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‘दूध की कीमतों में 4 रुपये की बढ़ोतरी, इस राज्य ने लिया बड़ा फैसला’

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देश में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से लोग परेशान हो रहे हैं तो वहीं दूसरी और अब दूध के दामों में भी बढ़ोत्तरी ने लोगों की चिताएं और बढ़ा दी हैं. ओडिशा मिल्क एंड डेयरी कोऑपरेटिव फेडरेशन (ओएमएफईडी) ने राज्य भर में दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है.

Strait of Hormuz: हॉर्मुज के ‘चक्रव्यूह’ से निकला भारत का एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल’

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Strait of Hormuz अमेरिका-ईरान तनाव और नाकेबंदी के बीच भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहा.

भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा है. ऐसे समय में जब अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, यह पारगमन भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. MarineTraffic के आंकड़ों के मुताबिक, एलपीजी वाहक ‘सर्व शक्ति’ ईरान के लारक द्वीप के करीब से गुजरा और इस चोकपॉइंट से गुजरने के लिए तेहरान द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन किया. यह जहाज 45,000 टन गैस और 18 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर विशाखापत्तनम के एक बड़े एलएनजी टर्मिनल की ओर जा रहा है.

संकट के बीच दुर्लभ सफर
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला ‘सर्व शक्ति’ जहाज, जिसमें करीब 45,000 टन एलपीजी (जो आमतौर पर खाना पकाने में इस्तेमाल होती है) लदी है, शनिवार को ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी में प्रवेश करता दिखाई दिया.  यह जहाज पहले भी पर्शियन गल्फ और भारतीय बंदरगाहों के बीच आवाजाही करता रहा है और फिलहाल यह भारत की ओर बढ़ने का सिग्नल दे रहा है. जहाज पर भारतीय चालक दल होने की जानकारी भी प्रसारित की जा रही है, जो ईरान युद्ध के बाद सुरक्षा के तौर पर अपनाई जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है.

इंडियन ऑयल खरीदार, पहली बड़ी आवाजाही

ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए एक शिपिंग दस्तावेज के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन है. हालांकि कंपनी ने इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. ‘सर्व शक्ति’ की यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर नाकेबंदी शुरू होने के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर का पहला दर्ज पारगमन है. इस नाकेबंदी के बाद हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या लगभग शून्य हो गई थी.

ऊर्जा संकट से जूझता भारत, एलपीजी की भारी कमी
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता होने के नाते भारत इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने के कारण देश में एलपीजी की कमी से घबराहट, लंबी कतारें और सीमित आपूर्ति की स्थिति बन गई है. नई दिल्ली ने फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से एलपीजी जहाजों के सुरक्षित पारगमन पर खास ध्यान दिया है. इसके तहत भारतीय बंदरगाहों को इन टैंकरों को प्राथमिकता देने और तेजी से अनलोडिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है.

तनाव के बीच बाधित हुआ था ट्रांजिट
अप्रैल के एक सप्ताहांत में स्थिति तब और बिगड़ गई जब ईरान ने पहले रास्ता खोलने की बात कही, लेकिन बाद में उसकी सेना ने गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग कर दी, जिससे कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा. हालांकि ‘देश गरिमा’ नाम का एक भारतीय टैंकर ट्रांसपोंडर बंद करके किसी तरह निकलने में सफल रहा था.

हॉर्मुज में अब भी ठप ट्रैफिक, भारत ने उठाए कदम

तब से हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप बनी हुई है. इस दौरान भारत ने तेहरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आठ एलपीजी जहाजों को इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है और अन्य विकल्पों पर भी काम कर रहा है. भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है, जबकि खपत घटकर 80,000 टन प्रतिदिन रह गई है. यह जानकारी पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार को दी.

