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Election 2026: बंगाल में 92% तो तमिलनाडु में 85% मतदान! बंपर वोटिंग के मायने क्या, चुनावी नतीजों पर कितना पड़ेगा असर?

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Election 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुई बंपर वोटिंग ने चुनावी इतिहास के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. बल्कि सभी 5 राज्यों में वोटिंग के नए फसाने लिखे गए, लेकिन रिकॉर्ड तोड़ मतदान के मायने क्या हैं?

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में गुरुवार (23 अप्रैल) को बंपर वोटिंग हुई. बंगाल की 294 सीटों में से 152 सीटों पर पहले फेज में 92.56% मतदान हुआ. वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.13% वोटिंग हुई. दोनों राज्यों में आजादी के बाद अब तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है. इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था, जबकि बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था. इससे पहले असम, केरलम और पुडुचेरी में भी 9 अप्रैल को रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी. असम के इतिहास में सबसे ज्यादा 85.91%, पुडुचेरी में 90% और केरलम में 1987 के बाद सबसे ज्यादा 78.27% वोटिंग हुई थी. पाचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को एकसाथ आएंगे, लेकिन इससे पहले एक्सप्लेनर में समझते हैं कि रिकॉर्ड वोटिंग के मायने क्या हैं…

सवाल 1: किस राज्य में कौन से चरण का मतदान हुआ और कितने प्रतिशत वोटिंग हुई?

जवाब: 9 से 23 अप्रैल 2026 तक 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव मे मतदान का पूरा गणित यह रहा:

राज्य मतदान का चरण मतदान प्रतिशत
पश्चिम बंगाल पहला चरण (152 सीटों पर) 92.56%
तमिलनाडु एकमात्र चरण 85.13%
केरलम एकमात्र चरण 78.27%
असम एकमात्र चरण 85.91%
पुडुचेरी एकमात्र चरण 90%

पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में मतदान प्रतिशत 90% के पार चला गया, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त ने आजादी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया. तमिलनाडु में पिछली बार (2021) के 73.63% मतदान की तुलना में इस बार जबरदस्त उछाल देखने को मिला.

सवाल 2: मतदान का इतना अधिक प्रतिशत होने के क्या मायने हैं?
जवाब: यह एक आम धारणा है कि अधिक मतदान मतलब सरकार के खिलाफ गुस्सा, लेकिन पिछले सात दशकों के चुनावी आंकड़ों को गहराई से जांचने पर यह पारंपरिक सोच पूरी तरह खारिज हो जाती है. डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने 1957 से 2021 के बीच हुए 56 विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे.

जब मतदान प्रतिशत बढ़ा तब सत्ताधारी दल 52% बार बच निकले. जब मतदान प्रतिशत गिरा तब सत्ताधारी दल केवल 44% बार ही दोबारा जीत पाए. यह आंकड़ा बताता है कि सिर्फ मतदान प्रतिशत के आधार पर सत्ता-विरोधी लहर का अनुमान लगाना सही नहीं है.

इस पैटर्न को समझिए:

  • पश्चिम बंगाल (2011): मतदान में मामूली बढ़ोतरी (2.6%) हुई और वाम मोर्चे का 34 साल पुराना शासन खत्म हो गया. यह ‘पारंपरिक ज्ञान’ के पक्ष में गया.
  • पश्चिम बंगाल (2021): मतदान प्रतिशत में गिरावट आई, लेकिन ममता बनर्जी की TMC रिकॉर्ड बहुमत के साथ दोबारा जीत गई. इसने पारंपरिक सोच को गलत साबित कर दिया.
  • तमिलनाडु: यहां तो हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन का अपना ही पैटर्न है. 2006 में 11.7% अधिक मतदान के बावजूद AIADMK सत्ता से बाहर हो गई, तो 2021 में मतदान गिरने पर भी उसे हार का सामना करना पड़ा.

