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यहां की लड़कियों से शादी करने पर मिलते हैं इतने लाख रूपये…

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आइसलैंड सरकार यहां की लड़कियों से शादी करने पर दूसरे देश के लड़कों को हर महीने 3 लाख 33 हजार रुपए (5 हजार डॉलर) देगी। इसकी वजह देश में मर्दों की कम जनसंख्या को बताया जा रहा है। बता दें कि इन दिनों यह न्यूज इंटरनेट पर काफी वायरल हो रही है।

इस ऑफर के तहत लड़के को अपनी मनपंसद लड़की को चुनकर शादी करनी होगी और उसी देश में बसना होगा।

कुछ न्यूज वेबसाइट्स की मानें तो इस ऑफर में नॉर्थ अफ्रीका के लोगों को ज्यादा प्रेफरेंस दिया जाएगा। लेकिन वायरल हो रही इस खबर की सच्चाई कुछ और ही है।

फेक खबर और फोटोज की जांच करने वाली साइट snopes.com ने इसे फेक करार दिया है। इस वेबसाइट के मुताबिक, आइसलैंड में 1007 पुरुषों पर महिलाओं की जनसंख्या 1000 है। वहीं, वायरल हो रही खबर में बताया जा रहा है कि लड़कियों की संख्या ज्यादा है, जो कि गलत है।

दरअसल, इसके बारे में किसी शख्स ने ‘द स्पिरिट व्हिसपर्स’ (The Spirit Whispers) नाम के एक ब्लॉग पर लिखा था, जिसके बाद कई वेबसाइट्स ने इसे खबर बनाकर छाप दिया।

इतना ही नहीं, खबर के बाद आइसलैंड की कई लड़कियों ने दूसरे देश के अनजान लोगों को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेजना शुरू कर दिया था। ऐसे में लोगों को लगने लगा कि वहां की सरकार ने वाकई में ऐसी घोषणा की है।

हालांकि, बाद में वहां की सरकार ने इस बात से इनकार कर दिया। साथ ही दूसरे देश के लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने वाली लड़कियों पर कार्रवाई भी की। बता दें कि दुनिया में आइसलैंड की गिनती बेस्ट टूरिस्ट प्लेसेज में होती है। इस ठंड देश में ब्लू लगून, गुलफोस, गोल्डन सर्कल जैसी जगहें टूरिस्टों को काफी आकर्षित करती है। यहां की लड़कियां भी काफी खूबसूरत होती हैं।

आप हर दिन नकली खाद्य पदार्थ खरीदते हैं उन्हें आप इन तरीको से पहचान सकते हैं…जानिए

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नकली खाद्य पदार्थ आजकल मार्केट में काफी ज्यादा बढ़ चुके हैं, सरकार अनेक नियम ला चुकी है पर नकली खाद्य पदार्थ बनाने वाले कोई ना कोई तरीका अपना ही लेते हैं उन सब से बचने का इसलिए आज हम आपको नकली खाद्य पदार्थों को पहचानने के कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जो आज आपको नकली खाद्य पदार्थ और असली खाद्य पदार्थ के बीच का अंतर बता देंगे।
1. हरी मटर
हरी मटर का सेवन आज के समय में हर कोई करता है, हरी चीजें खाना सेहत के लिए फायदेमंद भी होता है पर कभी-कभी हम नकली सामान घर ले आते हैं उसका हमें नुकसान उठाना पड़ता है।
हरी मटर को पहचानने का यह तरीका है कि अगर आपकी मटर कुछ ज्यादा ही हरी दिख रही है तो इसका मतलब वह नकली है। नकली मटर को आप बीच से फोड़ कर देखेंगे तो उसके बीच में आपको अंकुर नजर नहीं आएंगे जबकि असली अंकुर को नजर आते हैं।
2. अंडे
नकली अंडे को पहचानने का यह तरीका है कि नकली अंडे के अंदर बहुत खुरदरी गोले होते हैं आप नकली अंडे को उसकी जर्दी से भी पहचान सकते हैं यदि उस की जर्दी बहुत ज्यादा पीली है तो वह अंडा नकली है।
3. सेब
सेब अगर बहुत चमकदार,हरे,लाला और बहुत गोल लिखते हैं तो इसकी सबसे अधिक संभावना है कि वह से नकली हैं।
4. दालचीनी
असली दालचीनी को तोड़ना बहुत ही आसान होता है और यह बहुत हल्की भी होती हैं जबकि नकली दालचीनी ऐसी बिल्कुल भी नहीं होती।
5. ब्लूबेरी
यदि आप देखते हैं कि किसी उत्पाद में इंडिगो कारमाइन 132 है तो इसका मतलब ब्लूबेरी असली नहीं है।

