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पार्टियों का दावा, यूपी में भी महाराष्ट्र की तरह विपक्षी दलों में होगा विभाजन

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महाराष्ट्र के घटनाक्रम से उत्साहित उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी विपक्षी दलों और उनके गठबंधनों में संभावित विभाजन की भविष्यवाणी कर रहे हैं। निषाद पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) जल्द ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बन जाएगा।

निषाद ने कहा कि एनडीए का विस्तार होने जा रहा है और बीजेपी नेता आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी के संपर्क में हैं, जो जल्द ही कोई फैसला लेंगे।

इससे पहले रविवार को लखनऊ में मौजूद केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी आरएलडी को लेकर ऐसा ही दावा किया था। चौधरी ने अटकलों का खंडन किया और कहा कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में रहेगी। चौधरी ने भाजपा के साथ किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया और कहा कि वह कर्नाटक में होने वाली विपक्षी दलों की अगली संयुक्त बैठक में भाग लेंगे।

भारत की अध्यक्षता में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन यानी एससीओ समिट की शुरुआत वर्चुअल

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भारत की अध्यक्षता में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन यानी एससीओ समिट की शुरुआत वर्चुअली हो चुकी है.

इस समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ समेत आठ देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए.

पीएम मोदी ने इन नेताओं की मौजूदगी में चरमपंथी गतिविधियों को लेकर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा, ”आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, किसी भी अभिव्यक्ति में हो, हमें इसके विरुद्ध मिलकर लड़ाई करनी होगी.”

पीएम मोदी बोले, ”कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को अपनी नीतियों के रूप में इस्तेमाल करते हैं. आतंकवादियों को पनाह देते हैं. एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना में कोई संकोच नहीं करना चाहिए.”

पहले माना जा रहा था कि भारत इस का आयोजन इन-पर्सन यानी आमने-सामने करेगा लेकिन मई महीने के आख़िरी हफ़्ते में इसे वर्चुअल करने की घोषणा की थी.

एससीओ में कुल आठ सदस्य हैं. इनमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान, कज़ाख़्स्तान और उज़्बेकिस्तान हैं.

भारत 2005 में पहली बार ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुआ था जिसके बाद 2017 में पूर्णकालिक सदस्य बना.

एससीओ को चीन के दबदबे वाला संगठन माना जाता है. ब्रिक्स को भी चीन के दबदबे वाला संगठन माना जाता है और भारत इसका भी सदस्य है.

कुछ विश्लेषक ब्रिक्स और एससीओ को अमेरिका विरोधी संगठन के रूप में भी देखते हैं.

ब्रिक्स में ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ़्रीका हैं. इसमें सऊदी अरब और ईरान भी शामिल होने वाले हैं.

भारत के पास दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश जी-20 की भी अध्यक्षता है और भारत इस बैठक की भी सितंबर में मेज़बानी करने वाला है.

भारत ने जब एससीओ समिट का आयोजन वर्चुअल कराने का फ़ैसला किया था तो कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए थे.

कइयों का मानना था कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने को लेकर अनिश्चितता थी इसलिए भारत ने इसे वर्चुअल रखने की घोषणा की थी.एससीओ और ब्रिक्स में शामिल देश

ब्रिक्स में ‘साहिब चीन, बीबी रूस, ग़ुलाम भारत?

भारत एक तरफ़ चीन के दबदबे वाले ब्रिक्स और एससीओ में है तो दूसरी तरफ़ अमेरिका के अगुवाई वाले क्वॉड में भी है.

क्वॉड में भारत के अलावा जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया है.

क्वॉड को चीन अपने ख़िलाफ़ मानता है और रूस भी कह चुका है कि क्वॉड में भारत को अमेरिका चीन विरोधी मोहरा बना रहा है.

भारत का ब्रिक्स और एससीओ में रहना अमेरिका को पसंद नहीं है और क्वॉड में रहना चीन के साथ रूस को पसंद नहीं है.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद शीत युद्ध के दौर में जब दुनिया अमेरिका और सोवियत यूनियन के नेतृत्व में दो खेमों में बँटी थी तब भारत ने गुटनिरपेक्ष रहना चुना था.

