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2 राज्यों में किंगमेकर बनी IUML, बंगाल में भी बढ़ा जनाधार…कांग्रेस को मिल गई ओवैसी की पार्टी की काट?

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केरलम और तमिलनाडु में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग किंगमेकर की भूमिका में आ गई है. समीकरण के लिहाज से दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने के लिए IUML के विधायक जरूरी हो गए हैं. वहीं बंगाल में भी इस पार्टी का जनाधार बढ़ा है. सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस को ओवैसी की काट मिल गई है?

5 राज्यों के चुनाव परिणाम ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. पार्टी केरल और तमिलनाडु में किंगमेकर की भूमिका में आ गई है. दोनों ही राज्यों में IUML के बिना सरकार गठन मुश्किल है. केरल में IUML कांग्रेस के साथ सत्ता में आ सकती है. वहीं तमिलनाडु में पार्टी का एक्टर विजय की टीवीके के साथ गठबंधन हो सकता है. चुनाव आयोग के मुताबिक IUML को 140 सीटों वाली केरल में 22 और 234 सीटों वाली तमिलनाडु में 2 सीटों पर जीत मिली है.

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दक्षिण की सियासत में 1948 से ही एक्टिव है. 1951 में इस पार्टी ने भारत के संविधान को अपनाया था. IUML केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में मुसलमानों के मुद्दे पर मुखर रहती है.

पहले IUML के बारे में जानिए

केएम कादर मोहिदीन इसके अभी अध्यक्ष हैं. कादर पहले वेल्लोर सीट से सांसद रह चुके हैं. पार्टी केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में चुनाव लड़ती रही है. हालांकि, इसका बड़ा जनाधार केरल और तमिलनाडु में है. 2024 में पार्टी को लोकसभा की 3 सीटों पर जीत मिली थी, जिसमें 2 केरल की थी.

मुहम्मद इस्माइल इस पार्टी के पहले अध्यक्ष थे. एक जमाने में जीएम बनाथवाला इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे, जो संसद से सड़क तक काफी मुखर रहते थे. इस पार्टी का चुनाव चिन्ह सीढ़ी है. पार्टी के अधिकांश नेता मुस्लिम समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं.

2026 के चुनाव में IUML का दबदबा

चुनाव आयोग के मुताबिक केरल में IUML को 22 सीटों पर जीत मिली है. केरल में विधानसभा की 140 सीट है, जहां सरकार बनाने के लिए 71 विधायकों की जरूरत होती है. कांग्रेस केरल की सबसे बड़ी पार्टी चुनी गई है, जिसके पास 63 सीट है. सरकार में IUML किंगमेकर की भूमिका में रहेगी. केरल चुनाव में इंडियन मुस्लिम लीग को करीब 23 लाख वोट मिले हैं.

इसी तरह तमिलनाडु में पार्टी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की है. यहां पर विधानसभा की 234 सीट है, जहां सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है. टीवीके को 107 सीटों पर जीत मिली है. यहां भी टीवीके कांग्रेस और मुस्लिम लीग के विधायकों पर निर्भर है. तमिलनाडु में मुस्लिम लीग को 1.42 लाख वोट मिले हैं.

इंडियन मुस्लिम लीग के उम्मीदवार बंगाल चुनाव में भी उतरे थे, लेकिन उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली. IUML को इस बार सिर्फ बंगाल में 5 हजार वोट मिले हैं.

कांग्रेस को ओवैसी की काट मिल गई?

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर ओवैसी की पार्टी AIMIM से परेशान रही है. 2020 और 2025 के बिहार चुनाव में AIMIM ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का खेल बिगाड़ा था. इसके अलावा तेलंगाना, महाराष्ट्र, यूपी जैसे राज्यों पर ओवैसी की पार्टी की नजर है. इन राज्यों में इंडिया गठबंधन के दलों का सीधा मुकाबला बीजेपी और एनडीए से है.