जहाज की यात्रा और तकनीकी चुनौतियां
‘सर्व शक्ति’ फरवरी की शुरुआत में पर्शियन गल्फ में दाखिल हुआ था और इसे दुबई के पास जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए कार्गो मिला था, हालांकि कार्गो का सटीक स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया है. हॉर्मुज से गुजरने में आमतौर पर 10 से 14 घंटे लगते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के कारण जहाज की लोकेशन गलत दिखाई दे सकती है. कई जहाज अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद भी कर देते हैं. इस जहाज का प्रबंधन दुबई स्थित फोरसाइट ग्रुप सर्विसेज लिमिटेड के पास है, जबकि इसका मालिक झे यिन शान झोउ नंबर 4 तियानजिन बताया गया है, जो उसी पते से जुड़ा है. हालांकि कंपनी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना की शुरुआत, मोबाइल ऐप से जुटाई जा रही जानकारी…

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छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो चुका है, जिसमें 51 हजार से ज्यादा कर्मचारी घर-घर जाकर डिजिटल माध्यम से डेटा जुटा रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह मोबाइल ऐप आधारित है और नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

इस बार की जनगणना खास है क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। प्रगणक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़े कुल 33 सवालों का डेटा दर्ज कर रहे हैं। इससे प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी।

ड्यूटी से गायब कर्मचारियों पर सख्ती

प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी पर अनुपस्थित पाए गए 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस कार्य में बाधा डालना या मना करना दंडनीय अपराध है।

दुर्गम क्षेत्रों में भी शानदार काम

बस्तर जिले के तोकापाल तहसील के ग्राम गाटम में एक प्रगणक ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन अपना काम पूरा कर मिसाल पेश की। पहले दिन ही जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर निरीक्षण किया और कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया।

लोगों ने खुद भरी अपनी जानकारी

डिजिटल साक्षरता का असर भी इस अभियान में साफ दिखा। 16 से 30 अप्रैल के बीच 1,49,862 परिवारों ने वेब पोर्टल के जरिए खुद अपनी गणना (Self Enumeration) पूरी की। यह लोगों की जागरूकता और तकनीक के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

जानकारी पूरी तरह सुरक्षित

जनगणना निदेशालय ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इस डेटा का उपयोग न तो टैक्स, न पुलिस जांच और न ही कोर्ट केस में किया जा सकता है। यहां तक कि RTI के जरिए भी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और देश के विकास के लिए किया जाएगा।

सही जानकारी देना जरूरी

प्रशासन ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और पूरी जानकारी दें। आपका सहयोग देश के विकास और बेहतर योजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

‘NEET UG 2026 : देशभर में आज NEET-UG 2026 की परीक्षा आयोजित की जा रही है’

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NEET-UG 2026 की परीक्षा आज देशभर में आयोजित हो रही है, जिसमें 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। कड़े नियम, बायोमेट्रिक जांच और कई शहरों में विशेष व्यवस्थाओं के बीच परीक्षा को निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया है।

NEET UG 2026 News  देशभर में आज NEET-UG 2026 की परीक्षा आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में 22.79 लाख उम्मीदवारों ने पंजीयन कराया है। यह परीक्षा देश के 566 शहरों और विदेश के 14 शहरों में ऑफलाइन मोड में होगी। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक रहेगा।

परीक्षा नियम और एडवाइजरी

परीक्षा को लेकर NTA ने सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें ड्रेस कोड और परीक्षा केंद्र में ले जाने वाली (permissible items) को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है। रायपुर जिले में परीक्षा के लिए 26 केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। 1:30 बजे के बाद लेट आने वाले किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। पूरी परीक्षा प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच और एंटी-चीटिंग सिस्टम के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी ।

भोपाल में व्यवस्था

राजधानी भोपाल में नीट यूजी परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के 33 सेंटर्स पर लगभग 14 हजार अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे। परीक्षा दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक चलेगी। केंद्रों के अंदर प्रवेश की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगी और 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा। अगर किसी छात्र का बायोमेट्रिक फेल होता है, तो वे लिखित अंडरटेकिंग देकर परीक्षा दे सकेंगे।

इंदौर में विशेष सुविधा

वहीं इंदौर की बात करें तो यहाँ 57 सेंटर्स पर 23 हज़ार से ज़्यादा छात्र नीट यूजी की परीक्षा देंगे। सभी सेंटर्स पुलिस की निगरानी में रहेंगे। यहां सुबह 11 बजे से प्रवेश शुरू हो जाएगा। इंदौर आने वाले छात्रों के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। एआईसीटीएसएल (AICTSL) और रेलवे स्टेशन से प्रशासन द्वारा एसी बसें चलाई जाएंगी। यह निःशुल्क बस सेवा सुबह 9 बजे से शुरू हो जाएगी।

‘Tickets Online Booking : RCB के इन 2 धाकड़ मैचों की टिकट बिक्री हुई शुरू, जानें कैसे और किस दिन करें बुक’