16 से 30 अक्टूबर तक घोड़े से भी तेज दौड़ेगा इन 5 राशियों का भाग्य, किस्मत लेगी नया मोड़…

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राशियाँ राशिचक्र के उन बारह बराबर भागों को कहा जाता है जिन पर ज्योतिषी आधारित है। हर राशि सूरज के क्रांतिवृत्त (ऍक्लिप्टिक) पर आने वाले एक तारामंडल से सम्बन्ध रखती है और उन दोनों का एक ही नाम होता है – जैसे की मिथुन राशि और मिथुन तारामंडल। यह बारह राशियां हैं –
इन राशि वाले लोगों को शिव जी के आशीर्वाद से व्यापार से संबंधित कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना बन रही है, कार्यस्थल में वरिष्ठ अधिकारी और सहयोगी आपका पूर्ण सहयोग देने वाले हैं, आपकी कोई अधूरी इच्छा पूरी हो सकती है, आप अपने जीवन साथी के साथ किसी यादगार यात्रा पर जा सकते हैं, घर परिवार में खुशियां बनी रहेंगी, प्रेम संबंधों में सुधार आएगा, बच्चों की तरफ से खुशखबरी मिल सकती है। राजकीय कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बन रही है, पारिवारिक माहौल बेहतर रहेगा, घर परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल में सुधार आने के योग बन रहे हैं, आप अपने शत्रुओं पर विजय हासिल करेंगे, विद्यार्थी वर्ग के लोगों का मन पढ़ाई में लगेगा, व्यापार में आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
इस प्रकार मेष, कर्क, कुंभ, वृश्चिक और मकर राशि के लोग रहेंगे अधिक भाग्यशाली।

बीसीसीआई के नए अध्यक्ष सौरव गांगुली जानिए कितने करोड़ रुपए की सम्पत्ति के मालिक है…

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सौरव गांगुली दादा नाम से ( बंगाली में “बड़े भाई”) के रूप में जाने जाते हैं), जो पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी और भारतीय राष्ट्रीय टीम के कप्तान हैं। वर्तमान में, वो क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त है साथ ही विजडन इंडिया के साथ संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष भी है। अपने खेल करियर के दौरान, गांगुली ने खुद को दुनिया के अग्रणी बल्लेबाजों में से एक के रूप में दिखाया था और राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सबसे महान कप्तानों में से एक बने थे। यह बाएं हाथ से मध्य क्रम में बल्लेबाजी किया करते थे और एक अच्छे ओपनर बल्लेबाज भी रहे है।
भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली जा रही टेस्ट सीरीज में 2-0 से बढ़त हासिल कर चुकी है वही दूसरी ओर भारतीय के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को निर्विरोध बीसीसीआई का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है. विश्व के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद सौरव गांगुली को देश भर से बधाई मिल रही है इसलिए आज हम आपको सौरव गांगुली से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताने है.

आपको बता दें सौरव गांगुली का जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में हुआ था वही सौरव गांगुली ने साल 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टीम में अपना डेब्यू किया था. वही लगभग 16 साल तक भारतीय टीम की ओर से खेलने वाले सौरव गांगुली को भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक माना जाता है सौरव गांगुली ने अपने करियर में 113 टेस्ट व 311 वनडे मैच खेले हैं जिसमे उन्होंने कुल 38 अंतराष्ट्रीय शतक भी लगाए है.
आपको बता दें प्रिंस ऑफ कोलकाता के नाम से मशहूर सौरव गांगुली इंडियन सुपर लीग की एक फुटबॉल टीम के भी सह मालिक भी है साथ ही सौरव गांगुली ऑडी, बीएमडब्ल्यू जैसी लग्ज़री कारो के भी मालिक है.

