Home Blog Page 187

CG: नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार…

0

दुर्ग पुलिस ने हाइड्रोपोनिक गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने दोनों के आरोपियों के पास से 2 किग्रा सामान्य गांजा और 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा, नगदी समेत अन्य सामग्री बरामद की है।

प्रकरण में मादक पदार्थ के स्रोत एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश की जा रही है। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश कर दिया है।

पुलिस प्रवक्ता एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि शनिवार को मुखबीर से सूचना मिली कि बोरसी रोड स्थित बीज विकास निगम के पास रुआबांधा क्षेत्र में कुछ व्यक्ति गांजा बेच रहे हैं।

जिसके बाद पुलिस ने तलाशी अभियान चलाकर दोनों युवकों को हिरासत में लिया गया। युवकों की तलाशी में उनके पास से हाइड्रोपोनिक गांजा और सामान्य गांजा समेत अन्य सामग्री बरामद किया है।

पुलिस ने विक्रम साहू निवासी तालपुरी और यश विश्वकर्मा निवासी हुडको को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने इनके पास से 2 किग्रा गांजा और 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा, 40 हजार नगदी व अन्य सामग्री बरामद की है। पुलिस ने दो युवकों को एनडीपीएस के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है।

हाइड्रोपोनिक गांजा की कीमत एक लाख और सामान्य गांजा की कीमत एक लाख रुपये आंकी गई है।

सीएम विष्णु देव साय ने पीएम मोदी को दिया जीत का श्रेय, शहीदों को किया नमन

0

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, शहीद जवानों, बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।

शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।

हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी – मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है – जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।

CG: अगले पांच दिनों तक होगी भारी बारिश, लोगों को मिलेगी गर्मी से राहत, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट…

0

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में शनिवार देर रात मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। राजधानी रायपुर समेत आस पास के इलाकों में में तेज हवाओं के साथ जमकर बारिश हुई है। अचानक मौसम में हुए बदलाव के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं अचानक हुई बारिश के चलते लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा।

राजधानी समेत इन इलाकों में हुई बारिश

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ जमकर बारिश शुरू हो गई है। राजधानी रायपुर और आस-पास के इलाकों में जमकर बारिश हुई। मौसम में अचानक हुए बदलाव के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिल गई है। वहीं मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर समेत बलरामपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बलौदाबाजार, बालोद, समेत प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश होने से तापमान में कमी आएगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत भी मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले पांच दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ मेघगर्जन और बिजली गिरने की आशंका बनी रहेगी।

छत्तीसगढ़ के इस इलाके में आया भूकंप, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग, रिक्टर स्केल में 4.4 रही तीव्रता…

0
  • शनिवार रात करीब 11:31 पर 4.4 तीव्रता की भूकंप के झटके’
  • शनिवार की देर रात भूकंप के झटको से बस्तर के लोग दहशत में आ गए’

रात करीब 11:31 पर 4.4 तीव्रता की भूकंप के झटके बस्तर संभाग मुख्यालय में महसूस किए गए। जगदलपुर मुख्य शहर और आडावाल में लोगों ने इस कंपन को सीधी तौर पर महसूस किया। कई लोग अपने घरों से बाहर भी निकल आए पर यह समय इतना कम था कि लोगों को रिएक्ट करने का मौका नहीं मिला।

ओड़िशा के कोरापुट में रहा भूकंप का केंद्र

सीस्मोलॉजी सेंटर रिपोर्ट के अनुसार भूकंप का केंद्र ओड़िशा के कोरापुट में रहा, जो बस्तर संभाग मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है जिसके कारण इसका असर बस्तर में भी महसूस किया गया। भूकंप मॉनिटरिंग ऐप से मिले डाटा के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता तीव्रता 4.4 मापी गई है और इसका केंद्र जमीन से 5 किलोमीटर भीतर था, (Earthquake in Bastar) इस वजह से झटका काफी हल्के महसूस किए गए। अब तक भूकंप के कम्पन की वजह से किसी भी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

एक साल पहले भी आया था भूकंप

गौरतलब है कि, 10 साल पहले तक बस्तर कोरापुट सहित आसपास के क्षेत्र को भूकंप मुक्त जोन की तरह जाना जाता था, लेकिन बीते कुछ सालों में लगातार भूकंप के झटके बस्तर क्षेत्र में भी महसूस किए जा रहे हैं। इससे पहले अप्रैल 2024 में भी 2.6 तीव्रता का भूकंप कई क्षेत्रों में महसूस किया गया था।