भारत ने ख़ुद को दोनों खेमों से तटस्थ रखा था. हालांकि, ऐसा माना जाता है कि भारत वैचारिक रूप से सोवियत यूनियन के क़रीब था और यह क़रीबी 1991 में रूस बनने के बाद भी रही.

भारत के क्वॉड और एससीओ में होने को कई लोग उसकी विदेश नीति में विरोधाभास के तौर पर भी देखते हैं.

चीन, रूस और भारत को साहेब, बीवी और ग़ुलाम कहते हैं.

स्वामी चीन को साहेब, रूस को बीवी और भारत को ग़ुलाम बताते हैं.

स्वामी कहते हैं कि चीन अपने हितों के लिए ‘बीवी’ का इस्तेमाल करता ही है और ‘ग़ुलाम’ के पास हाथ मलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है.

अब कई विशेषज्ञ इस बात को मान रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध ने रूस को चीन पर ज़्यादा निर्भर बना दिया है और भारत के लिए स्थिति ज़्यादा जटिल हो गई है.

ऐसे में भारत भी विकल्प तलाश रहा है कि वह रक्षा मामलों में रूस पर निर्भर ना रहे.

भारत की तीन ‘ना’ की नीति

पिछले हफ़्ते ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक समारोह में कहा था कि भारत किसी एक देश के साथ बंधा नहीं रह सकता है.

कोलकाता में श्यामा प्रसाद लेक्चर में उन्होंने कहा था कि भारत एक टाइम में कई देशों के साथ रहना पसंद करता है.

जयशंकर ने कहा था कि भारत का रूस से बहुत ही मज़बूत संबंध है और किसी भी देश को अमेरिका के साथ मज़बूत संबंध में आड़े नहीं आना चाहिए.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था, ”किसी एक देश के साथ बंधे रहना भारत के हित में नहीं है. हम पारंपरिक रूप से रूस के साथ रहे हैं लेकिन यह संबंध अमेरिका के साथ मज़बूत संबंध में बोझ नहीं बनना चाहिए.”

हालांकि, अमेरिका कोशिश कर रहा है कि भारत की रूस पर रक्षा मामलों में निर्भरता कम हो.

रूस की चीन से गहरी दोस्ती है और भारत से भी है.

लेकिन भारत की चीन से तनातनी ऐतिहासिक रूप से रही है लेकिन भारत ने कभी इस बात को लेकर उलाहना नहीं दी कि रूस का चीन से गहरा संबंध क्यों है.

ऐसे में भारत भी चाहता है कि अमेरिका से भारत की गहराती दोस्ती के मामले में रूस को असहज नहीं होना चाहिए.

चीन अपनी विदेश नीति को ‘तीन ना’ से पारिभाषित करता है. ये तीन ना हैं- (नो अलायंस) कोई गुट नहीं, (नो कॉन्फ्रंटेशन) कोई टकराव नहीं और (नो टार्गेटिंग थर्ड पार्टीज़) किसी तीसरे पक्ष पर निशाना नहीं.

ये तीन ना डेंग श्याओपिंग के ज़माने से ही हैं.

यूक्रेन संकट के दौरान भारत ने ख़ुद को गुटनिरपेक्ष नीति के तहत किसी खेमे में नहीं जाने दिया.

कई जानकार कहते हैं कि भारत नॉन अलाइनमेंट (गुट निरपेक्ष) के बदले अब मल्टी-अलाइनमेंट (बहुपक्ष) की नीति पर चल रहा है.

लेकिन ये बात भी कही जा रही है कि जो हर गुट में होता है, वह किसी भी गुट में नहीं होता है.

क्या है मल्टीअलाइनमेंट

मल्टीअलाइनमेंट टर्म का सबसे पहले इस्तेमाल 2012 में शशि थरूर ने किया था. तब शशि थरूर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे.

