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CG: उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे…

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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग हेतु हुए समझौते’

कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी’

उज्बेकिस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी आगामी शैक्षणिक वर्ष से कृषि के क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान हेतु छत्तीसगढ़ आएंगे और छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु उज्बेकिस्तान जाएंगे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर तथा उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए हैं।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधि मंडल के विगत दिनों उज्बेकिस्तान प्रवास के दौरान ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी, समरकंद स्टेट वेटेरिनरी, तेरमेज़ इंस्टीट्यूट तथा देनोव इंस्टीट्यूट के बीच शिक्षा, अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता विकास आदि क्षेत्रों में सहयोग हेतु अनेक समझौते हस्ताक्षरित किए गए। इन समझौतों से छात्र और संकाय विनिमय कार्यक्रमों संयुक्त अनुसंधान पहलों, शैक्षणिक गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैश्विक भागीदारी बढ़ेगी।

कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जिनमें चांवल अनुसंधान, औषधीय फसलों की खेती, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता प्रमुख हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उज्बेकिस्तान में कृषि आधारित उद्योगों के विकास में भारतीय किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु काफी रूचि दिखाई। डॉ. चंदेल ने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान जाते हैं उसी प्रकार भविष्य में उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा प्राप्त करने लिए छत्तीसगढ़ आएंगे।

उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार के परिप्रेक्ष्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में 28 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर गया था। यह भ्रमण भारतीय एवं उज्बेक संस्थानों के बीच शैक्षणिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा कृषि विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, संरक्षित खेती, कृषि उद्यमिता एवं प्रमुख फसलों की मूल्य श्रृंखला विकास में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने हेतु किया गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं शासकीय प्रतिनिधियों से भेंट कर संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसंधान सहयोग एवं संस्थागत साझेदारी के अवसरों की पहचान की। प्रतिनिधि मंडल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. हुलास पाठक भी शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था साथ ही भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी का निर्माण करना था।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उजबेकिस्तान के प्रमुख विश्वविद्यालयों अनुसंधान संस्थानों और नीति संगठनों के साथ जुड़कर कृषि विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी कृषि उद्यमिता संरक्षित खेती और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों का पता लगाया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पाँच प्रमुख सस्थानो, तेरमेज़ पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट, डेनोव इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एक पेडागोजी, ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी और समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में प्रत्यायन और रेटिंग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के साथ भी एक विस्तृत बैठक की। इस यात्रा ने उज्बेकिस्तान की तेजी से विस्तार कर रही उच्च शिक्षा प्रणाली के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की और कौशल विकास, संकाय प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण समाधानों में सहयोग के नए रास्ते खोले।

तेरमेज पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट में एक एमओयू को औपचारिक रूप दिया गया और शैक्षणिक सहयोग तथा पाठयक्रम विकास पर चर्चा हुई। डेनोव इंस्टीट््यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडागोजी में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उच्च्य स्तरीय बातचीत में भाग लिया जिसमें उद्यमिता शिक्षा जैव प्रौद्योगिकी और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया गया। उच्च शिक्षा में उनके शैक्षणिक योगदान और नेतृत्व के सम्मान में डॉ गिरीश चंदेल और प्रो हुलास पाठक को उनकी यात्रा के दौरान विजिटिंग प्रोफेसरशिप सम्मान से सम्मानित किया गया। ताशकंद स्टेट एथेरियन यूनिवर्सिटी में कृषि जैव प्रौद्योगिकी खारा प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास में सहयोग पर बर्चा हुई, जिसके बाद एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी के दौरे से उन्नत स्मार्ट प्रयोगशाला सुविधाओं और किसान-समूह-आधारित मूल्य श्रृंखला मॉडलों विशेष रूप से कपास और डेयरी क्षेत्रों में देखने का अवसर मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के इन अभिनव दृष्टिकोणों की सराहना की। समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रतिनिधिमंडल ने चांवल अनुसंधान औषधीय पौधों और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान प्रदान के अवसरों पर चर्चा की। इस दौरे में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया जिसमें इनक्यूबेशन के अवसर कृषि आधारित उद्योगों का विकास और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना शामिल है।

हल्दी, अदरक, लहसुन, लेवेंडर और औषधीय पौधों जैसी फसलों के लिए मूल्य श्रृंखला विकास पर विशेष चर्चा हुई साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त ब्रांडिंग पहलों की संभावनाओं पर भी बात हुई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में भारतीय दूतावास के साथ भी बातचीत की जहाँ राजदूत सुश्री स्मिता पंत के साथ की गई चर्चा कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। प्रतिनिधि मंडल ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में केसर लैवेंडर, हींग, बेरी और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों की पहचान की। इस दौरे ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के लिए एक मजबूत नींव रखी है, जो सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित, धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम…

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित कर दिया गया। यह विधेयक मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह विधेयक सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और यह कानून उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बदलते समय के साथ कानूनों का अद्यतन आवश्यक हो जाता है। वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं। ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके।

विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी।

इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा। ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं। जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है। इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है। भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है। इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है।

इस विधेयक में पीड़ितों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, धोखे या लालच के कारण किया गया पाया जाता है, तो उसे पीड़ित मानते हुए न्यायालय द्वारा क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलेगा, बल्कि ऐसे कृत्यों पर प्रभावी रोक भी लगेगी। जांच प्रक्रिया को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसमें केवल सक्षम अधिकारी ही मामलों की जांच करेंगे और न्यायालयों को इस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अधिसूचित किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा, विवादों को कम करेगा और राज्य में एक संतुलित एवं शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है।

इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा। ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है। इसका भी प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा। मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा तथा विवादों को कम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से अनावश्यक तनाव और संघर्ष की स्थिति से बचा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक पारंपरिक सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करेगा।

CG: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 से अवैध धर्मांतरण पर सख्त नियंत्रण के साथ ही आस्था और सामाजिक समरसता को मिलेगा बल…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए माँ दुर्गा से प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव अथवा भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास कायम रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पूर्व में ही प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा, जिसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। नए प्रावधानों में कठोर दंडात्मक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई संभव होगी।

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध जनजागरण का जो अभियान चलाया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि समाज की जागरूकता और सहभागिता से ही इस दिशा में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूती देगा तथा छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

Chaitra Navratri 2026: इन 10 देवी मंदिरों में विज्ञान भी है फेल! यहां आज भी दिखते हैं चमत्कार…

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Chaitra Navratri 2026: उत्तर प्रदेश की धरती को शुरू से ही आस्था और विश्वास का केंद्र माना गया है। यहाँ के कण-कण में भक्ति बसती है। बात जब शक्ति की देवी यानी माँ दुर्गा के स्वरूपों की आती है, तो यूपी के पास एक बहुत ही समृद्ध आध्यात्मिक विरासत है।

यहाँ कई ऐसे प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कहानियाँ और चमत्कार आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। चाहे आप शांति की तलाश में हों या फिर इतिहास और संस्कृति को करीब से जानना चाहते हों, ये मंदिर आपके लिए एक अलग ही अनुभव लेकर आते हैं।

आज के इस दौर में, जहाँ भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद को अकेला महसूस करते हैं, ये धार्मिक स्थल हमें एक नई ऊर्जा और भरोसा देते हैं। आइए जानते हैं

उत्तर प्रदेश के उन 10 खास देवी मंदिरों के बारे में, जिनकी महिमा आज भी भक्तों को अपनी ओर खींच लाती है।

  1. माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल (मिर्जापुर)

मिर्जापुर जिले में गंगा किनारे स्थित माँ विंध्यवासिनी का मंदिर सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के बाद इसी स्थान को अपने निवास के रूप में चुना था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ विंध्यवासिनी का जन्म यशोदा के गर्भ से हुआ था, और जब कंस ने उन्हें मारने की कोशिश की, तो वे उनके हाथों से छूटकर दिव्य रूप में प्रकट हो गईं। यहाँ माँ को ‘कजरी देवी’ के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र के समय यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़ते हैं। वर्तमान में योगी सरकार यहाँ ‘विंध्य कॉरिडोर’ बनवा रही है, जिससे इस पवित्र स्थल की सुंदरता और भी बढ़ जाएगी।

  1. अलोपी देवी मंदिर, प्रयागराज

प्रयागराज के संगम तट के पास स्थित अलोपी देवी मंदिर दुनिया के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक है। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है। भक्त यहाँ एक खाली ‘डोली’ या पालकी की पूजा करते हैं。

नाम ‘अलोपी’ का अर्थ है ‘गायब हो जाना’। मान्यता है कि यहाँ देवी सती के हाथ की उंगलियां (हस्तंगुल) गिरी थीं और वे यहीं से अदृश्य हो गई थीं। यह स्थान कर्म और सृजन का प्रतीक माना जाता है। यहाँ की रहस्यमयी ऊर्जा और शांति भक्तों को एक अनोखा सुकून देती है।

  1. विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी

काशी की गलियों में मणिकर्णिका घाट के पास स्थित विशालाक्षी शक्तिपीठ बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पुराणों के अनुसार, यहाँ माता सती के कान के कुंडल गिरे थे। ‘विशालाक्षी’ का अर्थ है ‘बड़ी आंखों वाली’।

इस मंदिर का संबंध सीधे आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति से जोड़ा जाता है। यह स्थान जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता की याद दिलाता है। दक्षिण भारतीय भक्तों, विशेषकर तमिलनाडु के लोगों की इस मंदिर में बहुत गहरी आस्था है और इसका निर्माण भी नट्टुकोट्टई नगरथार समुदाय द्वारा कराया गया था।

