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मुर्गी पालन से बेरोजगारी को दी मात, ग्रामीण युवक बना स्वरोजगार का प्रेरक उदाहरण

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राजनांदगांव। कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छोड़कर मुर्गी पालन में कदम रखने वाले धनेश्वर वर्मा आज ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के एक सफल उदाहरण बन गए हैं। राजनांदगांव जिले के ग्राम विष्णुपुर, गातापार कला के निवासी धनेश्वर वर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से मुर्गी पालन व्यवसाय में सफलता प्राप्त की और अब वे न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

पढ़ाई छोड़ कर मुर्गी पालन की ओर रुख किया
धनेश्वर वर्मा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बी.ए. और आई.टी.आई. तक की और रायपुर में एक प्राइवेट कंपनी में सर्विस इंजीनियर के रूप में काम किया। लेकिन जब कोरोना महामारी ने जॉब बाजार को प्रभावित किया, तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौटकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 40 सोनाली मुर्गियां थीं, लेकिन आज उनकी मुर्गी फार्म की संख्या बढ़कर 3000 हो गई है।

मुसीबतों का सामना, फिर भी नहीं हारे
वर्मा बताते हैं कि जब फार्म में बीमारी फैली और मुर्गियां मरने लगीं, तो उन्होंने हार नहीं मानी। मरी हुई मुर्गियों का पोस्टमॉर्टम कराकर डॉक्टर से इलाज करवाया और बीमारी पर काबू पाया। डॉ. तरुण रामटेके के मार्गदर्शन से उन्होंने अपने फार्म की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाया और आज वह सफल मुर्गी पालनकर्ता बन गए हैं।

वर्मा के फार्म में तीन माह में एक किलोग्राम वजनी मुर्गियां तैयार हो जाती हैं। इसके बदले में उन्हें तीन माह में 2.5 लाख रुपये का मुनाफा होता है। और प्रतिमाह 70-80 हजार रुपये की शुद्ध आय होती है।

पशु चिकित्सकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण
जिला पशु चिकित्सालय के डॉ. तरुण रामटेके कहते हैं, “गांव में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन का अभाव होता है। धनेश्वर वर्मा ने मुर्गी पालन में सफलता पाने के लिए जो मेहनत की है, वह दूसरों के लिए एक प्रेरणा है। जो भी मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहता है, उसे पहले कम संख्या में मुर्गियों से शुरुआत करनी चाहिए, फिर धीरे-धीरे बर्ड की संख्या बढ़ानी चाहिए। साथ ही समय-समय पर टीकाकरण और पशु चिकित्सक से मार्गदर्शन लेना जरूरी है।”

स्वरोजगार की ओर एक नई दिशा
धनेश्वर वर्मा की सफलता से न सिर्फ वे स्वयं आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि उन्होंने अपने गांव और आसपास के इलाकों में स्वरोजगार की एक नई राह दिखाई है। आज वह लगभग आधे एकड़ में फार्म बनाकर मुर्गी पालन कर रहे हैं और अपने अनुभवों को अन्य युवाओं के साथ साझा कर उन्हें भी इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

धनेश्वर वर्मा का यह कदम यह साबित करता है कि अगर मेहनत और सही दिशा में काम किया जाए, तो किसी भी व्यवसाय में सफलता मिल सकती है। वह अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।

महाराष्ट्र में हिंसक हुआ चुनाव! एकनाथ शिंदे गुट और बीजेपी कार्यकर्ता

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महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. इस बीच राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता आक्रामक रूप से सक्रिय हैं. इस बीच कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महायुति के दो सहयोगी दल ही आपस में भिड़ गए.

ध्यान देने वाली बात है कि ये सरकार में तो ये दोनों दल सहयोगी हैं, लेकिन मनपा चुनाव में आमने-सामने लड़ रहे हैं.

ये दो दल हैं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना. दरअसल, कल्याण-डोंबिवली महानरपालिका चुनाव में शिवसैनिकों ने बीजेपी पर पैसा बांटने का आरोप लगाया और इसी के साथ प्रतिद्वंद्वी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया.

हमले में बीजेपी के दो और शिवसेना के दो पदाधिकारी घायल हो गए हैं. शिंदे गुट ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर रात के अंधेरे में पैसे बांटने का आरोप लगाया है.