वही भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की कुल सम्पत्ति की बात करे तो बीसीसीआई के नए अध्यक्ष सौरव गांगुली हिंदी वेबसाइट पत्रिका के अनुसार 354 करोड़ रुपए की सम्पत्ति के मालिक है.

जानिए पुरुषों के लिए किशमिश का सेवन क्यों जरूरी है, जरूर पढ़ें

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किशमिश सूखे अंगूरों को कहा जाता है। पारम्परिक रूप से बड़े अकार के अंगूरों की किशमिश को हिन्दी में मुनक़्क़ा कहा जाता है।
आपने कभी न कभी किशमिश का सेवन जरूर किया होगा क्योंकि यह बहुत ही पौष्टिक और फायदेमंद मानी जाती है। किशमिश प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर में समृद्ध हैं और आज हम आपको बताएंगे कि पुरुषों को किशमिश का सेवन क्यों करना चाहिए और किशमिश के कारण शरीर में आने वाले 5 बदलाव क्या हैं।
किशमिश का सेवन कैसे करें:
रात को सोने से पहले एक मुट्ठी किशमिश को साफ पानी में भिगो दें और जब आप सुबह उठें तो अपने हाथ धोएं और भीगी हुई किशमिश खाएं और कम से कम 1 घंटे तक किसी और चीज का सेवन न करें।

 ये 5 बदलाव शरीर में होते हैं:
1. किशमिश का सेवन आपकी आंखों को स्वस्थ रखता है और आपकी आंखों की रोशनी बढ़ती है क्योंकि इसमें विटामिन पाए जाते हैं।
2. किशमिश में साइबर की उपस्थिति के कारण, यह आपके पाचन तंत्र को हमेशा स्वस्थ रखता है और आप जो भी खाते हैं वह आपके शरीर को एक हिस्सा महसूस कराता है।
3. किशमिश में प्रोटीन भी पाया जाता है जो आपके शरीर में मांस को बढ़ाता है।
4. किशमिश में विटामिन सी भी पाया जाता है जो आपकी त्वचा और आपके बालों को स्वस्थ रखता है।
5. किशमिश का सेवन आपके दांतों की बीमारी को ठीक करता है, जैसे कि पायरिया की गंध, आदि।

अकाल तख़्त ने की आरएसएस पर बैन की मांग….

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सिख धर्म से जुड़ी सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर देश को बांटने वाली गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया है.

उन्होंने आरएसएस पर तुरंत पाबंदी लगाने की मांग की है.

उन्होंने कहा, “सभी धर्म और संप्रदाय के लोग भारत में रहते हैं और यही इस देश की खूबसूरती है. संघ का कहना है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, लेकिन ये देश के हित में नहीं है.”

इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सिख नेता आरपी सिंह ने आरएसएस का बचाव किया है.

उन्होंने बयान पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर करते हुए कहा है, “हिंदू कोई धर्म पंथ का नाम नहीं है, ये एक संस्कृति है. मैं अकाल तख़्त के जत्थेदार से निवेदन करूंगा कि आरएसएस का तीन सदस्य मंडल अल्पसंख्यक आयोग से मिला था और उन्होंने माना था कि सिख अलग धर्म है और इसका अलग अस्तित्व है.”

“इस बात को आरएसएस मान चुका है, और इस पर अब विवाद नहीं होना चाहिए.”

असल में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि संघ अपने इस नज़रिए पर अडिग है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है.

विजयदशमी के दिन नागपुर में अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि “राष्ट्र के वैभव और शांति के लिए काम कर रहे सभी भारतीय हिंदू हैं.”

शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने भी कहा कि यह बयान बेहद आपत्तिजनक है.

उन्होंने कहा, “संविधान ने सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता दी है. ऐसा लगता है कि भागवत संविधान को न देखते हुए हिंदू राष्ट्र का अपना एजेंडा सभी पर थोपना चाहते हैं.

भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी हुआ पीछे- पाँच बड़ी ख़बरें…

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 117 देशों की सूची में भारत 102वें नंबर पर आ गया है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में नीचे होने का मतलब है कि भारत में लोग भर पेट खाना नहीं खा पा रहे हैं, बाल मृत्यु दर ज़्यादा है, बच्चों का लंबाई के अनुसार वजन नहीं है और बच्चे कुपोषित हैं.

