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किसानों के हक में विधायक हर्षिता का हल्ला बोल, घुमका में विशाल धरना प्रदर्शन

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डोंगरगढ़। भाजपा की किसान विरोधी नीतियों और धान खरीदी में आ रही अव्यवस्थाओं के खिलाफ आज घुमका में एक विशाल धरना प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन नगर पंचायत घुमका के बस स्टैंड में आयोजित किया गया, जिसमें डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने नेतृत्व किया। सैकड़ों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
धरना प्रदर्शन के दौरान विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने किसानों के मुद्दों को उठाया और सरकार की नाकामियों को बिंदुवार गिनाया। विधायक ने कहा कि शासन द्वारा किसानों पर जबरन रकबा समर्पण (रकबा कटौती) का दबाव डाला जा रहा हैए जिससे किसान अपने ही उत्पाद को बेचने से वंचित हो रहे हैं। इस कदम को विधायक ने किसानों की मेहनत पर प्रहार बताया और कहा कि इससे उनकी जीविका पर संकट उत्पन्न हो रहा है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि धान बेचने के लिए किसानों को टोकन प्राप्त करने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई सोसायटियों में पोर्टल की समस्या या अन्य कारणों से टोकन नहीं काटे जा रहे हैं। वर्तमान में धान खरीदी की समय सीमा समाप्त होने को है, जबकि किसानों का धान अब भी खलिहानों में पड़ा हुआ है। विधायक ने तत्काल धान खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की।
प्रदर्शन में मौजूद वक्ताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किए गए वादे अब खोखले साबित हो रहे हैं और सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। किसानों को राहत देने के बजाय सरकार की नीतियां उन्हें मजबूर और परेशान करने वाली साबित हो रही हैं।
विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने मंच से अपने संबोधन में कहा, आज हमारे अन्नदाता अपने हक की फसल बेचने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े हैं और सरकार कूट नीतियों के जरिए उनका रकबा काट रही है। जब तक हर किसान का एक-एक दाना धान नहीं बिक जाता और खरीदी की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम किसानों के स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे।
इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि डोंगरगढ़ के किसान अपनी हक की लड़ाई को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं और जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मेरा भारत, मेरा वोट पदयात्रा का आयोजन

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राजनांदगांव। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मेरा भारत, मेरा वोट के थीम पर राजनांदगांव में एक विशेष पदयात्रा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवीन मतदाताओं, विशेष रूप से उन युवाओं को सम्मानित करना था जो हाल ही में 18 वर्ष के हो चुके हैं और जो अब मतदान के अधिकार का प्रयोग करने के योग्य हैं।
पदयात्रा का प्रारंभ अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम से हुआ, जहां माय भारत के सक्रिय स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए युवाओं को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया और शपथ दिलाई गई। इसके बाद, अतिथियों ने नए मतदाताओं को बैज पहनाकर उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण, राजनांदगांव के केसी त्रिपाठी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अल्बियस इक्का, सहायक संचालक और आईटीबीपी एवं एसएसबी के अधिकारी भी उपस्थित रहे। माय भारत की ओर से शूभजीत डे, जिला युवा अधिकारी, तपन साहू, लेखपाल, गोविंद साहू, तेजस्वी वर्मा और लोकेश यादव ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम में युवाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और पदयात्रा के माध्यम से मतदान के अधिकार की अहमियत को समझने और उसे अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने युवाओं में मतदाता जागरूकता को बढ़ाने और उन्हें लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
यह आयोजन न केवल युवाओं को मतदान के महत्व से अवगत कराता है, बल्कि समाज में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा देता है।

