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Hill Stations In North East India: नॉर्थ-ईस्ट के ये 10 हिल स्टेशन देंगे जन्नत का एहसास…

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Hill Stations In North East India: 

नार्थ- ईस्ट अपने आप में काफी खूबसूरत है. अगर आप घूमने जाते हैं, तो आपको तमाम जगहें एक्सप्लोर करने के लिए मिलती हैं. चलिए 10 हिल स्टेशन के बारे में बताते हैं.

नॉर्थ-ईस्ट इंडिया की पहाड़ियां हमेशा से बाकी टूरिस्ट जगहों से थोड़ी अलग रही हैं. यहां की यात्रा सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रास्ते, मौसम और लोकल लाइफ खुद एक अनुभव बन जाते हैं. गर्मियों में जब मैदानी इलाकों में तेज गर्मी पड़ती है, तब यहां की ठंडी हवा, धुंध और हरियाली लोगों को अपनी ओर खींचती है.

North East India Video 4K | Beautiful Places to visit in north east india |  Northeast Drone View

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शिलॉन्ग आज भी अपने पुराने हिल स्टेशन वाले अंदाज को काफी हद तक संभाले हुए है. पाइन के पेड़, हल्की बारिश और छोटेछोटे कैफे इस शहर को अलग पहचान देते हैं. यहां का मौसम गर्मियों में भी काफी सुहावना बना रहता है.

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गंगटोक बाकी हिल स्टेशनों से थोड़ा ज्यादा व्यवस्थित नजर आता है. साफ सड़कें, शांत माहौल और पहाड़ियों के बीच बसे मठ इस शहर को खास बनाते हैं. शाम होतेहोते धुंध पूरे शहर को ढक लेती है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है.

Amazing North East India (Timelapse) | Into the Clouds

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अरुणाचल प्रदेश का तवांग पहुंचने में वक्त जरूर लगता है, लेकिन यहां का सुकून सफर की सारी थकान भुला देता है. ऊंचे पहाड़, बदलता मौसम और दूरदूर तक फैली खामोशी इसे बेहद खास बना देती है. यहां का मठ भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.

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जीरो वैली उन जगहों में शामिल है जहां प्रकृति और लोकल संस्कृति साथसाथ चलती दिखाई देती है. चारों तरफ फैले धान के खेत और पाइन के जंगल इस जगह को बेहद शांत बनाते हैं. यहां की धीमी रफ्तार लोगों को शहरों की भागदौड़ से दूर ले जाती है.

Most Beautiful Village in Northeast India | Mechuka | Arunachal Pradesh

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चेरापूंजी को लोग अक्सर सिर्फ बारिश के लिए जानते हैं, लेकिन गर्मियों में यहां का नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है. बादलों से ढकी पहाड़ियां, जंगलों के बीच बने रूट ब्रिज और बदलता मौसम यहां की खूबसूरती को खास बना देता है.

Top 10 Hill Stations in North East India || Most Famous Hill Stations of  North East India

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असम का हफलॉन्ग ज्यादा चर्चित नहीं है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है. झीलों, हरियाली और शांत माहौल के बीच बसा यह छोटा सा हिल स्टेशन भीड़भाड़ से दूर सुकून भरा अनुभव देता है.

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पेलिंग उन लोगों के लिए बेहतर जगह मानी जाती है जो शांति के बीच पहाड़ों का असली नजारा देखना चाहते हैं. साफ मौसम में यहां से कंचनजंगा की चोटियां बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं. यहां का माहौल गंगटोक की तुलना में ज्यादा शांत महसूस होता है.

Most Beautiful Places in North East India

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कालिम्पोंग का माहौल दार्जिलिंग के मुकाबले थोड़ा शांत और कम भीड़भाड़ वाला है. पुराने चर्च, मठ और पहाड़ियों के बीच बसे बाजार इस शहर को अलग पहचान देते हैं. यहां का मौसम गर्मियों में काफी आरामदायक बना रहता है.

