Home Blog Page 133

बिहार में कल सम्राट कैबिनेट का विस्तार, नीतीश कुमार के बेटे निशांत बनेंगे मंत्री…

0

बिहार में कल यानी गुरुवार को सम्राट कैबिनेट का विस्तार होगा. खबर है कि पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार मंत्री बनेंगे. निशांत ने पहले मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया था.

बिहार में कल यानी गुरुवार को सम्राट कैबिनेट का विस्तार होगा. इससे पहले वहां से एक बड़ी खबर सामने आई है. पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार मंत्री बनेंगे. जानकारी के मुताबिक, जेडीयू के नेताओं ने निशांत को इसके लिए राजी कर लिया है. निशांत ने पहले मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया था.

यही कारण है कल यानी 7 मई को प्रस्तावित उनकी सद्भाव यात्रा भी स्थगित कर दी गई है. अब यह यात्रा 9 मई से दोबारा शुरू हो सकती है. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सम्राट मंत्रिमंडल का विस्तार होना है. पूरे जोर शोर से इसकी तैयारी हो रही है. समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शामिल होंगे.

15-15 का फॉर्मूला लागू हो सकता है?

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जेडीयू के बीच 15-15 का फॉर्मूला लागू हो सकता है. इसके तहत भाजपा के 13 और जेडीयू के 12 मंत्री शामिल हो सकते हैं. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास, जीतन राम मांझी की पार्टी हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. दिल्ली रवाना होने से पहले सीएम सम्राट ने नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी.

तमिलनाडु में कांग्रेस ने डीएमके से तोड़ा गठबंधन, विजय की पार्टी TVK को दिया समर्थन…

0

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में नई सरकार के गठन से पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने के बाद डीएमके से गठबंधन तोड़ दिया है.

एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके की जीत के साथ तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है. नई सरकार के गठन की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने डीएमके के साथ चले आ रहे लंबे समय के गठबंधन को तोड़कर टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है.

कांग्रेस ने कहा कि ‘टीवीके के साथ उसका गठबंधन न केवल इस सरकार के गठन के लिए है, बल्कि स्थानीय निकाय संगठनों, लोकसभा और राज्यसभा के भावी चुनावों के लिए भी है.’  हालांकि, तमिलनाडु में टीवीके को समर्थन देने के बाद भी केंद्र में ‘इंडिया ब्लॉक’ में कांग्रेस डीएमके का साथ बना रह सकता है. कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर ने कहा, ‘टीवीके से हमारी एकमात्र शर्त यह है कि हम नहीं चाहते कि भाजपा के किसी भी सहयोगी दल को इस गठबंधन में शामिल किया जाए. हम डीएमके के साथ ‘इंडिया’ गठबंधन में बने रहेंगे.’

टीवीके को कांग्रेस का समर्थन

इससे पहले कांग्रेस ने विजय की पार्टी टीवीके को सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा की थी. यह फैसला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाद लिया गया.  ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडणकर ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि टीवीके अध्यक्ष विजय ने कांग्रेस से औपचारिक रूप से समर्थन मांगा था.

समर्थन के लिए रखी ये शर्त

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता खासकर युवाओं ने साफ और मजबूत जनादेश दिया है, जो एक धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और जनकल्याणकारी सरकार के पक्ष में है. कांग्रेस ने इस जनादेश का सम्मान करते हुए टीवीके को ‘पूर्ण समर्थन’ देने का फैसला लिया है. हालांकि, पार्टी ने यह भी साफ किया है कि यह समर्थन एक शर्त के साथ होगा. कांग्रेस ने कहा कि इस गठबंधन में ऐसी किसी भी ‘सांप्रदायिक ताकत’ को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जो भारत के संविधान में भरोसा नहीं रखती हो.

प्रेस रिलीज में यह भी कहा गया कि टीवीके और कांग्रेस का यह गठबंधन केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी साथ मिलकर काम करेगा. दोनों पार्टियां पेरुंथलाइवर कामराज, पेरियार और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों पर चलते हुए सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगी.

बंगाल में नई सरकार बनने की हलचल तेज, EC ने भेजा नोटिफिकेशन, 8 मई को BJP विधायक दल की बैठक…

0

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर कवायद तेज हो गई है. चुनाव आयोग ने नई विधानसभा के गठन को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.

