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छत्तीसगढ़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भंग कर रही कांग्रेस सरकार: सुनील सोनी

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भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुनील सोनी ने नगरीय निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा नियम-कायदों की अनदेखी को संवैधानिक मर्यादाओं व लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार निकाय चुनावों की पध्दति में बदलाव लाने की हड़बड़ी में संसदीय परम्पराओं की अनदेखी कर रही है। सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों को अंतिम निर्णय मानकर कायदों की अनदेखी कर रही है। वस्तुतः उपसमिति की सिफारिशों को कैबिनेट की बैठक में रखकर पारित कराना होता है और फिर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद वह अध्यादेश लागू होता है। लेकिन कैबिनेट में चर्चा व अनुमोदन और राज्यपाल की मंजूरी की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रदेश सरकार जिस तरह का राजनीतिक आचरण कर रही है, वह न केवल संविधान व संसदीय लोकतंत्र की परम्परा का खुला अल्लंघन है, अपितु यह आचरण दर्शाता है कि राज्य सरकार एकांगी दृष्टिकोण रखकर इस मसले पर हड़बड़ी करके मनमानी करने पर उतारू है।
सांसद सोनी ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि प्रदेश सरकार निकाय चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ होने और परिसीमन हो चुकने बाद इस तरह के अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक फैसले कर रही है। उसके इस फैसले से यह तो साफ हो ही गया है कि वह निकाय चुनावों में अपनी पराजय को साफ देख रही है। क्योंकि पार्षदों पर दलबदल कानून के प्रावधान लागू नहीं होते और प्रदेश की कांग्रेस सरकार इसी प्रावधान का गलत फायदा उठाना चाहती है।

सावरकर को भारत रत्न देने की बात से भाजपा का दोहरा चरित्र हुआ उजागर : कांग्रेस

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वीर सावरकर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सावरकर मामले में अब भाजपा का दोहरा चरित्र और भाजपा की गांधीवाद विरोधी विचारधारा बेनकाब हो गयी है। एक ओर गांधी की 150वीं जयंती पर भाजपा पदयात्रायें निकाल रही है। दूसरी ओर उस सावरकर को भारतरत्न देने की बात कर रही है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल थे। महात्मा गांधी की हत्या की साजिश की जांच के लिये बनाया गया कपूर कमीशन इस निष्कर्ष पर पहुंचा,  “All these facts taken together were destructive of any theory other than the conspiracy to murder by Savarkar and his group”  “All these facts taken together were destructive of any theory other than the conspiracy to murder by Savarkar and his group”  महात्मा गांधी की हत्या के परिपेक्ष्य में कपूर कमीशन ने ये बात कही थी। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर, अगर भाजपा सरकार गांधीजी की हत्या के आरोपी रहे और कपूर कमीशन की फाइडिंग्स के अनुसार महात्मा गांधी की हत्या के षड़यंत्र में शामिल सावरकर को भारतरत्न देने पर विचार करती है, तो यह बेहद दुखद और भाजपा की गांधीवाद विरोधी सोच का जीताजागता सबूत है। सावरकर को भारतरत्न देने की बात करना बहुत सुनियोजित और सोची समझी साजिश है। इसके तहत एक तरफ महात्मा गांधी की प्रशंसा की जा रही है और दूसरी तरफ सावरकर को भारतरत्न देने की बात हो रही है। गांधी की हत्या को लेकर बाद में कपूर आयोग गठित किया गया। भारत सरकार द्वारा बनाया गया कपूर आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि गांधी की हत्या की साजिश में सावरकर और उनका समूह शामिल रहा है। कपूर आयोग की निष्कर्ष को देखते हुए यह सम्मान सावरकर को देने की बात करना भी राष्ट्रपिता का अपमान है। एक ओर सावरकर को भारतरत्न देने की बात करना और दूसरी ओर महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पदयात्रायें आयोजित करना भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सावरकर को भारत रत्न देने की बात की है।

जानें कौन हैं SC के वे 5 जज, जो सुनाएंगे अयोध्या केस पर ऐतिहासिक फैसला

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सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई खत्म हो गई है. बरसों से चले आ रहे इस मामले की अंतिम सुनवाई पिछले चालीस दिनों में पूरी हुई है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की ओर से तीखी बहस की गई. 40 दिन की बहस के बाद सुनवाई पूरी हो गई है और अब पूरा देश फैसले पर नज़रें गढ़ाए हुए है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संविधान पीठ ने इस मामले को सुना और अब यही पीठ ऐतिहासिक फैसला लिखने के करीब है.

