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तमिलनाडु में नई सरकार के गठन पर स्टालिन का बयान…

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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने नई सरकार के गठन पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि डीएमके टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय का इंतजार कर रही है और अगले छह महीने तक स्थिति पर नजर रखेगी। स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने 2021 के घोषणापत्र में किए गए वादों का 90% पूरा किया है। उन्होंने महिलाओं के लिए भत्ते और अन्य योजनाओं पर भी चर्चा की। जानें पूरी जानकारी इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम पर।

स्टालिन का बयान

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि डीएमके नई सरकार के गठन के लिए टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय का इंतजार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वे बिना किसी हस्तक्षेप के अगले छह महीने तक स्थिति पर नजर रखेंगे। इस बयान के साथ, स्टालिन ने एआईएडीएमके और डीएमके के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चल रही अटकलों को समाप्त कर दिया है।

संवैधानिक संकट से बचने की कोशिश

डीएमके ने संकेत दिया है कि वह राज्य में किसी भी संवैधानिक संकट या जल्द चुनाव नहीं चाहती। स्टालिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई सरकार उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई सभी योजनाओं को जारी रखेगी, साथ ही टीवीके द्वारा किए गए चुनावी वादों को भी पूरा करेगी। जब उनसे प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया, तो स्टालिन ने कहा कि नई सरकार को स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त नाश्ता योजना को जारी रखना चाहिए।

महिलाओं के लिए भत्ते पर चर्चा

स्टालिन ने ‘कलाइग्नार मगलीर उरिमाई थोगई’ (महिला मुखियाओं को 1,000 रुपये मासिक भत्ता) योजना का जिक्र किया। विजय द्वारा महिलाओं को 2,500 रुपये देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए, स्टालिन ने कहा कि यह वादा पूरा करना कठिन होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि कम से कम 1,000 रुपये तो दिए जाने चाहिए, जैसा कि उनकी सरकार ने किया था। डीएमके अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने 2021 के घोषणापत्र में किए गए 90% वादे पूरे किए हैं, लेकिन कुछ वादे, जैसे कि NEET को समाप्त करना, केंद्र के नियंत्रण में होने के कारण पूरे नहीं हो सके।

टीवीके के वादों पर सवाल

स्टालिन ने कहा कि इस चुनाव में भी, उन्होंने केवल उन वादों का आश्वासन दिया है जिन्हें वे पूरा कर सकते थे। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि टीवीके अपने वादे (राशन कार्ड धारकों के प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर) पूरे कर पाएगी। हालांकि, यदि वे ऐसा करने में सफल होते हैं, तो उन्हें खुशी होगी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों में, टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत के लिए उसे 10 सीटों की कमी रह गई।

भारतीय पारंपरिक ठंडे खाद्य पदार्थों की वापसी: स्वास्थ्य के लिए लाभ…

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भारतीय रसोई में पारंपरिक ठंडे खाद्य पदार्थों की वापसी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। छाछ, कंजी, और भिगोए हुए सब्जा बीज जैसे खाद्य पदार्थ अब फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये खाद्य पदार्थ न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं। आधुनिक

विज्ञान भी इस बात की पुष्टि कर रहा है कि ये खाद्य पदार्थ आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। जानें कैसे ये पारंपरिक खाद्य पदार्थ आज के स्वास्थ्य संकट का समाधान बन सकते हैं।

भारतीय रसोई में ठंडे खाद्य पदार्थों की वापसी

जबकि सुपरमार्केट में प्रोबायोटिक पेय, कंबुचा कैन और ‘गट-फ्रेंडली’ स्नैक्स की भरमार है, भारतीय रसोई में एक चुपचाप बदलाव हो रहा है। चास और कंजी फिर से मेज पर लौट आए हैं। इसके साथ ही भिगोए हुए सब्जा बीज, सत्तू, किण्वित चावल, कोकम का शरबत और ठंडा दलिया भी शामिल हैं। जो खाद्य पदार्थ पहले ‘पुराने जमाने’ के समझे जाते थे, वे अब एक नई पीढ़ी द्वारा फिर से खोजे जा रहे हैं, जो सूजन, अम्लता, खराब पाचन और लगातार थकान से जूझ रही है। डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, ये पारंपरिक ठंडे खाद्य पदार्थों की वापसी केवल एक पुरानी याद नहीं है, बल्कि यह जैविक आवश्यकता है।

