Kolar Gold Fields: भारत सरकार के सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15% करने के फैसले के बाद पूरे देश के बुलियन बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है. नई व्यवस्था के तहत अब इस टैक्स में 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस भी शामिल है. इस वजह से पूरे देश में सोने और चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. इसी बीच आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक खनन क्षेत्र के बारे में जहां से कभी भारत के लिए लगभग 95% सोने का उत्पादन किया जाता था. लेकिन अब यह वीरान और खामोश पड़ा है.
कोलार गोल्ड फील्ड्स को कभी भारत के स्वर्ण उद्योग की रीढ़ माना जाता था. ब्रिटिश युग के इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन कॉलोनी, क्लब, स्कूल और औद्योगिक विकास की वजह से इसे मशहूर तौर पर भारत का मिनी इंग्लैंड भी कहा जाता था.
इन खदानों के बंद होने की सबसे बड़ी वजह गहरी खुदाई की काफी ज्यादा ऑपरेशनल लागत थी. 120 से ज्यादा सालों की खुदाई के बाद खनन शाफ्ट 3 किलोमीटर से भी ज्यादा की गहराई तक पहुंच चुके थे. इस वजह से बिजली की खपत, पानी की निकासी, वेंटीलेशन सिस्टम और मजदूरी का खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया था.
वक्त के साथ खदानों के अंदर सोने का भंडार भी धीरे-धीरे कम होने लगा. सतह के करीब मौजूद सोने के समृद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले भंडार पहले ही खत्म हो चुके थे. वहीं ज्यादा गहराई में खुदाई करने पर सोने की काफी कम मात्रा मिल रही थी.
कोलार गोल्ड फील्ड्स के पतन की एक और बड़ी वजह आधुनिक तकनीक और नए निवेश की कमी थी. 1956 में खदानों के राष्ट्रीयकरण के बाद सरकारी स्वामित्व वाली भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड को कई दशकों तक पुरानी मशीन, खराब प्रबंधन और बढ़ते वित्तिय नुकसान से जूझना पड़ा.
पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से इस शहर की स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो गई. इतनी ज्यादा गहराई पर जमीन के नीचे से पानी का रिसाव एक गंभीर चुनौती बन गया था. इसी के साथ खनन के कचरे और अवशेषों से जुड़ने वाली धूल की वजह से स्थानीय निवासियों में सांस की बीमारी फैलने लगी थी.
हालांकि कोलार गोल्ड फील्ड्स काफी हद तक एक वीरान भूतिया शहर में बदल चुकी है. लेकिन इसके बावजूद भी इसके पुनरुद्धार को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. सरकारी एजेंसी और संसदीय समिति अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या आधुनिक खनन तकनीक का इस्तेमाल करके इस क्षेत्र में अभी भी मौजूद लगभग 33 मिलियन टन पुराने खनन अवशेषों से सोना निकाला जा सकता है.