अयोध्या मामले की सुनवाई करने वाले जज कौन हैं, आप उनके बारे में पढ़िए… (सभी जानकारी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से ली गई है)

1. जस्टिस रंजन गोगोई, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इस पीठ की अगुवाई कर रहे हैं. उन्होंने 3 अक्टूबर 2018 को बतौर मुख्य न्यायधीश पदभार ग्रहण किया था. 18 नवंबर, 1954 को जन्मे जस्टिस रंजन गोगोई ने 1978 में बार काउंसिल ज्वाइन की थी. उन्होंने शुरुआत गुवाहाटी हाईकोर्ट से की, 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज भी बने.

इसके बाद वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर जज 2010 में नियुक्त हुए, 2011 में वह पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 23 अप्रैल, 2012 को जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के जज बने. बतौर चीफ जस्टिस अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक मामलों को सुना है, जिसमें अयोध्या केस, NRC, जम्मू-कश्मीर पर याचिकाएं शामिल हैं.

2. जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े (एस.ए. बोबड़े)

इस पीठ में दूसरे जज जस्टिस एस. ए. बोबड़े हैं, 1978 में उन्होंने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन किया था. इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में लॉ की प्रैक्टिस की, 1998 में वरिष्ठ वकील भी बने. साल 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया. इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली. जस्टिस एस. ए. बोबड़े 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे.

3. जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज का पदभार संभाला था. उनके पिता जस्टिस यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में भी वह बतौर जज रह चुके हैं.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटियों में लेक्चर दे चुके हैं. बतौर जज नियुक्त होने से पहले वह देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं. वह सबरीमाला, भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता समेत कई बड़े मामलों में पीठ का हिस्सा रह चुके हैं.

4. जस्टिस अशोक भूषण

उत्तर प्रदेश से आने वाले जस्टिस अशोक भूषण का जन्म जौनपुर में हुआ था. वह साल 1979 में यूपी बार काउंसिल का हिस्सा बने, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस की. इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई पदों पर काम किया और 2001 में बतौर जज नियुक्त हुए. 2014 में वह केरल हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए और 2015 में चीफ जस्टिस बने. 13 मई 2016 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में कार्यभार संभाला.

5. जस्टिस अब्दुल नज़ीर

अयोध्या मामले की बेंच में शामिल जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने 1983 में वकालत की शुरुआत की. उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की, बाद में वहां बतौर एडिशनल जज और परमानेंट जज कार्य किया. 17 फरवरी, 2017 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कार्यभार संभाला.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस ऐतिहासिक मामले में पहले मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा गया था, लेकिन ये सफल नहीं हो सका था. इसी के बाद 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई चल रही है, अदालत ने हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुना. आखिरी कुछ दिनों में सुनवाई का वक्त एक घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था.

युवक कर रहा था इस जगह टाइमपास,जीते इतने लाख रूपये

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बदलते समय के साथ विभिन्न करियर स्कोप भी बदल रहे हैं। हालांकि, कुछ नियोक्ता हमेशा शिकायत करते हैं कि वे उस काम से प्यार नहीं करते हैं जो वे करते हैं। लेकिन एक व्यक्ति को उस काम के लिए भुगतान किया जाता है

जो कई काम करता है। यह आदमी लाखों कमा रहा है और उसके पास इसे ठीक करने का कोई समय नहीं है। डीन फोर्ड 7 साल का है। स्कॉटलैंड में रहने वाले डीन को वीडियो गेम खेलना पसंद है। उन्होंने इस क्षेत्र में अपना करियर बनाया है।