(Earthquake in Bastar) उस वक़्त भूकंप का केंद्र नजदीक था इसलिए पिछली बार ज्यादा कम्पन लोगों को महसूस हुऐ थे। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर बस्तर के क्षेत्र के नजदीक भूकंप का केंद्र नोटिस किया जा रहा है, लेकिन इसकी तीव्रता काफी कम होती है। इस वजह से नुकसान की आशंका नहीं है फिर भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

पांच में से तीन राज्यों में बनेगी एनडीए की सरकार, बंगाल में टीएमसी को सत्ता से हटाएंगे: संजय सरावगी…

0

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सारावगी ने आगामी राज्य चुनावों में भाजपा की स्थिति और आप सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने पर प्रतिक्रिया दी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आईएएनएस से बातचीत कहा, “भाजपा पूरे साल चौबीसों घंटे चुनाव की तैयारियों में लगी रहती है। हमारे कार्यकर्ता हमेशा तैयार रहते हैं। इस बार पार्टी का लक्ष्य टीएमसी को सत्ता से हटाकर बंगाल में सरकार बनाना है। असम में भाजपा पहले से भी अधिक मजबूती के साथ सत्ता में आएगी। पार्टी को केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी दमदार प्रदर्शन की उम्मीद है। 5 में से तीन राज्यों में एनडीए की सरकार बनाएगी।”

संजय सरावगी ने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों की बढ़ती आबादी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। प्रवासियों, रोहिंग्याओं या बांग्लादेशियों की मौजूदगी के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने की उम्मीद है। इससे इन समूहों का मनोबल बढ़ा है, लेकिन खबरों के मुताबिक बंगाल की जनता ऐसी स्थिति को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है और भाजपा को समर्थन मिलने की उम्मीद है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ममता बनर्जी और टीएमसी के सत्ता खोने की संभावना है।”

आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने पर संजय सरावगी ने कहा, “आप की नींव रखने वाले नेता धीरे-धीरे अरविंद केजरीवाल से दूर होते जा रहे हैं। केजरीवाल लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। इसके पहले स्वाति मालीवाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा के बोलने पर प्रतिबंध लगाना यह दर्शाता है कि पार्टी अपने लक्ष्यों से भटक गई है।”

दरभंगा में करोड़ों का सोना लूटने पर संजय सरावगी ने कहा कि उन्होंने सूचना मिलते ही तुरंत राज्य के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से बात की। एसपी और डीजीपी से बात हुई है। प्रशासन इस पर कार्रवाई कर रही है। बिहार में अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में भी जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

पीएम मोदी ने किया चेन्नई में संगीतकार रमेश विनायकम से मुलाकात का जिक्र, गमक बॉक्स नोटेशन सिस्टम’ को सराहा…

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चुनावी यात्रा के बीच चेन्नई में प्रसिद्ध संगीतकार रमेश विनायकम और उनके परिवार से मुलाकात कर भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर ले जाने के उनके प्रयासों की सराहना की।

यह जानकारी पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए दी।

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “चुनाव प्रचार के दौरान मुझे चेन्नई में रमेश विनायकम और उनके परिवार से मिलने का अवसर मिला। रमेश विनायकम एक संगीतकार हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय संगीत को लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने मुझे ‘गमक बॉक्स नोटेशन सिस्टम’ तैयार करने के अपने काम की एक झलक दिखाई। भारतीय संगीत को दुनिया तक पहुंचाने का यह एक बेहद ही अभिनव तरीका है।”

गमक बॉक्स नोटेशन सिस्टम एक विजुअल नोटेशन तकनीक है, जो भारतीय संगीत के सूक्ष्म अलंकारों को समझने और सिखाने में मदद करती है। किसी स्वर को सीधे न गाकर उसे हिलाकर, मोड़कर या सजाकर गाने को गमक कहते हैं।

रमेश विनायकम एक प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार, गायक, गीतकार और संगीत शोधकर्ता हैं। वे मुख्य रूप से तमिल और तेलुगु फिल्म उद्योगों में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 12 साल की उम्र में अपना पहला गाना लिखा और संगीतबद्ध किया था। उनके पिता, श्री विनायकम उनके पहले गुरु थे।

चुनावी कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री का केरल दौरा भी तय है। उनके कार्यक्रम के अनुसार, वे दोपहर करीब 2:30 बजे तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से कोट्टायम जिले के चंगनास्सेरी एनएसएस कॉलेज मैदान के लिए रवाना होंगे, जहां वे करीब 3 बजे पहुंचेंगे।

