छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित जिंदल स्टील प्लांट के परिसर में एक ठेकेदार की क्षत-विक्षत लाश मिली। मानसरोवर इलाके में शनिवार की सुबह एक कर्मचारी ने सबसे पहले लाश देखी और पुलिस को सूचित किया। काफी देर तक मृतक की पहचान नही हो सकी। इसके बाद अंगूठी से मृतक की पहचान संदीप सिंह के तौर पर हो पाई। संदीप प्लांट में ही ठेकेदारी का काम किया करता था। शव का धड़ ही पुलिस को मिल पाया है। कमर के नीचे का हिस्सा, सिर और एक हाथ अब तक नहीं मिल पाया है।
संदीप के सहकर्मियों ने बताया कि बीती रात तकरीबन 8 बजकर 30 मिनट पर रेलवे स्टेशन के पास उन्हें देखा गया था। इसके बाद किसी से संदीप का संपर्क नहीं हुआ। मौके पर पहुंचे पुलिस महकमे के आला अधिकारी अन्य ठेकेदारों और कंपनी के कर्मचारियों से पूछ-ताछ कर रहे हैं। परिजनों ने किसी भी व्यक्ति पर घटना में शामिल होने का शक नहीं जताया है। स्थानीय थाने में भी मृतक के खिलाफ या उसके द्वारा कभी किसी तरह के विवाद की जानकारी नहीं है।
नाइजीरिया के इग्बो-ओरा शहर में पैदा होते हैं जुड़वां बच्चे
वैज्ञानिकों को भी आज तक नहीं पता इसके पीछे की वजह
यहां लोग जुड़वां बच्चों को लेकर हर साल मनाते हैं उत्सव
दुनिया में सबसे ज्यादा जुड़वां बच्चे पैदा होने का है दावा
हर एक हजार पर यहां 50 जुड़वां बच्चे लेते हैं जन्म
नाइजीरिया के इग्बो-ओरा शहर को दुनियाभर में जुड़वां बच्चों की राजधानी कहा जाता है। यही वजह है कि यहां जुड़वां बच्चों के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। शुक्रवार से यह उत्सव शुरू भी हो गया है। इसमें शामिल होने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। दावा है कि इग्बो-ओरा में दुनिया में सबसे ज्यादा जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाले हर एक हजार बच्चों में से 33 बच्चे जुड़वां होते हैं। वहीं इग्बो-ओरा शहर में यह आंकड़ा 50 जुड़वां बच्चों का है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व-औपनिवेशिक काल में जुड़वां बच्चों के जन्म को बुराई के तौर पर देखा जाता था। हालांकि आज के दौर में सोच में बदलाव आया है और अब लोग इसे आशीर्वाद के रूप में देखने लगे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वह भी आज तक यह पता नहीं लगा पाए कि इग्बो-ओरा में आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।
यह हो सकती है वजह स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां की महिलाओं की खुराक इसकी एक वजह हो सकती है। इस बारे में स्थानीय नेता सैमुअल अदेयुवी अडेले का कहना है कि हमारे लोग याम, अमाला के साथ ओकरा पत्ता या इलसा खाते हैं।
माना जाता है याम में गोनैडोट्रोपिन नाम का रासायनिक पदार्थ होता है, जो महिलाओं में कई अंडे उत्पन्न करता है। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात को नहीं मानते हैं। उनके अनुसार जुड़वां बच्चों के जन्म लेने के पीछे आनुवंशिक कारण होते हैं।
भारत में करोड़पतियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी कि देश में सिर्फ 9 ऐसे शख्स हैं जिनकी एक साल की आमदनी 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आंकड़ों से पता चलता है कि देश में सिर्फ 9 ऐसे हैं जिनकी सलाना आमदनी 100 से 500 करोड़ रुपए के बीच है. हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन तीन लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है. आपको बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2018-19 तक का अपडेटेड टाइम-सीरिज डेटा और असेसमेंट इयर 2018-19 के लिए इनकम-डिस्ट्रिब्यूशन डेटा जारी किया है, जिसमें कॉरपोरेट्स, हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलिज (HUF) एंड इंडिविजुअल्स की इनकम डिस्ट्रिब्यूशन की जानकारियां शामिल हैं.