भारत एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है और दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत दक्षिण एशिया में भी सबसे नीचे है.

इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के लोग भारतीयों से पोषण के मामले में आगे हैं. भारत इस मामले में ब्रिक्स देशों में भी सबसे नीचे है. पाकिस्तान 94वें नंबर पर है, बांग्लादेश 88वें, नेपाल 73वें और श्रीलंका 66वें नंबर पर है.

भारत 2010 में 95वें नंबर पर था और 2019 में 102वें पर आ गया. 113 देशों में साल 2000 में जीएचआई रैंकिंग में भारत का रैंक 83वां था और 117 देशों में भारत 2019 में 102वें पर आ गया.

बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत जीएचआई रैंक में अव्वल हैं. यहां तक कि रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों के जीएचआई रैंकों में सुधार हुए हैं. जीएचआई इंडेक्स की रैंकिंग आयरलैंड की ऐड एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन ऑर्गेनाइज़ेशन वेल्ट हंगर तैयार करते हैं.

इमरान ख़ान को ट्रंप पसंद हैं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड इसलिए पसंद हैं क्योंकि वो युद्ध नहीं चाहते हैं.

ईरान और सऊदी अरब में बातचीत शुरू करवाने में लगे इमरान ख़ान से अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन ने पूछा कि इसमें क्या कोई प्रगति हो पाई है तो पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि अभी वो इसका डिटेल नहीं बताना चाहते हैं.

पीएम ख़ान ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आ जाती है तब तक वो कोई जानकारी साझा नहीं करेंगे. ट्रंप पर पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा, ”लोग राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना करते हैं लेकिन मैं उन्हें पसंद करता हूं क्योंकि वो युद्ध में भरोसा नहीं करते हैं.”

पाकिस्तान को पानी नहीं मिलेगा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के दादरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार भारत से पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक हरियाणा के किसानों के देगी.

पीएम मोदी ने कहा, ”जो पानी हरियाणा को मिलना चाहिए था वो पाकिस्तान को जा रहा है. ऐसा 70 सालों से हो रहा है. लेकिन मोदी अब ऐसा नहीं होने देगा. अब यह पानी आपके घरों में आएगा. मैंने इस पर काम करना पहले ही शुरू कर दिया है. यह पानी भारत और हरियाणा के लोगों का है. मोदी आपके लिए लड़ रहा है.”

ईडी से प्रफुल् पटेल को नोटिस

पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को प्रवर्तवन निदेशालय ने शुक्रवार को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया है. प्रफुल पटेल पर एक कंपनी और इक़बाल मेमन मिर्ची के परिवार वालों बीच वित्तीय डील कराने का आरोप है. आरोप है कि इस कंपनी के प्रमोटर प्रफुल्ल पटेल के परिवार वाले हैं.

मिर्ची का संबंध अंडरवर्ल्ड दाऊद इब्राहिम के साथ रहा है. हालांकि प्रफुल्ल पटेल ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

तुर्की ने अमरीका की अपील ठुकराई

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने उत्तरी सीरिया में युद्ध विराम के लिए अमरीका की अपील को ख़ारिज कर दिया है.

तुर्की का कहना है कि अमरीका से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद कुर्द बलों के ख़िलाफ़ वो अपना सैन्य हमला जारी रखेगा.

उनकी ये टिप्पणी उस समय आई है जब अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो तुर्की का दौरा करने वाले हैं.

उधर फ्रांस के प्रधानमंत्री ने संसद में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उत्तर सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले और तुर्की की सीरिया पर कार्रवाई के बाद इस्लामिक स्टेट की तरफ़ से नए ख़तरों के पैदा होने की आशंका जताई है.