शशि थरूर ने कहा था, ”नॉन अलाइनमेंट यानी गुटनिरपेक्ष नीति अपना प्रभाव खो चुकी है. 21वीं सदी मल्टी-अलाइनमेंट की सदी है.

भारत समेत कोई भी देश दूसरे देशों से सहयोग के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है. हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहाँ अलग नहीं रहा जा सकता. भारत भी ज़्यादा वैश्विक हुआ है.”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस टर्म के लिए शशि थरूर को श्रेय भी दिया था. जयशंकर के श्रेय देने के बाद शशि थरूर ने उन्हें शुक्रिया कहा था.

रूस के आधिकारिक दस्तावेज़ भी अलायंस के ख़िलाफ़ दलील देते रहे हैं.

चीन के साथ भी अलायंस को लेकर स्पष्ट कहा गया है कि एक उदार व्यवस्था ज़्यादा ठीक है, किसी अलायंस के बरक्स.

यूक्रेन पर हमले में चीन ने रूस को अपने हितों के हिसाब से ही समर्थन किया है.

चीनी अधिकारी और वहाँ के मीडिया का कहना है कि अमेरिका और नेटो यूक्रेन को हथियार देकर आग से खेल रहे हैं.

द अटलांटिक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि यूक्रेन संकट में चीन रूस का इस्तेमाल कर रहा है.

रूस और चीन की दोस्ती पर द अटलांटिक ने रिपोर्ट में लिखा है, ”1960 के दशक में चीन और रूस ने पश्चिम को मात देने का मौक़ा हाथ से निकल जाने दिया था क्योंकि शीत युद्ध के दौरान दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन गए थे.

दुनिया के दो शक्तिशाली स्वेच्छाचारी शासन वाले देश अमेरिका के नेतृत्व वाली उदार व्यवस्था के ख़िलाफ़ साथ आ गए हैं.

लोकतांत्रिक देश यूक्रेन पर रूस का चीन के समर्थन से हमला उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर ख़तरा है.

ऐतिहासिक रूप से चीन और रूस का संबंध टकराव भरा रहा है. 1960 के दशक के आख़िर में शीत युद्ध के दौरान दोनों देशों में तनाव इतना बढ़ गया था कि परमाणु युद्ध के क़रीब पहुँच गए थे.”

द अटलांटिक ने लिखा है, ”हालांकि, दोनों देश पारस्परिक हितों को लेकर अब साथ आ गए हैं. आर्थिक रूप से दोनों के बीच बढ़ता व्यापार पारस्परिक फ़ायदे वाला है. चीनी को अपनी इंडस्ट्री की भूख मिटाने के लिए तेल, गैस, कोयला और अन्य कच्चे माल की ज़रूरत है, जिसकी पूर्ति रूस कर रहा है.

पुतिन और शी जिनपिंग को क़रीबी दोस्त के रूप में देखा जाता है. 2019 में शी जिनपिंग ने पुतिन को सबसे अच्छा दोस्त कहा था.

दोनों अमेरिका की वैश्विक हैसियत से चिढ़े रहते हैं. दोनों अपने वैश्विक मक़सद में अमेरिका को सबसे बड़ा अवरोध मानते हैं. यह डर बढ़ता जा रहा है कि पश्चिम का वर्चस्व एशिया और यूरोप में रहेगा या नहीं.”

इस बदलती विश्व व्यवस्था में भारत को लगता है कि क्वॉड के साथ एससीओ और ब्रिक्स में रहना उसके हित में है.

Baba Bageshwar Interview: भारत में छा रही सनातन की क्रांति, हिंदुत्व है हमारा विजन, बोले- पंडित धीरेंद्र शास्त्री

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Baba Bageshwar Interview: बाबा बागेश्वर धाम के पुजारी पंडित धीरेंद्र शास्त्री आजकल चारो तरफ छाए हुए हैं. वो हिंदुत्व जैसी बातों पर बेबाकी से अपनी बात रखते हैं. अपने जन्मदिन के अवसर पर मिडिया से बातचीत करते हुए पंडित शास्त्री ने कहा कि भारत पर में हिंदुत्व की क्रांति छा रही है.

