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Diwali 2019: दिवाली के पटाखों से जल गया है हाथ, तो ऐसे रखें ख्याल

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दिवाली 2019 : अगर आप भी दिवाली पर पटाखे चलाने का शौक रखते हैं, तो ऐसे में पटाखों से जलने की सावधानियों और जलने के बाद के घरेलू उपचार के बारे में जानना बेहद जरुरी है। लेकिन क्या आपको पता है कि जले हुए हिस्से का उपचार कैसे किया जाता है। अगर नहीं, तो आइए जानते हैं पटाखे से हाथ जलने पर किया जाने वाला उपचार और सावधानियां (Treatment And Precautions For Hand Burnt With Firecrackers)

पटाखे जलाते समय की सावधानियां (Precautions while Running Firecrackers)

1. हमेशा पटाखे खुली जगह में ही जलाएं।

2. बड़ों की मौजूदगी में ही पटाखे जलाएं।

3. पटाखे जलाते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पास रखें।

4. पटाखों और मोमबती को हमेशा एक-दूसरे से अलग रखें।

5. हमेशा कॉटन के कपड़े पहनकर ही पटाखे जलाएं।

6. पटाखे जलाने से पहले बालों को जरुर बांधें।

7. बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें।

8. तेज आवाज और बड़े पटाखों से बच्चों को दूर रखें।

9. पटाखे जलाते समय हमेशा फर्स्ट एड किट साथ जरुर रखें।

10. लंबे और घेरदार कपड़े पहनकर पटाखे जलाने से बचें।

पटाखे से हाथ जलने के बाद की सावधानियां (Precautions After Burning Hands With Cracker)

1. जले स्थान पर बर्फ लगाने से बचें

आमतौर पर लोग पटाखे से हाथ या अन्य जगह जलने पर बर्फ का उपयोग करते हैं, इससे जलन तो समाप्त होती है, लेकिन जलने वाली जगह पर खून के जमने का खतरा बढ़ जाता है। जो बाद में समस्या उत्पन्न कर सकता है।

2. जले हुए स्थान पर रुई या कपड़े का उपयोग करने से बचें

पटाखे या अन्य किसी वजह से जलने पर कभी भी जले हुए स्थान पर रुई या किसी प्रकार के कपड़े से कवर करने की गलती न करें, इससे जले हुए स्थान पर उसके चिपकने का खतरा रहता है और हटाने पर त्वचा के छिलने या फफोले के फटने की संभावना बढ़ जाती है, जो बेहद असहनीय होती है।

3. जले स्थान पर चिपके कपड़े को हटाने की कोशिश न करें

कई बार जलने पर कपड़ा त्वचा से चिपक जाता है। ऐसे में कभी भी अपने हाथों से उसे हटाने की कोशिश न करें। इससे त्वचा के छिल सकती है। जिससे दर्द के साथ त्वचा में बैक्टीरियल इंफेक्शन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।

4. ज्यादा जलने पर मरीज को पानी देने से बचें

अगर पटाखे की वजह से कोई अत्याधिक जल गया है, तो ऐसे में कभी भी एक साथ बहुत सारा पानी पीने को न दें, बल्कि ओआरएस का घोल पिलाएं। क्योंकि जलने के बाद शरीर की आंतें काम करना बंद कर देती है और पानी सांस नली में फंस सकता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता हैं।

पटाखे से हाथ जलने के बाद का उपचार (Treatment After Burning Hands With Crackers)

1. टूथपेस्ट का प्रयोग

जब भी पटाखे या रसोई में काम करते समय हाथ या अन्य अंग जल जाए, तो ऐसे में आप सबसे पहले जले हुए स्थान पर टूथपेस्ट लगाएं। इससे आपकी जलन की कम होगी, साथ ही छाला पड़ने की संभावना भी कम होगी।