पोषण विशेषज्ञों की राय

डॉ. ए. संगमेश्वरन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपेटोलॉजी के सलाहकार, अपोलो स्पेशलिटी अस्पताल, वानगरम, चेन्नई के अनुसार, “रोगियों के खाद्य संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है।” उन्होंने कहा, “भारतीय घरों में कभी प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं थी। उनके पास कंजी, छाछ, कच्चा आम, कोकम और किण्वित चावल थे, जो हर गर्मी में यह काम करते थे।”

पारंपरिक खाद्य पदार्थों का महत्व

सदियों से, भारतीय परिवारों ने मौसम के अनुसार अपने आहार को समायोजित किया है। गर्मियों में भोजन हल्का और अधिक हाइड्रेटिंग हो जाता था। छाछ भारी ग्रेवी की जगह ले लेती थी। पानी से भरपूर फल हर प्लेट पर दिखाई देते थे। किण्वित खाद्य पदार्थों ने लंबे समय से आंत को पोषण दिया है। अब, आधुनिक विज्ञान इस बात की पुष्टि कर रहा है कि ये केवल आरामदायक खाद्य पदार्थ नहीं थे; वे कार्यात्मक थे।

आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान

डॉ. संगमेश्वरन ने कहा, “आंत का माइक्रोबायोम गर्मी के तनाव के प्रति संवेदनशील होता है, और कई पारंपरिक ठंडे खाद्य पदार्थ, जो प्राकृतिक प्रीबायोटिक्स, जीवित संस्कृतियों और सूजन-रोधी यौगिकों से भरपूर होते हैं, इस प्रतिक्रिया को सक्रिय रूप से संतुलित करते हैं।” आज के खाद्य परिदृश्य में, अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, परिष्कृत शर्करा, संरक्षक और अनियमित खाने की आदतें पाचन समस्याओं से जुड़ी हुई हैं।

पारंपरिक खाद्य पदार्थों का पुनरुत्थान

डॉ. अंशुल सिंह, क्लिनिकल न्यूट्रिशन और डायटिक्स विभाग, आर्टेमिस अस्पताल के टीम लीड, ने कहा कि ये खाद्य पदार्थ इसलिए काम करते हैं क्योंकि वे शरीर की गर्मी में आवश्यकताओं के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाते हैं। “पारंपरिक ठंडे खाद्य पदार्थ जैसे दही, छाछ, नारियल पानी, भिगोए हुए सब्जा बीज और मौसमी फल जैसे तरबूज और खीरा शरीर के तापमान को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने में मदद करते हैं।”

पोषण की गुणवत्ता में बदलाव

हालांकि, प्रीतिक रस्तोगी, सह-संस्थापक और सीईओ, बेटर न्यूट्रिशन ने बताया कि इन खाद्य पदार्थों के पीछे की ज्ञान शक्ति मजबूत है, लेकिन समय के साथ सामग्री की पोषण गुणवत्ता में बदलाव आया है। “भारत की दादियाँ सत्तू और दलिया को ‘ठंडे खाद्य पदार्थ’ नहीं कहती थीं। वे बस उन्हें रात के खाने के रूप में बुलाती थीं।”

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों को छोड़ने के बजाय, बेहतर जागरूकता और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के साथ इन परंपराओं को मजबूत करना आवश्यक है। “समस्या परंपरा को छोड़ने में नहीं है, बल्कि इसे मजबूत करने में है,” रस्तोगी ने कहा।

Eid al Adha 2026: मई में इस दिन मनाया जाएगा इस्लाम का बड़ा त्योहार, तैयारियों में जुट जाएं मुसलमान…

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Eid al Adha 2026: ईद के बाद ईद-उल-अजहा या बकरीद इस्लाम का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है, जिसमें खासतौर पर कुर्बानी का महत्व है. यह हर साल जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है.