मनगटा में पुलिस का बड़ा एक्शन, कई रिसॉर्ट्स पर हुई छापेमारी, हड़कंप मचा

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राजनांदगांव। कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने और असामाजिक गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए जिला पुलिस ने मनगटा क्षेत्र में स्थित कई रिसॉर्ट्स पर एक साथ दबिश दी। इस छापेमारी से क्षेत्र में खलबली मच गई। पुलिस की यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक अलेक्जेंडर किरो के नेतृत्व में की गई।
करीब 40 पुलिस कर्मियों की टीमों ने लगभग 49 रिसॉर्ट्स में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई रिसॉर्ट्स में अवैध रूप से शराब सेवन की सुविधा दी जा रही थी। विशेष रूप से रॉक हाउस, वनांचल, स्काय, डी कास्टल और विसलिंग वुड्स रिसॉर्ट में शराब की बिक्री और सेवन की पुष्टि हुई।
पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को समझाकर मामले को शांत किया और रिसॉर्ट संचालकों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 36 (सी) के तहत कानूनी कार्रवाई की। इसके अलावा, मनगटा के वन चेतना केंद्र के पास शराब के नशे में पाए गए एक व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
पुलिस ने सभी रिसॉर्ट संचालकों को नोटिस जारी कर उन्हें भारतीय न्याय संहिता के तहत नियमों का पालन करने की चेतावनी दी। यह नोटिस स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी तरह के नियम उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला पुलिस की यह त्वरित और संगठित कार्रवाई यह संदेश देती है कि पुलिस कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ है और किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को निरंतर जारी रखा जाएगा।
मनगटा क्षेत्र में इस दबिश से जहां एक ओर असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना हैए वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनता में भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर संतोष की भावना व्याप्त है।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन

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राजनांदगांव। भारत माता के प्रति समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) राजनांदगांव इकाई द्वारा वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसमें सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं और राष्ट्रप्रेमी नागरिकों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
तिरंगा यात्रा का शुभारंभ राष्ट्रगान और भारत माता के जयघोष के साथ हुआ। हाथों में तिरंगा लिए विद्यार्थी वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारों के साथ यात्रा में आगे बढ़े। यात्रा के दौरान पूरे नगर का वातावरण देशभक्ति से गूंज उठा। नगरवासियों ने यात्रा का स्वागत करने के लिए विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा की।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद अभिषेक सिंह ने यात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का प्रतीक है। उन्होंने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन युवाओं को अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों के साथ राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में राजनांदगांव कबड्डी संघ के अध्यक्ष ऋषि देव चौधरी ने कहा कि एबीवीपी युवाओं में नेतृत्व, चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का भाव पैदा करती है, जो समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रांत सह छात्रा प्रमुख सुश्री उर्वशी वर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है, और यह तिरंगा यात्रा राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रतीक है।
कार्यक्रम में प्रांत सहमंत्री अमन नामदेव ने कहा कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सेवा भावना जागृत करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभाग छात्रा प्रमुख पूर्वा समर्थ और जिला संयोजक धनंजय पांडे का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
नगर मंत्री अक्षत कुमार श्रीवास्तव ने आयोजन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, प्रशासन, पुलिस प्रशासन, मीडिया और नगरवासियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रतीक गढ़वाल, हर्ष वर्मा, नगर सह मंत्री भूपेंद्र पाल, नगर महाविद्यालय प्रमुख जीत शर्मा, नगर एसएफडी प्रमुख कुलदीप पाल, नगर एसएफएस प्रमुख चैतन्य द्विवेदी, राष्ट्रीय कला मंच प्रमुख श्रीमती युक्ता मांडवी, नगर सोशल मीडिया संयोजक यश श्रीवास्तव सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य भी उपस्थित रहे। साथ ही एनएसएस के विद्यार्थियों का भी आयोजन की सफलता में योगदान सराहनीय रहा।

धर्मापुर में कथित अवैध मिशनरी आश्रम मामला, हिंदू जागरण मंच ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की

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राजनांदगांव। राजनांदगांव जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर ग्राम धर्मापुर में संचालित एक कथित अवैध मिशनरी आश्रम को लेकर विवाद बढ़ गया है। हिंदू जागरण मंच और स्थानीय नागरिकों ने आश्रम संचालन को अवैध बताते हुए प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

एन.ओ.सी. का कथित दुरुपयोग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डेविड चाको नामक व्यक्ति ने ग्राम पंचायत से आवासीय भवन और सिलाई केंद्र के लिए जारी एन.ओ.सी. का दुरुपयोग किया। शिकायत में कहा गया है कि न तो सिलाई केंद्र संचालित हुआ और न ही स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप गतिविधियाँ की गईं। इसके बजाय, आश्रम परिसर में अनाथ बच्चों का रख-रखाव और धार्मिक गतिविधियाँ बिना अनुमति संचालित की जा रही थीं।