2. एलोवेरा

अगर आप कभी पटाखे या अन्य किसी वजह से हाथ जल जाता है, तो ऐसे में आप एलोवेरा जेल को हाथ पर रगड़ते हुए जलन खत्म होने तक लगाएं। इससे आपका जलने का निशान भी दूर होगा।

3. सरसों का तेल और नमक

पटाखे या रसोई में हाथ जलने पर तुरंत सरसों का तेल और नमक को मिक्स करके जले स्थान पर लगाने से जलन दूर होने के साथ छाले पड़ने की आशंका भी खत्म हो जाती है।

4. शहद

शहद में बहुत सारे एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों मौजूद होते हैं, जो हमारे शरीर को सेहतमंद रखने में मदद करते है। इसके अलावा शहद का उपयोग जलने पर भी किया जाता है। शहद को जले हुए स्थान पर त्रिफला के साथ मिलाकर लगाने से थोड़ी देर में जलन से राहत मिल जाती है।

5. दही और चूना

पटाखे या अन्य कारणों से जलने पर दही और सफेद चूने का पेस्ट लगाना भी बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि दही और सफेद चूने की तासीर ठंडी होती है, जिसे लगाने के कुछ समय बाद जलन से राहत मिलती है और रोजाना लगाने पर निशान भी दूर हो जाता है।

थायराइड के इन लक्षणों पर ध्यान देने की है अधिक आवश्यकता

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थाइरॉयड बॉडी के सिस्टम को संतुलित रखने में मददगार है। इस हार्मोन में गड़बड़ी आने पर शरीर में बहुत सी परेशानियां और चेंज आ जाते हैं।

इसके लक्षणों से इसके बारे में पता लगाया जा सकता है और सही समय पर इलाज से इस रोग से होने वाली दिक्कतों से मुक्ति पाया जा सकता है। आइए जाने इसके लक्षणों के बारे में जिन पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

कोई भारी काम न करने के बाद भी थकावट महसूस हो और दिन भर सुस्ती बनी रहे तो थाइरॉयड की जांच अवश्य करवाएं।

खाना खाने के बाद भी भूख महसूस होना भी थायरॉइड का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।

शरीर में अचानक से खून का दौरा बढ़ जाएं तो हो सकता है आप थाइरॉयड के शिकार हो गए हैं। ऐसे में जांच अवश्य करवाएं।

बालों के तेजी से टूटने और झड़ने का कारण भी थाइरॉयड ही हो सकता है।

डाइट का पूरा ध्यान रखने के बावजूद भी वजन तेजी से कम हो रहा हो तो अपनी सेहत की ओर विशेष ध्यान जरूर दें। इसका मुख्या कारण थायरॉइड भी हो सकता है।

बिना किसी वजह के तनाव में रहना या अपने आप को दुखी महसूस कर रहे हैं तो थाइरॉइड की जांच अवश्य करवाएं।

अपने आस-पास की चीजों को भूल जाना और दिमाग पर ज्यादा जोर डालना भी थाइरॉयड का मुख्या कारण हो सकता है।

जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग या दर्द महसूस हो तो वे अपनी जांच अवश्य करवाएं।

शरीर में अगर किसी तरह का बदलाव महसूस करें तो डॉक्टरी जांच जरूरी है

इन नियमों का पालन कर आप जल्द ही जी सकेंगे चश्मे के बिना लाइफ

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आजकल की बिमारियों में एक आम बीमारि है चश्मा लगना। छोटे-छोटे बच्चे भी इस बीमारी से पूरी तरह ग्रसित हैं। लेकिन आप आंख पर लगा चश्मा उतार सकते हैं।

जी हां, बस आपको रोजाना कुछ नियमों का पालन करना होगा और जल्द ही आप जी सकेंगे चश्मा-फ्री लाइफ।

नुस्खे जो उतार देंगे आपका चश्मा-

रात को आठ बादाम भिगो लें और सुबह पीस कर पानी के साथ मिलाकर पी जाएं। ऐसा लगातार करने से धीरे-धीरे आंखों की कमजोरी दूर होने लगेगी।

