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नितिन नबीन का BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है. सोमवार 19 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे.

नितिन नबीन के नामांकन में सभी राज्यों से एक-एक प्रस्ताव मंगाया गया है. राज्यों के अलावा नितिन नवीन के प्रस्तावक के रूप में बीजेपी संसदीय दल की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह सरीखे पार्टी के प्रमुख नेता भी होंगे.

दोपहर बाद 2 से 4 बजे के बीच में नितिन नबीन अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इसके बाद शाम 4 से 5 बजे के बीच नामांकन पत्रों की जांच होगी और शाम 5 से 6 बजे के बीच नाम वापस लिए जा सकेंगे. हालांकि नाम का आधिकारिक ऐलान कल यानी कि 20 जनवरी को ही किया जाएगा.

सभी राज्यों के सीएम और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया

नितिन नबीन के नामांकन के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों को आज दोपहर 2 बजे पार्टी मुख्यालय में रहने को कहा गया है. नितिन नबीन के नामांकन में सभी राज्यों से प्रस्ताव मंगाया गया है, जिस से ये संदेश जाए कि सभी राज्यों से नए अध्यक्ष को समर्थन है. इसके साथ साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नेता प्रस्तावक के रूप में रहेंगे.

सभी राज्यों से मांगे गए प्रस्तावक

बीजेपी के संविधान के मुताबिक देखा जाए तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम कम से पांच राज्यों से प्रस्ताव आना जरूरी होता है. जिसमें एक एक सेट में 20 प्रस्तावक होते हैं. लेकिन, बीजेपी ने सभी राज्यों से प्रस्ताव मंगाया है. जिस से सबके समर्थन का एक बड़ा संदेश दिया जा सके.

सभी राज्यों को प्रस्तावकों के लिए एक एक फॉर्म भेजा गया है. जिसमें सभी राज्यों द्वारा हर फॉर्म में 20 प्रस्तावकों के नाम भरने हैं. प्रस्तावकों के हस्ताक्षर करवा कर 18 जनवरी तक वो फॉर्म वापस दिल्ली भेजा गया है. 19 तारीख को नामांकन से पहले सभी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली जाएं.

कल होगा नाम का औपचारिक ऐलान

20 जनवरी को औपचारिक रूप से नितिन नबीन की अध्यक्ष के रूप में घोषणा कर दी जाएगी. 20 जनवरी को इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत सभी वरिष्ठ नेता, सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल होंगे. चुनाव की प्रक्रिया बीजेपी मुख्यालय में पूरी कराई जाएगी. इस मौके पर प्रधानमंत्री संबोधित भी कर सकते हैं.

21 तारीख को नितिन नबीन करेंगे बड़ी बैठक

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद 21 जनवरी को नितिन नबीन सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक भी करेंगे. इस बैठक में सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ साथ प्रदेशों के अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी भी शामिल होंगे. इस मौके पर सभी पदाधिकारियों को नितिन नबीन संबोधित भी करेंगे.

तीन राज्यों में नहीं हुआ बीजेपी में बदलाव

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए जारी की गई मतदाता सूची में 5708 मतदाताओं के नाम है. ये मतदाता सूची 30 राज्यों के संगठन चुनाव के आधार पर तैयार की गई है. जहां राज्य परिषद और केंद्रीय परिषद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हालांकि अभी 30 राज्यों में ही संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई है दिल्ली, हरियाणा, त्रिपुरा ,कर्नाटक जैसे राज्यों में संगठन चुनाव बाकी हैं.

“त्रिपुरा में 48वें कोकबोरोक दिवस पर उत्साह का माहौल, खड़गे ने दी शुभका”

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त्रिपुरा में 48वें कोकबोरोक दिवस के अवसर पर सोमवार को उत्साह और गर्व का माहौल है। यह दिन 19 जनवरी को हर साल मनाया जाता है, जो 1979 में कोकबोरोक भाषा को त्रिपुरा की आधिकारिक भाषा के रूप में पहली मान्यता मिलने की याद दिलाता है।

