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Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पूरी, करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटे; चुनाव से पहले बड़ा बदलाव…

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है. विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं

यह प्रक्रिया न्यायिक अधिनिर्णय के बाद सोमवार मध्यरात्रि को पूरी हुई, जिससे राज्य की चुनावी तस्वीर में बड़ा असर पड़ने की संभावना है.

न्यायिक अधिनिर्णय के बाद बढ़ा आंकड़ा

मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल के अनुसार, कुल 6006675 मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया था. इनमें से 5984512 मामलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और न्यायिक अधिकारियों द्वारा ई-हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं. इन मामलों में से 2716393 मतदाताओं को हटाए जाने योग्य पाया गया, जिसके बाद कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या बढ़कर 9083345 हो गई है. हालांकि, 22163 मामलों में अभी ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

मतदाता सूची में लगातार बदलाव

SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले, नवंबर में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 76637529 थी. दिसंबर में जारी मसौदा सूची में 5820899 नाम हटाए गए थे. इसके बाद 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या बढ़कर 6366952 हो गई. अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 91 लाख तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है.

अपील का मिलेगा अवसर

जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने योग्य पाए गए हैं, उन्हें अपील का अधिकार दिया गया है. इसके लिए राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोग अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ चुनौती दे सकते हैं.

इन जिलों में सबसे ज्यादा असर

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए हैं, जहां कुल 455137 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. इसके बाद उत्तर 24 परगना में 325666 और मालदा जिले में 239375 नाम हटाए गए हैं. इन जिलों में बड़े पैमाने पर बदलाव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से आगामी विधानसभा चुनाव पर सीधा असर पड़ सकता है. यह मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच विवाद का कारण भी बन सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. अब सभी की नजर अंतिम आंकड़ों और संभावित अपीलों पर टिकी है. अगर बड़ी संख्या में अपीलें दायर होती हैं और कुछ नाम बहाल होते हैं, तो मतदाता सूची में एक बार फिर बदलाव संभव है.

CG: मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप से युवाओं को मिलेगा प्रशासनिक क्षेत्र में करियर का अवसर…

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IIM रायपुर के सहयोग से संचालित दो वर्षीय MBA कार्यक्रम के लिए जागरूकता अभियान तेज’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के युवाओं को सुशासन और पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप” के तहत संचालित दो वर्षीय MBA इन पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इस क्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के प्रतिनिधि श्री बिनॉय टी एवं श्री एस.एन. मंडल द्वारा जशपुर सहित प्रदेश के उत्तरी जिलों का दौरा कर विद्यार्थियों को इस कोर्स की जानकारी दी जा रही है। टीम द्वारा विभिन्न इंजीनियरिंग एवं स्नातक महाविद्यालयों में पहुंचकर कार्यक्रम की विशेषताओं, पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही पंपलेट वितरण के माध्यम से भी अधिक से अधिक युवाओं तक जानकारी पहुंचाई जा रही है।

यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन एवं IIM रायपुर के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों की पूरी फीस राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्रति माह 50 हजार रूपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी।

कार्यक्रम की विशेषता यह है कि अभ्यर्थियों को IIM रायपुर में उच्च स्तरीय कक्षा शिक्षण के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण (फील्ड एक्सपोजर) का अवसर भी मिलेगा, जिससे उन्हें नीति निर्माण और प्रशासनिक कार्यों का वास्तविक अनुभव प्राप्त होगा।

यह फेलोशिप विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए उपलब्ध है तथा इसमें राज्य शासन की आरक्षण नीति लागू होगी। इच्छुक अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी एवं आवेदन के लिए IIM रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि IIM रायपुर की टीम द्वारा जशपुर जिले के सभी विकासखंडों के महाविद्यालयों का भ्रमण कर विद्यार्थियों को इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को सुशासन के क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिल सके।

