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“सुशासन तिहार 2026″ ‘समस्या सुनते ही तुरंत समाधान, सांसद विजय बघेल की मौजूदगी में 106 आवेदनों का हुआ निराकरण”

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“जनसमस्या निवारण शिविर में 623 आवेदन प्राप्त हुए” शिविर में 106 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया” योजना के तहत हितग्राहियों को लाभ वितरित”

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन आज दुर्ग जिले के जनपद पंचायत पाटन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुघवा क के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में किया गया। जनसमस्या निवारण शिविर में 623 आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें से 106 आवेदनों का मौके पर ही निराकृत किया गया। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन दिए। इस शिविर में पचपेडी, खम्हरिया कु, कोपेडीह, औंधी, सांकरा, उफरा, नारधी, पाहंदा अ, झीट, बटंग, घुघवा ज, रूही, अमलीडीह, जमराव, जामगांव एम, मोतीपुर, महुदा, अमेरी एवं करगा सहित आसपास के ग्रामीणों ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों में आवेदन जमा किए।

106 आवेदनों का मौके पर निराकरण

शिविर में सांसद विजय बघेल ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों से प्राप्त आवेदनों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी आवेदनों का निराकरण समय-सीमा में किया जाए। सांसद विजय बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 जून तक सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। जनसमस्या निवारण शिविर के माध्यम से सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सुशासन तिहार के माध्यम से गांव स्तर पर शिविर आयोजित कर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिविरों से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर सभी विभागों की सेवाएं मिल रही है। ग्राम घुघवा क में पीएम सूर्य घर योजना के तहत 60 घरों को लाभ मिला है, जिससे ग्रामीणों के बिजली बिल में कमी आई है। उन्होंने अन्य ग्रामीणों से भी योजना का लाभ लेने की अपील की।

व्हील चेयर एवं श्रवण यंत्र प्रदान किया

शिविर में सांसद बघेल ने एक हितग्राही को व्हील चेयर एवं श्रवण यंत्र प्रदान किया। मनरेगा अंतर्गत 07 हितग्राहियों को 100 दिवस कार्य पूर्ण करने वाले श्रमिकों को प्रमाण पत्र, 04 हितग्राहियों को लर्निंग लाइसेंस, 04 हितग्राहियों को सुपोषण टोकरी तथा 03 हितग्राहियों को आभा आईडी कार्ड वितरित किए। 04 हितग्राहियों को पीएम आवास चॉबी, 10 हितग्राहियों को राशन कार्ड, 03 हितग्राहियों को जॉब कार्ड एवं 03 लखपति दीदीयों को प्रमाण पत्र, 25 हितग्राहियों को स्वामित्व योजना के तहत अधिकार पत्र, 35 स्वच्छताग्राहियों को सम्मान पत्र प्रदान किए गया।

प्रशासन के अधिकारी भी रहे मौजूद

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष क्रीर्ति नायक, जनपद सदस्य पाटन कुसुम लता, सरंपच शैलेन्द्री साहू एवं भूषण भारद्वाज, सरपंच गायत्री साहू, सभापति जनपद पंचायत पाटन प्रणव शर्मा, एसडीएम लवकेश ध्रुव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जागेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीजन उपस्थित थे।

CG: IPL मैच के लिए 1500 पुलिस जवानों की तैनाती; पहली बार सीट नंबर वाले टिकट और गेट पर स्कैनिंग व्यवस्था…

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राजधानी रायपुर में आईपीएल 2026 के दो मुकाबले खेले जाएंगे। जिसे लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। मैच को लेकर पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक और सुरक्षा संबंधी एडवायजरी जारी की है। मैच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चार हिस्सों में बांटा गया है, ताकि दर्शकों को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिल सके। आपको बता दें पहली बार सीट नंबर वाले टिकट जारी किए गए हैं। स्टेडियम के सभी गेटों पर टिकट की स्कैनिंग की जाएगी।