  1. सिद्धपीठ माँ शाकुंभरी देवी, सहारनपुर

सहारनपुर की शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित माँ शाकुंभरी देवी का मंदिर बहुत ही प्राचीन और सिद्ध माना जाता है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

कहा जाता है कि यहाँ माता ने अपनी तपस्या से शाक (सब्जियां) उत्पन्न की थीं, जिससे दुनिया की भूख मिटी, इसीलिए उनका नाम शाकुंभरी पड़ा। नवरात्र और दिवाली के समय यहाँ का माहौल देखने लायक होता है। हाल के समय में यहाँ युवाओं की भागीदारी बहुत बढ़ गई है, जो यह दिखाता है कि नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ना चाहती है।

  1. चंद्रिका देवी मंदिर, लखनऊ

लखनऊ के पास गोमती नदी के शांत तट पर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर लगभग 300 साल पुराना है। इसका उल्लेख स्कंद और कूर्म पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में भी मिलता है।

एक प्राचीन कथा के अनुसार, लक्ष्मण जी के बड़े पुत्र ने गोमती नदी के पास घने जंगल में फंसने पर माँ से रक्षा की प्रार्थना की थी और देवी ने प्रकट होकर उन्हें बचाया था। एक अन्य मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में बरबरीक (घटोत्कच के पुत्र) ने यहाँ तीन साल तक तपस्या की थी। यहाँ स्थित ‘सुधन्वा कुंड’ के बीच में भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति स्थापित है, जो बहुत आकर्षक लगती है।

  1. ज्वाला देवी मंदिर, सोनभद्र

सोनभद्र जिले के शक्तिनगर में स्थित ज्वाला देवी मंदिर लगभग 1000 साल पुराना माना जाता है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ देवी सती की जिह्वा (जीभ) का अगला हिस्सा गिरा था।

यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर माँ को सोने या चांदी की जीभ चढ़ाते हैं। मंदिर की पूजा-अर्चना पिछले 12 पीढ़ियों से एक ही पुजारियों का परिवार कर रहा है, जो इसकी प्राचीन परंपरा को दर्शाता है। पास ही ज्वालामुखी गुफा भी स्थित है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

  1. ललिता देवी शक्तिपीठ, नैमिषारण्य (सीतापुर)

नैमिषारण्य को ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है और यहाँ स्थित ललिता देवी मंदिर में माता सती का हृदय गिरा था। ललिता देवी को नैमिषारण्य की रक्षक देवी माना जाता है।

कहा जाता है कि जब राक्षसों ने ऋषियों को परेशान करना शुरू किया, तब माँ ललिता ने प्रकट होकर उनका अंत किया था। मंदिर के पास ही ‘अक्षय वट’ नाम का एक बरगद का पेड़ है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसकी पत्तियां कभी नहीं गिरतीं और यह शाश्वत ज्ञान का प्रतीक है। यहाँ की पूजा से मानसिक शांति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

  1. कात्यायनी शक्तिपीठ, मथुरा

मथुरा-वृंदावन के पास स्थित कात्यायनी शक्तिपीठ वह स्थान है जहाँ माता सती के बाल (केश) गिरे थे। केश शक्ति और जीवन शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं।

यहाँ माँ अपने योद्धा स्वरूप में पूजी जाती हैं। यह मंदिर उन लोगों के लिए बहुत खास है जो अपने रिश्तों में सुधार या जीवन में साहस और स्पष्टता चाहते हैं। कृष्ण की भूमि पर स्थित यह मंदिर भक्ति और शक्ति का एक सुंदर संगम पेश करता है।

  1. शिवानी देवी मंदिर, चित्रकूट

रामगिरी हिल्स, चित्रकूट में स्थित यह मंदिर उस स्थान पर बना है जहाँ माता सती का एक अंग (वक्ष) गिरा था। यहाँ देवी को ‘शिवानी देवी’ के रूप में पूजा जाता है।

बाकी कई मंदिरों के मुकाबले यहाँ की ऊर्जा बहुत शांत और ममतामयी महसूस होती है। लोग यहाँ अपनी भावनाओं को संतुलित करने और मानसिक शांति के लिए आते हैं। यहाँ का प्राकृतिक परिवेश और देवी का वात्सल्य रूप भक्तों को तनाव से दूर ले जाता है।

  1. पंचसागर शक्तिपीठ, वाराणसी

वाराणसी में ही एक और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है जिसे पंचसागर कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ माता सती के नीचे के दांत गिरे थे। दांत शक्ति और उत्तरजीविता (survivability) का प्रतीक हैं।

हालाँकि इसके सटीक स्थान को लेकर विद्वानों के बीच कुछ अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन शास्त्रों में इसकी बहुत महत्ता बताई गई है। यह शक्तिपीठ हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड की शक्ति केवल सृजन ही नहीं करती, बल्कि जीवन को बनाए रखने का आधार भी वही है।

भक्तों के लिए कुछ जरूरी बातें

अगर आप इन मंदिरों की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना आपके सफर को आसान बना देगा।

यात्रा का सही समय:

वैसे तो साल भर यहाँ भक्त आते हैं, लेकिन नवरात्र (चैत्र और अश्विन) के दौरान यहाँ का अनुभव एकदम अलग होता है। सर्दियों का मौसम (अक्टूबर से मार्च) घूमने के लिए सबसे आरामदायक रहता है।

कैसे पहुँचें:

ये सभी मंदिर सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, लखनऊ एयरपोर्ट से आप सीतापुर (नैमिषारण्य) आसानी से पहुँच सकते हैं। वाराणसी और प्रयागराज के लिए सीधी फ्लाइट्स और ट्रेनें उपलब्ध हैं।

स्थानीय परंपराएं:

हर मंदिर के अपने रीति-रिवाज हैं। जैसे अलोपी देवी में मूर्ति की जगह पालकी की पूजा होती है। इन परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश के ये मंदिर केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये लाखों लोगों की आस्था का सहारा हैं। यहाँ की हवा में एक ऐसी शक्ति है जो आपको अपनी ओर खींचती है। चाहे आप धार्मिक हों या न हों, इन स्थलों का इतिहास और यहाँ का वातावरण आपको एक बार जरूर प्रभावित करेगा।

चांदी और शेयर बाजार में तगड़ा झटका: सेंसेक्स में 2170 अंक की गिरावट, निवेशकों में हड़कंप…

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शेयर बाज़ार एक बड़े क्रैश की चपेट में है। Sensex और Nifty बाज़ार खुलने के समय से ही अस्त-व्यस्त नज़र आए, और जैसे-जैसे ट्रेडिंग की गतिविधियाँ तेज़ हुईं, गिरावट और भी बढ़ गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30-शेयर वाला Sensex 2,100 से ज़्यादा अंकों की भारी गिरावट के साथ लुढ़क गया है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty इंडेक्स 600 से ज़्यादा अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है।

यह तबाही सिर्फ़ शेयर बाज़ार तक ही सीमित नहीं है; सोने और चाँदी की कीमतें भी धड़ाम से गिर गई हैं। MCX चाँदी की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट देखी गई। दूसरी ओर, तेल की कीमतों में उछाल ने भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में निवेशकों के मूड को खराब कर दिया है।

Sensex और Nifty शुरू से ही अस्त-व्यस्त

जैसे ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर $114 प्रति बैरल पर पहुँच गईं-जिससे जापान से लेकर कोरिया तक के एशियाई शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल मच गई-Sensex और Nifty बाज़ार खुलने के समय से ही बिखरे हुए नज़र आए, और इन नकारात्मक वैश्विक संकेतों के दबाव में आ गए। जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी, गिरावट और भी तेज़ हो गई।

गुरुवार को खुलने पर, BSE Sensex अपने पिछले बंद भाव 76,704 से फिसलकर 74,750 पर खुला। ट्रेडिंग के आखिरी घंटे के दौरान-लगभग 2:30 PM पर-यह 2,170 अंकों की भारी गिरावट के साथ 74,510 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। NSE Nifty का हाल भी कुछ बेहतर नहीं था; बुधवार के बंद भाव 23,777 की तुलना में, यह काफ़ी नीचे 23,197 पर खुला। यह रिपोर्ट लिखे जाने के समय, यह 50-शेयर वाला इंडेक्स 690 अंकों की गिरावट के साथ 23,087 पर ट्रेड कर रहा था।

ये शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गए

शेयर बाज़ार में आई इस “सुनामी” के बीच, बड़ी कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह ढहते हुए नज़र आए। Bajaj Finance (5.50%), Eternal (5.40%), M&M (4.90%), HDFC Bank (4.61%), LT (4.60%), और IndiGo (4.40%) के शेयर इन संबंधित मार्जिन के साथ धड़ाम से गिर गए। इसके अलावा, रिलायंस, कोटक, SBI, टाइटन, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, मारुति और इंफोसिस जैसी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।

सिर्फ़ शेयर बाज़ार ही नहीं-सोना और चाँदी भी धड़ाम

वैश्विक तनाव के बीच, जहाँ शेयर बाज़ार में भारी गिरावट आई, वहीं कीमती धातुएँ-सोना और चाँदी-जो आमतौर पर ऐसी स्थितियों में तेज़ी दिखाती हैं, विपरीत दिशा में चलती हुई दिखीं और उनमें भी भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ दिनों से सोने और चाँदी की कीमतों में गिरावट का रुख साफ़ नज़र आ रहा है, और गुरुवार को जब MCX पर ट्रेडिंग शुरू हुई, तो कीमतें तेज़ी से नीचे गिर गईं।

MCX पर, चाँदी की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट देखी गई, जबकि सोना लगभग 2.50 प्रतिशत नीचे गिर गया। दोपहर लगभग 12:00 बजे, चाँदी की कीमतें तेज़ी से नीचे गिरने लगीं; 1 किलोग्राम चाँदी का कॉन्ट्रैक्ट-जो 5 मई को समाप्त होने वाला था-₹12,000 तक सस्ता हो गया, जिससे इसकी कीमत गिरकर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम हो गई। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम लगभग ₹4,500 की गिरावट आई, और यह ₹1.50 लाख के स्तर से नीचे आ गया।

क्या आपका घर भी 20 साल पुराना है? टैक्स में मिल सकती है बड़ी राहत, जानें आप Eligible हैं या नहीं?