यहां से प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से तिरुवल्ला के स्टेडियम में आयोजित एक जनसभा में शामिल होंगे। इस जनसभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता और आसपास के क्षेत्रों से एनडीए उम्मीदवारों के शामिल होने की संभावना है।

जनसभा के बाद प्रधानमंत्री वापस तिरुवनंतपुरम लौटेंगे, जहां शाम को वे किल्लीपालम से करमाना जंक्शन तक करीब 1.5 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। इस रोड शो में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री जिला स्तर के एनडीए उम्मीदवारों से भी मुलाकात करेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, वे शाम करीब 7 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, असम चुनाव में बढ़ी राजनीतिक गर्मी…

0

अंतिम चरण के चुनाव प्रचार से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को “आंशिक समय के राजनीतिज्ञ” करार दिया, जो चुनावों के दौरान भारत आते हैं और चुनाव खत्म होते ही विदेश लौट जाते हैं।

शुक्रवार को मंगलदाई के डिघिरपर राश खाला मैदान में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए, नबीन के बयान ने असम विधानसभा चुनावों के निर्णायक चरण में बीजेपी के आक्रामक रुख को दर्शाया।

नबीन ने पार्टी के उम्मीदवारों नीलिमा देवी (मंगलदाई), डॉ. परमाणंद राजबोंगशी (सिपाझार), और बिकान डेका (टांगला) के लिए प्रचार करते हुए बीजेपी के शासन के रिकॉर्ड की तुलना कांग्रेस के शासन के वर्षों की अस्थिरता से की।

उन्होंने कहा, “2014-16 के बाद, जब बीजेपी की सरकारें केंद्र और असम में आईं, तब शांति, समृद्धि और संभावनाओं का माहौल बना, जो पहले के डर और अशांति के युग को बदल दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर पर ध्यान केंद्रित करते हुए, नबीन ने दोहराया कि असम सरकार के विकास दृष्टिकोण का केंद्रीय हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “मोदी जी का मानना है कि भारत की प्रगति पूर्वोत्तर की प्रगति के बिना संभव नहीं है,” और यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री की राज्य में बार-बार की यात्राएं उनके लोगों के प्रति “गहरी सम्मान और प्रतिबद्धता” को दर्शाती हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तुलना करते हुए, नबीन ने दावा किया कि मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान असम का “लगभग 70 बार” दौरा किया, जो सिंह के राज्य के साथ जुड़ाव के विपरीत है।

नबीन ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी-नियंत्रित राज्य सरकार की भी प्रशंसा की, जो उन्होंने कहा कि “घुसपैठियों” से बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को पुनः प्राप्त करने में सफल रही है, जिन्हें पहले कांग्रेस सरकारों द्वारा संरक्षण दिया गया था।

उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार ने सरकारी भूमि को मुक्त करने और कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं।”

रैली में राज्य बीजेपी अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया।

सैकिया ने कहा, “बीजेपी मंगलदाई, सिपाझार और टांगला सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी।”

उच्च स्वर और विपक्ष पर लक्षित हमलों के साथ, असम में बीजेपी का अभियान अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें नेता विकास के दावों और राजनीतिक विरोधाभासों के मिश्रण के माध्यम से समर्थन को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या हैं आज के ईंधन के दाम? जानें LPG, CNG और PNG की ताजा कीमतें…

0

ईंधन की कीमतों में स्थिरता

मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, घरेलू और व्यावसायिक ईंधन की कीमतों में आज कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। LPG, CNG और PNG की आपूर्ति पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी शहर में स्टॉक की कमी की सूचना नहीं मिली है।

भारत कच्चे तेल का 40 प्रतिशत और LPG का लगभग 90 प्रतिशत आयात पश्चिम एशियाई देशों से करता है, जिससे वैश्विक तनाव का प्रभाव ईंधन की कीमतों पर लगातार देखा जा रहा है। सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत योग्य परिवारों को सब्सिडी प्रदान कर रही है।

14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

  • दिल्ली: 913 रुपये
  • मुंबई: 912.50 रुपये
  • चेन्नई: 928.50 रुपये
  • कोलकाता: 939 रुपये
  • बेंगलुरु: 915.50 रुपये
  • हैदराबाद: 965.50 रुपये

