगलुरु में रविवार को खुदरा कीमत 30-35 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच थी।

गिरावट के पीछे नेपाल कनेक्शन

नेपाल से टमाटर के आयात के कारण उत्तरी राज्यों में कम मांग को मानते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि थोक बाजार में कीमतें 10 रुपये से 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हो सकती हैं। मैसूरु एपीएमसी के सचिव एमआर कुमारस्वामी ने कहा कि कीमतों में गिरावट के पीछे साधारण रसोई के सामान की अत्यधिक आपूर्ति है। उन्होंने कहा कि एपीएमसी में नियमित रूप से औसतन 40 क्विंटल टमाटर आते हैं।

शनिवार को 20 रुपये किलो था टमाटर

शनिवार को देश में सबसे सस्ता हावेरी 20 रुपये किलो के भाव से नीमच में बिका जबकि, कृष्णनगर के लोगों को अभी राहत नहीं मिली है। उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कृष्णनगर में टमाटर का रेट 168 रुपये प्रति किलो रहा। देश के अन्य हिस्सों की बात करें तो अधिकतर शहरों में टमाटर के रेट इस महीने के शुरुआत के मुकाबले 200 रुपये तक गिर चुके हैं।

:Tomato Price: कभी ₹2.50 किलो टमाटर बेचकर घाटा सहने वाला किसान आज एक महीने में ही बन गया करोड़पति

देश के कुल 169 शहरों में टमाटर के रेट 50 रुपये प्रति किलो से अधिक नहीं हैं। इनमें रांची, पन्ना, गया, रीवा, शामली जैसे शहर शामिल हैं। वहीं, करीब 70 शहरों में टमाटर के रेट 50 से 60 रुपये किलो के बीच हैं। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जामताड़ा, अकोला, होशंगाबाद, गोड्डा, गुमला आदि में टमाटर के भाव 50 से 60 रुपये के बीच हैं। करीब 90 शहरों 61 से 80 रुपये के बीचे थे।

2024 में साथ, लेकिन 2023 को लेकर ‘INDIA’ में दरार! राज्यों में केजरीवाल और अखिलेश ने पकड़ी अलग राह

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Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए बनाए गए गठबंधन INDIA में 26 विपक्षी दल शामिल हैं. गठबंधन में शामिल सभी दलों ने लोकसभा चुनाव में एकजुट रहने का प्रण लिया है.

हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में यह एकजुटता शायद देखने को न मिले क्योंकि क्षेत्रीय दल विधानसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं. आम आदमी पार्टी के बाद गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी ने भी मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

मध्य प्रदेश में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है. कांग्रेस और सपा दोनों ही INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी ने किसी गठबंधन के बिना अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में राज्य में सपा प्रमुख रामायण सिंह पटेल ने इस बात से इनकार किया है कि पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के मूड़ में है. उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान की तरफ से उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है.

यूपी की सीटों के बंटवारे को ध्यान में रखकर बनाई रणनीति
मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और समाजवादी पार्टी ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. यह घोषणा रणनीतिक तौर पर की गई है जिससे कि 2024 लोकसभा चुनाव में वह INDIA गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश की सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बना सके.

6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान
रविवार को अखिलेश यादव ने एमपी की दौहानी और चितरंगी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की. ये सीटें विंध्या क्षेत्र में आती हैं और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. विंध्या यूपी बॉर्डर से लगता है. दौहानी सीट पर विश्वनाथ सिंह गौड़ मरकम और चितरंगी पर श्रवण कुमार सिंह गौड़ सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. इससे पहले बुधवार को उत्तर प्रदेश बॉर्डर से ही लगे हुए बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल बेल्ट की मेहरांव, भंदर, निवारी और राजनगर के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई थी.

एमपी सपा प्रमुख बोले, गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए
रामायण सिंह पटेल ने बताया कि अखिलेश यादव की तरफ से अभी तक उन्हें कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का कोई आदेश नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि गठबंधन का फैसला पार्टी हाईकमान लेता है, लेकिन उन्हें गठबंधन की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. अखिलेश यादव ही इस पर फैसला लेंगे. रामायण सिंह पटेल ने कहा कि अखिलेश यादव ने राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कहा है. प्रदेश अध्यक्ष का यह भी कहना है कि INDIA गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए बनाया गया है, विधानसभा चुनाव में सपा अपनी मर्जी से चुनाव लड़ सकती है.

उत्तराखंड में भी उतारा अपना उम्मीदवार
वहीं, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में घोसी विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया और सपा उम्मीदवार का समर्थन करने का फैसला किया है. उत्तराखंड के बागेश्वर विधानसभा उपचुनाव में भी सपा ने अपना उम्मीदवार उतारा है, जबकि वहां बीजेपी और कांग्रेस का मुकाबला है.

