Home Blog Page 2422

छत्तीसगढ़ : धर्म बदल कर प्रेम विवाह करने के मामले में सुनवाई दो दिन बढ़ी

0

 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुस्लिम युवक द्वारा हिन्दू धर्म अपनाने के बाद हिन्दू युवती से प्रेम विवाह करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होने के कारण यहां पेश याचिका में सुनवाई दो दिन आगे बढ़ा दी है। धमतरी निवासी मुस्लिम युवक मोहम्मद इब्राहिम सिद्दिकी ने हिन्दू धर्म अपनाने के बाद धमतरी की हिन्दू युवती से रायपुर के आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह किया है।

युवती के पिता ने विवाह को शून्य घोषित करने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में युवती को मानसिक रोगी होने और उसका उपचार चलने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने मामले में युवती को बुलाकर पूछताछ की थी। कोर्ट ने युवती को पिता के साथ भेजने के बजाए उसे वन स्टॉप सखी सेंटर रायपुर में रखने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पिता ने सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दाखिल की है। हाई कोर्ट में लंबित मामले को सुनवाई के लिए सोमवार को चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन एवं जस्टिस पीपी साहू की डीबी में रखा गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होनी है। इस पर कोर्ट ने यहां चल रहे मामले की सुनवाई दो दिन बढ़ा दी है।

दुष्कर्म के आरोपित डॉक्टर को हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

बिलासपुर हाई कोर्ट ने पीड़ित के विशाखा कमेटी के समक्ष दिए बयान व पुलिस रिपोर्ट मे अंतर होने पर दुष्कर्म के आरोपित डॉक्टर को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। राज्य मानसिक रोग अस्पताल में सोशल वर्कर का काम करने वाली पीड़ित ने अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बीके बनर्जी के खिलाफ 18 जुलाई 2019 को दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि डॉक्टर उसे 2015 से लगातार छेड़छाड़ करता था। 29 मई 2019 को घर आया व उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ जुर्म दर्ज किया है। गिरफ्तारी से बचने डॉक्टर ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत आवेदन पेश किया।

इसमें कहा गया कि आवेदक को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। पीड़िता ने जून 2019 को अस्पताल की विशाखा कमेटी में शिकायत की थी। कमेटी में पूछताछ के दौरान उसने अपने बयान में कहा कि आरोपित डॉक्टर 29 मई 2019 को घर आकर छेड़छाड़ करने लगा। उसके चिल्लाने पर वह भाग गया।

इसके बाद वह विशाखा कमेटी के समक्ष नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुई। साथ ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें दुष्कर्म का आरोप लगाया है। दोनों ही बयान में अंतर होने से मामला सिर्फ छेड़छाड़ का ही बनता है। जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को शर्त के साथ अग्रिम जमानत प्रदान किया है।

एलर्जी की समस्या का ऐसे करें बचाव, जल्द मिलेगा छुटकारा

0

चाहे गर्मी से सर्दी में बदलता मौसम हो या सर्दी से गर्मी, बदलते मौसम के साथ नाक बहना, आंखों में जलन और छाती जमना आम बात होती है। यह ऐलर्जी बहुत परेशान करने वाली होती है और अगर तुरंत इसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में बचाव के लिए सतर्कता जरूरी है। ऐलर्जी शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली के धूलकणों, परागकणों और जानवरों के रेशों के प्रति प्रतिक्रिया की वजह से होती है। इन कणों के प्रतिरोध की वजह से शरीर में हेस्टामाइन निकलता है जो तेजी से फैल कर ऐलर्जी के जलन वाले लक्षण पैदा करता है।