CG: रोजगार कार्यालय में प्लेसमेंट कैम्प 8 अप्रैल को…

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राजनांदगांव: जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र राजनांदगांव में 8 अप्रैल 2026 को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया गया है। प्लेसमेंट कैम्प में वेदांता स्कील स्कूल कोरबा द्वारा ट्रेनिंग (सोलर) के 30 पद, ट्रेनिंग (सिलाई मशीन ऑपरेटर) के 40 पद, ट्रेनिंग (होटल मैनेजमेंट) के 40 पद, ट्रेनिंग (वेल्डर) के 40 पद एवं हयूमिलिटी फाइनेशियल सोल्योशन द्वारा प्रोबेशनरी बिजनेस एसोसियेट के 10 पद, लाईफ प्लानर के 15 पद, वेल्थ मैनेजर के 15 पद तथा क्वीस काप लिमिटेड द्वारा नेप्स ट्रेनी के 500 पद पर भर्ती की जाएगी। प्लेसमेंट में शामिल होने वाले आवेदकों को शैक्षणिक योग्यता के सम्पूर्ण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, 2 पासपोर्ट साईज फोटो, रोजगार पंजीयन कार्ड लाना अनिवार्य है।

CG: जिला पंचायत साधारण सभा की बैठक 15 अप्रैल को…

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राजनांदगांव: जिला पंचायत साधारण सभा की बैठक 15 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में आयोजित की गई है। बैठक में विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की प्रस्तुत जानकारी पर चर्चा की जाएगी। बैठक में सदस्यों को उपस्थित होने का आग्रह किया गया है तथा अधिकारियों को आवश्यक जानकारी सहित बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र के लिए किया गया चयनित…

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राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र के लिए किया गया चयनित…

राजनांदगांव” राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का चयन राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र हेतु किया गया है। चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में राजनांदगांव विकासखंड के सहसपुर दल्ली, पनिया एवं रेंगाकठेरा, छुरिया विकासखंड के आमगांव, हालेकोसा एवं भेजराटोला तथा डोंगरगांव विकासखंड के कम्हेरा शामिल हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम के तहत शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक कुल 42 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्यूएएस प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है, जबकि 83 स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा तैयारी पूर्ण कर प्रमाण पत्र हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इनमें से 24 स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिनके प्रमाण पत्र प्राप्त होना शेष है। इस उपलब्धि पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिले के सलाहकार डॉ. विकास राठौर, डॉ. स्नेहा जैन, डॉ. निहारिका टोपनो, खंड चिकित्सा अधिकारियों तथा चयनित स्वास्थ्य केंद्रों के समस्त कर्मचारियों को बधाई दी है।

CG: जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर की गई त्वरित निराकरण…

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जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर की गई त्वरित निराकरण – श्रमिकों को किया गया 25056 रूपए का भुगतान

राजनांदगांव: कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों पर त्वरित एवं प्रभावी निराकरण किया जा रहा है। जिससे आवेदकों को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके। इसी कड़ी में राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सोमनी के श्री बुधराम पटेल एवं अन्य श्रमिकों द्वारा लंबित मजदूरी भुगतान दिलाने के संबंध में साप्ताहिक जनदर्शन में आवेदन किया था। कलेक्टर ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए श्रमिकों को मजदूरी भुगतान दिलाने के निर्देश दिए। जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर जनपद पंचायत राजनांदगांव द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई की गई और श्रमिकों को  कुल 25056 रूपए का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किया गया। जिसमें श्री बुधराम पटेल को 9 हजार 657 रूपए, श्री टकेश्वरी बंजारे को 9 हजार 657 रूपए एवं योगेश्वरी पटेल को 9 हजार 657 रूपए मजदूरी भुगतान किया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए है कि जनदर्शन में प्राप्त सभी आवेदनों का त्वरित, पारदर्शी और नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को समय पर न्याय और समाधान मिल सके।

जंग के बीच इन 3 देशों के लिए संकटमोचक बना भारत, अपनी मुसीबत भूल जमकर पहुंचाई मदद…

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कुछ महीने पहले तक भारत को अपने पड़ोस में विरोध का सामना करना पड़ रहा था. कुछ देशों में तो भारत के खिलाफ अभियान भी चलाए जा रहे थे. लेकिन ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया है.