ईद-उल-अजहा को इस्लाम का महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है. इस साल 27 या 28 मई को यह त्योहार मनाए जाने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन अंतिम तिथि घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाएगी.

ईद-उल-अजहा को बकरीद, कुर्बानी या ईद-उल-अधा जैसे नामों से भी जाना जाता है. यह ऐसा अवसर होता है, जब दुनियाभर के मुसलमान एक साथ बकरीद मनाते हैं और अल्लाह की शुक्रिया अदा करते हैं. साथ ही बकरीद का त्योहार इबादत, अल्लाह के प्रति विश्वास, दान और उदारता से भी जुड़ा है.

कब है बकरीद

इस्लाम धर्म से जुड़े त्योहारों में डेट को लेकर सटीक जानकारी पहले से नहीं होती है, क्योंकि इस्लामिक त्योहार चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं और नया चांद (हिलाल) नजर आने के बाद ही सटीक तिथि की घोषणा की जाती है. इसलिए यह ग्रेगोरियन कैलेंडर वर्ष से आगे-पीछे हो जाती है. कई बार तो त्योहारों की तिथि में 10 से 11 दिनों तक का अंतर हो जाता है.

वहीं बात करें बकरीद के संभावित तिथि की तो यह 27 या 28 मई को मनाए जाने की उम्मीद है. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक बकरीद जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. जिलहिज्जा 2026 (Dhul Hijjah) का चांद 17 या 18 मई को देखा जाएगा. अगर इस दिन चांद नजर आ जाता है तो, बकरीद की तारीख भी तय हो जाएगी और मुसलमान तैयारियों में जुट जाएंगे.

क्यों मनाते हैं ईद के बाद बकरीद

इस्लाम धर्म में ईद या ई-उल-फितर को सबसे बड़ा त्योहार बताया गया है. लेकिन ईद के बाद मनाए जाने वाले त्योहार बकरीद का भी उतना ही महत्व है. इसे इस्लाम का दूसरा सबसे अहम त्योहार बताया गया है. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग पैगंबर इब्राहिम द्वारा किए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान और अल्लाह के प्रति उनके प्रेम को याद करते हैं.

जिलहिज्जा का नया चांद नजर आते ही मुसलमान तैयारियों में जुट जाते हैं. बकरीद से पहले ही बाजारों में रौनक भी बढ़ने लगती है. लोग नए कपड़े, मिठाइयां और कुर्बानी के लिए जानवर खरीदने की तैयारी शुरू कर देते हैं.

बकरीद पर कुर्बानी क्यों इतनी जरूरी?

बकरीद का त्योहार कुर्बानी के बिना अधूरा माना जाता है. इसमें भेड़ (दुम्बा), मेमना, बकरी, भैंस या ऊंट आदि जैसे जानवर की कुर्बानी की रस्म अदा की जाती है. कुर्बानी ईद के नियमों के अनुसार, कुर्बानी हलाल तरीके से की जाती है. कुर्बानी की रस्म के बाद दान देने की भी परंपरा है. कुर्बानी दिए गए जानवर के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है. पहला हिस्सा घर-परिवार के लोगों के लिए होता है, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों या करीबियों को दिए जाते हैं और तीसरी हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है.

Victoris जैसी टेक्नोलॉजी के साथ आ रही नई Brezza Facelift, जानें क्या होगा खास…

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Maruti Suzuki अपनी पॉपुलर SUV Brezza का नया फेसलिफ्ट मॉडल जल्द लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. इस बार कंपनी Brezza CNG को पहले से ज्यादा प्रैक्टिकल बनाने वाली है. रिपोर्ट्स के अनुसार नई Brezza Facelift CNG में Victoris जैसी अंडरबॉडी CNG टैंक टेक्नोलॉजी दी जाएगी. इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कार का बूट स्पेस पहले की तुलना में ज्यादा मिलेगा. अब तक ज्यादातर CNG कारों में टैंक बूट के अंदर लगाया जाता था, जिससे सामान रखने की जगह कम हो जाती थी. लेकिन अंडरबॉडी टैंक की वजह से यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी. यही कारण है कि नई Brezza CNG फैमिली ग्राहकों के लिए ज्यादा Useful साबित हो सकती है.