25 हजार होमगार्डों की नौकरी योगी सरकार ने खत्म की और बिहार में घर में घुसकर 3 लोगों पर बरसाई हथौड़ी…

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक ही झटके में 25 हज़ार होम गार्डों के ड्यूटी समाप्त कर दी है। ये सभी होम गार्ड पुलिस महकमें के बजट पर भर्ती किए गए थे और अलग-अलग विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। जानकारी के मुताबिक यूपी में कानून व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस विभाग में खाली पदों को भरने के लिए 25000 होमगार्ड भर्ती किए गए थे । मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 28 अगस्त को हुई बैठक में इस ड्यूटी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। इन नौकरियों को खत्म करने का एक कारण होम गार्डों का बढ़ा हुआ वेतन भी बताया जा रहा है।

बिहार के बेगूसराए में घर में घुसकर एक ही परिवार के तीन लोगों की हथौड़ी और दूसरे हथियार सर में कूचकर हत्या का मामला सामने आया है। घटना चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के खांजहांपुर गांव के बभनटोली की है, जहां अज्ञात हमलावरों ने सोमवार देर रात घर में घुसकर मां, बेटे और बहू पर हथौड़ी से हमला कर दिया और सिर को हथियार से कूच डाला, जिससे मां-बेटे की मौके पर ही मौत हो गई और बहू की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। एक कार नैनबाग इलाके में हादसे का शिकार हो गई। इस कार में 7 लोग सवार थे। घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है। एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई है। बचाव कार्य चल रह है।

गोहत्या बंद करने के लिए गांधी की विरासत में मानव हत्या की आवश्यकता नहीं…

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बौद्धिक समुदाय में यह विमर्श का विषय रहा है कि सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना की व्याख्या के संदर्भ में महात्मा गांधी और बी आर आंबेडकर अनिवार्य रूप से अलग-अलग ध्रुवों पर खड़े थे। इस तरह के सफेद और स्याह अर्थों में उनके विचारों तथा मूल्यों को समझना ऐतिहासिक रूप से गलत और धारणात्मक रूप से पूर्वाग्रही होगा। यह गांधी की दो भिन्न मुद्राओं, जो हमारी कल्पना में पहले से ही स्थित हैं, की अलग-अलग अर्थों जैसी व्याख्या करने जैसा है- जिसमें, पहले वाले में वह भगवान बुद्ध की तरह बैठे हुए हैं और ध्यान मग्न हैं और दूसरे में वह एक लाठी लेकर चलने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं, जैसा कि नंदलाल बोस ने उन्हें चित्रित किया है।

गांधीजी के विचारों में समाई हुई यह गहरी असंगति उनकी पब्लिक इमेज के मुकाबले पहली दृष्टि में स्वयं आधुनिकता के विचार में निहित एक ऐतिहासिक विरोधाभास है। आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की नींव के रूप में, ‘पश्चिमी ज्ञानोदय’ की परंपरा ने सोचा कि दार्शनिक रूप से मानव विवेक और बुद्धि आजादी और अहिंसा जैसी धारणाओं की उन्नति के लिए प्रबल रहेगी, अगर इन्हें नियमों, कानूनों, मानदंडों और हमारे समय के सामाजिक व्यवहार के ढांचे में सम्मिलित कर दिया जाए।

हिंसा और श्रेणी क्रम- यानी स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आधुनिकता के सिद्धांतों से डिगने- को एक नागरिक समाज, जिसका आधार सार्वभौमिक समानता, तार्किकता, आर्थिक तरक्की, वैज्ञानिक उन्नति और शांति है, एक बाइनरी में देखता है। फिर भी, व्यवहार में आधुनिकता ने मानव सभ्यता के खिलाफ जुल्म और श्रेणी क्रम को चिरायु रखने के लिए हिंसा की सबसे निर्मम तकनीकों को बनाने का मार्ग आसान किया है।

गांधीजी का जीवन और दर्शन हमें यह समझने का न्यौता देते हैं कि हम परिवर्तन को किस तरह संदर्भित करते हैं और कैसे हम भविष्य को पुनर्निर्मित करते हैं, एक ऐसे समय के रूप में जो कि उम्मीद और आशावाद से भरा हो। उनका पूरा जीवन न केवल उपनिवेशवाद के खिलाफ बल्कि आजादी की लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक विरोधाभाषों के विरुद्ध संघर्ष का पर्यायवाची बन जाता है। हमारे सामने एक ऐसा आदमी आता है जो अपने समय के विपरीत अहिंसा का देवदूत बन जाता है, जिसने नैतिक मूल्यों पर जोर दिया और व्रत से लेकर ध्यान तक जो भी उसके सामने था उसे एक प्रतिरोध के साधन के रूप में उपयोग किया और फिर भी आधुनिकता के अधिकांश प्रतिनिधि उस इंसान के साथ सामंजस्य नहीं बैठा सके।

