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राजनांदगांव 4-1 से जीता, करन साहू ने किए चारों गोल, सेमीफाइनल में बनाई जगह

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राजनांदगांव। स्व. हसन मिर्जा बेग स्मृति यूथ कप 7 ए साइड हॉकी प्रतियोगिता में जिला हॉकी संघ राजनांदगांव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुर्ग को 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। मुकाबला बिलासपुर में खेला गया।
मर्टर फाइनल के चौथे मैच में राजनांदगांव की टीम शुरू से ही आक्रामक रही। मैच के तीसरे मिनट में करन साहू ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद उन्होंने 10वें, 16वें और 28वें मिनट में लगातार गोल दागे। करन ने मैच में कुल चार गोल कर जीत के नायक बने। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। दुर्ग की टीम पूरे मैच में सिर्फ एक गोल ही कर सकी।
राजनांदगांव टीम में आदित्य मेश्राम, शकील अहमद, करन साहू, संदीप यादव, सुखदेव निर्मलकर, आदित्य नेताम, खुशाल यादव, मिथलेश पंड्या, मनीष यादव, अर्जुन यादव और तौफीक अहमद शामिल रहे। टीम मैनेजर की जिम्मेदारी प्रतीक तिवारी ने निभाई।
जीत पर जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी, सचिव शिवनारायण धकेता, नीलम जैन, कुतुबुद्दीन सोलंकी, रमेश डाकलिया, भूषण साव, प्रकाश सांखला, ज्ञानचंद जैन, गणेश प्रसाद शर्मा, आशा थॉमस, प्रिंस भाटिया, मृणाल चौबे, प्रकाश शर्मा, अजय झा, अनूप श्रीवास्तव, छोटे लाल रामटेके, अनुराज श्रीवास्तव, अरुण श्रीवास्तव, कुमार स्वामी, दीपक यादव, चंदन भारतद्वाज, शिवा चौबे, भागवत यादव, महेंद्र सिंह, गुणवंत पटेल, दिग्विजय श्रीवास्तव, शब्बीर हैदरी, अशोक देवांगन, सचिन खोब्रागढ़े, योगेश द्विवेदी, संजू पटेल, आशीष सिन्हा, अशोक नागवंशी, लक्ष्मण यादव, महबूब शरीफ, सुरेंद्र साहू, मुकेश जायसवाल और जावेद खान सहित अन्य सदस्यों ने टीम को शुभकामनाएं दीं।

जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा, सुकमा-1 में फुटबॉल फॉर स्कूल कार्यक्रम का सफल आयोजन

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पेंटा/सुकमा। पीएमश्री स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा, सुकमा-1 में आज फुटबॉल फॉन स्कूल (एफ फॉर एस) कार्यक्रम के अंतर्गत फीफा द्वारा प्रदत्त फुटबॉल्स का वितरण समारोह उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में खेल भावना, टीमवर्क, अनुशासन तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य संजय मंडल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य आकर्षण के रूप में सुदीप राजाराम वाकचुरे (द्वितीय कमान, 223 बटालियन) एवं सुखविंदर सिंह (सहायक कमांडेंट, 223 बटालियन) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी श्रीनिवास राव, कोंटा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अतिथियों का विद्यालय परिवार द्वारा पुष्प-गुच्छ एवं अभिनंदन के साथ स्वागत किया गया।
इस अवसर पर ईएमआरएस कोंटा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डुब्बाटोटा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एर्राबोर, शासकीय माध्यमिक शाला पोलमपल्ली तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जगरगुंडा के प्रतिनिधि भी फुटबॉल प्राप्त करने हेतु उपस्थित रहे। सभी विद्यालयों को फीफा द्वारा प्रदत्त फुबॉल्स प्रदान किए गए, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण देखा गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण एवं स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे, जिनमें श्याम कुमार (पीजीटी गणित), श्रीमती सपना धीमन, सुश्री कृष्णा भलावी, अजय कुमार, कपिल कुर्वे (टीजीटी विज्ञान), अमन पंथी (टीजीटी हिन्दी), सोनू कुशवाह, मलय कुमार, वेदप्रकाश मिश्रा, संजय कवडे तथा वेदांत राय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अतिथियों ने विद्यार्थियों को खेलों के महत्व के बारे में बताते हुए नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी विकास करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और टीम भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
प्राचार्य संजय मंडल ने फुटबॉल फॉर स्कूल, कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल से विद्यार्थियों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ेगी तथा विद्यालयों में खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