ऐलर्जी के लक्षण

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत अध्यक्ष ने कहा कि ऐलर्जी के लक्षणों में जुकाम, आंखों में जलन, गला खराब होना, बहती या बंद नाक, कमजोरी और बुखार प्रमुख हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह हल्की ऐलर्जी साइनस संक्रमण, लिम्फ नोड संक्रमण और अस्थमा जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपको किस चीज से ऐलर्जी है। तभी आप ऐलर्जी से बच सकते हैं और होने पर इलाज भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐलर्जी की पहचान करने के लिए कई किस्म के टेस्ट किए जाते हैं। ऐलर्जी स्किन टेस्टिंग जांच का सबसे ज्यादा संवेदनशील तरीका है, जिसके परिणाम भी तुरंत आते हैं। जब स्किन टेस्ट से सही परिणाम न मिलें, तब सेरम स्पैस्फिक एलजीई ऐंटी बॉडी टेस्टिंग जैसे ब्लड टेस्ट भी तब किए जा सकते हैं। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि ऐलर्जी का सबसे बेहतर इलाज यही है कि जितना हो सके ऐलर्जी वाली चीजों से बचें। मौसमी ऐलर्जी बच्चों से लेकर किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है, लेकिन 6 से 18 साल के बच्चों को इससे प्रभावित होने की ज्यादा संभावना होती है।

ऐसे करें बचाव

-ऐलर्जी से बचने के लिए फ्लैक्स के बीज से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक फैटी ऐसिड काफी मददगार साबित होते हैं।

-रेशा बनाने वाले पदार्थ जैसे कि दूध, दही, प्रॉसेस्ड गेहूं और चीनी से परहेज करें। अदरक, लहसुन, -शहद और तुलसी ऐलर्जी से बचाव करते हैं।

-अगर आपको धूलकणों या धागे के रेशों से ऐलर्जी है तो हाईपो अलर्जिक बिस्तर खरीदें। आसपास का माहौल धूल और प्रदूषण मुक्त रखें।

-सीलन भरे कोनों में फफूंद और परागकणों को साफ करें।

-बंद नाक और साइनस से आराम के लिए स्टीम इनहेलर का प्रयोग करें।

शहीदों के बलिदान से युवाओं को मिलती है प्रेरणा : राज्यपाल अनुसुइया उइके

0

पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर चौथी बटालियन सीएएफ माना में वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि आज के दिन हम उन शहीद जवानों को याद करते हैं, जो अपने कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। आज का दिन हमें उन वीर जवानों की अप्रतिम शौर्य गाथा की याद दिलाता है, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा के लिए अपना सब कुछ अर्पित कर दिया। उनके साहस और पराक्रम की गाथाएं, हमारे युवाओं को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी। ऐसे वीर सपूतों को जन्म देने वाले माता-पिता तथा उनके परिजनों को मैं प्रणाम करती हूं।

उइके ने कहा कि समाज में कानून व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने के लिए, पुलिस के जवान हमेशा निष्ठापूर्वक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हमारे जवान अत्यंत सूझबूझ एवं साहस के साथ नक्सलियों का सामना करते हैं। हम हमेशा उनके प्रति ऋणी रहेंगे।

उनकी बदौलत ही हम सब खुशहाली और अमन चैन से रहते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सुदूर अंचलों के लोगों में चेतना आई है और वे भी अन्य क्षेत्रों के निवासियों की तरह विकास चाहते हैं। विकास की रोशनी वहां तक पहुंच सके और वे देश की मुख्यधारा से जुड़ सकें, इसके लिए शासन द्वारा अनेक जनहितैषी योजनाएं एवं कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है। हम नक्सली समस्या के समाधान के लिए गंभीर हैं। अल्प समय में ही प्रदेश में नक्सली वारदातों में काफी कमी आई है, जो कि हमारी सरकार के गंभीर प्रयासों का ही परिणाम है। पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने कहा कि नक्सली गतिविधियों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राज्यपाल ने शहीद वाटिका में शहीदों को दी श्रद्धांजलि

राज्यपाल अनुसुईया उइके ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर राजीव स्मृति वन स्थित शहीद वाटिका के अमर जवान स्तंभ में पुष्प चक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

SSC CGL Notification 2019: ग्रेजुएट पास के लिए सरकारी नौकरी करने का शानदार मौका

0

SSC CGL Notification 2019: अगर आप ग्रेजुएट हैं और सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए ये शानदार मौका है. दरअसल, कर्मचारी चयन आयोग SSC CGL ग्रुप ‘B’ और ग्रुप ‘C’ के लिए नोटिफिकेशन जारी करने वाला है. इसके साथ ही सीजीएल 2019 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरु हो जाएगी. इस परीक्षा के माध्यम से कर्मचारी चयन आयोग केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप बी और ग्रुप सी के रिक्त पदों को भरेगा.

