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सरकार ने जारी कर दिया इस एक्ट का नोटिफिकेशन, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगा ये कानून…

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सरकार ने VB–G RAM G एक्ट 2025 लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया, जो 1 जुलाई 2026 से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नया रूप देगा. ये लेबर मार्केट पर असर डालेगा.

केंद्र सरकार ने एक नया ग्रामीण रोजगार कानून VB–G RAM G एक्ट, 2025 को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है. यह कानून 1 जुलाई 2026 से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा. यह योजना असल में भारत की मौजूदा MGNREGA व्यवस्था का एक नया और अपग्रेडेड रूप माना जा रहा है. इसे विकसित भारत विजन के तहत तैयार किया गया है, जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की गारंटी को और मजबूत करना है.

इस नए कानून के लागू होने के बाद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोगों को एक तरह की गारंटीड सरकारी आय या काम का विकल्प मिलेगा, जिससे उनका झुकाव निजी सेक्टर या अस्थायी मजदूरी के बजाय सरकारी योजना की ओर बढ़ सकता है. इंडस्ट्री के नजरिए से देखा जाए तो इसका असर अलग-अलग सेक्टरों पर पड़ेगा. खासकर कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और उन क्षेत्रों पर जो ग्रामीण मजदूरों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, वहां लेबर की उपलब्धता कम हो सकती है. इससे कंपनियों की लागत और कंप्लायंस का दबाव बढ़ने की संभावना है.

ग्रामीण लोगों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद

ग्रामीण लोगों की आमदनी बढ़ने से उनकी खरीदने की क्षमता भी बढ़ सकती है. इसका सीधा फायदा FMCG कंपनियों, एग्रीकल्चर इनपुट सेक्टर और ग्रामीण बाजार पर फोकस करने वाले बिज़नेस को मिल सकता है. गांवों में खपत बढ़ने से इन सेक्टरों की मांग में सुधार देखने को मिल सकता है. यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका असर उद्योगों और लेबर मार्केट पर अलग-अलग तरीके से देखने को मिलेगा.

सीएम विजय के बयान पर किया पलटवार, कहा- उन्हें विरासत में राज्य का खाली खजाना मिला है..

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भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने तमिनलाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें विरासत में राज्य का खाली खजाना मिला है.

भारतीय जनता पार्टी ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम के नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का अप्रत्यक्ष तौर पर समर्थन किया है. बीजेपी प्रवक्ता ने राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा तमिनलाडु का कोषागार खाली होने के दावे के बाद स्टालिन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि तकनीकी तौर पर राज्य का खजाना कभी खाली नहीं हो सकता है.

भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि चुनावों से पहले CM विजय ने बहुत बड़े-बड़े वादे किए थे. उन्होंने सोना देने, शादियों के लिए आर्थिक मदद देने और दूसरी रियायतें देने की बात कही थी. ऐसा लगता है कि इन चुनावी वादों को पूरा करने के लिए उनके राज्य के बजट का आकार तीन गुना बड़ा करना पड़ेगा. इसलिए उन्हें कम से कम कुछ बहाने तो बनाने ही चाहिए.

शाहदेव ने कहा कि अब उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया है कि उन्हें खाली खजाना विरासत में मिला है, जिसकी वजह से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन तकनीकी तौर पर, खजाना कभी भी पूरी तरह से खाली नहीं हो सकता, क्योंकि आमदनी और खर्च एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. आमदनी आती रहती है और खर्च होता रहता है.

स्टालिन ने क्या कहा था?

बता दें स्टालिन ने पिछली सरकार द्वारा खजाने को खाली करने के मुख्यमंत्री विजय के आरोप के जवाब में रविवार को कहा कि तमिलनाडु का कर्ज ‘अनुमेय सीमा’ के भीतर ही है और वह अभी से धन की कमी का रोना ना रोएं. उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री चंद्रशेखर जोसेफ विजय के उस आरोप के कुछ घंटों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार ने राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लाद दिया है और खजाने को खाली कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘तमिलनाडु का ऋण स्तर अनुमेय सीमा के भीतर है. अभी से यह कहना शुरू न करें कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं.’’