केवल मैनुअल गियरबॉक्स में आएगी CNG Brezza

नई Brezza Facelift CNG में कंपनी 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दे सकती है. फिलहाल इसके साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स आने की उम्मीद नहीं है. माना जा रहा है कि 6-स्पीड गियरबॉक्स केवल टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ ही दिया जाएगा. Maruti की CNG कारों की बिक्री लगातार बढ़ रही है और Brezza CNG इस सेगमेंट में कंपनी की मजबूत SUV बन सकती है. खासकर अब जब डीजल कारों की मांग धीरे-धीरे कम हो रही है, तब CNG मॉडल ग्राहकों के लिए कम खर्च वाला विकल्प बनकर सामने आ रहा है.

माइलेज और फीचर्स में भी मिलेगा फायदा

नई Brezza CNG की माइलेज Victoris CNG के आसपास रहने की उम्मीद है. यानी यह SUV कम खर्च में लंबा सफर तय करने में मदद करेगी. इसके अलावा फेसलिफ्ट मॉडल में कई नए फीचर्स भी देखने को मिल सकते हैं. कार के एक्सटीरियर और इंटीरियर दोनों में बदलाव किए जा सकते हैं. नई डिजाइन, अपडेटेड डैशबोर्ड और मॉडर्न फीचर्स इसे पहले से ज्यादा प्रीमियम बना सकते हैं. कंपनी इसमें नई टेक्नोलॉजी और बेहतर कनेक्टिविटी फीचर्स भी दे सकती है.

अगले महीने हो सकती है लॉन्च

रिपोर्ट्स के मुताबिक नई Maruti Brezza Facelift अगले महीने भारतीय बाजार में लॉन्च हो सकती है. इसकी कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा रहने की संभावना है. हालांकि नए फीचर्स, बेहतर बूट स्पेस और नई CNG टेक्नोलॉजी को देखते हुए यह कीमत ग्राहकों को सही लग सकती है.

Multibagger Stock: गजब! शेयर हो तो ऐसा, 1 लाख के बना दिए 14 करोड़; 24 साल में दिया 1400 गुना रिटर्न…

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Multibagger Stock: अनिल अग्रवाल की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने 24 सालों में 1400 परसेंट का बंपर रिटर्न देकर अपने निवेशकों को मालामाल बना दिया है. इसने 1 लाख के 14 कराेड़ बना दिए हैं.

Crorepati Stock: शेयर बाजार में निवेशकों को अकसर ऐसे स्टॉक्स की तलाश रहती है, जो उन्हें कम समय में ज्यादा मुनाफा करा जाए. हालांकि, शेयर बाजार में लिस्टेड स्टॉक्स में कुछ ही ऐसे हैं, जो मल्टीबैगर रिटर्न देने का दम रखते हैं. लेकिन इन स्टॉक्स की पहचान कर पाना भी कोई आसान काम नहीं है. आज हम आपको एक ऐसी कंपनी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने 24 सालों में अपने निवेशकों को करोड़पति बना दिया.

करोड़ों में खेल रहे 1 लाख निवेश करने वाले

यहां दिग्गज निवेशक अनिल अग्रवाल (Anil Agrawal) की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Limited) की बात की जा रही है. इस कंपनी के शेयर ने 24 सालों में 1400 परसेंट का बंपर रिटर्न दिया है. इस हिसाब से अगर किसी निवेशक ने साल 2002 में इस कंपनी में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज (मई 2026) उसकी वैल्यू बढ़कर लगभग 14 करोड़ रुपये हो गई होती. कंपनी ने पिछले 24 सालों में लगभग 33 परसेंट CAGR रिटर्न दिया है.