संस्था का नाम- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)

परीक्षा का नाम- SSC CGL (SSC Combined Graduate Level Exam)

पद नाम- असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर, असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर, इंस्पेक्टर सेंट्रल एक्साइज, इंस्पेक्टर एग्जामिनर, सब-इंस्पेक्टर, डिवीजनल अकाउंटेंट, ऑडिटर, टेक्स असिस्टेंट इत्यादि. अन्य सभी पदों के बारे में जानकारी के लिए एसएससी सीजीएल का नोटिफिकेशन देखें.

शैक्षिक योग्यता- एसएससी सीजीएल परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवार का किसी भी विषय में स्नातक पास होना अनिवार्य है.

आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु कम से कम 18 साल और अधिकतम 32 साल होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयुसीमा में छूट का प्रावधान है.

आवेदन शुल्क- सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं एससी/एसटी और महिला उम्मीदवारों को कोई आवेदन शुल्क नहीं देना होगा.

आवेदन शुरु होने तारीख- 22 अक्टूबर 2019
आवेदन करने की आखिरी तारीख- 22 नवंबर 2019

प्रारंभिक परीक्षा की तिथि- प्रारंभिक परीक्षा देशभर के विभिन्न केंद्रों पर 02 मार्च से 11 मार्च 2020 तक अलग-अलग पालियों में कराई जाएगी.

कैसे करें आवेदन- आवेदन करने के लिए कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट http://ssc-cr.org/index.php पर लॉगइन करें.

छत्तीसगढ़ में हथकरघा वस्त्रों को पहचान दिलाने की कवायद, ऐसा है सरकार का प्लान

0

 गुमनामी की तरफ बढ़ रहे हथकरघा वस्त्रों को न केवल देश, बल्कि विदेश में भी पहचान दिलाने की प्रदेश सरकार कवायद कर रही है। कोसा के कपड़ों के अलावा नए प्रयोगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जैसे अलसी के खराब रेशों से तैयार होने वाले वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 25 लाख स्र्पये मंजूर किए हैं, ताकि आधुनिक मशीनों की खरीदी की जा सके।

हथकरघा वस्त्रों के माध्यम से सरकार वनोपज की भी बिक्री बढ़ाने का रास्ता तलाश रही है, इसलिए हथकरघा संघ और बुनकरों को प्राकृतिक रंगों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के हथकरघा वस्त्रों की ब्रांडिंग के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल कोऑपरेटिव ट्रेड मेले में स्टॉल लगवाया गया था। इसमें 35 देशों से 150 सहकारी समितियां आई थीं, जिसमें छत्तीसगढ़ को पुरस्कार मिला। दिल्ली में छत्तीसगढ़ भवन में भी हथकरघा मेले का आयोजन कराया गया था।

सितंबर में रायपुर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन कराया गया था, जिसमें कई राज्यों की निजी कंपनियां और सहकारी समितियां आई थीं। हथकरघा वस्त्रों में प्राकृतिक रंगों के साथ नेचुरल ड्रॉइंग को बढ़ाने की कोशिश चल रही है। इसके लिए सरकार ने दो रंगरेजों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली भेजा था। संघ सरकारी सप्लाई के अलावा निजी मार्केट में भी संभावना तलाशने में लगी है।

कवायद का दिखने लगा असर

– छत्तीसगढ़ हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ बिलासा एम्पोरियम और श्रीलंका के सहकारिता विभाग के बीच दो वर्ष के लिए कोसा सिल्क कपड़ों का अनुबंध हुआ है।

– इंडिया इंटरनेशनल कोऑपरेटिस ट्रेड मेले में छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन मर्यादित संघ को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सहकारी राज्य के पुरस्कार से नवाजा गया।