संदिग्ध गतिविधियों का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि रात में आश्रम में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही रहती थी। भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जाता था। इस मामले के मीडिया में उजागर होने के बाद हिंदू संगठनों ने तत्काल आश्रम बंद करने की मांग की है।

भूमि, निर्माण और नशा मुक्ति केंद्र पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आश्रम निर्माण अवैध प्लाटिंग की भूमि पर हुआ और भूमि डायवर्सन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर पंजीकरण कराने के बावजूद, मौके पर ऐसा कोई केंद्र संचालित नहीं पाया गया।

विदेशी फंडिंग और करोड़ों की लागत की आशंका
संगठनों का दावा है कि आश्रम निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। इसके पीछे विदेशी फंडिंग की भी आशंका जताई गई है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग की गई है।

नाबालिग बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्न
शिकायत में कहा गया है कि आश्रम में 10 से 12 नाबालिग बच्चों को रखा गया था। अभिभावकों का शपथ पत्र न होना और बच्चों के घर लौटने पर शपथ पत्र बनवाना भी संदेह के घेरे में है। बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराना या विभागों को सूचित करना भी नहीं हुआ, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

अनधिकृत प्रार्थना सभाओं और चर्च पर सवाल
आरोप है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घरों में रविवार को प्रार्थना सभाएं और चर्च संचालित किए जा रहे हैं, जिनकी अनुमति नहीं ली गई। संगठनों ने प्रशासन से पूछा है कि यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

नार्को, पॉलिग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट की मांग
शिकायतकर्ताओं ने डेविड चाको का नार्को, पॉलिग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की मांग भी की है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

प्रशासन से ठोस कार्रवाई की अपील
हिंदू जागरण मंच और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गलत जानकारी के आधार पर जारी एन.ओ.सी. को निरस्त किया जाए, अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए और सभी संबंधित विभागों से समन्वित जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

जिला अध्यक्ष सुशील लढ्ढा ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

अंडरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर आसिफ अली के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन

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राजनांदगांव। शहर एवं उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों स्टेशनपारा, शिक्षक नगर, रामनगर, शंकरपुर, शांति नगर, ढाबा, गठुला एवं बोरी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन खैरागढ़-राजनांदगांव मुख्य मार्ग से होता है। पूरे क्षेत्र के लिए मात्र एक संकीर्ण ओवरब्रिज ही विकल्प है, जहां प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति बनती है और लगातार हो रही दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है।
पूर्व में स्टेशनपारा स्थित रेलवे फाटक क्रमांक 460 से आवागमन सुगम था, जिससे ओवरब्रिज पर यातायात का दबाव नहीं पड़ता था। किंतु लगभग तीन वर्षों से अंडरब्रिज निर्माण के नाम पर फाटक बंद कर दिया गया है, जबकि आज तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके कारण आम जनता, महिलाएं, बुज़ुर्ग और छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर हैं। कई बार दुर्घटनाओं में जनहानि भी हो चुकी है, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त है।
इसी गंभीर जनसमस्या को लेकर कांग्रेस नेता आसिफ अली के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन परिसर में सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने उग्र प्रदर्शन किया और घंटों नारेबाजी कर रेलवे प्रशासन को चेताया। आसिफ अली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शीघ्र अधूरे अंडरब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ कर पूर्ण नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता के साथ उग्र आंदोलन एवं चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अधूरे अंडरब्रिज के कारण भविष्य में यदि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होती है और जनहानि होती है, तो उसकी सम्पूर्ण नैतिक एवं प्रशासनिक जवाबदेही रेलवे प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के पश्चात दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मंडल अभियंता के नाम ज्ञापन स्टेशन मास्टर को सौंपा गया, जिसकी प्रतिलिपि जिलाधीश एवं जिला पुलिस अधीक्षक को भी दी गई। इस दौरान रेलवे प्रशासन ने आश्वासन दिया कि वर्तमान परिस्थितियों व समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए शीघ्र ही अंडरब्रिज निर्माण कार्य पूर्ण करवाया जाएगा।
आंदोलन एवं प्रदर्शन में आसिफ अली के साथ मुख्य रूप से पार्षद छोटे लाल रामटेके, अब्बास खान, विशाल गड़े, हितेश गोन्नाडे, हनीफ खान, परस लहरे, निरंजन पासवान, कृष्णा मेश्राम, शेख अनीश, चंचल देवांगन, प्रियेश मेश्राम, गोपाल सिन्हा, प्रीत राम साहू, पंच राम निषाद, भागवत यादव, दानी रगड़े, मनीष शर्मा, दिग्विजय श्रीवास्तव, उदय राम साहू, अरविंद साहू, नारायण पाल, नासिर खान, रामू यादव, परदेशी वासनिक, लीलेंद्र साहू, रोहित यादव, मो. तस्लीम, जितेंद्र साहू, शेख मुस्ताक, परवेज खान, छोटू साहू, सुरेश सिन्हा, चंदन साहू, सावन पाल, महेश भट्ट, राजेश सिन्हा, जुगनू राजपूत, हरीश साहू, अब्दुल कादिर सोलंकी, कांता अग्रवाल, ललित कुमार नामदेव, खुमान लाल, गोलू राजपूत, उमेश राजपूत, सलीम खान, छोटू श्रीवास, कमलेश मेश्राम, हिमालय बांधे, ठाकुर राम साहू, गोलू विश्वकर्मा, प्रमोद सोनटेके, अमित यादव, ऋषि रजक, बिल्किस खान, संतोषी नागवंशी, चमेली यादव, देवकी यादव, इंद्राणी यादव, सलमा बेगम, बबीता कुलदीप, द्रोपती कुलदीप, नीतू वैष्णव, किरण साहू, गायत्री यादव, चंद्रवती साहू, भाना पाल, राधिका यादव, देवकी साहू, अंजली अहीरवाल, नूरजहां खान, ज्योति नामदेव, मंजू यादव, मंटोरा साहू, अनुसुइया बाई, रेखा साहू, दीपकुमारी सिन्हा, योगिता श्यामकर, संजू लता रंगारी, रेखा नोनहरे, सुजाता रामटेके, मंदाकिनी मेश्राम, राम कुंवर, बीना यादव, हेमलता यादव, डिंपल पॉल, कुणाली नंदनवार, उर्मिला सिन्हा, लक्ष्मी यादव, भान यादव, सांता यादव, सरिता यादव, सुमित्रा यादव, हेमलता साहू, रेणुका साहू, तनुजा साहू, ईश्वरी बाई सिन्हा, इंदु सिन्हा, महेश्वरी यादव, नैन साहू, भावना ताम्रकार, असिति साहू, कुलेश्वरी साहू सहित समस्त स्टेशन वार्डवासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सब कुछ ठीक, सब एक साथ- संसद भवन में राहुल और खरगे से मुलाकात के बाद बोले शशि थरूर…

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की लंबे समय से पार्टी के प्रति नाराजगी के कयास लगाए जाते रहे हैं. नाराजगी की खबरों के बीच थरूर ने आज गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की.

देर तक चली मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि सब कुछ ठीक है और सब एक साथ हैं.

संसद भवन स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के ऑफिस में यह मुलाकात हुई. केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर ने इस मुलाकात को बहुत अच्छी, सार्थक और सकारात्मक करार दिया. शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, “सब कुछ ठीक है और हम सब एक साथ आगे बढ़ रहे हैं.”

मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार कियाः थरूर

थरूर ने कहा, “मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) और कांग्रेस अध्यक्ष (खरगे) के साथ हमारी बातचीत हुई. हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई. अब सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. मैं और क्या कह सकता हूं? मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?”

अगले कुछ महीने में केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार की संभावना को लेकर शशि थरूर ने कहा, “मैंने हमेशा प्रचार किया है, आगे भी प्रचार करता रहूंगा.”

मैं सीएम पद का उम्मीदवार नहीं थरूर

उन्होंने केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी से इनकार करते हुए कहा कि यह उनके लिए कभी मुद्दा ही नहीं रहा. क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई के सवाल पर उन्होंने कहा, “नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई. मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है. मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है.” उनका कहना है कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं, मैं पहले से सांसद हूं.