रात में सोने से पहले दूध में इलायची का पाउडर डालकर पीएं। ऐसा रोज करें, यह आपकी आंखों पर चमत्कारिक असर दिखाएगा।

चने के बराबर फिटकरी को सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और इस मिश्रण की चार-पांच बूंदें रोज रात में आंख में डाल कर सोएं।

एक चम्मच पानी में नींबू की बूंद डालें और इसकी दो-दो बूंद दोनो आंखों में डालें। चश्मा उतर जाएगा।

हर रोज एक कप कॉफी का सेवन नजर को कमजोर होने और मोतियाबिंद, अधिक उम्र और मधुमेह के कारण रेटिना को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।

एक्सरसाइज करने के बाद न करे इन चीज़ो का सेवन

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एक्सरसाइज के साथ अपने खान पान का ध्यान रखना भी जरुरी होता हैभले ही नियमित रूप से दौड़ने की आदत आपकी स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, ताकि आपके शरीर को दौड़ने का पूरा लाभ मिले.

रनिंग या दौड़ने के बाद कुछ गलत आदतों के वजह से आप अपनी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि घंटों भागने के बाद इसका लाभ शरीर को पहुंचें तो आपको अपनी डाइट पर ध्यान देने की जरुरत हैं.

अगर आप रनिंग के जरिए अपनी स्वास्थ्य को फिट बनाएं रखना चाहते हैं तो आपको ये मालूम होना बहुत जरुरी है कि प्रातः काल दौड़ने से पहने व बाद में क्या खाएं. जैसे की केला दौड़ने वालों व अभ्यास के प्रति उत्साही लोगों का पसंदीदा फल है. केला कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है.

इसमें पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम उपस्थित होता है. तेज दौड़ या कड़ी अभ्यास के दौरान शरीर से मिनरल्स, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन ए, मैग्नीशियम व फोलेट की कमी हो जाती है.

सांस की बीमारी को दूर करने के लिए करे ये उपाय

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अस्थमा सांस से जुड़ी बीमारी है. वैसे तो सर्दी-जुकाम व फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों में भी सांस की कठिनाई होती है लेकिन अस्थमा में सांस लेते समय सीने में सीटी या सूं-सूं (वीज) जैसी आवाजें आती हैं जो दूसरी बीमारियों में नहीं आती है. इसी से इसकी पहचान जल्द हो जाती है. जानते हैं कि कैसे आप अस्थमा को नियंत्रित रख सकते हैं :-

अस्थमा क्या है ( What Is Asthma )
श्वसन नलिकाओं में सूजन आने से अस्थमा की समस्या होती है. दरअसल श्वसन नलिकाएं फेफड़ों से हवा को अंदर-बाहर करने का कार्य करती हैं. सूजन से नलिकाएं संकड़ी व संवेदनशील हो जाती हैं जिससे फेफड़ों में हवा कम पहुंचती है तो मरीज को दम घुटने जैसा महसूस होता है. लंबे समय तक यह स्थिति जानलेवा हो सकती है.

ये हो सकते हैं कारण ( Asthma Causes )
धूल, धुआं व प्रदूषण के सम्पर्क में रहना, तीखे खाद्य पदार्थों की एलर्जी. माता-पिता को अस्थमा है तो बच्चों में अधिक आशंका. धूम्रपान करने वाले के सम्पर्क में आना, घरेलू जानवरों के लगातार सम्पर्क में रहना, शारीरिक और मानसिक तनाव, बिगड़ता खानपान, नशीले पदार्थों की लत, अधिक समय तक खांसी, फेफड़ों, दिल, गुर्दों, आंतों आदि में कमजोरी व दवाइयों का ज्यादा प्रयोग भी कफ को सुखा देता है जिससे अस्थमा की हाेने की संभावना बढ़ जाती है.इसके अतिरिक्त घर के कालीन में हाउस डस्ट माइट होते हैं. यह एलर्जन को बढ़ाते हैं. फ्रिज का पानी पीने व सर्द-गर्म से भी एलर्जी की संभावना रहती हैं.