सनातनी अब जग रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति में भटके युवावापस लौट आएं और संस्कार और संस्कृति के संरक्षण की बात करें और इसे जिएं यहीं हमारा लक्ष्य है.

भोपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समान नागरिकता कानून की आवश्यकता जाहिए किए जाने के बाद राजनीतिक पार्टियों से लेकर धार्मिक हस्तियों के विचार सामने आ रहे हैं. इस बाबत सवाल पूछे जाने को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने इसका समर्थन किया.

Uniform Civil Code : मुस्लिम कम्युनिटी में संपत्ति को लेकर क्या हैं मौजूदा नियम, UCC का क्यों हो रहा है विरोध?

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देश में जब से समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड की गूंज सुनी जा रही है, तब से सबसे ज्यादा विरोध मुस्लिम समुदाय के कथित ठेकेदार या जिम्मेदार, जो भी कहें, उनकी ओर से सामने आ रहा है.

कश्मीर में धारा 370 हटने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में बंटवारे के फैसले के बाद लोगों को यह लगने लगा है कि यूसीसी भी सरकार कभी भी लेकर आ सकती है. हाल ही में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूसीसी की चर्चा भर की तो एक बार फिर देश में तूफान मच गया.

इसी चर्चा और तूफान के बीच जानना जरूरी है कि आखिर शरीयत में मुस्लिम महिलाओं को संपत्ति में क्या और किस तरह के अधिकार दिए गए हैं. जैसे हिन्दू समुदाय में बेटियों को भी पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार है, वह लेती हैं या नहीं, उनका अपना विवेक है. पर, कानून हर बेटी को यह अधिकार देता है कि वह पिता की संपत्ति में हक से दावा कर सकती है.

ऐसी मान्यता है और समाज कहता भी है कि मुस्लिम कम्युनिटी में महिलाओं को बहुत सारे अधिकारों से वंचित रखा जाता है. इसकी सच्चाई जानने की कोशिश में टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल ने दारुल कज़ा फरंगी महल के मुफ्त्ती नसर उल्लाह से बात कर समझने की कोशिश की.

शरीयत में संपत्ति को लेकर क्या हैं नियम?

उन्होंने बताया कि मुफ्ती के रूप में किसी और धर्म की बात नहीं करूंगा लेकिन शरीयत के बारे में जानकारी देना पसंद करूंगा. यहां महिलाओं-बेटियों को संपत्ति में वही अधिकार दिए गए हैं, जो बाकी रिश्तों को हैं. शरीयत में सभी का हिस्सा तय है. कोई भेदभाव नहीं है. बिल्कुल स्पष्ट तरीके से चीजें शरीयत में दर्ज की गई हैं. उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि फर्ज करिए, किसी परिवार में एक बेटा-एक बेटी, इनके माता-पिता और दादा-दादी हैं. अब जरूरत पड़ने पर संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा?

अगर किसी की संतान नहीं है, तब सूरत क्या बनेगी? शौहर का निधन हो जाए और बच्चे भी न हों तब संपत्तिका क्या हिसाब-किताब बनेगा? शरीयत में सब कुछ दर्ज है. शरीयत कहता है कि संपत्ति का बंटवारा एक भाई और एक बहन के बीच होना है तो दो तिहाई हिस्सा भाई को मिलेगा और एक तिहाई हिस्सा बहन को देने की व्यवस्था है. इसी तरीके से अगर दो भाई में बंटवारा होगा तो बराबर-बराबर बंटेगा.

अगर किसी दम्पत्ति की संतान कोई संतान नहीं है और शौहर की मौत हो जाती है तब पत्नी को पूरी संपत्ति का 25 फीसदी मिलेगा. बाकी 75 फीसदी पति के भाई, बहन, पिता, माँ आदि को जाएगा. मान लीजिए कि किसी दम्पत्ति के बच्चे हैं और पति न रहे उस सूरत में आठवाँ हिस्सा सबसे पहले पत्नी को मिलेगा. छठवाँ हिस्सा पिता और इतना ही मां को मिलेगा, बाकी बच्चों को.