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मिजोरम की राजधानी आइजोल पहाड़ियों के बीच बसा बेहद खूबसूरत शहर है. यहां घर पहाड़ों की ढलानों पर बने दिखाई देते हैं और चारों तरफ फैली धुंध इस जगह को और आकर्षक बना देती है। यहां का शांत माहौल लोगों को काफी पसंद आता है.

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दार्जिलिंग आज भी पूर्वी भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में गिना जाता है. चाय बागान, टॉय ट्रेन और हिमालय के खूबसूरत नजारे इसे खास बनाते हैं. गर्मियों में यहां काफी भीड़ रहती है, लेकिन सुबह के समय यहां की वादियां अब भी सुकून का एहसास कराती हैं.

नितिन नबीन के नेतृत्व में बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेनियल नेताओं को मिल सकता है बड़ा रोल…

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नितिन नबीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में बड़े संगठनात्मक बदलाव की चर्चा तेज है. 2027 के चुनाव से पहले युवा और अनुभवी नेताओं के संतुलन पर फोकस बढ़ गया है.

नितिन नबीन के भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही पार्टी में बड़े पीढ़ीगत बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी. महज 45 साल की उम्र में उन्होंने नितिन गडकरी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोगी भी उन्हें “मिलेनियल नेता” और पार्टी का “बॉस” बता चुके हैं. माना जा रहा है कि नितिन नवीन की नई टीम अनुभवी नेताओं और उभरते युवा चेहरों का मिश्रण होगी, जिसका लक्ष्य भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडे को अगले चरण तक ले जाना है. अब चर्चा ये है कि बीजेपी में जल्द ही संगठन में बदलाव होंगे. अब देखना ये होगा कि बीजेपी की टीम मिलेनियल में कौन कौन शामिल होता है.

नितिन नवीन का राजनीतिक सफर खुद भाजपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है. बिहार सरकार में पीडब्ल्यूडी और शहरी विकास मंत्री रहने के बाद उनका संगठन में शीर्ष भूमिका तक पहुंचना इस बात का उदाहरण है कि भाजपा प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव को साथ लेकर चलना चाहती है. इससे पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह भी संगठन और सरकार के बीच अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र में संभावित कैबिनेट फेरबदल और नई राष्ट्रीय टीम का गठन 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है. पार्टी सात राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है.

मोदी सरकार 3.0 में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें 

मोदी सरकार 3.0 के दो साल पूरे होने से पहले केंद्र सरकार में बड़े कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकालों का हवाला देते हुए मानते हैं कि आने वाले महीनों में मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है. अटकलों के समर्थन दावे ये किया जा रहे हैं कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में नवंबर 2014 में पहली कैबिनेट विस्तार हुआ था, जबकि जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में बड़े फेरबदल किए गए थे. दूसरे कार्यकाल में जुलाई 2021 में बड़ा विस्तार और मई 2023 में मंत्रियों के विभागों में बदलाव हुआ था. ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी 3.0 के दो साल पूरे होने पर एक बार फिर मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन हो सकता है. 26 मई को केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होंगे, जबकि 9 जून को तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो जाएंगे. फिलहाल केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इससे नए चेहरों की एंट्री और कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की अटकलें बढ़ गई हैं. सूत्रों के मुताबिक 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष फोकस किया जा सकता है. भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल ही में एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में भी कहा था,“बीजेपी का कार्यकर्ता फुल टाइम पॉलिटिक्स करता है, हम 24X7 काम करते हैं,” जिसे पार्टी के कैडर आधारित ढांचे और लगातार चुनावी तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