दोनों दलों के दो-दो पदाधिकारी घायल

बताया जा रहा है कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव के प्रचार के अंतिम चरण में डोंबिवली के तुकाराम नगर इलाके में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई. पैनल नंबर 29 में मतदाताओं को पैसे बांटने के आरोप को लेकर दो रातों तक तनाव रहा. इस घटना में बीजेपी के 2 और शिवसेना के 2 पदाधिकारी घायल हुए हैं.

बीजेपी और शिवसेना पदाधिकारी अस्पताल में भर्ती

बीजेपी उम्मीदवार आर्या नाटेकर के पति ओमकार नाटेकर और शिवसेना उम्मीदवार नितिन पाटील को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

‘भावनात्मक नाटक अब नहीं चलेगा’, उद्धव और राज ठाकरे पर एकनाथ शिंदे”

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मुंबई के शिवाजी पार्क में सोमवार (12 जनवरी) महायुति की एक भव्य जनसभा का आयोजन किया गया. इस सभा में महायुति के सभी प्रमुख नेता मंच पर मौजूद रहे और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा नागरिक उपस्थित थे.

सभा को संबोधित करते हुए शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवतीर्थ और शिवसेना का अटूट नाता है और अब उसी तरह महायुति का भी शिवतीर्थ से अटूट रिश्ता बन गया है. उन्होंने कहा कि यह सभा केवल प्रचार नहीं, बल्कि बदलाव की लहर है.

एकनाथ शिंदे ने कहा कि विरोधी आते हैं, आरोप लगाते हैं और चले जाते हैं. अब हमें इसकी आदत हो गई है. मैं अब आरोपों का जवाब शब्दों से नहीं, हमारे काम से देता हूं. उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और उसे उसी स्तर पर दिखना चाहिए, यही महायुति का संकल्प है. उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को चुनाव आते ही मराठी आदमी याद आता है. पांच साल तक घर में बैठने वाले लोग चुनाव आते ही कहते हैं कि मुंबई खतरे में है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई खतरे में नहीं है और महायुति के रहते कभी नहीं होगी.

मुंबई का महापौर महायुति का होगा और वह मराठी होगा- एकनाथ शिंदे

उबाठा से सवाल करते हुए शिंदे ने कहा कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने मराठी आदमी के लिए क्या किया, यह जनता को बताना चाहिए. उन्होंने कहा कि हर चुनाव को मराठी आदमी की आखिरी लड़ाई बताकर भावनात्मक मुद्दे खड़े किए जाते हैं, लेकिन अब मुंबई की जनता ऐसे बयानों को नजर अंदाज कर रही है. एकनाथ शिंदे ने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई का महापौर महायुति का होगा और वह मराठी होगा. उन्होंने कहा कि मराठी आदमी मुंबई से बाहर क्यों गया, इस पर भी उबाठा को जवाब देना चाहिए. आज महायुति उसी मराठी आदमी को वापस मुंबई लाने का संकल्प ले रही है. हम केवल बोलते नहीं, करके दिखाते हैं. हमारे लिए मुंबई सबसे पहले है.

अपने कार्यकाल का एक भी बड़ा काम बताएं उबाठा- शिंदे

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने २० हजार इमारतों को ओसी दिया, पगड़ी प्रथा खत्म की, गड्ढा मुक्त और झोपड़ी मुक्त मुंबई का संकल्प लिया. इसके साथ ही क्लस्टर योजना लागू की, गृहिणी कामगारों को घर दिए और आगे एक लाख गृहिणी कामगारों को घर देने का लक्ष्य रखा है. उबाठा से सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने कार्यकाल का एक भी बड़ा काम बताएं. उल्टे उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के कामों को रोकने का काम किया. उन्हीं कामों को हमारी सरकार ने दोबारा शुरू किया. शिंदे ने दावा किया कि उबाठा के कारण महाराष्ट्र को करीब १० हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा बंगले पर बंगले बनाते रहे और गरीब नाले के किनारे रहने को मजबूर रहा. उन्होंने कहा, हम जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं और आप घर में बैठने वाले नेता हैं.

बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलते हैं हम- शिंदे

पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि इस हमले में हमारे हिंदू भाई-बहन मारे गए. प्रधानमंत्री ने अपना विदेश दौरा छोड़कर देश वापसी की, लेकिन कुछ नेता लंदन से लौटकर नहीं आए. उन्होंने सवाल किया कि क्या उनका लगाव लंदन से इतना ज्यादा है. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि दोनों एक-दूसरे के खिलाफ क्या-क्या बोलते थे, यह महाराष्ट्र की जनता जानती है. आज दोनों स्वार्थ के लिए साथ आए हैं. उन्होंने कहा कि हम बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलते हैं, लेकिन जब आपने अपने ही भाई के नगरसेवकों को तोड़ा था. वह क्या था, यह भी जनता को बताना चाहिए.

उबाठा ने मराठी आदमी की पीठ में छुरा घोंपने का किया काम- शिंदे

शिंदे ने कहा कि उबाठा ने मराठी आदमी और महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा के लोगों ने केवल पैसे खाने का काम किया, खिचड़ी में, कोविड में और उन्होंने मराठी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का काम किया है. पोस्टरों पर तंज कसते हुए शिंदे ने कहा कि ‘करून दाखवले’ की जगह ‘खाऊन टाकले’ लिखना चाहिए. उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने मुंबई के विकास के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी भी ली और धन भी लाया, जबकि विरोधियों ने कुछ नहीं किया. हमने मुंबई के कई प्रोजेक्ट्स को गति दी है. हम जोड़ने वाले लोग हैं, तोड़ने वाले नहीं.

बालासाहेब ठाकरे के सपने को पीएम मोदी ने किया पूरा- शिंदे

शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई को १० लाख करोड़ रुपये दिए. विरोधियों के अहंकार की वजह से मुंबई का नुकसान हुआ. पीएम मोदी ने बालासाहेब ठाकरे का सपना पूरा करते हुए राम मंदिर बनाया और अनुच्छेद ३७० हटाया. उन्होंने कहा कि महाविकास आघाडी के कार्यकाल में महाराष्ट्र में कोई बड़ा निवेश नहीं आया. महायुति सरकार ने अपने वचननामे में लाड़ली बहनों के लिए कई योजनाएं लाने का संकल्प किया है, जबकि विरोधियों ने हमेशा इन योजनाओं का विरोध किया है. अब महाराष्ट्र की बहनें उन्हें जवाब देंगी.

उबाठा से सवाल करते हुए शिंदे ने पूछा कि जब नवी मुंबई एयरपोर्ट अडानी को दिया गया तब मुख्यमंत्री कौन था और धारावी प्रोजेक्ट किसने दिया. राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिन उद्योगपतियों के नाम लेते हो, उन्हें घर बुलाकर खाना खिलाते हो. उनके बच्चे उनके घर नाचते है. अंत में एकनाथ शिंदे ने विश्वास जताया कि मुंबई की जनता विकास के लिए महायुति को समर्थन देकर बड़ी जीत दिलाएगी.

‘कोई भी ताकत मुंबई को…’, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दे दी चुनौती

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार (12 जनवरी) को शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 15 जनवरी को होने वाला बीएमसी चुनाव मराठी लोगों की नहीं, बल्कि ठाकरे भाइयों के अस्तित्व की लड़ाई है.

सीएम फडणवीस ने साफ कहा कि इस चुनाव में मुंबई या मराठी अस्मिता खतरे में नहीं है, बल्कि उन नेताओं का भविष्य दांव पर लगा है जो अब एकजुट हुए हैं.

महानगरपालिका चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में शिवाजी पार्क में आयोजित महायुति की रैली को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र का अभिन्न हिस्सा है और कोई भी ताकत इसे अलग नहीं कर सकती. उन्होंने मंच से उद्धव और राज ठाकरे के पुराने वीडियो भी दिखाए, जिनमें दोनों एक-दूसरे के खिलाफ बयान देते नजर आ रहे थे. इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज दोनों भाई स्वार्थ के लिए साथ आए हैं.