वह लोगों को ऑनलाइन ‘फोरनाइट’ वीडियो गेम खेलना सिखाता है। इसके लिए उन्हें हर महीने 1.5 लाख रुपये मिलते हैं। वह किसी कंपनी में नहीं है।

इसलिए वह यह काम स्वतंत्र रूप से करता है। खबरों के मुताबिक गेमिंग की दुनिया में लोग डीन फोर्ड को लॉस्टबिन के नाम से जानते हैं। जैसे, वह उपयोगकर्ताओं को सभी प्रकार के वीडियो गेम सिखाता है।

लेकिन उनके राजस्व का बड़ा हिस्सा फोर्टनाइट से आता है। डीन कहते हैं, ‘मेरा मतलब है, यह एक सपने का काम है।

मैं अपनी गणना करता हूं। मैं दूसरे के लिए काम नहीं कर रहा हूं। डीन का कहना है कि वह हर दिन 5 घंटे वीडियो गेम खेलता है।

जो उपयोगकर्ता उससे गेम खेलना सीखते हैं, वे 3 से 5 वर्ष की आयु के लोग हैं। डीन का यह भी कहना है कि आज फोर्टनाइट गेम का क्रेज है। कल इस गेम का क्रेज खत्म हो गया है, एक और गेम आएगा। मैं उसके लिए भी तैयार हूं। मैं लोगों को नए वीडियो गेम सिखाने जा रहा हूं।

चिड़ियाघर में शेर के बाड़े में कूदा युवक

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 दिल्ली के चिड़ियाघर में गुरुवार को एक व्यक्ति शेर के बाड़े में कूद गया, जिससे एक बार फिर जानवरों और इंसानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है। सूचना मिलने पर चिड़ियाघर के अधिकारियों ने उसे बाड़े से बाहर निकाल कर पुलिस के हवाले कर दिया।

दक्षिण-पूर्व दिल्ली के उपायुक्त चिन्मय विश्वाल के अनुसार पुलिस को आज अपराह्न 2:10 बजे चिड़ियाघर से कॉल मिली कि एक शख्स शेर के बाड़े में घुस गया है। पुलिस शीघ्रता से वहां पहुंची और व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। उन्होंने बताया कि रेहान पूरी तरह सुरक्षित है।

विश्वाल के अनुसार लड़के का नाम रेहान है। फिलहाल वह दिल्ली के सीलमपुर में रहता है लेकिन वह मूलतः बिहार का रहने वाला है। शुरुआती जांच में पता चला है कि रेहान मानसिक रूप से विक्षिप्त है। निजामुद्दीन थाना पुलिस उससे आगे की पूछताछ कर रही है।

2014 में भी शेर के बाड़े में घुसा था युवक

इससे पहले सितम्बर, 2014 में दिल्ली के इसी चिड़ियाघर में बाघ के हमले से एक युवक की मौत हो गई। युवक का नाम मकसूद था। यह बाघ के बाड़े में गिर गया था, जहां उस पर बाघ ने हमला कर दिया। युवक को संभलने का मौका नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई थी।

आज की इस घटना के बाद एक बार फिर चिड़ियाघर में जानवरों और इंसानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

भारत में 64 फीसदी महिलाओं के पास है पैन कार्ड, आय है कम फिर रहती हैं पुरुषों से ज्यादा खुश

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देश में कार्यस्थलों पर हर 10वीं महिला को किसी न किसी तरह से यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है और ऐसी शिकायतें करने वाली ज्यादातर महिलाओं के कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति भी नहीं थी. राष्ट्रीय महिला आयोग और ‘दृष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र’ की ओर से जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है. गत दो वर्षों के दौरान हुए अध्ययन में देश के 64 फीसदी जिलों में 74,095 महिलाओं से बात की गयी.