4 मई को नतीजे आने के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तस्वीर साफ हो चुकी है. 207 सीटें जीतकर बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है तो वहीं करीब डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. चुनाव के नतीजे आने के बाद नई विधानसभा के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं. चुनाव आयोग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नोटिफिकेशन को राज्यपाल के पास भेज दिया गया है, इसके साथ ही नई सरकार बनने का रास्ता भी साफ हो गया है. सूत्रों की मानें तो 8 मई को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है. इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री और बंगाल के पर्यवेक्षक बने अमित शाह कोलकाता जा सकते हैं.

7 मई को खत्म हो रहा कार्यकाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है. चुनाव आयोग का ये नोटिफिकेशन पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाने और अपना इस्तीफा देने से इनकार करने के बीच में आया है. कोलकाता में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने की संभावना से इनकार कर किया. उन्होंने कहा, ‘मैं अब इस्तीफा क्यों दूं? हम असल मायने में नहीं हारे हैं. ये परिणाम बड़े पैमाने पर  धांधली और वोटों की लूट को दिखाते हैं तो फिर इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?’

बंगाल में कब हो सकता है शपथग्रहण?

सूत्रों की मानें तो पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथग्रहण 9 मई को हो सकता है, इसी दिन गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है, इसलिए इसे खास माना जा रहा है. इससे पहले बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी सरकार के शपथ ग्रहण को लेकर जानकारी दी  थी. उन्होंने कहा कि 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है, उसी दिन शपथ ग्रहण समारोह होगा और इसकी घोषणा प्रधानमंत्री की ओर से की जा चुकी है.

सरकार बनाने का रास्ता खुला

पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में भी नई विधानसभा के गठन को लेकर चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है. चुनाव आयोग की अधिसूचनाओं से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में विजयी दलों के नेताओं को पिछली राज्य विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले सरकार गठन का दावा पेश करने का रास्ता खुल गया है. तमिलनाडु  विधानसभा का कार्यकाल 10 मई, असम का 20 मई, केरल का 23 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म हो रहा है.

बंगाल में बवाल के बाद तनाव, कोलकाता के बाद अब संदेशखाली में पुलिस-सेंट्रल फोर्स पर फायरिंग…

0

बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद से राज्य में कई जगह हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. संदेशखाली में राजनीतिक तनाव भड़क गया. उपद्रवियों ने सेंट्रल फोर्स-पुलिस पर गोलीबारी की.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है. कई जगहों से हिंसा, झड़प और तोड़फोड़ की खबरें सामने आ रही हैं. मंगलवार (5 मई) को संदेशखाली के बामनघेरी क्षेत्र में राजनीतिक तनाव भड़क गया. उपद्रवियों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पुलिस पर गोलीबारी की. फायरिंग में तीन सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं.

संदेशखाली में सरबेरिया-अगरती ग्राम पंचायत के बामनघेरी क्षेत्र (वार्ड संख्या 14) में राजनीतिक तनाव भड़क उठा. मंगलवार देर रात जब केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पुलिस का एक दल इलाके में गश्त करने गया था, इसी दौरान उपद्रवियों ने कथित तौर पर उन पर गोलीबारी की. फायरिंग की घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है.

कई इलाकों से हिंसा की घटनाएं आईं सामने

इससे पहले मंगलवार को कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. आरोप है कि इस घटना में टीएमसी समर्थकों का हाथ है. इस हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा फैल गया. हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भीड़ को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.

न्यूटाउन ही नहीं, राज्य के कई और इलाकों से भी हिंसा की खबरें आई हैं. हावड़ा के जगतबल्लभपुर में टीएमसी के दफ्तर में आग लगा दी गई, जबकि कोलकाता के हॉग मार्केट इलाके में भी जमकर बवाल हुआ. वहीं, जलपाईगुड़ी, साउथ 24 परगना और आसनसोल जैसे इलाकों में भी टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं.

हिंसा की घटनाओं को लेकर EC सख्त

हिंसा की घटनाओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ निर्देश दिया है कि जो भी लोग हिंसा भड़काने या तोड़फोड़ में शामिल हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए. CEC ने राज्य के बड़े अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव, डीजीपी, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख महानिदेशकों (डीजी) को अलर्ट रहने को कहा है. साथ ही सभी जिलों के डीएम, एसपी और पुलिस अधिकारियों को लगातार गश्त करने का आदेश दिया गया है ताकि हालात काबू में रहें.