राजपाल यादव केस: जेल हुई तो क्या 9 करोड़ माफ हो जाएंगे? कानून क्या कहता है, 2010 से लेकर 2026 तक की पूरी टाइमलाइन…

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बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को कौन नहीं जानता. हंसाने-गुदगुदाने में माहिर ये एक्टर इन दिनों अपनी एक्टिंग नहीं, बल्कि जेल जाने की वजह से सुर्खियों में हैं. लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में वह तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं.

ये सजा अचानक नहीं हुई. मामला सालों पुराना है. फिल्म बनाने के लिए लिया गया करोड़ों का कर्ज समय पर नहीं लौटाया गया, जिसके बाद चेक बाउंस का केस कोर्ट तक पहुंचा.

कोर्ट ने कई बार भुगतान के मौके दिए, लेकिन तय समयसीमा बार-बार टूटती रही. आखिरकार कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सजा बरकरार रखी और सरेंडर का आदेश दे दिया. आइए जानते हैं पूरा मामला कैसे शुरू हुआ और क्यों जेल तक पहुंचा. और अब राजपाल यादव का आगे क्या होगा.

राजपाल यादव चेक बाउंस केस की पूरी टाइम लाइन 2010- फिल्म के लिए लोन लिया

पूरा मामला शुरु होता है साल 2010 में जब राजपाल यादव ने फिल्म बनाने के लिए कर्ज लिया. उन्होंने फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया. फिल्म 2012 में रिलीज हुई और फ्लॉप हो गई. ये फिल्म करीब 11 करोड़ में बनी और इसने बॉक्स ऑफिस पर महज 38 लाख रुपये की कमाई की. इसके बाद से लोन चुकाने की दिक्कत शुरु हई.

2018- चेक बाउंस केस

फिल्म फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव लोन चुका नहीं पाए. उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए जो 7 चेक दिए गए थे वो सारे बाउंस हो गए. और इसके बाद कानूनी रुप से केस स्टार्ट हुआ.

2018- पति-पत्नी दोषी

साल 2018 के अप्रैल महीने में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने Negotiable Instruments Act (धारा 138) के तहत राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया और 6 महीने की जेल की सजा सुनाई.

2019- सेशंस कोर्ट राजपाल यादव ने साल 2019 में सेशंस कोर्ट ने अपील की लेकिन यहां भी कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी.

2024- दिल्ली हाईकोर्ट जून 2024 में राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिली. हाईकोर्ट ने उनकी सजा अस्थायी रूप से रोक दी लेकिन अदालत ने कहा कि वो अपना प्रयास दिखाएं कि पैसे लौटाना चाहते हैं. कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया. इसके बाद राजपाल यादव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे. इसमें 40 लाख रुपए की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपए की दूसरी किश्त शामिल थी. लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं की गई. 2024 तक ये कर्ज बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो चुका था.

2025- बार-बार वादा, बार-बार देरी राजपाल यादव ने अक्टूबर 2025 में 75 लाख जमा किए गए. इसके बाद दिसंबर 2025 में भी 40 लाख देने का वादा किया लेकिन नहीं दे पाए.

इसके बाद कोर्ट ने कहा कि गंभीरता नहीं दिख रही.

2026- आखिरी मौका भी गया

इस साल यानि 2026 फरवरी में कोर्ट ने इस मामले में एक हफ्ते की मोहलत मांगने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कई बार सेटलमेंट करने के लिए समय दिया लेकिन पेमेंट नहीं किया गया. जज ने कहा कि सेलिब्रिटी होने से अलग नियम नहीं बन सकते. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन बेहद गंभीर है. कोर्ट ने कहा कि अभिनेता को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने अदालत के भरोसे को तोड़ा है. कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया.

5 फरवरी 2026- तिहाड़ जेल

5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. उन्हें कोर्ट ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई थी.

सरेंडर के बाद कहा- पैसे नहीं हैं

सरेंडर करने के बाद राजपाल यादव ने कहा- ‘सर क्या करुं, मेरे पास पैसे नहीं हैं, कोई दूसरा उपाय भी नहीं दिखता. यहां हम सब अकेले हैं. कोई भी दोस्त नहीं हैं. मुझे इस मुसीबत का सामना खुद ही करना पड़ेगा.’