तेजी से बढ़ रही है करोड़पतियों की संख्या- इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2017-2018 में करोड़पतियों की संख्या में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. >> देश में 1 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई वाले लोगों की संख्या 97,689 है. वहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की साल 2016-17 की रिपोर्ट में देश में करोड़पतियों की संख्या 81,344 थी. >> देश में 89,793 लोग ऐसे हैं जिनकी आय एक से 5 करोड़ रुपए के बीच है. 5,132 लोग ऐसे हैं जिनकी आय 5 से 10 करोड़ रुपए के बीच है.
>> 100-500 करोड़ रुपये वाले लिस्ट में 9 लोग शामिल है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया है.
>> असेसमेंट इयर 2018-19 में करोड़पति टैक्सपेयर्स की संख्या 20 पर्सेंट बढ़कर 97,689 पर पहुंच गई है. असेसमेंट इयर 2017-18 में एक करोड़ रुपये से अधिक की टैक्सेबल इनकम वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 81,344 थी.
>> अगर सभी टैक्सपेयर्स को इसमें शामिल किया जाए, तो 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना टैक्स योग्य आय वाले लोगों की संख्या 1.67 लाख है. यह असेसमेंट इयर 2017-18 की तुलना में 19 फीसदी अधिक है.
>> आंकड़ों के अनुसार 15 अगस्त, 2019 तक कुल 5.87 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए गए. 5.52 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत लोगों, 11.13 लाख हिंदू अविभाजित परिवारों, 12.69 लाख फर्मों और 8.41 लाख कंपनियों ने रिटर्न दाखिल किया है.
>> 10-15 लाख रुपये कमाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 22 लाख से ज्यादा हो गई है.
हरेकला हजब्बा कर्नाटक में मेंगलोर के रहने वाले हैं। हजब्बा यूं तो कहने के लिए अनपढ़ हैं, लेकिन समाज में ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। डेक्कन क्रॉनिकल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 साल से संतरे बेचकर अपना गुजारा चलाने वाले हजब्बा ने पाई-पाई जोड़कर अपने गांव में गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण करा दिया है। यही नहीं, अब वह एक कॉलेज बनाने का सपना पूरा करना चाहते हैं।
हजब्बा मेंगलोर से करीब 25 किलोमीटर दूर हरेकला में नई पप्ड़ु गांव के रहने वाले हैं। वह स्थानीय लोगों के लिए किसी संत से कम नही हैं। यही वजह है कि उन्हें यहां अक्षरा सांता (अक्षरों के संत) के नाम से जाना जाता है। हजब्बा का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। शुरू में उन्होंने बीड़ी बनाने का काम किया। पर कहते हैं कि हौसला इंसान की सबसे बड़ी ताक़त है। हजब्बा ने तब संतरा बेचना शुरू किया तो लगा कि जैसे उनके जीवन जीने का मकसद ही बदल गया। हजब्बा कहते हैंः
मैं कभी स्कूल नहीं गया। बचपन में ही ग़रीबी ने मुझे संतरे बेचने के लिए मजबूर कर दिया। एक दिन मैं दो विदेशियों से मिला, जो कुछ संतरे खरीदना चाहते थे। उन्होंने मुझसे अंग्रेजी में संतरे की कीमत पूछी, लेकिन मैं उन लोगों से बातचीत करने में असमर्थ था। वह दोनो मुझे छोड़ कर चले गए। मैं इस घटना के बाद अपमानित महसूस कर रहा था और मुझे शर्म भी आ रही थी की सिर्फ़ भाषा की वजह से उन्हें जाना पड़ा।
हजब्बा नही चाहते थे कि कोई दूसरा भी इस अनुभव से गुजरे। इस वाकये के बाद उन्हें जीवन का मकसद मिल गया। उस दिन हजब्बा ने यह संकल्प लिया कि अपने गांव के ग़रीब बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण करा कर रहेंगे। उनकी पत्नी मामूना अक्सर शिकायत करती थी कि उनके खुद के तीन बच्चे हैं, इसके बावजूद वह सारा पैसा दूसरों के लिए क्यों खर्च कर रहे हैं। लेकिन बाद में उन्होंने भी हजब्बा का सहयोग करना शुरू कर दिया।