इससे साफ है कि यहां मतदान प्रतिशत नहीं, बल्कि सत्ता-विरोधी और नेतृत्व की भूमिका ज्यादा मायने रखती है.

सवाल 3: तो फिर हाई टर्नआउट के असली मायने क्या हैं?
जवाब: इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं कि हाई टर्नआउट ‘भागीदारी का पैमाना’ है, राजनीतिक बदलाव की भविष्यवाणी करने का ‘भरोसेमंद पैमाना’ नहीं है. कभी-कभी हाई टर्नआउट भरोसे का प्रतीक होता है, जहां मतदाता अपने पसंदीदा नेता को और मजबूत करने के लिए वोट देने निकलते हैं. इसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं:

  1. मजबूत लामबंदी: केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं की जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ और मतदाताओं को बूथ तक लाने की क्षमता.
  2. नए और महिला मतदाताओं की भूमिका: तमिलनाडु में इस बार 14.59 लाख से ज्यादा पहली बार वोट देने वाले मतदाता हैं. महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग 10 लाख ज्यादा है यानी 2.93 करोड़. इन वोटर्स का उत्साह आंकड़ों को प्रभावित करता है.
  3. तमिलनाडु का ’80 प्रतिशत पैराडॉक्स’: यह एक बेहद अहम पहलू है. इस बार चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत तमिलनाडु में 95 लाख फर्जी, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए. इससे कुल मतदाताओं की संख्या 2021 के 6.29 करोड़ से घटकर 5.73 करोड़ रह गई . नतीजतन, कम मतदाताओं की वजह से प्रतिशत अपने आप ऊंचा हो जाता है. उदाहरण के लिए, इस बार का 75% मतदान भी 2021 के 73.63% की तुलना में 33 लाख कम लोगों के वोट डालने के बराबर होगा.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में इतनी ज्यादा वोटिंग होना, बीजेपी के लिए चुनौती साबित हो सकती है. बंगाल में पहले फेज में जिस इलाके में वोटिंग हुई है, वो बीजेपी का गढ़ है. वहीं अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बीजेपी को सबक सिखाने के लिए ज्यादा वोटर्स निकले, खासकर महिलाएं. सिर्फ पश्चिम बंगाल या तमिलनाडु की बात न करते हुए सभी 5 राज्यों में देखें तो SIR हो या हजारों-करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट्स की सौगातें, कहीं न कहीं बीजेपी के हक में झंडे जरूर गाड़ेंगी.’

सवाल 4: हाई टर्नआउट से चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: अमिताभ तिवारी का कहना है, ‘यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वोटर टर्नआउट बढ़ने से किसे फायदा मिलेगा. पश्चिम बंगाल के पिछले चुनावों के एनालिसिस से भी कोई साफ पैटर्न समझ नहीं आता है. आजादी के बाद 17 चुनावों में 9 बार वोटिंग 4.5% से ज्यादा घटी या बढ़ी है. इसमें सिर्फ 3 बार सत्ता परिवर्तन हुआ, बाकी 6 बार मौजूदा सरकार ही बरकरार रही.’

2020 तक देश में करीब 332 विधानसभा चुनाव हुए हैं. इनमें से 188 चुनावों में मतदान-प्रतिशत बढ़ा, जिनमें 89 सरकारें दोबारा चुनी गईं. वहीं 144 बार मतदान-प्रतिशत घटा है, जिनमें 56 सरकारें दोबारा चुनी गईं. साफ तौर पर मतदान-प्रतिशत और चुनावी नतीजों के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं है.

मतदान प्रतिशत चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी का भरोसेमंद जरिया नहीं है, इसलिए असली फैसला 4 मई को EVM से निकलने वाले आंकड़ों पर टिका है. उस दिन यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड मतदान मतलब ‘परिवर्तन’ था या ‘निरंतरता’.