विवाद होने पर कहां जा सकते हैं?

पारिवारिक संपत्ति को लेकर होने वाले किसी भी विवाद में कोई भी पक्ष दारुल इफ्ता जाकर फतवा की अपील कर सकता है. मुफ्ती मामले को समझते हैं. सबको सुनते हैं. फिर फतवा देते हैं. फतवा देने का मतलब समाधान देना होता है. मुफ्ती नसर उल्लाह कहते हैं कि अगर मुफ्ती के फैसले से भी कोई असहमत हो जाए तो उसे सिविल कोर्ट जाने का अधिकार है. उनका दावा है कि जैसे ही अदालत मामले की सुनवाई शुरू करेगी तो फतवे के बारे में पूछेगी. फतवा पेश होगा.

आगे की सुनवाई अदालत अपने तरीके से देश में उपलब्ध नियम-कानून के दायरे में रहकर करेगी, लेकिन वह शरीयत को इग्नोर नहीं करती. मुफ्ती नसर उल्लाह कहते हैं कि शरीयत सब कुछ साफ है. अब किसी की नियत खराब हो. वह शरीयत की न मानें. बड़ों की न मानें. काजी-मुफ्ती की न माने तो हमारा देश है, संविधान है, उसे मानना ही होगा. पर, मुस्लिम समाज के लिए शरीयत एक मुकम्मल व्यवस्था है. पारदर्शी है. उसमें कहीं कोई कन्फ्यूजन नहीं है

SCO Summit 2023: PM मोदी की लीडरशिप में आज होगी SCO की शिखर बैठक, पुतिन- जिनपिंग समेत इन 12 देशों के नेता होंगे शामिल

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Summit of the SCO Council of Heads of State Today: आज का दिन भारत में वैश्विक कूटनीति के लिहाज से खास होने जा रहा है. आज शंघाई सहयोग संगठन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिखर सम्मेलन की बैठक होगी.

यह बैठक दोपहर 12:30 बजे शुरू होगी और 2 घंटे 45 मिनट तक चलेगी. भारत की अध्यक्षता में SCO की इस बैठक का आयोजन हो रहा है.

पीएम नरेंद्र मोदी का अध्यक्षीय भाषण

रिपोर्ट के मुताबिक इस शिखर बैठक (SCO Summit 2023) में पीएम नरेंद्र मोदी का अध्यक्षीय भाषण होगा. इस बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वर्चुअल तौर पर शामिल होंगे. चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय इसकी पुष्टि कर चुके हैं. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी.

इस देश को मिल सकती है नई मेंबरशिप

सूत्रों के मुताबिक गोवा में SCO के विदेश मंत्रियों की 4-5 मई को बैठक हुई थी. इस बैठक में जो फ़ैसले लिए गए थे, उन फ़ैसलों को मंज़ूरी के लिए शिखर सम्मेलन (SCO Summit 2023) में रखा जाएगा. इसके साथ ही संगठन के नए सदस्य के तौर पर ईरान को शामिल करने पर भी फैसला संभव है. फिलहाल भारत में SCO के 8 पूर्णकालिक सदस्य हैं. जिनमें भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं.

भारत ने बैठक के लिए रखी है ये थीम

भारत ने SCO के शिखर सम्मेलन की बैठक की थीम SECURE रखी है. इस SECURE का मतलब S- Security, E- Economic Development, C- Connectivity, U- Unity, R- Respect for sovereignty and territorial integrity और E- Environmental Protection है. इसके साथ ही पीएम मोदी ने वसुधैव कुटुम्बकम का मंत्र भी दिया है.

भारत दुनिया के सामने रखेगा अपना एजेंडा

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत-चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव और रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग के मध्य हो रही यह शिखर बैठक (SCO Summit 2023) बेहद अहम है. इस बैठक के जरिए भारत एक बार फिर अपना वैश्विक एजेंडा दुनिया के सामने रखेगा. वह कनेक्टिविटी और व्यापार बढ़ाने पर तो जोर देगा. लेकिन साथ ही दूसरे देशों की प्रभुसत्ता और एकता-अखंडता का सम्मान करने की मांग भी करेगा.