संगठन में युवा नेतृत्व पर जोर

बीजेपी में 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक बदलावों की तैयारी तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश और बिहार में हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद कई नेताओं को दोबारा संगठन में लाने के संकेत मिले हैं. सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई नेताओं को नई संगठनात्मक टीम में जगह मिल सकती है. कई नेताओं को अगले साल होने वाले चुनाव के लिए राज्य प्रभारी का भी दायित्व मिल सकता है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम को लेकर चर्चाएं अंतिम चरण में बताई जा रही हैं. 20 जनवरी को अध्यक्ष पद संभालने के बाद से नितिन नवीन लगातार संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और अहम नियुक्तियों पर मंथन कर रहे हैं. माना जा रहा है कि नई टीम की घोषणा जल्द हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, नई टीम में में युवा नेताओं को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है. हालांकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है. राष्ट्रीय महासचिव स्तर पर भी कई नए चेहरों की एंट्री हो सकती है, ताकि अलग-अलग राज्यों के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा सके. इसके अलावा महिला नेताओं को भी नई टीम में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संगठन और भारत सरकार में संभावित फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि लंबे समय की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा हैं. पार्टी 2027 में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति को नए सिरे से आकार दे रही है.इसके साथ ही भाजपा के भीतर अगली पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार में होने वाले बदलाव आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक दिशा, चुनावी संदेश और नेतृत्व संरचना पर गहरा असर डाल सकते हैं.

बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति 2026 को मंजूरी, नई नीति में क्या है शामिल?

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सरकार का दावा है कि नई नीति से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा. राज्य ने साल 2030 तक लक्ष्य रखा है कि नए रजिस्टर होने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की होगी.

देशभर में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारें लगातार नई योजनाएं ला रही हैं. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए अब राज्य सरकारें लोगों को ईवी यानी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. इसी दिशा में बिहार सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है. नई ईवी पॉलिसी के तहत अब महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी. इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में भी भारी छूट मिलेगी.

बिहार सरकार ने बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति 2026 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया. सरकार का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है. इस योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर यानी ईवी कार खरीदने पर सीधे 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

नई नीति में क्या है शामिल?

नई नीति में केवल कार ही नहीं बल्कि अन्य इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को 12 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी. वहीं इलेक्ट्रिक मालवाहक थ्री-व्हीलर्स खरीदने पर सामान्य वर्ग को 50 हजार रुपये और एससी-एसटी वर्ग को 60 हजार रुपये तक की दी जाएगी.

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटर व्हीकल टैक्स में भी 50 प्रतिशत तक की छूट देने का फैसला किया है. यानी अगर कोई शख्स बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर रजिस्ट्रेशन कराता है, तो उसे टैक्स में बड़ी राहत मिलेगी.इसके अलावा पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर केंद्र सरकार की नीति के अनुसार अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा. इससे लोगों का झुकाव पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से हटकर ईवी की तरफ बढ़ सकता है.

क्या है सरकार का दावा?

सरकार का दावा है कि इस नई नीति से बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा. राज्य ने साल 2030 तक लक्ष्य रखा है कि नए रजिस्टर होने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की हो. अधिकारियों के मुताबिक, अगर यह टारगेट पूरा होता है तो हर साल लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकती है.इससे आम लोगों का परिवहन खर्च भी कम होगा और पॉल्यूशन में भी बड़ी कमी आएगी.

नई ईवी नीति के तहत राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाएगा. सरकार पब्लिक और निजी दोनों तरह के चार्जिंग स्टेशन लगाने को बढ़ावा देगी. शॉपिंग मॉल, होटल, पेट्रोल पंप और बड़े भवनों में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि लोगों को चार्जिंग की समस्या का सामना न करना पड़े.

Kolar Gold Fields: भारत में एक ऐसा खनन क्षेत्र है जहां से भारत के लगभग 95% सोने का उत्पादन किया गया था. आइए जानते हैं क्यों हुआ वह बंद.

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Kolar Gold Fields: भारत सरकार के सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15% करने के फैसले के बाद पूरे देश के बुलियन बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है. नई व्यवस्था के तहत अब इस टैक्स में 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस भी शामिल है. इस वजह से पूरे देश में सोने और चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. इसी बीच आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक खनन क्षेत्र के बारे में जहां से कभी भारत के लिए लगभग 95% सोने का उत्पादन किया जाता था. लेकिन अब यह वीरान और खामोश पड़ा है.