अरविंद केजरीवार का एमपी और छ्त्तीसगढ़ दौरा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान पिछले दिनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई दौरे पर कर चुके हैं. 19 अगस्त को रायपुर दौरे के दौरान अरविंद केजरीवाल ने 10 गारंटी की घोषणा की और बीजेपी एवं कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा. उधर, मध्य प्रदेश की विंध्या और सतना पर आप का फोकस है. अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश के जनता से कई वादे किए और कहा कि सरकार बनी तो वह इन्हें जरूर पूरा करेंगे.

Nuh Braj Mandal Yatra: नूंह में ‘शोभा यात्रा’ से पहले गुरुग्राम में दहशत, झुग्गियां खाली नहीं करने पर आग लगाने की मिली धमकी

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Nuh Braj Mandal Yatra : हरियाणा के गुरुग्राम के पड़ोसी नूंह जिले में सोमवार को निकाली जाने वाली ‘शोभा यात्रा’ से पहले गुरुग्राम के सेक्टर-69 में झुग्गियों पर कुछ ‘चेतावनी वाले’ पोस्टर लगाए गए.

निवासियों को क्षेत्र खाली करने या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है. सेक्टर-69 स्थित झुग्गी बस्ती में लगभग 200 परिवार रहते हैं, जिनमें ज्यादातर पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिक हैं.

‘झोपड़ियों में आग लगाने की मिली चेतावनी’
एक निवासी दिनेश राय ने कहा शनिवार और रविवार की रात कुछ अज्ञात लोगों ने दो पोस्टर चिपकाए और हमें 28 अगस्त तक क्षेत्र खाली करने या गुस्से का सामना करने की धमकी दी. उन्होंने कहा, “पोस्टरों में निवासियों को 28 अगस्त तक झुग्गी खाली करने की चेतावनी दी गई है, अन्यथा उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी जाएगी, और वहां रहने वाले लोग अपने जीवन के लिए जिम्मेदार होंगे. पोस्टरों पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् के भी नाम हैं. झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों ने बताया कि 31 जुलाई को नूंह में हुई सांप्रदायिक झड़प से भड़की हिंसा के गुरुग्राम पहुंचने के बाद ज्यादातर झोपड़ियां खाली हो गईं और अब भी उनमें ताले लगे हुए हैं. हालांकि पुलिस ने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया, लेकिन झुग्गीवासियों में डर और दहशत बना हुआ है.

‘आरोपियों पर होगी सख्त कार्रवाई’
बादशाहपुर थाने के एसएचओ सतीश देशवाल ने कहा कि मामला हमारे संज्ञान में आया है और हमने लोगों की सुरक्षा के लिए पीसीआर वैन के साथ-साथ पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की है. हमने मौके से चेतावनी वाले पोस्टर बरामद किए हैं. मामले की जांच चल रही है. इस कृत्य के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और गिरफ्तार किया जाएगा.

नूंह में धारा 144 लागू
आपको बता दें कि हरियाणा के नूंह जिला प्रशासन ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी, जिससे एक स्थान पर चार या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है क्योंकि प्रशासन द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के बावजूद हिंदू संगठन 28 अगस्त को धार्मिक जुलूस निकालने पर अड़े हुए हैं. शोभा यात्रा के मद्देनजर जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं.

कैसे बना धारावी एशिया का सबसे बड़ा स्लम? कई बार हुए प्रयास, अब अडानी ग्रुप करेगा रिडेवलपमेंट

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मुंबई का स्लम एरिया धारावी को एक स्मार्ट सिटी में बदलने का काम भारतीय अरबपति गौतम अडानी ने उठाया है. यहां के 1 मिलियन लोगों का पुर्नवास एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा. हालांकि इससे पहले भी मुंबई के इस स्लम एरिया को डेवलप करने के कई प्रयास किए जा चुके हैं.

आइए जानते हैं 94 एकड़ (240 हेक्टेयर) स्लम एरिया के विकास को कितनी बार प्रयास किए गए है और अभी तक क्या-क्या बदल गया है.

1800 के दशक के अंत में धरावी का उदय हुआ था, जब कुम्हारों, चमड़े के कारीगरों, श्रमिकों और मजदूरों ने इस एरिया में छोटा मोटा व्यापार शुरू कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि झुग्गीवासियों ने इन जमीनों पर कब्जा कर लिया और झोपड़ियां बना ली और धीरे-धीरे ये एरिया बढ़ता चला गया.