India Monsoon 2026: ‘देश में जल्दी दस्तक देगा मानसून, वक्त से पहले बारिश…’, IMD की बड़ी भविष्यवाणी, बता दी तारीख’

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India Monsoon 2026: देश में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है. इस साल मानसून सामान्य से पहले आ सकता है. इसका सबसे बड़ा असर दक्षिण के राज्यों में देखने को मिलेगा.

देश के ज्यादातर हिस्सों में अप्रैल के महीने से ही तेज गर्मी हो रही है. इस वजह से लोग काफी परेशान है. उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई इलाकों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. भारत मौसम विभाग यानी IMD ने भी आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की चेतावनी दी है. हालांकि, इस कड़ी गर्मी के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है. मौसम से जुड़े नए अनुमान बता रहे हैं कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य समय से पहले आ सकता है. इससे मई के आखिर तक दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है.

यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट यानी ECMWF के अनुसार, मानसून की शुरुआत जल्दी होने के संकेत मिल रहे हैं. पिछले साल 2025 में भी अनुमान था कि केरल में मानसून 27 से 29 मई के बीच पहुंचेगा, लेकिन वह उससे पहले ही आगे बढ़ गया था. इसी तरह इस बार भी संकेत मिल रहे हैं कि मानसून तय समय से पहले आ सकता है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून सबसे पहले पहुंचता है. इस बार अनुमान है कि 18 से 25 मई के बीच यहां मानसून की शुरुआत हो सकती है. अभी मौसम मॉडल दिखा रहे हैं कि हिंद महासागर से आने वाली नमी भरी हवाएं तेज हो रही हैं, जो बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के ऊपर बन रही हैं. इन हवाओं की वजह से उस समय इन इलाकों में सामान्य से 30 से 60 मिलीमीटर ज्यादा बारिश हो सकती है.

कैसे बनता है ट्रॉपिकल सिस्टम?

अंडमान के उत्तर में एक ट्रॉपिकल सिस्टम बनने की 20 से 40 प्रतिशत संभावना भी जताई गई है. ऐसे सिस्टम आम तौर पर मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, क्योंकि वे ज्यादा नमी खींचते हैं और बारिश की प्रक्रिया को तेज करते हैं. इसके बाद 25 मई से 1 जून के बीच मानसून के और आगे बढ़ने का अनुमान है. इस दौरान दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर तेज पश्चिमी हवाएं चल सकती हैं, जो नमी को सीधे भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट की ओर ले जाएंगी. इससे केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है.

दक्षिण भारत के लिए अहम खबर

दक्षिण भारत के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि यहां के कई इलाके खेती और पानी के लिए मानसून पर निर्भर हैं. अगर बारिश जल्दी होती है तो लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और खेती का काम भी समय पर शुरू हो सकेगा. मौसम पर असर डालने वाले कुछ बड़े कारण भी इस बार मानसून के पक्ष में नजर आ रहे हैं. इनमें एक है इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD. जब हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का पानी पूर्वी हिस्से से ज्यादा गर्म होता है तो इसे पॉजिटिव IOD कहा जाता है. ऐसी स्थिति में भारत की ओर ज्यादा नमी आती है और मानसून आम तौर पर मजबूत होता है. इस बार अनुमान है कि IOD मानसून के पक्ष में रह सकता है.

तेज गर्मी का असर मानसून पर

इस साल की शुरुआत में पड़ी तेज गर्मी का भी असर मानसून पर पड़ सकता है. ज्यादा गर्मी की वजह से समुद्र से आने वाली हवाएं पहले सक्रिय हो सकती हैं, जिससे मानसून जल्दी आने की संभावना बढ़ जाती है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समुद्र और वातावरण की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता तो मानसून 25 मई के आसपास भारत में दस्तक दे सकता है. अभी तक के संकेत यही बताते हैं कि इस साल मानसून सामान्य से पहले आ सकता है. हालांकि अभी देश के कई हिस्सों में गर्मी से राहत नहीं मिली है, लेकिन अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले दिनों में दक्षिण भारत के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.

पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग से सुप्रीम कोर्ट खुश, हिंसा पर लगाम लगने पर भी जताया संतोष’

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टीएमसी के वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से प्रवासी मजदूर वोट देने पहुंचे. शायद उन्हें डर था कि वोट न देने पर उनका नाम मतदाता सूची से कट जाएगा.

पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान पर सुप्रीम कोर्ट ने भी खुशी जताई है. कोर्ट ने भारी मतदान और शांति-व्यवस्था बने रहने को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ते हुए इसकी सराहना की. चीफ जस्टिस ने कहा कि जब लोग मतदान की ताकत को पहचानते हैं तो हिंसा अपने आप कम हो जाती है.

शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान की जानकारी दी गई. चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया.

चीफ जस्टिस ने कहा, ​’एक नागरिक के रूप में, मुझे मतदान प्रतिशत देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. जब लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत होता है.’ पश्चिम बंगाल से आने वाले जस्टिस बागची ने खास तौर पर इस बात का उल्लेख किया कि इस बार राज्य में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई.

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने ​प्रवासी मजदूरों की बड़ी भागीदारी की तरफ कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से प्रवासी मजदूर वोट देने पहुंचे. बनर्जी ने कहा कि शायद उन्हें डर था कि वोट न देने पर उनका नाम मतदाता सूची से कट जाएगा. वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस ‘ऐतिहासिक मतदान’ के लिए सुरक्षा बलों को भी श्रेय दिया जाना चाहिए. उन्होंने लोगों को सुरक्षित महसूस करवाया. इसके चलते लोग बड़ी संख्या में घर से बाहर निकले.

सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने SIR अपील ट्रिब्यूनल की धीमी रफ्तार का मसला उठाया. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर 27 लाख अपीलों में से ट्रिब्यूनल ने बहुत कम का निपटारा किया है. इसके चलते पहले चरण में सिर्फ 136 लोगों को ही मतदान का मौका मिल सका. कोर्ट ने कहा कि अपील ट्रिब्यूनल के काम से जुड़ी शिकायतों को वह कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखें.

सुप्रीम कोर्ट में 65 ऐसे लोगों का मामला भी रखा गया जो कथित रूप से चुनाव ड्यूटी में हैं, लेकिन उनका नाम SIR की अंतिम लिस्ट में नहीं है. कोर्ट ने सीधे दखल से मना करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता प्रक्रिया के मुताबिक अपील ट्रिब्यूनल के सामने जाएं. हो सकता है वह इस बार वोट न दे सकें लेकिन भविष्य के लिए मतदाता सूची में बने रहना ज्यादा जरूरी है.

पश्चिम बंगाल में पहला चरण खत्म, असम-केरल-तमिलनाडु में वोटिंग पूरी, कब आएगा एग्जिट पोल?

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असम, केरल, पुडुचेरी में चुनाव की प्रक्रिया 9 अप्रैल को पूरी हो गई. तमिलनाडु की सभी सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई, जबकि बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान हो चुका है.

पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच राज्यों में मतदान हो रहा है. बंगाल में पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है, वहीं दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी. वहीं तमिलनाडु की सभी सीटों पर मतदान हो चुका है. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को ही वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ऐसे में लोगों को अब एग्जिट पोल का इंतजार है. आइए जानते हैं कि इन चुनावों का एग्जिट पोल कब आएगा.

असम, केरल, पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया 9 अप्रैल को ही पूरी हो गई थी. तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई, जबकि बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान हो चुका है. जहां पुडुचेरी में 89.87% वोटिंग हुई, वहीं असम में 85.91% और केरलम में 78.27% मतदान दर्ज हुआ. अगर तमिलनाडु की बात करें तो यहां भी 84.69% मतदान हुआ है. वहीं बंगाल में पहले चरण में 92.88 फीसदी वोटिंग हुई है.