शाम 7:30 बजे से शुरू होंगे दोनों मैच

सीजन रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम मेंके दो मुकाबले खेले जाएंगे। दोनों मैच शाम 7:30 बजे से शुरू होंगे। पहला मैच 10 मई को रॉयल चैलेंजर बैंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच होगा। इसके बाद 13 मई को बैंगलुरु (RCB) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच मुकाबला खेला जाएगा।

1500 पुलिस और जवान रहेंगे तैनात

पुलिस के मुताबिक मैच के दौरान करीब 1500 पुलिस अधिकारी और जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। स्टेडियम परिसर, पार्किंग, प्रवेश द्वार और आसपास के क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।

इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अलग से पुलिस बल तैनात किया जाएगा। दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 14 प्वाइंट की एडवायजरी जारी की गई है।

स्टेडियम के अंदर न ले जाने वाले प्रतिबंधित सामान –

  1. शराब, बीड़ी-सिगरेट, गुटका तम्बाकु, माचिस, लाईटर्स, ज्वलनशील पदार्थ
  2. बॉटल, डिब्बे, टिफिन
  3. कुर्सी – स्टुल, छाता, रोलर, पटरिया, ब्लैड्स, स्कैट्स बोर्ड, वाद्य यंत्र ।
  4. अग्नियअस्त्र, फटाका, चाकु, कटार, तलवार, कैंची, काटने वाले तेज धारदार वस्तु, खतरनाक वस्तु
  5. खाद्य पदार्थ (बच्चों के खाद्य छोड़कर) कांच का कंटेनर
  6. हैण्ड बैग, सुटकेश, लेडिज बैग, कागज का पैकेट, पिछे का बैग
  7. भड़काउ / संकट पैदा करने वाले संकेत
  8. लैपटॉप, हैण्डीकेम कैमरा, लेजर लाईट / सूचनात्मक लाईट, फ्लैस लाईट
  9. परफ्युम, स्प्रे (सांस का स्प्रे छोड़कर), सिरिंज
  10. पेन / पेंसिल, फुग्गे, खेलने वाले गेन्द
  11. लकड़ी की लाठी / हॉकी / स्टीक / झण्डा
  12. लाउड हैलर/सिटी/हार्न/रेडियो
  13. प्रचार उत्पाद सामाग्री, सभी प्रकार का सिक्का
  14. जानवर

छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग तीनों राज्यों के बीच आवागमन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी-तपकरा-लवाकेरा मार्ग पर नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। क्षेत्रवासियों का मानना है कि नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ट्रक से भारी मात्रा में डोडा और अफीम बरामद की एक तस्कर गिरफ्तार कर पूछताछ जारी…

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ट्रक से भारी मात्रा में मिली ये चीज, देखकर फटी रह गई पुलिस की आंखें, पाकिस्तान बॉर्डर से सीधे रायपुर में थी खपाने की तैयारी!

खेप पाकिस्तान बॉर्डर के करीब वाले इलाके से लाई गई थी’

छत्तीसगढ़ पुलिस लगातार ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगाने के लिए अभियान चला रही है। अलग-अलग जिलों में लगातार कार्रवाई भी की जा रही है, इसके बाद भी नशे का कारोबार थम नहीं रहा है। इसी बीच एक बार फिर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है, पुलिस ने ट्रक से भारी मात्रा में डोडा और अफीम बरामद की है।

मिली जानकारी के अनुसार, ये कार्रवाई आमानाका थाना पुलिस ने की है। बताया जा रहा है कि पंजाब नंबर प्लेट का ट्रक था। जिसमें भारी मात्रा में डोडा और अफीम रखा हुआ था। इसी दौरान पुलिस ने ट्रक को रोककर जांच की। तलाशी के दौरान ट्रक से 4 किलो 432 ग्राम डोडा और 79 ग्राम अफीम बरामद हुई। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक तस्कर को भी गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि यह खेप पाकिस्तान बॉर्डर के करीब वाले इलाके से रायपुर लाई गई थी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर ली है और पूछताछ कर रही है कि ड्रग्स की सप्लाई कहां से की जा रही थी और इसे रायपुर में किसे पहुंचाया जाना था।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में गरज-चमक, तेज हवा, आकाशीय बिजली और बारिश को लेकर मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी…