इस अध्ययन के तहत सरकारी पहचान पत्र एवं बैंकिंग सुविधा, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार, नीति निर्धारण व्यवस्था और कई अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति के बारे में तथ्य एकत्र किए गए. इस अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है, ”हर 10वीं महिला को अपने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और ज्यादातर महिलाओं के कार्य स्थलों पर इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई आंतरिक शिकायत समिति भी नहीं थी.’ अध्ययन में भी यह पाया गया कि निजी क्षेत्र और असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं को वेतन को लेकर भी भेदभाव का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया कि सिर्फ 69 फीसदी कार्यस्थलों पर शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाएं पायी गयीं और सिर्फ 51 फीसदी महिलाओं ने जानकारी दी कि उन्हें नियमित तौर पर छुट्टियां मिलती हैं.

इस अध्ययन के मुताबिक देश 87 फीसदी कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच की सुविधा नहीं है और यह एक बड़ी वजह है कि ज्यादातर महिलाओं को मां बनने के तत्काल बाद नौकरी से हटना पड़ा. इसमें यह भी पाया गया कि देश की 82 फीसदी महिलाओं के पास मतदाता पहचान पत्र, 79 फीसदी के पास बैंक खाते और 64 फीसदी महिलाओं के पास पैन कार्ड है. 2011 की जनगणना के बाद महिलाओं की साक्षरता में 15 फीसदी बढ़ोतरी भी हुई. इस अध्ययन के अनुसार महिलाओं में रक्तचाप के बाद गठिया रोग सबसे आम बीमारी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले आमतौर पर ज्यादा खुश रहती हैं तथा इस खुशी का आय से कोई लेनादेना नहीं है. यही नहीं, अध्ययन के मुताबिक आदिवासी इलाकों में लड़कियों के बाल विवाह का चलन अब भी चल रहा है.

बेहद कम उम्र में ही अपनी जिम्मेदारियां खुद उठाने लगी यह अभिनेत्रियां, एक की उम्र है 15 साल

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बचपन से लेकर 20 से 25 साल तक ऐसी उम्र होती है, जिसमे न तो हमारे ऊपर किसी चीज की जिम्मेदारियां होती है, और न ही किसी की टेंशन होती है। हमारी जितनी भी जरूरत होती हैं, हमारे मां-बाप पूरी करते हैं। लेकिन आइए आज हम कुछ सितारों के बारे में आपको बताते हैं जो अपनी जरूरतें खुद अपने कमाए हुए पैसों से करते हैं

1:- अशनूर कौर

3 मई 2004 को जन्मी यह लड़की अभी सिर्फ 15 साल की हुई है। लेकिन अपनी सारी जिम्मेदारियां खुद उठाती है यहां तक कि अपने घर वालों का भी ख्याल रखती है। बता दें कि दरअसल अशनूर कौर एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री हैं। यह कुछ समय पहले धारावाहिक ‘पटियाला बेब्स’ में नजर आई थीं। बताया जाता है कि यह 1 एपिसोड के लिए 40 हजार रुपए फीस लेती हैं।

2:- अवनीत कौर

यह अब टेलीविजन की बेहद मशहूर अभिनेत्री मानी जाती है। इनका जन्म 13 अक्टूबर 2001 में हुआ था। और अभी इनकी उम्र सिर्फ 17 साल है। अवनीत कौर ने अपने करियर की शुरुआत डांस के रूप में की थी लेकिन अब यह टीवी सीरियल में काम कर रही हैं। यह टेलीविजन ‘डांस इंडियन डांस लिटिल मास्टर’ अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। और अब तक यह कई टीवी सीरियल में काम कर चुकी हैं। और इस समय यह टीवी सीरियल ‘अलादीन नाम तो सुना होगा’ में काम कर रही हैं। यह 1 एपिसोड के लिए 30 हजार रुपए लेती हैं।

3:- जन्नत जुबैर रहमानी

सोशल मीडिया से लेकर टीवी और फिल्मों तक अपने जलवे बिखरने वाली यह लड़की अभी सिर्फ 17 साल की उम्र की है। यह इतनी छोटी उम्र में ही अपनी सारी जिम्मेदारियां खुद उठाती हैं दरअसल इन्हें 1 एपिसोड के लिए 40 हजार रुपए प्राप्त होते हैं।