कब आएगा एग्जिट पोल?

चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक एग्जिट पोल सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं. इस पर निर्वाचन आयोग की रोक रहती है. जब तक आखिरी मतदाता पोलिंग बूथ पर अपना वोट नहीं डाल लेता है, तब तक एग्जिट पोल के नतीजों को पब्लिक नहीं किया जाता है. इसलिए पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को पूरी होने के बाद एग्जिट पोल सामने आएगा. शाम छह बजे के बाद इन्हें टीवी और दूसरे माध्यमों के जरिए बताया जा सकेगा.

क्या होता है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल ऐसे सर्वे होते हैं जो मतदाताओं से वोट डालने के तुरंत बाद आमतौर पर मतदान केंद्रों के बाहर ही किए जाते हैं. इन सर्वे का उद्देश्य वोटिंग के रुझान को समझना और आधिकारिक नतीजे आने से पहले चुनावी रिजल्ट का अनुमान लगाना होता है. मीडिया संस्थान और प्राइवेट एजेंसियां ऐसे सर्वे कराते हैं. ये सर्वे कुछ चुनिंदा वोटर्स के जवाबों पर आधारित होते हैं.

CG” नगर पालिका आम निर्वाचन 2026: निर्वाचन व्यय संपरीक्षक एवं लेखा दल का गठन’

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राजनांदगांव:  कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव ने नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 अंतर्गत नगर पंचायत घुमका के लिए निर्वाचन व्यय अनुविक्षण दल हेतु निर्वाचन व्यय संपरीक्षक एवं लेखा दल का गठन किया है। इसके तहत लेखाधिकारी जिला पंचायत श्री रोजेश कुमार तिवारी को निर्वाचन व्यय संपरीक्षक तथा लेखापाल कार्यालय प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला घुमका श्री अतुल कुमार जैन व डाटा एन्ट्री ऑपरेटर जनपद पंचायत राजनांदगांव श्री संतोष देवांगन को लेखा दल का सदस्य नियुक्त किया गया है। सहायक ग्रेड 2 कार्यालय खण्ड चिकित्सा अधिकारी घुमका श्री छमाधर शुक्ला को रिजर्व में रखा गया है। इनका कार्यक्षेत्र रिटर्निंग ऑफिसर नगर पंचायत घुमका होगा।

CG” नगर पालिका आम निर्वाचन 2026: नगर पंचायत घुमका के आम निर्वाचन हेतु रिटर्निंग ऑफिसर एवं सहायक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त’

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राजनांदगांव: कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव ने नगर पालिका आम व उप निर्वाचन 2026 के लिए नगर पंचायत घुमका के आम निर्वाचन हेतु तहसीलदार घुमका श्री मुकेश कुमार ठाकुर को रिटर्निंग ऑफिसर तथा नायब तहसीलदार घुमका श्री अब्दुल वसीम सिद्दीकी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत घुमका श्री ज्ञानेश्वर प्रसाद देवदास को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है।

CG” राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान” ज्ञानभारतम मिशन के तहत अब तक 3 पाण्डुलिपियां प्राप्त”

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राजनांदगांव:  संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा एवं बौद्धिक विकास की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों एवं हस्तलिखित ग्रन्थों अन्य धरोहरों को संरक्षित एवं सुरक्षित करने के उद्देश्य से ज्ञानभारतम मिशन प्रारम्भ किया गया है। इस मिशन अंतर्गत पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों, दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थों व चित्रकारी के संस्थागत (निजी एवं सरकारी) संग्रह केन्द्रों एवं व्यक्तिगत संग्रहकर्ताओं का चिन्हीकरण व सर्वेक्षण किया जाएगा।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में ज्ञानभारतम मिशन अंतर्गत राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस सर्वेक्षण अभियान के क्रियान्वयन तथा पाण्डुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण गतिविधियां संचालित करने हेतु जिले अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को नोडल अधिकारी व सर्वेक्षणकर्ता नियुक्त किया गया है।

सर्वेक्षण कार्य गूगल प्ले स्टोर पर नि:शुल्क डाउनलोड हेतु उपलब्ध मोबाईल एप्लीकेशन ज्ञान भारतम मोबाईल एप के माध्यम से किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा सर्व संबंधित विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों एवं सर्वेक्षणकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने एवं सर्वेक्षण कार्य से संबंधित अन्य आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई है।

ज्ञानभारतम मिशन के तहत राजनांदगांव जिला अंतर्गत अब तक 3 पाण्डुलिपियां प्राप्त हुई हैं। जिसमें पहला पाण्डुलिपि दिग्विजय कॉलेज राधाकृष्ण मंदिर में प्राप्त हुआ है, जिसमें संस्कृत भाषा में धार्मिक श्लोक व मंत्र इत्यादि लिखे हुए हैं। दूसरा पाण्डुलिपि दिग्विजय कॉलेज में इतिहास के प्राध्यापक डॉ. शैलेन्द्र सिंह के पास हस्तलिखित पाण्डुलिपि प्राप्त हुआ है, जो धार्मिक एवं अवधि भाषा (सन 1870 से 1890 ई.) में लिखा हुआ है।

तीसरी पाण्डुलिपि छुरिया विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम रतनभाट में रहीम मियां के घर एक ताम्र पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें हथेली का निशान निर्मित है। इसमें फारसी एवं उर्दू में कुरान के संदेश लिखे हुए हैं। यह ताम्रपत्र रहीम मियां के घर 3-4 पीढ़ी पूर्व से रखे हुए हैं। राजनांदगांव जिला अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पाण्डुलिपि स्थित होने के संभावित क्षेत्र संस्कृति महाविद्यालय, निजी एवं सरकारी पुस्तकालय, संग्रहालय, शिक्षण एवं शोध संस्थान, संस्कृत पाठशालाएं, मंदिर, मठ, आश्रम, गुरूकुल, ट्रस्ट एवं निजी संग्रहकर्ता, पुरोहित, धर्माचार्य, ज्योतिषाचार्य, आयुर्वेदाचार्य, संस्कृत एवं प्राचीन भाषाओं के विद्वानों अन्य को चिन्हीकरण व सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा।

जिले अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कहीं भी पाण्डुलिपि की उपलब्धता के आधार पर नागरिकों द्वारा स्व-प्रेरणा से स्वयं भी यह सर्वेक्षण कार्य ज्ञानभारतम मोबाईल एप के माध्यम से किया जा सकता है। जिससे संबंधित जानकारी हेतु जिला स्तर पर नियुक्त मास्टर ट्रेनर्स सुश्री प्रणीता शर्मा के मोबाईल नंबर 8120758970, श्री केपी विश्वकर्मा के मोबाईल नंबर 9827152229, श्री शतदल पात्रो के मोबाईल नंबर 7879088180, श्रीमती कल्याणी सिन्हा के मोबाईल नंबर 8103757894 पर संपर्क किया जा सकता है।

इसी क्रम में जिला प्रशासन राजनांदगांव द्वारा नागरिकों से भी यह अपील किया गया है कि यदि उनके पास किसी प्रकार की प्राचीन पाण्डुलिपि, ताड़पत्र, दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थ व चित्रकारी आदि उपलब्ध हैं एवं उसकी जानकारी इस सर्वेक्षण में दर्ज कराये जाने हेतु सहमत हों, तो वे मास्टर ट्रेनर्स से संपर्क कर सकते हैं।

CG: नील हरित शैवाल फसलों के लिए सस्ता और टिकाऊ जैविक उर्वरक’