सरकारी से प्राइवेट बनने तक का सफर

हिंदुस्तान जिंक पहले एक सरकारी कंपनी थी. साल 2002 में सरकार ने इस कंपनी में 26 परसेंट की हिस्सेदारी अनिल अग्रवाल की कंपनी ‘स्टरलाइट इंडस्ट्रीज’ (जो अब वेदांता ग्रुप का हिस्सा है) को 445 करोड़ रुपये में बेच दी. आज के समय में हिंदुस्तान जिंक दुनिया में सबसे बड़ी चांदी उत्पादक कंपनियों में से एक है.

डिविडेंड देने में भी आगे कंपनी

शेयर बाजार में हिंदुस्तान जिंक का डिविडेंड रिकॉर्ड सबसे मजबूत माना जाता है. कंपनी अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा निवेशकों में हमेशा बांटती रहती है. कंपनी अप्रैल के महीने में 11 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान किया, जो  कारोबारी साल 2026-27 की का पहला डिविडेंड है.

डिविडेंड का रिकॉर्ड

  • 2025-26- 10 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान.
  • 2024-25- कंपनी ने दो किस्तों (10+19 रुपये) में 29 रुपये डिविडेंड का किया ऐलान.
  • 2023-24- 13 रुपये प्रति शेयर (7+6) डिविडेंड का भुगतान

मौजूदा समय में इसके शेयरों की कीमत (630-645 रुपये) के आधार पर हिंदुस्तान जिंक की डिविडेंड यील्ड लगभग 3.26 परसेंट से 3.47 परसेंट के बीच है.

IPL Match 2026: क्रिकेट का महाकुंभ’ दर्शकों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने बनाई खास रणनीति, अधिकारियों को दिए ये निर्देश…

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‘पुलिस कमिश्नर को विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश, CCTV और बैरिकेडिंग की व्यवस्था, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के लिए डेडिकेटेड रूट चिन्हांकित’

IPL Match 2026 रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आगामी 10 और 13 मई को होने वाले टाटा आईपीएल टी-20 मैचों के सफल आयोजन के लिए राज्य प्रशासन ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की और आयोजन से जुड़ी तमाम व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव के इन कड़े निर्देशों के बाद अब नवा रायपुर का प्रशासन क्रिकेट के इस महाकुंभ की मेजबानी के लिए पूरी तरह मुस्तैद है, जिससे दर्शकों को एक सुरक्षित और आनंदमयी अनुभव मिल सके।

मैचों का शेड्यूल

IPL Match 2026 10 मई 2026 केा रॉयल चौलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) बनाम मुंबई इंडियंस (MI) और 13 मई 2026 को रॉयल चौलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के मध्य मैच खेला जाएगा।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर विशेष जोर

मुख्य सचिव विकासशील ने स्पष्ट किया कि स्टेडियम में आने वाले हजारों दर्शकों की सुरक्षा और सुगम यातायात प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। ऑनलाइन बुकिंग के बाद रायपुर पहुंचने वाली दर्शकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कमिश्नर रायपुर को विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्किंग एरिया और स्टेडियम के चारों ओर CCTV कैमरों का सघन जाल बिछाया जाएगा। बैरिकेडिंग और पार्किंग की जिम्मेदारी पुलिस, NRDA और BCCI की संयुक्त टीम संभालेगी।

आपातकालीन सेवाएं

फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के लिए डेडिकेटेड रूट (Emergency Route) चिन्हांकित किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। आयोजन के सुचारू संचालन के लिए कलेक्टर रायपुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है। इसमें पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), आयुक्त नगर निगम, संचालक (खेल एवं युवा कल्याण), क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO), और NRDA के CEO सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यद्यपि संपूर्ण आयोजन का उत्तरदायित्व BCCI और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ का है, लेकिन प्रशासन पेयजल, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।