– टाटा कंपनी के तनेरा टेक्सटाइल्स का देश में 200 स्टोर खोला जा रहा है, जिसके लिए कोसा साड़ी और मध्यप्रदेश हस्तशिल्प बोर्ड ने कोसा वस्तुओं का ऑर्डर दिया है।

सरकारी आपूर्ति का लक्ष्य बढ़ाया

हथकरघा संघ ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में सरकारी विभागों को 194 करोड़ के वस्त्रों की आपूर्ति की थी। चालू वित्तीय वर्ष में 169 करोड़ के वस्त्रों की सप्लाई का ऑर्डर मिला है। पहले माह में ही संघ ने 166 करोड़ के वस्त्रों की सप्लाई कर दी। इस कारण संघ ने आपूर्ति का लक्ष्य बढ़ाकर 205 करोड़ कर दिया है।

– हथकरघा संघ अब सरकारी सप्लाई के अलावा निजी सेक्टर में भी संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि प्रदेश के 65 हजार बुनकरों को लगातार काम मिले। देश के सभी मेट्रो सिटी में संघ का शो-रूम खोलने का प्रयास चल रहा है। – मोतीलाल देवांगन, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ हथकरघा संघ

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने लिंचिंग और धार्मिक हत्याओं पर ताजा डेटा जारी किया

0

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने एक साल से ज्यादा समय बाद सोमवार को देश भर में अपराध की घटनाओं पर अपना ताजा डेटा जारी किया है। अधिकारियों ने कहा कि भीड़ हत्या के कारण प्रभावशाली लोगों द्वारा हत्या, खाप पंचायत द्वारा आदेशित हत्या और धार्मिक कारणों से की गई हत्या के नए उप-प्रमुखों के तहत एकत्र किए गए आंकड़े प्रकाशित नहीं किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप 2017 की एजेंसी की रिपोर्ट में आंशिक देरी हुई थी।

बड़े पैमाने पर डेटा सुधार

नई रिपोर्ट ने बड़े पैमाने पर 2016 के संस्करण के पैटर्न का पालन किया है, राज्य के खिलाफ साइबर अपराधों और अपराधों की श्रेणी में परिवर्धन को रोक दिया है। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी ने एनसीआरबी के पूर्व निदेशक ईश कुमार के तहत बड़े पैमाने पर डेटा सुधार की कवायद शुरू की थी। यह उनके अधीन था कि ब्यूरो ने हत्या की श्रेणी के तहत प्रोफार्मा को संशोधित किया और अन्य लोगों के बीच धार्मिक कारणों से भीड़ के नए उप-प्रमुखों और हत्या को जोड़ा। डेटा संग्रह प्रक्रिया के लिए एक आधिकारिक बयान में कहा की ‘यह आश्चर्यजनक है कि यह डेटा प्रकाशित नहीं हुआ है। यह डेटा तैयार था और पूरी तरह से संकलित और विश्लेषण किया गया था। केवल शीर्ष ब्रास ही इसका कारण जान सकता है कि इसे प्रकाशित क्यों नहीं किया गया है।’।

सरकार को इन अपराधों से निपटने में अपनी नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी

लिंचिंग पर डेटा एकत्र करने का निर्णय देश भर में 2015-16 के दौरान लिंचिंग की घटनाओं के मद्देनजर लिया गया था। अधिकारियों ने कहा, इस तरह के डेटा संग्रह से सरकार को इन अपराधों से निपटने में अपनी नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि लिंचिंग कई कारणों से होती है जिसमें चोरी, बच्चे को उठाने, पशु तस्करी या सांप्रदायिक कारणों का संदेह शामिल है।

2016 की तुलना में अपराधों की घटनाओं में 30 प्रतिशत की वृद्धि

एनसीआरबी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2016 की तुलना में राज्य के खिलाफ अपराधों की घटनाओं में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस श्रेणी में देशद्रोह, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और दूसरों के बीच सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराध शामिल हैं। डेटा से पता चलता है कि 2016 में 6,986 अपराधों के खिलाफ, 2017 में 9,013 ऐसे अपराध थे।