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छत्तीसगढ़ के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल, राजधानी में होने वाले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के दो हाईवोल्टेज आईपीएल मैचों (IPL matches) लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। जो फैंस स्टेडियम में जाकर अपनी पसंदीदा टीम का मैच देखना चाहते हैं, वे अब अपने टिकट बुक कर सकते हैं।

आज और कल से कर सकते है बुकिंग

मैच की टिकटों की बुकिंग के लिए आरसीबी (RCB) की आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का ही उपयोग करना होगा। आरसीबी vs मुंबई इंडियंस जो 10 मई को होने वाली है उसकी टिकट आप आज से बुक कर सकते है वहीं आरसीबी vs कोलकाता नाइट राइडर्स का मैच जो 13 मई को है उसकी टिकट आप कल से कर सकते है।

एम-टिकट और क्यूआर कोड का सिस्टम लागू

स्टेडियम में एंट्री को आसान बनाने के लिए पहली बार एम-टिकट और क्यूआर कोड (QR) एंट्री सिस्टम लागू किया गया है। वहीं, स्टेडियम के अंदर मिलने वाली फूड और अन्य सुविधाओं को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। पुलिस ने भी इस संबंध में अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि टिकट बुक करते समय सोशल मीडिया या किसी अन्य अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले फर्जी लिंक से पूरी तरह बचें।

आधिकारिक वेबसाइट से ही ख़रीदे टिकट

अगर आप मैच का आनंद लेना चाहते हैं, तो केवल आरसीबी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही टिकट खरीदें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें ताकि आप धोखाधड़ी का शिकार न हों। बाकी स्टेडियम की सुविधाओं को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें।

CG: रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में अलर्ट! तेज हवाओं और बारिश का खतरा, विभाग ने जारी किया ऑरेंज-येलो अलर्ट’

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छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ली है। कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है, वहीं भीषण गर्मी के बीच लोगों की चिंता बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने एक बार फिर मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। यह अलर्ट विशेष रूप से मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों के लिए जारी किया गया है, जहाँ आगामी समय में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है।

इन ज़िलों में दिखेगा सब ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में वर्षा और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है, जिसके लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इस चेतावनी का सबसे ज्यादा असर बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, दुर्ग, जांजगीर-चंपा, कबीरधाम और मुंगेली जिलों में देखने को मिलेगा। इसके साथ ही, राजधानी रायपुर और मध्य छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भी इस बदले हुए मौसम का प्रभाव महसूस किया जाएगा, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का प्रकोप

बता दें की छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में फ़िलहाल तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। वहीं मौसम विभाग की तरफ से जारी की गई चेतावनी ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना जताई थी साथ ही 27 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया था।

‘छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन’

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औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं ग्रामीण महिलाएं’

छत्तीसगढ़ के वनांचल की गोद में छिपी अमूल्य औषधि संपदा अब केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि प्रदेश की नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन की जिस परिकल्पना को साकार कर रही है, उसे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप और  छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में धरातल पर उतार रहा है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पहचान

वनांचल में बिखरे पारंपरिक ज्ञान को महज एक स्मृति न रहने देने के संकल्प के साथ बोर्ड ने इसे वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन स्थानीय वैद्यों और जानकारों का चिन्हांकन शुरू किया गया है, जिनके पास असाध्य रोगों के उपचार का अद्भुत ज्ञान है। बोर्ड का प्रयास इन महिलाओं को एक उचित मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिले और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है जिसे ग्रामीण महिलाओं ने सदियों से सहेजकर रखा है। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक जड़ी-बूटी और जनजातीय ज्ञान को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से नई पहचान मिल रही है। राज्य के वनों में छिपे औषधीय खजाने को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित कर, उसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

संग्रहण से प्रसंस्करण तकउद्यमिता की नई उड़ान

आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब दिखाई दे रहा है, जब जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाली महिलाएं अब संग्राहक से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में नजर आ रही हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, महिला स्व-सहायता समूहों को औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के उन्नत गुर सिखाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल औषधीय पौधों का संरक्षण कर रही है, बल्कि वनवासियों और लघु वन उपज संग्राहकों की आय में वृद्धि करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। छत्तीसगढ़ में 1500 से अधिक सक्रिय वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और जड़ी-बूटियों के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह संस्था हर्बल उत्पादों की खेती, मूल्य संवर्धन, और मार्केटिंग में तकनीकी सहायता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है।