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राजनांदगांव: कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव की प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गुजन झा ने नील हरित शैवाल (बीजीए) का धान व अन्य फसलों के महत्व के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि ब्लू ग्रीन शैवाल (नील-हरित शैवाल) जिसे सायनोबैक्टीरिया के रूप में भी जाना जाता है। नील हरित शैवाल प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवाणुओं का एक समूह है, जो ताजे और समुद्री पानी में पाए जाते हैं। यह एक प्राकृतिक जैविक उर्वरक है, जो धान के खेतों में नाइट्रोजन को स्थिर कर पैदावार बढ़ाने में मदद करता है। धान की फसल में नील हरित शैवाल एक बेहतरीन, सस्ता और टिकाऊ जैविक उर्वरक है, जो हवा से नाइट्रोजन को सोखकर मिट्टी में स्थिर करता है। यह नाइट्रोजन की कमी को पूरा कर उपज में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि करता है। इसके अलावा यह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाता है और यूरिया पर होने वाले खर्च को कम करता है। ब्लू ग्रीन शैवाल को सायनोबैक्टीरिया, नील-हरित काई एवं ब्लू-ग्रीन एल्गी के नाम से भी जानते है।

धान की फसल में नील हरित शैवाल के विभिन्न लाभ है। यह वातावरण से नाइट्रोजन को स्थिर करके पौधों को उपलब्ध कराता है, जिससे 25-30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की बचत होती है। यह मिट्टी में जीवांश की मात्रा बढ़ाता है, जिससे मिट्टी उपजाऊ और भुरभुरी बनती है। इसके उपयोग से यूरिया और अन्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है। यह धान की उपज में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकता है। यह मिट्टी में फायदेमंद सूक्ष्म जीवाणुओं को बढ़ाता है और धान की जड़ों के विकास में सहायक होता है। नील हरित शैवाल, विशेष रूप से एनाबीना और नॉटोक, धान के खेतों के लिए एक सस्ता और सुलभ जैविक नाइट्रोजन उर्वरक हैं। वेनाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ जोड़कर उसकी उर्वरता बढ़ाते हैं। ये सूक्ष्मजीव प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से वातावरण और पानी में ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जो जलीय जीवन (मछलियों सहित अन्य जलीय जीव) के लिए आवश्यक है। ये तालाबों और अन्य जल निकायों में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य पोषक तत्वों का उपयोग करके पानी को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं।

नील हरित शैवाल के सभी उत्पाद सुरक्षित नहीं होते हैं। प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त शैवाल में विषाक्त पदार्थ (माइक्रोसिस्टिन) हो सकते हैं। जो यकृत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए केवल प्रमाणित और प्रयोगशाला में उगाए गए उत्पादों का ही उपयोग करना चाहिए। नील हरित शैवाल धान की फसल के लिए एक बेहतरीन, सस्ती और जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकारक खाद है। इसे घर पर या खेत में आसानी से उगाया जा सकता है। इसके उत्पादन के लिए गड्ढा (2 मीटर* 3 मीटर* 0.2 मीटर) में पानी, सूखी मिट्टी, गोबर और फास्फोरस का मिश्रण तैयार किया जाता है। जिसे 30-45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 10-15 दिनों में शैवाल की मोटी परत मिल जाती है। इसे बनाने के लिए धूप वाली जगह पर 2 मीटर लंबा, 2 मीटर चौड़ा और 20-30 सेमी गहरा गड्ढा खोदें। गड्ढे में 100 किलोग्राम सूखी मिट्टी और 10-15 किलोग्राम गोबर की खाद मिलाकर बराबर कर दें। गड्ढा में 5-10 सेमी ऊंचाई तक पानी भरें। इसमें 200 ग्राम सुपर फास्फेट डालें। अब इस मिश्रण में 1 से 2 किलोग्राम नील हरित शैवाल का कल्चर (स्टार्टर) डालें, जो कृषि केंद्रों पर मिलता है। तेज धूप में पानी सूखने पर पानी डालते रहें। लगभग 10 से 15 दिनों में (गर्मियों में), जब पानी सूख जाए और ऊपर नीली-हरीपरत बन जाए, तो इसे खुरचकर इक_ा कर लें और सुखाकर रख लें। 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में छिड़काव करें। रोपाई के 7-10 दिन बाद, जब खेत में पानी भरा हो, तब इसका उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। उपयोग के बाद खेत को 10-15 दिनों तक सूखने न दें। इसके विकास के लिए खेत में पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस का होना आवश्यक है। नील हरित शैवाल के उत्पादन के लिए 30-45 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक है। हरी शैवाल को नष्ट करने के लिए 1 ग्राम नीलाथोथा का 1 लीटर पानी में घोल उपयोग किया जा सकता है।