कोकबोरोक त्रिपुरा के मूल निवासी त्रिपुरी समुदाय की प्राचीन और जीवंत भाषा है, जो हजारों वर्षों से बोली जा रही है। इस अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने त्रिपुरा के लोगों को शुभकामनाएं दी।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट में लिखा, “कोकबोरोक दिवस के अवसर पर त्रिपुरा के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह खास दिन कोकबोरोक भाषा का जश्न मनाता है। यह एक प्राचीन, सांस्कृतिक रूप से जीवंत स्वदेशी भाषा है जो हजारों सालों से बोली जा रही है और यह भारत की विविधता और साझा मूल्यों की समृद्धि को उजागर करती है।”

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल ने एक पोस्ट में लिखा, “हम कोकबोरोक दिवस पर त्रिपुरा में अपने बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। यह दिन 1979 में कोकबोरोक को आधिकारिक भाषा के रूप में मिली शुरुआती मान्यता की याद दिलाता है। यह दिन एकता लाए और हमारी विविध संस्कृतियों और समृद्ध विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा दे।”

त्रिपुरा के जनजातीय कल्याण मंत्री विकास देववर्मा ने लिखा, “कोकबोरोक दिवस के अवसर पर त्रिपुरा के सभी लोगों को प्यार और शुभकामनाएं। यह दिन राज्य में खुशियां और समृद्धि लाए। 48वें कोकबोरोक दिवस के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। कोकबोरोक हमारे लोगों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और पहचान को दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण दिन पर, आइए हम इस कीमती भाषा को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराएं। साथ मिलकर, हम गर्व और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ते हैं।”

“ग्रामीणों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन का ऐलान किया, प्रशासन”

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पिछले करीब चार महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अब 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। यह कदम प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से समस्याओं के समाधान में उदासीनता के खिलाफ ग्रामीणों का सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने उनकी मांगों को लगातार अनदेखा किया। उन्होंने बताया कि सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी के कारण पिछले महीनों से उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की उपेक्षा और लापरवाही के कारण उन्हें अब यह महाआंदोलन शुरू करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे, लेकिन जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन को अभी से कार्रवाई करनी होगी, नहीं तो आंदोलन जिला और राज्य स्तर पर तेज़ और व्यापक रूप ले सकता है।

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ग्रामीणों के स्थानीय संगठन और पंचायत के प्रतिनिधि कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में महिला और युवा वर्ग भी पूरी सक्रियता से भाग लेंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो यह आंदोलन सामाजिक और राजनीतिक रूप से बड़ा संकट बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वे समन्वय और संवाद के जरिए मामले का तुरंत निपटारा करें।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने सभी पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 28 जनवरी के बाद किसी भी तरह की बाधा या लापरवाही को वे सीधे प्रशासन के खिलाफ संघर्ष मानेंगे।

प्रशासन ने अब तक किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जिला अधिकारी ग्रामीण नेताओं से बातचीत के लिए बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनका प्रयास रहेगा कि महाआंदोलन से पहले समाधान निकालने का प्रयास किया जाए।

ग्रामीणों के इस ऐलान से इलाके में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि आंदोलन सफल होता है, तो यह अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी विरोध के स्वर बढ़ाने वाला कदम साबित हो सकता है।

इस प्रकार, चार महीनों से चल रहे विरोध के बाद ग्रामीणों द्वारा अनिश्चितकालीन महाआंदोलन का ऐलान प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के लिए चेतावनी के समान है। अब यह देखने वाली बात होगी कि प्रशासन समय रहते समाधान निकालेगा या आंदोलन को और व्यापक होने दिया जाएगा।

“BMC मेयर की कुर्सी पर संग्राम: शिवसेना ने कर दी ये बड़ी डिमांड, भाजपा”

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महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में बीजेपी और शिवसेना को बड़ी जीत मिली है। बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने मुंबई में BMC चुनाव भी जीत लिया है। हालांकि, BMC का मेयर कौन होगा, यह अभी साफ नहीं है।

इस बीच, शिवसेना ने अपने 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने पार्षदों से मुलाकात की है। मुंबई मेयर के पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, और इसी बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने BMC मेयर का पद एक साल के लिए मांगा है।

शिवसेना की क्या मांग है

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना चाहती है कि मुंबई मेयर का पद पहले साल के लिए उन्हें दिया जाए। शिवसेना का तर्क है कि 23 जनवरी को बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी है। इसलिए, बालासाहेब को श्रद्धांजलि के तौर पर, मुंबई मेयर का पद पहले साल के लिए शिवसेना को दिया जाना चाहिए। पहले, शिवसेना मेयर पद के लिए ढाई साल का कार्यकाल मांग रही थी, लेकिन जब उन्हें लगा कि यह मांग पूरी नहीं होगी, तो उन्होंने यह नई मांग रखी।