शशि थरूर की नाराजगी को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे हैं. इससे पहले पिछले दिनों कांग्रेस सांसद थरूर ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPM) की ओर उनके झुकाव की अटकलें लगाई जा रही थीं.

अटकलें तब से लगाई जाने लगी हैं जब से उन्होंने कांग्रेस की कई बैठकों से दूरी बनाकर रखी. पिछले दिनों एक अहम बैठक में नहीं आने पर सफाई में कहा कि उनके पास न्योता इतनी देर से आया कि उनके पास अपने पहले से तय कार्यक्रम को बदलने का कोई विकल्प नहीं था. यह बैठक पिछले दिनों सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित की गई थी.

जब भारत की अर्थव्यवस्था है ‘सुपरहिट’, फिर रुपया क्यों हो रहा है ‘गरीब’?

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गुरुवार की सुबह भारतीय मुद्रा बाजार में एक बेचैनी भरा माहौल देखने को मिला. जैसे ही बाजार खुला, रुपये ने गोता लगाया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.99 के स्तर को छू लिया. पिछले कारोबारी सत्र में यह 91.78 पर बंद हुआ था, लेकिन सुबह की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई. हम अक्सर सुनते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

2025-26 का इकोनॉमिक सर्वे भी यही कह रहा है जीडीपी ग्रोथ 7.4% है, महंगाई दर काबू में होकर 1.7% पर आ गई है और बैंकों की हालत पिछले कई दशकों में सबसे बेहतर है (NPA मात्र 2.2% है). लेकिन सवाल यह है कि जब देश का “मैक्रो-इकोनॉमिक रिपोर्ट कार्ड” इतना शानदार है, तो हमारी करेंसी अपनी चमक क्यों खो रही है?

रुपया क्यों हो रहा ‘फ्लॉप’?

इस पहेली का जवाब देश के भीतर नहीं, बल्कि सात समंदर पार छिपा है. 2025 में दुनिया का व्यापारिक माहौल बदल चुका है. अब व्यापार सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि ताकत दिखाने के लिए हो रहा है. अमेरिका ने अप्रैल 2025 में भारतीय निर्यात पर 25% ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और फिर अगस्त में अतिरिक्त 25% ‘पीनल टैरिफ’ लगाकर हमारे निर्यातकों को करारा झटका दिया है. इसे “इकोनॉमिक स्टेटक्राफ्ट” कहा जा रहा है, जहां व्यापार नीतियों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

इसके साथ ही, अनिश्चितता के इस दौर में दुनिया सुरक्षित निवेश की तलाश में है. जनवरी 2026 तक सोने की कीमतें 5101.34 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई हैं. जब भी दुनिया में डर का माहौल बनता है, निवेशक डॉलर और सोने की तरफ भागते हैं, जिससे रुपये जैसी उभरती मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है. लोवी इंस्टीट्यूट का “पावर गैप इंडेक्स” भारत को -4.0 का स्कोर देता है, जो एशिया में रूस और उत्तर कोरिया को छोड़कर सबसे कम है. यह बताता है कि हमारे पास 145 करोड़ लोगों की ताकत तो है, लेकिन वैश्विक झटकों को झेलने वाली ‘रणनीतिक एकाग्रता’ की कमी है.

AI की आंधी में उड़ गया निवेशकों का पैसा

रुपये की कमजोरी का एक और बड़ा और आधुनिक कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI). 2025 में वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा पारंपरिक बाजारों से निकलकर अमेरिका, ताइवान और कोरिया की टेक्नोलॉजी कंपनियों में जा रहा है. निवेशक “लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स” (LLMs) और डेटा सेंटर्स पर अंधाधुंध पैसा लगा रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि वॉल स्ट्रीट के निवेशकों ने बैलेंस शीट से बाहर जाकर करीब 120 बिलियन डॉलर सिर्फ डेटा सेंटर्स में लगा दिए हैं.