Weather Forecast Today: आज यूपी-बिहार में होगी झमाझम बारिश, ये इलाके भी बरसात में डूबेंगे; जानें अपने शहर का अपडेट

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Weather Update of 4 July 2023 :: देशभर में मानसून की झमाझम बारिश हो रही है. गुजरात में तो तेज बारिश की वजह से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है. पहाड़ी इलाकों में भी खूब बादल बरस रहे हैं, जिससे कई जगहों पर भूस्खलन होने के मामले भी सामने आ रहे हैं.

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है. ऐसा ही एक क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मध्य भागों पर बना हुआ है. चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र उत्तरी अरब सागर के ऊपर भी दिख रहा है.

पिछले 24 घंटों में ऐसा रहा मौसम

पिछले 24 घंटों की बात करें तो बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों और उत्तराखंड में हल्की बारिश (Weather Update Today) हुई.

तटीय कर्नाटक और केरल में भी मध्यम से भारी स्तर की बारिश हुई. पूर्वोत्तर भारत, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मराठवाड़ा, दक्षिण गुजरात, तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश हुई. लक्षद्वीप, कोंकण और गोवा, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व बिहार में हल्की से मध्यम स्तर की बरसात हुई.

इन राज्यों में आज बारिश

प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक आज पूर्वोत्तर भारत, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दक्षिण गुजरात, तटीय आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश (Weather Update Today) हो सकती है. केरल और तटीय कर्नाटक में आज भारी बारिश होने के आसार हैं.

यूपी-बिहार में ऐसा रहेगा मौसम

एजेंसी के अनुसार आज छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों और उत्तराखंड में हल्की बारिश (Weather Update Today) हो सकती है. इसके साथ ही सिक्किम, यूपी, बिहार, लक्षद्वीप, कोंकण और गोवा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर बिहार में हल्की से मध्यम स्तर की बरसात हो सकती है.

कांवड़ यात्रा आज से शुरू, कौन से रास्ते बंद और कौन से खुले घर से निकलने से पहले जान लें ट्रैफिक एडवाइजरी

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Kanwar Yatra Traffic Advisory:

कांवड़ यात्रा आज से शुरू हो रही है और 15 से 20 लाख कांवडियों के दिल्ली से गुजरने की उम्मीद है. कांवड़ा यात्रा का समापन 15 जुलाई को होगा. इसे देखते हुए दिल्ली यातायात व्यवस्था को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की है.

श्रद्धालुओं और सड़क उपयोगकर्ताओं को यातायात नियमों का पालन करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक श्रद्धालु कांवड़ इन रास्तों से होकर गुजरेंगे:-

-अप्सरा बॉर्डर- शाहदरा फ्लाईओवर- सीलमपुर टी प्वाइंट- आईएसबीटी फ्लाईओवर- बुलेवा रोड- रानी झांसी रोड- फैज रोड- अपर रिज रोड- धौला कुंआ- एन एच-8 और हरियाणा जाने के लिए रजोकरी की तरफ से प्रस्थान करेंगे.

-भोपुरा बॉर्डर- वजीराबाद रोड- लोनी फ्लाईओवर- गोकुलपुरी टी प्वाइंट- 66 फुटा रोड- सीलमपुर टी प्वाइंट- एन.एच 1 और आगे जाने के लिए नए आईएसबीटी ब्रिज की तरफ से प्रस्थान करेंगे.

-भोपुरा रोड- वजीराबाद रोड- वजीराबाद ब्रिज- बाहरी रिंग रोड- मथुरा रोड और हरियाणा की ओर जाने के लिए टिकरी बॉर्डर से प्रस्थान करेंगे.

-महाराजपुर बॉर्डर, रोड नंबर 56, गाजीपुर बॉर्डर- एन एच-24- रिंग रोड- मथुरा रोड और हरियाणा के लिए बदरपुर बॉर्डर से प्रस्थान करेंगे.