इसने दक्षिण एशिया में एक खामोश बदलाव को बढ़ावा दिया है. वही पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका ईंधन के लिए भारत की ओर देख रहे हैं. भारत ने पुरानी कड़वाहट को भुलाकर मदद का हाथ बढ़ाया है, जिससे उसकी ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) की नीति और मजबूत हुई है. हिंदुस्तान ने अफगानिस्तान की भी मदद की, जो इस वक्त भूकंप और बाढ़ के कारण संकट का सामना कर रहा है.

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 90% कच्चे तेल की मंजिल एशिया होती है. हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश तेल के लिए इस मार्ग पर निर्भर रहते हैं. ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, लेकिन हिंदुस्तान के जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति है. यही वजह है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत कम मुसीबत में है.

मुसीबत भूल की मदद

संकट के बावजूद, भारत बांग्लादेश और श्रीलंका को कई टन ईंधन भेज चुका. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफ्रिंग के दौरान बताया था कि इन देशों ने भारत से मदद मांगी थी. उन्होंने कहा कि घरेलू उपलब्धता और उत्पादन के स्तर का आकलन करने के बाद हर मामले पर अलग से फैसला लिया जाएगा. फिलहाल भारत में घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं है, क्योंकि उसके पास लगभग दो महीने का ईंधन उपलब्ध है.

ईरान जंग से हिला बांग्लादेश

ईरान जंग के कारण पैदा हुआ संकट बांग्लादेश में साफ दिखाई दे रहा है. वो अपने तेल का 95% और गैस का 30% हिस्सा आयात करता है. गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो जाने के कारण बांग्लादेश को बिजली की व्यापक कटौती का सामना करना पड़ा. गारमेंट सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है. डीजल की कमी के कारण भी ये भी खतरे में है. बिजली की खपत कम करने के लिए देश भर के सभी विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया.

भारत ने दिखाया बड़ा दिल

संकट के बीच तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने मदद के लिए भारत से संपर्क किया. भारत ने तेजी से कदम उठाते हुए, भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति बढ़ा दी. इस पाइपलाइन को 2017 में चालू किया गया था. इसका ज्यादातर हिस्सा असम की नुमालीगढ़ रिफ़ाइनरी से भेजा जा रहा है.

10 मार्च को भारत ने 5,000 टन डीजल भेजा था. इसके बाद इसमें इजाफा ही हुआ और लगातार मदद पहुंचाई जा रही है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से शुरू करने का संकेत दिया है.

अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. हालांकि BNP सरकार की भारत के प्रति पहल ने दोनों देशों के संबंधों को फिर से पटरी पर ला दिया है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी दिल्ली आने वाले हैं. उनकी यात्रा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.

श्रीलंका की भी मदद

श्रीलंका के लिए मौजूदा हालात ने उसके 2022 के आर्थिक संकट की यादें ताजा कर दी हैं. उस दौरान श्रीलंका ने चीनी निवेश पर बहुत ज़्यादा निर्भरता दिखाई थी. इसी वजह से कोलंबो ने कभी-कभी चीनी जासूसी जहाज़ों को अपने बंदरगाहों पर रुकने की इजाजत देकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज किया.

ईरान युद्ध ने एक बार फिर श्रीलंका की पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है. देश ने यह भी साफ कर दिया है कि उसके पास एक महीने से ज़्यादा का स्टोरेज नहीं है, जिसकी वजह से उसे ईंधन की कीमतों में 33% की बढ़ोतरी करनी पड़ी है.