4:- अनुष्का सेन

17 साल कि यह लड़की अब टेलीविजन की बेहद मशहूर अभिनेत्री मानी जाती है। इन्हें सबसे ज्यादा सफलता सब टीवी के सीरियल ‘बालवीर’ से मिली, जिसे लोग आज भी बेहद पसंद करते हैं। यह अब बॉलीवुड में भी काफी ज्यादा मशहूर हो चुकी हैं। और इनकी बॉलीवुड में अच्छी खासी पहचान भी है। बताया जाता है कि यह एक एपिसोड के लिए अनुष्का सेन को 45 हजार रुपए की फीस मिलती है।

छत्तीसगढ़ : दुष्कर्म पीड़िता ने कोर्ट में आरोपित को पहचाने से किया इंकार, कहा-पुलिस ने जबरदस्ती कराई थी दूसरे की शिनाख्त

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 राजधानी पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर से विवादों में आ गया है। दरअसल विधानसभा थानाक्षेत्र में मई महीने में एक नाबालिग से दुष्कर्म की घटना हुई थी। पिछले दिनों इस केस की कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस की केस डायरी में दर्ज दुष्कर्म के आरोपित को पीड़िता ने पहचानने से साफ इंकार कर दिया। उसने कोर्ट में यह बयान देकर पुलिस की पूरी जांच पर सवालिया निशान लगा दिया कि दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति को वह अच्छी तरीके से पहचानती है। उसकी कद-काठी तक सामने कठघरे में खड़े उस व्यक्ति से नहीं मिलती है। पुलिस ने मुझे कहा था कि हमने तुम्हें ले जाने वाली महिला दलाल से इसकी पहचान कराई है। यह वहीं आरोपित है, तुम पहचान करो तो मैंने कर दिया, जबकि यह वो नहीं था।

जानकारी के मुताबिक विधानसभा पुलिस थाने में मई 2019 में अपराध क्रमांक 212/19 में दर्ज दुष्कर्म के केस में पुलिस ने यह दावा किया था कि 14 वर्षीय किशोरी को बंधक बनाकर उससे देह व्यापार कराया गया था। इस प्रकरण में धारा 366, 376(3), 370, 370(क), 34 के साथ 6 पॉस्को एक्ट और अजाजजा अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (2) (फ) (क) जैसी धाराएं लगाई गई थीं। केस में एक महिला दलाल और दुष्कर्म करने वाले को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन 3 अक्टूबर को जब अजाजजा अत्याचार निवारण के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता की कोर्ट में पीड़िता की गवाही हुई तो उसने पुलिस की केस डायरी में बनाए गए आरोपित को यह कहते हुए पहचानने से इंकार कर दिया कि जिसने मेरे साथ गलत काम किया था, उसकी कद काठी तक इससे नहीं मिलती। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुझे पुलिस ने कहा था कि तुम्हें ले जाने वाली महिला से आरोपित की पहचान कराई है, यही है तुम पहचान करो तो मैंने कर दिया था, जबकि यह वो नहीं था।

महिला दलाल ने लिए थे पैसे

इस बहुचर्चित केस में पुलिस की डायरी दर्ज कहानी यह बता रही है कि किशोरी को उसके परिजन हॉस्टल भेजना चाहते थे और वह वहां नहीं जाना चाहती थी तो उसने अपनी पूर्व परिचित महिला से संपर्क किया। तब किशोरी को रात को अपने साथ महिला ले गई और एक परिचित के मकान में उसे छोड़ दिया था। वहां पर दो दिनों तक आरोपित ने आकर किशोरी से जबरन दुष्कर्म किया। आरोपित ने इसके बदले में महिला दलाल को पैसे दिए थे। बहरहाल पीड़िता के कोर्ट में दिए बयान के बाद विधानसभा पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।