1999 में हजब्बा के सपने ने धीरे-धीरे पंख फैलाना शुरू कर दिया। उन्होने अपने गांव में एक मदरसे की शुरुआत की। जब यह स्कूल शुरू हुआ था तो सिर्फ़ 28 छात्र थे। हालांकि बाद में जब छात्रों की संख्या बढ़ने लगी, हजब्बा को लगा कि इस मदरसे को अब बेहतर स्कूल में तब्दील करना होगा। इसलिए वह खुद के जोड़े हुए एक-एक पाई उस स्कूल की इमारत और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उचित शिक्षा के लिए जमा करने लगे।
2004 में हजब्बा ने स्कूल के लिए एक ज़मीन का टुकड़ा खरीदा, लेकिन इतना काफ़ी नही था। उन्हें यह महसूस होने लगा कि उन्होंने अभी तक जो भी पूंजी जमा की है, वह स्कूल के भवन के निर्माण के लिए काफ़ी नही है। तब विवश होकर हजब्बा ने उद्योगपतियों और नेताओं से मदद की गुहार लगाई। वह अपना अनुभव बताते हुए कहते हैंः एक बार में पैसों के लिए एक बहुत धनी आदमी के पास गया, लेकिन उसने मेरी मदद करने की बजाय मुझ पर अपने पालतू कुत्ते छोड़ दिए। धीरे-धीरे उन्होंने इतने पैसे इकट्ठा कर लिए, जिसकी बदौलत ज़मीन पर एक छोटे से प्राथमिक विद्यालय का निर्माण किया जा सके।
फिर एक कन्नड़ अखबार ‘होसा दिगणठा’ ने हजब्बा की कहानी प्रकाशित की। जल्द ही उसके बाद, सीएनएन आईबीएन ने हजब्बा को ‘अपने असली हीरो’ पुरस्कार के लिए नामित किया और स्कूल के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए नगद पुरस्कार प्रदान किया।
इकोनॉमी स्टडी रिसर्च की एक रिपोर्ट में ब्रिटेन और भारत को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हाल ही में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में अटलांटिक काउंसिल की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अंग्रेजों ने भारत में 200 साल तक शासन किया और वे यहां से 45000 अरब डॉलर (करीब तीन हजार लाख करोड़ रुपए) लूटकर ले गए। उन्होंने ये आंकड़े जानी-मानी अर्थशास्त्री उत्सव पटनायक की इकोनॉमी स्टडी रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर बताए । पिछले साल कोलंबिया विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच अंग्रेज भारत से 45 टिलियन डॉलर की संपत्ति लूटकर ले गए।
ऐसे हुआ बड़ा घोटाला रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में एक्सचेंज रेट 4.8 अमेरिकी डॉलर प्रति पाउंड था। भारत जो पैसा ब्रिटेन ने भारत से चुराया उसे हिंसा के लिए इस्तेमाल किया। साल 1840 में चीनी घुसपैठ और 1857 में विद्रोह आंदोलन को दबाने का तरीका निकाला गया और उसका पैसा भी भारतीयों के द्वारा दिए गए टैक्स से ही लिया गया। भारतीय राजस्व से ही ब्रिटेन अन्य देशों से जंग का खर्च निकालता था और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का विकास करता था।
भारत की कमाई पर ब्रिटेन ने डाला डाका इस पूरी भ्रष्ट व्यवस्था का असर ये हुआ कि भले ही पूरी दुनिया के सामने भारत बेहद अच्छा बिजनेस कर रहा था और बेहद अच्छा मुनाफा कमा रहा था, जो अगले तीन दशकों तक देश को चला सकता था पर भारत के राजसी खजाने और वित्तीय कागजों में देश कंगाल हो रहा था। भारत की असली कमाई ब्रिटेन लूटकर ले जा रहा था।
नया टैक्स एंड बाय सिस्टम कर दिया लागू जब ब्रिटिश राज भारत में 1847 तक पूरी तरह से लागू हो गया उस समय नया टैक्स एंड बाय सिस्टम लागू किया गया। ईस्ट इंडिया कंपनी का काम कम हो गया और भारतीय व्यापारी खुद निर्यात करने के लिए तैयार हो गए। भारत से जो कोई भी विदेशी व्यापार करना चाहता था उसे खास काउंसिल बिल का इस्तेमाल करना होता था। ये एक अलग पेपर करंसी होती थी, जो सिर्फ ब्रिटिश क्राउन द्वारा ही ली जा सकती थी और उन्हें लेने का एक मात्र तरीका था लंदन में सोने या चांदी द्वारा बिल लिए जाएं।