इस संकट के बीच, राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने मार्च के मध्य में प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की. भारत ने रिएक्ट करते हुए 28 मार्च को तुरंत 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल श्रीलंका भेज दिया. इसके बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने आभार जताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, भारत के त्वरित समर्थन के लिए आभारी हूं.

अफगानिस्तान के लिए भी संकटमोचक

ऐसा नहीं है कि हिंदुस्तान जंग से संकट में आए देशों को ही मदद पहुंचा रहा है. उसने अफगानिस्तान की भी सहायता की है. उस अफगानिस्तान की जो हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप के कारण मुश्किल हालात का सामना कर रहा है. भारत ने उसको मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है.

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस सहायता सामग्री में किचन सेट, हाइजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा कि भारत अफ़गानिस्तान के लोगों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता और समर्थन देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

EPFO 3.0 Update: ATM और UPI से PF निकासी होगी शुरू! एक बार में निकाल सकेंगे इतनी रकम, ये रही पूरी डिटेल…

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पिछले साल EPFO 3.0 शुरू किया था, ताकि रिटायरमेंट संस्था के डिजिटल सिस्टम और काम करने के तरीकों को आसान और आधुनिक बनाया जा सके. उम्मीद है कि EPFO 3.0, 2026 के मध्य तक पूरी तरह लागू हो जाएगा, जिसका मकसद लोगों को आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.

ईपीएफओ 3.0 के तहत कई सारे नए बदलाव प्रस्तावित हैं कुछ हो लागू हो गए हैं और कुछ के लागू होने की उम्मीद है. उन्हीं बदलावों में से एक है यूपीआई और एटीएम से पीएफ से निकासी करने का नियम. आइए आपको इसके बारे में डिटेल से बताते हैं.

EPFO 3.0 के तहत कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें प्रोविडेंट फंड तक आसान पहुंच, ऑटो-क्लेम सेटलमेंट, ATM और UPI से तुरंत PF निकालना, और कर्मचारी की पसंद के बैंक खाते में आसानी से पैसा ट्रांसफर करना शामिल है. EPFO 3.0 के तहत सदस्य UPI पर अपना PF बैलेंस भी देख सकेंगे. EPFO 3.0 के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ATM और UPI से PF का पैसा निकालने का विकल्प मिलेगा. इससे लोगों को अपना पैसा पाने के लिए बैंक या EPFO ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. हालांकि, कुछ सीमाएं और शर्तें हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है.

इतना निकाल सकेंगे पैसा?

EPFO, UPI या ATM से PF बैलेंस निकालने की अधिकतम सीमा खाते में जमा कुल रकम के 50% तक तय कर सकता है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सदस्य कुछ पैसा बचाकर रख सकें और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सकें. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, EPFO सदस्यों के लिए ATM कार्ड भी जारी कर सकता है, जिससे वे सीधे ATM से पैसा निकाल सकेंगे. ये कार्ड PF खाते से जुड़े होंगे.

ATM और UPI से PF बैलेंस कौन निकाल सकता है?

EPFO के सदस्यों को PF का पैसा आसानी से निकालने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी. सदस्य के पास एक्टिव यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होना चाहिए. मोबाइल नंबर और UAN दोनों चालू होने चाहिए. इसके अलावा, UAN का Aadhaar, PAN, बैंक खाता संख्या और IFSC कोड से जुड़ा होना जरूरी है. बिना किसी परेशानी के सेवा देने के लिए, EPFO ने 32 सरकारी और निजी बैंकों के साथ समझौता किया है, ताकि कंपनियां सीधे बैंकों में PF का पैसा जमा कर सकें और PF क्लेम प्रोसेस होने में लगने वाला समय कम हो सके.