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Old House Tax Relief: प्रयागराज वालों के लिए नए वित्तीय वर्ष (April) की शुरुआत एक बहुत बड़ी खुशखबरी के साथ होने जा रही है। अगर आपका घर 20 साल या उससे ज्यादा पुराना है, तो अब आपको हाउस टैक्स (गृहकर) की भारी-भरकम रकम से आजादी मिलने वाली है।

नगर निगम ने फैसला किया है कि ऐसे पुराने भवनों पर 40 प्रतिशत की सीधी छूट दी जाएगी। संगम नगरी में पिछले काफी समय से इसकी मांग की जा रही थी, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है। शहर के 100 वार्डों में करीब 4.12 लाख मकान हैं, जिनमें से 50 से 60 हजार मकान मालिकों को इसका फायदा मिलने वाला है। आइए जानते हैं आपको इसका फायदा कैसे और कब तक मिलेगा…

नगर निगम का ‘स्मार्ट’ प्लान

अक्सर सरकारी छूट पाने के लिए लोगों को फाइलों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन इस बार नगर निगम ने मामला एकदम सिंपल रखा है। आपको छूट पाने के लिए किसी जोनल अधिकारी के पास जाने की जरूरत नहीं है और न ही कोई नए दस्तावेज (Documents) जमा करने होंगे। नगर निगम के पास मौजूद पुराने दस्तावेजों के आधार पर ही आपको यह राहत दे दी जाएगी। 15 से 20 अप्रैल के बीच नगर निगम की टीमें डेटा जमा करना शुरू कर देंगी। यानी आपको घर बैठे-बैठे ही टैक्स में छूट का तोहफा मिल जाएगा।

सर्वे के बाद ही कटेगा टैक्स का बिल

छूट देने से पहले नगर निगम की एक स्पेशल टीम आपके घर का ‘मौका मुआयना’ करने आएगी। टीम यह देखेगी कि मकान वास्तव में कितना पुराना है और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है। सर्वे के बाद टीम अपनी रिपोर्ट लगाएगी और फिर उसी के हिसाब से आपके हाउस टैक्स का नया और कम बिल तैयार किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 3 से 4 महीने का समय लग सकता है।

किसे मिलेगा पूरा फायदा और किसे नहीं?

टैक्स में छूट को लेकर एक जरूरी नियम है जिसे समझना बहुत जरूरी है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संजय ममगई के अनुसार, अगर आपका घर 20 साल पुराना है, तो उस पूरे हिस्से पर 40% की छूट मिलेगी। मान लीजिए आपने 20 साल पहले नीचे की मंजिल बनाई और 10 साल पहले उसके ऊपर एक और मंजिल बना ली, तो आपको सिर्फ नीचे वाली (पुरानी) मंजिल पर ही छूट मिलेगी। नई मंजिल पर टैक्स पहले जैसा ही लगेगा।

सोना-चांदी में बम्पर गिरावट: 1 दिन में 13000 तक सस्ती हुई चांदी सोना भी गिरा, यहाँ जाने क्या है लेटेस्ट प्राइस…

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मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध के चलते, तेल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से निकट भविष्य में गैस और तेल की भारी किल्लत हो सकती है।

इस संघर्ष का सीधा नतीजा यह है कि कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके विपरीत, शेयर बाजार के साथ-साथ सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में रोजाना गिरावट का रुख देखा जा रहा है। फेडरल रिज़र्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में कोई कटौती न करने के फैसले और चल रहे युद्ध के मिले-जुले असर को गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों, दोनों पर साफ देखा गया। MCX एक्सचेंज पर भी सोने और चांदी की दरों में गिरावट दर्ज की जा रही है।

इज़राइल द्वारा ‘पार्स गैस फील्ड’ पर किए गए हमले, फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले, और HDFC बैंक के अंशकालिक (Part-Time) चेयरमैन के इस्तीफे का असर गुरुवार सुबह शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों, दोनों पर महसूस किया गया। शुरुआती कारोबार में, सेंसेक्स 2,000 अंकों से भी ज़्यादा लुढ़क गया। सोने और चांदी की दरों की बात करें तो, इन दोनों कीमती धातुओं में भारी गिरावट देखी गई। https://ibjarates.com पर प्रकाशित दरों के अनुसार, गुरुवार को 24-कैरेट सोना ₹4,000 सस्ता हो गया, जबकि चांदी की कीमत में ₹13,000 से भी ज़्यादा की गिरावट आई।