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छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। भीषण गर्मी के बीच प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में गरज-चमक, तेज हवा, आकाशीय बिजली और बारिश को लेकर मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट लेने के संकेत दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में तेज धूप और उमस के बीच कहीं-कहीं बारिश और आंधी का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने अब प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में गरज-चमक, तेज हवा, आकाशीय बिजली और बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले पांच दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि इस दौरान तापमान में धीरे-धीरे 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना भी जताई गई है।

कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

मौसम विभाग ने सुबह 10 बजे तक प्रदेश के कई जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, राजनांदगांव, गरियाबंद, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, जशपुर, पेंड्रा, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

गर्मी से मिली राहत, लेकिन तापमान फिर बढ़ेगा

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। केवल राजनांदगांव में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बारिश और बादलों की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन से पांच दिनों में तापमान में क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है।

इन इलाकों में हुई बारिश

गुरुवार को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। चरमा में 3 सेंटीमीटर और गरियाबंद में 1 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। बारिश के साथ कई इलाकों में तेज हवा और गरज-चमक भी देखने को मिली।

एक्टिव सिस्टम से बदला मौसम

मौसम वैज्ञानिक एच.पी. चंद्रा के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मौसम के अचानक बदलने के पीछे कई सक्रिय मौसमी सिस्टम जिम्मेदार हैं। दक्षिण मध्य प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जबकि अंदरूनी ओडिशा और उससे लगे छत्तीसगढ़ क्षेत्र में भी एक अन्य चक्रवाती सिस्टम सक्रिय है।

इसके अलावा पूर्वी बिहार के ऊपर भी ऊपरी हवा का परिसंचरण प्रभावी है। वहीं दक्षिण मध्य प्रदेश से झारखंड तक एक द्रोणिका छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रही है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण प्रदेश में गरज-चमक, तेज हवाएं, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।

आंधी और बिजली गिरने का खतरा

मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषकर ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने को कहा गया है। कृषि कार्यों में लगे किसानों को भी मौसम की जानकारी लेकर ही खेतों में जाने की सलाह दी गई है।

रायपुर में कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी रायपुर में शुक्रवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार शहर में गरज-चमक, हल्की बारिश और अंधड़ चल सकता है। रायपुर का अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

किसानों के लिए बढ़ी चिंता

बारिश और तेज हवाओं का असर खेती-किसानी और वनोपज पर भी पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में तेंदूपत्ता, आम और सब्जियों की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम का यह अस्थिर पैटर्न आने वाले दिनों में कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

छत्तीसगढ़ में 42 आईएएस का तबादला, इन ज‍िलों के कलेक्‍टर बदले, देखें List…

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छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सूची में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और कई जिलों के कलेक्टरों को इधर से उधर किया गया है . शासन ने प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से यह सूची जारी की है .

नवा रायपुर स्थित महानदी भवन से जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ की व‍िष्‍णु देव साय सरकार ने ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की नई कमान सौंपी है. वहीं, मनोज कुमार पिंगुआ अब वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे. इस फेरबदल में न केवल मंत्रालयों के सचिव बदले गए हैं, बल्कि कोरिया, बीजापुर, सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों के कलेक्टरों की भी नई पदस्थापना की गई है. IFS मयंक अग्रवाल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, चिप्स से अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), चिप्स बनाए गए हैं.