ठाकरे भाइयों का दांव पर है अस्तित्व- देवेंद्र फडणवीस

राज ठाकरे के ‘मराठी मानुष का आखिरी चुनाव’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने कहा कि यहां मराठी नहीं, बल्कि ठाकरे भाइयों का अस्तित्व दांव पर है. उन्होंने कहा कि 74 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली देश की सबसे अमीर महानगरपालिका पर कब्जे के लिए यह लड़ाई लड़ी जा रही है.

मुंबई में महायुति का ही बनेगा महापौर- फडणवीस

फडणवीस ने दावा किया कि मुंबई में महायुति का ही महापौर बनेगा और पारदर्शी शासन दिया जाएगा. उन्होंने महाविकास आघाड़ी पर आरोप लगाया कि उसी सरकार ने हिंदी को अनिवार्य करने का फैसला लिया था और धारावी पुनर्विकास परियोजना को रोका था. अब यह परियोजना राज्य सरकार और अदाणी समूह मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं.

बीएमसी चुनाव में महायुति की होगी बड़ी जीत- फडणवीस

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य भाषा है. साथ ही नवी मुंबई एयरपोर्ट के बाद तीसरे एयरपोर्ट और मुंबई एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की घोषणा भी की. फडणवीस ने भरोसा जताया कि बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत होगी.

Exclusive: शरद पवार को रिटायर हो जाना चाहिए? अजित पवार ने पकड़ लिए कान

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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख अजित पवार ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत की. इस दौरान अजित पवार ने कई ऐसे सवालों का जवाब दिया, जिसका इंतजार महाराष्ट्र की जनता लंबे समय से कर रही थी.

महानगरपालिका चुनाव के बीच एनसीपी प्रमुख ने चाचा शरद पवार से गठबंधन, बहन सुप्रिया सुले और राज-उद्धव ठाकरे को लेकर बड़ी टिप्पणियां कीं.

जब अजित पवार से सवाल किया गया कि महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव के लिए उन्होंने चाचा शरद पवार के साथ गठबंधन कैसे किया? तो जवाब में अजित पवार ने बताया, “स्थानीय कार्यकर्ताओं का निर्णय है. मैंने सुप्रिया सुले को खुद फोन किया और बातचीत की. उसके बाद यह फैसला हुआ कि यह बातचीत खत्म होने के बाद एकनाथ शिंदे और उदय सामंत ने गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाया था लेकिन देर हो चुकी थी. कई जगह पर हम शिवसेना के साथ फ्रेंडली मैच खेल रहे हैं.”

क्या सुप्रिया सुले केंद्र में मंत्री बनेंगी?

अजित पवार ने जवाब दिया, “हमारा परिवार एक है. सुप्रिया के बारे मे अभी कोई चर्चा नहीं है. यह बातें बाहर हो रही हैं. हमारे नेता के साथ बातचीत होगी.”

क्या शरद पवार को रिटायर हो जाना चाहिए?

जब अजित पवार से सवाल किया गया कि उनके चाचा और प्रतिद्वंद्वी पार्टी एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार को राजनीति में सक्रिय रहना चाहिए या अब रिटायरमेंट ले लेना चाहिए? तो जवाब में अजित पवार ने अपने कान पकड़ लिए. उन्होंने अपने कान पकड़कर तौबा करते हुए कहा, “मैं उन्हें कोई सलाह नहीं दूंगा. उनका जनसंपर्क बड़ा है. उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है. दिल्ली में उनके जन्मदिन के अवसर पर मैंने उनकी ताकत देखी है. मैंने जो भी बोला वह मेरा मेरा पुराना बयान था.”

ठाकरे बंधुओं के बारे में क्या सोचते हैं अजित पवार?

एनसीपी प्रमुख अजित पवार का कहना है कि दोनों भाई, राज और उद्धव ठाकरे भविष्य मे साथ रहेंगे. दोनों के कार्यकर्ता यही चाहते थे, लेकिन बालासाहेब ठाकरे जैसी ताकत इन दोनों भाइयों में नहीं है.

बीजेपी और एनसीपी के बीच तनातनी पर बोले

अजित पवार

अजित पवार ने कहा कि पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में बीजेपी ने ताकत लगाई है. खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस प्रचार के आखरी दिन पुणे में हैं. यह सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ है. मेरे पास सत्ता थी तो मैंने काम करके दिखाया है. मैं काम करने वाला नेता हूं.