गठबंधन की भावना का हवाला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना यह तर्क दे रही है कि उसने केंद्र और राज्य स्तर पर मुश्किल समय में हमेशा बीजेपी का साथ दिया है। इसलिए, क्योंकि इस साल बाल ठाकरे की 100वीं जयंती है, गठबंधन की भावना को देखते हुए, मेयर का पद पहले साल के लिए शिवसेना के पास होना चाहिए, और बाकी चार साल बीजेपी के पास होना चाहिए।

बीजेपी ने भी अपने पार्षदों को बड़ा आदेश दिया

इस बीच, मुंबई बीजेपी ने भी अपने नए चुने गए पार्षदों को एक बड़ा आदेश जारी किया है, जिसमें उन्हें अगले 10 दिनों तक मुंबई नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है। अगर किसी इमरजेंसी के कारण शहर छोड़ना जरूरी है, तो पार्टी के सीनियर नेताओं को पहले से सूचित करना होगा। इस आदेश के पीछे का कारण मेयर का चुनाव है। नए मेयर के चुनाव में लगभग 8-10 दिन लग सकते हैं। बीजेपी के पास 89 पार्षद हैं और शिवसेना के पास 29। मेयर चुनने के लिए 114 पार्षदों की जरूरत होती है। महागठबंधन के पास बहुमत से सिर्फ़ चार वोट ज़्यादा हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर बीजेपी मेयर चुनाव होने तक सभी कॉर्पोरेटरों को मुंबई में ही रखना चाहती है।

बिहार की राजनीति में नया सियासी समीकरण! कांग्रेस के छह विधायक जदयू

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इस बार चर्चा के केंद्र में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) है। राजनीतिक गलियारों में जोर-शोर से यह चर्चा चल रही है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक जल्द ही जदयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो यह राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर माना जाएगा। हालांकि इस संभावित दल-बदल की कहानी नई नहीं है, बल्कि इसके संकेत चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही मिलने लगे थे।

चुनाव नतीजों के बाद ही कांग्रेस विधायकों को जदयू में शामिल कराने की कवायद शुरू हो गई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि कांग्रेस के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है और विधायकों का झुकाव सत्ताधारी दल की ओर बढ़ रहा है। लेकिन तब यह पूरी कवायद महज चर्चाओं तक ही सीमित रह गई थी। वजह यह थी कि कांग्रेस के कुछ विधायक उस समय पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित नजर आ रहे थे और खुलकर किसी तरह की बगावत सामने नहीं आई थी।

अब एक बार फिर कांग्रेस विधायकों के टूटने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार मामला सिर्फ कयासों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर मजबूत राजनीतिक बैटिंग कर ली गई है। बताया जा रहा है कि संभावित दल-बदल को लेकर रणनीति काफी हद तक तैयार है और कांग्रेस विधायक भी इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट बताए जा रहे हैं। सत्ता में भागीदारी, राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों को लेकर उन्हें आश्वासन दिए गए हैं।

हालांकि इसी बीच इस पूरे दल-बदल कार्यक्रम में एक गजब का ट्विस्ट आ गया है। यह ट्विस्ट क्या है, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह अड़चन कानूनी, संगठनात्मक या शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हो सकती है। दल-बदल कानून, पार्टी की आंतरिक सहमति या गठबंधन की मजबूरियां इस प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस विधायकों का एकसाथ जदयू में शामिल होना आसान नहीं होगा। इसके लिए न केवल विधायकों की सहमति जरूरी है, बल्कि कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक संतुलन को भी साधना होगा। यदि प्रक्रिया में थोड़ी भी चूक होती है, तो मामला उलटा भी पड़ सकता है।

वहीं कांग्रेस खेमे में भी इस संभावित टूट को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। पार्टी नेतृत्व विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है और अंदरखाने संवाद तेज कर दिया गया है। दूसरी ओर, जदयू खेमे में फिलहाल सतर्कता बरती जा रही है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचा जा रहा है।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। कांग्रेस के छह विधायकों का भविष्य, जदयू की रणनीति और इस पूरे घटनाक्रम में आया “ट्विस्ट” आने वाले दिनों में राज्य की सियासी दिशा तय कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह चर्चा हकीकत में बदलती है या फिर एक बार फिर राजनीतिक अफवाह बनकर रह जाती है।