इसके बाद सवाल लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं. क्या 6 महीने जेल की सजा काटने के बाद उन्हें 9 करोड़ नहीं चुकाने पड़ेंगे? अगर उसके बाद भी ये पैसे नहीं चुकाए तो क्या होगा?

सबसे पहले जानते हैं कि इस केस के बारे में राजपाल यादव का क्या कहना है.

लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में भी राजपाल यादव ने इस केस पर बात की थी. राजपाल यादव ने इसमें साफ किया था कि ये दूसरी पार्टी की तरफ से की गई एक इन्वेस्टमेंट थी. उन्होनें कहा था, ‘मैंने पैसे लिए नहीं थे बल्कि उन्होंने फाइनेंसर के तौर पर खुद इनवेस्ट किए थे. उन्हें अपने पोते को हीरो बनाना था.’

साथ ही राजपाल यादव ने ये भी कहा, ‘मैंने अदालत में भी विनम्रता के साथ अपनी बात रखी थी. अगर यह माना भी जाए कि मैंने 5 करोड़ रुपये लिए, तो मैं एक सार्वजनिक व्यक्ति हूँ- जनता को सच्चाई बताना ज़रूरी है. यह रकम आखिर थी क्या- लोन, इन्वेस्टमेंट या कुछ और? 15 करोड़ जैसी रकम कहीं गायब नहीं हो सकती.

मैं पिछले 40 साल से दुनिया भर में काम कर रहा हूँ, जिनमें 30 साल विदेशों में गुजरे हैं, और आज तक किसी ने मुझ पर उंगली नहीं उठाई. शुरू से मैं यही कहता आया हूँ कि मामले की असल प्रकृति साफ-साफ लिखी जाए.’ इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोर्ट नहीं होता तो सामने वाले तो फांसी लगवा देते.

अब राजपाल यादव का क्या होगा?

क्या जेल की सजा काट लेने के बाद कर्ज नहीं चुकाना पड़ेगा? क्या ये केस खत्म हो जाएगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब जानने जरुरी हैं.

कानूनी भाषा में समझें तो जेल की सजा काटने से 9 करोड़ रुपये की देनदारी खत्म नहीं होगी. राजपाल यादव को जेल की सजा काटने के बाद भी या तो 9 करोड़ चुकाना पड़ेगा या फिर समझौता करना पड़ेगा. आपको बताते हैं क्यों?

ये चेक बाउंस मामला

(Negotiable Instruments Act, धारा 138) का है. इस धारा में कानून में सजा दो तरह की होती है-

क्रिमिनल सजा- जिसमें जेल की सजा सुनाई जाती है या फिर पेनल्टी लगती है.

सिविल देनदारी- मूलधन के साथ ब्याज और हर्जाना तीनों चुकाना होता है

इसका मतल है कि कर्ज देना ही पड़ेगा.

इस मामले पर वाराणसी के अधिवक्ता वरुण सिंह का कहना है, ‘डिशऑनर का चेक मामले में निर्धारित धनराशि चुकाने के बाद मामला समाप्त होने का प्रावधान है. लेकिन इसी से संबंधित आपराधिक मामलों से जुड़े विषयों में जैसे- 420 , 421 में तय धनराशि देने के बाद भी कोर्ट में ट्रायल चलता है. प्रतिवादी द्वारा लिखित आधार पर ही यह मामला समाप्त होता है.’

वो आगे बताते हैं, ‘राजपाल यादव लोन न चुकाने का मामला क्रिमिनल ऑफेंस के दायरे में है जिसमें उन्हें 6 महीने की जेल की सजा हुई है. इसलिए उनके द्वारा धनराशि चुकाने के बाद सजा में राहत कोर्ट ट्रायल के बाद मिलेगी.’

राजपाल यादव जेल से बाहर आ सकते हैं अगर…

एडवोकेट रुपेश दत्ता का कहना है कि राजपाल यादव की सजा रद्द हो सकती है अगर वो बकाया रकम चुका दें. रुपेश दत्ता ने एबीपी न्यूज़ को बताया, ‘आम तौर पर गैर-समझौता योग्य (non-compoundable) मामलों में ऐसा संभव नहीं होता, लेकिन राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला समझौता योग्य (compoundable) श्रेणी में आता है. अगर वे किसी व्यवस्था के तहत बकाया रकम लौटाने पर सहमत हो जाते हैं, तो उनकी 6 महीने की सजा निलंबित की जा सकती है, भले ही वे फिलहाल जेल में हों.’

वो आगे कहते हैं, ‘इस समय वे सिर्फ इसलिए जेल में हैं क्योंकि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पहले दिए गए समय का पालन नहीं किया और अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं कर पाए.’

खुदरा महंगाई दर जनवरी में 2.75% हुआ, आधार वर्ष 2012 से बदलकर अब हो गया 2024…

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जनवरी महीने के लिए खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) का नया आंकड़ा जारी कर दिया गया है, जिसमें महंगाई दर 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई है. खास बात यह है कि यह आंकड़ा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला के आधार पर तैयार किया गया है.

अब गणना का आधार वर्ष 2012 की जगह बदलकर 2024 कर दिया गया है, जिससे महंगाई के आकलन की पद्धति और दायरा दोनों में बदलाव आया है.

आधार वर्ष में सरकार ने किया बदलाव

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी इस नई श्रृंखला में उपभोक्ता खर्च के बदलते पैटर्न को ध्यान में रखते हुए कई अहम संशोधन किए गए हैं. मूल्य स्थिति की अधिक सटीक तस्वीर पेश करने के लिए वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़ाकर 308 कर दी गई है, जबकि सेवाओं की संख्या 40 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों के वास्तविक उपभोग व्यवहार को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सके.

जनवरी में खाद्य मुद्रास्फीति 2.13 प्रतिशत रही, जो कुल महंगाई दर से भी कम है. नई श्रृंखला में ग्रामीण मकान किराया, ऑनलाइन मीडिया सेवाएं, सीएनजी/पीएनजी जैसे ईंधन को शामिल किया गया है. इसके अलावा, डिजिटल और प्रशासनिक स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के बेहतर उपयोग के लिए टेलीफोन शुल्क, रेल और हवाई किराया, डाक शुल्क, ईंधन तथा ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं को भी शामिल किया गया है. यह बदलाव उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है.

आरबीआई का ब्याज पर ‘स्टे’

तुलना के लिए, वर्ष 2012 को आधार मानने वाली पुरानी श्रृंखला के तहत जनवरी 2025 में खुदरा महंगाई 4.26 प्रतिशत थी, जबकि दिसंबर में यह 1.33 प्रतिशत रही थी. आधार वर्ष में बदलाव और टोकरी (बास्केट) के पुनर्गठन के कारण नई और पुरानी श्रृंखला के आंकड़ों में अंतर दिखाई देना स्वाभाविक है.

कुल मिलाकर, नई सीपीआई श्रृंखला महंगाई के आकलन को अधिक व्यापक और वर्तमान उपभोग प्रवृत्तियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

बांग्लादेश ने भारत को दिया बड़ा झटका, कपास खरीदने के लिए अमेरिका से किया समझौता…

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बांग्लादेश में आम चुनावों के बीच महत्वपूर्ण निर्णय

बांग्लादेश में आज, गुरुवार को हो रहे आम चुनावों के दौरान एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत को एक बड़ा आर्थिक झटका देते हुए कपड़ा उद्योग के लिए कपास की खरीद अब अमेरिका से करने का निर्णय लिया है।

चुनाव से तीन दिन पहले, 9 फरवरी को यूनुस सरकार ने अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत बांग्लादेश अब अमेरिकी कपास का प्रमुख खरीदार बनेगा।

गोपनीय समझौता और इसके प्रभाव

गोपनीय तरीके से हुआ समझौता, ‘गेम चेंजर’ का दावा

यूनुस की सरकार ने इस समझौते को गुप्त रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ साझा नहीं किया, जिससे इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में इसे बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी कपड़ों पर लगने वाले टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर इसे 19% कर दिया है। यह दर अब कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है, तो उस पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं लगेगा, यानी वह ‘जीरो ड्यूटी’ पर सामान बेच सकेगा।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बिगड़े रिश्ते

इस निर्णय को भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम माना जा रहा है। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट और भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी। 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा बेचा था, लेकिन रिश्तों में आई कड़वाहट के बाद व्यापार प्रभावित हुआ। तनाव इतना बढ़ गया कि 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में भारत ने भी 16 मई 2025 से बांग्लादेशी रेडीमेड गारमेंट्स की जमीनी रास्ते से एंट्री बंद कर दी थी। अब अमेरिका के साथ हुई इस डील ने भारत के लिए एक बड़े बाजार के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।

चुनौतियाँ और संभावनाएँ

दूरी और गुणवत्ता बनी बड़ी चुनौती

हालांकि यूनुस सरकार इसे एक बड़ी उपलब्धि मान रही है, लेकिन अर्थशास्त्रियों ने इस राह में कई चुनौतियों की ओर इशारा किया है। ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका बांग्लादेश से भौगोलिक रूप से काफी दूर है, जिससे वहां से कपास मंगवाने में शिपिंग चार्ज बहुत बढ़ जाएगा। इससे टैरिफ में मिली छूट का लाभ खत्म हो सकता है। इसके अलावा, गुणवत्ता भी एक बड़ा सवाल है। टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय और मिस्र की कपास की गुणवत्ता बेहतरीन मानी जाती है। यदि अमेरिकी कपास उस मानक पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार बांग्लादेश के बनाए कपड़े रिजेक्ट कर सकते हैं।

एनडीए के नेताओं ने राहुल गांधी पर कसा तंज, कहा- ‘सदन की गरिमा को पहुंचा रहे ठेस’

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संसद में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एनडीए के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी पर बिना तथ्यों के आरोप लगाने, सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “गंभीर पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी समझनी चाहिए। ऐसे मुझे लगता है ये विशेषाधिकार प्रस्ताव एक अधिकार है। हर किसी के पास कि अगर कोई ऐसी बातें करता है, जिसका कोई मायने नहीं है तो ऐसा कदम उठाया जा सकता है। अभी ये होगा या नहीं, ये अभी कंफर्म नहीं है।”

केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “बजट सत्र बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन विपक्ष के सांसदों को न अपनी गरिमा का ख्याल है, न ही संसद की गरिमा का ख्याल है। उन्होंने बजट सत्र में व्यवधान पैदा करने का काम किया है। मुझे लगता है कि यह सभी के लिए बहुत अच्छा बजट है।”

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी जिस तरह से बयान देते हैं, वह सही नहीं है। इनके पास कोई आधार भी नहीं होता है। कांग्रेस के सांसदों को स्पीकर से मिलने का और उनसे बात करने का अधिकार है, लेकिन स्पीकर को धमकी देना, यह भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। यह रवैया बिलकुल ठीक नहीं है।”

जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा, “अब तो लेखक और पब्लिशर दोनों ने कहा है कि किताब नहीं छपी है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगता है कि वो सभी नियम-कानूनों के ऊपर हैं, उन पर कुछ लागू नहीं होता। वो पूरी राजनीति करना चाहते हैं। वो लोकसभा को बंधक बनाकर रखने की कोशिश कर रहे हैं।”

भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने कहा, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन को बाधित कर रहे हैं, संसद में झूठ बोलते हैं। बिना सोचे-समझे कुछ भी नाम लेते हैं, किसी को भी बदनाम करते हैं। मुझे लगता है कि उनको संसद में चुनकर लाना ही गलत है।”

भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, “लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिना तथ्यों के बयान दे रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। सदन में कोई भी बात रखने से पहले उसके पुख्ता सबूत होने चाहिए और यह विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।”

भाजपा सांसद शशांक मणि ने कहा, “जब विपक्ष के पास मुद्दा नहीं होता तो झूठ बोलकर काम चलाते हैं। इस बार उन्होंने बेबुनियाद रूप से कई ऐसे लोगों का नाम लिया, जो सदन में भी उपस्थित नहीं थे, जिनका नाम नहीं लिया जा सकता है। कई लोगों ने इसपर आपत्ति भी जताई।”

राजस्थान भाजपा अध्यक्ष व सांसद मदन राठौड़ ने कहा, “देश विरोधी गतिविधियां राहुल गांधी करते हैं। वो हमारे देश के नेतृत्व की आलोचना विदेश में जाकर करते हैं। उनको जो बात कहनी है, वो सदन में कहें। जब सदन में बजट पर चर्चा होनी है तब वो कभी किसी मंत्री पर आरोप लगा देते हैं तो कभी प्रधानमंत्री पर बोलते हैं, यह ठीक बात नहीं है। अगर उन्होंने बजट पढ़ा होता तो वो शायद इस प्रकार की बात नहीं करते।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “जब कोई संसद को अखाड़ा बना देगा, शब्दों को असंसदीय और अशिष्ट भाषा के रूप में प्रदर्शित करेगा और संसद की गरिमा को चोट पहुंचाएगा तो लोगों के पास चारा क्या बचता है? जो भी होगा, वो नियम के अंतर्गत होगा, ससंदीय परंपराओं के पालन के लिए होगा।”

यात्रीगण ध्यान दें! 1 मार्च से बदल जाएगा रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम, फटाफट जान ले अपने काम की खबर…

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अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन से जनरल ट्रेन टिकट बुक करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत ज़रूरी है। इंडियन रेलवे 1 मार्च से UTS (अनरिज़र्व्ड टिकटिंग सिस्टम) ऐप बंद कर देगा। अब पैसेंजर्स को जनरल और प्लेटफ़ॉर्म टिकट बुक करने के लिए नए सुपर ऐप, RailOne पर निर्भर रहना होगा।

 रेलवे ने बताया कि यह बदलाव पैसेंजर्स को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर सभी सर्विस देने के लिए किया जा रहा है।

UTS ऐप धीरे-धीरे बंद होगा, RailOne नया प्लेटफ़ॉर्म बनेगा

अभी तक, पैसेंजर्स UTS ऐप के ज़रिए ऑनलाइन जनरल और प्लेटफ़ॉर्म टिकट खरीद सकते थे। लेकिन, 1 मार्च के बाद यह ऐप काम नहीं करेगा। इसकी जगह RailOne ऐप ले लेगा, जिसे पिछले साल लॉन्च किया गया था। RailOne को रेलवे का “वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म” बताया जा रहा है।

RailOne कई तरह की इंटीग्रेटेड सर्विस देगा

RailOne ऐप सिर्फ़ जनरल टिकट बुकिंग तक ही सीमित नहीं है। यह रिज़र्व्ड टिकट बुकिंग, प्लेटफ़ॉर्म टिकट बुकिंग, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, कोच की जगह, प्लेटफ़ॉर्म की जानकारी और PNR स्टेटस जैसी सुविधाएँ एक ही जगह पर देता है। इसके अलावा, IRCTC Rail Connect, NTES, Rail Madad और Food on Track जैसी सर्विसेज़ को भी इस ऐप में इंटीग्रेट किया गया है। इसका मतलब है कि पैसेंजर्स को अब अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं होगी।

UTS R-Wallet का क्या होगा?

रेलवे ने साफ़ किया है कि UTS ऐप के R-Wallet में पैसेंजर्स का बैलेंस बर्बाद नहीं होगा। पैसेंजर्स उसी लॉगिन ID और पासवर्ड से RailOne में साइन इन करके अपने वॉलेट बैलेंस को एक्सेस कर सकते हैं। UPI, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और R-Wallet जैसे डिजिटल पेमेंट ऑप्शन मौजूद रहेंगे।

जनरल टिकट पर 3% डिस्काउंट

RailOne ऐप को प्रमोट करने के लिए, रेलवे अभी जनरल टिकट पर 3% डिस्काउंट दे रहा है। यह डिस्काउंट सिर्फ़ डिजिटल पेमेंट करने पर ही मिलेगा। यह ऑफ़र 14 जुलाई, 2026 तक वैलिड रहेगा।

पैसेंजर्स को क्या करना चाहिए?

रेलवे ने पैसेंजर्स को सलाह दी है कि वे समय पर RailOne ऐप डाउनलोड करें, लॉग इन करें और अपनी प्रोफ़ाइल सेट अप करें। ताकि 1 मार्च के बाद टिकट बुक करने में कोई दिक्कत न हो।

बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, राजनीतिक अस्थिरता से वर्षों की कोशिशों पर विराम तय…

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बांग्लादेश में वोट चोरी और हिंसा की घटनाओं के बीच गुरुवार को आखिरकार चुनाव शुरू हो गया। बांग्लादेशी मीडिया ने चुनाव आयोग के हवाले से जानकारी साझा की है कि दोपहर 12:00 बजे तक पूरे देश में 32.88 फीसदी वोटिंग हुई।

ईसी के सीनियर सेक्रेटरी अख्तर अहमद ने शहर के निर्वचन भवन में दोपहर 1:10 बजे मीडिया को ब्रीफ करते हुए कहा, “हमने 42,651 पोलिंग स्टेशनों में से 32,789 से डेटा इकट्ठा किया है। डेटा के मुताबिक, वोटिंग 32.88 फीसदी है।”

देश भर में 300 पार्लियामेंट्री सीटों में से 299 पर शांतिपूर्ण माहौल में वोटिंग हो रही है।

शेख हसीना की सरकार के गिराए जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी खराब हो गए हैं। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान और चीन की तरफ ज्यादा झुकी हुई है। यूनुस के शासन में पाकिस्तान को बांग्लादेश में एंट्री मिल गई।

जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में हालिया स्थिति पर अपना नियंत्रण बना रहा है। यही कारण है कि हाल के समय में बांग्लादेश में कुछ ऐसी नीतियां बनाई गई हैं, जिनका मकसद भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना था।

भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होनी चाहिए और जल्द ही चुनाव होने चाहिए। भारत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए अपना समर्थन भी जताया था।

सर्वे में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सबसे आगे थी। भारतीय पक्ष और बीएनपी दोनों चुनाव के आखिरी नतीजे के आधार पर भारत-बांग्लादेश के बीच संबंधों को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। भारत भी चुनाव पर करीब से अपनी नजर बनाए हुए है। इस चुनाव में जीत बीएनपी की हो या फिर जमात की, दोनों ही स्थिति में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन सबसे ऊपर भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा सुरक्षा है।

भारत बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ सबसे लंबी सीमा है। ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां कोई बाड़ नहीं है। इन्हीं इलाकों से गैर-कानूनी इमिग्रेशन, जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार और नकली करेंसी का आना-जाना होता है।

एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिरता एक बड़ी चिंता है। एक मजबूत सरकार के साथ एक स्थिर बांग्लादेश का मतलब होगा कि सीमाएं सुरक्षित रहेंगी, क्योंकि दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। भारत बांग्लादेश से आतंकवादियों की एंट्री को लेकर भी चिंतित है।

यूनुस के शासन में कई कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को रिहा किया गया है। साथ ही बांग्लादेश में यूनुस के काल में आईएसआई एक्टिव हो चुकी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिसका भविष्य में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।

शेख हसीना सरकार गिरने से पहले, काउंटर-टेररिज्म दोनों देशों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। दोनों देशों ने पहले जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन किए हैं, वे बिना किसी रुकावट के हुए हैं। भारत चाहेगा कि यह संतुलन बना रहे और इसलिए, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का होना बहुत जरूरी है।

बांग्लादेश और भारत लंबे समय से व्यापारिक साझेदार रहे हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए एक स्थिर बांग्लादेश बहुत जरूरी है। हसीना की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी अच्छे थे। दोनों देशों ने मिलकर आर्थिक सहयोग बढ़ाया था। इसमें व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा सहयोग और बिजली का व्यापार भी शामिल था।

ये जरूरी मुद्दे हैं, और दोनों देश चाहेंगे कि ये बने रहें। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता पर निर्भर करेगा। किसी भी तरह की अस्थिरता दोनों देशों के वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देगी। भारत और बांग्लादेश ने 1971 से अब तक साथ मिलकर जिस तरह से हर क्षेत्र में आपसी संबंध स्थापित किए हैं और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है, वह सब बर्बाद हो जाएगा।

भारत को उम्मीद है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी की तुलना में इस पार्टी के साथ काम करना आसान होगा। एक अधिकारी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अगर जमात सत्ता में आई तो संबंध पूरी तरह टूट जाएंगे। भारत ने जमात के साथ तब काम किया है जब वह पहले बीएनपी के साथ गठबंधन में थी। अभी स्थिति अलग है क्योंकि जमात और बीएनपी अब सहयोगी नहीं बल्कि दुश्मन हैं।

भारत लौटे बिना विजय माल्या को नहीं मिलेगी राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया अंतिम मौका…

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि जो व्यक्ति जानबूझकर अदालत की प्रक्रिया से बच रहा हो, वह ‘इक्विटेबल रिलीफ’ (न्यायोचित राहत) का लाभ नहीं ले सकता।

हालांकि, अदालत ने निष्पक्षता के आधार पर माल्या को यह स्पष्ट करने के लिए एक अंतिम मौका दिया कि क्या वे भारत लौटने का इरादा रखते हैं या नहीं।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ विजय माल्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की संवैधानिक वैधता और खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने की कार्यवाही को चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह यह दर्ज करने के पक्ष में है कि विजय माल्या अदालत के अधिकार क्षेत्र से बच रहे हैं, इसलिए उनकी याचिका में राहत की अपेक्षा नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “आपको वापस आना होगा। यदि आप वापस नहीं आते हैं तो हम आपकी याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। आप अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, इसलिए आप राहत नहीं मांग सकते। फिर भी निष्पक्षता के तहत हम मामला खारिज नहीं कर रहे हैं और आपको एक और मौका दे रहे हैं।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी है।

इससे पहले विदेश मंत्रालय (एमईए) ने भी दोहराया था कि भारत सरकार आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि कई कानूनी प्रक्रियाएं शामिल हैं, लेकिन सरकार की ओर से विजय माल्या और ललित मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों को भारत लाकर अदालत में पेश करने की कोशिश की जा रही है।

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी कि 31 अक्टूबर 2025 तक कुल 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, जिनमें से 9 लोगों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है, जिससे 26,645 करोड़ रुपए का मूल नुकसान हुआ। इन पर 31 अक्टूबर 2025 तक 31,437 करोड़ रुपए का ब्याज भी जुड़ चुका है, जबकि 19,187 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है।

हालांकि, विजय माल्या और ललित मोदी ने अपने खिलाफ लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से इनकार किया है। माल्या ने हाल ही में केंद्र सरकार और सार्वजनिक बैंकों से यह भी सवाल किया था कि उनसे वसूली गई राशि को लेकर अलग-अलग बयान क्यों दिए जा रहे हैं, और इस मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की मांग की थी।

अमेरिका को टैरिफ लागू होने की उम्मीद : व्हाइट हाउस

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व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार समझौते के तहत टैरिफ कम करने के वादे को पूरा करेगा। व्हाइट हाउस ने इस समझौते को अमेरिकी किसानों, मजदूरों और उद्योगों के लिए एक सकारात्मक जीत बताया।

ट्रंप सरकार इस समझौते को एक मील का पत्थर मानती है, लेकिन उसे उम्मीद है कि प्रतिबद्धता को ऐसे एक्शन में बदला जाएगा, जिन्हें मापा जा सके। व्यापार प्रवर्तन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीति का एक अहम हिस्सा रहा है।

व्हाइट हाउस के अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही साबित कर चुके हैं कि हम सभी व्यापार साझेदारों से अपने डील कमिटमेंट्स को बनाए रखने की उम्मीद करते हैं।”

व्हाइट हाउस ने यह नहीं बताया कि किन टैरिफ लाइनों या क्षेत्रों में तुरंत बदलाव होंगे, लेकिन अमेरिकी फार्म समूहों ने बार-बार भारत की ऐतिहासिक रूप से ज्यादा कृषि शुल्क को अमेरिकी एक्सपोर्ट्स में रुकावट बताया है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने नॉन-टैरिफ उपायों, जिसमें रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स और सर्टिफिकेशन नियम शामिल हैं, को भी बड़े मार्केट एक्सेस में रुकावट बताया है।

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल की नीतियों में भारत को दक्षिण एशिया और वेस्टर्न इंडो-पैसिफिक में एक अहम साझेदार बताया। व्यापार, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन रेजिलिएंस को उस साझेदारी के मुख्य स्तंभ के तौर पर रखा गया है।

अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और पिछले दस सालों में दोनों देशों के बीच गुड्स और सर्विसेज का ट्रेड लगातार बढ़ा है। हालांकि, टैरिफ और मार्केट एक्सेस को लेकर समय-समय पर तनातनी सामने आती हैं, लेकिन दोनों सरकारों ने व्यापार में आने वाली दिक्कतों को मैनेज करते हुए कमर्शियल एंगेजमेंट बढ़ाने के मकसद से बातचीत जारी रखी है।