“उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप, AIIMS के डॉक्टरों ने बताया किन बीमारियों”
AIIMS के हार्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार, ठंड के मौसम में ब्लड सेल्स सिकुड़ जाती है, जिससे दिल पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो जाता है.
वहीं ठंड के दौरान अचानक बीपी बढ़ जाना, सांस फूलना, पैरों में सूजन, सीने में दर्द या बेचैनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
डॉक्टरों के अनुसार ठंड में रोजाना ब्लड प्रेशर की जांच करनी चाहिए. नमक और पैकेट वाले नमकीन से दूरी बनाए रखें, दवाएं नियमित लें और पर्याप्त पानी पीते रहें. वहीं बहुत ठंड में सुबह-सुबह वॉक से बचें.
इसके अलावा ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती है, जिससे अस्थमा और COPD के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है. खांसी, बलगम और सांस लेने में दिक्कत भी बढ़ सकती है.
ऐसे में सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों को बाहर निकलते समय नाक और मुंह ढकना चाहिए, ठंडी हवा से बचना चाहिए, कई लेयर वाले गर्म कपड़े पहनने चाहिए और चाय-सूप जैसे गर्म तरल पदार्थ लेने चाहिए. वहीं दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
ठंड के कारण फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है. ऐसे में किडनी मरीजों के लिए भी यह मौसम खतरनाक हो सकता है.
डायबिटीज और किडनी मरीजों को लेकर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डायबिटीज और किडनी मरीजों को ठंड में हल्की एक्सरसाइज या योग करना चाहिए. तला-भुना और ज्यादा नमक वाला खाना कम करना चाहिए और समय-समय पर ब्लड शुगर और किडनी की जांच करानी चाहिए.
AIIMS के बाल रोग एक्सपर्ट्स के अनुसार छोटे बच्चों में शरीर का तापमान जल्दी गिरता है. इससे सांस लेने में तकलीफ, सुस्ती और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती है.
वहीं दिल, फेफड़े या अस्थमा से पीड़ित बुजुर्गों को ठंड और प्रदूषण दोनों से बचाव करना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित आहार, गर्म कपड़े, नियमित दवाइयां और समय पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.