मूल्य संवर्धन (वेल्यू एडिशन)

छत्तीसगढ़ में जड़ी-बूटी मूल्य संवर्धन एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से राज्य के समृद्ध वन संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित (प्रोसेस) करके उनके आर्थिक मूल्य को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत इन उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। जब ये महिलाएं वनों से प्राप्त कच्ची सामग्री को साफ कर, सुखाकर उसे चूर्ण, अर्क या तेल के रूप में परिवर्तित करती हैं, तो उत्पाद की कीमत और गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इस मूल्य संवर्धन का सीधा आर्थिक लाभ उनके बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे बिचौलियों का वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

65 से अधिक लघु वन उपज प्रजातियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी और उनका प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख हर्बल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम है।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स को वैश्विक पहचान

छत्तीसगढ़, जिसे ‘जड़ीबूटि गढ़’ भी कहा जाता है, अपने घने जंगलों, विशेषकर बस्तर में 160 से अधिक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक खजाना है। यहाँ की मिट्टी में अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी और तिखुर जैसी औषधियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। बाजार की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए बोर्ड ने विपणन (मार्केटिंग) तंत्र को पारदर्शी बनाया है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को सशक्त करने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से इन उत्पादों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘व्होकल फार लोकल’ और मुख्यमंत्री के ‘लखपति दीदी’ अभियान को सफल बनाने में यह रणनीति संजीवनी का कार्य कर रही है।

नर्सरी प्रबंधन और स्थानीय रोजगार

जड़ी बूटियों को किचिन गार्डन, होम गार्डन में खिड़की, बालकनी, टेरिस पर गमलों, या अन्य कंटेनरों में कभी भी उगाया जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग में जड़ी-बूटियां उगाने का एक फायदा यह भी है कि जड़ी-बूटी को उसकी जरूरत के आधार पर मिट्टी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और नमी के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है तथा गमलों में उगाई गई प्रत्येक जड़ी-बूटी (हर्बल) को उसकी आदर्श स्थितियां दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों की ‘मदर नर्सरी’ विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपी जा रही है। इससे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए बारहमासी रोजगार के द्वार खुल गए हैं, जिससे वनांचल से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगा है।

समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़

राज्य शासन का यह समेकित दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड केवल एक प्रशासक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। सामूहिक नेतृत्व और संस्थागत सुधारों पर जोर देने से आज छत्तीसगढ़ की बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वनांचल की महिलाओं के चेहरे पर उपजी मुस्कान एक समृद्ध और स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की सच्ची तस्वीर पेश कर रही है।

CG: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार अंतर्गत अपने प्रदेशव्यापी दौरे का आज कर रहे हैं आगाज’

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राज्य शासन के महत्वपूर्ण अभियान सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री श्री साय आज  पुलिस लाइन हेलीपेड रायपुर से रवाना हुए’

इस अभियान में मुख्यमंत्री  श्री साय आम नागरिकों से रूबरू होकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं  एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति का लेंगे फीडबैक’

उल्लेखनीय है  कि 1 मई से प्रारम्भ सुशासन तिहार 10 जून तक जारी रहेगा’

मुख्यमंत्री के साथ दौरे पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल भी हुए रवाना’

 बड़ी खबर! 1 जुलाई से बदल रहे हैं नेशनल पेंशन सिस्टम के चार्ज, जेब पर क्या पड़ेगा असर

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PFRDA ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा लिए जाने वाले शुल्कों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है, जिससे निवेशकों को अपने फंड मैनेजमेंट लागत को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी. टियर-2 (Tier-II) अकाउंट के तहत लिए जाने वाले शुल्कों को तर्कसंगत बनाया गया है, जिससे निवेशकों का खर्च घटेगा. जो खाते निष्क्रिय या बंद पड़े हैं, उनके लिए पेनल्टी और रिकवरी के नियमों को लचीला बनाकर खाताधारकों को बड़ी राहत दी गई है.