PM मोदी की अपील पर भड़की स्टालिन की DMK…

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पीएम मोदी ने लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील की है. पीएम ने विदेश यात्रा टालने, सोना न खरीदने, मेक इन इंडिया उत्पाद खरीदने और किसानों को रासायनिक खाद कम करने को भी कहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से बड़ी अपील करते हुए कहा है कि वह सोना न खरीदे और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम वाले रूटीन पर वापस लौटे. इसके अलावा आने-जाने के लिए अपने व्हीकल की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करे. पीएम मोदी की इस अपील पर एमके स्टालिन की डीएमके भड़क गई. उसने कहा कि चुनाव से पहले तक वह खुद अपने जेट से पूरे देश का दौरा कर रहे थे.

डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के नागरिकों से ये मांगें क्यों कर रहे हैं. उन्होंने पूछा कि क्या पीएम को यह जानकारी है कि हालात और खराब होने वाले हैं. अन्नादुरई ने कहा कि चुनाव से पहले तक प्रधानमंत्री अपने जेट विमान से पूरे देश का दौरा कर रहे थे, उनके काफिले चल रहे थे.

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी के प्रवक्ता ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह इतनी बड़ी घटना है, जिससे भारतीयों के जन-जीवन पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है तो इस पर विपक्षी पार्टियों को विश्वास में क्यों नहीं लिया जा रहा है.

डीएमके नेता ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को इस देश को समझाना होगा कि वे ऐसी मांग क्यों कर रहे हैं. वे कहते हैं विदेश यात्राएं बंद करें, लेकिन 15 मई को वे खुद UAE, नीदरलैंड और स्वीडन जाने वाले हैं, आखिर किसलिए?’

पीएम मोदी ने लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लोग डीजल-पेट्रोल बचाने के लिए मेट्रो, कारपूल, ईवी अपनाएं. इसके अलावा कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी. पीएम ने विदेश यात्रा टालने, सोना न खरीदने, मेक इन इंडिया उत्पाद खरीदने और किसानों को रासायनिक खाद कम करने को भी कहा है. उनका कहना है कि खाद की एक बोरी तीन हजार की पड़ती है, जिसमें हम किसान को बढ़ी मात्रा में सब्सिडी देते हैं.

President Election: राष्ट्रपति चुनाव कितनी आसानी से जीतेगी बीजेपी? 5 राज्यों के चुनावी नतीजे राष्ट्रपति चुनाव पर…

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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत 5 राज्यों के चुनावी नतीजे राष्ट्रपति चुनाव पर गहरा असर डालेंगे. 2027 में देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा और इस बार NDA की राह में कोई रोड़ा नहीं अटकेगा.

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. खासकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत ने गहरा असर डाला है. यह कोई आम राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सीधे-सीधे चुनावी गणित का खेल है. बीजेपी के लोकसभा में 293 सांसद, राज्यसभा में 140 से ज्यादा सांसद और 21 राज्यों की विधानसभाओं में बहुमत, जीत की संभावना को लगभग अटल बना देते हैं. आइए जानते हैं कैसे?

निर्वाचक मंडल: राष्ट्रपति चुनाव की आत्मा

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति चुनाव का ‘गणित’ आखिर काम कैसे करता है. संविधान के अनुच्छेद 54 और 55 के तहत, राष्ट्रपति का चुनाव एक खास निर्वाचक मंडल (Electoral College) करता है. इस मंडल में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी निर्वाचित सांसद, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के सभी निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल के मनोनीत सांसद या विधायक इस चुनाव में वोट नहीं डाल सकते हैं.

अब मजेदार पेच यह है कि हर वोट की कीमत एक जैसी नहीं होती. संविधान के मुताबिक, सभी सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा) के वोटों का कुल मूल्य और सभी विधायकों के वोटों का कुल मूल्य लगभग बराबर होना चाहिए. इसी को संतुलित करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है. जहां एक सांसद के वोट का मूल्य तय होता है (2022 में यह 700 था और 2027 में भी लगभग इतना ही रहने की संभावना है).