भारतीय व्यापारियों को ऐसे बनाया मूर्ख जब भारतीय व्यापारियों के पास ये बिल जाते थे तो उन्हें इसे अंग्रेज सरकार से कैश करवाना होता था। इन बिलों को कैश करवाने पर उन्हें रुपयों में पेमेंट मिलती थी। ये वो पेमेंट होती थी जो उन्हीं के द्वारा दिए गए टैक्स द्वारा इकट्ठा की गई होती थी यानी व्यापारियों का पैसा ही उन्हें वापस दिया जाता था। इसका मतलब बिना खर्च अंग्रेजी सरकार के पास सोना-चांदी भी आ जाता था और व्यापारियों को लगता था कि ये पैसा उनका कमाया हुआ है। ऐसे में लंदन में वो सारा सोना-चांदी इकट्ठा हो गया जो सीधे भारतीय व्यापारियों के पास आना चाहिए था।इस तरह से ब्रिटेन भारतीय व्यापारियों को मूर्ख बनाता रहा और अपना विकास करता रहा।
भारतीय व्यापार पर ट्रेड सिस्टम से किया कब्जा ये सब कुछ ट्रेड सिस्टम के आधार पर हुआ। औपनिवेशिक काल के पहले ब्रिटेन भारत से कई तरह का सामान खरीदा करता था। इसमें कपड़े और चावल प्रमुख थे। भारतीय विक्रेताओं को अंग्रेजों की तरफ से कीमत भी उसी तरह से मिलती थी, जिस तरह से अंग्रेज अन्य देशों में व्यापार करते थे। यानी चांदी के रूप में, लेकिन 1765 के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के विकास के साथ ही उसका भारतीय व्यापार पर एकछत्र राज हो गया।
अंग्रेजों ने मुफ्त में लूटे मजे निर्यात के कारण यूरोप के अन्य हिस्सों से ब्रिटेन में बहुत ज्यादा आय आने लगी। सस्ते दाम पर खरीदे गए सामान को ज्यादा दामों में बेचकर ब्रिटेन ने न सिर्फ 100 फीसद मुनाफा कमाया, बल्कि उसपर और भी ज्यादा राजस्व प्राप्त किया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई तरह के कर लगाए। ये कर व्यापारियों पर लगाए गए और साथ ही साथ आम नागरिकों पर भी। इन करों का असर ये निकला कि कंपनी की आमदनी बढ़ गई। इसी आमदनी का एक तिहाई हिस्सा भारतीयों से सामान खरीदने पर खर्च कर दिया जाता था। यानी जो कर व्यापारी देते थे उसका एक हिस्सा उनसे सामान खरीदने के लिए ही खर्च कर दिया जाता था। इस तरह भारतीय सामान को अंग्रेज मुफ्त में इस्तेमाल करते थे। उसके लिए अपनी जेब से पैसा नहीं देते थे। जो भी सामान भारत से लिया जाता था उसे सस्ते दामों पर व्यापारियों के टैक्स से पैसे से ही खरीदा जाता था। फिर उसे ब्रिटेन में इस्तेमाल किया जाता था और वहीं से बचा हुआ सामान बाकी देशों में निर्यात कर दिया जाता था। यानी मुफ्त का सामान इस्तेमाल भी किया जाता था और बेचा भी जाता था।
आवश्यक सामग्री पनीर मैश किया हुवा 1 कप 1 प्याज बारीक कटा हुवा 1 टमाटर बारीक कटा हुवा 4 लहसुन की कलियाँ बारीक कटी हुई एक चुटकी हल्दी पाउडर 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1/2 चम्मच गरम मसाला पाउडर 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई 2 चम्मच धनिया की पत्ती बारीक कटी हुई 2 चम्मच तेल 1 चम्मच शाबूत जीरा नमक स्वादानुसार बनाने की विधि अपने हथेलियों से पनीर को रगड़ कर बारीक हो जाने तक इसे पीस ले. आप चाहे तो इसे मिक्सी में भी पीस सकते है लेकिन बस थोड़े देर के लिए जिससे पनीर का पेस्ट ना बनने पाए. मुझे हथेलियों से करना ज्यादा सही लगता है. अब एक कढ़ाही को आंच पर चढ़ाये और इसमें तेल डालकर गर्म करे जब तेल अच्छे से गर्म हो जाये तो शाबूत जीरा डालकर इसका तड़का लगाये. जीरा अच्छे से भून जाए तो आंच को मध्यम कर दे और इसमें कटे हुए लहुसन और हरी मिर्च डालकर इसको चलाते हुए fry कर लेंगे. इसमें प्याज भी मिला ले और बीच बीच में चलाते हुए इसे golden brown color में आने तक fry कर ले. अगर टमाटर आप डाल रहे हो तो इसमें टमाटर के साथ हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिला ले. इसे चलाते हुए fry करे और पनीर को भी मिला ले. आंच को तुरंत बंद कर दे और एक बार खूब अच्छे से सभी सामग्रियों को मिला ले.