इस केस में महिला दलाल और दुष्कर्म के आरोपित की जमानत हाईकोर्ट से दो बार खारिज हो चुकी है। दोनों अभी जेल में है। एसडीएम के सामने पीड़ित किशोरी का 164 का बयान दर्ज कराया गया था, उस समय उसने आरोपित की पहचान की थी। केस की सुनवाई कोर्ट में चल रहीं है। फिलहाल पीड़िता ने कोर्ट में क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी नहीं है।

-अश्विन राठौर, थाना प्रभारी विधानसभा

दो Made in India रोबोट्स इस रेस्टोरेंट में करते हैं नौकरी, वीडियो हो रहा वायरल

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केंद्र सरकार देश में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ डिजिटल क्रांति को भी बढ़ा रही है। इसी से प्रेरित होकर ओडिशा में एक शख्स ने अपने रेस्टोरेंट में इंसानों के साथ ही देसी रेबोट्स को भी नौकरी पर रखा है। पूर्वी भारत में ऐसा पहली बार होगा कि जब कोई स्वदेशी रोबोट किसी रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहकों को सर्व कर रहे हों। यह हो रहा है ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में। यहां एक रेस्टोरेंट रोबो शेफ जो कि भुवनेश्वर के चंद्रशेखरपुर में बना हुआ है, वहां दो मेड इन इंडिया रोबोट्स ग्राहकों को खाना सर्व करते नजर आाते हैं। यह रेस्टोरेंट बुधवार को ही खुला है और इसके ठीक बाद से बी इसका वीडियो वायरल हो रहा है। खबरों के अनुसार इन इंसानी रोबोट्स में एक मेल है और दूसरा फीमेल है और इनके नाम चंपा-चमेली रखा गया है। बुधवार शाम चंपा-चमेली को रेस्टोरेंट में सर्व करने के लिए फ्लोर पर उतारा गया। यह रोबोट्स सर्विस के दौरान रेस्टोरेंट में ग्राहकों से पूछते भी है कि ‘अपना माने खुशी तो’ मतलब आप खुश तो हैं? यह वही स्लोगन है जो चुनावों के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जारी किया था। रेस्टोरेंट में काम करने वाले चंपा और चमेली रोबोट्स ग्राहकों से ऑर्डर भी लेते हैं।

रोबो शेफ रेस्टोरेंट के मालिक बासा एक सिविल इंजीनियर हैं और अपने इस ने वेंचर के बारे में बताते हैं कि इसकी प्रेरणा अमेरिका में मिली थी। यह दोनों ही रोबोट्स पूरी तरह से भारत में बने हैं और इस रेस्टोरेंट को दूसरों से अलग बनाते हैं। वैसे तो देश में और भी रेस्टोरेंट्स हैं जहां रोबोट्स काम करते हैं लेकिन हमारे यहां रोबोट्स के लिए कोई स्पेशल ट्रैक नहीं बनाया गया है। यह दोनों रोबोट्स राडार की मदद से काम करते हैं। यह जरूरत के हिसाब से काम करते हैं साथ ही ओडिया के अलावा कोई भी भाषा बोल सकते हैं।

छत्तीसगढ़ : गांधी विचार पद यात्रा समापन, मंत्री मो. अकबर रहे मौजूद

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राजनांदगांव। जिले में गांधी विचार पदयात्रा का गुुरुवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री मो. अकबर उपस्थित थे। उनके साथ महापौर मधुसूदन यादव, खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह, निगम में नेता प्रतिपक्ष हफ़ीज़ खान, जिलाधीश जेपी मौर्य, पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप सहित जिले के अनेक वरिष्ठ अधिकारी तथा कांग्रेस के नेतागण उपस्थित थे। सभी वक्ताओं ने अपने उदबोधन में तत्कालीन परिस्थितियों में गांधीजी द्वारा अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए देश को स्वतंत्र कराने के लिए किए गए प्रयासों को प्रासंगिक बताया। खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह ने भूपेश बघेल सरकार द्वारा शुरू की गई योजना नरवा, घुरवा,गरवा, बारी को गांधीजी के सपनों से जोड़कर सरकार की तारीफ की। अंत मे आभार प्रदर्शन निगम में नेता प्रतिपक्ष हफ़ीज़ खान ने किया।