हर राज्य के एक विधायक के वोट का मूल्य अलग-अलग होता है. यह मूल्य उस राज्य की 1971 की जनगणना के आधार पर तय जनसंख्या और विधानसभा सीटों की संख्या पर निर्भर करता है. इसीलिए, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के एक विधायक के वोट का मूल्य (2022 में 208) सिक्किम जैसे छोटे राज्य के एक विधायक के वोट के मूल्य (2022 में महज 7) से लगभग 30 गुना ज्यादा था.

लोकसभा का झटका और विधानसभाओं से ‘मरहम’

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था. पार्टी अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा (272) नहीं छू पाई और उसकी सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 रह गई. इस सीधे नुकसान ने निर्वाचक मंडल में बीजेपी के वोट बैंक में 44,100 वोटों की बड़ी सेंध लगा दी थी. विपक्ष को लगा कि शायद अब बीजेपी की राह आसान नहीं रहेगी. लेकिन, इसके बाद जो हुआ, वह बीजेपी के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं था.

लगातार हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और NDA ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने न सिर्फ लोकसभा के घाव पर मरहम लगाया, बल्कि राष्ट्रपति चुनाव की पूरी बिसात ही पलट दी. खासतौर पर, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में NDA के प्रदर्शन ने यह कारनामा कर दिखाया.

तीन राज्यों के ‘गणित’ ने बदली पूरी तस्वीर

राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा वोट वैल्यू वाली तीन विधानसभाएं महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार की ही हैं. इन तीनों राज्यों में NDA की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है:

  1. महाराष्ट्र: 2022 के राष्ट्रपति चुनाव के समय 288 सदस्यीय विधानसभा में NDA की ताकत लगभग 150 विधायकों की थी. आज यह आंकड़ा बढ़कर 237 तक पहुंच चुका है.
  2. बिहार: 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के विधायकों की संख्या पिछली बार के 125 से बढ़कर अब 202 हो गई है.
  3. पश्चिम बंगाल: यह तो सबसे बड़ा गेम-चेंजर रहा. बीजेपी ने 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की और राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई. पिछली बार उसके सिर्फ 77 विधायक थे.

कागज पर अब कैसे दिखता है जीत का गणित?

अब आते हैं असली गणित पर, जो बताता है कि जीत कितनी आसान है. 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचक मंडल का कुल वोट मूल्य 10,86,431 था. 2027 के चुनाव में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जुड़ने से यह कुल वोट वैल्यू थोड़ा बढ़ सकती है, लेकिन जीत के लिए 50% से अधिक वोटों का आंकड़ा हासिल करना होगा.

अब जरा NDA की मौजूदा ताकत पर नजर डालते हैं:

संसद में ताकत:

  • लोकसभा में अकेले बीजेपी के 240 सांसद हैं. TDP (16) और JDU (12) जैसे सहयोगियों के साथ  NDA के पास 293 सांसदों का समर्थन है.
  • राज्यसभा में बीजेपी की संख्या बढ़कर 113 हो गई है और पूरे  NDA के पास लगभग 140 से 148 सांसद हैं. यह अपने आप में बहुमत का आंकड़ा है.

विधानसभाओं में दबदबा:

  • देश के 28 राज्यों में से 21 राज्यों में अब  NDA की सरकार है, जिनमें से 15 राज्यों में अकेले बीजेपी की सरकार है.
  • इन 21 राज्यों के हजारों विधायक आज  NDA के साथ हैं.

राष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ उत्तर प्रदेश के विधायकों की कुल वोट वैल्यू ही 83,800 से ज्यादा है और राज्य में योगी आदित्यनाथ की सरकार मजबूती से काबिज है.