19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें

  • दिल्ली: 2,078.50 रुपये
  • मुंबई: 2,031.50 रुपये
  • चेन्नई: 2,246.50 रुपये
  • कोलकाता: 2,208.50 रुपये
  • बेंगलुरु: 2,161 रुपये
  • हैदराबाद: 2,320.50 रुपये

CNG और PNG की कीमतें CNG की आज की कीमतें (प्रति किलो)

  • दिल्ली: 77.09 रुपये
  • मुंबई: 80.50 रुपये
  • चेन्नई: 91.50 रुपये
  • कोलकाता: 93.50 रुपये
  • बेंगलुरु: 88.95 रुपये
  • हैदराबाद: 97 रुपये

PNG की आज की कीमतें (प्रति SCM) दिल्ली: 47.89 रुपये

  • मुंबई: 50 रुपये
  • चेन्नई: 50 रुपये
  • कोलकाता: 50 रुपये
  • बेंगलुरु: 52 रुपये
  • हैदराबाद: 51 रुपये

5 किलो LPG सिलेंडर की कीमत में वृद्धि.5 किलो LPG सिलेंडर की कीमत में 51 रुपये की बढ़ोतरी

5 किलो वाले LPG सिलेंडरों की कीमत में 51 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब इनकी कीमत 649 रुपये से बढ़कर लगभग 700 रुपये हो गई है।

उपभोक्ताओं के लिए सुझाव उपभोक्ताओं के लिए सलाह

LPG अभी भी अधिकांश घरों में खाना पकाने का मुख्य ईंधन है, लेकिन CNG और PNG तेजी से किफायती विकल्प बनते जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के अनुसार ईंधन की कीमतों और सरकारी नीतियों के अपडेट पर ध्यान दें ताकि वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकें।

ईरान की चेतावनी के बीच ग्लोबल टेक डर में: अगर Google, Apple और Meta बंद हो जाएं तो कैसे बदलेगी दुनिया की डिजिटल लाइफ…

0

मध्य पूर्व में तनाव अब डिजिटल दुनिया तक भी पहुँच गया है। ईरान ने चेतावनी जारी करते हुए अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे इंटरनेट सेवाओं पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

ऐसे हालात में, अगर Google, Apple और Meta जैसी कंपनियाँ प्रभावित होती हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। सबसे अहम सवाल यह है: क्या WhatsApp, YouTube और Gmail जैसे प्लेटफॉर्म अचानक काम करना बंद कर सकते हैं? और भारत पर इसका क्या असर होगा?

सिर्फ़ ऐप्स ही नहीं: पूरी डिजिटल दुनिया इन्हीं पर निर्भर है

आज की दुनिया में, Google, Meta और Apple सिर्फ़ मोबाइल एप्लिकेशन चलाने वाली कंपनियाँ नहीं हैं; वे पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। Google के सर्वर Gmail, YouTube, Maps और हज़ारों अन्य एप्लिकेशन को चलाते हैं, जबकि Meta के बिना WhatsApp, Instagram और Facebook का काम पूरी तरह से ठप हो जाएगा। Apple का इकोसिस्टम iPhone यूज़र्स के डेटा, पेमेंट सिस्टम और ऐप के माहौल से गहराई से जुड़ा हुआ है। अगर उनके डेटा सेंटर्स में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो यह समस्या सिर्फ़ किसी एक ऐप के बंद होने तक सीमित नहीं रहेगी; यह पूरी डिजिटल ज़िंदगी को ठप कर सकती है। ऐसी किसी घटना का असर दुनिया भर के लाखों यूज़र्स पर एक साथ पड़ेगा।

डेटा सेंटर्स: आसान निशाने

अमेरिका के अंदर सीधे हमला करने के बजाय, ईरान मध्य पूर्व में मौजूद डेटा सेंटर्स को निशाना बना सकता है। बहरीन में Amazon के डेटा सेंटर में रुकावट आने की एक घटना पहले ही सामने आ चुकी है। UAE और बहरीन जैसे इलाकों में बड़े-बड़े सर्वर हब हैं, जो पूरे इलाके को इंटरनेट सेवाएँ मुहैया कराते हैं। अगर इन जगहों पर हमला होता है, तो लाखों यूज़र्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सेवाएँ एक साथ बाधित हो सकती हैं। ऐसे हमले सिर्फ़ बम या ड्रोन तक ही सीमित नहीं हो सकते; इन्हें साइबर हमलों के ज़रिए या बिजली और नेटवर्क के बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाकर भी अंजाम दिया जा सकता है। इसके अलावा, अगर समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलें-जो वैश्विक नेटवर्क की भौतिक नींव हैं-क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो कई देशों में इंटरनेट की रफ़्तार काफ़ी धीमी हो सकती है या पूरी तरह से बंद हो सकती है।