कोलार गोल्ड फील्ड्स को कभी भारत के स्वर्ण उद्योग की रीढ़ माना जाता था. ब्रिटिश युग के इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन कॉलोनी, क्लब, स्कूल और औद्योगिक विकास की वजह से इसे मशहूर तौर पर भारत का मिनी इंग्लैंड भी कहा जाता था.

इन खदानों के बंद होने की सबसे बड़ी वजह गहरी खुदाई की काफी ज्यादा ऑपरेशनल लागत थी. 120 से ज्यादा सालों की खुदाई के बाद खनन शाफ्ट 3 किलोमीटर से भी ज्यादा की गहराई तक पहुंच चुके थे. इस वजह से बिजली की खपत, पानी की निकासी, वेंटीलेशन सिस्टम और मजदूरी का खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया था.

वक्त के साथ खदानों के अंदर सोने का भंडार भी धीरे-धीरे कम होने लगा. सतह के करीब मौजूद सोने के समृद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले भंडार पहले ही खत्म हो चुके थे. वहीं ज्यादा गहराई में खुदाई करने पर सोने की काफी कम मात्रा मिल रही थी.

कोलार गोल्ड फील्ड्स के पतन की एक और बड़ी वजह आधुनिक तकनीक और नए निवेश की कमी थी. 1956 में खदानों के राष्ट्रीयकरण के बाद सरकारी स्वामित्व वाली भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड को कई दशकों तक पुरानी मशीन, खराब प्रबंधन और बढ़ते वित्तिय नुकसान से जूझना पड़ा.

पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से इस शहर की स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो गई. इतनी ज्यादा गहराई पर जमीन के नीचे से पानी का रिसाव एक गंभीर चुनौती बन गया था. इसी के साथ खनन के कचरे और अवशेषों से जुड़ने वाली धूल की वजह से स्थानीय निवासियों में सांस की बीमारी फैलने लगी थी.

हालांकि कोलार गोल्ड फील्ड्स काफी हद तक एक वीरान भूतिया शहर में बदल चुकी है. लेकिन इसके बावजूद भी इसके पुनरुद्धार को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. सरकारी एजेंसी और संसदीय समिति अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या आधुनिक खनन तकनीक का इस्तेमाल करके इस क्षेत्र में अभी भी मौजूद लगभग 33 मिलियन टन पुराने खनन अवशेषों से सोना निकाला जा सकता है.

केरल CM चुनने से पहले राहुल गांधी ने किससे मांगा इनपुट? हो गया खुलासा…

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कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2026 विधानसभा चुनाव में UDF की जीत का सबसे बड़ा चेहरा वीडी सतीशन को माना गया. उन्होंने पूरे चुनाव अभियान की कमान संभाली थी.

वीडी सतीशन को लेकर चल रहा लंबा सियासी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है. कांग्रेस आलाकमान ने 2026 विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद वीडी सतीशन के नाम पर मुख्यमंत्री पद के लिए मुहर लगा दी है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने कई दौर की चर्चा, संगठन से मिले फीडबैक और गठबंधन सहयोगियों की राय लेने के बाद यह फैसला किया. पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा था, जिसमें कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे. हालांकि आखिरकार संगठन और जनता के बीच सबसे मजबूत पकड़ रखने वाले चेहरे के तौर पर वीडी सतीशन आगे निकल गए.

सतीशन ने संभाली थी पूरे चुनाव अभियान की कमान

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2026 विधानसभा चुनाव में UDF की जीत का सबसे बड़ा चेहरा वीडी सतीशन को माना गया. उन्होंने पूरे चुनाव अभियान की कमान संभाली और लेफ्ट मोर्चे के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाते हुए कांग्रेस नीत गठबंधन को सत्ता तक पहुंचाया. चुनाव के दौरान उनकी जमीनी सक्रियता, जनसभाओं में भीड़ और संगठन पर पकड़ ने हाईकमान को प्रभावित किया.

मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया में गठबंधन सहयोगी Indian Union Muslim League की भूमिका भी बेहद अहम रही. IUML ने खुलकर वीडी सतीशन के समर्थन में अपनी राय रखी और उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की पैरवी की. माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने का दबाव भी बढ़ा.

वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर के सी वेणुगोपाल के समर्थन में भी एक बड़ा वर्ग सक्रिय था. सूत्रों के मुताबिक कई विधायक और संगठन के नेता वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए बेहतर विकल्प मान रहे थे. बावजूद इसके कांग्रेस आलाकमान ने जनता और संगठन से मिले फीडबैक को प्राथमिकता दी.

अंतिम फैसले से पहले मांगा गया था विस्तृत इनपुट

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने अंतिम फैसले से पहले पूरे प्रदेश से विस्तृत इनपुट मंगवाए थे, जिसमें वीडी सतीशन की लोकप्रियता सबसे ज्यादा सामने आई. इसी के बाद नेतृत्व ने उनके नाम पर अंतिम सहमति बनाई.

इसी बीच सूत्र यह भी बता रहे हैं कि राहुल गांधी ने नाराजगी की अटकलों के बीच आज सुबह वेणुगोपाल को अपने आवास पर बुलाया. इस बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं. बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने और भविष्य की रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा की.

बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य किया. फैसले पर राजनीति तेज…

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पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य किया. फैसले पर राजनीति तेज हो गई है. हुमायूं कबीर और BJP नेताओं ने इसका खुलकर समर्थन किया.

“वंदे मातरम” को बाबरी मस्जिद वाले हुमायूं कबीर का समर्थन, कहा किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. पश्चिम बंगाल में स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है. राज्य सरकार ने सोमवार, 18 मई से सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है. स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी छात्र सुबह की सभा में कक्षाएं शुरू होने से पहले राष्ट्रीय गीत गाएंगे और स्कूल प्रमुख इसकी सख्ती से पालन सुनिश्चित करेंगे.

आदेश में कहा गया है, “सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाए, ताकि राज्य के सभी स्कूलों में सभी छात्र इसे गाएं.” शिक्षा विभाग ने स्कूलों से इस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग रखने को भी कहा है, ताकि आदेश के पालन का प्रमाण मौजूद रहे.

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. एजेयूपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ भारत का नारा और मातृभूमि का राष्ट्रीय गीत है. इसमें समस्या क्या है? पहले भी स्कूलों, कॉलेजों और कई जगहों पर ‘वंदे मातरम्’ गूंजता था। मुख्यमंत्री ने जो कहा उसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.”

प्रार्थना सभा के लेकर स्कूलों में असमंजस

वहीं भाजपा विधायक लक्ष्मीकांत साहू ने कहा, “निश्चित रूप से ‘वंदे मातरम्’ होना चाहिए. इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसी धरती पर लिखा था. अगर बंगाल की धरती पर इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा, तो फिर कहां बनाया जाएगा? इससे पहले राज्य की पूर्व सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ को स्कूलों की प्रार्थना सभा में अनिवार्य किया था. स्कूल प्रशासन अब इस बात को लेकर असमंजस में है कि सुबह की सभा में ‘वंदे मातरम्’, ‘बांग्लार माटी’ और राष्ट्रगान—तीनों गीतों को शामिल किया जाए या नहीं. कई प्रधानाचार्यों का कहना है कि तीन-तीन गीत गवाने से समय अधिक लगेगा और इससे कक्षाएं देर से शुरू होंगी.

Punjab Kings vs Mumbai Indians: आज IPL 2026 में 58वां मैच पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेला जाएगा…

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Punjab Kings vs Mumbai Indians: आज IPL 2026 में 58वां मैच पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेला जाएगा. यह मैच धर्मशाला में खेला जाएगा, जो पंजाब के लिए प्लेऑफ की दृष्टि से बहुत अहम है.

आईपीएल 2026 में आज पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस का मैच धर्मशाला में खेला जाएगा. पंजाब लगातार 4 मुकाबले हार चुकी है और प्लेऑफ की दृष्टि से उसके लिए यह मैच बहुत महत्वपूर्ण है. दूसरी ओर मुंबई अपनी साख बचाने मैदान में उतरेगी.