अगर  NDA के सभी सांसद और विधायक पार्टी लाइन पर वोट करते हैं, तो गठबंधन के पास जीत के लिए जरूरी 50% से अधिक वोट आराम से मौजूद हैं. लोकसभा में हुई भरपाई से कहीं ज्यादा विधानसभाओं में हुई बढ़त ने कर दी है.

तो क्या राह बिल्कुल आसान है?

हां, लेकिन मौजूदा आंकड़ों और नए राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी और  NDA की जीत की राह बेहद आसान नजर आती है. आज की तारीख में, NDA के पास निर्वाचक मंडल में इतनी ज्यादा संख्या बल है कि वह आसानी से अपनी पसंद के उम्मीदवार को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा सकता है. हालांकि, राजनीति में किसी भी चीज को पूरी तरह ‘तय’ मानना जल्दबाजी होगी. कभी-कभी क्रॉस वोटिंग, गठबंधन के भीतर असंतोष या कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर खेल बदल सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, आत्मविश्वास और राष्ट्र की ताकत को लेकर बड़ा संदेश…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं. सोमवार को उन्होंने गिर सोमनाथ में भव्य रोड शो किया और सोमनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक व पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया.

प्रधानमंत्री मोदी रविवार से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं. सोमवार को उन्होंने गिर सोमनाथ में भव्य रोड शो किया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उनका स्वागत किया. इसके बाद प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर पहुंचे और वहां कुंभाभिषेक तथा पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया.प्रधानमंत्री आज शाम वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन भी करेंगे. इसके साथ ही वे दोनों कार्यक्रमों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे.

भारत को कोई झुका नहीं सकता

गुजरात में सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, आत्मविश्वास और राष्ट्र की ताकत को लेकर बड़ा संदेश दिया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास में कई आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और उसके वैभव को मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो सके.

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती और न ही किसी दबाव में ला सकती है. उन्होंने 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पूरी दुनिया भारत के खिलाफ खड़ी हो गई थी. परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे और दुनिया की आंखें लाल हो गई थीं, लेकिन भारत पीछे नहीं हटा.

सरदार वल्लभभाई पटेल को किया याद

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के समय सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर देश को एकजुट किया और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प भी पूरा किया. उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार सोमनाथ आने का अवसर मिला है और कुछ समय पहले भी वे यहां आए थे.

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आक्रमणकारी सोमनाथ को सिर्फ एक भौतिक ढांचा मानते रहे, इसलिए बार-बार इसे तोड़ा गया. लेकिन हर बार सोमनाथ फिर खड़ा हो गया, क्योंकि तोड़ने वाले भारत की वैचारिक शक्ति को समझ नहीं सके. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति भौतिक शरीर को नश्वर मानती है, लेकिन उसके भीतर की आत्मा को अविनाशी मानती है. पीएम मोदी ने कहा कि शिव तो सर्वात्मा हैं और यही भारत की सनातन चेतना की सबसे बड़ी ताकत है.

कई बार सोमनाथ आने का मिला अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें कई बार सोमनाथ आने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय पहले भी वे सोमनाथ आए थे और इस पवित्र धाम से उनका विशेष जुड़ाव रहा है. प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं.

गुजरात में सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्वाभिमान, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र की ताकत को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि हमारे यहां स्वाभिमान जैसे विषय पर भी राजनीति होती है.

पोखरण परमाणु परीक्षण को किया याद

प्रधानमंत्री ने 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पूरी दुनिया भारत के खिलाफ खड़ी हो गई थी. परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए थे. उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया में तूफान जैसा माहौल बन गया था और कई देशों की आंखें लाल हो गई थीं, लेकिन भारत अपने फैसले पर मजबूती से कायम रहा.

