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ट्रेड डील नहीं, अमेरिका के पक्ष में झुका समझौता; पूर्व वित्तमंत्री ने उठा दिया बड़ा सवाल…

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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के बीच पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने बड़ा दावा किया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का कहना है कि यह कोई ट्रेड डील नहीं है। बल्कि यह एक अंतरिम समझौता है, जिसे द्विपक्षीय ट्रेड डील कहकर सेलिब्रेट किया जा रहा है।

पी चिदंबरम ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि दोनों पक्षों द्वारा साइन किया हुआ कोई डील डॉक्यूमेंट पब्लिक डोमेन में मौजूद नहीं है। उन्होंने कहाकि हमें जो उपलब्ध कराया गया है वह वाइट हाउस द्वारा जारी किया गया एक संयुक्त वक्तव्य है। इस संयुक्त वक्तव्य को पढ़ने के बाद मैं यही कह सकता हूं कि यह पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है।

सरकार बचना क्यों चाहती है

पी चिदंबरम ने आगे कहाकि सेक्शन 232 जांच भी पब्लिक में जारी नहीं की गई है। एनडीटीवी के मुताबिक यूपीए सरकार के दौरान वित्तमंत्री रहे चिदंबरम ने कहाकि बिना इन कागजातों और जांच की डिटेल के आप संयुक्त वक्तव्य से क्या हासिल कर लेंगे। उन्होंने कहाकि मैं सिर्फ इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि यह अंतरिम समझौता भर है। जो, एक अंतरिम समझौता बन सकता है।

जब चिदंबरम से पूछा गया कि वह सरकार से क्या चाहते हैं? इस पर उन्होंने कहाकि आखिर सरकार राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पारित आदेशों को सामने लाने से बचना क्यों चाहती है। सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों में है क्या? चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार को सेक्शन 232 इंवेस्टिगेशन के बारे में नहीं पता? अगर उसे इस बारे में जानकारी नहीं है तो फिर उसने संयुक्त वक्तव्य जारी ही क्यों किया।

कैसे कहेंगे डिप्लोमैटिक जीत?

इस डील को भारत की डिप्लोमैटिक जीत कहे जाने पर भी चिदंबरम ने नाखुशी जताई। उन्होंने कहाकि मुझे यह बात समझ नहीं आ रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहाकि वह भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के बारे में कुछ नहीं जानते। अगर विदेश मंत्री को ही इस बारे में जानकारी नहीं है तो मैं इसे कैसे डिप्लोमैटिक जीत मान लूं। उन्होंने यह भी कहा कि इस सौदे में मौजूद असमानता उनके लिए चिंता का विषय थी।

चिदंबरम ने आगे कहाकि अप्रैल 2025 से पहले टैरिफ क्या थे? यह औसतन दो से तीन प्रतिशत के बीच था। कुछ वस्तुओं में, यह थोड़ा अधिक हो सकता था… अप्रैल 25 से पहले के टैरिफ की तुलना में, यह एक बड़ा उछाल है।