पॉइंट्स टेबल में पंजाब किंग्स अभी चौथे स्थान पर है, जिसके 13 अंक हैं. वहीं मुंबई इंडियंस 6 अंकों के साथ टेबल में नौवें स्थान पर है. MI की टीम प्लेऑफ से बाहर हो चुकी है. पिच के हाल और आंकड़ों के आधार पर जान लीजिए आज के मैच में किसके जीतने के अधिक चांस हैं?

हेड टू हेड में कौन आगे?

पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस की आईपीएल में 35 बार टक्कर हुई है. इनमें 18 बार पंजाब की टीम जीती है, जबकि MI की टीम ने 17 मुकाबलों में बाजी मारी है. इन दोनों की पिछली तीनों भिड़ंत में पंजाब की टीम जीती है.

पिच रिपोर्ट

धर्मशाला के एचपीसीए स्टेडियम की पिच को बल्लेबाजी के लिए स्वर्ग माना जाता है. बल्लेबाजी करना आसान होता है, इसलिए अक्सर यहां हाई-स्कोरिंग मैच देखे जाने की संभावना होती है. यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का औसत स्कोर 189 रन है. अच्छा बाउंस और पेस होने के कारन गेंद बढ़िया ढंग से बल्ले पर आती है. यहां पर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का जीत प्रतिशत 60 है.

मैच प्रिडिक्शन

हालिया फॉर्म देखें तो पंजाब किंग्स लगातार 4 मैच हार चुकी है, वहीं मुंबई इंडियंस पिछले 5 में से चार मुकाबले हारी है. फॉर्म दोनों की खराब है, लेकिन घरेलू कंडीशंस के हिसाब से देखा जाए तो पंजाब का पलड़ा भारी रह सकता है. टॉस जीतना भी बहुत महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यहां चेज से ज्यादा स्कोर डिफेंड होते हैं.

पंजाब किंग्स की संभावित प्लेइंग इलेवन: प्रियांश आर्य, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शशांक सिंह, मार्कस स्टोइनिस, सूर्यांश शेडगे, मार्को जानसेन, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल

इम्पैक्ट प्लेयर: यश ठाकुर

मुंबई इंडियंस की संभावित प्लेइंग इलेवन: रायन रिकेल्टन (विकेटकीपर), नमन धीर, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, विल जैक्स, राज बावा, कॉर्बिन बॉश, शार्दुल ठाकुर, दीपक चाहर, एएम गजनफर, जसप्रीत बुमराह

इम्पैक्ट प्लेयर: रोहित शर्मा

पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला. दिल्ली में दो दिन हर हफ़्ते सरकारी दफ्तरों में वर्क फॉर होम रहेगा…

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दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बड़ी घोषणा की है. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने गुरुवार (14 मई) को ऐलान किया कि दिल्ली में दो दिन हर हफ़्ते सरकारी दफ्तरों में वर्क फॉर होम रहेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो अपील की है उसको देखते हुए इकोनॉमी स्थिरता बनाये रखने के लिए हमने एक प्लान तैयार किया है.

प्राइवेट दफ्तरों को भी वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी

सीएम ने कहा कि वर्क फ्रॉम होम का नियम हम कोशिश करेंगे कि निजी दफ्तरों में भी लागू हो. प्राइवेट सेक्टर को भी 2 दिन वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी दी गई है, जहां काम ऑनलाइन हो सकता है. लेबर विभाग इसकी निगरानी करेगा.

सरकारी अफ़सर और मंत्री के काफ़िले में कमी- सीएम

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी अफ़सर और मंत्री के काफ़िले में कमी की गई है. अधिकारियों को जो पेट्रोल दिया जाता था उसमें 20 फ़ीसदी की कटौती की गई है. जिन्हें 200 और 250 लीटर पेट्रोल डीजल प्रति माह दिया जाता था उसमे ये कटौती होगी. एक दिन हम नो व्हीकल डे मनायेंगे.