नियादी सुविधाओं की उपलब्धता

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को स्टेडियम में पानी के सुचारू प्रवाह और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। बिजली विभाग को मैचों के दौरानछत्तीसग्ढ विद्युत वितरण कंपनी को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, PHE सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, खेल सचिव यशवंत कुमार और कलेक्टर रायपुर गौरव सिंह सहित पुलिस विभाग, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और CSPDCL के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही BCCI और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के प्रतिनिधियों ने भी अपनी तैयारियों का ब्यौरा साझा किया।

छत्तीसगढ़ की महिलाओं को बड़ा तोहफा! साय सरकार ने कर दिया ये बड़ा ऐलान…

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महिलाओं के नाम पर संपत्ति रजिस्ट्री में अब केवल 2% शुल्क लगेगा, संपत्ति स्वामित्व बढ़ने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, अनुमानित 200 करोड़ रुपये की कमी के बावजूद यह कदम समाजिक दृष्टि से लाभकारी है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उनके नाम पर कराए जा रहे भूमि रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी करने का फैसला लिया है। माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में  पंजीयन मंत्री ओ पी चौधरी की पहल पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया .मंत्रिपरिषद द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी दिये जाने के उपरान्त अधिसूचना प्रकाशन से यह छूट प्रभावशील हो गई है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम संपत्ति के रजिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा।

अधिसूचना के अनुसार, महिलाओं के पक्ष में निष्पादित अचल संपत्ति अंतरण से जुड़े दस्तावेजों पर लागू पंजीयन शुल्क में पचास फीसदी की छूट दी जाएगी। वर्तमान में ऐसे दस्तावेजों पर संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता है। अब महिलाओं के नाम पर होने वाले रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क दो प्रतिशत लगेगा।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने के लिए यह एक दूरदर्शी और सकारात्मक पहल है। वर्ष 2024-25 में महिलाओं के नाम पर 82,755 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है।नए प्रावधान के लागू होने से अनुमानित रूप से करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व में कमी आ सकती है।राजस्व में कमी के बावजूद महिलाओं को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।

सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवादरू संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर…

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कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे। गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं – कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।

जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा – “आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।

कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।

सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

मातृ सुरक्षा से खुशहाली का मार्ग, छत्तीसगढ़ में मातृ वंदना योजना की ऐतिहासिक सफलता…

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किसी भी राष्ट्र की प्रगति का पैमाना वहां की माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य होता है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज देशभर के लिए एक मॉडल बन चुकी है। राज्य में इस योजना को केवल सरकारी आंकड़े बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में लागू किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना छत्तीसगढ़ में सुरक्षित मातृत्व और समृद्ध समाज के बीच की एक मजबूत कड़ी बन गई है। संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनभागीदारी का यह संगम छत्तीसगढ़ की माताओं और नवजात शिशुओं के भविष्य को उज्ज्वल और सुरक्षित बना रहा है।

योजना का स्वरूप और वित्तीय संबल

1 जनवरी 2017 से संचालित इस योजना का मूल उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके पोषण स्तर में सुधार लाना है। छत्तीसगढ़ में मातृ वंदना योजना के तहत पहली जीवित संतान के जन्म पर 5 हजार की सहायता दी जाती है। कन्या भ्रुण हत्या रोकने और बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने हेतु दूसरी संतान के रूप में बेटी होने पर 6 हजार की विशेष सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे तौर पर प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव जैसी आवश्यक स्वास्थ्य प्रक्रियाओं से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मिशन मोड पर कार्य

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक इस योजना को पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले ने ‘डोर-टू-डोर‘ पंजीयन सुनिश्चित किया है।

सफलता के आंकड़ेछत्तीसगढ़ देश में अव्वल

छत्तीसगढ़ ने डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी भुगतान प्रणाली (डीबीटी) के प्रभावी उपयोग में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उपलब्धियों का ग्राफ कुछ इस प्रकार है। बढ़ता पंजीयन वर्ष 2023-24 में 1 लाख 75 हजार 797 महिलाओं का पंजीयन हुआ, जो 2024-25 में बढ़कर 2 लाख 19 हजार 012 हो गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में 2 लाख 04 हजार 138 महिलाओं का पंजीयन कर राज्य ने 93.3 प्रतिशत का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। आवेदनों के परीक्षण और केंद्र से स्वीकृति दिलाने में छत्तीसगढ़ 83.87 प्रतिशत की दर के साथ देश में सबसे आगे है।