सोना ₹40,000 के स्तर से नीचे गिरा (प्रति 10 ग्राम)

https://ibjarates.com वेबसाइट पर प्रकाशित दरों के अनुसार, 23-कैरेट सोने की कीमत गिरकर ₹151,030 रह गई। इसी तरह, 22-कैरेट सोने की कीमत भी गिरकर ₹138,899 प्रति 10 ग्राम हो गई। ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। सोना, जो कुछ समय पहले ₹192,000 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था, अब ₹40,000 प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया है, और इसकी कीमत ₹151,637 प्रति 10 ग्राम पर आकर स्थिर हुई है।

चांदी की कीमतों में ₹175,000 से ज़्यादा की गिरावट

चांदी की बात करें तो, यह अपने अब तक के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड स्तर से ₹175,000 प्रति किलोग्राम से भी ज़्यादा नीचे गिर गई है। 29 जनवरी, 2026 को चांदी की कीमत बढ़कर ₹420,000 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है। https://ibjarates.com के अनुसार, गुरुवार को चांदी की कीमतें गिरकर ₹236,809 प्रति किलोग्राम पर आ गईं। इस तरह, प्रति किलोग्राम लगभग ₹185,000 की गिरावट दर्ज की गई है। अकेले गुरुवार (19 मार्च, 2026) को ही चांदी की कीमतों में ₹13,000 प्रति किलोग्राम की और गिरावट देखने को मिली।

सोने की कीमतें क्यों गिर रही हैं?

सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम वजह फेडरल रिज़र्व का हालिया फैसला है कि वह ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा-यह अमेरिकी केंद्रीय बैंक का एक कदम है। फेड ने संकेत दिया है कि उसे इस साल सिर्फ़ एक बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। इससे सोने पर दबाव बढ़ा है; आम तौर पर, कम ब्याज दरों की उम्मीद सोने की कीमतों के लिए एक सकारात्मक उत्प्रेरक का काम करती है, जिससे कीमतों में तेज़ी आती है। इसके विपरीत, जब ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है, तो अक्सर सोने की मांग में गिरावट देखी जाती है।

दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष बाज़ार में अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है। साथ ही, ईरान के हमलों का असर LNG की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा आपूर्ति में गहराता संकट आने वाले दिनों में महंगाई को और बढ़ा सकता है। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, निवेशक सोने में अपनी होल्डिंग कम कर रहे हैं। कीमतों में गिरावट के कारण निवेशकों का ध्यान भी इस धातु से हट गया है।

क्या गिरावट के बीच निवेश करने का यह सही समय है?

सोने और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट से यह साफ़ संकेत मिलता है कि रिकॉर्ड ऊंचे स्तरों पर मुनाफ़ा-वसूली (profit-booking) तेज़ हो गई है। वैश्विक संकेतों और अमेरिकी डॉलर की चाल के कारण, अल्पावधि में बाज़ार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। पृथ्वी फिनमार्ट के निदेशक मनोज कुमार जैन का सुझाव है कि कीमतों में इस सुधार के दौर में निवेशकों को सोने में निवेश के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सोने की कीमतों के बारे में उन्होंने उम्मीद जताई कि संघर्ष शांत होने के बाद कीमतों में तेज़ी आ सकती है, और इस साल कीमतें ₹200,000 के स्तर तक पहुँच सकती हैं। व्यवस्थित निवेश के लिए, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) एक बेहतरीन विकल्प है।

6000 में कौन सा Air Cooler है सबसे बेस्ट? देखें Top 3 सस्ते और दमदार ऑप्शन…

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Air Cooler Under 6000:

गर्मियों के शुरुआत होने के साथ कूलर की डिमांड भी बढ़ जाती है। अगर एसी लेने का बजट नहीं है तो क्यों न सूरज की गर्मी सहन करने की बजाय कूलर खरीदा जाए। इस वक्त नवरात्रि से लेकर ईद जैसे त्योहारों पर ई-कॉमर्स कंपनियां डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। आप भी इन्हीं का फायदा उठाकर अच्छा कूलर घर ला सकते हैं। हम आपके लिए लाए हैं ऐसे 3 डील्स जो काम आसान करेंगी।

लिस्ट में पहला नाम ओरिएंट कंपनी के Durachill 40 L Portable Air Cooler है, जो छोटे कमरों के लिए आइडियल च्वाइस है। आप इसे बेडरूम के लिए चुने सकते हैं। इसकी खासियत प्राइस है, अमेजन पर यह 10,990 के MRP रेट की बजाय 49% डिस्काउंट के साथ ₹5,599 में खरीदना का मौका मिल रहा है।

फीचर्स

17% ज्यादा एयर डिलीवरी का वादा एय़रोफैन टेक्नोलॉजी से लैस 3 साइड डेंसनेस्ट हनीकॉम्ब पैंडस नमी बनाएं रखते हैं मल्टी डायरेक्शन कूलिंग सिस्टम लो, मीडियम और हाई 3 स्पीड सेटिंग्सइन्वर्टर के लिए कम्पैटिब 12 महीने की वारंटी बजाज कंपनी का PX97 Torque New 36L Personal एयर कूलर अमेजन पर 17 फीसदी के ऑफर संग ₹5,799 में उपलब्ध है, जबकि रियल प्राइस 6,990 है। यहां पर 204रु प्रतिमाह के हिसाब से नौ कॉस्ट EMI का विकल्प भी दिया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए मेन वेबसाइट देखें।