50 फीसदी मीटिंग वर्चुअल- सीएम

सीएम ने कहा कि जिन अधिकारियों को व्हीकल अलाउंस दिया जाता है, अगर वो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें 10 फीसदी का इंक्रीमेंट मिलेगा. बसों के रूट निर्धारित किए जाएंगे ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें. हमारी कोशिश होगी की 50 फीसदी मीटिंग वर्चुअल हो.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कोर्ट से भी अपील की है कि ज्यादातर सुनवाई को वर्चुअल करने की कोशिश करें. सोमवार को सभी लोग ज़्यादा से ज़्यादा मेट्रो का इस्तेमाल करें. अगले तीन महीने हम बड़े इवेंट नहीं करेंगे. दिल्ली के लिए हम विशेष ट्रेवल प्लान तैयार करेंगे ताकि पर्यटकों को कोई दिक्कत न हो.

NEET Paper Leak Case: अहमदाबाद में शिक्षा मंत्री का विरोध.पेपर लीक में कई गिरफ्तारी…

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गुरुवार को इस गुस्से का शिकार खुद देश का शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान उस वक्त बन गए, जब वे अहमदाबाद के दौरे पर गए. उनको लोगों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा.

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है. इसी बीच गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अहमदाबाद दौरे के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा. बताया जा रहा है कि पेपर लीक विवाद के बाद उनका यह दौरा काफी गोपनीय रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद विरोध की आशंका पहले से जताई जा रही थी. नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने प्रदर्शन की चेतावनी दी थी, जिसके चलते प्रशासन पहले से सतर्क हो गया.

अहमदाबाद में शिक्षा मंत्री का विरोध

जब मंत्री का काफिला वहां पहुंचा, तो कुछ कार्यकर्ताओं ने उसे रोकने की कोशिश की. हालांकि, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और स्थिति को नियंत्रित किया. इस बीच महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार को नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में राज्य के विभिन्न हिस्सों से दो लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें एक महिला ब्यूटीशियन भी शामिल है.

अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों पुणे में पकड़ी गई महिला और अहिल्यानगर में गिरफ्तार किए गए पुरुष को आगे की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया गया. यह कार्रवाई नासिक जिले में शुभम खैरनार (30) की गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुई, जिस पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के पेपर लीक में भूमिका होने का आरोप है.

पेपर लीक में कई गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार, पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके से मनीषा वाघमारे नाम की महिला को हिरासत में लिया गया, जो पेशे से ब्यूटीशियन हैं. पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बताया कि उनसे पूछताछ के बाद उन्हें सीबीआई को सौंप दिया गया है, हालांकि मामले में उनकी सटीक भूमिका का खुलासा नहीं किया गया है.

इसी तरह, अहिल्यानगर जिले के राहुरी निवासी 26 वर्षीय धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी हिरासत में लेकर सीबीआई को सौंपा गया है और उसकी भूमिका की जांच जारी है. इस बीच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने पेपर लीक के आरोपों के बाद तीन मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया है.

सुशासन तिहार 2026 प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में करेंगे कार्य : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

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– विधानसभा अध्यक्ष ग्राम मुड़पार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में हुए शामिल’
– विधानसभा अध्यक्ष ने 4 करोड़ 50 लाख 59 हजार रूपए के 115 विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण’
– ग्राम मुड़पार से खरखरा नदी तक 2 किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा की’

राजनांदगांव: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम मुड़पार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 4 करोड़ 50 लाख 59 हजार रूपए के 115 विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया।

उन्होंने ग्राम मुड़पार से खरखरा नदी तक 2 किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा की।  विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 1 मई से 10 मई 2026 तक चलने वाले सुशासन तिहार अंतर्गत गांव-गांव में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों में हेलीकॉप्टर से पहुंच कर ग्रामीणों का हालचाल पूछ रहे हैं। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ले रहे हैं और जनमानस की समस्याओं का समाधान कर रहे।

जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदन प्राप्त हो रहे है। जिसका एक माह में निराकरण कर आवेदक को सूचित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत प्रदेश में 18 लाख से अधिक नए आवास की स्वीकृति दी गई। जिसमें से 30 हजार 46 आवास निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। राजनांदगांव जिले में 10 हजार 304 आवास स्वीकृत किए गए।