सोमनाथ बारबार टूटकर भी खड़ा होता रहा

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आक्रमणकारी सोमनाथ को सिर्फ एक भौतिक ढांचा मानते रहे, इसलिए इसे बार-बार तोड़ा गया. लेकिन हर बार सोमनाथ फिर खड़ा हो गया. उन्होंने कहा कि तोड़ने वाले भारत की वैचारिक शक्ति को समझ नहीं सके. भारतीय संस्कृति भौतिक शरीर को नश्वर मानती है, लेकिन उसके भीतर की आत्मा को अविनाशी मानती है. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि शिव केवल देव नहीं, बल्कि सर्वात्मा हैं. उन्होंने कहा कि यही भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक शक्ति की सबसे बड़ी पहचान है.

राहुल गांधी के बयान पर देवेंद्र फडणवीस का पलटवार….

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pm नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतवासियों से अपील की है कि मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत की जनता सोने, पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और खाद की बचत करे और विदेश यात्रा से बचे. पीएम मोदी द्वारा हैदराबाद में जनता से की गई यह अपील के चलते अब राजनीतिक पारा हाई हो गया है. खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी के इस आग्रह का विरोध किया और कहा कि ये जनता के सुझाव नहीं बल्कि सरकार की नाकामी के सबूत हैं.

राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी की स्पीच का विरोध किए जाने पर अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक ‘रिजेक्टेड माल’ हैं.

राहुल गांधी को हम महत्वपूर्ण नहीं समझते

मीडिया से बात करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “देखिए, राहुल गांधी भारत की राजनीति के सबसे रिजेक्टेड माल हैं- ‘रिजेक्टेड बाय ऑल’. उन्हें हर राज्य की जनता ने अस्वीकार किया है. मुझे ऐसा लगता है कि ये लोगों द्वारा रिजेक्ट किया हुआ माल है, लोकतंत्र में जिसको लोग स्वीकार करते हैं वही महत्वपूर्ण होता है.”

पीएम मोदी के समर्थन में बात करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “राहुल गांधी जैसे रिजेक्टेड नेताओं को हम महत्व नहीं देते. देश पीएम मोदी के साथ खड़ा है, उनके पीछे खड़ा है. देश बार-बार पीएम मोदी को आशीर्वाद देता है.”

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पीएम मोदी की सोना-पेट्रोल कम करने की अपील का विरोध किया और इसे केंद्र सरकार की नीतियों की नाकामी बताया था. राहुल गांधी के पोस्ट में लिखा था कि पीएम मोदी ने जनता से त्याग करने को कहा है- सोना कम, विदेश यात्रा कम, पेट्रोल कम, खाद और खाद्य तेल कम… मेट्रो से चलो और घर से काम करो. ये उपदेश नहीं बल्कि ये नाकामी के सबूत हैं.

राहुल गांधी का कहना है कि बीजेपी नीत केंद्र सरकार ने 12 साल में देश को इस पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब जनता पर पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं. लोग क्या खरीदें क्या न खरीदें, कहां जाएं कहां न जाएं. हर चीज की जिम्मेदारी जनता पर ही डाल दी जाती है. नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि देश चलाना अब ‘कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम’ के बस की बात नहीं है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के इसी बयान पर भड़कते हुए उन्हें ‘रिजेक्टेड नेता’ बताया है.

पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के प्रमुख आसिम मुनीर की भारत को सीधी धमकी…

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पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के खिलाफ बयान दिया है. इससे पहले भारत ने पिछले साल पहलगाम हमले के बाद PoK में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी.

पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ बयान दिया है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत ने बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान पर कार्रवाई की थी. साथ ही उन्होंने भारत को चेतावनी देने की भी कोशिश की. यह कार्यक्रम रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित किया गया था. इसमें पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू और नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ भी मौजूद थे.

आसिम मुनीर ने कहा कि 6 और 7 मई की रात भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था और पाकिस्तान ने इसका जवाब पूरी ताकत से दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई हुई तो उसका असर बहुत बड़ा और दर्दनाक होगा. मुनीर ने यह भी कहा कि मारका-ए-हक सिर्फ दो देशों के बीच युद्ध नहीं था, बल्कि यह विचारधाराओं की लड़ाई थी. उन्होंने दावा किया कि इस लड़ाई में पाकिस्तान की जीत हुई. इसके साथ ही उन्होंने 2001 संसद हमला, 2008 मुंबई हमला, 2016 उरी हमला और 2019 पुलवामा हमले के बाद भारत की कार्रवाई को फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत झूठे आरोप लगाकर पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है.