तलाकशुदा युवती से दुष्कर्म, पहले हिसार, फिर बीकानेर और फिर झुंझुनूं में बेचा

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 तलाकशुदा एक युवती ने एक व्यक्ति पर बार-बार दुष्कर्म करने और तीन बार बेचने के गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता ने एसपी से मिलकर आपबीती बताई. इस पर मुकदमा दर्ज किया है. महिला थाना पुलिस के अनुसार परिवादिया ने एसपी काे बताया है कि पति से तलाक के बाद वह श्रीगंगानगर रहने लगी. तीन साल पहले वह किसी महिला के घर काम करने जाती थी.

वहीं पर आरोपी मुकेश का आना-जाना था. आरोपी मुकेश ने पीड़िता की लाचारी का फायदा उठाते हुए उससे कहा कि वह नाैकरी लगवा देगा. पीड़िता उसके साथ चली गई. आरोपी ने अपने घर ले जाकर नशीली चाय पिलाई जिससे वह बेहाेश हाे गई. जब हाेश आया ताे आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म करते की वीडियाे दिखाकर डराया कि वह किसी काे इस बारे में ना बताए. इसके बाद आरोपी बार-बार उसे ब्लैकमेल करते हुए दुष्कर्म करने लगा. पीड़िता युवती ने आरोप लगाए कि आरोपी ने उसे हिसार निवासी रमेशकुमार काे बेच दिया. पीड़िता काे हिसार रखा और दुष्कर्म करता रहा. बाद में मुकेश बीकानेर निवासी राजू काे बेच दिया और तीसरी बार उसे झुंझुनूं निवासी विक्रम नाम के आदमी काे बेच दिया.

कल्पना चावला ने जब पिता से कहा- एक दिन अंतरिक्ष में अगवा हो जाऊंगी

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अस्सी साल के बनारसी लाल चावला अपनी बेटी कल्पना चावला की याद में खोए हुए हैं। वह उस दिन को याद कर रहे हैं जब उन्होंने बेटी की अस्थियों को अमेरिका के सिय्योन नेशनल पार्क की पहाड़ियों में फैलाया था। तभी एकाएक, उन्हें एक अमेरिकी महिला दिखी, जो कल्पना चावला की मौत से दुखी होकर रो रही थी। बता दें कि भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटते समय कोलंबिया में विस्फोट हो गया था।

कल्पना के पिता बनारसी लाल चावला ने बताया कि जब कल्पना को नासा के लिए चुना गया था तो उसने कहा था कि वह एक दिन बाहरी अंतरिक्ष में अगवा कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कल्पना के लिए करनाल से लेकर कैलिफॉर्निया तक लोगों में प्यार था और उसकी मृत्यु के बाद मुझे उसके जीवन के कई पहलुओं के बारे में पता चला। जिन्होंने लोगों को प्रेरित किया। कल्पना सिर्फ मेरी बेटी नहीं थी, वह भारत और अमेरिका की भी बेटी थी।

दरअसल, यह सभी बातें कल्पना चावला और उनके माता-पिता के साक्षात्कारों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा हैं। नेट जियो के अधिकारियों के मुताबिक 45 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनाई गई है।

नेशनल जियोग्राफिक ने इसे अपने कार्यक्रम ‘मेगा आइकन’ टीवी सीरीज के लिए बनाया है। अधिकारियों ने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग गुरुवार को मुंबई में एक समारोह में की गई।

बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी डॉक्यूमेंट्री बनारसी चावला ने कहा कि मैं चाहता हूं कि पूरी दुनिया कल्पना के किए गए कार्यों से लाभान्वित हो। कल्पना ने अपनी पूरी जिंदगी में करनाल स्थित टैगोर बाल निकेतन विद्यालय से लेकर कॉलेज और विश्वद्यालय तक जहां कहीं भी भाषण दिए, उनसे लोगों को प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री भी आने वाली पीढ़ियों को बड़ा सपना देखने के लिए प्रेरित करेगी।