सऊदी अरब में फंसे महाराष्ट्र के 41 भारतीय, सुप्रिया सुले ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से लगाई मदद की गुहार…

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सऊदी अरब की राजधानी रियाद से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां महाराष्ट्र के जालना जिले के भोकरदन के रहने वाले 41 भारतीय नागरिक पिछले कुछ समय से फंसे हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये सभी यात्री महाराष्ट्र के भोकरदन क्षेत्र के निवासी हैं। वे रियाद से मुंबई लौटने के लिए तैयार थे, लेकिन अंतिम समय पर अकासा एयर (Akasa Air) की उनकी उड़ान अचानक रद्द कर दी गई। विमान सेवा रद्द होने के कारण इन यात्रियों के पास न तो घर लौटने का कोई विकल्प बचा है और न ही वहां रुकने की कोई ठोस व्यवस्था है।

सुप्रिया सुले का सरकार को संदेश

सांसद सुले ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, सऊदी अरब में स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल को टैग करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने मांग की है कि इन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए तत्काल राजनयिक कदम उठाए जाएं। सुप्रिया सुले ने जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक फ्लाइट कैंसिल होने का तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा और उनके मानवाधिकारों का सवाल है। प्रशासन को सभी बाधाओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाना चाहिए।

प्रभावित यात्रियों की सूची

सांसद सुप्रिया सुले ने पारदर्शिता और पहचान के लिए यात्रियों की पूरी सूची भी सार्वजनिक की है। फंसे हुए लोगों में आफरीन बेगम, शेख तालेब, सिकंदर खान, हसीना बेगम, शेख अनवर, अमजद खान, आसमा शेख, सुरेय्या बी, सीमा बेगम, जमीला बेगम, रफीक सईद कादरी और कई अन्य शामिल हैं। सूची में महिलाएं और छोटे बच्चे (जैसे एमएसटीआर जकवान और मिस आयशा) भी शामिल हैं, जो इस स्थिति में सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं।

परिजनों की बढ़ी चिंता

इधर महाराष्ट्र में इन यात्रियों के परिजनों की नींद उड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी जमीन पर इस तरह अचानक फंस जाना डरावना है। परिजनों ने सरकार से अपील की है कि उनके अपनों को रियाद से निकालने के लिए वैकल्पिक फ्लाइट या विशेष व्यवस्था की जाए। फिलहाल, हर किसी की नजरें विदेश मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

Assam Chunav 2026: शाही परिवार की हार की सेंचुरी लगेगी, असम में PM मोदी का कांग्रेस पर वार, जनता से की ये अपील…

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PM Modi Assam Visit: असम विधानसभा चुनाव(Assam Chunav) में मतदान को अब कुछ ही दिन बाकी हैं, और इस मौके पर हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। असम के बारापेटा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि शाही परिवार की हार की सेंचुरी लगेगी।

बारापेटा जिले के भवानीपुर-सोरभोग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए संकीर्ण दृष्टिकोण अपना रही है, जबकि भाजपा की योजना दीर्घकालिक विकास की है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा जो कहती है, वो करके दिखाती है, और असम की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

असम की पहचान को विश्वभर में ऊंचा करना है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 10 सालअसम की पहचान को बचाने के लिए थे, और अब हमें असम की पहचान को दुनिया में बुलंद करना है। उन्होंने कहा, “आपका वोट(Assam Chunav) इस बार विकसित असम के निर्माण की नींव को मजबूत करेगा।” प्रधानमंत्री ने असम के विकास के लिए भाजपा की योजनाओं और प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए जनता से भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

कांग्रेस पर बोला हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास जनता के बीच जाने और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने की हिम्मत नहीं है। “देश के जिन एक-दो राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बची हैं, वहां पर कांग्रेस कभी जनता के बीच अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर नहीं जाती है।”

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, भाजपा सरकार साफ नीयत से जनता को बताती है कि हमने जनता की सेवा के लिए क्या किया। इस चुनावी रैली (Assam Chunav) में पीएम मोदी ने भाजपा की योजनाओं और असम के विकास के मुद्दे पर जोर देते हुए कांग्रेस को उसके भ्रष्टाचार और विकासहीनता के लिए जिम्मेदार ठहराया।