ट्रंप की नए टैरिफ धमकी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल

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हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। कीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदना शुरू कर दिया।

सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया।

वहीं, खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपए यानी 1.71 प्रतिशत बढ़कर 1,44,955 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपए यानी 4.54 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,00,824 रुपए प्रति किलो हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में तेज उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और बाद में 4,670 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ। इस दौरान सोने ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी छुआ।

सोने और चांदी में तेजी तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाएगा, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने अमेरिका को मनाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बताया कि दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर सवाल और लगातार चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों को सहारा दे रहे हैं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती की उम्मीद भी सोने और चांदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए है, खासकर 2025 में अच्छे प्रदर्शन के बाद।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह डॉलर की कीमतों में अस्थिरता और अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर आने वाला फैसला है।

विश्लेषकों ने बताया कि सोने को 1,41,650 से 1,40,310 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,44,150 से 1,45,670 रुपए के बीच इसमें रेजिस्टेंस आ सकती है। चांदी के लिए 2,85,810 से 2,82,170 रुपए का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,94,810 से 2,96,470 रुपए पर रेजिस्टेंस है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स चांदी भी मजबूत बनी हुई है और 93 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। हाल ही में यह 94.30 डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती मांग के चलते चांदी की कीमतों को लंबे समय तक मजबूती मिल सकती है।

ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में कुछ निवेशक मुनाफा वसूली कर सकते हैं, जिससे चांदी की कीमत 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक नीचे आ सकती है। इसके बाद कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

वर्ष 2030 तक ‘अपर मिडिल इनकम’ वाले देशों में शामिल हो सकता है भारत

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भारत अगले चार वर्षों यानी 2030 तक प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) में 4,000 डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। इसके साथ ही भारत ‘अपर मिडिल इनकम कंट्री’ की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां अभी चीन और इंडोनेशिया जैसे देश मौजूद हैं।

सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को आजादी के बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में करीब 60 साल लगे, जबकि देश ने सिर्फ 7 साल में 2 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा 2014 में छू लिया।

इसके बाद भारत ने 2021 में 3 ट्रिलियन डॉलर और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का स्तर हासिल किया। यानी समय के साथ भारत की आर्थिक रफ्तार और तेज होती गई है।

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने बताया कि भारत अगले दो वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2009 में आजादी के 62 साल बाद पहली बार 1,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल की थी। इसके बाद 2019 में 2,000 डॉलर और 2026 में 3,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुंचने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहतर रही है। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई है और वह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।

डॉ. घोष ने कहा कि यदि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत उच्च आय वाला देश बनना है, तो प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) को हर साल औसतन 7.5 प्रतिशत की सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि पिछले 23 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीएनआई करीब 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जिससे यह लक्ष्य संभव लगता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उच्च आय वाले देश बनने की सीमा (थ्रेशहोल्ड) बढ़ सकती है। यदि यह सीमा 13,936 डॉलर से बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय को और तेज, यानी करीब 8.9 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ाना होगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर जनसंख्या वृद्धि और महंगाई को ध्यान में रखा जाए, तो अगले 23 वर्षों तक भारत को डॉलर के हिसाब से अपनी नॉमिनल जीडीपी करीब 11.5 प्रतिशत की दर से बढ़ानी होगी।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि भारत को आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी होगी, ताकि तेजी से विकास हो सके और देश उच्च आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंच सके।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए अपर मिडिल इनकम देश बनना पूरी तरह संभव है, जहां प्रति व्यक्ति आय की सीमा करीब 4,500 डॉलर होती है। इसके लिए जरूरी 11.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि पहले भी हासिल की जा चुकी है, खासकर कोरोना महामारी से पहले के वर्षों में।

दिल्ली में आईआईसीडीईएम 2026 की मेजबानी करेगा चुनाव आयोग

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भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) 21 जनवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारत अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईआईसीडीईएम) 2026 की मेजबानी करने जा रहा है।

इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईसीडीईएम) द्वारा आयोजित 3-दिवसीय कॉन्फ्रेंस 23 जनवरी तक चलेगी।

चुनाव आयोग ने सोमवार को एक बयान में कहा, “आईआईसीडीईएम 2026 लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अपनी तरह का सबसे बड़ा ग्लोबल कॉन्फ्रेंस बनने जा रहा है।”

बयान में आगे बताया गया कि दुनिया भर के 70 से ज्यादा देशों के लगभग 100 इंटरनेशनल डेलीगेट्स इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। साथ ही, इंटरनेशनल संगठनों, भारत में विदेशी मिशनों और चुनावी क्षेत्र के एकेडमिक और प्रैक्टिसिंग एक्सपर्ट्स के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मिलकर 21 जनवरी को उद्घाटन सत्र में प्रतिनिधियों का स्वागत करेंगे और कार्यवाही की शुरुआत करेंगे।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) के सामान्य और पूर्ण सत्र शामिल हैं, जिसमें उद्घाटन सत्र, ईएमबी नेताओं का पूर्ण सत्र, ईएमबी कार्यकारी समूह की बैठकें और वैश्विक चुनावी मुद्दों, मॉडल अंतर्राष्ट्रीय चुनावी मानकों और चुनावी प्रक्रियाओं में नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर केंद्रित विषयगत सत्र शामिल हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ के नेतृत्व में और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एकेडमिक एक्सपर्ट्स के सहयोग से कुल 36 थीमेटिक ग्रुप कॉन्फ्रेंस के दौरान विस्तार से चर्चा करेंगे।

इन चर्चाओं में प्रमुख एकेडमिक संस्थानों की भी भागीदारी होगी, जिनमें 4 आईआईटी, 6 आईआईएम, 12 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) और आईआईएमसी शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने कहा कि वह दुनिया भर में ईएमबी के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ईएमबी के साथ 40 से ज्यादा द्विपक्षीय बैठकें करेगा।

आयोग औपचारिक रूप से ईसीनेट भी लॉन्च करेगा, जो चुनाव से जुड़ी सभी जानकारी और सेवाओं के लिए ईसीआई का वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

इन कार्यक्रमों के साथ-साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत में चुनाव कराने की विशालता और जटिलता को दिखाया जाएगा, साथ ही चुनाव के दो मुख्य स्तंभों, मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने, को मजबूत करने के लिए ईसीआई द्वारा हाल ही में की गई पहलों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

ईसीआई ने बताया कि आईआईसीडीईएम के पहले दिन ‘इंडिया डिसाइड्स’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी दिखाई जाएगी, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े चुनाव, लोकसभा 2024 चुनावों को आयोजित करने की प्रक्रिया को दिखाया जाएगा।

दावोस 2026: वैश्विक समस्याओं पर चर्चा और भविष्य की दिशा तय करने जुटे

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दुनियाभर के दिग्गज लीडर्स स्विट्जरलैंड के दावोस में इकट्ठा हो रहे हैं, जहां सरकार, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग मिलकर वैश्विक समस्याओं पर चर्चा करेंगे।

इस बैठक का उद्देश्य दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान निकालना और आने वाले समय के लिए प्राथमिकताएं तय करना है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के अनुसार, यह बैठक सामूहिक और मजबूत कदम उठाने की जरूरत को देखते हुए बेहद अहम मानी जा रही है।

डब्ल्यूईएफ के मुताबिक, 19 से 23 जनवरी तक चलने वाला यह आयोजन पांच बड़ी वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बातचीत और सहयोग जरूरी माना गया है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी होगी।

इन समस्याओं पर चर्चा करते समय आर्थिक विकास, मजबूती और नवाचार को खास महत्व दिया जाएगा। यही तीन बातें यह तय करेंगी कि दुनिया के नेता आज की जटिल परिस्थितियों से कैसे निपटें और भविष्य के अवसरों को कैसे अपनाएं।

इस बीच, भारत भी दावोस में होने वाली इस सालाना बैठक में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री, अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री और देश की बड़ी कंपनियों के 100 से अधिक सीईओ शामिल हो रहे हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अपनी पहचान बनाए हुए है और राजनीतिक व कारोबारी नेता विदेशी निवेश आकर्षित करने पर जोर देंगे।

दावोस में होने वाली आर्थिक चर्चाओं में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों में रेल और सूचना एवं प्रसारण मंत्र अश्विनी वैष्णव, कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी और नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू शामिल हैं।

राज्यों में निवेश आकर्षित करने के लिए दावोस पहुंचे मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के सीएम ए. रेवंत रेड्डी, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा शामिल हैं।

इस साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की शुरुआत ‘स्पिरिट ऑफ डायलॉग’ यानी संवाद की भावना विषय के साथ हो रही है। यह आयोजन अमेरिका के टैरिफ से जुड़ी हलचल और बढ़ती वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच हो रहा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े बड़े दिग्गज जैसे जेन्सेन हुआंग, सत्य नडेला, डेमिस हसाबिस और डारियो अमोदेई भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे।

अगले 24 घंटे में क्या-कुछ होगा बड़ा ? जानिए नितिन नबीन के नामांकन…

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में अपना नॉमिनेशन पेपर दाखिल करेंगे।

बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। सूत्रों का दावा है कि नितिन नवीन निर्विरोध चुने जाएंगे और कल पद की शपथ लेंगे। सूत्रों ने बताया कि नए पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में काफी हलचल है। बीजेपी शासित राज्यों के लगभग सभी मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं और नॉमिनेशन के दौरान मौजूद रह सकते हैं।

20 जनवरी को आधिकारिक घोषणा

बीजेपी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नवीन सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच अध्यक्ष पद के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर दाखिल करेंगे। इसके बाद, शाम 4 बजे से 5 बजे तक नॉमिनेशन पेपर की जांच की जाएगी, और शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच नॉमिनेशन वापस लेने का समय होगा। अगर ज़रूरत पड़ी तो 20 जनवरी को वोटिंग होगी, लेकिन फिलहाल इस बात की पूरी संभावना है कि नितिन नवीन निर्विरोध चुने जाएंगे। हालांकि, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा 20 जनवरी को की जाएगी। नॉमिनेशन प्रक्रिया के बाद नए बीजेपी अध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होता है। उन्होंने कहा कि सोमवार को नॉमिनेशन दाखिल किए जाएंगे और अगले दिन नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी।

पीएम मोदी और अमित शाह प्रस्तावक होंगे

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन तीन अलग-अलग सेट में अपना नॉमिनेशन पेपर दाखिल कर सकते हैं। नॉमिनेशन पेपर के एक सेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा प्रस्तावक होंगे। दूसरे सेट में 20 से ज़्यादा चुने हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्षों के नाम शामिल हो सकते हैं। तीसरे सेट में बीजेपी राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का समर्थन होने की बात कही जा रही है।

दिल्ली में टॉप नेताओं का जमावड़ा

नए पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में काफी हलचल है। बीजेपी शासित राज्यों के लगभग सभी मुख्यमंत्री, राज्य इकाई के अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आ रहे हैं। बीजेपी के एक सूत्र ने PTI को बताया कि इस मौके पर हमारे लगभग सभी मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, बीजेपी की सभी राज्य इकाइयों के अध्यक्ष और पार्टी के अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद रहेंगे।

बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज करता है, जिसमें पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, और इस प्रक्रिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर करते हैं। बीजेपी के संविधान के अनुसार, किसी राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कोई भी 20 सदस्य मिलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं जो चार कार्यकाल से पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हो और जिसकी सदस्यता के पंद्रह साल पूरे हो गए हों। हालांकि, ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों से आना चाहिए जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पहले ही हो चुके हों।

कल शपथ ग्रहण समारोह

सूत्रों का कहना है कि नितिन नवीन निर्विरोध बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाएंगे और कल सुबह 11:30 बजे PM मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गडकरी, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य अध्यक्षों और संगठन सचिवों की मौजूदगी में पदभार संभालेंगे।

नितिन नवीन कौन हैं?

नितिन नवीन बिहार से पांच बार के विधायक हैं और पार्टी के भीतर एक मजबूत आयोजक के रूप में जाने जाते हैं। वह 2010 से लगातार पांच बार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। वह पहली बार 2006 में पटना पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्हें हाल ही में बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अब, वह पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। उनके नेतृत्व में, पार्टी आने वाली चुनौतियों का सामना करने और अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए एक नया रोडमैप तैयार करेगी।