बता दें कि चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। इस डॉक्यूमेंट्री में कल्पना का वह साक्षात्कार भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके निधन के बाद उनकी राख या तो हिमालय या फिर उटाह के सिय्योन नेशनल पार्क में बिखेर दी जाए।

कल्पना का जन्म साल 1962 में करनाल में हुआ था। वह साल 2003 में दुर्घटनाग्रस्त हुए अंतरिक्ष यान के चालक दल के सात सदस्यों में से एक थीं। उनका अंतरिक्ष कोलंबिया के आसमान में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

बेटी के लौटने का इंतजार कर रहा था: बनारसी लाल चावला बनारसी लाल चावला ने एक साक्षात्कार में पीटीआई को बताया कि मैं ह्यूस्टन में था और घर पर अपनी बेटी के अंतरिक्ष अभियान से लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था। लेकिन इसके बजाय मुझे पता चला कि मैंने अपनी प्यारी बेटी खो दी है।

वह बचपन से ही विमानों से मोहित थी। वह हमेशा सितारों और उनसे जुड़ा किसी न किसी तरह का सपना देखती थी। उन्होंने बताया कि मुझे लगता है कि वह उस दिन सितारों में ही खो गई।

पिता बनारसी लाल ने कहा कि कल्पना का उड़ने वाली वस्तुओं के प्रति आकर्षण तब शुरू हुआ, जब वह सिर्फ तीन साल की थी और उसने घर की छत से एक विमान को जाते हुए देखा था।

उन्होंने बताया कि उसने करीब से एक विमान देखा और फिर विमान को पास से देखने की जिद की। उस समय हमारे घर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर करनाल फ्लाइंग क्लब था, इसलिए मैंने वहां एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया, जिनसे मैं कुछ महीने पहले ही मिला था। मैंने उन्हें अपनी बात बताई, जिसके बाद उन्होंने हमें क्लब का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया।

साइकिल पर आगे कल्पना बैठी थी उन्होंने याद करते हुए बताया कि मैं अपने घर से साइकिल लेकर निकला और साइकिल पर आगे कल्पना बैठी थी, साथ ही मेरा बेटा पीछे बैठा था। हमने क्लब की तरफ जाना शुरू किय। इससे पहले कि मैं अपनी साइकिल पार्क करता, तब तक कल्पना उस विमान की तरफ दौड़ चुकी थी जिसे उसने देखा था।

उन्होंने बताया कि वह विमान को देखकर उसके चक्कर काटने लगी और अधिकारी से उत्सुकता से पूछा कि यह कैसे उड़ता है? यह कैसे काम करता है? बनारसी चावला ने बताया कि कप्तान ने उसके बाद उन्हें, उनके बेटे और कल्पना को विमान में बैठाया और करनाल का चक्कर लगाया। उन्होंने बताया कि मैं कल्पना के चेहरे की खुशी अभी तक नहीं भूल पाया हूं जो उसने उड़ने के दौरान महसूस की थी।

मैं अंतरिक्ष में अगवा कर ली जाऊंगी बनारसी चावला ने कहा उस दिन मुझे पता चल गया था कि वह उड़ने और तारों के बीच रहने के लिए पैदा हुई थी। सितारे उसके साथी थे। वास्तव में अंतरिक्ष से उसे इतना लगाव था कि नासा के लिए चुने जाने के बाद उसने कहा भी था वह एक दिन बाहरी अंतरिक्ष में अगवा कर ली जाएगी।

बता दें कि बनारसी चावला हाल ही में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इससे उनकी रीढ़ और बांहों में चोटें आई थीं। हालांकि उनका कहना है कि उनका अपनी बेटी के बारे में बात करना ही उन्हें फिट रखता है।

आंवले के लड्डू को खाने से शरीर को मिलता है ये लाभ, बनाये घर पर

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सर्दियाें में आने वाला आंवला आंखें, पेट, हृदय, किडनी और दिमाग की स्वास्थ्य दुरुस्त रखता है. इसमें विटामिन-सी, अमीनो एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और कई अन्य तत्त्व होते हैं.