कैसे एक हमला कई सेवाओं को ठप कर सकता है

एक डेटा सेंटर एक डिजिटल पावरहाउस की तरह काम करता है, जिसमें हज़ारों सर्वर एक साथ मिलकर काम करते हैं। इन सर्वरों को लगातार बिजली, कूलिंग और तेज़ रफ़्तार इंटरनेट कनेक्टिविटी की ज़रूरत होती है। जैसे ही इनमें से कोई भी ज़रूरी सिस्टम फेल होता है, सर्वर ज़्यादा गरम होने लगते हैं और फिर बंद हो जाते हैं। अक्सर, सुरक्षा कारणों से, सिस्टम अपने आप बंद हो जाते हैं, जिससे सेवाएँ अचानक रुक जाती हैं। Google के लिए, इसका मतलब है विज्ञापनों का रुक जाना; Meta के लिए, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म में रुकावट; और Apple के लिए, उसके ऐप्स और पेमेंट सिस्टम पर असर पड़ना। इससे इन कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है और साथ ही यूज़र्स का भरोसा भी कम होता है।

भारत और दुनिया पर असर

अगर ऐसी कोई स्थिति आती है, तो भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ेगा। यहाँ, करोड़ों लोग WhatsApp, YouTube और Google जैसी सेवाओं पर निर्भर हैं। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े स्टार्टअप तक, हर किसी का काम-काज इन प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ा हुआ है। अगर सेवाएँ कुछ घंटों के लिए भी रुक जाती हैं, तो UPI पेमेंट ठप हो सकते हैं, ऑनलाइन कारोबार रुक सकते हैं, और फ्रीलांसरों और कंटेंट क्रिएटर्स का काम बाधित हो सकता है। इसके अलावा, अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा, क्योंकि बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाएँ सभी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हैं। सिर्फ़ एक डेटा सेंटर के बंद होने से एक के बाद एक कई समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं, जिससे पूरा डिजिटल इकोसिस्टम अस्थिर हो सकता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में संघ और ममता बनर्जी के बीच टकराव…

0

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर से सक्रिय हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की बढ़ती गतिविधियों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के बीच के समीकरण चर्चा का विषय बन गए हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या संघ की रणनीति ममता बनर्जी के लिए नुकसानदायक होगी या यह उनके लिए राजनीतिक लाभ का कारण बनेगी।

संघ की गतिविधियों में वृद्धि

हाल के दिनों में संघ ने पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को तेजी से फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया है। गांवों में पहुंच बनाने और सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसे आगामी चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

ममता बनर्जी की स्थिति

वहीं, ममता बनर्जी का बंगाल की राजनीति में एक मजबूत आधार बना हुआ है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पिछले चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। ममता खुद को बंगाल की ‘माटी की बेटी’ के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो उन्हें स्थानीय पहचान दिलाता है।

राजनीतिक टकराव का लाभ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ की सक्रियता भाजपा के लिए जमीन तैयार कर सकती है, लेकिन यह ममता बनर्जी के लिए भी फायदेमंद हो सकती है।

ध्रुवीकरण का लाभ: संघ की उपस्थिति से यदि राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो ममता अपने कोर वोट बैंक को और मजबूत कर सकती हैं।

विपक्ष को घेरने का मौका: ममता इस स्थिति को बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप के रूप में पेश कर राजनीतिक लाभ उठा सकती हैं।

भाजपा की रणनीति

संघ की रणनीति को भाजपा की चुनावी तैयारी से जोड़ा जा रहा है। यदि संघ जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है, जिससे ममता के लिए चुनौती बढ़ेगी।

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संघ की यह रणनीति किस दिशा में जाती है और ममता बनर्जी इसे किस प्रकार संभालती हैं। बंगाल की राजनीति में हर कदम का व्यापक प्रभाव होता है, इसलिए दोनों पक्ष अपनी चालों में सावधानी बरत रहे हैं।

निष्कर्ष

संघ और ममता बनर्जी के बीच यह राजनीतिक मुकाबला सीधा नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक है। संघ अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है, जबकि ममता इस स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस समय यह कहना कठिन है कि किसका पलड़ा भारी है, लेकिन मुकाबला निश्चित रूप से दिलचस्प हो गया है।