इसका सीधा असर यह हुआ कि भारत जैसे हाई-परफॉर्मिंग बाजारों से पैसा निकलकर अमेरिका की ओर मुड़ गया है. इसे लिक्विडिटी कॉन्ट्रैक्शन कहा जा रहा है. भले ही भारत 7.4% की दर से विकास कर रहा हो, लेकिन जब वैश्विक पूंजी को AI में अगला बड़ा जैकपॉट दिख रहा है, तो वे भारत की मजबूत बुनियाद को भी नजरअंदाज कर रहे हैं. यही कारण है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत से 3.9 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश (FPI) बाहर चला गया.

क्या ‘सेवाओं’ के भरोसे चल पाएगी गाड़ी?

सर्वे एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, हम अपनी ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ (भुगतान संतुलन) की समस्याओं के लिए काफी हद तक सेवाओं (IT सेक्टर और रेमिटेंस) पर निर्भर हैं. लेकिन सच यह है कि सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचकर या विदेश से पैसा मंगाकर रुपये को नहीं बचाया जा सकता. विनिर्माण (Manufacturing) ही वह इकलौता सेक्टर है जो करेंसी को असली मजबूती दे सकता है.

भारत अभी “Paradox of 2025” यानी विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है. हमारी घरेलू स्थिति मजबूत है S&P ने हमें ‘BBB’ रेटिंग दी है जो दो दशकों में पहली बार हुआ है. लेकिन रणनीतिक रूप से रुपया अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, इसका एक छोटा फायदा भी है. कमजोर रुपया अमेरिकी टैरिफ के असर को कुछ हद तक कम कर देता है, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है.

NEET UG पास किए बिना भी बन सकते हैं डॉक्टर.. जानें MBBS समेत सभी कोर्सों की पूरी डिटेल्स…

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12वीं के बाद मेडिकल फील्ड में करियर बनाने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए यह जानकारी बेहद काम की है. अक्सर छात्रों को लगता है कि अगर NEET परीक्षा पास नहीं हुई तो मेडिकल में आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो जाते हैं, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है.

MBBS जरूर सबसे लोकप्रिय कोर्स है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे मेडिकल और हेल्थकेयर कोर्स मौजूद हैं, जिनके जरिए छात्र एक सफल और सम्मानजनक करियर बना सकते हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई कोर्स NEET के बिना भी किए जा सकते हैं और इनमें नौकरी के अच्छे अवसर उपलब्ध हैं.

12वीं के बाद मेडिकल फील्ड में करियर के ऑप्शन

MBBS

MBBS भारत का सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कोर्स माना जाता है. इस कोर्स में एडमिशन के लिए NEET-UG परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है. NEET के स्कोर के आधार पर सरकारी, प्राइवेट, AIIMS, JIPMER और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलता है.

MBBS की कुल अवधि 5.5 साल होती है, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल है. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र डॉक्टर बन सकते हैं और आगे MD या MS जैसी पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई भी कर सकते हैं. सरकारी मेडिकल ऑफिसर, सर्जन और रिसर्चर जैसे विकल्प भी खुले रहते हैं.

BDS: डेंटल सेक्टर में शानदार करियर

जो छात्र दांतों और मुंह से जुड़ी बीमारियों के इलाज में रुचि रखते हैं, उनके लिए BDS एक बेहतरीन विकल्प है. BDS कोर्स में भी NEET-UG स्कोर के आधार पर एडमिशन मिलता है. इस कोर्स की अवधि 5 साल होती है, जिसमें इंटर्नशिप शामिल है. BDS करने के बाद छात्र डेंटिस्ट, ओरल सर्जन या सरकारी अस्पतालों में दंत चिकित्सक के रूप में काम कर सकते हैं. प्राइवेट क्लिनिक खोलने का विकल्प भी मौजूद है.

AYUSH Courses: आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा

आयुष कोर्सेज की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. NEET-UG स्कोर के आधार पर छात्र BAMS, BHMS, BUMS, BSMS और BNYS जैसे कोर्स में दाखिला ले सकते हैं. इन कोर्सों के जरिए छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर, होम्योपैथिक चिकित्सक, पंचकर्म विशेषज्ञ या यूनानी चिकित्सा के एक्सपर्ट बन सकते हैं. आज के समय में लोग वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे इस फील्ड में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं.

