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‘महिला आरक्षण की आड़ में सत्ता कब्जाने की साजिश’, विपक्षी सांसदों ने दी प्रतिक्रिया’

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लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित न होने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस महिला विरोधी नहीं है, बल्कि लंबे समय से एक-तिहाई महिला आरक्षण की समर्थक रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लाए गए महिला आरक्षण कानून को कांग्रेस समेत सभी दलों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया था।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमने 2023 के संशोधन का एकमत से समर्थन किया और उसे पास किया। लेकिन उसकी आड़ में उन्होंने एक और संशोधन पेश किया उसमें एक डिलिमिटेशन क्लॉज डाल दिया, इस तरह महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को एक कर दिया। इन बिलों को एक साथ लाकर, वे सत्ता हासिल करना चाहते थे ताकि आगे कोई भी डिलिमिटेशन कानून सदन में सिंपल मेजॉरिटी से पास और बदला जा सके।”

उन्होंने कहा कि आपको यह 543 सदस्यों के अंदर करना चाहिए। अगली जनगणना या जाति जनगणना पूरी होने के बाद, आप इसे अगले चुनाव में पूरा कर सकते हैं। आपका इरादा संविधान के ढांचे को बदलना और एग्जीक्यूटिव पावर अपने हाथों में लेना है।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “हमने पहले ही 2023 का महिला आरक्षण एक्ट बिना किसी सहमति के पास कर दिया था। अब सरकार को 2029 के चुनाव के लिए बिल को लागू करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी। महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से जोड़ने का उनका एजेंडा कल फेल हो गया। क्योंकि वे अपनी सुविधा के हिसाब से डिलिमिटेशन करना चाहते हैं।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “आप उन्हें क्या कहेंगे जो लोकतंत्र के विरोधी हैं और उसका विरोध करके सत्ता में आने की कोशिश करते हैं? मैं तो बस यही कहूंगा कि कल लोकतंत्र की रक्षा हुई और भारत के संविधान को सुरक्षित रखा गया।”

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, “कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक है। यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। परसों उन्होंने एक अधिसूचना जारी की और उसके बाद वे महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की योजना बना रहे थे।”

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। एक बार फिर से चुनाव के दौरान ही सत्र बुलाया जा रहा है। जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में आजतक एक महिला जज नहीं बनी है। महिलाओं पर शोषण हो रहा है, इस पर ये लोग कुछ नहीं बोल रहे है। जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह का काम भाजपा कर रही है। महिलाओं का सम्मान बहुत ही कम हो रहा है।

समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “समाजवादी पार्टी, हमारे नेता महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती के साथ खड़े हैं। सदन ने सर्वसम्मति से 2023 में महिला आरक्षण को पास कर दिया था और अब संविधान संशोधन लेकर आए हैं, 2011 की जनगणना के अनुसार महिला आरक्षण देना चाहते हैं, यह उनकी साजिश है।”