चुनाव आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हिंसा भड़काने और तोड़फोड़ करने वाले तुरंत गिरफ्तार होंगे.

तमिलनाडु में AIADMK के होंगे दो टुकड़े, विजय ने डाली दरार! 30 विधायक टूटेंगे?

0

तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके को सबसे ज्यादा सीटें मिलने के बाद राज्य की सियासी हलचल बढ़ी हुई है. विजय को समर्थन देने को लेकर AIADMK में दो फाड़ हो सकती है.

तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. विधानसभा चुनाव में एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है. टीवीके को समर्थन देने के लिए राजनीतिक दल सियासी गुणा-गणित सेट करने में जुटे हैं.इसी क्रम में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम’ (AIADMK) में बगावत के सुर उठते दिख रहे हैं. टीवीके के समर्थन को लेकर पार्टी दो फाड़ होती नजर आ रही है. AIADMK की आज (6 मई) को होने वाली विधायक दल की बैठक भी टल गई है.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 47 MLA में से ज्यादातर TVK को सपोर्ट करने की मांग कर रहे हैं. अप्रत्यक्ष तौर पर पूर्व सीएम और AIADMK के सीनियर लीडर एडप्पाडी को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने जल्द फैसला नहीं लिया तो 30 से ज्यादा MLA पार्टी तोड़कर विजय को सपोर्ट कर देंगे. इस बगावत का नेतृत्व CV षणमुगम कर रहे हैं, ऐसी खबर मिल रही है कि उनके घर पर कुछ देर में एआईएडीएमके MLA पहुंच सकते हैं.

विधायकों की बैठक टली

एआईएडीएमके के नवनिर्वाचित विधायकों की बुधवार (6 मई) को चेन्नई में बैठक होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर यह टल गई. पार्टी का एक धड़ा विजय की पार्टी टीवीके को कम से कम एक साल के लिए बाहर से समर्थन देने के पक्ष में है. यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि टीवीके राज्य विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से पीछे है. तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटें जरूरी हैं, जबकि टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं.

टीवीके ने अकेले चुनाव लड़ा था, इसलिए अब डीएमके और एआईएडीएमके दोनों खेमों की पार्टियों से बातचीत तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, डीएमके गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस, जिसने पांच सीटें जीती हैं, विजय को समर्थन देने के लिए ज्यादा इच्छुक मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी का विजय को फोन कर बधाई देना भी संभावित सहयोग के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

एआईएडीएमके गठबंधन की सहयोगी पीएमके ने चार सीटें जीती हैं, वह भी समर्थन देने के लिए तैयार दिख रही है. जल्द ही पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास और विजय की मुलाकात होने की चर्चा है. विजय पहले ही गठबंधन सरकार के लिए अपनी सहमति जता चुके हैं, जिससे छोटे दलों को कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. अगर एआईएडीएमके बाहर से समर्थन देती है, तो विजय आसानी से बहुमत हासिल कर सकते हैं और सरकार पर मजबूत पकड़ बनाए रख सकते हैं.

थलपति विजय की जीत से क्या बदल जाएगी तमिलनाडु की किस्मत? ज्योतिष से मिल रहे चौंकाने वाले संकेत…

0

थलपति विजय का तमिलनाडु की सीएम कुर्सी तक पहुंचना महज उनकी लोकप्रियता नहीं बल्कि ग्रहों का भी अहम योगदान है, राहु ने कैसे विजय को राजनीति के शीर्ष पर पहुंचाया देखें.

तमिलनाडु चुनाव में विजय थलपति की विजय महज उनकी लोकप्रियता की वजह से नहीं बल्कि इसके पीछे राहु और मूलांक 4 की अहम भूमिका है. राहु ने कैसे बनाया विजय को तमिलनाडु का किंग जानें

फिल्म जगह में झंडे गाड़ने के बाद अब जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने राजनीति के मैदान में दबदबा बना लिया है. सफल एवं लोकप्रिय राजनेता बनने के लिए कुंडली में कुछ विशेष ग्रह-नक्षत्रों का प्रबल होना आवश्यक है.