1971-76 के समय महाराष्ट्र राज्य सरकार ने मुंबई के स्लम में रहने वाले लोगों की स्थिति को सुधारने के लिए एक कानून पास किया. इसके तहत आवास, इलेक्ट्रिकसिटी और टॉयलेट की व्यवस्था की गई.

2004-05 के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने धारावी के रिडेवलपमेंट के लिए अप्रूवल दिया और स्लम रिहैबिलिटेशन अथोरिटी को प्रोजेक्ट अप्वॉइंट किया.

2007-08 में महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक सर्वे किया गया, जिसके तहत यहां 47 हजार लीगल रेजिडेंट्स और 13 हजार कमर्शियल स्ट्रक्चर पाए गए. हालांकि इसके तहत उपरी मंजिल पर रहने वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया.

2016 तक महाराष्ट्र धारावी के डेवलपर्स को आकर्षित करने का प्रयास करती है, लेकिन ये प्लान भी काम नहीं आता है.

2018 के दौरान 20 फीसदी सरकारी और 80 फीसदी प्राइवेट तौर पर इसे डेलवलप करने के लिए टेंडर जारी किया जाता है, जिसके तहत दुबई का सेकलिंक कंसोर्टियम और भारत का अदानी समूह शामिल हुआ.

2019 में SecLink की 87.1 करोड़ डॉलर की बोली सबसे ज्यादा है. अडानी 54.8 करोड़ डॉलर की बोली के साथ दूसरे स्थान पर रहा. 2020 के तहत सेकलिंक ने महाराष्ट्र सरकार पर गलत तरीके से टेंडर जारी करने का आरोप लगाया और हाईकोर्ट में याचिका दायर की. राज्य ने इससे इनकार कर दिया.

2022 में फिर से टेंडर जारी किया जाता है और इस बार सेकलिंक शामिल नहीं होता है. डीएलएफ और अडानी ग्रुप ने बोली लगाई. अडानी ने इस बार 61.4 करोड़ डॉलर की बोली लगाई.

साल 2023 में अडानी ग्रुप को राज्य सरकार की ओर से इसे रिडेवलप करने का काम दे दिया गया. सेकलिंक ने इसे लेकर सरकार पर गलत तरीके से काम करने का आरोप लगाया.

INDIA Alliance Meeting: ’31 अगस्त को सामने आएगा I.N.D.I.A का लोगो’, संजय राउत ने गठबंधन की बैठक को लेकर दिया ये अपडेट

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Sanjay Raut On INDIA Logo: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बनाए गए विपक्ष के गठबंधन I.N.D.I.A की तीसरी बैठक महाराष्ट्र के मुंबई में होने वाली है. इस बैठक में ‘इंडिया’ के लोगो का अनावरण भी होना है.

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा है कि लोगो का अवारण 31 अगस्त की शाम को किया जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “विपक्षी गुट के इंडिया का लोगो भारत के नागरिकों के लिए बहुत प्रेरणादायक है. इसका अनावरण 31 अगस्त को शाम 7 बजे किया जाएगा जब सभी नेता मुंबई में गठबंधन की तीसरी संयुक्त बैठक के लिए पहुंचेंगे.”

शिवसेना (यूबीटी) करेगी मीटिंग की मेजबानी

विपक्षी दलों की मुंबई में होने वाली बैठक की मेजबानी शिवसेना (यूबीटी) करने वाली है. इससे पहले संजय राउत ने कहा था, “अगली बैठक की मेजबानी शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे करेंगे.” बैठक के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए उन्होंने कहा था, “इंडिया गठबंधन की अगली बैठक में लोगो का अनावरण होगा. इस लोगो में इंडिया की झलक देखने को मिलेगी.”

उन्होंने आगे कहा कि इस लोगो में वो सबकुछ है जो लोगों को एकजुट रखने के लिए जरूरी है. मीटिंग को लेकर सभी पार्टियों में उत्सुकता बनी हुई है. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया था कि पूर्वोत्तर राज्यों से कुछ पार्टियां इस गठबंधन में शामिल हो सकती हैं.

‘एनडीए के दल इंडिया में शामिल हो सकते हैं’

इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने ये भी दावा किया है कि बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए के कुछ दल इंडिया में शामिल हो सकते हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कांग्रेस नेता आलोक शर्मा ने कहा, “एनडीए की बैठक में शामिल होने वाले कुछ दल आने वाले दिनों में विपक्षी गुट में शामिल होंगे. मुंबई में होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की आगामी बैठक में कुछ बहुत महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से संबोधित एनडीए की बैठक में हिस्सा लेने वाले 38 दलों में से कुछ अभी और कुछ लोकसभा चुनाव से पहले ‘इंडिया’ में शामिल होंगे.”