अजित पवार बदले बदले क्यों लग रहे हैं?

अजित पवार ने हंसते-हंसते इस बात का जवाब दिया. उन्होंने कहा, “पहले मेरे पर जिम्मेदारी नहीं थी. पहले शरद पवार अंतिम फैसला लेते थे. अभी जिम्मेदारी मेरे उपर है. इसलिए किसी को नाराज करना अच्छा नहीं लगता. पहले कोई टेंशन नहीं होती थी, अब हंसते-खेलते रहना पड़ता है. सबको संभालकर आगे लेकर जाना पड़ता है.

राज ठाकरे ने महायुति पर निशाना साधा, कहा- उम्मीदवारों को पैसे देकर हटा

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार (12 जनवरी) को महायुति गठबंधन पर कड़ा हमला किया. ठाकरे ने आरोप लगाया कि महायुति के नेता विकास कार्य करने का दावा तो करते हैं, लेकिन निकाय चुनावों में वोट हासिल करने के लिए पैसों की पेशकश की जा रही है.

उन्होंने कहा कि 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों में कई तरह की अनियमितताएं हो रही हैं. जबकि पुलिस और चुनाव तंत्र इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

चुनाव से हटने के लिए उम्मीदवारों को पेश की जा रही भारी रकम- राज ठाकरे

राज ठाकरे ने सोलापुर में विद्यार्थी सेना के एक नेता की हत्या का भी जिक्र किया और बताया कि उम्मीदवारों को चुनाव से रोकने के लिए ‘एबी फॉर्म निगलने’ जैसी अजीबोगरीब घटनाएं हो रही हैं. उन्होंने मंच पर अपनी पार्टी के कुछ उम्मीदवारों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें चुनाव से हटने के लिए भारी रकम की पेशकश की गई. ठाकरे ने बताया कि कल्याण डोम्बिवली के उम्मीदवार शैलेश, मनीषा और पूजा धत्रक को 15 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, जबकि सुशील अवते ने एक करोड़ रुपये की रिश्वत ठुकरा दी. राजश्री नाइक को पांच करोड़ रुपये की पेशकश हुई, जिसे उन्होंने भी स्वीकार नहीं किया.

प्रत्येक घर को रुपये बांटकर खरीदी जा रही वोट- ठाकरे

ठाकरे ने कहा कि इन सभी उम्मीदवारों ने प्रस्ताव को ठुकराकर मैदान में बने रहकर महाराष्ट्र के ‘स्वाभिमानी खून’ को साबित किया. उन्होंने महायुति पर आरोप लगाया कि एक तरफ विकास का दावा किया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रति घर 5,000 रुपये बांटकर वोट खरीदे जा रहे हैं. ठाकरे ने इसे चुनाव को बाजार बनाने की कोशिश बताया.

महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के लिए मतदान 15 जनवरी को होगा और मतगणना अगले दिन होगी. इस दौरान मनसे का जोर है कि जनता को ऐसी अनियमितताओं से सावधान रहना चाहिए.

Lohri 2026: लोहड़ी कब जलेगी, जानें अग्नि पूजन का शुभ मुहूर्त;

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Lohri 2026 Jalane Ka Samay: लोहड़ी पंजाबी और सिख समुदाय के लोगों का विशेष त्योहार है, जोकि हर साल मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) से एक रात पहले मनाई जाती है. आज 13 जनवरी 2026 को देशभर में लोहड़ी की धूम देखने को मिल रही है.

लोहड़ी के पावन दिन पर लोग इकट्ठा होकर घर के बाहर पवित्र अग्नि जलाते हैं. अग्नि में मूंगफली, पॉपकॉर्न आदि जैसी चीजें अर्पित की जाती है और फिर सभी लोग भंगड़ा-गिद्दा करते हुए ढोलक की धुन पर अग्नि के चारों और घूमते हैं और नाचते-गाते हैं. आइए जानते हैं शाम के समय कितने बजे जलाई जाएगी लोहड़ी की अग्नि और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा.