ओवैसी की पार्टी भी दक्षिण भारत से ही निकली है और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में उसका मजबूत जनाधार है. मुस्लिम हिस्सेदारी के मसले पर ओवैसी लगातार इंडिया गठबंधन और कांग्रेस को घेरते रहे हैं, लेकिन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का बढ़ता प्रभाव इंडिया गठबंधन, खासकर कांग्रेस के लिए राहत भरा है.

आने वाले वक्त में मुस्लिम इलाकों में इंडिया गठबंधन के लिए IUML मोर्चा संभाल सकता है.

अमित शाह को भाजपा ने बनाया बंगाल का पर्यवेक्षक, नड्डा को असम की जिम्मेदारी….

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बंगाल और असम में बीजेपी की सरकार बन गई है. केरल में कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. हर लाइव अपडेट के लिए यहां बनें रहें.

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे (Assembly Election Results 2026) आ गए हैं. बीजेपी ने 294 सीटों वाले बंगाल विधानसभा (Bengal Election Results 2026) में बंपर जीत हासिल की है. वहीं असम में भी बीजेपी की सरकार एक बार फिर बनी है. केरल में  कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है. तमिलनाडु की बात करें तो वैसे तो इस बार तमिलनाडु में मुकाबला DMK और AIADMK के बजाय त्रिकोणीय रहा. अभिनेता से नेता बने ‘थलापति’ विजय की नई पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही थी और विजय की पार्टी ने राज्य के चुनावी गणित को बदल दिया. वहीं पुडुचेरी विधानसभा में एक बार फिर NDA की सरकार लौटी है. चुनाव के नतीजों के बाद जहां विपक्ष धांधली का आरोप लगा रहा है तो वहीं जनता अब जीती हुई पार्टी से अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसका जवाब ढूंढने में लगी हुई है.

बंगाल विधानसभा चुनाव: तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री चुनाव हारे

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और उनके कई मंत्री चुनाव हार गए. ममता बनर्जी अपने गृह क्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 15,105 मतों से हार गईं. हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ मंत्री शोवनदेब चट्टोपाध्याय, फिरहाद हकीम और जावेद खान चुनाव जीत गए. खान ने दक्षिण कोलकाता के कस्बा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत हासिल की, उन्होंने भाजपा के संदीप मुखर्जी को 20,974 मतों से हराया.

दक्षिण कोलकाता के प्रतिष्ठित बॉलीगंज निर्वाचन क्षेत्र में शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सतरूप को 61,476 मतों से हराया.कोलकाता के महापौर और निवर्तमान ममता बनर्जी मंत्रिमंडल में शहरी विकास मंत्री रहे फिरहाद हकीम ने कोलकाता पोर्ट सीट पर भाजपा के राकेश सिंह को 56,000 से अधिक मतों से हराया. बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी हकीम ने लगातार चौथी बार यह सीट जीती है.

तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी नयना बंदोपाध्याय ने चौरंगी सीट पर भाजपा प्रत्याशी एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी संतोष पाठक को 22,002 मतों से हराया.तृणमूल के मंत्री उदय गुहा दिन्हाटा सीट पर भाजपा के अजय राय से 17,000 से अधिक मतों से हार गए.

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा को श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की पूर्णिमा चक्रवर्ती ने 14,633 मतों से हरा दिया. तृणमूल के आसनसोल उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार और मंत्री मलय घटक भाजपा के कृष्णेंदु मुखर्जी से 11,615 मतों से हार गए. मलय ने तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

बंगाल चुनाव परिणाम देश के राजनीतिक इतिहास का  एक घनघोरकाला दिन’-अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है.यादव ने सोमवार को कई राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के परिणामों की कड़ी आलोचना करते हुए चुनावी प्रक्रिया के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों का वीडियो साझा कर अपनी प्रतिक्रिया में कहा “अब क्या सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे.” उन्होंने कहा कि “देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है। आज पूरा देश आक्रोशित है.

बदलते मौसम का फसल पर भी पड़ता है असर, अभी से ये तैयारियां कर लें किसान…

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बदलते मौसम का सीधा असर अब किसानों की फसलों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी आइए जानते है.

मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा. हर दिन बदलते तापमान, अचानक बारिश और तेज धूप का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है.  खासकर इस समय गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है. इस साल गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ तौर पर देखी जा सकती है. जहां एक ओर समय से पहले तेज गर्मी पड़ रही है, वहीं कई जगहों पर अचानक बारिश भी हो रही है.  तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं के दानों का सही तरीके से विकास नहीं हो पा रहा है. दाने सिकुड़ रहे हैं और उनका वजन भी कम हो रहा है, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. वही पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि मौसम का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है.

मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा. हर दिन बदलते तापमान, अचानक बारिश और तेज धूप का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है.  खासकर इस समय गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है. इस साल गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ तौर पर देखी जा सकती है. जहां एक ओर समय से पहले तेज गर्मी पड़ रही है, वहीं कई जगहों पर अचानक बारिश भी हो रही है.  तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं के दानों का सही तरीके से विकास नहीं हो पा रहा है. दाने सिकुड़ रहे हैं और उनका वजन भी कम हो रहा है, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. वही पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि मौसम का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है.

बदलते मौसम का फसलों पर बढ़ता असर

सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि चना, सरसों और सब्जियों की फसलें भी इस बदलते मौसम से प्रभावित हो रही हैं. चना और सरसों में जहां फूल और दाने झड़ने की समस्या सामने आ रही है, वहीं सब्जियों में गुणवत्ता भी खराब हो रही है. तेज धूप पौधों को झुलसा रही है और अचानक बारिश से फसलों में रोग लगने का खतरा भी बढ़ रहा है.

किसानों के लिए विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.  उनकी सलाह है कि खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करते रहें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न दें इससे भी फसल खराब हो सकती है. जहां तापमान बहुत ज्यादा हो रहा है, वहां फसलों को बचाने के लिए मल्चिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की नमी बरकरार रहती है और पौधों को गर्मी से राहत मिलती है. विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि किसान फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी रोग या कीट का संकेत मिलते ही तुरंत उसका उपचार करें.

कटाई के समय बरतें सावधानी

इसके अलावा, अगर बात कटाई की करें तो विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की कटाई सही समय पर करना बेहद जरूरी है. अगर फसल पूरी तरह पक जाए तो देर नहीं करनी चाहिए. इस समय तेज धूप के बाद अचानक बारिश होने का खतरा रहता है, जिससे खड़ी फसल गिर सकती है और दाने खराब हो सकते हैं. इसलिए मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही कटाई का निर्णय लेना बेहतर माना गया है.

रबी के बाद हरी खाद से बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरता

साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि रबी फसल की कटाई पूरी हो चुकी है, तो खेत को खाली छोड़ने के बजाय उसका सही उपयोग करना जरूरी है. वही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद का इस्तेमाल एक बेहतर विकल्प माना जाता है. इसके लिए आप ढैंचा, सनई और लोबिया जैसी फसलें बो सकते हैं, जो मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने में मदद करती हैं. हालांकि, बुवाई करते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि खेत में पर्याप्त नमी हो, ताकि बीजों का अंकुरण अच्छा हो सके और फसल बेहतर तरीके से विकसित हो.

बदलते दौर में खेती के लिए नई रणनीति जरूरी

बदलते मौसम के इस दौर में खेती करना पहले से कई ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसलिए जरूरी है कि किसान नई तकनीकों और विशेषज्ञों की सलाह को अपनाएं. साथ ही समय रहते सही कदम उठाकर ही फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

Kerala Assembly Elections 2026: केरल में केरल कांग्रेस (जैकब) और केरल कांग्रेस ने अपने किलों को और मजबूत कर लिया है. दोनों पार्टियों ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन. पढ़ें पूरी खबर…..

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Kerala Assembly Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव के परिणामों की तस्वीर साफ हो गई है. राज्य में कांग्रेस ने धमाकेदार वापसी की है. कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यानी यूडीएफ ने ऐतिहासिक वापसी करते भारी जनादेश हासिल किया है. यूडीएफ की 102 सीटों पर जीत के साथ यह परिणाम केरल के चुनावी इतिहास में सबसे प्रभावशाली वापसी में से एक माना जा रहा है, जिसने माकपा-नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश को निर्णायक रूप से रोक दिया.

सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि कांग्रेस से निकले दो अन्य ईसाई बहुल क्षेत्रीय दलों ने भी इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. ये दो दल हैं केरला कांग्रेस और केरला कांग्रेस (जैकब). केरल कांग्रेस और केरल कांग्रेस (जैकब) ने अपने पारंपरिक किलों को न केवल सुरक्षित रखा है, बल्कि भारी अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत कर ली है.

सबसे पहले बात केरला कांग्रेस (जैकब) की

केरल कांग्रेस (जैकब) के दिग्गज नेता अनूप जैकब ने पिरवम सीट पर एक बार फिर अपना परचम लहराया है. उन्होंने 44 हजार 681 वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की, जो इस क्षेत्र में उनकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है. अनूप को कुल 89 हजार 551 वोट मिले और उन्होंने प्रतिद्वंद्वियों को रेस से पूरी तरह बाहर कर दिया.

केरल कांग्रेस ने जीतीं 7 सीटें

केरल कांग्रेस के अन्य गुटों ने भी मध्य केरल और रबर बेल्ट कहे जाने वाले इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया है. पार्टी ने इस चुनाव में सात सीटें अपने नाम की हैं.

थोडुपुझा में अपु जॉन जोसेफ ने 44 हजार 291 के भारी अंतर से जीत हासिल कर अपनी ताकत दिखाई. इन्हें 84 हजार 796 वोट मिले.

कडुथुरुथी में अनुभवी नेता मॉन्स जोसेफ ने 31 हजार 300 वोटों के अंतर से अपनी सीट बचाए रखी. इन्हें 70 हजार 353 वोट मिले.

इरिंजालकुडा में एडवोकेट थॉमस उन्नीयादन ने 10 हजार 212 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि कुट्टनाड में रेजी चेरियन ने 20 हजार 600 वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल की है.

कोठामंगलम, चंगनाचेरी और तिरुवल्ला जैसी सीटों पर भी पार्टी ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईसाइयों और किसान मतदाताओं के बीच यूडीएफ के प्रति बढ़ते भरोसे ने इन उम्मीदवारों की राह आसान कर दी. यह नतीजे न केवल केरल कांग्रेस के गुटों के लिए संजीवनी हैं, बल्कि आगामी सरकार निर्माण में उनकी भूमिका को भी निर्णायक बना रहे हैं.

मोदी-शाह की चुनावी रणनीति, ममता के चक्रव्यूह को भेदने का मास्टरप्लान…

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पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनावी अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से संभाला.

उन्होंने दीदी के माने जाने वाले अभेद्य सियासी दुर्ग को भेदने के लिए पूरी ताकत झोंक दी.

प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव अभियान के दौरान 22 से अधिक बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया, जबकि अमित शाह ने 40 कार्यक्रम आयोजित कर 39 संगठनात्मक जिलों को कवर किया.

भाजपा ने दिल्ली की रणनीति को बंगाल में जमीनी स्तर पर लागू किया. उन्होंने बूथ स्तर पर 71,000 बूथों पर मजबूत पकड़ बनाई और माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल से हर घर तक पहुंच सुनिश्चित की.

मुस्लिम बहुल इलाकों को छोड़कर हर क्षेत्र में छोटे संगठन बनाए गए.

सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को, पटना के गांधी मैदान में नए मंत्री लेंगे शपथ…

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बिहार में राजनीतिक हलचल के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि की घोषणा कर दी गई है.

7 मई को बिहार में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा. ये जानकारी राज्य के राजनीतिक गलियारों से मिली एक बड़ी खबर है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार 7 मई को होगा. इस दिन बिहार के नए मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे.

ये समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, जिसमें सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.

SBI कर्मचारियों ने 25-26 मई 2026 को दो दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान…

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SBI कर्मचारियों ने 25-26 मई 2026 को दो दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. उनकी मांगों में भर्ती, पेंशन, स्टाफ की कमी और आउटसोर्सिंग बंद करना शामिल है, जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) के कर्मचारियों ने देशभर में 2 दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. यह हड़ताल 25 और 26 मई 2026 को होगी. कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने हक, बेहतर कामकाजी माहौल और स्टाफ व ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं.

क्यों हो रही है हड़ताल?

यह हड़ताल अखिल भारतीय भारतीय स्टेट बैंक कर्मचारी संघ (AISBISF) ने बुलाई है. उनका कहना है कि कर्मचारियों की कई समस्याएं अब तक हल नहीं हुई हैं और पुराने समझौतों को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा. 2 मई 2026 को SBI चेयरमैन को भेजे नोटिस में कहा गया कि वर्कमैन कैटेगरी के कर्मचारी Industrial Disputes Act, 1947 के तहत हड़ताल करेंगे. अगर इन तारीखों में छुट्टी हुई, तो हड़ताल 27 मई को होगी.

कर्मचारियों की क्या हैं मांगें?

फेडरेशन ने कुल 16 मांगें रखी हैं. उनका कहना है कि कर्मचारियों के अधिकारों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है. उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं.

  • मेसेंजर और आर्म्ड गार्ड की भर्ती
  • पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति
  • स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग बंद करना
  • NPS कर्मचारियों को पेंशन फंड मैनेजर बदलने का विकल्प
  • 2019 के बाद भर्ती कर्मचारियों के ट्रांसफर की सुविधा
  • मेडिकल और पेंशन से जुड़ी सुविधाओं में सुधार

भर्ती और सुरक्षा पर चिंता

फेडरेशन का कहना है कि पिछले करीब 30 साल से मेसेंजर की भर्ती नहीं हुई है, जिससे गरीब वर्ग के लोगों के लिए नौकरी के मौके खत्म हो गए हैं. साथ ही, हाल ही में सूरत की SBI ब्रांच में हुई लूट की घटना का हवाला देते हुए आर्म्ड गार्ड की कमी पर भी सवाल उठाए गए हैं.

पेंशन और सैलरी से जुड़े मुद्दे

NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को पेंशन फंड मैनेजर बदलने की सुविधा नहीं मिलने पर भी नाराजगी है. इसके अलावा, वेतन में असमानता (Parity Issue) को लेकर भी कर्मचारी आवाज उठा रहे हैं.

हड़ताल से पहले क्या होगा?

हड़ताल से पहले कर्मचारी 5 मई से लेकर 21 मई तक अलग-अलग विरोध कार्यक्रम करेंगे, जैसे लंच टाइम प्रदर्शन, धरना, सोशल मीडिया कैंपेन और ज्ञापन देना. वे निर्मला सीतारमण और नरेंद्र मोदी को भी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे. कुल मिलाकर, अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो 25-26 मई की यह हड़ताल बैंकिंग सेवाओं पर असर डाल सकती है.

बंपर जीत के बाद भी बहुमत से दूर रह गए विजय, तमिलनाडु में किसकी मदद से बनेगी सरकार…

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राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में, विजय ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि उनकी TVK पार्टी को सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया जाए, साथ ही विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय भी मांगा.

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है. बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनेगी. इसी तरह तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के इतर नई सरकार बनने जा रही है. एक्टर से नेता बने विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने जोरदार जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया. हालांकि विजय के लिए यह चमत्कारी प्रदर्शन उसे बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए नाकाफी रहा. अब यहां की सियासत में यही सवाल गूंज रहा है कि विजय आखिर कहां से बहुमत का आंकड़ा जुटाएंगे.

नवोदित नेता विजय, जिनकी TVK पार्टी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है. हालांकि पार्टी ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए 2 हफ्ते का समय भी मांगा. इस तरह से चुनाव के बाद नई सरकार के गठन को लेकर कवायद शुरू हो गई है.

तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा

विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, TVK ने 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटों पर जीत हासिल की है, हालांकि पार्टी के पास पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी सीटों की संख्या नहीं है. यहां किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 118 सीट चाहिए होती है, जो इस बार नहीं मिलीं, ऐसे में तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन गई है.

कैसे जुटेगा बहुमत का आंकड़ा

TVK ने कुल 108 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन पार्टी के पास असल में 107 सीट ही है, ऐसा इसलिए है क्योंकि विजय ने 2 अलग-अलग सीटों (पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट) से जीत हासिल की है, और चुनाव आयोग इन दोनों में से केवल एक सीट को ही मानेगा. दूसरी सीट छोड़नी पड़ेगी जिस पर बाद में चुनाव कराया जाएगा. ऐसे में TVK को 118 के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए 11 और सीटों की जरूरत रहेगी.

साथ ही एक विधायक को आगे चलकर स्पीकर बनना होगा. आम परिस्थितियों में स्पीकर वोटिंग नहीं करता है. ऐसे में संख्या 106 रह जाएगी. हालांकि वोटिंग के दौरान मुकाबला टाई होने की स्थिति में ही स्पीकर वोट करते हैं. इस तरह से टीवीके पार्टी को 12 विधायकों के समर्थन की दरकार होगी.

माना जा रहा है कि जीत के बाद TVK बहुमत जुटाने की कोशिश में लग गई है. वह अन्य राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने में लगी है. साथ ही वह AIADMK या DMK जैसे बड़े दलों में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है. DMK की अगुवाई वाले गठबंधन में DMK के पास अकेले 59 सीटें हैं जबकि कांग्रेस के पास 5, वीसीके के पास 2, सीपीआई और सीपीआई-एम के पास 2-2 सीटें हैं तो मुस्लिम लीग के पास 2 और डीएमडीके के पास 1 सीट है. इसके अलावा PMK के पास 4 के अलावा भारतीय जनता पार्टी के पास 1, AMMKMNKZ के पास 1 सीट हैं. AIADMK के पास 47 सीटें हैं.

दूसरी ओर, चुनाव परिणाम आने से बीच विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस से गठबंधन करने की खुली अपील कर डाली. चंद्रशेखर ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर जिक्र करते हुए कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और परंपरा है. ऐसी कांग्रेस, आखिर कमजोर क्यों पड़ रही है? सत्ता की कमी की वजह से.” उन्होंने कहा, “किसी पार्टी का समर्थन करने से वे कमजोर पड़ रहे हैं. वह उन्हें ताकत हम देंगे, हम नहीं, बल्कि विजय देने के लिए तैयार हैं.”

सरकार बनाने को राज्यपाल को पत्र

इस बीच राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में, विजय ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया जाए, साथ ही विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय भी मांगा. राज्यपाल को पत्र सौंपे जाने के बाद, इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है कि राज्यपाल सरकार बनाने के लिए कब निमंत्रण देंगे.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस बीच, नीलंकरई इलाके में, जहां विजय का घर है, वहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और वे सुरक्षा ड्यूटी में मुस्तैदी से लगे हुए हैं. पत्रकारों सहित अन्य लोगों को अंदर तभी जाने दिया जा रहा है, जब वे प्रवेश द्वार पर कड़ी सुरक्षा जांच में शामिल होते हैं.

Assembly Elections Result 2026

ALLIANCE / PARTY Won Change +/- Vote Share
TVK 107 +107 35.12 %
TVK 107 +107 35.12 %
DMK+ 72 -87 31.43 %
DMK 58 -75 24.09 %
INC 5 -13 3.38 %
VCK 2 -2 1.13 %
CPI 2 0 0.68 %
CPI(M) 2 0 0.61 %
IUML 2 +2 0.3 %
DMDK 1 +1 1.23 %
MMK 0 0 0 %
MDMK 0 0 0 %
ADMK+ 50 -20 25.23 %
AIADMK 49 -17 21.49 %
AMMK 1 +1 0.77 %
BJP 0 -4 2.97 %
PMK-A 0 0 0 %
TMC-GK 0 0 0 %
IJK 0 0 0 %
OTH 5 0 3.19 %
PMK 4 -1 2.12 %
IND 1 +1 1.07 %

 

भारतीयों पर हमले के बाद गुस्से में पीएम मोदी, होर्मुज पर दे डाला अल्टीमेटम, कहा- ‘अटैक मंजूर नहीं…’

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शहर फुजैरा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (5 मई) को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शहर फुजैरा पर हुए ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए. यूएई ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था.

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा,’यूएई पर हुए हमलों की मैं कड़ी निंदा करता हूं, जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं. आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंजूर नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘भारत यूएई के साथ पूरी तरह एकजुट है और बातचीत और कूटनीति के जरिए से सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराता है.’

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध नेविगेशन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.’ फुजैरा शहर पर हमला ऐसे समय में हुआ है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है. होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के लगभग बीस फीसदी तेल और गैस का परिवहन होता है जो दोनों देशों के बीच वार्ता में एक प्रमुख अड़चन बना हुआ है.

संघर्ष की वजह से होर्मुज स्ट्रेट के इस संकरे जलमार्ग से होकर गुजरने वाले जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हुआ है. यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार (4 मई) को कहा कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार ड्रोन को नाकाम कर दिया. मंत्रालय ने पुष्टि की कि वह ‘किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और देश की सुरक्षा को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास का मजबूती से मुकाबला करेगा.

हिमंत बिस्वा सरमा ने वोटिंग खत्म होने पर की थी भविष्यवाणी, हो गई सच, जानें सफेद कागज पर क्या लिखा था?

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असम विधानसभा चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने के बाद हिमंत विश्व शर्मा ने एक्स पर सीटों के अनुमानों पर आधारित एक तस्वीर शेयर की है, जो काफी चर्चा में है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक तस्वीर साझा की है, जो अब काफी चर्चा में है. इस तस्वीर में एक कागज पर विधानसभा चुनाव के संभावित नतीजों से जुड़े कुछ आंकड़े लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं. इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा कि 9 अप्रैल को जब असम में मतदान खत्म हुआ, तब उन्होंने हमेशा की तरह एक कागज पर अपने अनुमान लिखे थे. उन्होंने बताया कि एक महीने बाद जब असली नतीजे सामने आए, तो उनकी उम्मीद से भी बेहतर परिणाम मिले.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी को लोगों का ऐतिहासिक समर्थन मिला है और पिछले प्रदर्शन से भी एक सीट ज्यादा हासिल हुई है. उन्होंने इसके लिए जनता का आभार जताया और इस जीत को लोगों के विश्वास का परिणाम बताया. इस पोस्ट के जरिए हिमंत बिस्वा सरमा ने यह दिखाने की कोशिश की कि उन्हें अपने चुनावी प्रदर्शन को लेकर पहले से ही भरोसा था और अब नतीजों ने उस भरोसे को सही साबित कर दिया है.

भाजपा ने कितनी सीटों पर हासिल की जीत

असम में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने वाली है. राजग ने सोमवार को 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज की. भाजपा ने 82 सीट पर जीत हासिल की जबकि उसके सहयोगी दलों बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीट पर जीत मिली है. राज्य में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है. इससे पहले 2021 और 2016 के चुनावों में उसने 60-60 सीटें जीती थीं.

कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को हिमंत ने हराया

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 मतों से हराकर लगातार छठी बार जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की. विपक्षी खेमे में कांग्रेस ने 19 सीट जीतीं, जबकि बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले एआईयूडीएफ और अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले रायजोर दल ने दो-दो सीट हासिल कीं. तृणमूल कांग्रेस को एक सीट पर जीत हासिल हुई. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट में मौजूदा भाजपा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,181 मतों के अंतर से हार गए. भाजपा के चुनाव जीतने वाले प्रमुख नेताओं में मंत्री अजंता नियोग (गोलाघाट), रानोज पेगु (धेमाजी), पीजूष हजारिका (जागीरोड), कौशिक राय (लखीपुर), प्रशांत फूकन (डिब्रूगढ़), कृष्णेंदु पॉल (पाथरकांडी) और बिमल बोरा (तिंगखोंग) शामिल हैं.