आवश्यक सामग्री 2 ब्रेड के slice 2 अंडे 1 1/2 चम्मच तेल एक चुटकी हल्दी पाउडर एक चुटकी काली मिर्च पाउडर 2 चुटकी चाट मसाला पाउडर 2 चम्मच प्याज बारीक कटा हुवा 1 चम्मच शिमला मिर्च बारीक कटा हुवा 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई 1 चम्मच धनिया की पत्ती बारीक कटी हुई नमक स्वादानुसार एक चुटकी लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच बटर (Optional) 1 चम्मच cheese (Optional) 2 चम्मच tomato ketchup बनाने की विधि 1. सभी सामग्री को काट कर तैयार कर ले. अब एक bowl में दोनों अन्डो को फोड़ कर डाले और कांटे वाले चम्मच से इसे अच्छे से फेंट ले. अब इसमें कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, शिमला मिर्च और धनिया की पत्ती मिला कर साथ में एक बार फिर mix करेंगे. आखिर में bowl में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर mix कर लेंगे. 2. एक pan में तेल डालकर गर्म करे आप चाहे तो इसके जगह बटर भी use कर सकते है. अब फेंटे हुए अंडे के mixture को pan में डाले और चारो तरफ अच्छे से फैला दे और आंच को मध्यम पर सेट कर दे. आप इसे जैसा shape देना चाहे आप कड़छल से दे सकते है. दिखने में सुन्दर लगे इसके लिए आप इसे चौकोर या गोलाकार के shape में ढाल सकते है. 3. जब किनारों से ऑमलेट फूलने लगे तो किसी नुकीली चीज से किनारों से ऑमलेट को किनारों से उठाये. अब ऑमलेट को पलट ले अब अगर आप cheese use कर रहे हो तो use डाले और bread को ऑमलेट के mixture में डुबो कर दोनों bread आमलेट पर बिछा ले. 4. अब जब दूसरी परत पक कर तैयार हो जाये तो ऑमलेट को दोनों कोनो से मिला ले. इसे थोड़ा देर पकने दे या golden brown color में आने तक पकाए फिर इसे serving bowl में रखे. लीजिये दोस्तों तैयार है हमारा bread आमलेट जिसे हम गर्मागर्म चाय, coffee या tomato ketchup के साथ serve करेंगे.
कई रिसर्चों में यह बात सामने आयी है कि जो लोग सिगरेट पीना छोड़ते हैं उनका वजन अचानक से बढ़ने लगता है. लेकिन Smoking and Weight Loss को कैसे मैनेज किया जा सकता है. आइये हम आपको बता देते हैं इसके बारे में. एक नए शोध से पता चलता है कि निकोटीन पर किसी व्यक्ति की निर्भरता यह निर्धारित करती है कि उसे छोड़ने के बाद उसका वजन कितना बढ़ सकता है. जानते हैं इसके बारे में.
धूम्रपान करने के समय वजन कम क्यों रहता है ? किसी भी रूप में तम्बाकू का उपयोग उनके चयापचय को बढ़ाकर किसी व्यक्ति के वजन को प्रभावित करता है. इसके अलावा, निकोटीन की खपत कैंसर, अंधापन, अपक्षयी डिस्क रोग और नपुंसकता की एक सरणी के साथ पंक्तिबद्ध है.
धूम्रपान छोड़ते समय क्या करना चाहिए ?
अध्ययन के शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित व्यायाम और धूम्रपान के बाद के आहार में स्वस्थ आहार को शामिल करने से वजन बढ़ाने में मदद मिलती है.
डाइटिंग और एक्सरसाइज से न केवल वजन बढ़ने से रोका जा सकेगा बल्कि दिल की समस्याओं और ग्लूकोज असहिष्णुता के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी.
इसलिए, यदि आप धूम्रपान छोड़ने से जुड़े वजन बढ़ने से चिंतित हैं, तो इसे अभी करें. जितना अधिक आप निर्भर होते हैं, उतने ही अधिक वजन आप एक परिणाम के रूप में प्राप्त करेंगे.
लहसुन खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ साथ सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोज 21, विटामिन ए, बी, सी और सल्फ्यूरिक एसिड के गुण काफी मात्रा में होते हैं जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की लहसुन की चाय लहसुन से ज्यादा फायदेमंद है। आज हम आपको बताएंगे किस तरह से लहसुन की चाय हमारे लिए फायदेमंद है।
लहसुन की चाय बनाने के लिए सामान
लहसुन की चाय बनाने के लिए 1 लहसुन की कली (पिसी हुई), 1 गिलास पानी, 1 चुटकी कटा हुआ अदरक, 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शहद चाहिए होगा।
ऐसे बनाएं लहसुन की चाय
लहसुन की चाय बनाने के लिए सबसे पहले 1 गिलास पानी को उबाल लें। इसके बाद इसमें 1 चुटकी कटा हुआ अदरक और 1 पिसी हुई लहसुन की कली डालकर 15-20 मिनट तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद करके इसे 10 मिनट के लिए ठंडा होने दें। अब इसे छालकर उसमें 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शहद मिलाएं। इस चाय का सेवन रोजाना खाली पेट सुबह के समय करना फायदेमंद होता है।
लहसुन की चाय के सेवन से ब्लड सर्कुलेशन और कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है। जिससे आप दिल से जुडी समस्या से बचे रहते हैं।
इसमें एंटी-आक्सीडेंट के गुण काफी मात्रा में होते हैं जो शरीर में फ्री रेडिकल को बनने से रोकता है। जिससे आप कैंसर जैसी बीमारी से बचे रहते हैं।
इसमें एंटी – बैक्टीरियल तत्व होते हैं। इसलिए दांतों में दर्द होने पर लहसुन की चाय का सेवन लाभदायक होता है। इसके अलावा हर रोज इसका सेवन करने से आप दांतों में खून आना, दर्द, सड़न और कैविटी जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
आज हम आपके साथ शेयर करने जा रहे है घर पर चॉकलेट फेस पैक बनाने का तरीका. चॉकलेटसेहत ही नहीं सौंदर्य के लिए बहुत खास मानी जाती है. अगर आप इसके बेहतर फायदा लेना चाहते हैं तो अपनी डाइट में डार्क चॉकलेट शामिल करें. चॉकलेट तब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाती है, जब इसमें शुगर ओवरलोडेड हो जाती है. आज हम आपको बता रहे हैं स्किन के लिए चॉकलेट के लाभ. तो आइए बनाते हैं चॉकलेट फेस पैक अभी तक मार्केट में चॉकलेट फेशियल बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है. यह स्किन के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी माना जा रह है. पर इसे करवाने के लिए आपको पार्लर जाना पड़ेगा. अगर घर बैठे ही आप अपनी स्किन को चॉकलेटी टच व ग्लोदेना चाहती हैं, तो इस्तेमाल कर सकती हैं चॉकलेट फेस पैक .
इस तरह बनाएं चॉकलेट फेस पैक
एक-तिहाई कप कोको पाउडर में 2-3 बड़ा चम्मच शहद व कुछ नींबू के रस की बूंदे मिलाएं. तीनों चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें व कुछ देर के लिए रखा रहने दें. अब यह बहुत अच्छा गाढ़ा पेस्ट बन गया है. इसे अंगुली या ब्रश की सहायता से चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट चेहरे पर ही रहने दें. उसके बाद चेहरा सादा पानी से धो लें. इसका प्रभाव आपको तुरंत नजर आएगा. चेहरे पर एक अलग ग्लो व मुलायमियत महसूस होगी.
चॉकलेट फेस पैक के फायदे
यह चेहरे पर बढ़ती आयु के असर को कम करता है व झुर्रियों, दाग-धब्बों को दूर करता है. चॉकलेट एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो बढ़ती आयु के लक्षणों को दूर कर स्कीन को जवां व खूबसूरत बनाता है.इससे स्कीन में कसाव आता है. यह एंटी-इनफ्लैमेटरी होता है, जिससे यह रूखी व संवेदनशील स्कीन के लिए बिल्कुल उपयुक्त होता है. डार्क चॉकलेट स्कीन में निखार लाने के साथ ही उसे मुलायम बनाता है व स्कीन में नमी बरकरार रखता है.चॉकलेट फ्लैवेनोल व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो स्कीन को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षित रखता है, झुर्रियां दूर करता है व स्कीन को नमी प्रदान करता है. चॉकलेट में पाया जाने वाला फ्लैवेनोल रक्त चाप को नियंत्रित करता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है व ह्रदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है. यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर स्कीन को कोमल बनाता है.