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगीभारत

भारत पहले ही साफ कर चुका है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी. इसके जवाब में भारत ने 7 मई को पीओके में मौजूद 9 बड़े आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया था. भारतीय कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी. इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से भी हमले हुए, लेकिन भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों, एयरबेस और रडार साइटों को निशाना बनाया. 10 मई तक हालात ऐसे हो गए थे कि पाकिस्तान ने सीजफायर की अपील की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया था.

Gold Prices India: अगर 1 साल तक सोना न खरीदें भारत के लोग, क्या इससे सस्ता हो जाएगा गोल्ड?

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Gold Prices India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है. आइए जानते हैं क्या इससे सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिलेगी.

भारतीय घरों में सोने की हमेशा खास जगह रही है. भले ही वह गहनों के रूप में हो या फिर निवेश के रूप में. लेकिन भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में से भी एक है. भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 1 साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के दौरान प्रधानमंत्री की यह अपील आई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर भारतीय 1 साल तक सोना ना खरीदें तो क्या सोने की कीमतें गिर जाएंगी.

वैश्विक सोने की मांग में भारत का हिस्सा लगभग एक चौथाई है. अगर भारतीय उपभोक्ता अचानक सोना खरीदना बंद कर दें तो लंदन और न्यूयॉर्क जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग में भारी गिरावट देखी जा सकती है. इससे वैश्विक कीमतें नीचे गिर सकती हैं.

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भारत के अंदर खरीद कम होने से स्थानीय जौहरियों और व्यापारियों पर दबाव कम होने की संभावना है. मांग में कमी आने से घरेलू सोने की कीमतें मौजूदा स्तरों की तुलना में सस्ती हो सकती हैं.

Why India Is Moving Their Gold: A Warning To The West

भारत अपनी खपत का 90% से ज्यादा सोना आयात करता है. खरीद में भारी कमी से विदेशी मुद्रा भंडार में अरबों डॉलर की बचत हो सकती है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा.

क्योंकि सोने के आयात के लिए अमेरिकी डॉलर में बड़े भुगतान की जरूरत होती है इस वजह से आयात कम होने से डॉलर की मांग कम हो जाएगी. इससे भारतीय रुपया मजबूत हो सकता है. इसके बाद कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल जैसे दूसरे आयात भी सस्ते हो जाएंगे.

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सोने के आयात में गिरावट से देश का आयात बिल कम हो जाएगा. इसके बाद अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के दौरान भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट और वित्तीय स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

अगर लोग सोना खरीदने से बचते हैं तो घरेलू बचत की बड़ी रकम बैंक जमा, म्युचुअल फंड, शेयर बाजार और व्यवसाय की तरफ जा सकती है. इससे अर्थव्यवस्था के लिए लिक्विडिटी और विकास के अवसर मिल सकते हैं.

यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मायावती को सताई ब्राह्मणों की चिंता…

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने यूपी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बीजेपी पर निशाना साधा है.

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य सरकार की कैबिनेट के विस्तार के बाद भारतीय जनता पार्टी पर तीखा बयान दिया है. मंत्रिमंडल विस्तार को बीजेपी का आंतरिक मामला बताते हुए बसपा चीफ ने कहा है कि इसका लाभ आम जन को होना चाहिए.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर मायावती ने लिखा कि वैसे तो मंत्रिमण्डल का घटाना-बढ़ाना व विस्तार आदि सत्ताधारी पार्टी का आन्तरिक राजनीतिक चिन्तन का मामला ज़्यादा होता है और इसीलिये उत्तर प्रदेश मंत्रिमण्डल के कल हुये विस्तार के बारे में कुछ भी टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, किन्तु कुल मिलाकर इसका अच्छा प्रभाव आमजन के हित के साथ-साथ ख़ासकर सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं के जीवन की बेहतरी एवं महिला सुरक्षा-सम्मान आदि पर पड़ता हुआ दिखना भी ज़रूर चाहिये, वरना लोग इसको राजनीतिक जुगाड़ तथा सरकारी संसाधन पर बढ़ा हुआ बोझ ही मान लेंगे.