तबादला सूची: आईएएस अधिकारियों की नई पदस्थापना

  1. ऋचा शर्मा: अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन से अब अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास
  2. मनोज कुमार पिंगुआ: अपर मुख्य सचिव, गृह एवं जेल से अब अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन
  3. सुबोध कुमार सिंह: प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री के साथ अब प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग का अतिरिक्त प्रभार
  4. निहारिका बारिक: प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास से अब प्रमुख सचिव, गृह एवं जेल विभाग
  5. शहला निगार: कृषि उत्पादन आयुक्त से अब प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग
  6. रोहित यादव: सचिव, जनसंपर्क एवं ऊर्जा से अब सचिव, वित्त विभाग
  7. कमलप्रीत सिंह: सचिव, लोक निर्माण विभाग से अब सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग
  8. परदेशी सिद्धार्थ कोमल: सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग से अब सचिव, कृषि एवं कृषि उत्पादन आयुक्त
  9. रीना बाबा साहेब कंगाले: सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति से अब सचिव, वाणिज्यिक कर (आबकारी)
  10. अविनाश चंपावत: सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के साथ अब सचिव, उच्च शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार
  11. मुकेश कुमार बंसल: सचिव, वित्त से अब सचिव, वाणिज्यिक कर (आबकारी एवं पंजीयन छोड़कर) और सचिव, लोक निर्माण विभाग
  12. आर. शंगीता: सचिव, वाणिज्यिक कर (आबकारी) से अब सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
  13. अंकित आनंद: सचिव, आवास एवं पर्यावरण (वाणिज्यिक कर-पंजीयन के प्रभार से मुक्त)
  14. भुवनेश यादव: सचिव, समाज कल्याण से अब सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
  15. एस. भारतीदासन: सचिव, कौशल विकास से अब सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग
  16. शम्मी आबिदी: सचिव, महिला एवं बाल विकास से अब सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग
  17. बसवराजू एस.: सचिव, मुख्यमंत्री से अब सचिव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग
  18. मोहम्मद कैसर अब्दुलहक: सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के साथ अब मिशन संचालक, जल जीवन मिशन का प्रभार
  19. राजेश सिंह राणा: सीईओ, क्रेडा से अब सचिव, ग्रामोद्योग विभाग
  20. महादेव कावरे: आयुक्त, रायपुर संभाग से अब आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां
  21. श्याम लाल धावड़े: सचिव, ग्रामोद्योग से अब आयुक्त, रायपुर संभाग
  22. सारांश मित्तर: आयुक्त, आदिम जाति विकास से अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी, क्रेडा
  23. पदुम सिंह एल्मा: एमडी, स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन से अब आयुक्त, आबकारी
  24. संजीव कुमार झा: संचालक, स्वास्थ्य सेवायें के साथ अब एमडी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रभार
  25. रणबीर शर्मा: एमडी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से अब संचालक, समाज कल्याण
  26. पुष्पा साहू: संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा से अब कलेक्टर, जिला-कोरिया
  27. राजेन्द्र कुमार कटारा: कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज से अब विशेष सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  28. संतोष कुमार देवांगन: आयुक्त, उच्च शिक्षा से अब कलेक्टर, जिला-गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
  29. एस. जयवर्धन: कलेक्टर, जिला-सूरजपुर से अब संचालक, कोष एवं लेखा
  30. प्रभात मलिक: संयुक्त सचिव, चिप्स से अब संयुक्त सचिव, माननीय मुख्यमंत्री
  31. डी. राहुल वेंकट: कलेक्टर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर से अब आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास
  32. चंदन संजय त्रिपाठी: कलेक्टर, जिला-कोरिया से अब कलेक्टर, जिला-बलरामपुर-रामानुजगंज
  33. रोक्तिमा यादव: संचालक, समाज कल्याण से अब आयुक्त, उच्च शिक्षा
  34. लीना कमलेश मण्डावी: कलेक्टर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से अब एमडी, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड
  35. संंतन देवी जांगड़े: संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य से अब कलेक्टर, जिला-मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
  36. संजय कन्नौजे: कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ से अब संचालक, संस्कृति
  37. पद्मिनी भोई साहू: संचालक, कोष एवं लेखा से अब कलेक्टर, जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़
  38. संबित मिश्रा: कलेक्टर, जिला-बीजापुर से अब आयुक्त, नगर पालिक निगम, रायपुर
  39. रेना जमील: उप सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग से अब कलेक्टर, जिला-सूरजपुर
  40. विश्वदीप: आयुक्त, नगर निगम रायपुर से अब कलेक्टर, जिला-बीजापुर
  41. रीता यादव: एमडी, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड से अब सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल
  42. ऋषभ कुमार पाराशर: उप सचिव, वित्त विभाग के साथ अब संचालक, बजट एवं संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा

धमतरी-जगदलपुर नेशनल हाईवे गलत एलाइनमेंट में काटे गए 8 हजार से अधिक पेड़…

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दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: वन विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण-जांच में हुआ बड़ा खुलासा, जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार

धमतरी-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) के चौड़ीकरण के दौरान हुई वृक्ष कटाई में बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि स्वीकृत एलाइनमेंट से बाहर जाकर हजारों पेड़ों की कटाई कर दी गई है। इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए वन विभाग ने दोषियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

धमतरी-जगदलपुर मार्ग के उन्नयन के लिए वर्ष 2017 में बालोद, कांकेर, कोण्डागांव और बस्तर जिलों के वन क्षेत्रों की 402.423 हेक्टेयर भूमि के व्यपवर्तन (डायवर्सन) की अनुमति दी गई थी। इस परियोजना के तहत केशकाल वनमंडल में कुल 10 हजार 731 वृक्षों की कटाई की अनुमति मिली थी। इसमें फरसगांव-बड़ेडोंगर परिक्षेत्र के 1 हजार 545 और केशकाल परिक्षेत्र के 9 हजार 186 वृक्ष शामिल थे। संयुक्त टीम द्वारा कटाई के बाद लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रखा गया।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

मार्च 2026 में जब लोक निर्माण विभाग (एनएच) ने सड़क निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ किया, तब एलाइनमेंट में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई। उप-वनमंडलाधिकारी केशकाल की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने पाया कि अवैध कटाई लगभग 8 हजार 159 वृक्ष स्वीकृत डीजीपीएस एलाइनमेंट से बाहर के क्षेत्र में काट दिए गए। अतिरिक्त कटाई की आवश्यकता गलत कटाई के कारण अब स्वीकृत एलाइनमेंट में सड़क बनाने के लिए 6 हजार 336 अतिरिक्त वृक्षों को काटना अनिवार्य हो गया है।

दोषियों पर गिरेगी गाज

वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भविष्य के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। भविष्य में त्रुटि न हो, इसके लिए एलाइनमेंट में चिन्हित वृक्षों का तकनीकी कर्मचारियों द्वारा दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। वर्ष 2016-17 में स्वीकृत क्षेत्र के बाहर वृक्ष कटाई के लिए जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया गया है।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण के नियमों की अनदेखी और शासकीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की पहचान कर उन पर नियमानुसार कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

छत्तीसगढ़ का वनाधारित आजीविका मॉडल बना देश के लिए मिसाल…

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अध्ययन करने पहुँचा अरुणाचल प्रदेश का उच्चस्तरीय दल’
महिला समूहों को 25 लाख रुपए से अधिक का लाभांश वितरित’
प्रतिनिधिमंडल ने ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ और प्रसंस्करण इकाइयों को सराहा’

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा विकसित वनाधारित आजीविका मॉडल आज अपनी सफलता की गूँज देशभर में फैला रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण के साथ-साथ लघु वनोपजों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के इस अनूठे मॉडल का अध्ययन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुँचा।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य

इस दल में अरुणाचल वन निगम के अध्यक्ष श्री नालोंग मिजे, विधायक श्री चौ जिंगनु नामचूम, उपाध्यक्ष श्री टी.जी. बाकि तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री पी. सुब्रमण्यम सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