जिसमें से 6447 आवास पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुंचकर समस्याओं का निराकरण कर रहे है। उन्होंने ग्रामीणों से शिविर में अपनी मांग एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने बताया कि मंडी बोर्ड से 12 करोड़ रूपए एवं राजस्व विभाग से 11 करोड़ रूपए से ज्यादा कार्य स्वीकृत हुए हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी विकास के कार्य निरंतर जारी रहेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में कार्य करेंगे और राजनांदगांव जिले को आगे बढ़ाएंगे। प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाएंगे।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने प्रशासकीय प्रतिवेदन का वाचन किया। उन्होंने बताया कि सुशासन तिहार अंतर्गत जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 10 क्लस्टर में जनसमस्या निवारण शिविर लगाएं जा रहे है। जहां शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है तथा जनमानस को अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 62 शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मांग के 5 हजार तथा शिकायत के 115 आवेदन प्राप्त हुए है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 29 हजार आवास बने हैं तथा राजनांदगांव जिला प्रदेश में अव्वल रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.5 अंतर्गत 7119 गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं तथा समूह की  42 हजार महिलाएं लखपति दीदी बनी.

शिविर में 4 करोड़ 50 लाख 59 हजार रूपए के 115 कार्यों का लोकार्पण किया। जिसमें मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास अंतर्गत 76 लाख 57 हजार रूपए के 16 कार्य, विधायक निधि अंतर्गत 91 लाख 60 हजार रूपए के 22 कार्य, जिला खनिज न्यास संस्थान अंतर्गत 38 लाख 65 हजार रूपए के 14 कार्य, हाट बाजार विकास कार्य अंतर्गत 29 लाख 68 हजार रूपए के 2 कार्य, प्रभारी मंत्री अंतर्गत 17 लाख रूपए के 3 कार्य, राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन अंतर्गत 10 लाख 72 हजार रूपए के 4 कार्य, स्कूल जतन योजना अंतर्गत 3 लाख 18 हजार रूपए के 3 कार्य, सांसद निधि अंतर्गत 5 लाख रूपए के 1 कार्य, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास प्राधिकरण अंतर्गत 82 लाख 36 हजार रूपए के 18 कार्य, एससीए-एलडब्ल्यूई अंतर्गत 21 लाख रूपए के 3 कार्य, जनपद पंचायत विकास निधि अंतर्गत 18 लाख 9 हजार रूपए के 15 कार्य, अधोसंरचना उपकर निधि अंतर्गत 47 लाख 80 रूपए के 8 कार्य, लोक शिक्षण मद अंतर्गत 1 लाख 94 हजार रूपए के 4 कार्य, धार्मिक न्यास अंतर्गत 5 लाख रूपए के 1 कार्य, 15वें वित्त अंतर्गत 2 लाख रूपए के 1 कार्य शामिल है।

इस दौरान आरबीसी 6-4 के तहत ग्राम सोमनी निवासी श्रीमती सरोज निषाद एवं श्री ईश्वरदास को आर्थिक सहायता हेतु 4-4 लाख रूपए का चेक प्रदान किया गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला अंडी में कक्षा 10वीं व 12वीं में प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित हुए। पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत 4 बच्चों को सुपोषण किट प्रदान किया गया। दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शाल-श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया गया। दिव्यांगजनों को ट्रायसायकल का वितरण किया गया। ग्राम धामनसरा स्वच्छता समिति को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू, अध्यक्ष जनपद पंचायत राजनांदगांव श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, श्री संतोष अग्रवाल, श्री सौरभ कोठारी, श्री रोहित चंद्राकर, श्री सुमीत उपाध्याय, श्री भावेश बैद, पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, डीएफओ श्री आयुष जैन, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, एसडीएम राजनांदगांव श्री गौतम पाटिल, सीईओ जनपद पंचायत राजनांदगांव श्री मनीष साहू सहित ग्राम पंचायतों के सरपंच, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।