शिकायत निवारण और लाभार्थियों की संतुष्टि

केवल योजना लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लाभार्थियों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। छत्तीसगढ़ ने लगभग 93 प्रतिशत शिकायतों का त्वरित निराकरण कर सुशासन की एक नई इबारत लिखी है।

कुपोषण के विरुद्ध एक सशक्त हथियार

यह योजना आर्थिक सहायता से कहीं अधिक स्वास्थ्य क्रांति का हिस्सा है। समय पर मिलने वाली इस राशि ने माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया है, जिससे एनीमिया जैसी गंभीर चुनौतियों से लड़ने में मदद मिली। स्वस्थ शिशु जन्म दर में वृद्धि हुई, मातृ मृत्यु दर में प्रभावी कमी आई।

TN-केरलम में कीचड़ नहीं फैला तो कमल नहीं खिला… EC पर भड़की कांग्रेस…

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने वोट चोरी, लक्षित वोट कटौती (SIR) और परिसीमन के जरिए चुनाव में धांधली का दावा किया. वहीं तमिलनाडु और केरल के नतीजो पर पवन खेड़ा ने कहा कि तमिलनाडु और केरल में कीचड़ नहीं फैलाया गया तो कमल नहीं खिला.

देश के पांच राज्यों में आए चुनाव नतीजों पर कांग्रेस के पवन खेड़ा ने एक प्रेस कान्फ्रेंस की, जिसमें खेड़ा ने चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने SIR, वोट चोरी और परिसीमन के जरिए चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप लगाए, पवन खेड़ा ने कहा कि कई राज्यों में वोट चोरी के बाद, अब SIR के चाबुक और परिसीमन के जरिए सिस्टम पर चोट की जा रही है.

वहीं तमिलनाडु और केरल के नतीजों पर पवन खेड़ा ने कहा कि तमिलनाडु और केरल में कीचड़ नहीं फैलाया गया तो कमल नहीं खिला. चुनाव आयोग का काम कीचड़ फैलने और हेट स्पीच को रोकना था, लेकिन वह खुद कीचड़ में लोटता रहा. पवन खेड़ा ने इन भी मुद्दों पर राहुल गांधी के रुख को एक सैद्धांतिक स्टैंड बताया है.

SIR में टारगेट करके वोट काटे गए- पवन खेड़ा

पवन खेड़ा ने कहा कि SIR के जरिए लक्षित वोट कटौती की गई. जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहता था वहां 10 से 20 टारगेट वोट काटने का आरोप लगाया. उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया गया है और कहा कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चोरों के साथ मिल गए हैं और उन्हें विधानसभा ले जा रहे हैं.

मुस्लिम लीग वाली टिप्पणी और बंगाल हिंसा पर क्या बोले खेड़ा?

कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मुद्दे पर खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में 78 फीसद हिंदू और 12 फीसद मुस्लिम विधायक होने के बावजूद बीजेपी का आईटी सेल और मीडिया कांग्रेस को मुस्लिम लीग बताता है. वहीं पश्चिम बंगाल में परिणामों के बाद हुई हिंसा के पीछे खेड़ा ने दिल्ली का हाथ बताया है. उन्होंने इसे ‘दादागिरी’ बताते हुए पीएम से इसे रोकने की अपील की है.

बंगाल की जिन सीटों पर लोगों को मताधिकार से वंचित रखा गया और जहां जीत का अंतर कम है, वहां खेड़ा ने दोबारा मतदान कराने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट से इसे संज्ञान में लेने का आग्रह किया. वहीं TVK को समर्थन देने पर उन्होंने दिसंबर 2013 में DMK के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा को उन्होंने ‘बैक स्टेबिंग’ बताने वालों पर पलटवार करते हुए कहा कि TVK के साथ जाना कीचड़ फैलने से रोकना है, और यही उन्होंने किया.