महिला सशक्तिकरण: 25 लाख रुपए के लाभांश का वितरण

भ्रमण के दौरान एक विशेष कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों को उनकी कड़ी मेहनत का फल 25 लाख 17 हजार 776 रुपए की लाभांश राशि के रूप में दिया गया।  वन धन विकास केंद्र डॉगनाला, इच्छापुर, दुगली और विशेष पिछड़ी जनजाति (पीव्हीटीजी) केंद्र केशोडार की महिलाओं को लाभांश के चेक प्रदान किए गए। इस अवसर पर डीएफओ (कटघोरा) श्री कुमार निशांत सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण और आधुनिक तकनीक

प्रतिनिधिमंडल ने जमीनी स्तर पर हो रहे कार्यों को समझने के लिए विभिन्न केंद्रों का दौरा किया। राजनांदगांव में महुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन कर आधुनिक तकनीक को समझा। कबीरधाम में वन धन शहद प्रसंस्करण केंद्र की कार्यप्रणाली देखी। दल ने “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” के मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क और 67 प्रकार के लघु वनोपजों की एमएसपी पर खरीदी की व्यवस्था की सराहना की। उन्हें बताया गया कि राज्य में तेंदूपत्ता का देश में सर्वाधिक 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा मूल्य दिया जा रहा है।

प्रेरणादायी मॉडल के रूप में पहचान

अरुणाचल प्रदेश के दल ने छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट और प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने महिला समूहों की कार्यक्षमता से प्रभावित होकर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की। राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा और प्रबंध संचालक श्री अनिल कुमार साहू सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें छत्तीसगढ़ की वन संपदा व जनजातीय आजीविका के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।

धान के खेतों में अब उपज रही औषधीय समृद्धि, वच की खेती ने बदली छत्तीसगढ़ के किसानों की तकदीर, एक एकड़ से हो रही लाख रुपए तक की शुद्ध आय…

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छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के चक्र से बाहर निकलकर औषधीय फसलों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसान वच (स्वीट फ्लैग) की व्यावसायिक खेती अपनाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती के अलावा वच की औषधीय खेती ने किसानों की तकदीर बदल दी है, विशेषकर वन अंचलों में। औषधीय पौधों की खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है।

क्या है वच और क्यों है इसकी मांग?

वच, जिसे स्थानीय स्तर पर घोड़बच कहा जाता है, एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। इसकी जड़ों का प्रयोग आयुर्वेद, हर्बल दवाओं, सौंदर्य प्रसाधन, सुगंधित तेल और अगरबत्ती निर्माण में प्रमुखता से किया जाता है। वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग ने इसे किसानों के लिए हरा सोना बना दिया है। औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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गांवों से हुई मुनाफे की शुरुआत

वर्तमान में धमतरी, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और रायपुर जिलों के 11 गांवों में लगभग 38 एकड़ क्षेत्र में वच की खेती की जा रही है। राज्य सरकार के नई सुबह की ओर अभियान के तहत आदिवासी किसान अब ब्राह्मी और वच ;बचद्ध जैसी सुगंधित व औषधीय फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

कम लागत, अधिक लाभ

जहाँ पहले एक एकड़ धान से किसान मुश्किल से 20 हजार रुपए कमा पाते थे, वहीं अब बोर्ड द्वारा निःशुल्क पौधे और तकनीकी सहायता मिलने से मुनाफा लाख के पार पहुँच गया है। वैज्ञानिक पद्धति और जैविक खेती का संगम किसानों ने औषधीय पादप बोर्ड के प्रशिक्षण के अनुरूप आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। रोपाई जुलाई माह में 30×30 सेमी की दूरी पर अंकुरित कंदों का रोपण।