-कालिंदी कुंज- मथुरा रोड- बदरपुर बॉर्डर

-कालिंदी कुंज- मथुरा रोड- मोदी मिल- मां आनंद माई मार्ग- एमबी रोड

-न्यू रोहतक रोड(कमल टी प्वाइंट से टिकरी बॉर्डर तक)

-नजफगढ़ रोड(जखीरा से नजफगढ़ तक)

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक इन रास्तों पर भारी जाम देखने को मिलता है:-

-आमतौर पर रानी झांसी रोड पर बर्फखाना चौक से फायर स्टेशन बुलेवाई रोड और आजाद मार्केट चौक, गोकुलपुरी फ्लाईओवर, 66 फुटा रोड, मौजपुर चौक, बदरपुर टी प्वाइंट, मथुरा रोड पर भारी यातायात जाम देखने को मिल सकता है.

-एन.एच-8 पर धौला कुंआ मेट्रो स्टेशन से रजोकरी बॉर्डर तक यातायात में रुकावट हो सकती है.

Price Hike : दो महीने बाद फिर महंगी हुई LPG, जानिए अब आपके शहर में कितनी हो गई गैस सिलेंडर की कीमत

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LPG Price Hike: तेल कंपनियों ने एक बार फिर LPG सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि कर दी है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मंगलवार को अचानक कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि कर दी है।

अब कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए पहले के मुकाबले 7 रुपये प्रति सिलेंडर अधिक कीमत देनी पड़ेगी।

राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस बढ़ोत्तरी के बाद 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की दिल्ली खुदरा बिक्री कीमत 1,773 रुपये से बढ़कर 1,780 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई।

ताजा बढ़ोत्तरी के बाद महानगरों में दाम

तेल और विपणन कंपनियों द्वारा हाल ही में घोषित दर वृद्धि के कार्यान्वयन के बाद, दिल्ली में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें 1780 रुपये प्रति सिलेंडर होंगी। कोलकाता में एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 1902 रुपये, मुंबई में 1740 रुपये और चेन्नई में 1952 रुपये हो जाएगी।

पिछले महीने घटे थे गैस के दाम

पेट्रोलियम कंपनियों ने जून की शुरुआत में कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटा दिए थे। कंपनियों ने दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम में 83 रुपये की कमी की थी। दिल्ली में 1 मई को 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1856.50 रुपये थी जो 1 जून को घटकर 1773 हो गई है।

घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर

एक ओर जहां बीते कुछ महीनों से कमर्शियल एपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती और बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार पहली मार्च 2023 को 50 रुपये की बढ़ोत्तरी देखने को मिली थी। जहां राजधानी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG Cylinder) 1103 रुपये में मिल रहा है, तो कोलकाता में आप इसे 1129 रुपये में खरीद सकते हैं।

छत्तीसगढ़ : 500 रुपए में गैस सिलेंडर देने का होगा ऐलान? CM भूपेश बघेल ने कह दी बड़ी बात

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रायपुर दौरे से पहले सीएम भूपेश बघेल ने पीएम मोदी से मांग की है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ को जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि दे।

रायपुर में कार्गाे एयरपोर्ट की सुविधा और कोल रॉयल्टी की बकाया राशि दें। वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ₹500 में सिलेंडर देने का वादा कर सकती सवाल के जवाब में सीएम भूपेश बघेल ने कहा 2 राज्यों की कांग्रेस सरकार कम दाम में सिलेंडर दे रही है। कुछ घोषणाएं घोषणापत्र के लिए भी बचाना होगा। हालांकि कांग्रेस घोषणापत्र समिति इस पर निर्णय लेगी।

वही अमित शाह के दौरे पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा उनके सरकारी प्रोग्राम की जानकारी नहीं है। अमित शाह संगठन के कार्य से आ रहे होंगे। मतलब छत्तीसगढ़ में बीजेपी संगठन खत्म हो गया।

महाराष्ट्र की सियासत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि भाजपा की वाशिंग मशीन से धुलाई हो गई है।