महात्मा और उनकी अहिंसा दोनों ही आधुनिक सार्वजनिक क्षेत्र में नया हस्तक्षेप थे। जहां हिंसा और प्रतिहिंसा रोजमर्रा की जिंदगी का सच बन गई हो, उस श्रेणी क्रम समाज में वह एक व्यवधान थे। उनकी अहिंसा, आधुनिकीकरण के विरूद्ध उनकी लड़ाई, ग्रामीण व्यवस्था की तरफ वापस मुड़ना या फिर उनका एक ऐसा व्यक्ति होना जो कि हृदय में किसी के लिए कोई घृणा लेकर नहीं चलता, लगता है यही सब गांधीजी को एक विरोधाभासों का व्यक्ति बनाता है।

हालांकि हमारे पास वह ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपने समाज के सुधार के लिए लेनिन या माओ से भी ज्यादा किया था, फिर भी उन्हें गलत समझा गया, क्योंकि लगातार ऐसी कोशिशें हुईं कि भ्रम पैदा किए जाएं, उसमें से छवियां पैदा हों उनसे एक व्यक्ति बनाया जाए। उनको असंगति के स्तर तक गिरा दिया गया। राजनीति में एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसने सदा गांधी को नकारा है, लेकिन साथ ही जरूरत पड़ने पर उनके प्रतीक का इस्तेमाल भी किया है।

आज हमें यह स्वयं को याद दिलाने की आवश्यकता है कि गांधी के प्रमुख प्रतीक जैसे कि उनकी विचारधारा मात्र खादी, चरखा, स्वच्छता, बकरी का दूध या कुष्ठ रोगियों के लिए ही नहीं है- जैसा कि आजकल हम इन्हें उनकी व्यक्तिगत विशिष्टता के रूप में देख रहे हैं। गांधीजी को केवल ऊपर लिखे गए लक्ष्यों के जीवन निर्वाह या जीवनशैली तक सीमित करना उनकी विरासत को खतरे में डालने जैसा होगा, क्योंकि गांधीजी एक सकारात्मक स्वतंत्रता सिद्धांतकार के घिसे-पिटे चित्रण को ललकारते हुए हमेशा अपने विचारों को बेहतर बनाते रहे और नागरिक स्वतंत्रताओं के मामले में लगातार सक्रिय रहे।

गांधीजी के लिए नागरिक अधिकार आधुनिक समाज और राज्य की एक मिलीजुली जिम्मेदारी थी। गांधीजी हमारे समय में भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि उनकी राजनीति में सार्वजनिक स्थान पर अलग-अलग पहचानों का एक साथ काम करना विशिष्ट रूप से एक गैर-पश्चिमी लोकतंत्र और धार्मिक विविधता के उभार का मार्ग प्रशस्त करती है। गांधीजी मानते थे कि सभी लोगों को किसी भी धर्म के पालन का अधिकार है और उस उपासना पर राज्य का कोई हुक्म नहीं होना चाहिए। हालांकि वह स्वयं एक हिंदू धर्मनिष्ठ थे, तथापि उन्होंने अन्य धर्मों में आस्था रखने वालों के साथ संवेदनशीलता के साथ सदैव बातचीत की और तर्क दिया कि सत्य के लिए हर धर्म भिन्न मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है।

हिंदू-मुस्लिम एकता को स्थापित करने का उनका संघर्ष और कट्टरपंथी हिंदूवाद में अस्पृश्यता जैसे घृणित व्यवहार का अंत करने की उनकी लड़ाई उनके मुख्य कार्यभार थे। वह इस सत्य को जानते थे कि मात्र ब्रिटिश शासन के अधीन राजनीतिक गुलामी को ही नहीं उखाड़ फेंकना था बल्कि भारत को और भी कई सारे बंधनों से आजाद कराना था, जैसे अस्पृश्यता, गरीबी, सांप्रदायिकता, सफाई-व्यवस्था की कमी, खुदगर्जी और यहां तक कि धार्मिक दोगलेपन से।