लड्डू, जैम, माउथफे्रशनर, अचार, मुरब्बा के रूप में आंवला खाने पर कफ, पित्त और वात संतुलित रहता है. आइए जानते हैं इनके बनाने की विधि के बारे में :-

आंवला लड्डू ( Amla Ladoo )
सामग्री : 1 किलो कद्दूकस किया आंवला, साइट्रिक एसिड 2 ग्राम, पिसी इलायची 5 ग्राम, चीनी 1/2 किलो, नारियल बुरादा 100 ग्राम.

विधि : आंवले को कद्दूकस कर उबलते पानी में डालकर एक मिनट बाद निकालें. अच्छे से निचोड़कर उसमें चीनी और साइट्रिक एसिड मिलाएं. एक स्टील के भारी तले वाले बर्तन में धीमी आंच पर इसे तब तक पकाएं जब तक कि यह लड्डू जैसा बंधने की स्थिति में न आ जाए. ठंडा होने पर इसमें इलायची पाउडर मिलाकर लड्डू बनाएं और नारियल बुरादा लपेटकर कंटेनर में रखें. सर्दी में एक माह तक इसे स्टोर कर रख सकते हैं. बिना नारियल के बुरादे के भी बना सकते हैं.

आंवला जैम ( Amla Jam )
सामग्री: आंवला 500 ग्राम, चीनी 750 ग्राम, इलायची 5 ग्राम.
विधि : आंवलों को धोकर प्रेशर कुकर में 100 मिली पानी में उबालें. अब आंवले की कलियों को निकालकर और अलग कर पीस लें व चीनी डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं.

तैयार जैम की परख के लिए एक चम्मच जैम को एक प्लेट में रखेंं व थोड़ी देर बाद प्लेट को तिरछा करें. जैम बहना नहीं चाहिए. पिसी इलायची गरम-गरम जैम में मिलाकर साफ कांच के कंटेनर में रखें. इसे दो महीने तक स्टोर किया जा सकता है.

Dhanteras 2019: इस धनतेरस खरीद रहे हैं चांदी तो जान लें शुद्धता पहचानने का तरीका

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धनतेरस पर कई लोग सोने चांदी के सिक्के, जेवर और सामान खरीदना शुभ मानते हैं. लेकिन इस त्योहारी सीजन से पहले ही सोने के भाव में काफी उछाल दर्ज किया जा रहा है जिसके चलते कई लोग ऐसे होंगे जिनका बजट सोने की खरीदारी से गड़बड़ा सकता है. लेकिन चांदी के भाव् इस सीजान ठीकठाक हैं. तो आप निवेश के लिए या खरीदारी के तौर पर ही चांदी की खरीदारी कर सकते हैं. अगर हम कल यानी कि 23 अक्टूबर की बात करें तो सोने के दाम 38,061 रुपये प्रति 10 ग्राम रुपये दर्ज किये गए थे जबकि चांदी का भाव प्रति 10 ग्राम 454 रुपये था. ऐसे में आपके लिए चांदी का सामान खरीदना एक अच्छा फैसला साबित हो सकता है. लेकिन कई बार दुकानदार मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी चांदी भी बेच देते हैं जो आगे जाकर काली पड़ जाती है. आइए जानते हैं कुछ ऐसे तरीके जिनसे आप पता कर सकते हैं चांदी की शुद्धता…

ऐसे करें पहचान:
NBT में प्रकाशित खबर के मुताबिक, चांदी का सामान खरीदते वक्त उसपर हॉलमार्क का निशान देखना न भूलें. हॉलमार्क का चांदी का समान पहचानने के लिए सामान पर बने ये संकेत देखें…

  1. सामान पर बना BIS का लोगो देखना ना भूलें.
    2. चांदी खरीदने से पहले सुनार/दुकानदार का इडिंटिटिफिकेशन नंबर या निशान की पड़ताल कर लें.
    3. चांदी खरीदते वक्त शुद्धता का ग्रेड/ फाइननेस जरूर चेक करें.