अब डिप्टी सीएम और मंत्री बना दिया गया। वही केजरीवाल पर अरविंद सीएम भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा केजरीवाल को छत्तीसगढ़ के बारे में जानकारी नहीं। कृषि, अनुसूचित जाति जनजाति पर केजरीवाल कुछ नहीं बोले। केजरीवाल केवल राजनीति करते हैं।

US Independence Day: 4 जुलाई को अमेरिका की 247वीं स्वतंत्रता दिवस, जानें चौंकाने वाले तथ्य

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US Independence Day: संयुक्त राज्य अमेरिका 4 जुलाई को अपनी स्वतंत्रता की 247वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है. समारोहों में परेड, आतिशबाजी, आधिकारिक समारोह कार्यक्रम और नागरिकों द्वारा पिकनिक सभाएं शामिल होती हैं.

ऐतिहासिक दिन को चिह्नित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रगान “द स्टार-स्पैंगल्ड बैनर” गाया जाता है.

स्वतंत्रता के लिए दो दिन पहले हुआ था मतदान

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि स्वतंत्रता के लिए मतदान दो दिन पहले हुआ था. इसके बावजूद, 4 जुलाई को व्यापक रूप से अमेरिकी स्वतंत्रता के प्रतीकात्मक “जन्मदिन” के रूप में मान्यता प्राप्त है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्रता की घोषणा पर वास्तविक हस्ताक्षर चौथे दिन नहीं हुए थे. राष्ट्रीय अभिलेखागार के अनुसार, प्रतिनिधियों ने 2 अगस्त को स्वतंत्रता की अंतिम घोषणा पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया शुरू की.

4 जुलाई को देशभक्ति का जश्न मनाने की परंपरी

संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के बीच 1812 के युद्ध के बाद, 4 जुलाई को देशभक्ति का जश्न मनाने की परंपरा अधिक व्यापक हो गई. 1870 में, अमेरिकी कांग्रेस ने 4 जुलाई को संघीय अवकाश के रूप में स्थापित किया, और 1941 में, संघीय कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश देने के लिए इसका विस्तार किया गया.

खास तरीके से मनाया जाता है यह दिन

हालांकि समय के साथ छुट्टी का राजनीतिक महत्व कम हो गया है, फिर भी स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय महत्व बना हुआ है और यह देशभक्ति के प्रतीक के रूप में कार्य करता है. चूंकि यह गर्मियों के मध्य में आता है, जुलाई की चौथी तारीख 19वीं सदी के अंत से अवकाश गतिविधियों और पारिवारिक समारोहों के लिए एक प्रमुख अवसर बन गई है. उत्सवों में अक्सर आतिशबाजी का प्रदर्शन और बाहरी बारबेक्यू शामिल होते हैं. अमेरिकी ध्वज छुट्टियों का एक व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त प्रतीक है, और राष्ट्रगान, “द स्टार-स्पैंगल्ड बैनर” आमतौर पर समारोहों के दौरान बजाया जाता है.

4 जुलाई के पहले समारोह में क्या हुआ था?

जॉन एडम्स ने अपनी बेटी को लिखे एक पत्र में स्वतंत्रता की घोषणा को अपनाने की पहली वर्षगांठ पर फिलाडेल्फिया में होने वाले अचानक उत्सव का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाने का विचार दो दिन पहले तक नहीं सोचा गया था और तीसरे दिन तक इसके बारे में चर्चा नहीं की गई थी. हालांकि, अल्प सूचना के बावजूद, एडम्स फिलाडेल्फिया के चार जुलाई के उद्घाटन समारोह की उल्लेखनीय और शानदार प्रकृति से प्रभावित हुए.

संयुक्त राज्य अमेरिका में चौथी जुलाई का व्यापक उत्सव 1812 के युद्ध के बाद तक आम नहीं हुआ, जैसा कि कांग्रेस के पुस्तकालय ने कहा था. ऐसे समय की कल्पना करना कठिन है जब अमेरिकी इस तिथि को उत्सवों के साथ नहीं मनाते थे.