आज कितने बजे जलेगी लोहड़ी (Lohri Bonfire Timing)

ज्योतिषियाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, आज लोहड़ी के दिन विशाखा नक्षत्र और शूल योग बना है. इसके अलावा शुक्र भी आज 13 जनवरी 2026 को सुबह 03:40 पर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं. लोहड़ी जलाने के लिए आज 13 जनवरी को शाम 05:43 से शुभ मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी और यह महूर्त 07:15 तक रहेगा. इस मुहूर्त में आप लोहड़ी की पवित्र अग्नि (अलाव) जला सकते हैं. इसके बाद सभी लोग अग्नि की 7 या 11 बार परिक्रमा करें.

लोहड़ी पूजा विधि (Lohri 2026 Puja Vidhi)

जिस स्थान पर लोहड़ी जलानी हो, सबसे पहले उस स्थान की साफ-सफाई कर लें. इसके बाद लकड़ियों का ढ़ेर बनाकर उसमें आग जलाएं. सभी लोग एक साथ बैठकर दुल्ला-भाटी और लोहड़ी की लोककथाएं सुनें. लोहड़ी की अग्नि में तिल-गुड़, रेवड़ी, मक्का, गजक और मूंगफली जैसी चीजें अर्पित करें और अग्नि के चारों ओर 7 या 11 बार परिक्रमा करें. मक्का को नई फसल का प्रतीक मानकर लोग लोहड़ी की अग्नि मे इसे डालते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इस दिन घरों में मकके की रोटी और सरसों का साग भी बनाया जाता है.

बालोद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ की बैठक सम्पन्न, लंबित मांगों पर हुई चर्चा

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बालोद/रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ की जिला स्तरीय बैठक बालोद में सम्पन्न हुई। बैठक का आयोजन जिला अध्यक्ष श्री खिलेश साहू के नेतृत्व में हुआ, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी एवं अन्य प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद थे।

बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने संगठन सुदृढ़ीकरण, कर्मचारियों की एकजुटता बनाए रखने और लंबित मांगों के समाधान के लिए आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। संघ ने बताया कि पिछले एक माह के आंदोलन के बाद शासन से लिखित आश्वासन मिलने पर हड़ताल को स्थगित किया गया था। शासन ने 6 प्रमुख मांगों के समाधान के लिए तीन माह के भीतर समिति गठन का आश्वासन दिया था, जिसकी समय-सीमा अब पूरी हो चुकी है।

संघ ने विश्वास जताया कि शासन जल्द ही मानव संसाधन नीति, स्थानांतरण नीति, अनुकम्पा नियुक्ति, ग्रेड पे और नियमितीकरण जैसे लंबित मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेगा। साथ ही, यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई और ऐसे कार्यक्रम चलाने की सहमति बनी।

बैठक में प्रदेश महासचिव श्री कौसलेश तिवारी, श्री पुरन दास, श्री दिनेश खार्कवाल, जिला अध्यक्ष श्री खिलेश साहू, श्री देवांनंद रात्रे, श्री रितेश साहू, सुश्री झरना नामदेव, श्री हेमंत कुमार साहू, श्री खोमेश्वर साहू और बालोद जिले के अन्य एनएचएम अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

संघ ने यह स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और लंबित मांगों के लिए संगठन सशक्त और संघर्षशील रहेगा।

उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप, AIIMS के डॉक्टरों ने बताया किन बीमारियों

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“उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप, AIIMS के डॉक्टरों ने बताया किन बीमारियों”

AIIMS के हार्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार, ठंड के मौसम में ब्लड सेल्स सिकुड़ जाती है, जिससे दिल पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो जाता है.

वहीं ठंड के दौरान अचानक बीपी बढ़ जाना, सांस फूलना, पैरों में सूजन, सीने में दर्द या बेचैनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

डॉक्टरों के अनुसार ठंड में रोजाना ब्लड प्रेशर की जांच करनी चाहिए. नमक और पैकेट वाले नमकीन से दूरी बनाए रखें, दवाएं नियमित लें और पर्याप्त पानी पीते रहें. वहीं बहुत ठंड में सुबह-सुबह वॉक से बचें.

इसके अलावा ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती है, जिससे अस्थमा और COPD के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है. खांसी, बलगम और सांस लेने में दिक्कत भी बढ़ सकती है.