फीचर्स

3 साल की वारंटी 36 लीटर पानी की टंकी 30 फीट तक एयर फ्लो एंटी बैक्टीरियल हेक्साकूल पैड्स जो हवा साफ रखते हैं टर्बो फैन टेक्नोलॉजी 3 स्पीड कंट्रोल सिस्टम एडजस्टेबल एयर फ्लो

Symphony Air Cooler Price

अमेजन पर सिंपनी के Diet 12T Tower Air Cooler को ग्राहकों ने बेस्ट सेलर टैगर दिया है। अगर आप कम पैसों में बढ़िया डील चाहते हैं तो इसे एक्सप्लोर कर सकते हैं। वैसे तो यह कूलर 6,291रुपए में आता है, हालांकि अमेजन ऑफर पर इसे ₹5,491 में खरीदा जा सकता है। यह प्रोडक्ट 10×10 रूम के लिए मुफीद है, जहां तक बात खासियत की करें तो-

पावरफुल ब्लोअर, जो तेज हवा और कूलिंग देता है स्लिम और पोर्टेबल डिजाइन, जिसे कहीं भी घुमाया जा सकता है हमीकॉम्ब कूलिंग पैड से लैस जो कूलिंग स्पीड बढ़ाता है ऑठो लूवर मूवमेंट, जो हवा को पूरे कमरे में फैलाता है

CFD टेक्नोलॉजी से लैस

घर के लिए कितने लीटर का कूलर लेना चाहिए ?

Air Cooler की क्षमता कमरे के साइज पर निर्भर करती है। अगर रूम छोटा है तो 30 लीटर, मीडियम साइज रूम के लिए 35-50 लीटर और बड़े हाल के लिए 50 से 100 लीटर कूलर बढ़िया माने जाते हैं।

कूलर खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

कमरे के हिसाब से कैपिसिटी चुनें कूलिंग पैड टेक्नोलॉजी का ध्यान रखें

ज्यादा कूलिंग मतलब ज्यादा उम्र एयर थ्रू का ध्यान रखें, कूलर कितनी दूर तक हवा देता है बिजली खपत डायमेंशन चेक करें इनवर्टर फ्रेंडली कूलर चुनें पानी की टंकी बड़ी चुनें ताकि बार-बार भरना न पड़ें

कूलर कितने घंटे चलाना चाहिए ?

गर्मी बढ़ने पर कूलर का इस्तेमाल लगातार किया जाता है, हालांकि ऐसा नहीं करना चाहिए। आप 6-8 घंटे चलाकर इसे बंद कर दें। यदि कमरे में वेंटिलेशन, तो बंद होने के बाद भी कमरा ठंडा रहेगा।

प्लास्टिक और लोहे के कूलर में कौन बढ़िया है ?

घर में जगह की कमी है तो प्लास्टिक कूलर चुनें। इन्हें बिना परेशानी कहीं भी आसानी से घुमाया जा सकता है। वहीं, बड़े घरों के लिए लोहे के कूलर बढ़िया माने जाते हैं। ये मजबूत होने के साथ लंबे वक्त साथ निभाते हैं।

कूलर कितने साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है?

प्लास्टिक का कूलर या लोहे का सही मेनटेंस से यह 5-10 साल तक चलाया जा सकता है कूलर की लाइफ बढ़ाने के लिए 20-30 दिन में सफाई करते रहें

घर में पड़ी मोती माला से बनाएं 5 कमाल की जूलरी, होगी पैसे की बचत और मिलेगी न्यू स्टाइल…

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Moti Mala Reuse Jewellery Ideas: पुरानी मोती माला को फेंकें नहीं! जानें 5 आसान DIY आइडियाज-इयररिंग्स, चोकर, ब्रेसलेट, हेयर एक्सेसरी और मांगटीका बनाकर दें नया स्टाइलिश लुक। पैसे बचाएं और घर पर बनाएं डिजाइनर जूलरी।

DIY Pearl Jewelry Tutorial || Pearl necklace, bracelet and earrings ideas

DIY Pearl Necklace Jewellery: आजकल DIY जूलरी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। अगर आपके पास पुरानी या टूटी हुई मोती माला रखी है, तो उसे फेंकने की बजाय आप उससे कई स्टाइलिश और यूनिक जूलरी बना सकती हैं। इससे न सिर्फ पैसे की बचत होगी बल्कि आपको हर आउटफिट के साथ नया लुक भी मिलेगा। खास बात यह है कि ये सभी आइडियाज घर पर आसानी से बनाए जा सकते हैं और देखने में बिल्कुल डिजाइनर जूलरी जैसे लगते हैं।