जैविक पोषण

रासायनिक खादों के बजाय गोबर खाद और जीवामृत का उपयोग किया जाता है। सुरक्षा की फसल में कीटों का प्रकोप नगण्य होने और कम पानी की आवश्यकता के कारण रखरखाव का खर्च काफी कम रहा। प्रसंस्करण से मिली ए-ग्रेड गुणवत्ता 9 महीने की मेहनत के बाद अप्रैल-मई में फसल तैयार हुई। किसानों ने केवल कच्चा माल नहीं बेचा, बल्कि जड़ों की सफाई, कटाई और पॉलिशिंग कर उन्हें ए-ग्रेड गुणवत्ता में बदला, जिससे बाजार में उन्हें उच्चतम मूल्य प्राप्त हुआ।

मुनाफे का गणित (प्रति एकड़) विवरण

अनुमानित आंकड़े कुल लागत लगभग 20 हजार रुपए कुल उपज (सूखी जड़ें) लगभग 15 क्विंटल बाजार मूल्य 70 रुपए प्रति किलो शुद्ध की दर से आय करीब एक लाख रुपए होती है। सतत खेती की ओर कदम भविष्य के प्रति जागरूक किसानों ने अपनी उपज का 10 प्रतिशत हिस्सा अगले साल के बीज (कंद) के रूप में सुरक्षित रखा है। बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और विपणन सहायता ने किसानों में यह आत्मविश्वास जगाया है कि वे अब वच की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

इस सफलता की कहानी सिद्ध करती है कि यदि पारंपरिक कृषि के साथ तकनीकी नवाचार और औषधीय पादपों का समन्वय हो, तो छत्तीसगढ़ का किसान न केवल समृद्ध होगा, बल्कि देश की हर्बल अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ भी बनेगा।

बंगाल, तमिलनाडु, केरल में तख्तापलट का देश के लिए क्या मायने…

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लोकतंत्र में चुनाव मतदाता के दिल की धड़कन होती है, दिल की धड़कन से तय होता है कि प्रदेश और देश की दिशा और दशा क्या होगी. वोटरों ने पांच राज्यों में तय कर दिया है कि किस पार्टी की सरकार आएगी और किस पार्टी की सरकार जाएगी. गौर करने की बात है कि पांच राज्यों में तीन राज्यों में बदलाव की बयार चली और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, तमिलनाडु में स्टालिन और केरल में लेफ्ट सरकार की विदाई हो गई, ये सरकारें बीजेपी की धुर विरोधी भी थीं। सबसे दिलचस्प रहा पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के नतीजे. पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए अभेद किले को भेदना बड़ी सफलता मानी जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुर विरोधी तमिलनाडु की डीएमके की हार के बड़े मायने हैं. डीएमके सरकार को एक ऐसे नए और कम अनुभव वाले अभिनेता-नेता ने पटकनी दी जिसकी कोई कल्पना नहीं थी. तमिलनाडु में थलपति विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं पुडुचेरी में एनडीए की सरकार बनी है. असम में तीसरी बार बीजेपी की वापसी यह संकेत देती है कि राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत हुई है. इस जीत से केन्द्र और राज्य की राजनीति पर क्या असर होंगे, ये जानने की कोशिश करते हैं.

क्या हार हुई?

लोकतंत्र में मतदाता मालिक होते हैं. अगर सरकार मतदाता के मन की बात नहीं समझ पाती है तो वह उसे सबक सिखाती है. ममता बनर्जी 15 साल से पश्चिम बंगाल में राज कर रही थीं, उनके खिलाफ नाराजगी थी, सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप थे, बेरोजगारी, उद्योग-धंधों का बंद होना, शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर कमजोर होना और कानून-व्यवस्था की स्थिति की वजह से उनकी पार्टी की हार हुई. वहीं तमिलनाडु में डीएमके का हारना परिवारवाद की राजनीति से जनता की थकान को भी दिखाता है. ये दोनों जगह की सरकारें भले राज्य की थीं लेकिन सीधा चुनौती पीएम मोदी को दे रही थीं. हर बात में केन्द्र सरकार से टकराना, विरोध करना और दो-दो हाथ करने की स्थिति बनी रहती थी. भले इन नेताओं को अच्छा लगता था लेकिन मतदाता को आपसी लड़ाई से ज्यादा मतलब नहीं था, यही वजह रही कि जनता ने सबक सिखाने का फैसला किया. देश में आकांक्षी वर्ग बढ़ रहा है, जेन जी का भी असर है, रोजगार, विकास और महिला सशक्तिकरण मुख्य मुद्दे हैं, लगता है कि बीजेपी जनता के नब्ज को पकड़ने में सफल रही है.