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें यह साफ किया गया है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और उससे जुड़ी योजनाओं के तहत सब्सक्राइबर्स पर चार्ज कैसे लागू होंगे. ये नए स्पष्टीकरण 1 जुलाई, 2026 से लागू होंगे. रेगुलेटर ने कहा कि इस कदम का मकसद सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRAs) द्वारा चार्ज लगाने के तरीके में ज्यादा स्पष्टता और एकरूपता लाना है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर PFRDA की ओर से सर्कूलर में किस तरह की जानकारी है…

Tier I और Tier II के लिए AMC: क्या बदलाव हुए हैं?

मुख्य स्पष्टीकरणों में से एक सालाना मेंटेनेंस चार्ज (AMC) से जुड़ा है. PFRDA ने कहा कि Tier II खातों के लिए AMC अब उसी सेक्टर (सरकारी या निजी) के तहत Tier I खातों के साथ अलाइन किया जाएगा. हालांकि, छोटे निवेशकों के लिए राहत की बात है. कोई AMC नहीं लगाया जाएगा… जहां ऐसे [Tier II] खाते में जमा राशि, किसी तिमाही के अंत में, 1,000 तक हो. इसका मतलब है कि अगर आपका Tier II बैलेंस 1,000 या उससे कम रहता है, तो आप पर कोई AMC नहीं लगाया जाएगा.

एक ही PRAN के तहत हर योजना के लिए अलग AMC

सर्कुलर में यह भी साफ किया गया है कि भले ही आपके पास एक ही PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) हो, फिर भी हर योजना को एक अलग खाते के तौर पर माना जाएगा. एक PRAN के तहत चलाई जा रही हर पेंशन योजना को एक अलग खाते के तौर पर माना जाएगा… और ऐसे हर खाते पर अलग से AMC लगाया जाएगा. इसलिए, अगर आपके पास एक ही PRAN के तहत कई योजनाएं हैं, तो हर योजना पर अलग से चार्ज लग सकते हैं.

निष्क्रिय खातों के लिए बड़ी राहत

निष्क्रिय सब्सक्राइबर्स के लिए एक खास छूट है. अगर आपका खाता निष्क्रिय हो जाता है (लगातार 4 तिमाहियों तक कोई योगदान नहीं होता है), तो आप पर सामान्य AMC का सिर्फ 10 फीसदी चार्ज लगाया जाएगा. सर्कुलर में कहा गया है कि निष्क्रिय खाते के मामले में, लागू AMC का 10% AMC लगाया जाएगा.

निष्क्रिय खाता क्या है?

PFRDA के अनुसार एक ऐसा खाता जिसमें लगातार चार तिमाहियों तक कोई योगदान नहीं मिलता है उसे निष्क्रिय अकाउंट माना जाएगा. ऐसे खातों को अगली तिमाही के पहले हफ़्ते में निष्क्रिय (dormant) के तौर पर चिह्नित किया जाएगा, और कम किए गए चार्ज तब तक लागू रहेंगे जब तक खाता फिर से सक्रिय नहीं हो जाता.

PRAN खोलने के शुल्क: अतिरिक्त खातों के लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं

  • PRAN खोलने का शुल्क केवल एक बार लगेगा, वो भी शुरुआती समय में खाता बनाते समय.
  • यदि आप उसी PRAN के तहत अतिरिक्त खाते (Tier I या Tier II) खोलते हैं या उन्हें एक्टिवेट करते हैं, तो कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.
  • मौजूदा PRAN के तहत हर खाते को एक्टिवेट/खोलने के लिए शुल्क शून्य होगा.

कुछ योजनाओं के लिए शून्य AMC

अटल पेंशन योजना (APY) और NPS-Lite के तहत शून्य बैलेंस वाले खातों के लिए कोई AMC नहीं लिया जाएगा.

शुल्क कैसे और कब वसूले जाएंगे

सर्कुलर में कहा गया है कि शुल्क हर तिमाही के आखिर में वसूले जाएंगे. या तो एम्प्लॉयर को बिल भेजा जाएगा (यदि वे खर्च उठाते हैं), या सीधे सब्सक्राइबर के खाते से काट लिया जाएगा. PFRDA के सर्कुलर में कहा गया है कि लागू शुल्क हर तिमाही के आखिर में या सब्सक्राइबर के खाते से यूनिट काटकर वसूले जाएंगे.

किसमें नहीं होगा बदलाव?

PFRDA ने स्पष्ट किया कि 15 सितंबर, 2025 के अपने पिछले सर्कुलर के अन्य सभी प्रावधान बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगे.