BVSc & AH: पशु चिकित्सा में करियर

जो छात्र जानवरों के इलाज और देखभाल में रुचि रखते हैं, उनके लिए वेटरनरी साइंस एक शानदार विकल्प है. BVSc & AH कोर्स में एडमिशन NEET-UG के जरिए होता है. इस कोर्स की अवधि 5.5 साल होती है. इसे पूरा करने के बाद छात्र पशु चिकित्सक बनते हैं और सरकारी पशुपालन विभाग, क्लिनिक या रिसर्च सेक्टर में काम कर सकते हैं.

BSc Nursing: हेल्थकेयर की रीढ़

नर्सिंग मेडिकल सिस्टम का अहम हिस्सा है. कई प्रतिष्ठित संस्थान, जिनमें AIIMS भी शामिल है, NEET-UG के आधार पर BSc Nursing में एडमिशन देते हैं. यह 4 साल का कोर्स है. इसके बाद छात्र सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में नर्स, नर्सिंग ऑफिसर या हेल्थकेयर मैनेजर के रूप में नौकरी पा सकते हैं.

NEET के बिना किए जा सकने वाले मेडिकल कोर्स

नर्सिंग (ANM और GNM)

जो छात्र NEET पास नहीं कर पाते, वो ANM या GNM कोर्स करके नर्स बन सकते हैं. ANM 2 साल का डिप्लोमा कोर्स है, जबकि GNM की अवधि 3.5 साल होती है. इन कोर्सों के बाद छात्र अस्पतालों, क्लीनिक और हेल्थ सेंटर्स में नौकरी कर सकते हैं.

B.Sc मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (MLT)

यह कोर्स मेडिकल जांच और लैब टेस्ट से जुड़ा होता है. इसकी अवधि लगभग 3 साल होती है. MLT करने के बाद छात्र पैथोलॉजी लैब, अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर में लैब टेक्नीशियन के रूप में काम कर सकते हैं.

फार्मेसी: दवाओं की दुनिया में करियर

बी.फार्मेसी उन छात्रों के लिए अच्छा विकल्प है जो दवाओं के निर्माण और वितरण में रुचि रखते हैं. इस कोर्स में NEET जरूरी नहीं होता.

कोर्स पूरा करने के बाद छात्र फार्मासिस्ट, ड्रग इंस्पेक्टर, हेल्थ इंस्पेक्टर या फार्मा इंडस्ट्री में नौकरी कर सकते हैं.

फिजियोथेरेपी: बिना NEET मेडिकल करियर

फिजियोथेरेपी में शारीरिक व्यायाम और थेरेपी के जरिए मरीजों का इलाज किया जाता है. बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) एक ग्रेजुएट कोर्स है और इसे NEET के बिना भी किया जा सकता है. स्पोर्ट्स, हॉस्पिटल और रिहैब सेंटर में इसके अच्छे अवसर हैं.

साइकोलॉजी: मन और व्यवहार की पढ़ाई

जो छात्र मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, वो बिना NEET के बीए ऑनर्स साइकोलॉजी कर सकते हैं. यह 3 साल का कोर्स है. इसके बाद छात्र काउंसलिंग, स्कूल, हॉस्पिटल और कॉरपोरेट सेक्टर में काम कर सकते हैं.

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क्या बीच में बंद कर सकते हैं अपनी LIC पॉलिसी? कितना होगा नुकसान…

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जीवन बीमा यानी लाइफ इंश्योरेंस हम सभी अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए खरीदते हैं. लेकिन जीवन में कई बार ऐसे आर्थिक हालात पैदा हो जाते हैं, जब प्रीमियम का बोझ उठाना भारी पड़ने लगता है.

ऐसे में पॉलिसी को बीच में ही बंद करने या सरेंडर करने का ख्याल आना बहुत स्वाभाविक है. अगर आप भी अपनी एलआईसी पॉलिसी को मैच्योरिटी से पहले बंद करने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए. पॉलिसी सरेंडर करने से न सिर्फ आपकी सुरक्षा खत्म होती है, बल्कि आपकी जमा पूंजी का एक बड़ा हिस्सा भी नुकसान में जा सकता है. इस पूरी प्रक्रिया और इसके नफा-नुकसान को समझना बेहद जरूरी है.