आज सम-सामयिक संघर्षों का भूतापेक्ष (रेट्रस्पेक्टिव) अध्ययन गांधी और आंबेडकर को अलग-अलग खड़ा कर देता है, जबकि इतिहास की परख दलितों की पुरानी पीढ़ी के हाथ में है जो कि गांधीवादी संघर्षों के सीधे लाभार्थी थे। वर्तमान परिदृश्य को निश्चित रूप से आंबेडकर को सघर्षों का एक आदरणीय आइकन (प्रतिरूप) मानने की आवश्यकता है। फिर भी आंबेडकर हिंदूवाद के ढांचे के लिए एक ‘बाहरी’ व्यक्ति बने रहे। इतिहास को गांधी- एक ‘भीतरी’ व्यक्ति- की आवश्यकता थी जो स्वयं प्रैक्टिशनर के शब्दकोष में से असमानता का खत्म करें, जैसा कि स्वतंत्रता पर उनके विचारों में मुखर होता है।

उनके विचारों और व्यवहारों के द्वारा आधुनिकता की एक प्रति-विचारधारा (काउंटर आइडियोलॉजी) तैयार हो रही थी जो कि मेट्रोपॉलिटन दुनिया या विश्वविद्यालयों में उभरकर सामने नहीं आई, बल्कि लगातार मिलने और बातचीत के द्वारा मुफस्सिल क्षेत्रों के निरक्षरों के दिमागों में उभरी। हमारे सामने एक नेता था जो पुरजोर तरीके से यह तर्क देने की कोशिश कर रहा था कि आजादी के संघर्ष से सामाजिक स्थिति बदलने की प्रेरणा मिलनी चाहिए और जिसके राजनीतिक सत्याग्रह ने आध्यात्मिक आत्म शुद्धि के संकेत दिए, जिसने बड़ी व्यवहारिकता से आधुनिक पूंजीवादी समाज के लिए रचनात्मक योगदान दिया।

एक ऐसी दुनिया में जो कट्टरपंथी मतभेदों में बंटी पड़ी है जहां राजनीति का उपयोग मात्र सांप्रदायिक लक्ष्यों के लिए किया जा रहा है, वहां गांधीवादी विरासत सदा बनी रहेगी। गांधीजी का भारत की एकता को लेकर एक सार्वलौकिक विजन था। वह अपने पीछे धर्मनिरपेक्ष भारत की एक मजबूत विरासत छोड़ गए हैं जहां गोहत्या बंद करने के लिए मानव हत्या की आवश्यकता नहीं है। रोक और निषेध का सही तरीका प्रबोधन और प्रोत्साहन था और रचनात्मक कार्यों के लिए मानसिकता में खादी द्वारा परिवर्तन की आवश्यकता थी, जो कि मात्र एक वस्त्र नहीं बल्कि जीवन का एक तरीका था। ये गांधीजी के वे सिद्धांत हैं जो उनके जीवनकाल में और आज हमारे समय में भी राजनीति को मानवता के लिए संवेदनशील बनाए हुए हैं।

अयोध्या मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बहुत हो गया, आज सुनवाई पूरी करके ही उठेंगे…

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उच्चतम न्यायालय में बुधवार को राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले की लगतार 40वें दिन सुनवाई शुरू हो गई है। पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने कहा कि शाम पांच बजे मामले की सुनवाई पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘अब बहुत हो गया, इस मामले में सुनवाई आज ही पूरी होगी। हम सुनवाई पूरी करके ही उठेंगे। किसी को और समय नहीं दिया जाएगा।’ इससे पहले मंगलवार को सीजेआई ने कहा था कि सभी पक्ष 16 अक्तूबर तक मामले से संबंधित दलीलें पेश कर दें क्योंकि फिर उन्हें फैसला लिखने में चार सप्ताह का समय लगेगा।

मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने आज अयोध्या मामले में एक पक्ष हिंदू माया सभा के हस्तक्षेप के आवेदन को खारिज करते हुए कहा, ‘यह मामला आज शाम को पांच बजे खत्म हो जाएगा। बहुत हो चुका। हम और समय नहीं देंगे।