CG: कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव का रेडियोग्राफर किया गया निलंबित’

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राजनांदगांव: संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें रायपुर संभाग रायपुर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव में पदस्थ रेडियोग्राफर भोज कुमार साहू को पदीय कर्तव्यों में घोर लापरवाही एवं गंभीर अनुशासनहीनता बरतने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव के रेडियोग्राफर भोज कुमार साहू  द्वारा शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने, पदीय दायित्वों का निर्वाहन नहीं करने, शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, उच्च अधिकारियों से अनुचित वार्तालाप करने तथा असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। भोज कुमार साहू का कृत्य गंभीर अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं कर्तव्यों के प्रति लापरवाही के श्रेणी में होने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के शर्तों का उल्लंघन है। निलंबन अवधि के दौरान भोज कुमार साहू का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन जिला दुर्ग निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।

CG: कलेक्टर ने कन्हारपुरी के खेतों में पहुंचकर मौके पर सीमांकन कार्य का लिया जायजा’

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– 30 अप्रैल तक सभी प्रकरणों का निराकरण करने के दिए निर्देश
– नए और पुराने सभी राजस्व संबंधित आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण करने कहा
– जिले में पिछले एक सप्ताह में 150 सीमांकन के प्रकरणों का किया गया निराकरण

राजनांदगांव” कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव आज दोपहर की गर्मी के बीच राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम कन्हारपुरी के खेतों में पहुंचकर चल रहे सीमांकन कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान के निर्देश दिए। कलेक्टर के सतत निरीक्षण से जिले में पिछले एक सप्ताह में 150 सीमांकन के प्रकरणों का निराकरण किया गया है।

कलेक्टर ने सीमांकन कार्य की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण 30 अप्रैल तक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सीमांकन कार्य को सुबह या शाम के समय करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को गर्मी से राहत मिल सके। उन्होंने अधिकारी-कर्मचारियों को निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। कलेक्टर ने किसानों से आवेदन की स्थिति, जमीन का रकबा और लंबित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नए और पुराने सभी आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विवादित प्रकरणों का सीमांकन कर रिपोर्ट तहसीलदार को प्रस्तुत करें, ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी द्वारा अवैध मांग या प्रलोभन की स्थिति में तत्काल शिकायत कर सकते हैं, ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के एक प्रकरण में संबंधित किसान को 15 दिवस के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए।

ग्राम कन्हारपुरी के किसान श्री वीरेन्द्र चंद्राकर ने कहा कि उनके 2 एकड़ 50 डिसमील जमीन का सीमांकन किया गया है। उन्होंने सीमांकन के लिए तहसीलदार कार्यालय में आवेदन किया था। आज राजस्व अधिकारियों और आसपास के किसानों की उपस्थिति में सीमांकन कार्य पारदर्शी तरीके से नापजोख कर किया गया है।

इसके साथ ही दो अन्य आवेदक किसान श्री घनश्याम निर्मलकर और श्री रवि निर्मलकर के जमीन का भी सीमांकन किया गया है। कलेक्टर ने कहा कि सभी किसान नियमों का पालन करें, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो और गांव में सौहार्द बना रहे।

उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर श्री विश्वास कुमार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, किसान, ग्रामीण उपस्थित थे।