बीजेपी नेता पर हमले का किया जिक्र

उन्होंने लिखा कि  इतना ही नहीं बल्कि समाज के हर वर्गों में भी विशेषकर कमज़ोर तबक़ों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा व उन्हें न्याय मिलता हुआ महसूस होने पर सरकार व उनके सभी मंत्रियों के कार्यकलापों में परिलक्षित भी हो तो यह उचित होगा, जो कि सरकारों व उनके मंत्रियों की पहली संवैधानिक ज़िम्मेदारी बनती है. इसी क्रम में अभी हाल ही में राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक युवा नेता पर जानलेवा हमला होने से हर तरफ एकबार फिर से क़ानून-व्यवस्था के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गयी है कि यूपी में ब्राह्मण समाज यहाँ केवल उपेक्षित ही नहीं बल्कि काफी असुरक्षित भी है.

उन्होंने लिखा कि जो अति-चिन्तनीय, जबकि बी.एस.पी. की रही सभी सरकारों में समाज के हर वर्ग के जान, माल व मज़हब के साथ-साथ बेहतरीन क़ानून-व्यवस्था के तह्त ब्राहमण समाज सहित समाज के सभी वर्गों को ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त के अन्तर्गत न्याय और सुरक्षा दी गयी थी, जो कि सर्वविदित है.

Gold Industry Impact: ज्वेलरी बाजार में हड़कंप, पीएम मोदी की गोल्ड वाली अपील से सहमे व्यापारी…

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पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील से ज्वेलरी इंडस्ट्री चिंतित है, शादी सीजन में मांग घटने की आशंका जताई गई है और व्यापारी आर्थिक नुकसान की संभावना से परेशान हैं.

Jewellery Market प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील ने ज्वेलरी इंडस्ट्री में खासी खलबली मचा दी है. दिल्ली समेत पूरे देश के ज्वेलरी व्यापारी, सुनार और छोटे कारोबारी इस अपील से बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं.

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि अपील सामने आते ही सैकड़ों व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया और अपनी गहरी चिंता जताई है. गोयल ने कहा कि शादियों का पीक सीजन चल रहा है और इस समय प्रधानमंत्री की इस अपील से गहनों और ज्वेलरी की मांग में भारी गिरावट आने की आशंका है.

800 टन से घटकर 500 टन खपत का अनुमान

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है. CTI के अनुसार देश में हर साल औसतन 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. बृजेश गोयल का कहना है कि पीएम मोदी की इस अपील के बाद सोने की खपत 800 टन से घटकर 500 टन तक रह सकती है.

छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों पर छंटनी का खतरा

CTI चेयरमैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक साल तक सोने की बिक्री प्रभावित रही तो छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों को अपने कर्मचारियों को वेतन देने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में कई जगहों पर मजबूरन कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है. ज्वेलर्स का मानना है कि इस तरह के आह्वान से ग्राहकों के मन में डर का माहौल बन जाता है, जिसके चलते सोने की बिक्री खासकर शादियों के सीजन में काफी कम हो सकती है.

सोना संस्कृति का हिस्सा है

CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि सोना केवल एक धातु या निवेश का साधन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. शादियों में गहने लगभग अनिवार्य माने जाते हैं. इसलिए यह अपील ज्वेलरी इंडस्ट्री के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण समय पैदा कर रही है.

शेयर बाजार पर भी असर

CTI के अनुसार टाइटन, सेनको गोल्ड, कल्याण ज्वेलर्स जैसी प्रमुख लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी इस अपील का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. बृजेश गोयल ने आगे कहा कि यह अपील ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. इसलिए अब इंडस्ट्री को अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ेंगी.