क्या होता है पॉलिसी सरेंडर

इंश्योरेंस की दुनिया में जब आप पॉलिसी को उसकी तय अवधि पूरी होने से पहले ही बंद कर देते हैं और बीमा कंपनी से अपना पैसा वापस मांगते हैं, तो इस प्रक्रिया को ‘पॉलिसी सरेंडर’ कहा जाता है. आम तौर पर लोगों को लगता है कि उन्होंने जितना पैसा प्रीमियम के तौर पर भरा है, वह उन्हें वापस मिल जाएगा. लेकिन हकीकत इससे अलग होती है. कंपनी आपको जो रकम वापस करती है, उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहते हैं. यह रकम आपके द्वारा जमा किए गए कुल प्रीमियम से काफी कम हो सकती है. पॉलिसी के दस्तावेजों में सरेंडर चार्ज और अन्य कटौतियों का जिक्र होता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि बुरे वक्त में मदद के लिए जमा किया गया पैसा उम्मीद से कम वापस मिलता है.

सिर्फ पैसे ही नहीं, सुरक्षा कवच का भी होता है अंत

पॉलिसी सरेंडर करने का सबसे बड़ा और गंभीर नुकसान आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से होता है. जैसे ही आप पॉलिसी सरेंडर करते हैं, आपका जीवन बीमा कवरेज तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाता है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर भविष्य में पॉलिसीधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो उसके परिवार या नॉमिनी को कोई भी डेथ बेनिफिट (मृत्यु दावा राशि) नहीं मिलेगा. जिस उद्देश्य से आपने सालों पहले यह पॉलिसी ली थी, वह उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है. टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो स्थिति और भी अलग होती है. टर्म प्लान में कोई सेविंग कंपोनेंट नहीं होता, इसलिए इसे बीच में छोड़ने पर न तो कवरेज बचता है और न ही कोई पैसा वापस मिलता है.

क्यों काटा जाता है आपकी जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा?

अक्सर पॉलिसीधारक यह सवाल पूछते हैं कि उनका पूरा पैसा वापस क्यों नहीं मिलता? इसके पीछे बीमा का गणित काम करता है. पॉलिसी के शुरुआती वर्षों में आप जो प्रीमियम भरते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा एजेंट के कमीशन, पॉलिसी जारी करने के प्रशासनिक खर्च और अंडरराइटिंग चार्जेज में चला जाता है. यही कारण है कि अगर कोई व्यक्ति पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 2 से 4 सालों के भीतर उसे बंद करता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है. एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी में मिलने वाले बोनस और लॉयल्टी एडिशन जैसे फायदे भी पॉलिसी सरेंडर करते ही शून्य हो जाते हैं. यानी लंबे समय तक निवेश बनाए रखने का जो लाभ आपको मिल सकता था, वह एक झटके में खत्म हो जाता है.

पॉलिसी बंद करने के बजाय क्या है बेहतर विकल्प?

अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और प्रीमियम भरना मुश्किल है, तो पॉलिसी बंद करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है. आप अपनी पॉलिसी को ‘पेड-अप’ (Paid-Up) करवा सकते हैं. यह एक तरह का बीच का रास्ता है. इसमें आप आगे का प्रीमियम देना बंद कर देते हैं, लेकिन पॉलिसी बंद नहीं होती. वह कम बीमा राशि के साथ मैच्योरिटी तक चलती रहती है. हालांकि इसमें मिलने वाले फायदे कम हो जाते हैं, लेकिन आपका कवरेज पूरी तरह खत्म नहीं होता. इसके अलावा, बीमा नियामक IRDAI ने हाल ही में नियमों में कुछ बदलाव किए हैं, जिससे कुछ विशेष परिस्थितियों में पॉलिसीधारकों को पहले की तुलना में थोड़ी बेहतर सरेंडर वैल्यू मिल सकती है. इसलिए अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी बीमा कंपनी से ‘सरेंडर वैल्यू’ और ‘पेड-अप वैल्यू’ दोनों का हिसाब जरूर मांग लें.