थलपति विजय को मिला राहु का साथ 

महज 2 साल पहले तमिलनाडु की पॉलिटिक्स ( TVK पार्टी) से जुड़े साउथ सिनेमा के स्टार कलाकार विजय थलपति अब सीएम के दावेदार हैं. विजय की इस प्रचंड जीत के पीछे राहु का खेल है, क्योंकि राहु जीवन में अचानक होने वाले बदलाव के लिए जाना जाता है.  विजय का पॉलिटिक्स में आना और उनकी तेजी से सफलता इसका एक बेहतरीन उदाहरण है.

मूलांक 4 और राहु का कनेक्शन

विजय थलपति का जन्म 22 जून 1974 को हुआ और अंक ज्योतिष के अनुसार उनका मूलांक 22 यानि 2 + 2 = 4 है. न्यूमरोलॉजी में मूलांक 4 के बॉस राहु हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राजनीति के संदर्भ में राहु का शुभ होना व्यक्ति को पॉलिटिक्स का किंग बना देता है.

खूबियां मूलांक 4 वाले लोगों अचानक बदलाव और लीक से हटकर सोचने के लिए जाने जाते हैं, इसमें राहु अहम भूमिका निभाता है. राहु नीति कारक का ग्रह है. इसकी शुभता व्यक्ति को राजनीति में बुलंदियों तक पहुंचा देती है.

किसी भी व्यक्ति का जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 और 31 तारीख को हुआ है. ऐसे लोगों का मूलांक 4 होता है. इसका स्वामी चूंकि मायावी ग्रह राहु है. राहु का प्रभाव व्यक्ति इन्हें यूनिक बनाता है

क्या तमिलनाडु के CM बनेंगे थलपति ? 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार भारत की कुंडली में राहु की महादशा चल रही है और विजय थलपति की कुडंली में भी राहु की महादशा है. राहु की अहम भूमिका के चलते उन्हें प्रचंड जीत तो मिल गई है लेकिन उनकी कुंडली में शनि की स्थिति कुछ देरी और बाधाओं का संकेत दे रही है, इसलिए CM बनने में समय लग सकता है.हालांकि ग्रहों के अनुसार भविष्य में उनके शीर्ष पद तक पहुंचने की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं.

विजय थलपति की कुंडली में अष्टकवर्ग के अनुसार दशम भाव (सत्ता और करियर का घर) का स्कोर 30 से अधिक है जो बेहद मजबूत स्थिति मानी जाती है. ज्योतिष सिद्धांत कहते हैं कि जब दशम भाव इतना सशक्त हो और उस पर बृहस्पति का शुभ प्रभाव मिले, तो व्यक्ति के लिए उच्च सत्ता और शीर्ष पद तक पहुंचना लगभग तय रहता है.

2026 मूलांक 4 के लिए कैसा रहेगा 

मेहनत, अनुशासन और करियर में स्थिरता व तरक्की का साल है. 2026 सूर्य का वर्षहोने से यह राहु के प्रभाव को अनुशासित करेगा. करियर में नई ऊंचाइयां और प्रमोशन मिल सकते हैं, जबकि आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी. अप्रैल, अगस्त और नवंबर-दिसंबर विशेष रूप से अच्छे रह सकते हैं.

नेशन फर्स्ट हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत CM योगी….

0

सीएम योगी ने कहा कि नेशन फर्स्ट केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय सैनिक के जीवन का संकल्प है. यह हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब लड़ाई सीमाओं से बढ़कर साइबर, स्पेस, डेटा नेटवर्क और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम तक फैल चुकी है. पारंपरिक युद्ध कौशल के साथ-साथ अब तकनीकी दक्षता, रणनीतिक सोच और मानसिक दृढ़ता भी अनिवार्य हो गई है. आज के युद्ध में कीबोर्ड, सेटेलाइट और डेटा उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने पारंपरिक हथियार. दुश्मन के संचार नेटवर्क को बाधित करना तथा अपने सिस्टम को सुरक्षित रखना नई युद्ध रणनीति का आधार बन रहा है. ऐसे परिदृश्य में वही राष्ट्र आगे रहेगा, जो साहस और तकनीक के बीच संतुलन स्थापित कर सके.

‘नेशन फर्स्ट सिर्फ एक नारा नहीं’

सीएम योगी बुधवार को प्रयागराज में ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम (एनटीएस) 2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान सीएम ने कहा कि ‘नेशन फर्स्ट’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय सैनिक के जीवन का संकल्प है. यह हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरि है और उससे बढ़कर कुछ भी नहीं.

‘आधुनिक युद्ध में कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सियाचिन की जमाने वाली ठंड हो, रेगिस्तान की तपती रेत, घने जंगलों का अंधकार या समुद्र व आकाश की अनंत चुनौतियां, हमारे सैनिक हर परिस्थिति में तत्पर रहते हैं. उनकी सतर्क निगाहों के कारण ही पूरा देश सुरक्षित और निश्चिंत रह पाता है. आधुनिक युद्ध अब केवल जल, थल और नभ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के युग में प्रवेश कर चुका है.

उन्होंने कहा कि युद्ध में साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं. कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार बन चुका है. दुश्मन के पावर ग्रिड, राडार, जीपीएस, बैंकिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम को बाधित करना या अपने नेटवर्क को सुरक्षित व अभेद्य बनाना, नई सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है. सेटेलाइट्स के माध्यम से निगरानी, खुफिया जानकारी और नेविगेशन अब युद्ध की ‘आंख’ और ‘दिमाग’ बन चुके हैं. अब लड़ाई सिग्नल्स और डेटा के माध्यम से भी लड़ी जा रही है.

‘डिफेंस सेक्टर में यूपी ने की उल्लेखनीय प्रगति’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध जैसी स्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है. कुछ वर्ष पहले भारत का रक्षा निर्यात लगभग 600 करोड़ रुपये ही था, लेकिन निरंतर प्रयासों से आज हमारी सामर्थ्य 38 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये तक के रक्षा उत्पाद निर्यात करने की है. भारत अब मित्र देशों को रक्षा उत्पाद उपलब्ध करा रहा है.

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. राज्य में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह प्रमुख नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट पर तेजी से कार्य हो रहा है. इन नोड्स में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर रहे हैं. सरकार ने डिफेंस एवं एयरोस्पेस पॉलिसी के तहत बड़े लैंड बैंक का निर्माण किया है और निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. अलीगढ़ छोटे हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जबकि कानपुर गोला-बारूद, मिसाइल, डिफेंस टेक्सटाइल और प्रोटेक्टिव गियर के उत्पादन का महत्वपूर्ण हब बन रहा है.

उन्होंने कहा कि लखनऊ और झांसी नोड्स में ब्रह्मोस मिसाइल और हैवी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की सैन्य क्षमता और मजबूत हो रही है. चित्रकूट और आगरा नोड्स में एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विकास जारी है, ताकि स्पेस डोमेन सहित रक्षा के सभी आयामों में देश की क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके.

‘यूपी डिफेंस कॉरिडोर सैनिकों की क्षमता और सुरक्षा में मददगार’

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत तोप के गोले, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है. डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उत्तर प्रदेश में उपलब्ध हैं. प्रदेश के पास 56 प्रतिशत युवा एवं स्किल्ड वर्कफोर्स और 96 लाख एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है. सभी 6 स्ट्रेटेजिक नोड्स पर पर्याप्त लैंड बैंक भी उपलब्ध है.

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार स्किल, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के माध्यम से मार्केट-रेडी और इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इसी क्रम में आईआईटी कानपुर के साथ ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया गया है, जबकि स्टेट फॉरेंसिक संस्थान के माध्यम से भी विभिन्न क्षेत्रों में नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं. सभी स्ट्रेटेजिक नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है.

‘ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकारना हमारी परंपरा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सिम्पोजियम के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री के विजन को साकार होते देखना गर्व का विषय है. यह सिम्पोजियम ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है. उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकार करना हमारी परंपरा रही है और यह सिम्पोजियम उसी भावना को आगे बढ़ा रहा है.

‘हाईटेक क्षेत्रों में स्थापित हुए स्टार्टअप’

सीएम योगी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 21,000 से अधिक स्टार्टअप्स स्थापित हुए हैं, जो एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाईटेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. सेफ्टी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के समन्वय से प्रदेश ने बीमारू छवि को पीछे छोड़ते हुए देश के ग्रोथ इंजन के रूप में पहचान बनाई है. अपराध और अव्यवस्था के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति हमारा संकल्प रहा है. माफिया से कानून के राज और उपद्रव से उत्सव तक की यात्रा तय करते हुए यूपी इस मुकाम तक पहुंचा है.

‘हमारी उदारता को कोई कमजोरी न समझें’

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत को आत्मसात किया है. उदारता हमारे संस्कार का हिस्सा है, लेकिन इसकी रक्षा के लिए शक्ति व सामर्थ्य का होना अनिवार्य है. उन्होंने इस संदर्भ में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षमा व शांति की भाषा वही प्रभावी ढंग से बोल सकता है, जिसके पास पर्याप्त शक्ति हो. भारत अपनी सामरिक और आंतरिक शक्ति इसलिए नहीं बढ़ा रहा कि किसी पर आक्रमण करे, बल्कि इसलिए कि उसकी उदारता को कोई कमजोरी न समझे.

‘यूपी का कानून-व्यवस्था मॉडल देश-दुनिया में उदाहरण’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमने वर्ष 2017 में सत्ता संभाली, प्रदेश अराजकता, अव्यवस्था और पहचान के संकट से जूझ रहा था. तब हमने ‘रूल ऑफ लॉ’ को स्थापित करने का संकल्प लिया और अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पूरी सख्ती के साथ लागू की. आज उत्तर प्रदेश का कानून-व्यवस्था मॉडल देश-दुनिया में एक उदाहरण है. इसी सुदृढ़ कानून-व्यवस्था ने प्रदेश में विश्वसनीय और निवेश अनुकूल इकोसिस्टम तैयार किया, जिसने उद्योग व रोजगार के नए अवसरों को गति दी. डिफेंस कॉरिडोर भी इसका एक हिस्सा है. आज प्रदेश के पास एक्सप्रेसवे, हाईवे, आधुनिक रेलवे कनेक्टिविटी, मेट्रो नेटवर्क व एयर कनेक्टिविटी के रूप में देश का विशालतम इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क है.

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, लेफ्टिनेंट जनरल वी. हरिहरन, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, एसआईडीएम के वाइस प्रेसिडेंट नीरज गुप्ता, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ए.के. घोष के साथ ही सेना के कई वरिष्ठ अधिकारीगण और स्टेकहोल्डर्स उपस्थित रहे.

Top Selling Diesel Cars India: इन 10 डीजल कारों का दबदबा! बिक्री में सबको छोड़ा पीछे, देखें सेल्स रिपोर्ट…

0

FY 2026 में सबसे ज्यादा बिकने वाली 10 डीजल कारों की लिस्ट सामने आ गई है. आइए जानें कौन सी कार रही नंबर 1 और किसे कितने ग्राहक मिले हैं. भारत में डीजल कारों की मांग हमेशा बनी रहती है क्योंकि ये पेट्रोल कारों के मुकाबले ज्यादा माइलेज देती हैं और लंबी दूरी के लिए बेहतर मानी जाती हैं. डीजल इंजन मजबूत होता है, जिससे कार की परफॉर्मेंस भी अच्छी रहती है. यही कारण है कि हर साल लाखों लोग डीजल कार खरीदना पसंद करते हैं. वित्त वर्ष 2026 में भी कई डीजल कारों ने शानदार बिक्री दर्ज की है और ग्राहकों का भरोसा जीता है.

टॉप 10 डीजल कारों की लिस्ट

वित्त वर्ष 2026 में सबसे ज्यादा बिकने वाली डीजल कारों में Mahindra और Hyundai का दबदबा देखने को मिला. इस लिस्ट में Mahindra Scorpio, Bolero, Hyundai Creta, Thar Roxx, XUV700, Thar, Toyota Innova Crysta, Fortuner, Kia Seltos और Kia Sonet शामिल हैं. इन सभी कारों ने अपनी दमदार परफॉर्मेंस, भरोसेमंद इंजन और अच्छे फीचर्स के कारण ग्राहकों को खूब लुभाया है.

किस कार को मिले सबसे ज्यादा ग्राहक

  • इस साल Mahindra Scorpio ने सबसे ज्यादा बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया. इसकी कुल 1,70,372 यूनिट्स बिकीं और इसका मार्केट शेयर करीब 19.7% रहा.
  • दूसरे नंबर पर Mahindra Bolero रही, जिसे 1,10,136 लोगों ने खरीदा.
  • तीसरे स्थान पर Hyundai Creta का डीजल मॉडल रहा, जिसकी 91,907 यूनिट्स बिकीं.
  • इसके बाद चौथे नंबर पर Mahindra Thar Roxx रही, जिसकी 72,336 यूनिट्स की बिक्री हुई.
  • पांचवें स्थान पर Mahindra XUV700 रही, जिसे 44,546 ग्राहकों ने खरीदा. इसके बाद Mahindra Thar छठे नंबर पर रही, जिसकी 43,030 यूनिट्स बिकीं.
  • सातवें स्थान पर Toyota Innova Crysta रही, जिसकी 37,090 यूनिट्स बिकीं. आठवें नंबर पर Toyota Fortuner रही, जिसे 34,157 ग्राहकों ने खरीदा.
  • नौवें स्थान पर Kia Seltos रही, जिसकी 31,784 यूनिट्स बिकीं, और दसवें नंबर पर Kia Sonet रही, जिसे 30,858 लोगों ने खरीदा.

डीजल कारों का भविष्य

आज के समय में भले ही इलेक्ट्रिक कारों की चर्चा बढ़ रही है, लेकिन डीजल कारों की पॉपुलेरिटी अभी भी कम नहीं हुई है. खासकर SUV सेगमेंट में डीजल इंजन की मांग ज्यादा बनी हुई है. आने वाले समय में भी ये कारें अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख सकती हैं.

5 राज्यों में कुल कितने मुस्लिम कैंडिडेट्स चुनाव जीते? बंगाल में सबसे ज्यादा, पुडुचेरी में मुश्किल से…

0

बंगाल और तमिलनाडु समेत 5 राज्यों में कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए. इसमें कुल 107 मुस्लिम कैंडिडेट्स चुनकर विधानसभा पहुंचे. इस बार बीजेपी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा.

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने हर तरफ चौंकाने वाली राजनीतिक तस्वीर बना दी है. एक ओर जहां बीजेपी ने पश्चिम बंगाल और असम में जोरदार वापसी करते हुए सरकार बनाई, वहीं दूसरी ओर केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने एक दशक बाद सत्ता में वापसी की. इस पूरे चुनावी घमासान के बीच मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन एक अहम सवाल बना रहा. इन पांच राज्यों की कुल 824 विधानसभा सीटों में से करीब 107 पर मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, लेकिन बीजेपी के खाते में एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है.

पश्चिम बंगाल: सबसे ज्यादा 40 मुस्लिम विधायक, लेकिन TMC का आधार खिसका

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस बार 40 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. हालांकि, 2021 के चुनाव में यह संख्या 44 थी, यानी TMC के मुस्लिम विधायकों की तादाद 43 से घटकर 34 रह गई है. वहीं गैर-TMC और गैर-बीजेपी मुस्लिम विधायकों की संख्या 1 से बढ़कर 6 हो गई है. इनमें कांग्रेस के दो, आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के दो, माकपा का एक और ISF का एक विधायक शामिल है. बीजेपी ने इस बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था, जिसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिला.

केरल: 35 मुस्लिम विधायक, UDF का दबदबा बढ़ा

140 सीटों वाली केरल विधानसभा में 35 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जो कुल विधायकों का 25 प्रतिशत है. 35 विधायकों में 30 मुस्लिम विधायक सत्ताधारी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के हैं, जिसमें कांग्रेस के 8 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के 22 विधायक शामिल हैं. विपक्षी माकपा के चार और भाकपा के एक मुस्लिम विधायक भी चुनकर आए हैं. केरल में मुस्लिम विधायकों की संख्या में पिछली बार की तुलना में तीन सीटों का इजाफा हुआ है, जो UDF की मजबूत पकड़ को दर्शाता है.

असम: 22 मुस्लिम विधायक, कांग्रेस के 18 मुसलमान उम्मीदवारों को मौका

असम की 126 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 22 मुस्लिम उम्मीदवार विधायक बने हैं. पिछली विधानसभा में यह आंकड़ा 31 था, यानी इस बार 9 सीटों की गिरावट दर्ज की गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के कुल 19 विधायकों में से 18 मुस्लिम समुदाय से हैं. इसके अलावा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के दो, रायजर दल का एक और तृणमूल कांग्रेस का एक मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचा है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे राज्य के बदले राजनीतिक समीकरण और परिसीमन को बड़ी वजह माना जा रहा है.

तमिलनाडु: 9 मुस्लिम विधायक, DMK और AIUML का प्रतिनिधित्व  

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में इस बार 9 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है. इनमें DMK के तीन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के दो, कांग्रेस का एक और विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के तीन मुस्लिम विधायक शामिल हैं. राज्य की 5.86 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के मुकाबले विधानसभा में इनकी हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत है, जो बेहद कम है.

पुडुचेरी:  30 में से सिर्फ 1 मुस्लिम विधायक चुना गया

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा में इस बार एक ही मुस्लिम उम्मीदवार जीत दर्ज कर पाया है. DMK के उम्मीदवार ए.एम.एच. नजीम इकलौते मुस्लिम विधायक बने हैं. उन्होंने कराईकल साउथ सीट से जीत हासिल की है. 6.05 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस प्रदेश में यह स्थिति राजनीतिक दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों को प्रतिनिधित्व न दिए जाने का नतीजा मानी जा रही है.

क्या कहते हैं कुल आंकड़े?

राज्य कुल सीटें मुस्लिम विधायक
पश्चिम बंगाल 294 40
केरल 140 35
असम 126 22
तमिलनाडु 234 9
पुडुचेरी 30 1
कुल 824 107

पांचों राज्यों को मिलाकर 107 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं, जो कुल 824 (वर्तमान घोषित) विधायकों का करीब 14.40 प्रतिशत है. हालांकि, इनमें से एक भी बीजेपी का उम्मीदवार नहीं है क्योंकि पार्टी ने किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था. केरल और असम में मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत दर 80 प्रतिशत से ज्यादा रही, जबकि तमिलनाडु और पुडुचेरी में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बेहद कमजोर रहा. यह आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम मतदाताओं ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग रुख अपनाया, लेकिन राजनीतिक दलों से उन्हें उम्मीदवारी मिलने में अब भी बड़ा फासला नजर आता है.

बंगाल में BJP की बंपर जीत के बाद बांग्लादेश ने लगा ली भारत से बड़ी उम्मीद…

0

बंगाल चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद बांग्लादेश ने भारत को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने तीस्ता जल समझौते पर फिर से विचार की बात की है.

बंगाल चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने भारत को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए लंबे समय से अटके तीस्ता जल समझौते पर फिर से विचार किया जा सकता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ममता बनर्जी को भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल विवाद को सुलझाने की कोशिशों में एक रुकावट के तौर पर देखा जाता रहा है.

क्या बोले बांग्लादेश के विदेश मंत्री?
चीन की यात्रा पर रवाना होने से पहले ढाका में पत्रकारों ने जब खलीलुर रहमान से पूछा कि क्या अभी भी लंबे समय से अटके तीस्ता नदी के पानी बंटवारे को लेकर समझौते की उम्मीद है तो उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि पश्चिम बंगाल में अभी तक नई सरकार नहीं बनी हैं और वे क्या सोचते हैं या क्या करेंगे, यह बताना उनका काम है. उनके मन की बात पढ़ना मेरा काम नहीं है.

इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने 2011 में बनी सहमति का जिक्र करते हुए समझौते पर फिर से विचार की उम्मीद जताई है. खलीलुर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश भारत के फैसले का इंतजार नहीं करेगा, क्योंकि ये नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए जीवन-मरण का सवाल है.

ममता बनर्जी ने किया था विरोध
साल 2011 में बांग्लादेश और भारत के बीच तीस्ता समझौते पर सहमति बन गई थी. उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण ये समझौता ठंडे बस्ते में चला गया. इसके बाद बांग्लादेश ने तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना शुरू की. शेख हसीना ने 2019 में बीजिंग यात्रा के दौरान परियोजना के लिए चीन से सहायता मांगी थी.

ढाकादिल्ली संबंध और बेहतर होंगे
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने सोमवार को पश्चिम बंगाल चुनाव को भारत का एक घरेलू घटनाक्रम बताया था. इसके बाद सत्ताधारी बीएनपी के मीडिया सेल के सदस्य सैरुल कबीर खान ने ढाका-दिल्ली संबंधों में सकारात्मक घटनाक्रम की उम्मीद जताई.