टांका, बट्टा पूछ लें:
सुनार से चांदी के गहने खरीदते वक्त बायबैक पॉलिसी के बारे में पता कर लें. सुनार कई बार महंगे दामों पर चीजें बेचते हैं लेकिन जब हम उसे बाजार में बेचने जाते हैं तो काफी ज्यादा टांका बट्टा काटने के बाद सामान लेते हैं जिससे कि हमारा नुक्सान होता है. इसलिए पहले ही इसके बार में तसल्ली से पता कर लें.

बाजार भाव और मेकिंग चार्जेस पर दें ध्यान:
चांदी के गहने खरीदते वक्त उसका बाजार भाव और मेकिं चार्जेज पता कर लें. अमूमन चांदी के सामान पर प्रति ग्राम पर 3 रुपये की दर से मेकिंग चार्ज लगाये जाते हैं. कई बार लोग जड़ाऊ पत्थर वाले चांदी के आभूषण खरीदना पसंद करते हैं. लेकिन कई सुनार ऐसे भी होते हैं कि जब वो बेचते वक्त गहने का वजन करते हैं तो पत्थर का दाम भी चांदी के बराबर लगा देते हैं जिससे आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं और आपको घाटा हो जाता है.

टेलीकॉम कंपनियों को SC से झटका, सरकार वसूलेगी 92000 करोड़ रुपए

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टेलीकॉम कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से आज बड़ा झटका लगा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की वसूली के मामले में टेलीकॉम विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया है। अब टेलीकॉम कंपनियों को 92,000 करोड़ रुपए की बकाया रकम सरकार को चुकानी होगी। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट की ती सदस्यीय पीठ ने टेलीकॉम विभाग द्वारा तय की गई एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) की परिभाषा को बरकरार रखा है।

टेलीकॉम विभाग की याचिका स्वीकार
पीठ ने कहा, ”हम समायोजित सकल आय की परिभाषा को बरकरार रहेगी।” इस संबंध में निर्णय के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, ”हम टेलीकॉम विभाग की याचिका को स्वीकार करते हैं, जबकि कंपनियों की याचिका खारिज करते हैं।” शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने टेलीकॉम कंपनियों की सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि कंपनियों को टेलीकॉम विभाग को जुर्माना और ब्याज की रकम का भुगतान करना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले मे आगे और कोई कानूनी वाद की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा वह समायोजित सकल आय की गणना और कंपनियों को उसका भुगतान करने के लिए समयसीमा तय करेगी।

एजीआर क्या है?
बता दें कि AGR में क्या क्या शामिल होगा इसकी परिभाषा को लेकर टेलीकॉम कंपनियोंं और सरकार के बीच विवाद चल रहा है। टेलीकॉम विभाग ने कहा था कि एजीआर में डिविडेंड, हैंडसेट की बिक्री, किराया और कबाड़ की बिक्री भी शामिल होनी चाहिए। टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि एजीआर में सिर्फ प्रमुख सेवाएं शामिल की जाएं। अदालत ने अगस्त में फैसला सुरक्षित रखा था। टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर के आधार पर ही सरकार को स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस चुकानी होती है। कंपनियां अभी टेलीकॉम ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर एजीआर की गणना करती हैं। इसके तहत वे अपने अनुमान के आधार पर स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस फीस चुकाती हैं। टेलीकॉम विभाग लगातार बकाया की मांग करता रहा है।