NPS सब्सक्राइबर्स के लिए यह क्यों मायने रखता है

आसान शब्दों में कहें तो, ये स्पष्टीकरण इस बात में ज़्यादा पारदर्शिता लाते हैं कि शुल्क कैसे लागू होते हैं, छोटे और निष्क्रिय निवेशकों को राहत देते हैं, और एक PRAN के तहत कई खातों पर स्पष्टता प्रदान करते हैं. सब्सक्राइबर्स के लिए, खासकर जिनके पास कई योजनाएं या निष्क्रिय खाते हैं, इससे भ्रम कम हो सकता है और कुछ मामलों में, शुल्क भी कम हो सकते हैं.

Strait of Hormuz: रसोई गैस लेकर भारत आ रहा जहाज’

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अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है. ऐसे में भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. भारी खतरों के बीच 45,000 टन रसोई गैस (LPG) लेकर विशाल सुपरटैंकर ‘सर्व शक्ति’ भारतीय तटों की तरफ बढ़ रहा है.

जब पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलस रहा है और अमेरिका-ईरान की तनातनी से समुद्र में सन्नाटा है, तब भारत ने अपने बेहतरीन कूटनीतिक कौशल का लोहा मनवाया है. 45,000 टन एलपीजी (LPG) यानी रसोई गैस से लदा विशालकाय सुपरटैंकर ‘सर्व शक्ति’ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा है.

रसोई गैस का संकट होगा खत्म

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. हाल के दिनों में मध्य पूर्व से सप्लाई चेन टूटने के कारण देश में रसोई गैस की भारी किल्लत देखने को मिली. गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें, लोगों में घबराहट और होटलों के छोटे होते मेन्यू ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है. ऐसे समय में सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने इस विशाल गैस कार्गो को खरीदा है. अगर ‘सर्व शक्ति’ सुरक्षित भारतीय तटों पर पहुंचता है, तो यह बाजार में गैस की किल्लत को दूर करने में एक संजीवनी का काम करेगा.

‘होर्मुज’ की नाकेबंदी ने बिगाड़ा खेल

फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से ही होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है. अमेरिका ने ईरान से जुड़े जहाजों की कड़ी नाकेबंदी कर रखी है. पिछले महीने तो हालात इतने बिगड़ गए थे कि ईरान ने रास्ता पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग तक कर दी थी, जिससे कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा. लेकिन, इस भारी तनाव के बीच भी नई दिल्ली की कूटनीति रंग लाई. तेहरान के साथ हुई सफल द्विपक्षीय वार्ता के दम पर भारत अब तक युद्ध के दौरान आठ एलपीजी जहाजों को सुरक्षित निकाल चुका है.

खतरों के बीच कैसे गेम बदल रहा है ‘सर्व शक्ति’?

मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चल रहा यह सुपरटैंकर फरवरी की शुरुआत में फारस की खाड़ी में दाखिल हुआ था और दुबई के तट पर इसने अपना कार्गो लोड किया था. सुरक्षा के मद्देनजर इसने बाकायदा ब्रॉडकास्ट कर रखा है कि इसके क्रू मेंबर्स भारतीय हैं और यह भारत की दिशा में ही जा रहा है. यह युद्ध की शुरुआत के बाद से जहाजों द्वारा अपनाया जाने वाला एक बेहद अहम सुरक्षा उपाय है.

फिलहाल यह ईरान के लारक और केशम द्वीपों से होकर ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है. 10 से 14 घंटे के इस सफर में खतरे कम नहीं हैं. इलाके में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल जाम होने या रडार से गायब होने (स्पूफिंग) का डर बना रहता है. इससे पहले भारत से जुड़े एक अन्य टैंकर ‘देश गरिमा’ को भी अपना ट्रांसपोंडर बंद करके इस इलाके से चुपचाप निकलना पड़ा था.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के अनुसार, संकट से निपटने के लिए भारत ने अपनी घरेलू एलपीजी उत्पादन क्षमता को 60% बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है. वहीं, दैनिक खपत भी 90,000 टन से घटकर 80,000 टन पर आ गई है. इसके अलावा, सरकार ने अपने सभी बंदरगाहों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी टैंकरों को किनारे लगाने और खाली करने में सबसे पहली प्राथमिकता दें, ताकि आम लोगों तक रसोई गैस बिना किसी रुकावट के पहुंच सके.