ऐसे में सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों को बाहर निकलते समय नाक और मुंह ढकना चाहिए, ठंडी हवा से बचना चाहिए, कई लेयर वाले गर्म कपड़े पहनने चाहिए और चाय-सूप जैसे गर्म तरल पदार्थ लेने चाहिए. वहीं दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

ठंड के कारण फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है. ऐसे में किडनी मरीजों के लिए भी यह मौसम खतरनाक हो सकता है.

डायबिटीज और किडनी मरीजों को लेकर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डायबिटीज और किडनी मरीजों को ठंड में हल्की एक्सरसाइज या योग करना चाहिए. तला-भुना और ज्यादा नमक वाला खाना कम करना चाहिए और समय-समय पर ब्लड शुगर और किडनी की जांच करानी चाहिए.

AIIMS के बाल रोग एक्सपर्ट्स के अनुसार छोटे बच्चों में शरीर का तापमान जल्दी गिरता है. इससे सांस लेने में तकलीफ, सुस्ती और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती है.

वहीं दिल, फेफड़े या अस्थमा से पीड़ित बुजुर्गों को ठंड और प्रदूषण दोनों से बचाव करना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित आहार, गर्म कपड़े, नियमित दवाइयां और समय पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

IND vs NZ: डेब्यू अलर्ट! दूसरे वनडे में बदलेगी टीम इंडिया की तस्वीर

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राजकोट में भारत और न्यूजीलैंड के बीच बुधवार को खेला जाने वाला दूसरा वनडे मैच कई मायनों में खास होने वाला है. पहला मुकाबला जीतकर टीम इंडिया पहले ही सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है.

अगर शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम दूसरा मैच भी जीत लेती है, तो तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल हो जाएगी. ऐसे में टीम मैनेजमेंट की नजर एक मजबूत और संतुलित प्लेइंग इलेवन उतारने पर होगी.

हालांकि, दूसरे वनडे से पहले टीम इंडिया को एक झटका भी लगा है. ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर चोट के कारण सीरीज से बाहर हो चुके हैं. वडोदरा में खेले गए पहले वनडे में गेंदबाजी के दौरान उन्हें साइड स्ट्रेन की समस्या हुई थी. इसके बाद मेडिकल टीम की सलाह पर उन्हें बाकी दोनों मैचों के लिए आराम दिया गया है. सुंदर की गैरमौजूदगी ने टीम संयोजन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.

सुंदर की जगह नए चेहरे को मौका

वाशिंगटन सुंदर के बाहर होने के बाद भारतीय टीम ने 26 वर्षीय आयुष बदोनी को वनडे स्क्वॉड में शामिल किया है. अब पूरी संभावना है कि राजकोट में बदोनी को भारत के लिए वनडे डेब्यू करने का मौका मिल सकता है. टीम इंडिया को नंबर 5 पर ऐसे बल्लेबाज की जरूरत है जो रन बनाने के साथ-साथ गेंदबाजी में भी हाथ बंटा सके. बदोनी इस रोल में फिट बैठते नजर आ रहे हैं.

क्यों बदोनी सबसे मजबूत विकल्प

आयुष बदोनी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं. विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने दिल्ली के लिए बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दिया. रेलवे के खिलाफ मैच में उन्होंने अहम मौकों पर विकेट निकालकर अपनी ऑलराउंड काबिलियत भी दिखाई थी. उनके पास ऑफ स्पिन गेंदबाजी का विकल्प है, जो राजकोट की पिच पर उपयोगी साबित हो सकता है.

टीम के पास नीतीश कुमार रेड्डी और ध्रुव जुरेल जैसे विकल्प भी हैं. हालांकि रेड्डी एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं और टीम पहले से ही तीन तेज गेंदबाजों के साथ उतरने की योजना में है. वहीं, जुरेल विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और गेंदबाजी नहीं करते, जिससे टीम का संतुलन बिगड़ सकता है. ऐसे में बदोनी को प्राथमिकता मिलना लगभग तय माना जा रहा है.

दूसरे वनडे के लिए टीम इंडिया किसी और बड़े बदलाव के मूड में नहीं दिख रही है. इसका मतलब साफ है कि बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह एक बार फिर प्लेइंग इलेवन से बाहर रह सकते हैं.

भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन

रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, आयुष बदोनी, केएल राहुल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, हर्षित राणा, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा.