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‘अगर मैं राष्ट्रपति बना तो भारत से रिश्ते…’, अमेरिकी नेता ने किया बड़ा वादा, कहा- ट्रंप ने बर्बाद कर दी पूरी मेहनत’

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Trump Policy: इमैनुएल ने कहा कि ट्रंप की भाषा और रवैये के कारण अमेरिका के कई सहयोगी देश उससे दूर हो रहे हैं. भारत, जापान और कोरिया जैसे अहम साझेदार भी ट्रंप की नीतियों से असहज महसूस कर रहे हैं.

अमेरिका के पूर्व राजदूत रेहम इमैनुएल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियों ने भारत-अमेरिका रिश्तों को कमजोर किया है और अगर वह सत्ता में आते हैं तो इन संबंधों को फिर मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे.

भारतअमेरिका संबंधों पर ट्रंप की नीतियों की आलोचना
एक इंटरव्यू में भारत-अमेरिका रिश्तों पर बात करते हुए इमैनुएल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने भारत को दूर धकेला. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 30 वर्षों में हर अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को करीब लाने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप ने इस प्रयास को नुकसान पहुंचाया.

सहयोगी देशों से बढ़ी दूरी का दावा
इमैनुएल ने कहा कि ट्रंप की भाषा और रवैये के कारण अमेरिका के कई सहयोगी देश उससे दूर हो रहे हैं. उनके मुताबिक भारत, जापान और कोरिया जैसे अहम साझेदार भी ट्रंप की नीतियों से असहज महसूस कर रहे हैं.

राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी और बड़ा बयान
डेमोक्रेटिक नेता इमैनुएल के ये बयान इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि वह आने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में हैं. इलिनोइस से पूर्व प्रतिनिधि रहे इमैनुएल 2028 के चुनाव में उतरने की संभावनाओं को लेकर चर्चा में हैं.

पाकिस्तान को लेकर ट्रंप के रुख पर सवाल
इमैनुएल ने ट्रंप प्रशासन की भारत-पाकिस्तान नीति पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि ट्रंप ने कई मौकों पर भारत के बजाय पाकिस्तान के पक्ष में झुकाव दिखाया, जो अमेरिका की विदेश नीति के लिए सही नहीं है.

भारतपाक तनाव के दौरान बयानबाजी पर आलोचना
भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सैन्य तनाव के बाद ट्रंप के बयानों को लेकर भी इमैनुएल ने नाराजगी जताई. उनका कहना है कि ट्रंप के बयान भारत के रुख के विपरीत थे, जिससे नई दिल्ली में असहजता पैदा हुई.

CM सम्राट चौधरी ने सदन में हासिल किया विश्वासमत, गूंजा जय श्रीराम का नारा’

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Samrat Choudhary News: सदन में सम्राट चौधरी ने एनडीए सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की. यह भी कहा कि आज भी कई सेक्टर हैं जिसमें काम करने की जरूरत है.

बिहार की नई सरकार के गठन को करीब 10 दिन हो गए हैं. आज (शुक्रवार) सदन में सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने बहुमत साबित किया. ध्वनिमत से विश्वासमत हासिल किया. विपक्ष ने मत विभाजन यानी वोटिंग की मांग नहीं रखी. इस दौरान सदन में एनडीए के विधायक जय श्रीराम का नारा लगाते नजर आए.

सम्राट चौधरी ने इस मौके पर एनडीए सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की. कहा कि 680 करोड़ की राशि से सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर में कॉरिडोर बनाया जाएगा. अब जो रोड हादसे होंगे उसमें इंश्योरेंस का पैसा भी 4,00,000 मिलेगा और सरकार भी अपने स्तर से 4,00,000 देगी.

सम्राट चौधरी ने कहा, “कई सेक्टर हैं जिसमें काम करने की जरूरत है, ब्लॉक में मॉडल स्कूल स्थापित करना है, जिला स्कूल को भी व्यवस्थित करना है.”

उन्होंने कहा, “मैं किसी अधिकारी के बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, लेकिन यह व्यवस्था जरूर बनानी है कि ऑफिसर और मंत्री अपने बच्चों को स्वयं सरकारी स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दें.”

सम्राट ने की स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर व्यवस्था बनाने की बात

दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था करनी है यदि जिले में किसकी को इलाज की जरूरत पड़े तो वह दो-तीन दिनों तक रहकर इलाज कराए. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र पर भी चर्चा की. कहा कि सभी प्रखंडों में एक-एक डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे. 208 डिग्री कॉलेज को बिहार सरकार ने बना लिया है. जल्द ही सभी डिग्री कॉलेज को एक साथ चालू किया जाएगा.

सीएम ने कहा कि बिहार में लगातार एयरपोर्ट का काम चल रहा है. किशनगंज में भी एयरपोर्ट की कल्पना की जा रही है. पूर्णिया एयरपोर्ट चालू हो गया है. फारबिसगंज और सहरसा में एयरपोर्ट की कल्पना की जा रही है. बीरपुर एयरपोर्ट के लिए टेंडर निकल गया. दरभंगा में एयरपोर्ट बनकर तैयार है और चालू है.

उच्चस्तरीय शिक्षा, नवाचार और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं से बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर’

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उत्तर प्रदेश में बेटियों को सुरक्षित माहौल देने के बाद योगी सरकार का लक्ष्य उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है, ताकि उनके सपनों को पंख मिल सकें. इसके लिए सरकार शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार नए अवसर सृजित कर रही है. उच्चस्तरीय शिक्षा, नवाचार और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिल रहा है. प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि बेटियां केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल के साथ रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें.

इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन के माध्यम से बड़ी संख्या में युवतियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मिशन के तहत आईटी, हेल्थकेयर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है. सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर विशेष जोर दिया है.

प्रशिक्षण केंद्रों में युवतियों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल स्किल और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण के बाद उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. इसके साथ ही बेटियों को स्वरोजगार और स्टार्टअप के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. तकनीकी प्रशिक्षण के साथ अब युवतियों को सॉफ्ट स्किल्स, डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक क्षमताओं में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें.

इसी दिशा में कौशल विकास मिशन ने छह प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ समझौता कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और आधुनिक बनाया है. इन संस्थाओं के सहयोग से युवतियों को मंच कौशल, संवाद क्षमता, व्यक्तित्व विकास और डिजिटल दक्षता का प्रशिक्षण दिया जाएगा. परफॉर्मिंग आर्ट्स और सॉफ्ट स्किल्स के प्रशिक्षण से युवतियों में संवाद कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा. भारतेंदु नाट्य अकादमी के सहयोग से प्रशिक्षणार्थियों को मंच कौशल और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे कला आधारित रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

सरकार कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाने पर जोर दे रही है. इसी उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी और कौशल विकास मिशन के बीच ‘कौशल कनेक्ट सेल’ का गठन किया गया है, जिससे निवेश करने वाले उद्योगों को प्रशिक्षित वर्कफोर्स उपलब्ध कराई जा सकेगी. इससे युवतियों के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे. कौशल प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की परफॉर्मेंस-बेस्ड ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है. इस व्यवस्था के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को अधिक अवसर दिए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और युवाओं के साथ ही युवतियों को बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे.

युवाओं को योजनाओं और रोजगार अवसरों से जोड़ने के लिए मिशन मुख्यालय में ‘कौशल कॉल सेंटर’ भी शुरू किया गया है. इसके माध्यम से प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार से जुड़ी जानकारी सीधे युवाओं तक पहुंचाई जाएगी, ताकि कोई भी बेटी केवल जानकारी के अभाव में किसी अवसर से वंचित न रह जाए. तकनीकी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.

प्रदेश के विभिन्न तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में छात्राएं इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य तकनीकी विषयों में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. वर्तमान में प्रदेश में लगभग 35 सेक्टर्स और 1300 से अधिक जॉब रोल्स में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भी कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं.

योगी सरकार की इन पहलों से उत्तर प्रदेश की बेटियां शिक्षा, कौशल और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

यूजीसी रेग्युलेशन 2026- मोदी का मंडल और मंदिर दोनों वोट बैंक खतरे में!

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आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूजीसी रेगुलेशन 2026’ पर रोक लगा दी. सर्वोच्च अदालत का कहना है कि नियम बहुत साफ नहीं हैं. जब तक नये और स्पष्ट नियम नहीं आ जाते फिलहाल 2012 वाला नियम ही लागू रहेगा.

हम जैसे ओल्ड स्कूल तो माननीय न्यायमूर्ति की नीयत पर सवाल उठाने का साहस नहीं कर सकते. मगर इस आदेश पर पिछड़ा-दलित क्वार्टर से आवाज आयी कि चीफ जस्टिस ब्राह्मण हैं और बेंच के दूसरे जस्टिस बागची बंगाली सवर्ण हैं. इस स्टे ने उस वर्ग की आशंका को सही साबित किया. इक्विटी कमेटी का मुखिया अगर सवर्ण होगा तो वो दलित पिछड़ों के हित में क्या फैसला देगा.

फिलहाल जब तक स्टे लागू है 2012 के नियम ही लागू होंगे. यानि तब तक ओबीसी इसके दायरे से बाहर होंगे और शिकायत ग़लत पाए जाने पर शिकायत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी. 2026 के रेग्युलेशन में यही दो चीजें एकदम नयी थीं. फिलहाल मामला तारीख़ पर तारीख़ के अदालती चक्र में चला गया है तो समझिए लटक ही गया है. अदालत ने स्टे लगाते हुए क्या-क्या कहा ये अब सबको पता है, सवाल तो इसके पीछे की सियासत का है.

जिन्हें लगता है कि यूजीसी रेग्युलेशन-2026 के प्रावधान सरकार की सहमति के बगैर और लापरवाही से लागू हो गए, वो मुगालते में हैं. मोदी सरकार अल्पसंख्यक सवर्णों के मुकाबले बहुसंख्यक ओबीसी–दलित-आदिवासी वोट को लेकर ज्यादा चिंतित है. सवर्णों को तो वो अपना स्थायी वोट बैंक मान कर चल रही थी – जो जाएं तो जाएं कहां की मनस्थिति में हैं.

एक सच ये भी है कि जैसे सवर्णों में ब्राह्मण है उसी तरह ओबीसी में यादव हैं. इन्हें यूपी-बिहार में नियो रिच और पॉलिटिकली पावरफुल माना जाता है. अगर 2026 के रेगुलेशन में ओबीसी को नहीं शुमार किया गया होता तो शायद ये विरोध इतना इंटेंस नहीं होता. दलित तो मॉरली आज भी इतना दबा हुआ है कि बहुत सारी जगहों पर वो आवाज़ नहीं निकालता मगर यादव ऐसा करते हैं. कुर्मियों के बारे में मशहूर है कि वो निहुरे-निहुरे (झुके-झुके) ही ऊंट चुरा लेने की कला में माहिर हैं. यादवों की तरह लाउड नहीं हैं.

बहरहाल इस रेगुलेशन को लेकर सोशल मीडिया से सड़क तक जिस तरह पीएम मोदी का विरोध हुआ- ऐसा पहले नहीं देखा गया. अब तक मोदी ही रैलियों में खुद को सबसे बड़ा ओबीसी बताते थे, मगर इस बार तो हद पार हो गयी जब उन्हें ही उनकी जाति बताई जाने लगी, उन्हें घांची तेली कहा जाने लगा.

यूपी के गोंडा में एक संगठन ने मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे अमंगलकारी जेएनयू टाइप नारे लगाए. एक जगह तो बीच चौराहे पर मोदी और अमित शाह के पुतलों की जूते से पिटाई की तस्वीर भी सामने आयी.

मत भूलिए कि ये वही यूपी है जहां से वीपी सिंह के मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने पर तीखा विरोध शुरु हुआ. पुलिस की गोली से पहली शहादत भी ब्राह्मण बहुल पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई. मरने वाला छात्र भी त्रिपाठी ब्राह्मण ही था. दिल्ली में गोस्वामी ने तो आत्मदाह की कोशिश बहुत बाद में की. जिस शख्स के लिए राजा नहीं फक़ीर है का नारा लगा था, वो राजा ओबीसी आरक्षण का खलनायक बन गया था. राजा मांडा यानि वीपी सिंह को इसका कोई फायदा हुआ हो या न हुआ हो, यूपी और बिहार में इसने दो मंडलवादी धुरंधर पैदा किए – मुलायम सिंह यादव और लालू यादव. जबकि मंडल का ‘किक बैक’ मिला बीजेपी को.

आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की पहली रथयात्रा मंडल के काउंटर में ही निकाली थी. भले ही 1986 के पालनपुर, हिमाचल के अधिवेशन में हिंदुत्व और राममंदिर बीजेपी के एजेंडे पर आ चुके थे, मगर जो मुहिम बाद में शुरु होनी थी उसे मंडल के चलते ‘प्री-पोन’ करना पड़ा. दरअसल मोदी से पहले बीजेपी कभी भी खुलकर जाति की राजनीति नहीं करती थी. आज भी हिंदुत्व का ध्रुवीकरण ही बीजेपी को फायदा पहुंचाता है, और जातियों की गोलबंदी उसे हरा देती है. क्योंकि आखिर-आखिर वो सवर्णों की पार्टी ही मानी जाती है. लिहाज़ा मंडल विरोध में सामाजिक धरातल पर जो हो रहा था बीजेपी वो देख रही थी. ओबीसी को 26 फीसदी आरक्षण का हिंसक और आत्मघाती विरोध कर रहे सवर्णों की वजह से जो काउंटर पोलराइजेशन हो रहा था, बीजेपी उसे देख कर चिंता में थी.

मंडल की आग तो ठंढी हो गयी मगर ओबीसी आज भी पूरी तरह बीजेपी के हाथ नहीं आया. यादव तो खैर पूरी तरह लालू- मुलायम के हो गए. दोनों राज्यों में मुस्लिम-यादव का एमवाई समीकरण बना. यादवों के बाद दूसरे नंबर के ओबीसी कुर्मी भी उनके साथ ही गए, लेकिन 2014 आते-आते चाणक्य अमित शाह ने कुर्मियों को यादवों से अलगाने में कामयाबी हासिल की – खासतौर पर यूपी में. मगर बिहार में नीतीश को साधने में उन्हें वक्त लगा.

एक सवाल ये भी है कि क्या सरकार ने खुद ही मंडल और कमंडल दोनों के वोटों को खतरे में डाल दिया है.

क्योंकि ये भी एक संयोग है कि जब मंडलवाद का भूत मंडरा रहा होता है, मंदिरवादी राजनीति का साया भी उसी वक्त गहराने लगता है. काशी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर तोड़-फोड़ पर बहस चल ही रही थी, माघ मेले में पालकी से स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य को लाठी के दम पर रोकने का विरोध हो रहा था. उसी वक्त यूजीसी रेग्युलेशन का जिन्न बाहर आ गया. मणिकर्णिका और शंकराचार्य के मसले पर तो सरकार की ओर से बोलने वाले बहुतेरे थे. जब संकट मोचन के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने डबडबायी आंखों से घाट पर आकर कहा कि मणिकर्णिका गंगा से पहले का तीर्थ है, तो सरकार समर्थक पंडितों ने लेख लिख डाले कि मणिकर्णिका का ऐसा कोई महत्व ही नहीं. वो भी एक और श्मशानघाट है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तो फर्जी ठहराने वाले ब्राह्मणों की कतार लग गयी जो उन्हें बीजेपी विरोधी और अखिलेश – कांग्रेस समर्थक बताने में तमाम हदें पार कर रहे थे.

मगर, यूजीसी रेगुलेशन 2026 का मसला सीधे सवर्ण छात्रों के भविष्य से जुड़ रहा था तो वहां किसी तरह की दो फाड़ नहीं हुई. सरकार के सूचना तंत्र ने जब हालात की गंभीरता बयान की तो होश फाख्ता हो गए. हालात बिगड़ने से बचाने के लिए बेताल फिर लौट कर उसी डाल पर आया.

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र जैसे ब्राह्मण नेता खोज कर बाहर निकाले गए जिन्होंने रेग्युलेशन के खिलाफ़ बयान दिया. दबदबे वाले ठाकुर बृज भूषण शरण सिंह ने भी विरोध में बयान दिया. जबकि उनके बेटे करण भूषण रेग्युलेशन वाली संसदीय समिति में थे. हालांकि कोशिश संसदीय समिति के अद्धयक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के सिर ठीकरा फोड़ने की भी हुई. मगर दिग्गी ने साफ कर दिया कि नियम बनाने में संसदीय समिति का कोई रोल था ही नहीं, हमने सिर्फ सिफारिशें दी थीं. रेग्युलेशन का प्रारुप तो यूजीसी की कमेटी ने ही बनाया.

विरोध की सुगबुगाहट पार्टी के भीतर भी थी, अब सरकार खुद तो पीछे हट नहीं सकती थी और अदालत ही एक रास्ता था जो अख्तियार किया गया. मगर एक बात 100 फीसदी सच है कि इस रेग्युलेशन ने सवर्णों का संशय बढ़ाया है, ओबीसी तो पहले ही इसे लेकर आश्वस्त नहीं था. लिहाजा इसका असर आगे क्या होता है देखने वाली बात होगी.

पुनश्च: इस बीच एक मजेदार चीज देखने को मिली. किसी सवर्ण ने सोशल मीडिया पर लिखा ब्राह्मण, ठाकुर और पठान यूजीसी बिल के विरोध में एक साथ. इस पर किसी मुसलमान की त्वरित टिप्पणी आयी – अभी हम कागज़ खोजने में लगे हैं आप अपना देख लो. किसी शख्स ने दोनों को मिला कर मजाहिया मीम बना दिया.

मायावती और ओवैसी फैक्टर ने बदली अखिलेश की चुनावी स्क्रिप्ट’

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी जिस बदले हुए तेवर-कलेवर को अपनाकर चलती हुई दिख रही है, वह किसी वैचारिक आत्ममंथन का परिणाम कम और बदलते चुनावी गणित की उपज ज्यादा है. दरअसल प्रदेश में मायावती और ओवैसी फैक्टर की मजबूती ने स्पष्ट रूप से समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले को सीधी चुनौती है. यही कारण है कि समाजवादी पार्टी ने लंबे समय तक जिस M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण को सत्ता की चाबी माना, वह अब पहले जैसी भरोसेमंद पूंजी नहीं रह गई है.

अखिलेश यादव को कहीं न कहीं इस बात का भान है और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और बिहार जैसे पड़ोसी राज्य के चुनावी नतीजे ने इसे और पुष्ट किया है. ऐसे में, आज सपा की नई रणनीति का केंद्र इस विमर्श पर टिका है कि जब परंपरागत वोट बैंक बिखरने लगे, तो आखिर चुनाव कैसे जीता जाए? जाहिर है, बिना सवर्णों के सहयोग से ऐसा हो पाना असंभव है.

बिहार से मिला पहला बड़ा संकेत

इस बदलाव की पहली स्पष्ट झलक बिहार विधानसभा चुनाव में दिखी. अखिलेश यादव ने वहां विपक्षी गठबंधन के लिए आक्रामक प्रचार किया और 25 से अधिक सीटों पर रैलियां कीं. रणनीति यह थी कि एकजुट अल्पसंख्यक वोट सत्ता विरोधी लहर पैदा करेगा. लेकिन, नतीजा इसके उलट निकला. मुस्लिम वोटों के बड़े पैमाने पर एकजुट होने के बावजूद एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की. यह परिणाम अखिलेश के लिए चेतावनी था कि केवल अल्पसंख्यक गोलबंदी भी अब सत्ता की गारंटी नहीं रही.

ओवैसी फैक्टर ने गरमाई मुस्लिम वोटों की नई राजनीति

बिहार के बाद महाराष्ट्र और अन्य राज्यों AIMIM के प्रदर्शन ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है. इन राज्यों में ओवैसी फैक्टर के प्रभाव ने यह साबित कर दिया कि मुस्लिम मतदाता अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक अभिव्यक्ति तलाश रहा है. उत्तर प्रदेश में भी AIMIM की मौजूदगी और उसका बढ़ता जमीनी प्रभाव सपा के लिए खतरे की घंटी है. अखिलेश जानते हैं कि अगर AIMIM यूपी में मजबूती से उतरी, तो मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा सपा से खिसकना तय है. मुस्लिम वोटों का छिटकना सपा के लिए निर्णायक हार तय कर सकता है.

मायावती की वापसी और PDA का संकट

अखिलेश की दूसरी बड़ी चुनौती मायावती की सक्रियता है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) का नारा देकर सपा ने खासतौर पर ‘संविधान बदलने’ के नैरेटिव के सहारे दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश की थी. लेकिन वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हालात बदलते दिख रहे हैं. बसपा फिर से संगठन को खड़ा कर रही है और मायावती खुलकर चुनावी मैदान में उतरने के संकेत दे रही हैं. यदि बसपा दलित वोटों को फिर से अपने पाले में करने में सफल रही तो PDA का गणित स्वतः ही कमजोर पड़ जाएगा.

ओवर डिपेंडेंस अब लगने लगा है जोखिम

सपा के रुख में बदलाव का संकेत पार्टी के भीतर के घटनाक्रमों से भी मिलता है. जैसे रामपुर में उम्मीदवार चयन से लेकर आजम खान का निर्णय न मानना. इसे केवल व्यक्तिगत मतभेद कहकर नहीं टाला जा सकता. यह दरअसल उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह किसी एक चेहरे या एक समुदाय पर निर्भर नहीं है. अल्पसंख्यक राजनीति का ‘ओवर-डिपेंडेंस’ अब सपा को जोखिम भरा लगने लगा है.

सवर्णों की ओर बढ़ता सपा का कदम

नई चुनावी पिच पर सपा इन दिनों खुलकर खेल रही है. ब्राह्मणों और अन्य सवर्ण मतदाताओं को लुभाने के प्रयास, धार्मिक स्थलों का प्रचार, सांस्कृतिक प्रतीकों पर नरम रुख इसी रणनीति का हिस्सा हैं. संदेश साफ है: सपा का भरोसा अब पिछड़ा-अल्पसंख्यक वोटों पर पहले जैसा नहीं रहा. यह बदलाव वैचारिक क्रांति नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विवशता से उपजा है जो मानती है कि M-Y समीकरण अब ‘जीत की गारंटी’ नहीं.

एक वोट बैंक पर निर्भरता का अंत 

पिछले कई विधानसभा चुनावों का ट्रैक रिकॉर्ड यही बताता है कि यूपी जैसे राज्य में किसी एक सामाजिक समूह के सहारे सत्ता पाना अब लगभग असंभव हो चुका है. भाजपा ने व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाकर यह मॉडल पहले ही स्थापित कर दिया है. अखिलेश अब उसी वास्तविकता को स्वीकारते दिख रहे हैं. उन्हें अंदेशा है कि यदि बसपा दलित वोट काटे और AIMIM मुस्लिम वोटों में सेंध लगाए, तो सपा का पारंपरिक आधार बुरी तरह कमजोर हो सकता है.

2027 की तैयारी और बदला हुआ गणित

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में अखिलेश यादव के पास विकल्प सीमित हैं. या तो वे पुराने समीकरणों पर भरोसा करते रहें या फिर जोखिम उठाएं और नए सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश करें.

M-Y समीकरण पर कम हुए भरोसे के बीच सवर्णों की ओर बढ़ता झुकाव इसी दूसरे विकल्प का संकेत है. यह रणनीति सफल होगी या नहीं, यह अलग विषय है, लेकिन इतना तय है कि मायावती और ओवैसी के उभार ने अखिलेश को अपनी राजनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. इस संकेत को समझना अल्पसंख्यक मतदाताओं के लिए भी अहम है. क्योंकि यह एक ऐसा वोटर समूह रहा है जिसने एकजुट होकर हमेशा सपा को वोट दिया.

इफ्तिखार अहमद की नाव में बैठकर पीएम मोदी ने किया फोटोशूट, सामने आया मालिक, बोला- ‘हमें 5 मिनट पहले ही…’

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पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के बाद शुक्रवार को पीएम मोदी ने हुगली घाट का दौरा किया. पीएम मोदी ने किराए पर अपनी नावें देने वाले इफ्तिखार अहमद से बातचीत की.

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (23 अप्रैल) को पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ. वोटिंग के बाद पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को गंगा किनारे पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कई नाविकों से बात की. इसके अलावा पीएम मोदी ने खुद फोटोग्राफी भी की. पीएम मोदी के दौरे के दौरान किराए पर अपनी नाव देने वाले नाविक का रिएक्शन सामने आया है.

पीएम मोदी के हुगली घाट दौरे के दौरान मोहम्मद इफ्तिखार अहमद से किराए पर उसकी नावें ली गई थीं. नावों के मालिक इफ्तिखार अहमद ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बताया कि आज सुबह यहां काम करने वाले एक व्यक्ति ने मुझसे 7 नावें मांगीं थी, जब मैंने उनसे पूछा कि क्या ये वीआईपी लोगों के लिए हैं. उन्होंने कहा कि कोई खास बात नहीं है.

इफ्तिखार अहमद से क्या बोले पीएम 
मोहम्मद इफ्तिखार ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद हमने अपनी नावें यहां खड़ी कर दीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से ठीक 5 मिनट पहले. उन्होंने हमें इसके बारे में बताया. सुबह की सैर के बाद प्रधानमंत्री मोदी घाट पर आए और हमारी नाव में बैठ गए. प्रधानमंत्री ने हमसे कहा कि हम सभी को मिल जुलकर सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहना चाहिए.

पीएम ने हावड़ा ब्रिज को निहारा
पीएम मोदी ने नाव की सवारी के दौरान हावड़ा ब्रिज को निहारा. पीएम ने एक्स पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर हावड़ा से कोलकाता तक रोड शो में पुल पर खड़े समय को याद किया. उन्होंने लिखा कि कल शाम मैं हावड़ा से कोलकाता तक लंबे रोड शो के दौरान हावड़ा ब्रिज पर था और आज सुबह इसे हुगली नदी से देखा.

पीएम मोदी ने मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने गंगा नदी के महत्व पर विचार साझा करते हुए कहा कि यह बंगाल की आत्मा में बहती है. उन्होंने चुनावी माहौल के बीच पश्चिम बंगाल के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई. प्रधानमंत्री मोदी ने नाव में सफर करते हुए कई तस्वीरें भी एक्स पर शेयर कीं और फोटोग्राफी करने की कोशिश की. इस दौरान उन्होंने विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज की झलकियां भी दिखाईं.

हिंसा और रिकॉर्ड वोटिंग को लेकर ममता बनर्जी का पहला रिएक्शन, जानें सरकार बनाने पर क्या कहा?

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West Bengal Election: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अब तक हुए मतदान से संकेत मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस अभी से ही जीत की स्थिति में है.

पश्चिम बंगाल में छुटपुट हिंसा और पथराव की खबरों के बीच रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया. शाम 5 बजे तक राज्य में 89.93 फीसदी लोगों ने वोटिंग किया. सीएम बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बंपर वोटिंग टीएमसी की जीत का संकेत है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अब तक हुए मतदान से संकेत मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस अभी से ही जीत की स्थिति में है.

बंपर वोटिंग पर ममता बनर्जी ने क्या कहा

सीएम बनर्जी ने कहा कि मैं लोगों के मन को जितना समझ पाई हूं, उसके हिसाब से अभी तक हुए मतदान को देखते हुए यह कह सकती हूं कि हम पहले से ही जीत की स्थिति में हैं. मुझे किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है. मुझे कुर्सी नहीं चाहिए. मैं सिर्फ दिल्ली में भाजपा सरकार का अंत चाहती हूं.

कोलकाता के बो बाजार इलाके में आयोजित रैली में ममता ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद वह सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर दिल्ली (केंद्र की सत्ता) पर विजय हासिल करेंगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान जारी है. चुनाव आयोग ने कहा है कि शाम शाम पांच बजे तक राज्य में 89.93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. दूसरे चरण के तहत 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा.

पश्चिम बंगाल की कई सीटों पर हुई वोटिंग

पहले चरण का चुनाव शांतिपूर्ण नहीं रहा है. मुर्शिदाबाद, नवदा और अन्य जगह पर बम हमले, पत्थरबाजी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़प देखने को मिली. कई जगह पर सीआरपीएफ और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा है. इन घटनाओं ने चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके अलावा एसआईआर का असर भी चुनावी वोटिंग में देखने को मिला है. यहां बड़ी संख्या में लोग वोटिंग करने निकले.

बंगाल की जिन 5 सीटों पर हुई सबसे ज्यादा वोटिंग, वहां कितने मुस्लिम, जो बना-बिगाड़ सकते हैं ममता का खेल?

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West Bengal Assembly Elections 2026:

पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर बंपर वोटिंग हुई. CEC ज्ञानेश कुमार ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार इतनी ज्यादा वोटिंग हुई है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की बंपर वोटिंग ने इतिहास रच दिया है. पहले चरण की वोटिंग में 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार (23 अप्रैल) को धुआंधार वोटिंग हुई. चुनाव आयोग ने बताया कि बंगाल में पहले चरण में 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. देश की आजादी के बाद पहली बार बंगाल में इतनी वोटिंग हुई है. हम आपको बंगाल की उन 5 सीटों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर सबसे ज्यादा वोटिंग हुई और उन सीटों पर कितने मुस्लिम वोटर हैं.

सीतालकुची सीट

कूच बिहार जिले में स्थित सीतालकुची सीट अनुसूचित जाति यानी SC के लिए आरक्षित है. इस सीट पर पहले चरण की सभी सीटों से ज्यादा वोटिंग हुई है. यहां करीब 97.53 फीसदी लोगों ने अपने मतों का इस्तेमाल किया है. सीतालकुची में अनुसूचित जाति के मतदाता बहुमत में हैं, जिनकी संख्या 63.59 फीसदी है, जबकि मुस्लिम मतदाता 26.10 प्रतिशत हैं. यहां पहले भी अच्छी वोटिंग होती रही है.

भगवानगोला सीट 

भगवानगोला विधानसभा सीट पर मुर्शिदाबाद जिले में आती है, जोकि हमेशा सुर्खियों में रहता है. भगवानगोला सीट पर इस बार 96.95 फीसदी मतदान हुआ है. इस सीट पर 85 फीसदी से ज्यादा वोटर मुस्लिम हैं, जबकि 14 फीसदी के करीब हिंदू और अन्य समुदाय के वोटर्स हैं.

रघुनाथगंज सीट

रघुनाथगंज विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आती है. इस सीट पर भारी वोटिंग हुई है. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यहां 96.90 फीसदी वोटिंग हुई है, जोकि 152 सीटों में दूसरी सबसे ज्यादा है. चाणक्या के मुताबिक, इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी करीब 80 फीसदी है.

मेकलीगंज सीट

कूच बिहार जिले की मेकलीगंज सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस सीट पर 96.87 फीसदी वोटिंग हुई है. यहां अगर मुस्लिम वोटर्स की बात करें तो उनकी संख्या 49,371 है यानी कुल वोटर्स का करीब 22.80 फीसदी. यहां सबसे ज्यादा संख्या में एससी वोटर्स हैं, जिनकी संख्या एक लाख 41 हजार है, जोकि करीब 65 फीसदी हैं.

रानीनगर सीट

रानीनगर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है, जोकि सामान्य सीट है. पहले चरण की वोटिंग में इस सीट पर 96.81 फीसदी मतदान हुआ है. रानीनगर सीट मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है. रानीनगर क्षेत्र में करीब 81 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता 7.90 प्रतिशत हैं.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की होगी गिरफ्तारी? गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका’

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Pawan Khera Case गुवाहाटी हाई कोर्ट ने हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी है.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाई कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा की ओर से दर्ज कराए गए मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. इसके साथ ही अब उनके खिलाफ दर्ज मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला दो बड़े राजनीतिक पक्षों से जुड़ा हुआ है.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े मामले में विवाद उस समय शुरू हुआ, जब उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए. खेड़ा ने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास एक से ज्यादा पासपोर्ट हैं. उनके इस बयान के बाद गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं. इनमें चुनाव से जुड़े गलत बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं. पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू की.

गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था बयान

पवन खेड़ा ने नई दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट या गोल्डन कार्ड हैं और विदेश में संपत्ति भी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इन बातों का जिक्र उनके पति के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया. इन आरोपों को रिनिकी भुइयां शर्मा ने गलत और बेबुनियाद बताया. इसके बाद उन्होंने 6 अप्रैल को पवन खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया. कानूनी प्रक्रिया के दौरान पवन खेड़ा को 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट से एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि खेड़ा को इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत में ही आवेदन करना चाहिए.

‘भारत का सपना रह जाएगा अधूरा, जब तक देश में मुसलमानों को…’ गुजरात में ये क्या कहने लगे ओवैसी’

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गुजरात के भुज कस्बे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस, आरएसएस के साथ मिलकर एआईएमआईएम के बारे में झूठ फैला रहे हैं.

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार (23 अप्रैल) को कहा कि जब तक देश में मुसलमानों को न्याय नहीं मिलता, तब तक भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता. भुज कस्बे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए न्याय और समानता के बिना भारत को वैश्विक नेता बनाने का सपना अधूरा रहेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इस देश को विश्वगुरु या महाशक्ति बनना है, तो यह तब तक संभव नहीं है जब तक भारत के मुसलमानों को उनके अधिकार नहीं मिल जाते.

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और कांग्रेस, आरएसएस के साथ मिलकर एआईएमआईएम के बारे में झूठ फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मकसद लोकतंत्र को मजबूत करना और संविधान में जनता के विश्वास को सुदृढ़ करना है. अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि इसके मूल सिद्धांत स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व केवल कागज़ पर लिखे शब्द ही रह जाएंगे, जब तक अल्पसंख्यक अपना नेतृत्व विकसित नहीं कर लेते.

ओवैसी ने AIMIM के कामों का किया बखान
उन्होंने कहा, “70 वर्षों से हम केवल मतदाता रहे हैं. इसी वजह से हम हर क्षेत्र में पिछड़ गए हैं.” उन्होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में स्कूलों, अस्पतालों और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर इशारा किया. ओवैसी ने हैदराबाद में एआईएमआईएम के कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कई शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवा संस्थान चलाती है, जिनमें अस्पताल और कॉलेज शामिल हैं, जो किफायती सेवाएं देते हैं.

बीजेपी से साठगांठ के आरोपों पर क्या कहा
बीजेपी को लाभ पहुंचाने के आरोपों पर औवेसी ने असम और तमिलनाडु के उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि उनकी पार्टी ने समान विचारधारा वाली क्षेत्रीय ताकतों को कमजोर करने के बजाय उनका समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के लिए प्रचार किया और तमिलनाडु में डीएमके को समर्थन दिया ताकि बीजेपी को अपनी पकड़ मजबूत करने से रोका जा सके.

पीएम मोदी पर साधा निशाना
पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि 2014 के बाद से लागू किए गए कई कानून भेदभावपूर्ण हैं. जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, हमने देखा है कि सीएए जैसा कानून लागू किया गया है, जो धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात करता है, जो भारत के संविधान के खिलाफ है. तीन तलाक जैसा दोषपूर्ण कानून संविधान के खिलाफ बनाया गया. उन्होंने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने एक अजीब और विचित्र कानून बनाया. वास्तव में, उस कानून के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.

गुजरात में बुलडोजर कार्रवाई पर क्या कहा
ओवैसी ने गुजरात में बीजेपी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने अपने हिंदू भाइयों से पूछा, मुस्लिम घरों और मस्जिदों को गिराने से आपको क्या मिलेगा? हमारे नुकसान से आपको क्या लाभ होगा? ओवैसी ने आगे कहा, यह देश ‘बाबा’ (डॉ. बी. आर. अंबेडकर) के संविधान से चलेगा, न कि ‘दादा’ के बुलडोजर से. आज आप सत्ता में हैं लेकिन सत्ता हमेशा नहीं रहती. अगर आप बुलडोजर जैसी कार्रवाई में विश्वास रखते हैं, तो यह बुलडोजर सबको कुचल देगा. यह केवल समय की बात है. इतना अहंकार मत कीजिए.