जम्मू और कश्मीर में देशद्रोह का सिर्फ एक मामला दर्ज

इस तरह के अपराधों की अधिकतम संख्या हरियाणा (2,576) के बाद यूपी (2,055) बताई गई। हालांकि, इन दोनों राज्यों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कृत्यों के कारण बड़े पैमाने पर अपराध हुए। हरियाणा (13) के बाद असम (19) से सबसे अधिक राजद्रोह के मामले सामने आए। जम्मू और कश्मीर में देशद्रोह का सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया, जबकि छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्व के सभी राज्यों, असम को छोड़कर, शून्य घटना दर्ज की गई।

अधिकतम अपराध लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्ट द्वारा

‘एंटी-नेशनल एलिमेंट्स’ की विभिन्न श्रेणियों द्वारा किए गए अपराधों की एक नई श्रेणी से पता चलता है कि अधिकतम अपराध लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्ट (LWE) ऑपरेटिव्स (652) द्वारा किए गए थे, इसके बाद नॉर्थ ईस्ट विद्रोहियों (421) और आतंकवादियों (जिहादी और अन्य तत्व) ) (371)। हत्याओं की सबसे अधिक संख्या LWE विद्रोहियों (82) द्वारा की गई थी। इनमें से 72 हत्याएं छत्तीसगढ़ में हुईं। इसके बाद जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों (36) – 34 को मार गिराया गया। नॉर्थ ईस्ट के विद्रोहियों ने 10 लोगों को मार डाला।

आंकड़ों के अनुसार, कुल 50,07,044 संज्ञेय अपराध – 30,62,579 भारतीय दंड संहिता (IPC) अपराध और 19,44,465 विशेष और स्थानीय कानून (SLL) अपराध – 2017 में दर्ज किए गए, पंजीकरण में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2016 के मामलों की संख्या (48,31,515 मामले) थी। 2017 के दौरान हत्या के कुल 28,653 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 2016 के मुकाबले 5.9 फीसदी की गिरावट (30,450 मामले) दर्ज किए गए। ‘विवाद’ (7,898 मामले) 2017 के दौरान सबसे ज्यादा हत्या के मामलों में मकसद था, इसके बाद व्यक्तिगत प्रतिशोध या दुश्मनी ‘(4,660 मामले) और’ लाभ ‘(2,103 मामले) थे।

महिलाओं के विरूद्ध कुल IPC अपराधों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले ‘क्रूरता या उनके संबंधियों द्वारा क्रूरता’ (33.2 प्रतिशत) के बाद दर्ज किए गए, इसके बाद ‘महिलाओं पर हमला, उनके अपमान के इरादे पर हमला’ (27.3 प्रतिशत), ‘ अपहरण और महिलाओं का अपहरण (21.0 प्रतिशत) और ‘बलात्कार’ (10.3 प्रतिशत)। प्रतिशत के संदर्भ में, 2017 के दौरान क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रन ‘के तहत प्रमुख अपराध प्रमुख अपहरण और अपहरण (42.0 प्रतिशत) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (25.3 प्रतिशत) के तहत मामले थे।

छत्तीसगढ़ : निकाय चुनाव में ‘मोदी फैक्टर’ को क्रेक करने अप्रत्यक्ष चुनाव की तैयारी

0

बस्तर संभाग की दो विधानसभा सीट दंतेवाड़ा और चित्रकोट में उपचुनाव हो गया है। अब राजनीतिक दल नगरीय निकाय चुनावों की तैयारी में पूरी तरह से जुट जाएंगे। हालांकि, कांग्रेस और उसकी सरकार ने पहले से नगरीय निकाय चुनाव की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। शहरी क्षेत्रों में मोदी फैक्टर को क्रेक करने के लिए सरकार जो बड़ा दांव खेलने जा रही है, वह महापौर और अध्यक्षों का अप्रत्यक्ष चुनाव है। यह 20 साल पुरानी व्यवस्था है, जिसे फिर से लागू करने की तैयारी हो रही है।

विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को 90 में से 68 सीटों पर जीत मिली। 15 साल सत्ता में रहने वाली भाजपा केवल 15 सीटों पर ही सिमटकर रह गई। बम्पर जीत से उत्साहित कांग्रेसी लोकसभा में भी एकतरफा जीत का दावा कर रहे थे, लेकिन केवल दो सीटों से संतुष्ट होना पड़ा था।

कांग्रेस और उसकी सरकार को इस बात की चिंता होने लगी कि कहीं नगरीय निकाय चुनाव में भी मोदी फैक्टर और राष्ट्रवाद चला तो कांग्रेस को नुकसान हो जाएगा। तब, राज्य सरकार ने महापौर और अध्यक्षों का चुनाव जनता से न कराने का विचार शुरू किया।

मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई गई, जिसने महापौर और अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के बीच से कराने की अनुशंसा कर दी है। जल्द ही कैबिनेट की उस पर मुहर लग जाएगी। जनता केवल पार्षद चुनेगी। कांग्रेस और सरकार का मानना है कि पार्षद चुनाव में मोदी फैक्टर नहीं चलेगा, क्योंकि मतदाता आपसी संबंध और सक्रियता को ध्यान में रखकर पार्षद प्रत्याशी को वोट करता है। उसे वार्ड चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों से मतलब नहीं होता है।

कांग्रेस की दो और रणनीति

– भाजपा राम के साथ गांधी का नाम अलापने लगी है, तो कांग्रेस ने भी गांधी के साथ छत्तीसगढ़ के राम का राग छेड़ दिया है।

– भाजपा के राष्ट्रवाद को गोडसे और कांग्रेस अपने राष्ट्रवाद को गांधी की विचारधारा से जोड़कर प्रचारित करने में लग गई है।

वार्ड स्तर पर चल रहा है सर्वे

अप्रत्यक्ष चुनाव में पार्षद प्रत्याशी फाइनल करने में ज्यादा मशक्कत करनी होगी। इसका कारण यह है कि जिस दल के पार्षद ज्यादा होंगे, उन्हीं में से महापौर और अध्यक्ष का चुनाव होगा। कांग्रेस ने वार्ड स्तर पर सर्वे शुरू करा दिया है, इसलिए दावेदारों के फ्लैक्स नजर आने लगे हैं।

समय पर एम्बुलेंस न मिलने पर एक्ट्रेस और नवजात बच्चे की मौत

0

मराठी फिल्म इंडस्ट्री की 25 साल की एक एक्ट्रेस और उसके नवजात बच्चे की रविवार को मौत हो गई। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में हुई यह घटना एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध न होने के कारण हुई।

मृतक एक्ट्रेस पूजा जुंजर के रिश्तेदारों ने दावा किया कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो वह आज जिंदा होती। पूजा की डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ गई थी और दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना था लेकिन एम्बुलेंस न मिलने से देरी हो गई और पूजा की मौत हो गई।

घटना विधानसभा चुनावों के एक दिन पहले हुई। इस घटना से ग्रामीण महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की गंभीर तस्वीर सामने आती है, जिसमें लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने के लिए राजनीतिक दलों के दावे धरे रह गए।

पॉलिथीन में नहीं दिया बिस्किट तो दिल्ली में कर दिया दुकानदार का कत्ल

0

राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगा दिया गया है. लेकिन अब प्लास्टिक न देने पर कत्ल की सनसनीखेज खबर दिल्ली से आई है. यहां पर बेकरी में काम करने वाले एक शख्स की सिर्फ इस वजह से हत्या कर दी गई क्योंकि उसने पॉलिथीन में सामान नहीं दिया था.

खलील के सिर पर ईंट से वार

ये घटना दिल्ली के दयालपुर थाना के चांद बाग इलाके की है. यहां पर 45 साल का खलील अहमद एक बेकरी की दुकान में काम करता था. खलील अहमद के रिश्तेदारों का कहना है कि उसका फैजान नाम के शख्स से दुकान पर झगड़ा हुआ, फैजान ने ईंट से खलील अहमद के सिर पर जोरदार हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से खलील अहमद को संभलने का भी मौका नहीं मिला वो वहीं पर गिर गया. इधर मौके का फायदा मिलाकर फैजान वहां से फरार हो गया.