बीजेपी का फैलता दायरा

जब से केन्द्र में मोदी सरकार आई है तब से देश में बीजेपी की राजनीतिक जमीन का दायरा बढ़ता जा रहा है और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार ढहने के बाद राज्य में विपक्षी सरकारें ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही हैं, जो लोकतंत्र के शुभ संकेत नहीं हैं क्योंकि लोकतंत्र को मजबूत रहने के लिए विपक्ष का मजबूत रहना जरूरी होता है. बीजेपी ऐसे राज्यों में अपने बलबूते पर सरकार बनाने और अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करने में सफल रही है जहां वह पहले कमजोर मानी जाती थी, मसलन असम, ओडिशा, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, नागालैंड और मेघालय इत्यादि. अब पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी हार गईं हैं और तमिलनाडु में ऐसी स्थिति हो सकती है कि नई सरकार के गठन में एनडीए की भूमिका हो सकती है?

ममता की हार से बढ़ गयी विपक्ष की धड़कनें

पांच राज्यों के चुनाव के बाद अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं, इसके बाद तुरंत गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव होने हैं. बंगाल में फतह के बाद बीजेपी का जोश हाई है. इसका असर विपक्षी पार्टियों पर भी पड़ सकता है. हालांकि विपक्ष की दो ही जगह सरकार है, एक हिमाचल और दूसरा पंजाब—लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव काफी जोश में हैं. 2024 के चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद अखिलेश को लग रहा है कि 2027 के चुनाव में कड़ी टक्कर होगी, लेकिन बंगाल के चुनाव नतीजों से उन पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी झारखंड छोड़कर महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़त बना रही है. वहीं विपक्ष से चूक हुई है कि पश्चिम बंगाल में विपक्षी एकता क्यों नहीं बन पाई और असम में बदरुद्दीन अजमल की अगुवाई वाली एआईयूडीएफ से गठबंधन क्यों नहीं हो पाया.

विपक्ष बीजेपी की चाल नहीं समझ पाया

पश्चिम बंगाल की लड़ाई भी आसान नहीं थी. जब सरकार ने महिला आरक्षण बिल लेकर आई तो विपक्ष ने उसे हल्के में लिया, लेकिन वह यह समझ नहीं पाया कि बीजेपी महिला वोटरों को अपनी तरफ खींचने की बड़ी रणनीति बना रही है. वहीं संगठनात्मक बदलावों को भी विपक्ष ठीक से नहीं समझ पाया. अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगाया और जिस तरह से शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स लगाई गई, उससे मतदाता में भरोसा बढ़ा और पिछली बार की तरह हिंसा की स्थिति नहीं बनी.

अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर

मजबूत जनादेश के साथ भारत की वैश्विक छवि में स्थिरता और निरंतरता का संदेश जाता है, जिससे विदेश नीति में सरकार को अधिक आत्मविश्वास मिलता है. इससे अन्य देशों में भी यह धारणा बनती है कि भारत में सरकार मजबूत है और उसकी वैश्विक अहमियत बढ़ रही है. भले भारतीय जनता पार्टी को केंद्र में अपने दम पर पूर्ण बहुमत न मिला हो, लेकिन उसके राजनीतिक प्रभाव और भौगोलिक विस्तार में वृद्धि देखी जा रही है. नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक मजबूत हुई है, क्योंकि मतदाता का रुझान पार्टी के पक्ष में बना हुआ दिखता है। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष के सामने अपनी रणनीति और संगठन को और मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है.