स्टाइलिश पर्ल इयररिंग्स

मोती माला के छोटे-छोटे दानों को अलग करें और हुक या स्टड में लगाकर खूबसूरत इयररिंग्स बनाएं। आप चाहें तो इसमें चेन या स्टोन जोड़कर इसे पार्टी वियर भी बना सकती हैं।

ट्रेंडी पर्ल हेयर एक्सेसरी

पुरानी माला के मोती को हेयर पिन, क्लचर या रबर बैंड पर चिपकाएं। यह ब्राइडल या फेस्टिव लुक के लिए परफेक्ट हेयर एक्सेसरी बन जाती है।

पर्ल चोकर नेकपीस

लंबी माला को छोटा करके चोकर स्टाइल में बदलें। बीच में पेंडेंट या कुंदन जोड़ दें, आपका सिंपल लुक तुरंत रॉयल बन जाएगा।

पर्ल ब्रेसलेट या कंगन

मोती के दानों को इलास्टिक या वायर में पिरोकर ब्रेसलेट तैयार करें। इसे आप सिंगल लेयर या मल्टी लेयर में बनाकर वेस्टर्न और एथनिक दोनों के साथ पहन सकती हैं।

पर्ल मांगटीका या हेयर चेन

कुछ मोती लेकर चेन के साथ जोड़ें और मांगटीका या हेयर चेन बनाएं। यह खासतौर पर शादी और त्योहारों में बेहद एलीगेंट लगता है।

Navratri AI Magic: अपना नाम लिखें और पाएं माता रानी के साथ वाली 3D फोटो, जानें 2 मिनट में फ्री वीडियो बनाने की ट्रिक…

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“Navratri AI Magic: अपना नाम लिखें और पाएं माता रानी के साथ वाली 3D फोटो, जानें 2 मिनट में फ्री वीडियो बनाने की ट्रिक”

Navratri AI Wishes 2026: आज 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है। अगले 9 दिनों तक (27 मार्च तक) मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की भक्ति में पूरा देश डूबा रहेगा.

इस दौरान लोग अपनों को नवरात्रि की शुभकामनाओं वाली फोटो, मैसेज भेजते हैं। लेकिन क्या आप अभी भी वही पुराने, घिसे-पिटे ‘Forwarded’ मैसेज अपनों को भेज रहे हैं? इस नवरात्रि टेक्नोलॉजी की हेल्प लीजिए। इसके लिए आपको प्रोफेशनल डिजाइनर बनने की जरूरत नहीं है। आप सिर्फ 2 मिनट में AI (Artificial Intelligence) की मदद से खुद की फोटो वाले शानदार नवरात्रि वीडियो और ग्रीटिंग्स बना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे आप इस काम को चुटकियों में बिल्कुल फ्री में कर सकते हैं…

AI से नवरात्रि विशेज बनाने के 3 आसान तरीके

  1. अपना नाम और फोटो वाला 3D इमेज
  • माइक्रोसॉफ्ट का यह टूल आजकल बहुत वायरल है। आपको बस लिखना है कि आपको कैसी फोटो चाहिए।
  • इसके लिए गूगल पर ‘Bing Image Creator’ सर्च करें।
  • वहां लिखें- ‘A boy/girl sitting in front of Goddess Durga, wearing traditional clothes, ‘Happy Navratri’ written on background.’
  • यह AI आपको पलक झपकते ही ऐसी फोटो बना कर देगा जो देखने में एकदम रियल और प्रोफेशनल लगेगी।
  1. जादुई वीडियो और रील्स
  • अगर आप अपनी फोटो को बोलता हुआ या एनिमेटेड बनाना चाहते हैं, तो ‘Canva’ का ‘Magic Media’ फीचर बेस्ट है।
  • इसमें अपनी फोटो अपलोड करें और ‘Navratri’ एलिमेंट्स सर्च करें।
  • वहां मौजूद AI टूल्स आपकी साधारण फोटो में जान फूंक देंगे और बैकग्राउंड में माता के भजन खुद-ब-खुद सेट हो जाएंगे।
  1. एआई वाली शायरी और मैसेज
  • वही पुराने मैसेज बोरिंग हो गए हैं? एआई से एकदम फ्रेश शायरी लिखवाएं।
  • ChatGPT या Gemini में से किसी पर टाइप करें- ‘Write a unique Navratri wish for my family in simple Hindi.’
  • आपको ऐसी कड़क लाइनें मिलेंगी जो सीधे दिल को छुएंगी।

चैत्र नवरात्रि 2026: वायरल होने के लिए क्या करें?

  • मैसेज में सामने वाले का नाम जरूर लिखें (AI से यह काम आसान हो जाता है)।
  • हमेशा HD फोटो ही डाउनलोड करें ताकि स्टेटस पर धुंधली न दिखे।
  • इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते समय ट्रेंडिंग ‘Navratri’ ऑडियो का ही इस्तेमाल करें।