पॉलिथीन में सामान नहीं देने पर हमला

आनन-फानन में वहां मौजूद लोग खलील अहमद को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. खलील अहमद के रिश्तेदार का कहना है कि फैजान से उसकी लड़ाई पॉलिथीन को लेकर हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक फैजान खलील से प्लास्टिक में भरकर सामान मांग रहा था, लेकिन खलील प्लास्टिक बंद होने का हवाला देकर उसे पॉली बैग में सामान नहीं दे रहा था. पहले तो दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन तुरंत दोनों के बीच बात बढ़ गई और खूनी झड़प में तब्दील हो गई. इसी दौरान फैजान ने खलील के सिर पर ईंट दे मारा. ये मामला लगभग एक सप्ताह पहले 15 अक्टूबर का है.

2 अक्टूबर से प्लास्टिक पर रोक

पुलिस ने डेड बॉडी का पोस्टमार्टम कराया है और घटना की जांच शुरू कर दी है. बता दें कि दिल्ली के किराना दुकानों, सब्जी बाजारों में इस वक्त प्लास्टिक नहीं मिल रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने की अपील की थी.

बुजुर्ग बांग्लादेशियों को लुभा रही ‘नारंगी दाढ़ी’, इस चलन के पीछे यह है वजह…जानिए

0

आज के समय में युवाओं में दाढ़ी रखने का बहुत क्रेज है। युवा विभिन्न प्रकार की दाढ़ी रखकर खुद को अलग दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन इससे इतर पिछले कुछ समय से बुजुर्गों में रंगीन दाढ़ी रखने का चलन बढ़ा है। दरअसल, हम यहां बात कर रहे हैं भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की। बांग्लादेश में खासकर बुजुर्गों में चेहरे की शोभा बढ़ाने वाली नारंगी रंग की दाढ़ी रखने का चलन काफी बढ़ गया है। हर तरफ इसकी चर्चा भी है। यहां के बुजुर्ग अपनी लंबी दाढ़ियों पर मेहंदी लगाकर इसे नारंगी रंग दे रहे हैं। यह नारंगी रंग की दाढ़ी बांग्लादेश में अब धीरे-धीरे ही सही लेकिन फैशन का प्रतीक बन गई है। ढाका में सब्जी बाजार में काम करने वाले 60 वर्षीय अबुल मियां ने इसका कारण पूछने पर कहा कि मुझे यह अच्छा लगता है। मेरा परिवार कहता है कि मैं इस रंग की दाढ़ी में युवा और खूबसूरत लगता हूं। वहीं 50 वर्षीय महबूब-उल बशर ने इस नए प्रयोग के बारे में कहा कि मैं दो महीने से अपनी दाढ़ी को इस नारंगी रंग में रंग रहा हूं, क्योंकि यह मुझे अच्छा लगता है।

बांग्लादेश में नारंगी दाढ़ी की दीवानगी ऐसी है कि शायद ही कोई ऐसी गली मिले जहां आपको इस तरह की दाढ़ी रखने वाले लोग आपको नहीं मिलें। विशेषज्ञों की बातों पर गौर करें तो इसे मजहब से जुड़ा बताया जा रहा है। उनका कहना है कि रंगीन दाढ़ी रखकर लोग खुद को इस्लाम के अनुयायी पेश करने की कोशिश कर रहें हैं, क्योंकि बांग्लादेश में निवास करने वाले मुस्लिमों की संख्या लगभग 17 करोड़ है।

प्रसिद्ध फैशन मैगजीन कैनवास के पत्रकार दीदार-उल दीपू ने इस बारे में कहा कि बीते कुछ सालों में बुजुर्गों के बीच यह फैशन बन चुका है। इसका कारण उन्होंने आसानी से और कम खर्च में दुकानों पर मेहंदी की उपलब्धता को बताया।